GLIBS
11-09-2019
उन्नाव गैंगरेप केस : बयान दर्ज करने के लिए एम्स में लगी अदालत

नई दिल्ली। उन्नाव बलात्कार मामले में एम्स में बुधवार को अस्थायी अदालत लगाई गई। बलात्कार पीड़िता के बयान दर्ज करने के लिए जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा एम्स पहुंच गए हैं। मामले के एक प्रमुख आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को इसके लिए एम्स लाया गया। उसके साथ सह-आरोपी शशि सिंह को भी लाया गया है। भाजपा सेंगर को पार्टी से निष्कासित कर चुकी है। न्यायाधीश ने एम्स के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में एक अस्थायी अदालत स्थापित करने के निर्देश दिए थे, जहां महिला को 28 जुलाई को एक दुर्घटना के बाद भर्ती कराया गया था। उच्च न्यायालय ने इस मामले में शुक्रवार को अनुमति दी थी। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को प्रशासनिक पक्ष से इस आशय की एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश शर्मा पीड़िता के बयान दर्ज करेंगे। महिला ने 2017 में सेंगर पर उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार करने का आरोप लगाया था। घटना के वक्त वह नाबालिग थी। 28 जुलाई को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई पीड़िता फिलहाल जीवन के लिए जूझ रही है। उस दुर्घटना में उसकी मौसी और चाची दोनों की मौत हो गई थी। हादसे में उनका वकील भी घायल हो गया था।

08-09-2019
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का निधन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का 95 वर्ष की उम्र में रविवार को उनके दिल्ली स्थित आवास पर निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। जेठमलानी की गिनती देश के मशहूर आपराधिक वकीलों में होती थी। वह राष्ट्रीय जनता दल से वर्तमान में राज्यसभा सांसद थे। उन्हें राजद ने 2016 में राज्यसभा भेजा था। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कानून मंत्री का पदभार संभाला था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जेठमलानी को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके आवास पर पहुंचे।

 

राम जेठमलानी का जन्म पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 14 सितंबर 1923 को हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया था। वह कोर्ट में बिना माइक के जिरह किया करते थे। वह अपने मुकदमों के अलावा अपने बयानों के कारण भी अक्सर चर्चा में रहते थे। 17 साल की उम्र में जेठमलानी ने वकालत की डिग्री प्राप्त कर ली थी। उस समय नियमों में संशोधन करके उन्हें 18 साल की उम्र में प्रैक्टिस करने की इजाजत दी गई। जबकि नियमानुसार प्रैक्टिस करने की उम्र 21 वर्ष तय थी। उन्हें यह छूट इसलिए दी गई थी क्योंकि उन्होंने अदालत से अनुरोध करते हुए एक आवेदन दिया था। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। राम जेठमलानी ने कई बड़े केस लड़े हैं। जिनमें नानावटी बनाम महाराष्ट्र सरकार, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह, हर्षद मेहता स्टॉक मार्केट स्कैम, हाजी मस्तान केस, हवाला स्कैम, मद्रास हाईकोर्ट, आतंकी अफजल गुरु, जेसिका लाल मर्डर केस,  2जी स्कैम केस और आसाराम का मामला शामिल है।

06-09-2019
यूएपीए कानून में संसोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने अवैध गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) में किए गए संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र से शुक्रवार को जवाब मांगा। याचिकाओं में अवैध गतिविधियां (रोकथाम) कानून में किये गये संशोधनों को कई आधार पर चुनौती दी गई है। याचिकाओं में कहा गया है कि ये संशोधन नागरिकों के मौलिक आधिकारों का उल्लंघन करते हैं और एजेंसियों को लोगों को आतंकवादी घोषित करने की ताकत प्रदान करते हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने सजल अवस्थी और गैर सरकारी संगठन असोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स की याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए। संसद ने हाल ही में अवैध गतिविधियां (रोकथाम) कानून में संशोधनों को मंजूरी दी थी। इन संशोधनों के बाद सरकारी एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिल गया है।

