GLIBS
19-03-2020
हर्बल साबुन बनाकर महिलाएं हो रही हैं आत्मनिर्भर, 104 महिलाओं को मिला रोजगार

रायपुर। छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित सामग्रियों के विक्रय के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए महिला स्व-सहायता समूहों को खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से पंजीकृत कर इनके उत्पादों जैसे गोबर के गमले, आचार, पापड़, सुगंधित चावल, अगरबत्ती, फाईल, बांस की सामग्री, बड़ी, लाई बड़ी, आयुर्वेदिक दवाईयां, फिनायल, मसाला आदि की खादी मार्का प्रदान किया जा रहा है ताकि इन उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाया जा सके। रायपुर शहर के निकट स्थित सेरीखेड़ी ग्राम में कुल 8 महिला स्व-सहायता समूह से लगभग 104 महिलाओं द्वारा केमिकलरहित विभिन्न प्रकार के हर्बल साबुन तैयार किया जा रहा है। हर्बल साबुन में गुलाब, नीम, लेमन, चारकोल, मुल्तानी, शहद, एलोवेरा, मिक्स फ्रूट और तुलसी का उपयोग किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के  साथ-साथ महिलाओं का सशक्तिकरण करना भी है।

महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके द्वारा निर्मित 14000 नग हर्बल साबुन  छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा लगभग 6 लाख रुपये में क्रय कर विभिन्न प्रदर्शनियों जैसे-राज्योत्सव, किताब मेला, शबरी एम्पोरियम दिल्ली, एम्स रायपुर, युवा महोत्सव, आदिवासी महोत्सव, गिरोधपुरी मेला, सिटी सेंटर भिलाई, कृषि मेला, फल एवं पुष्प प्रदर्शनी एवं प्रदेश के खादी भण्डारों के माध्यम से लगभग  4 लाख रुपये की बिक्री की जा चुकी है एवं विक्रय निरंतर जारी है।  स्व सहायता समूह द्वारा निर्मित हर्बल साबुन छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग भण्डार विजेता काम्प्लेक्स शाॅप नंबर 4, 5 शास्त्री मार्केट रायपुर, छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग भण्डार केयूर भूषण स्मृति परिसर कंकाली पारा रायपुर, छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग भण्डार सत्यम काम्प्लेक्स बिलासपुर एवं छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग भण्डार अग्रसेन चौक चित्रकूट रोड जगदलपुर में उपलब्ध है।

12-11-2019
85 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदेंगे, भाजपा 25 सौ में धान खरीदी के खिलाफ क्यों : रविन्द्र चौबे

