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01-09-2020
छत्तीसगढ़ के कण-कण में बसे हैं राम, यहां लोगों की जीवन शैली राममय : राज्यपाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कण-कण में राम बसे हैं। यहां के लोगों की जीवन शैली पूरी तरह से राममय हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक की यात्रा में भगवान राम का प्रभाव है। छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता है। यह वह पुण्य भूमि है, जिसे भगवान श्रीराम का सान्निध्य मिला और अनेक पुण्य आत्माओं का भी जन्म हुआ है। अनेक ऋषि-मुनियों का आशीर्वाद प्राप्त है। ये विचार सोमवार को राज्यपाल अनुसुईया उइके ने व्यक्त किए। राज्यपाल ‘‘दक्षिण कोसल में राम कथा की व्याप्ति और प्रभाव’’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबशोध संगोष्ठी में शामिल हुईं। संगोष्ठी गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर, अयोध्या शोध संस्थान, अयोध्या, उत्तर प्रदेश शासन तथा सेंटर फॉर स्टडीज ऑन होलिस्टिक डेवलपमेन्ट रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। 

राज्यपाल ने कहा कि, मुझे बताया गया है कि यह संगोष्ठी ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण तैयार करने की दृष्टि से आयोजित की जा रही है। यह विषय संपूर्ण भारतवासियों ही नहीं पूरे विश्व में हमारी भारतीय संस्कृति के जो उपासक हैं, उन सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं।राज्यपाल ने कहा कि, यहां की भूमि और यहां के लोगों में भगवान श्रीराम का इतना प्रभाव है कि उनकी सुबह राम नाम के अभिवादन से होती है। जब वे किसी से मिलते हैं तो वे एक दूसरे से राम-राम कहकर अभिवादन करते हैं। उनके नाम में भगवान राम का उल्लेख मिलता है। हम यदि गांव में जाएं तो वहां के लोग रामचरित मानस का पाठ करते मिलते हैं और पुण्य लाभ लेते हैं। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में कई रामायण मंडली होती है, जिसके बीच प्रतियोगिता भी होती है। अभी भी कई स्थानों पर रामलीला का मंचन होता है। दशहरे के समय तो यहां की रौनक देखते ही बनती है।

उन्होंने कहा कि, भगवान राम का संपूर्ण जीवन प्रेरणादायी है। उनके जीवन से हमें समन्वयवादी जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा मिलती है। हम छत्तीसगढ़ को देखें तो यहां भी समन्वयवादी संस्कृति मिलती है। यह सब भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है। छत्तीसगढ़वासियों के मन में भगवान राम के प्रति अथाह प्रेम है। यहां एक समुदाय ऐसा भी है, जिसके सदस्य अपने पूरे शरीर में भगवान राम के नाम का गोदना गोदवा लेते हैं। भगवान राम के प्रति ऐसा समर्पण शायद ही कहीं देखने को मिले। इसे रामनामी सम्प्रदाय के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि, हम छत्तीसगढ़ में भगवान राम के प्रति प्रेम भाव की बात करें तो कवर्धा जिले में एक पंचमूखी बुढ़ा महादेव मंदिर का उल्लेख किया जाना चाहिए। जहां पर अनवरत रामधुन गाई जाती है। यही नहीं इस प्रदेश में भगवान श्रीराम इतने गहराई तक समाए हुए हैं कि एक मुसलमान कथा वाचक दाउद खान रामायणी जैसे महापुरूष हुए, जिनमें राम के प्रति इतनी आस्था थी कि आजीवन रामकथा का वाचन करते रहे और उन्हें पूरी रामकथा कंठस्थ थी।

राज्यपाल ने कहा कि, छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है। यह माना जाता है कि रायपुर जिले के चन्द्रखुरी नामक गांव में माता कौशल्या का जन्म हुआ था, इसका प्रमाण है कि वहां माता कौशल्या का एकमात्र मंदिर स्थापित है। इस नाते भगवान राम को पूरे छत्तीसगढ़ का भांजा माना जाता है। इसलिए भांजे को श्रेष्ठ स्थान देने की परम्परा है और उनके पैर भी छुए जाते हैं। छत्तीसगढ़ को दण्डकारण्य भी कहा जाता है, जहां वनवास के दौरान भगवान राम अधिकतम समय व्यतीत किया था, जिस दक्षिण पथ मार्ग से वे लंका विजय के लिए गये उसे हम राम वन गमन पथ के नाम से जानते हैं। राज्य शासन ने इसे विकसित करने की योजना बनाई गई है।