अवैध गतिविधियां गतिविधि रोकथाम कानून में हाल ही में हुए संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। कानून में जो बदलाव किए गए हैं, उनके बदलावों को ही याचिका में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि यह कानून संविधान के अनुच्छे 14, 19 और 21 के खिलाफ है। बता दें कि संसद से पास किए गए इस कानून के अनुसार केन्द्र सरकार किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी की श्रेणी में डाली सकती है। फिर वह चाहे किसी समूह के साथ जुड़ा हो या नहीं। अवैध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए को साल 1967 में 'भारत की अखंडता तथा संप्रभुता की रक्षा' के उद्देश्य से पेश किया गया था और इसके तहत किसी शख्स पर 'आतंकवादी अथवा गैरकानूनी गतिविधियों' में लिप्तता का संदेह होने पर किसी वारंट के बिना भी तलाशी या गिरफ्तारी की जा सकती है। इन छापों के दौरान अधिकारी किसी भी सामग्री को ज़ब्त कर सकते हैं। आरोपी को ज़मानत की अर्ज़ी देने का अधिकार नहीं होता, और पुलिस को चार्जशीट दायर करने के लिए 90 के स्थान पर 180 दिन का समय दिया जाता है।

05-09-2019
सुप्रीम कोर्ट ने इल्तिजा मुफ्ती को दी मां महबूबा मुफ्ती से मिलने की इजाजत

नई दिल्‍ली। जम्‍मू कश्‍मीर की पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मां से मिलने की इजाजत दे दी है। इल्तिजा जिन्‍हें घर में सना के नाम से बुलाया जाता है, उन्‍होंने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्‍होंने अथॉरिटीज से अपील की थी कि उन्‍हें उनकी मां से मिलने की इजाजत दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इल्तिज़ा को चेन्नई से श्रीनगर जाने और अपनी मां से मुलाकात की इजाज़त दे दी है। कोर्ट ने साफ किया कि इसके अलावा श्रीनगर में उन्हें कहीं आने-जाने के लिए प्रशासन की इजाज़त लेनी होगी। 

बता दें कि पांच अगस्‍त को घाटी से आर्टिकल 370 को हटाया गया था और उसके एक दिन पहले यानी चार अगस्‍त को घाटी के कुछ नेताओं को नजरबंद किया गया था। इनमें महबूबा के अलावा दो और पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्‍दुल्‍ला और उनके पिता फारूक अब्‍दुल्‍ला भी शामिल हैं। इल्तिजा ने अपनी याचिका में कहा है कि उनकी मां की तबियत ठीक नहीं है और पिछले एक माह से उनकी मुलाकात अपनी मां से नहीं हो पाई है। उन्‍हें अपने मां के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता है, जो ठीक नहीं हैं। इल्तिजा के वकील आकाश कामरा ने कहा है कि याचिका बिल्‍कुल उसी तरह की है जो सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी की ओर से दायर की गई थी। 28 अगस्‍त को सुप्रीम कोर्ट ने येचुरी की याचिका पर फैसला दिया था और सरकार से कहा था कि उन्‍हें कश्‍मीर जाने दिया जाए। येचुरी ने अपनी पार्टी के नेता मोहम्‍मद युसूफ तारीगामी से मिलने की इजाजत कोर्ट से मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने येचुरी को इस शर्त पर कश्‍मीर जाने की इजाजत दी थी कि वह सिर्फ स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी चिंताओं पर ही तारीगामी से बातचीत करेंगे।

05-09-2019
पी. चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की ख़ारिज

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट से पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को बड़ा झटका लगा है। आईएनएक्स मीडिया केस में सुप्रीम कोर्ट ने पी. चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है और उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) आईएनएक्स मीडिया केस में पूछताछ के लिए पी. चिदंबरम को हिरासत में ले सकती है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि एजेंसी पूर्व वित्त मंत्री को हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। पी. चिदंबरम की सीबीआई हिरासत आज ही खत्म हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया है कि ईडी ने क्या दस्तावेज इकट्ठा किए हैं, उन्हें पी. चिदंबरम को दिखाने की जरूरत नहीं है और ना ही एजेंसी ने पूर्व वित्त मंत्री से क्या सवाल पूछे हैं उसकी ट्रांसक्रिप्ट कोर्ट को देने की जरूरत नहीं है। सूत्रों की मानें तो गुरुवार को ही ईडी पूर्व वित्त मंत्री को हिरासत में ले सकती है और पूछताछ शुरू कर सकती है। बता दें कि आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम अभी भी केंद्रीय जांच ब्यूरो की हिरासत में हैं। अंतरिम जमानत और सीबीआई कस्टडी के मसले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अपना फैसले पढ़ते हुए कहा कि एजेंसी की तरफ से केस डायरी को अदालत में पेश किया जा सकता है।

सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम, बेटे कार्ति चिदंबरम, वकील अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट में पी. चिदंबरम की ओर से सीबीआई की हिरासत का विरोध किया गया था, हालांकि राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पी. चिदंबरम को 5 सितंबर तक की सीबीआई हिरासत में भेज दिया था। 21 अगस्त को सीबीआई ने पी. चिदंबरम को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से ही वह हिरासत में हैं। गुरुवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट में पी. चिदंबरम की हिरासत पर भी सुनवाई होनी है, 5 सितंबर को ही सीबीआई हिरासत खत्म हो रही है। अगर सीबीआई को अदालत से पी. चिदंबरम की हिरासत नहीं मिलती है या उसकी तरफ से कोई मांग नहीं की जाती है तो ईडी तुरंत इस मामले में पूछताछ के लिए पी. चिदंबरम को गिरफ्तार कर सकती है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कहा गया था कि अभी उन्हें पी. चिदंबरम की और कस्टडी नहीं चाहिए, ऐसे में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए। अगर पी. चिदंबरम को न्यायिक कस्टडी में भेजा जाएगा तो उन्हें तिहाड़ जेल जाना होगा। कपिल सिब्बल की तरफ से इसका विरोध किया गया था, जिसके बाद अदालत ने 5 सितंबर तक कस्टडी बढ़ाने का आदेश दे दिया था।

 

02-09-2019
मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद-पुराण के आधार पर नहीं

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को मुस्लिम पक्षकारों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने हिंदू पक्ष की तरफ  से पेश की गई दलीलों को काटते हुए कहा कि मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद और स्कंद पुराण के आधार पर नहीं। उन्होंने हिंदू पक्ष के परिक्रमा वाले दलील पर कहा कि लोगों का उस स्थान की परिक्रमा करना धार्मिक विश्वास को दिखाता है। यह कोई सबूत नहीं है। वर्ष 1858 से पहले के गजेटियर का हवाला देना भी गलत है। अंग्रेजों ने लोगों से जो सुना लिख लिया। इसका मकसद ब्रिटिश लोगों को जानकारी देना भर था। मुस्लिम पक्षकार के वकील ने रामायण को काल्पनिक काव्य करार दिया। राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा कि कहा जा रहा है कि विदेशी यात्रियों ने मस्जिद का जिक्र नहीं किया। लेकिन मार्को पोलो ने भी तो चीन की महान दीवार के बारे में नहीं लिखा था।

मामला कानून का है। हम इस मामले में किसी अनुभवहीन इतिहासकार की बात को नहीं मान सकते हैं। हम सभी अनुभवहीन ही हैं। इस पर कोर्ट ने राजीव धवन से कहा कि आपने भी हाईकोर्ट में ऐतिहासिक तथ्य रखे थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि आपने (राजीव धवन) भी कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य दिए हैं। कोई ऐसा साक्ष्य है, जिसपर दोनों ने भरोसा जताया हो? इससे पहले राजीव धवन ने कहा कि महाभारत एक इतिहास है और रामायण एक काव्य है। इस पर जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है? धवन ने कहा काव्य तुलसीदास द्वारा कल्पना के आधार पर लिखी गई थी। इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि कुछ तो साक्ष्य के आधार पर लिखा जाता होगा। धवन ने दलील देते हुए कहा कि हम सिर्र्फ  इसलिए इस पक्ष को मजबूती से देख रहे हैं, क्योंकि वहां कि शिला पर एक मोर या कमल था। इसका मतलब यह नहीं है कि मस्जिद से पहले एक विशाल संरचना थी।

22-08-2019
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, शादी से पहले आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाना नहीं माना जाएगा दुष्कर्म