रायपुर। मिलिये मंत्री से कार्यक्रम में आज राजीव भवन में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि भाजपा के पास न कोई कहने के लिये मुद्दा है और ना घेरने का मुद्दा है। अगर वो हमसे जवाब चाहेंगे तो इतना तो जरुर बतायेंगे ही कि किसानों को 5 साल 270 रुपए देने की घोषणा किए थे लेकिन उन्होंने धोखा क्यों दिया। विधानसभा में इतना उत्तर तो जरुर दे देना कि 300 रुपए प्रति वर्ष, प्रति क्विंटल बोनस देने का वायदा उन्होंने किया था, किसानों के साथ धोखा क्यों किया? इतना तो उत्तर वो देंगे ना, केन्द्र में उनकी सरकार बनने के पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करेंगे, इसे लागू क्यों नहीं किया गया, इसका उत्तर भी देंगे। मीडिया से चर्चा के दौरान मंत्री चौबे ने कहा कि सभी अनाजों मिनिमम सपोर्ट प्राईज डेढ़ गुना करने का वादा किया था, तो उसको क्यों नहीं किया? देश में मोदी की सरकार बनने के बाद उन्होंने के कहा था फेटेलाईजर साइड इनपुट जो होता है, आधा कर देंगे, कम कर देंगे, मंहगाई कम कर देंगे, इसको आपने नहीं किया। इन सारे प्रश्न में ज्वलंत प्रश्न है जिसका उत्तर उनको पहले देना है तब तो हम प्रश्न करेंगे और हमसे प्रश्न यहीं करेंगे ना 2500 रुपए प्रति क्विंटल आप अपने संसाधनों से दे रहे हो की मोदीजी प्रधानमंत्री के सपोर्ट से दे रहे हो और इसको तो हम सार्वजनिक कह रहे हैं। हमारे मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसानों को पिछले साल भी हम छत्तीसगढ़ की राज्य के बजट से दिये थे और इस साल भी हम छत्तीसगढ़ की राज्य की बजट से देंगे। पिछले साल 80 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की थी, इस बार 85 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदेंगे, ये हमारा वादा है सरकार का वादा है। 
मंत्री चौबे ने कहा कि मंत्री से मिलिये कार्यक्रम में ऐसा नहीं है कि लोग शिकायत ही लेकर आते हैं, कुछ सुझाव भी आते है। कुछ कार्यक्रम की नई रूपरेखा तैयार की जाती है। पहले की तुलना में अब एप्लीकेशन कम आते हंै, परिस्थितिया अलग-अलग होती है,स्थानंतरण सत्र था तो आवेदन ज्यादा आते थे। अभी नगरीय निकाय चुनाव होने वाले है तो कुछ लोगों के रिज्यूम ज्यादा आये है। अभी जैसे धान खरीदी शुरू होनी है तो धान खरीदी केन्द्र खोलने की बात आती है। कुछ किसानों ने धान खरीदी के समय को बढ़ाया जाये, इसके बारे में अपना सुझाव दिया है। पहले भी लोगो ने कहा कि किसानों का पंजीयन अभी हो नहीं पाया है इसलिये सरकार को पंजीयन की तारीके बढ़ाना चाहिये। 
मंत्री चौबे ने कहा कि पिछले विधानसभा में सप्लाई का मामला सामने आया था, तो हमने विधानसभा में कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। कुछ किसानों को दूसरी बार देकर के अगर खानापूर्ति की गई है, इसकी जांच की जायेगी। क्योंकि अगर दूसरी बार एप्लीकेशन किसानों से लिया गया और उसको स्प्रिलिंकर दिया गया तो इसमें कोई खामी है लेकिन एप्लीकेशन लिया और स्प्रिलिंकर नहीं दिया गया, अडजेस्टमेंट किया गया तो इसके खिलाफ निलंबित भी करेंगे और कार्यवाही भी करेंगे। ये जांच का विषय है। हम लोग भी किसान है, जानते है कि किसानों को लगातार स्प्रिलिंकर की जरुरत होती है। ये जांच करने के बाद ही लेकिन कहीं भी इस प्रकार से करप्शन के कारण दूसरी बार किसानों का एप्लीकेशन लेकर के कागज में कार्यवाही करके कोई अधिकारी किया होगा उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। 
मंत्री चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार कृत संकल्पित है, छत्तीसगढ़ के किसानों का धान खरीदने के लिये। इसलिये इस प्रकार की सारी व्यवस्थाओं की शुरुआत भी कांग्रेस सरकार बनते ही शुरू की गई थी और इस बार भी करेंगे।  केन्द्र से चार चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अनुरोध किया है लेकिन आज तारीख तक केन्द्र सरकार ने सहमति नहीं दी है। यही तो विवाद का कारण है, हम लोग चाहते है धान का पूरा निष्पादन हो जाये और छत्तीसगढ़ को केन्द्र की मदद मिलनी चाहिये। प्रधानमंत्री से हम लोग आग्रह करना चाहेंगे कि छत्तीसगढ़ भारत भूमि का हिस्सा है वहां किसानों को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिये। मंत्री चौबे ने कहा कि पूरे प्रदेश में कुछ जगह लगभग बारिश हुई है। अधिकांश जो सोयाबीन उत्पादक अधिकांश जिले में वहां तो क्षति भरपूर हुई है। उड़द की फसल को काफी नुकसान हुआ है। धान की अर्ली वेयराटी का जो धान था उस फसलों को भी कुछ  प्रतिशत तक के नुकसान हुआ है। हमने और मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से जिला कलेक्टरों को और अपने विभाग के अधिकारी को निर्देश दिया हुआ है सर्वे करने के लिये कहा है कि ताकि तत्काल आरवीसी की साहयता उन किसानों को मिल जाये। उसके बाद सोयाबीन इतना विस्तृत फसल है, उसमें स्वयं किसानों को कवर करने वाले है तो इंश्योरेंस के अधिकारी को भी निर्देश दिया हुआ है। जहां-जहां ऐसी शिकायत आयी है वहां इस प्रकार की सर्वे करें। आरवीसी की मद्द और इंश्योरेंस की मद्द किसानों को मिलेगी। विभाग को निर्देश दिये हुये है और उसका आंकलन चल रहा है। 
मंत्री चौबे ने कहा कि वर्षा ज्यादा हुई है, जहां धान खरीदी करते हैं आज पर्यन्त गीला है, अभी भी बहुत किसान आये हुये है । खेत गीला है, हारवेस्टर खेतों में चल नहीं पा रहा है। एकदम अर्ली वेयराटी के कुछ किसानों के धान कुछ हजार क्विंटल अभी मार्केट में आये हुये है लेकिन हम चाहते है कि जितना समय धान खरीदी के लिये प्रदेश में दिया जाता है उतना ही समय राज्य सरकार ने घोषित का इधर 15 दिन अगर बढ़ाया गया तो फरवरी माह 15 दिन आगे उसको बढ़ाया जाये। इसलिये किसानों के धान को जितना किसान लायेंगे 15 क्विंटल के हिसाब से हम पूरा खरीदेंगे। अभी जो मार्केट में दिख रहा है,उतना तो हमेशा पहले भी शुरूआत होता था।  खेत भी गिला है और पंजीयन का काम भी लेट हुआ, किसानों ने मांग की है इसलिये 7 दिन पंजीयन की तारीख बढ़ायी गई थी। मंत्री चौबे ने कहा कि पहली बार छत्तीसगढ़ में 2500 रुपए की धान खरीदी का निर्णय मुख्यमंत्री  ने लिया तो ऐसे नौजवान जिन्होंने गांव में खेती करना छोड़ दिया था,लगभग 2 लाख से अधिक किसान नये गांव में पंजीकृत हुये और लगभग साढ़े तीन लाख एकड़ के अतिरिक्त की जमीन में धान का रकबा बढ़ाया ये संकेत है सरकार के इस प्रकार निर्णयों का किसानों में उत्साह जनक स्वागत किया। इनका पहले से पंजीयन होता है कितनी जमीन का धान आयेगा,किसान की सहमति से तारीके तय होती है और जिन तारीकों तक सोसायटी उनको देता इन तारीखों में खरीदी होगी।
मंत्री चौबे ने कहा कि सौभाग्य से छत्तीसगढ़ में अभी 10 से 11 महीने की हमारी सरकार में अधिकांश जो रोजगार के अवसर हो सकते है , उसको उपलब्ध करवाया गया। कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया गया है। कुछ  प्रोसेसिंग की ईकाइया बढ़ाने के लिये हम लोगों ने राशि स्वीकृत की है और अरसे बाद एक इतनी सरल उद्योग नीति छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत की गई है। इस राज्योत्सव में मुख्यमंत्री ने इसका विमोचन किया है और प्रदेश की जनता को समर्पित किया है ताकि उद्योग छत्तीसगढ़ में आये। नये लड़कों को रोजगार मिल सके। रोजगार के एप्लीकेशन तो आयेंगे, पिछले 15-20 सालों में ये जो छत्तीसगढ़ की स्थिति बनी हुयी है लगभग 27 से 28 लाख शिक्षित बेरोजगार हमारे कार्यालय रोजगार दफ्तर के पंजीकृत है। एप्लीकेशन तो आयेंगे लेकिन हम लोगों का प्रयास है रोजगार का अवसर नौकरी से है,स्वरोजगार की दिशा में भी कैसे किया जाये सरकार इसके लिये काम कर रही है।