13-08-2020
Video : किन कारणों से संघ प्रमुख माता कौशल्या के जन्मभूमि विवाद पर खामोश रहे : विकास तिवारी 

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता व सचिव विकास तिवारी ने कहा है कि, आगामी दिनों में संघ प्रमुख मोहन भागवत का दो दिवसीय दौरा छत्तीसगढ़ राज्य में है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मभूमि विवाद और मंदिर निर्माण का श्रेय लेने की होड़ में शामिल संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत, कौशल्या माता के जन्मभूमि विवाद पर पिछले बीस सालों से खामोश क्यों थे? जबकि उनका लगातार दौरा छत्तीसगढ़ राज्य और राजधानी रायपुर में होता था। किन कारणों से भगवान राम की माता कौशल्या के जन्मभूमि में स्थित मंदिर गर्भ-गृह में लगे ताले पर संघ प्रमुख खामोश थे? अब जब वह दो दिवसीय प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं, तो कांग्रेस पार्टी उनसे पूछना चाहती है कि, क्या डॉक्टर मोहन भागवत भगवान माता कौशल्या के मंदिर चंदखुरी दर्शन के लिए जाएंगे? क्या वह यह जानने का प्रयास करेंगे कि, किन कारणों से पिछले बीस सालों से कौशल्या माता के मंदिर के गर्भ गृह में ताला लगा कर रखा गया था? इस विषय पर संघ समर्थित पूर्ववर्ती भाजपा की रमन सरकार,छत्तीसगढ़ राज्य की आरएसएस इकाई और विश्व हिंदू परिषद इकाई खामोश क्यों थी? इस बात की जानकारी क्या हुआ लेना उचित समझेंगे? 

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि, लगातार आरएसएस हिंदुत्व और भगवान राम जन्मभूमि विवाद की बात करती है,पर छत्तीसगढ़ राज्य में माता कौशल्या जन्मभूमि विवाद और राम वन गमन को हाशिए में रखे जाने के विषय पर चुप्पी साधे रखती है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह खुद एक स्वयंसेवक हैं। लगातार संघ प्रमुख मोहन भागवत के सतत संपर्क में रहते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि, केंद्र की मोदी सरकार ने रामायण कॉरिडोर योजना की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ राज्य के जगदलपुर शहर मात्र को ही इस परियोजना में शामिल किया गया है। जबकि यह सर्वविदित है कि,छत्तीसगढ़ राज्य पूर्व में कौशल राज्य था। माता कौशल्या का मायका था,भगवान राम का ननिहाल था। इसी कौशल राज्य के विभिन्न स्थानों से गुजर कर,रुक कर भगवान राम,माता सीता और  लक्ष्मण बहुत से स्थानों पर रुके। वनवास का समय व्यतीत किया, जो कि समूचे विश्व के राम भक्तों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है।

05-08-2020
विकास उपाध्याय ने राम मंदिर शिलान्यास के दिन को यादगार बनाने किए विविध आयोजन, रायपुर हुआ राममय

