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18-02-2020
डीईओ सतीश पांडेय बने कोरबा डाइट के प्राचार्य, आरपी आदित्य होंगे नए डीईओ

कोरबा। स्कूल शिक्षा विभाग में बंपर तबादले हुए हैं। 5 डीईओ सहित 16 अधिकारियों के ट्रांसफर आर्डर जारी हुए हैं। लिस्ट में राजनांदगांव, कोरबा, बिलासपुर के डीईओ के ट्रांसफर किए गए हैं। संयुक्त संचालक और उप संचालक से भी ट्रांसफर किए गए हैं। डीईओ सतीश पांडेय को डाइट का प्राचार्य बनाया गया है। वहीं नए डीईओ का दायित्व आरपी आदित्य को दिया गया।

 

17-02-2020
आगामी शिक्षा सत्र से प्रदेश के बड़े शहरों में खुलेंगे शासकीय अंग्रेजी माध्यम के स्कूल 

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। मुख्यमंत्री का सपना है कि राज्य के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। मुख्यमंत्री द्वारा पिछले कुछ दिनों में शिक्षा से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है। राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि सभी बड़े शहरों में अंग्रेजी माध्यम के उत्कृष्ट स्कूल आगामी शिक्षा सत्र से प्रारंभ की जाए। उन स्कूलों के लिए कोई न्यूनतम संख्या निर्धारित नहीं की गई है, परंतु अपेक्षा यह है कि ऐसे स्कूल अधिक से अधिक संख्या में हो और प्रत्येक जिले में कम से कम एक ऐसा स्कूल हो।

कलेक्टरों से कहा गया है कि इन स्कूलों के लिए नवीन भवन का निर्माण नहीं किया जाना है, बल्कि वर्तमान में संचालित स्कूलों के भवनों में ही यह स्कूल संचालित किए जाने है। इन स्कूलों में कक्षा एक से 12वीं तक की कक्षाएं एक साथ प्रारंभ की जाएगी। डॉ. शुक्ला ने कलेक्टरों को इस संबंध में स्कूलों का चयन कर प्रत्येक स्कूल के सुधार के लिए पूरी योजना बनाकर एक सप्ताह में शासन को अवगत कराने के निर्देश दिए है। कलेक्टरों से योजना को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मांगे गए है।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा द्वारा जिला कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में तत्काल कार्य प्रारंभ किया जाना आवश्यक है, जिससे 15 जून के पहले सभी तैयारियां पूरी हो सके। कलेक्टरों से यह ध्यान रखने कहा गया है कि जिले के बड़े शहरों के स्कूलों का भ्रमण कर, ऐसे स्कूलों का चयन करें जहां पर योजना तुरंत प्रारंभ की जा सकती है। डॉ. शुक्ला ने कहा है कि ऐसे स्कूलों का चयन करें जो शहर के बीच में हो जहां पर वर्तमान दर्ज संख्या कम हो। इसके अतिरिक्त इस बात का ध्यान रखा जाए कि स्कूल के भ्रमण में कक्षा पहली से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए पर्याप्त स्थान के साथ ही पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं के लिए भी पर्याप्त स्थान हो। अच्छा होगा कि स्कूल में पर्याप्त खेल का मैदान भी हो।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने कहा है कि स्कूल का चयन करने के बाद स्कूल के भवन में सुधार के लिए छोटे-छोटे सिविल कार्य कराए जा सकते है। विशेषरूप से शौचालयों को साफ-सुथरा रखने,  प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों को अच्छा करने के लिए भी सिविल कार्यों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। स्कूल का रंग-रोगन भी कराया जा सकता है। कलेक्टरों से कहा गया है कि अनावश्यक सिविल कार्य नहीं कराया जाए, ऐसा कार्य कराया जाए जो मई माह तक पूरे हो जाए। कक्षाओं में अच्छी क्वालिटी का फर्नीचर, प्रयोगशालाओं के लिए आवश्यक उपकरण स्कूल में उपलब्ध कराए जाए। पुस्तकालय में अच्छी क्वालिटी के सेल्फ फर्नीचर तथा सभी विषयों की अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध हो। पुस्तकालय के साथ एक रीडिंग रूम भी हो और उसमें अंग्रेजी के अखबार तथा मैग्जीन भी रखे जाए। खेल मैदान होने पर उसे अच्छा बनाया जाए। कलेक्टरों से कहा गया है कि स्कूलों की कार्ययोजना में होने वाले व्यय को कनवर्जेंस से पूरा करने का प्रयास करें। इसमें डीएमएफएफ, सीएसआर आदि की राशि का उपयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त नगर पालिक निगम, जन-सहयोग से कुछ कार्य किए जा सकते है।