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यदि एक महिला किसी पुरुष के साथ यह जानते हुए भी शारीरिक संबंध बनाना जारी रखती है कि उन दोनों की शादी नहीं हो सकती है तो यह इस दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। महिला इस आधार पर उसके खिलाफ शादी का झूठा वादा करके दुष्कर्म करने का आरोप नहीं लगा सकती है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने सेल्सटैक्स की सहायक आयुक्त द्वारा सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट के खिलाफ दर्ज कराए गए दुष्कर्म के आरोपों को खारिज कर दिया। दोनों पिछले छह सालों से रिश्ते में थे और कई बार एक-दूसरे के घर में भी रह चुके थे। अदालत ने कहा इससे पता चलता है कि दोनों ने आपसी सहमति से संबंध बनाए थे।

शिकायत करनेवाली महिला ने कहा था कि वह सीआरपीएफ के अधिकारी को 1998 से जानती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2008 में शादी का वादा कर अधिकारी ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए। 2016 तक दोनों के बीच संबंध रहा और इस दौरान कई-कई दिनों तक दोनों एक-दूसरे के आवास पर भी रुके थे। शिकायतकर्ता का कहना है, '2014 में अधिकारी ने महिला की जाति के आधार पर शादी करने में असमर्थता जताई। इसके बाद भी दोनों के बीच 2016 तक संबंध रहे।' 2016 में महिला ने अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई क्योंकि उन्हें उसकी किसी अन्य महिला के साथ सगाई के बारे में सूचना मिली थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वादा करना और किन्हीं परिस्थितियों में उसे नहीं निभा पाना वादा कर धोखा देना नहीं है। कोर्ट ने कहा, 'अगर शादी का झूठा वादा कर किसी शख्स का इरादा महिला का भरोसा जीतना है। झूठे वादे कर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने में और आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने को लेकर गलत धारणा है। झूठा वादा कर धोखा देना वह स्थिति है, जिसमें वादा करने वाले शख्स के मन में जुबान देते वक्त उसे निभाने की सिरे से कोई योजना ही न हो।'  कोर्ट ने एफआईआर का बीरीकी से अध्य्यन करने के बाद कहा कि 2008 में किया गया शादी का वादा 2016 में पूरा नहीं किया जा सका। सिर्फ इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि शादी का वादा महज शारीरिक संबंध बनाने के लिए था। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला शिकायतकर्ता को भी इस बात का पता था कि शादी में कई किस्म की अड़चनें हैं। वह पूरी तरह से परिस्थितियों से अवगत थीं। 

21-08-2019
पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, ईडी ने जारी किया लुकआउट नोटिस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की वह अपील तत्काल सूचीबद्ध करने पर विचार के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष रखी जाएगी। चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तारी से पूर्व जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। जस्टिस एनवी रमन्ना ने चिदंबरम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि मामला प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी से किसी भी तरह की छूट देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद ईडी और सीबीआई की टीम चिदंबरम के आवास पर पहुंची, वहां चिदंबरम मौजूद नहीं थे। वहीं ईडी ने पी. चिदंबरम के खिलाफ ताजा लुकआउट नोटिस जारी किया है। इसका मतलब है कि चिदंबरम कहीं सफर करते दिखे तो उन्हें पकड़ा जा सकता है। सीबीआई और ईडी की टीम उन्हें तलाश रही है। चिदंबरम ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। पी. चिदंबरम के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि आईएनएक्स मीडिया मामले में उन्हें कर्ता-धर्ता बताने संबंधी दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी पूर्णतय: निराधार है और इसकी पुष्टि करने वाली कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है। 

 

19-08-2019
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- हमारे आदेश को न दें राजनीतिक रंग 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित संत रविदास मंदिर को गिराने के उसके आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों को ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक रूप से या प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था संबंधी कोई स्थिति उत्पन्न न हो। पीठ ने कहा कि हर चीज राजनीतिक नहीं हो सकती। धरती पर किसी के भी द्वारा हमारे आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने नौ अगस्त को कहा था कि वनक्षेत्र को खाली करने के उसके पूर्व आदेश पर अमल न कर गुरु रविदास जयंती समारोह समिति ने बड़ी गलती की है। बता दें कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानते हुए मंदिर को गिरा दिया था।