रायपुर। विधायक व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने बुधवार को प्रभु राम के अयोध्या में मंदिर निर्माण की आधारशिला रखे जाने को रायपुर में भी जीवंत बनाए रखने सुबह से कई कार्यक्रम आयोजित किए। माता कौशल्या की इस धरती को राममय बनाने कोई कसर नहीं छोड़ी। श्रीराम के अयोध्या में हुए मंदिर निर्माण की आधारशिला को यादगार बनाए रखने पिछले कई दिनों से दिन रात मेहनत की। राजधानी में एक लाख से भी ज्यादा मिट्टी के दीये वितरण कर आम जनता से अपील की। सभी को कहा कि वे आज अपने घरों में कौशल्या के राम के नाम एक दीया जरूर जलाएं। आज इस अपील का व्यापक असर राजधानी रायपुर में तो देखने को मिली ही, साथ ही पूरे छत्तीसगढ़ में भी लोगों ने कई कार्यक्रम आयोजित किए। शाम को तेज बारिश के बावजूद दिये कि रोशनी से पूरा छत्तीसगढ़ जगमगा उठा। विकास उपाध्याय ने सुबह से ही विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। दूधाधारी मठ से इसकी शुरुआत भजन प्रभात से की। छत्तीसगढ़ में माता कौशल्या के मंदिर से जुड़े वाक्ये पर प्रकाश डालते हुए भजन सम्राट दिलीप षडंगी ने स्वयं रचित जस गीत गाकर सभी का मनमोह लिया। घंटों चले इस कार्यक्रम में विधायक उपाध्याय इस कदर भक्ति भाव में खो गए कि मंच में काफी समय तक थिरकते रहे। यह दर्शकों के लिए कौतूहल का विषय बना रहा। भजन प्रभात में विशेष रूप से महंत रामसुंदर दास पूरे समय उपस्थित थे।
इसके बाद विकास उपाध्याय के निवास पर भगवान राम को स्मरण करने 21 पंडितों से सुंदरकांड का पाठ करा कर प्रसाद वितरण किया। भगवान राम के नारों के साथ सभी से उनके दिखाए मार्ग पर चलने की अपील की। इस मौके पर विशेष रूप से संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज उपस्थित हुए। शाम को पूरे शहर में दीप प्रज्वलित किए गए। विधायक उपाध्याय ने सभी लोगों से मिलकर राम जन्मभूमि में आज मंदिर निर्माण की आधारशिला रखे जाने की बधाई दी। आज के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विशिष्ट लोगों में राज्यसभा सांसद छाया वर्मा,पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर भी उपस्थित हुईं। इसके अलावा प्रशांत ठाकर, तारिक खान गिनी और पंडित वीरेन्द्र शुक्ला भी उपस्थित थे।

 

05-08-2020
Video: एक दीया कौशल्या के राम के नाम

राजनांदगांव। एक ओर जहाँ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे थे वहीं राजनांदगांव के मानव मंदिर चौक में महापौर हेमा देशमुख व अन्य कांग्रेसजनों द्वारा एक दीया कौशल्या के राम के नाम का आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे। महापौर हेमा देशमुख ने ऐतिहासिक रानी सागर में दो घाट, एक सीता घाट जहाँ महिलाओं के लिए व दूसरा राम घाट जो पुरुषों के लिए रहेगा के प्रस्तवित स्थल पर विधि-विधान से पूजा अर्चना कर आज के दिन को ऐतिहासिक बनाने की ओर कदम बढ़ाया।

04-08-2020
विकास उपाध्याय राम मंदिर निर्माण दिवस को यादगार बनाने दूधाधारी मठ में करेंगे भजन,निवास में सुंदरकांड का पाठ

रायपुर। विधायक व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय 5 अगस्त को राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के अवसर को यादगार बनाने,सुबह माता कौशल्या के राम के नाम भजन कीर्तन की शुरुआत दुधाधारी मठ से करेंगे। विधायक उपाध्याय ने आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सुबह 8.30 बजे से शुरू होने वाले कार्यक्रम रात तक चलेंगे। शुरुआत माता कौशल्या के राम के नाम भजन, कीर्तन के साथ दूधाधारी मठ राम मंदिर में कैलाश पूरी से की जाएगी। इसके बाद सुंदरकांड का पाठ विधायक निवास में शाम को किया जाएगा। शाम को पूरे राजधानी में एक-एक घरों में दिया जला कर भगवान श्रीराम का स्वागत किया जाएगा। पूरे कार्यक्रम के दौरान शासन के दिशा-निर्देश का पालन किया जाएगा। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग,मास्क,ग्लब्स और सैनिटाइजर आवश्यक रूप से स्थलों में उपलब्ध रहेंगे।

29-07-2020
माता कौशल्या की सपत्नीक पूजा की भूपेश बघेल ने,मांगा राज्य की खुशहाली का वरदान,चंदखुरी में जल्द बनेगा भव्य मंदिर