10-11-2019
लोकवाणी : शहरों का नियोजित विकास और खुशनुमा वातावरण का निर्माण हमारी प्राथमिकता : भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘लोकवाणी’ के चौथे प्रसारण में  ’नगरीय विकास का नया दौर’ विषय पर प्रदेश की जनता के सवालों का जवाब दिया तथा नगरीय क्षेत्रों में शासन द्वारा किए जा रहे विकास कार्यो एवं कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों का नियोजित विकास, उत्साह से भरपूर और खुशनुमा वातावरण का निर्माण हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने नगरीय विकास के संबंध में लोगों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि नगरीय क्षेत्रों में वर्षा जल संचय और नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने अनेक योजनाओं संचालित है। उन्होंने कहा कि पेयजल और नगर की बसाहट बुनियादी जरूरतें हैं। सच में भू-जल स्तर का गिरना चिंता का विषय है और इसका सबसे बड़ा कारण हमारे शहरों का विकास, सीमेंट कांक्रीट के जंगल की तरह किया जाना है। शहरों के बहुत से हिस्से, घरों, व्यवसायिक भवनों, सड़कों आदि के कारण इतने ठोस हो गए हैं कि बरसात का पानी भी जमीन के भीतर नहीं जा पाता।

भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है कि सतह का पानी रिस-रिसकर जमीन के भीतर जाए। छत्तीसगढ़ को तरिया का, तालाबों का, जलाशयों का, नदियों-नालों का, जलप्रपातों का प्रदेश कहा जाता रहा है। विडम्बना है कि एक लम्बे अरसे तक सही सोच और सही योजना के बिना ही निर्माण कार्य किए जाते रहे हैं। ऐसे निर्माण कार्यों की वजह से हमारी जमीन की रिचार्जिंग क्षमता कम होती गई और भू-जल स्तर गिरते-गिरते अब खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। हमारी सरकार ने नियमों में संशोधन करके अब प्रत्येक आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया है। पूर्व में निर्मित भवनों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की गई है। छह प्रकार की रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट की दर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की गई है और सैकड़ों एजेन्सियों तथा स्व-सहायता समूहों को आगे किया गया है कि वे एक माह के भीतर सभी जगह रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करें। हम चाहते हैं नए भवनों में बिजली कनेक्शन भी तभी दिया जाए, जब रेन वाटर हार्वेस्टिंग की यूनिट वहां लगा दी जाए।

‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ योजना से शहरों को जोड़ने का कार्य शुरू हो गया है। ‘वी-वायर इंजेक्शन वेल’ के माध्यम से भू-जल की रिचार्जिंग की परियोजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से, स्थानीय प्रशासन से, जिला प्रशासन से, स्वयंसेवी संगठनों से अपील की कि पुराने कुओं की साफ-सफाई कराएं। पुराने कुओं को जाली आदि लगाकर सुरक्षित करें ताकि इससे कोई दुर्घटना न हो। उन्होंने कहा कि आजकल छोटे भू-खण्डों पर घर बनाए जाते हैं, जिसमें कुओं का निर्माण कठिन होता है, इसीलिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग की प्रणाली अपनाई जाती है, लेकिन जहां पुराने कुएं हैं, उनका पूरा सम्मान और व्यवस्था हो। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनते ही 212 करोड़ रू. लागत से रायपुर शहर वृहद पेयजल आवर्धन योजना की शुरूआत कर दी गई है। घरेलू पेयजल कनेक्शन से वंचित बीपीएल परिवारों के लिए ‘मिनीमाता अमृतधारा नल योजना’ शुरू की गई है। फिल्टर प्लांट के माध्यम से पैकेज्ड वाटर अर्थात सीलबंद पानी उपलब्ध कराने के लिए ‘राजीव गांधी सर्वजल योजना’ शुरू की गई है।