इसके बाद से चारों ओर विरोध हो रहा है। पंजाब के जालंधर सहित कई शहरों में सड़कों को जाम कर प्रदर्शन किया किया गया। दिल्ली-हरियाणा में भी लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। बता दें कि दिल्ली के तुगलकाबाद में संत रविदास का एक भव्य मंदिर था।  इस मंदिर में एक खास वर्ग के साथ-साथ सिख समाज भी इसमें आस्था रखता है। डीडीए का आरोप है कि मंदिर का निर्माण जंगल की जमीन पर किया गया था। इस बारे में कई बार इसे हटाने के लिए कहा गया, लेकिन संत रविदास जयंती समारोह समिति ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी मंदिर को जंगल की जमीन से नहीं हटाया गया, तब जाकर 9 अगस्त को एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को ढहाए जाने का आदेश जारी किया और डीडीए के दस्ते ने उस मंदिर को वहां से हटा दिया।

 

19-08-2019
सुप्रीम कोर्ट ने की तरुण तेजपाल की याचिका खारिज 

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को तरुण तेजपाल की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए यौन शोषण के आरोपों को रद्द करने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने मामले में छह महीने के भीतर सुनवाई समाप्त करने का भी आदेश दिया। तेजपाल ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने तेजपाल के खिलाफ दुष्कर्म, उत्पीड़न सहित अन्य धाराओं में आरोप तय किए थे। उसने दोषी नहीं होने का दावा किया और खुद को निर्दोष बताया। एक पूर्व जूनियर महिला सहकर्मी ने तहलका संस्थापक पर 2013 में गोवा में उनके द्वारा आयोजित एक सम्मेलन थिंकफेस्ट के दौरान दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

16-08-2019
धारा-370 पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाली, चीफ जस्टिस गोगोई ने दोबारा याचिका दायर करने को कहा

 

नई दिल्ली। धारा-370 को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 370 पर सुनवाई टाल दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता एमएल शर्मा को दोबारा याचिका दायर करने को कहा है। अगर याचिकाकर्ता सुधार कर दोबारा याचिका दायर करते हैं तो इस पर सुनवाई अब अगले हफ्ते हो सकती है। धारा-370 पर कुल 7 याचिका दायर की गई थी। इसमें से 4 याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट ने कमियां पाईं। सुप्रीम कोर्ट ने आज दो याचिकाओं पर सुनवाई किया। पहली याचिका में धारा-370 हटाए जाने का विरोध किया गया। वहीं दूसरी याचिका में कश्मीर में पत्रकारों से सरकार का नियंत्रण हटाने की मांग की गई।

पहली याचिका एमएल शर्मा ने डाली, जिसमें कहा गया है कि सरकार ने आर्टिकल 370 हटाकर मनमानी की है, उसने संसदीय रास्ता नहीं अपनाया, राष्ट्रपति का आदेश असंवैधानिक है। एमल शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजीआई ने फटकार लगाते हुए कहा कि ये किस तरह की याचिका है। मुझे नहीं समझ नहीं आ रही है। उन्होंने पूछा कि याचिकाकर्ता कैसी राहत चाहते हैं।

08-08-2019
370 पर सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार, पूछा- क्या यूएन बदलाव को रोक सकता है

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को कमजोर किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है। इस मामले पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अगली तारीख तय करेंगे और बताएंगे कि ये कब सुना जाएगा। इस दौरान अदालत ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़ा एक सवाल भी पूछा। अदालत ने पूछा कि क्या यूएन हमारे संविधान में किए गए बदलाव पर रोक लगा सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया है और साथ ही अनुच्छेद-370 को कमजोर किया है। मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की गई थी, जिसमें इस फैसले को अंसवैधानिक बताया था।

गुरुवार को जब ये मामला जस्टिस एनवी रमन्ना के सामने आया तो उन्होंने कुछ सवाल पूछे और कह दिया कि वह इस मामले की चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के सामने उठाएंगे. वही इस मामले की लिस्टिंग करेंगे। वकील एमएल शर्मा ने इस दौरान अदालत को बताया कि पाकिस्तान इस मामले को संयुक्त राष्ट्र ले जाना चाहता है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि अगर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में जाता है तो क्या वह भारत के संविधान में हुए बदलाव पर रोक लगा सकता है? इस पर वकील ने कहा है कि ऐसा नहीं है। अदालत में जो याचिका दायर की गई है, उसमें कहा गया है कि सरकार ने धारा 367 में जो संशोधन किया है वह पूरी तरह से असंवैधानिक है। सरकार ने इस मामले में मनमानी की है और असंवैधानिक ढंग से कार्रवाई की है।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804