रायपुर। राजधानी के समीप माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी में जल्द ही भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज धर्मपत्नी मुक्तेश्वरी बघेल और परिवार के सदस्यों के साथ चंदखुरी पहुंचकर वहां स्थित माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के सौन्दर्यीकरण और परिसर के विकास के लिए तैयार परियोजना की विस्तृत जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार राम वन गमन पथ पर पड़ने वाले महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसकी शुरूआत चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य के बीते 22 दिसम्बर को भूमि-पूजन के साथ कर दी गई है। भव्य मंदिर की निर्माण की कार्ययोजना में परिसर में विद्युतीकरण,तालाब का सौंदर्यीकरण,घाट निर्माण,पार्किंग,परिक्रमा पथ का विकास आदि कार्य शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहां कण-कण में भगवान राम बसे हुए हैं। भगवान राम ने वनवास का बहुत सा समय यहां व्यतीत किए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भगवान राम के वन गमन मार्ग को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित कर रही है ताकि इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सके। बघेल ने कहा कि चंदखुरी में 15 करोड़ की लागत से सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर यहां तालाब के बीच से होकर गुजरने वाले पुल की मजबूती के साथ ही यहां परिक्रमा पथ, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और शौचालय बनाने कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौन्दर्यीकरण कार्य का भूमिपूजन हो गया है यहां अगस्त के तीसरे सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणों की मांग पर मंदिर के पास से बायपास सड़क की स्वीकृति प्रदान करते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। वहीं ग्राम वासियों की सहुलियत को देखते हुए चंदखुरी में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिए है।  बघेल ने इस अवसर पर मंदिर परिसर पर बेल और उनकी धर्मपत्नी ने महुआ का पौधा भी रोपा। इसके साथ ही परिसर में आवंला, पीपल, अमरूद और करंज आदि के पौधे भी लगाए गए। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ.शिव कुमार डहरिया, जनपद पंचायत आरंग के अध्यक्ष खिलेश देवांगन, ग्राम पंचायत चंदखुरी की सरपंच मालती धीवर और कौशल्या माता समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र वर्मा और ग्रामीणजन उपस्थित थे।

गौरतलब है कि त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कोसल एवं दण्डकारण्य के रूप में विख्यात था। प्रभु श्रीराम ने उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश के बाद विभिन्न स्थानों पर चौमासा व्यतीत करते हुए दक्षिण भारत में प्रवेश किया गया था। छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले की गवाई नदी से होकर सीतामढ़ी हरचौका नामक स्थान से प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। इस दौरान उन्होंने 75 स्थलों का भ्रमण करते हुए सुकमा जिले के रामाराम से दक्षिण भारत में प्रवेश किया था। उक्त स्थलों में से 51 स्थल ऐसे है, जहां प्रभु श्रीराम ने भ्रमण के दौरान रूक कर कुछ समय व्यतीत किया था। प्रथम चरण में इनमें से 9 स्थलों को विकसित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पथ का पर्यटन की दृष्टि से विकास की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य में आने वाले पर्यटकों, आगन्तुकों के साथ-साथ देश और राज्य के लोगों को भी राम वन गमन मार्ग व स्थलों से परिचित कराना एवं इन ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के दौरान पर्यटकों को उच्च स्तर की सुविधाएं भी उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पर्यटन परिपथ को विकसित करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में 09 स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अम्बिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर), रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। राम वन गमन पर्यटन परिपथ में प्रस्तावित 09 स्थलों को लेते हुए पर्यटन विभाग द्वारा एक कॉन्सेप्ट प्लान तैयार किया गया है, जिसकी लागत 137.45 करोड़ रूपए है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ हेतु राज्य शासन द्वारा गत वर्ष (2019-20) राशि 5 करोड़ रूपए और इस वर्ष (2020-21) 10 करोड़ रूपए का प्रावधान बजट में किया गया है। इस तरह कुल राशि रूपए 15 करोड़ राज्य शासन ने स्वीकृति दी ।

02-12-2019
भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थान ने डॉ. महेन्द्र ठाकुर को किया सम्मानित

रायपुर। हाल ही में वाराणसी उत्तर प्रदेश में भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थान द्वारा ज्योतिष शास्त्रार्थ विमर्श विषय पर सम्मेलन का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन में माता कौशल्या ज्योतिष साहित्य संस्कृति पीठ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र कुमार ठाकुर को वाराणसी के राजीव रंजन विभागाध्यक्ष सदानंद शुक्ल, वेदमूर्ति, नंदिता शास्त्री व निर्देशक डॉ. पुरुषोत्तम गुप्ता की उपस्थिति में सम्मानित किया गया। यह जानकारी देते हुए डॉ. ठाकुर ने बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायपुर में चन्दखुरी स्थित माता कौशल्या की जन्मस्थली एवं महर्षि वाल्मीकि आश्रम तुरतुरिया राम वन गमन पथ से जुड़े शिवरीनारायण क्षेत्र के आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व की जानकारी सम्मेलन में उपस्थित प्रबुद्धों को दी। उक्त सम्मेलन में डॉ. ठाकुर को ज्योतिष शास्त्रार्थ रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया एवं डॉ. महेन्द्र ठाकुर को अखिल भारतीय सर्वाेच्च ज्योतिष मार्गदर्शन मंडल वाराणसी की मानद सदस्यता प्रदान की गई।