आपदाग्रस्त स्थानों अर्थात जहां भू-जल प्रदूषित है, वहां सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री चलित संयंत्र पेयजल योजना’ शुरू कर दी गई है। चंदखुरी, जिला दुर्ग में ‘समूह पेयजल योजना’ के माध्यम से समस्या का समाधान किया जा रहा है। सुपेबेड़ा में तेलनदी का जल शुद्ध करने के लिए ‘सुपेबेड़ा जल योजना’ शुरू की गई है। सरकार बनते ही रायगढ़ तथा जगदलपुर शहर सिवरेज मास्टर प्लांट को मंजूरी दी गई है, जिससे नदियों में मिल रहे नाले-नालियों के दूषित जल का शुद्धिकरण किया जा सके।
बरसों से लंबित खारून सफाई योजना को मंजूरी दी गई है। बस्तर की जीवनदायनी इंद्रावती नदी के संरक्षण के लिए प्राधिकरण का गठन किया गया है। बिलासपुर में अरपा नदी की सफाई का बड़ा अभियान जनभागीदारी के साथ चलाया गया है। मैं चाहता हूं कि प्रदेश की जनता अपने आस-पड़ोस की नदियों को साफ रखने में मदद करें। इससे हमारी सरकार का उत्साह बढ़ेगा और हम सब मिलकर अपने शहरों को, शुद्ध पानी भी दे सकेंगे और स्वच्छ परिवेश भी।

नालियों में कचरा नहीं डालने लोगों से अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह हमारे शरीर में रक्त वाहिकाएं होती हैं उसी तरह शहर की सफाई व्यवस्था नालियों पर निर्भर करती है। जब हम नाली में कचरा डालते हैं तो वहां से पानी बहना बंद हो जाता है। जब पानी नहीं बहता तो गंदे पानी से बदबू, मच्छर, कीड़े-मकोड़े और तरह-तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं। उन्होंने घर या दुकान का कचरा नालियों में नहीं डालने की अपील की है।  

युवाओं का सम्मान करने, उन्हें  जिम्मेदारी देने तथा उन पर भरोसा करने का दिया संदेश

मुख्यमंत्री ने इस बार नगरीय निकायों के चुनावों की प्रक्रिया में  किए गए संशोधन के संबंध में बताया कि महापौर या अध्यक्ष के दोनों पद प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की तरह एक्जीक्यूटिव पद हैं। यदि पार्षदों का समर्थन नहीं मिलता तो नगर का विकास ठप्प पड़ जाता है। पार्षद जब अपना मुखिया चुनेंगे तो नगरीय विकास का काम निर्बाध रुप से पूरा होगा। जब 21 साल में कोई पार्षद बन सकता है तो मेयर क्यों नहीं बन सकता। हमें युवाओं को सम्मान देना, युवाओं को जिम्मेदारी देना, युवाओं पर भरोसा करना सीखना होगा। हमने प्रदेश को कुचक्रों से बाहर निकालने में सफलता पाई है और अब युवा जोश और ऊर्जा से राजनीति को स्वस्थ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। शहरों का नियोजित विकास, उत्साह से भरपूर और खुशनुमा वातावरण का निर्माण हमारी प्राथमिकता है।

मछुआ सहकारी समितियों की बढ़ेगी आय और नगरीय निकायों को मिलेगा राजस्व

मुख्यमंत्री ने लोकवाणी के माध्यम से बताया कि नगरीय निकायों के तालाबों से मछुवारों को दूर किया गया था। हम चाहते हैं कि मछुवा सहकारी समितियों को ये तालाब दिये जाएं, जिससे तालाबों की देखरेख भी होगी। नियमित सफाई होगी। मछलियां पाली जायेंगी। मछुवारों की आय बढ़ेगी और नगरीय निकायों को राजस्व भी मिलेगा।

छोटे भू-खण्डों के क्रय-विक्रय से रोक हटाने से हुए लगभग एक लाख सौदे

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों की वजह से हर क्षेत्र में नये रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। पूरे प्रदेश में नगरीय-निकायों द्वारा निर्मित दुकानों के किराये में कमी की गई है ताकि स्वरोजगारी युवाओं को मदद मिले और वे अन्य लोगों को रोजगार दे सके। हमने जमीन की गाइड लाइन दर में 30 प्रतिशत की कमी की और छोटे भू-खंडों के क्रय-विक्रय से रोक हटाई जिसके कारण लगभग एक लाख सौदे हुए। एक जमीन बिकने पर दसियों लोगों को लाभ मिलता है। मकान बनता हैं तो बढ़ई, लोहार, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, प्लम्बर, रेजा, कुली से लेकर दुकानदार तक सबको रोजगार मिलता है। हमने गुमाश्ता लायसेंस के वार्षिक नवीनीकरण में छूट देने जैसे कई कदम उठाए हैं, जिससे कारोबारियों का उत्साह बढ़ा है।
शिक्षाकर्मियों, सहायक शिक्षक (एल.बी.) को नियमित वेतन, तबादले की सुविधा, स्वच्छता दीदियों के मानदेय में वृद्वि जैसे अनेक कदम उठाए गए हैं। ‘पौनी-पसारी’ छत्तीसगढ़ में एक ऐसी बाजार व्यवस्था है, जिसमें आपसी सद्भाव, सहयोग और समरसता के सामाजिक माहौल में सारी आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं। समन्वय की अर्थव्यवस्था हमारी बसाहटों में खुशहाली का आधार थी। आधुनिक बाजार व्यवस्था में यह परम्परा टूट रही थी। इसलिए हमने नगरीय-निकायों में ‘पौनी-पसारी’ बाजार व्यवस्था का संरक्षण तथा संवर्धन करने का निर्णय लिया है। मुझे खुशी है कि इस दीवाली में हमारी माटी के दीयों से छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि दिल्ली भी रोशन हुई है। हमारे गांवों, बस्तियों में बने पकवानों की खुशबू और मिठास हर घर में पहुंची है। गांव का पैसा गांव में ही, आपस में एक-दूसरे के काम आता है। हमारा प्रयास है कि हर हाथ को उसकी क्षमता के अनुसार रोजगार मिले, नई उद्योग नीति में इसके लिए समुचित प्रावधान किये गए हैं।

मोर जमीन-मोर मकान योजना से 11 माह में बने 40 हजार मकान

मुख्यमंत्री ने लोकवाणी के जरिए बताया कि जब हमने सरकार की बागडोर सम्हाली तब प्रदेश में ‘मोर जमीन-मोर मकान योजना’ के तहत सिर्फ 8 हजार मकान बने थे, जबकि 11 महीने में 40 हजार मकान बन गए। हमने ‘राजीव गांधी आश्रय योजना’ का आगाज किया और कानून में संशोधन किया ताकि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन परिवारों को उनके नाम से पट्टा मिले, नियमितीकरण हो। इस योजना का लाभ एक लाख लोगों को मिलेगा। आबादी पट्टों का वितरण होने लगा है। किफायती आवास योजना के तहत 1250 करोड़ रू. की लागत से लगभग 29 हजार नवीन आवासों की मंजूरी दी गई है। वर्ष 2022 तक सभी आवासहीनों को आवास उपलब्ध करा देंगे।



बीमार लोगों तथा कुपोषित माताओं, बहनों एवं बच्चों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़ितों तक पहुंचना, हताश और निराश लोगों तक पहुंचना, परेशान लोगों तक पहुंचना, बीमार लोगों तक पहुंचना, कुपोषित माताओं, बहनों, बच्चों तक पहुंचना सरकार का काम है। शहरी बस्तियों के लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए इतने व्यस्त रहते हैं कि अपनी बीमारियों की अनदेखी करते हैं। इसलिए हमने मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य केन्द्रों तथा अन्य शासकीय योजनाओं के माध्यम से यह तय किया कि शहरी बस्तियों के लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते तो अस्पताल उनके घर के पास पहुंच जाए। मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालयों और मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य केन्द्रों में अब उत्साह का वातावरण है।



राज्योत्सव में छत्तीसगढ़िया कलाकारों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइंस कॉलेज के मैदान में जिस तरह विशाल जनसमुद्र उमड़ा, उसने हमारे हर फैसले पर मुहर लगा दी है। जहां तक उपलब्धि का सवाल है, तो तीन प्रमुख उपलब्धियां हैं। पहली उपलब्धि कि हमने अपने लक्ष्य के अनुरूप नई उद्योग नीति 2019-2024 जारी कर दी है। दूसरी उपलब्धि छत्तीसगढ़िया कलाकारों की प्रतिभा ने यह साबित कर दिया है कि उनके कार्यक्रम किसी सेलीब्रिटी के मोहताज नहीं और तीसरी उपलब्धि कि छत्तीसगढ़ को अपना राज्यगान मिल गया। छत्तीसगढ़ के महान जनकवि डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा ने जब ‘अरपा-पैरी के धार-महानदी हे अपार....’ गीत की रचना की थी, तब उन्हें पता नहीं था कि यह गीत कैसे-कैसे जन-जन की जुबान में चढ़ेगा और एक दिन ऐसा आएगा कि स्वयं यह गीत राज्य गीत का गौरव पाएगा।
लोकवाणी का ’आदिवासी विकास: हमारी आस’ विषय पर आगामी प्रसारण 8 दिसम्बर 2019 को होगा।

04-11-2019
मुख्यमंत्री ने राज्योत्सव में आम लोगों के बीच की खरीददारी और खिंचाई सेल्फी

 रायपुर।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्योत्सव के विभन्न स्टॉलों का भ्रमण कर आम लोगों के साथ खरीददारी की। खरीददारी के दौरान उन्होंने कई स्टालों में हस्त शिल्पियों और आम नागरिकों के साथ सेल्फी भी खिंचाई। उन्होंने वन मंत्री मोहम्मद अकबर को स्टॉल से कुर्ता खरीदकर भेंट किया। मुख्यमंत्री ने राज्योत्सव में शिल्प ग्राम में लगाए गए विभिन्न स्टालों में जाकर हस्तशिल्पियों से चर्चा की तथा उनके मेहनत और लगन की सराहना की और उनकी समस्याएं भी सुनी। उन्होंने यहां हाथ से बनाई गई बस्तर की विभिन्न कलाकृतियां और कुर्ता तथा बेडशीट भी खरीदा। भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सामाज कल्याण, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग और गांधी विचार यात्रा के स्टॉल सहित विभिन्न विभागों के द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर राज्य सभा सांसद छाया वर्मा एवं नगर निगम रायपुर की पूर्व महापौर डॉ. किरणमयी नायक भी उनके साथ थी।

 राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ के कलाकारों और शिल्पियों को अपनी कला का प्रदर्शन के लिए भरपूर मौका मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्पियों को यहां अच्छा बाजार मिल रहा है। हस्तशिल्पियों की कलाकृतियों की छटा यहां के कोसा और खादी के कपड़ों में भी देखने को मिल रही है। नए प्रयोगों से उनके उत्पादों की बिक्री भी खूब हो रही है। इस बार साइंस कालेज मैदान में चल रहे राज्योत्सव में 19 विभागों के स्टॉल के अलावा व्यावसायिक पेवेलियन में उद्योगों के 52 स्टॉल भी लगाए गए हैं। यहां शिल्पग्राम और फुड जोन भी बनाए गए हैं। इसके अलावा केन्द्रीय संस्थानों के स्टॉल भी लगाए गए हैं।

04-11-2019
राज्योत्सव में दिव्यांग बच्चों की बनाई पेंटिंग्स और गायन को मिल रही सराहना

रायपुर। छत्तीसगढ के 20वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्योत्सव में समाज कल्याण विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल में दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स और गायन को बहुत सराहना मिल रही है। ये पेंटिंग्स स्टॉल में प्रदर्शन और विक्रय के लिए रखी गई हैं। इसके साथ ही ‘मोर रायपुर स्वच्छ रायपुर‘ थीम सॉग गाने वाली रायपुर के मठपुरैना स्थित शासकीय श्रवण एवं दृष्टि बाधित विद्यालय की छात्राओं ने राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी पर गीत गाकर लोगों का दिल जीत लिया है। समाज कल्याण मंत्री अनिला भेंड़िया ने स्टॉल का निरीक्षण कर सराहना की और कहा विभागीय योजनाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाए।
स्टॉल में विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय और राज्य पेंशन योजनाओं, नशामुक्ति, सेरेब्रेल पल्सी गेट लैब, क्रित्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण प्रदाय सहित विभिन्न योजनाओं के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यहां महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर शुरू हुए ‘कार्याजंली‘ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्यके जिले में राज्य शासन द्वारा स्थापित किये जा रहे सियान चौपाल के मॉडल का प्रदर्शन किया गया है। सियान चौपाल ऐसे स्थान हैं, जहां बुजुर्ग मनोरंजन और विचार-विमर्श कर सकें। सरकार द्वारा बुजुर्गों के पढ़ने और खेलने लायक सामग्रियों की व्यवस्था भी सियान चौपाल में होगी। स्टॉल में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लोगों को समाज कल्याण और दिव्यांगों के सशक्तिकरण संबंधित योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदर्शन, पॉम्पलेट, फ्लैक्स, एल.ई.डी., मॉडल जैसे गई माध्यमों से लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा रही है। कलापथक दल के द्वारा भी गीत-संगीत के माध्यम से योजनाओं के बारे में बताया जा रहा है।

04-11-2019
राज्योत्सव: स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी स्टॉल में जाकर खनिजों के बारे में ले रहे जानकारी

रायपुर। विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए राज्योत्सव में लगाए गए खनिज साधन विभाग का स्टॉल जिज्ञासा और कौतूहल का केन्द्र बना हुआ है। स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी और युवा यहां प्रदर्शित डोलोमाइट, ग्रेफाइट, बॉक्साइट, बेन्डेट हेमेटाइट क्वार्टजाइट, गेलेना जैसे अनेक बहुमूल्य खनिज पदार्थों को देखने का अवसर मिल रहा है तथा इन खनिजों के बारे में दिलचस्पी के साथ जानकारी भी ले रहे हैं। साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्योत्सव में खनिज गतिविधियों एवं योजनाओं की महत्वपूर्ण उपलब्धियों की जानकारी जनसामान्य के लिए प्रदर्शित की गई है। खनिज साधन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों में पारदर्शिता एवं प्रक्रिया के सरलीकरण के उद्देश्य से विभाग द्वारा वेब बेस्ड ‘खनिज ऑनलाईन पोर्टल का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। पोर्टल के तहत प्रदेश में एसईसीएल, एनएमडीसी, बीएसपी, बाल्को, हिंडालको सहित अनेक सीमेंट संयंत्रों एवं क्रशर, वॉशरी संचालकों द्वारा सफलतापूर्वक खनिज आधारित व्यवसाय का संपादन किया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पोर्टल के तहत प्रथम फेज में मुख्य खनिज तथा कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूनापत्थर खानों में सिंगल पॉइंट पेमेंट, ऑनलाईन आवेदन, ई-परमिट, ई-ट्रांजिट पास, खनिज वाहनों का ई-पंजीयन इत्यादि सुविधाओं से जहां एक ओर इस कार्य में संलग्न व्यवसायियों, संस्थानों का कार्य व्यवस्थित एवं सरलीकृत हो गया है। वहीं वर्ष में विभाग को भी खानों के रेगुलेशन में भी सुविधा हुई है। खनिज ऑनलाईन पोर्टल में माह अक्टूबर 2019 तक कुल 108 लीज होल्डर्स, 159 लायसेंसी, 2520 एण्ड यूजर्स एवं 51 हजार 740 वाहन सफलतापूर्वक पंजीकृत होकर कार्य कर रहे हैं। पोर्टल से पांच हजार 611 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ है एवं 31 लाख से अधिक ई-ट्रांजिट पास जारी किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि आईटी क्षेत्र में हो रहे सतत बदलावा एवं खनिज ऑनलाइन योजना अंतर्गत वर्तमान में संचालन की उपर्युक्त स्थित, ट्रांजेक्शनल फैक्ट्स के अलावा इसके अंतर्गत प्रमुख व्यवस्था, स्टेकहोल्डर्स की सुविधा एवं पोर्टल को और प्रभावी करने के उद्देश्य से खनिज ऑनलाईन 2.0 प्रस्तावित किया गया है। प्रस्तावित खनिज ऑनलाईन 2.0 परियोजना में नये मॉड्यूल जैसे मोबाइल एप्लीकेशन, व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम, कमाण्ड कंट्रोल सेंट्रल जैसे विभिन्न नवाचार के साथ खान एवं खनिज संबंधी सम्पूर्ण कार्य डिजिटल और पेपरलेस करते हुए खनिज ऑनलाइन को अपने नए स्वरूप में बहुआयामी और सारे हितधारको के लिए सरल बनाया जा रहा है। 