 

27-11-2019
राम वन गमन पथ के महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा: उमेश पटेल  

रायपुर। उच्च शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल ने खरसिया विकासखण्ड के कांटाहरदी में आंगनबाड़ी भवन एवं शेड निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम की माता कौशल्या की जन्मभूमि रही है। प्राचीनकाल में यह दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कहा कि शासन ने यह निर्णय लिया है कि भगवान श्रीराम अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान जिन रास्तों से गुजरे थे, उन महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विस्तारित एवं विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रायगढ़ जिले का राम झरना एवं गेरवानी का लक्ष्मण पादुका स्थान राम वन गमन पथ के लिए शासन के प्रस्ताव में पहले से ही शामिल है।

पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह स्पष्ट कह दिया है कि शासन की प्रतिबद्धता है कि 2500 रुपये समर्थन मूल्य में धान खरीदी की जाएगी। राशन नवीनीकरण के बाद कार्डधारियों को 35 किलो चावल मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिनके नाम छूट गए है, उनका नाम राशन कार्ड में जुड़ सकता है। उन्होंने आंगनबाड़ी एवं शेड निर्माण की मांग पूरी होने पर ग्रामवासियों को बधाई दी। उच्च शिक्षा मंत्री ने ग्राम बालमगोड़ा में उचित मूल्य दुकान सह गोदाम, सीसी रोड का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष निराकार पटेल, ग्राम कांटाहरदी के सरपंच आशा यादव एवं उप सरपंच राधेलाल सिदार उपस्थित थे।

16-11-2019
माता कौशल्या की जन्मतिथि बताने वाले को मिलेगा इनाम

रायपुर। छत्तीसगढ़ जिसे पुरातनकाल से ही दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता रहा है। रामचरित मानस व वाल्मिकी रामायण में भी कौशल प्रदेश का उल्लेख मिलता है। माता कौशल्या इसी कौशल प्रदेश (छत्तीसगढ़) की राजकुमारी थीं। वे पिता भानुमंत व माता सुबाला/अमृतप्रभा की पुत्री थीं। राजकुमारी कौशल्या को अयोध्या के राजकुमार दशरथ की अग्रमहिषी तथा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की माता होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वाल्मीकि रामायण, आनन्द रामायण, आध्यात्म रामायण, गुणभद्रकृत उत्तर पुराण सहित बलदेव प्रसाद मिश्र, मैथलीशरण गुप्त आदि के काव्यों में कौशल्या माता की कथाओं का वर्णन है। छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी रायपुर से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर चंदखुरी (प्राचीन नाम चंद्रपुरी) गांव है। इसे माता कौशल्या की जन्म स्थली माना जाता है। यहां माता कौशल्या का मंदिर भी है। यह मंदिर दुर्लभतम है, जैसे पूरे देश में पुष्कर में ब्रह्मा का तथा कोणार्क में सूर्यदेव का एक मात्र मंदिर है। ठीक वैसे ही रायपुर के चंदखुरी में माता कौशल्या का एक मात्र मंदिर स्थित है। करीब 126 तालाब वाले इस गांव में सात तालाबों से घिरे जलसेन तालाब के बीच प्राचीन द्वीप पर यह मंदिर है, जहां भगवान श्रीरामचन्द्र की माता कौशल्या की प्रतिमा स्थापित है और रामलला उनकी गोद में विराजमान हैं। प्राप्त प्रमाण, पुरातत्व की खुदाई,प्राचीन ग्रन्थों,जनश्रुति, क्षेत्रीय दंतकथाओं आदि के अलावा ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले समस्त विद्वानों को तत्सम्बन्ध में समस्त जानकारियों व ज्योतिष गणना आदि के द्वारा भगवान रामचन्द्र की कुंडली के चतुर्थ भाव के आधार पर माता कौशल्या की जन्मतिथि के निर्धारण एवं जन्मकुंडली तैयार किए जाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
विद्वानों से प्राप्त प्रस्ताव को चयनित विशेषज्ञ जजों (जूरी) द्वारा प्रमाणित किया जाएगा। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्वान को नगद राशि 11 लाख रुपए तथा विशेष सम्मान पत्र प्रदान किया जायेगा।

 

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