04-11-2019
राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी व्यंजन की बढ़ी मांग
   

रायपुर। साईंस कॉलेज मैदान में राज्योत्सव में फूड जोन में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की महक खासी लोगों को आकर्षित कर रही है। व्यंजनों का आस्वादन का आनंद मेला में आने वाले लोग ले रहे हैं। फूड जोन में बुस्क आर्ट महिला स्वसहायता समूह महावीर नगर रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाया गया है। समूह की अध्यक्ष नम्रता चंद्राकर ने बताया कि राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को खरीदने लोग काफी उत्साहित रहे। व्यंजनों में फरा, बरा, चीला, लाडू सहित अन्य व्यंजन उपलब्ध है। इसी तरह से फूड जोन में और कई तरह के खाना खजाने की बहार है। लोग इसका भरपूर लुत्फ उठा रहे हैं।

04-11-2019
राज्योत्सव 2019: लोगों को लुभा रहा है नरवा, गरवा, घुरवा और बारी का एकीकृत मॉडल

रायपुर। राज्योत्सव स्थल साइंस कॉलेज मैदान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्टॉल में रोज भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के एकीकृत मॉडल को आकर्षक ढंग से दिखाया गया है। विभाग के स्टॉल में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत काम कर रहीं स्वसहायता समूह की महिलाएं गोबर के दीये, धूपबत्ती और गमला बनाते हुए भी देखी जा सकती हैं। ‘बिहान’ के स्वसहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए गोबर के दीयों की मांग इस साल दीवाली में छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक थी। इस बार दीवाली में अनेक लोगों के घर इन महिलाओं के बनाए गोबर के दीयों से रोशन हुए थे। 

 स्टॉल में नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के मॉडल के जरिए इस योजना के बारे में विस्तार से बताया गया है। गौठान की विभिन्न व्यवस्थाओं चरवाहों के विश्राम कक्ष, पशुओं के बैठने के शेड, उनको चारा खिलाने और पानी पिलाने की व्यवस्था, पैरावट, उपचार के लिए ट्रेविस तथा गोबर से वर्मी कंपोस्ट निर्माण को यहां आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। बारी योजना के तहत साग-सब्जियों तथा फूलों की खेती और इनमें कंपोस्ट खाद के उपयोग के फलस्वरूप लहलहाती, हरी-भरी बारी को भी दर्शाया गया है। लोग पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मॉडल का बारिकी से अवलोकन कर नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के संरक्षण-संवर्धन की जरूरत और तरीकों से रू-ब-रू हो रहे हैं। आकर्षक डिस्प्ले के माध्यम से नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के संरक्षण व संवर्धन के लिए पिछले 10 महीनों में किए गए कार्यों के बारे में भी यहां बताया गया है। विभाग के स्टॉल में स्वच्छ भारत मिशन के तहत साफ-सफाई के प्रति जागरूकता के संदेश के साथ ही ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए गांवों में शासन द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद की भी जानकारी दी जा रही है

04-11-2019
खेल प्रतिभाओं को मिला राज्योत्सव में सम्मान
   

रायपुर। प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की बहुतायत है। प्रतिभावान खिलाड़ियों को मौका मिलने से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं। खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के रूप में ईनाम या पुरस्कार मिले तो खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन करने को प्रेरित होते हैं। राज्य सरकार द्वारा राज्योत्सव 2019 में प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ी दिपेश कुमार सिन्हा को गुण्डाधूर खेल रत्न और गिरिवर सिंह को महाराजा प्रवीणचन्द भंजदेव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस प्रकार के सम्मान से अन्य खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलता है। छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत दिपेश कुमार सिन्हा प्रतिभावान वॉलीवाल खिलाड़ी है। वे वर्ष 2010 से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल की प्रतिभा दिखा रहे हैं। वर्ष 2012 में ईरान में आयोजित स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ एशियन वॉलीवाल खिलाड़ी का खिताब भी प्राप्त किया था।

 तीरंदाजी खेल के लिए राज्यस्तरीय पुरस्कार महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान इस वर्ष बिलासपुर जिले के शिवतराई निवासी गिरिवर सिंह को दिया गया। राज्य के पैरा तीरंदाजी खेल के खिलाड़ी गिरिवर ने रोहतक हरियाणा में आयोजित राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में इंडियन राउण्ड ओपन कैटेगरी में प्रथम स्थान किया था। अब तक गिरिवर तीन नेशनल और तीन स्टेट लेवल टूर्नामेंट में पदक जीत चुके हैैं।

04-11-2019
नन्ही गायिका का वरिष्ठ अधिकारियों ने किया उत्साहवर्धन

रायपुर। राज्योत्सव के मंच पर 'अरपा पैरी की धार, महानदी हे अपार' और 'पंथी गीत' तथा 'धनी बिना जग लागे सून्ना रे' गीत गाकर दर्शकों की व्यापक प्रशंसा पाने वाली  11 वर्षीय प्रतिभाशाली गायिका आरू साहू ने संस्कृति विभाग के सचिव सिध्दार्थ कोमल परदेशी, जिला कलेक्टर डॉ. एस.भारतीदासन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ एच शेख, नगर निगम आयुक्त शिव अनंत तायल से मुलाकात की। इन अधिकारियों ने उसका उत्साहवर्धन किया और शुभकामनाएं दी। 

         

04-11-2019
बूंद-बूंद जल संचय का संदेश देता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का मॉडल  

रायपुर। साईंस कालेज मैदान में आयोजित राज्योत्सव में लोक-स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर 'बूंद-बूंद जल की बचत' मॉडल आकर्षण का केन्द्र है और यह लोगों के लिए सेल्फी जोन बन गया है। इस मॉडल में यह संदेश दिया जा रहा है कि दिन प्रतिदिन पीने योग्य पानी की कमी होती जा रही है, अगर आज हम जल का सदुपयोग नहीं करेंगे तो भविष्य में हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाएगा। प्रदर्शनी में नल जल योजना का चलित मॉडल, राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना मिनीमाता अमृत धारा योजना को प्रदर्शित किया गया है। इस योजनांतर्गत ग्रामीण अंचलों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए निःशुल्क नल कनेक्शन प्रदाय किया जाना है। नल जल प्रदाय योजना और सतही स्रोत पर आधारित नल जल योजना की जानकारी को आकर्षित रूप में प्रदर्शित है। जिसमें सतही स्रोत के जल को उपचारित कर चयनित ग्रामों में उच्च स्तरीय जलागार के माध्यम से जल प्रदाय किया जाता है।
 स्टॉल में जल परीक्षण की प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जिसमें नागरिकों को जल परीक्षण के बारे में बताया जा रहा है इसके माध्यम से जल के परीक्षण के महत्व को दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त दूषित जल में स्थापित फ्लोराइड, आयरन और आर्सेनिक जैसे जहरीले तत्वों के बारे में भी बताया गया है। स्टॉल में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट एवं आयरन रिमूवल प्लांट का मॉडल भी प्रदर्शित किया गया है।
 

04-11-2019
मुख्यमंत्री ने सेक्सोफोन बजाने वालों के साथ ली सेल्फी, तालियों से गूंज उठा राज्योत्सव मैदान

रायपुर। 3 नवंबर की शाम सेक्सोफोनिस्ट विजेंद्र धवनकर पिंटू, लिलेश, सुनील और उनके साथियों के साथ- साथ संगीत प्रेमियों के लिए भी एक यादगार शाम थीं। रायपुर के वृंदावन हॉल और भिलाई के प्रतिष्ठित कलामंदिर में अपनी धमाकेदार प्रस्तुति से लोगों के दिलों में खास छाप छोड़ने वाले सेक्सोफोनिस्टों ने जब राज्योत्सव के विशाल मंच में बेशुमार दर्शकों के बीच सेक्सोफोन बजाया तो हर कोई झूम उठा। एक पुरानी छत्तीसगढ़ी फिल्म घर-द्वार के प्रसिद्ध गीत- सुन-सुन मोर मया पीरा... की धुन को बजाते हुए कलाकार जब समारोह के प्रमुख मंच तक पहुंचे तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद को सेल्फी लेने से नहीं रोक पाए। उन्होंने तीन बार अलग-अलग अंदाज से कलाकारों के साथ सेल्फी ली। मुख्यमंत्री का यह अंदाज सबको खूब पंसद आया क्योंकि इसके पहले छत्तीसगढ़ के लोगों ने यहां के मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह को केवल मुंबई के नामचीन कलाकारों के साथ ही सेल्फी लेते हुए देखा था। मुख्यमंत्री द्वारा ली गई सेल्फी की एक खास बात यह भी थीं कि मंच पर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास मंहत, सांसद ज्योत्सना महंत, स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया, शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह, लोक स्वास्थ्य मंत्री रूद्र गुरू, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया, मुख्य सचिव आरपी मंडल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, संस्कृति विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, संचालक अनिल साहू सहित विधायक और वरिष्ठ अफसर मौजूद थे।

राज्योत्सव में कलाकारों ने फिल्म शोले के टाइटल म्यूजिक से जो माहौल बनाया वह अंत तक बरकरार रहा। कलाकारों ने एक से बढ़कर एक धुनें सुनाई। डाक्टर नरेंद्र देव वर्मा लिखित गीत अरपा पैरी के धार की सबसे पहली प्रस्तुति वे भिलाई में दे चुके थे, लेकिन यहां राज्योत्सव में भी जब सेक्सोफोन पर यह गीत गूंजा तो हर कोई यह कहने को मजबूर हो गया कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी में जन्में कलाकार अंग्रेजी बाजे में भी अपनी माटी के प्रति सम्मान प्रकट करने का हुनर जानते हैं। कलाकारों ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गड़वा बाजा को भी सेक्सोफोन पर बजाकर दर्शकों को नाचने के लिए मजबूर कर दिया। सेक्सोफोन बजाने वाले कलाकार जल्द ही अपनी प्रस्तुति अंबिकापुर, राजनांदगांव, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में भी देंगे।

 

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