चयनित स्कूलों में उत्कृष्ट प्राचार्यों की पदस्थापना की जाएगी

डॉ. शुक्ला ने बताया कि चयनित स्कूलों में शासन द्वारा उत्कृष्ट प्राचार्यों की पदस्थापना की जाएगी। कलेक्टरों को इस संबंध में चिन्हित स्कूलों की सूची अविलंब भेजने कहा गया है। पत्र में कहा गया है कि स्कूल की योजना बनाने में प्राचार्य का भी सहयोग लिया जाए। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया वर्तमान में प्रचलन में है। चयनित स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के उत्कृष्ठ शिक्षकों की पदस्थापना शीघ्र की जाएगी। हाईस्कूल और हायर सेकण्डरी स्तर पर शिक्षकों की पदस्थापना के लिए सर्वप्रथम जिले में पहले से पदस्थ ऐसे शिक्षकों को खोजे जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्राप्त की हो। इन शिक्षकों को बुलाकर उनका साक्षात्कार कर परीक्षण कर लें कि किन शिक्षकों का उपयोग इन स्कूलों में किया जा सकता है। इसके बाद भी पर्याप्त संख्या में अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक नहीं मिलते है तो सूचित करें। शासन स्तर पर उनकी व्यवस्था के संबंध में निर्णय लिया जा सके।

शिक्षकों की चयन प्रक्रिया अप्रैल माह तक पूर्ण की जाएं

शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया अप्रैल माह के अंत तक पूरी की जानी है। जिससे चयनित शिक्षकों के लिए एक इंडक्शन प्रशिक्षण आगामी क्षत्र के पहले आयोजित किया जा सके।

जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि इन स्कूलों में वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए आस-पास के हिन्दी माध्यम के शासकीय स्कूलों में पढ़ने की व्यवस्था करनी होगी। इस बात का ध्यान रखा जाए कि हिन्दी माध्यम के शासकीय स्कूलों के गुणवत्ता सुधार की योजना में साथ में बनाई जाए, जिससे हिन्दी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चें भी उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त कर सके। इसके लिए आवश्यकतानुसार हिन्दी माध्यम के स्कूलों में भी सिविल कार्य, अच्छी क्वालिटी के फर्नीचर, प्रयोगशालाओं और हिन्दी माध्यम के पुस्तकालयों की पूर्ण व्यवस्था की जाए। इनका सुधार भी जिले की योजना का अभिन्न अंग होना चाहिए।

कलेक्टरों से कहा गया है कि अंगेजी माध्यम में चयनित स्कूलों में विद्यार्थियों की भर्ती के लिए किसी प्रकार की परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाए। कक्षा पहली से तीसरी तक के लिए किसी भी माध्यम से पढ़े हुए बच्चों को भर्ती किया जा सकता है, परंतु इसके बाद की कक्षाओं में उन्हीं बच्चों को भर्ती करना होगा, जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम से इसके पूर्व की शिक्षा प्राप्त की है, जिससे वें कक्षा में पिछड़ न जाए। यदि उपलब्ध सीटों से अधिक संख्या में भर्ती का आवेदन प्राप्त होते है तो पहले आओ पहले पाओ के आधार पर भर्ती की जा सकती है।

15-02-2020
छत्तीसगढ़ के 12 शासकीय स्कूलों में ऑनलाइन क्लास शुरू, कॉन्फ्रेंसिंग टू-वे कम्युनिकेशन से दिया जा रहा होमवर्क

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नई पहल करते हुए जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं है, वहां ऑनलाइन पढ़ाए जाने का नया फॉमूर्ला इजाद किया है। इसमें विभिन्न विषयों के ऑनलाइन वीडियो तैयार किए गए हैं। स्कूलों में जिन विषयों के शिक्षक नहीं है, वहां विषय विशेषज्ञों के माध्यम से पढ़ाई शुरू की गई है। पांच मिनट के वीडियो और लाइव-लेक्चर से पढ़ाई के बाद ऑनलाइन होमवर्क भी दिया जाता है। पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 12 शासकीय स्कूलों में इसकी शुरुआत 10 फरवरी से हो चुकी है। इसमें सभी विषयों की ई-कक्षाएं उपलब्ध है। आने वाले समय में इसी योजना से करीब एक हजार स्कूलों को लाभांन्वित करने का लक्ष्य है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कम्युनिकेशन के माध्यम से दोपहर 12 बजे विशेषज्ञ ऑनलाइन होते हैं। पहले पाठ से संबंधित वीडियो प्ले किया जाता है, फिर 20 मिनट के लेक्चर के बाद बच्चों के मन में जो प्रश्न होते हैं वे रियल टाइम पर अपने सवाल करते हैं। शिक्षक उनके प्रश्नों का उत्तर देते हैं। बच्चों को पढ़ाई ठीक से समझ में आ रही है या नहीं यह जानने के लिए जूम एप पर कॉन्फ्रेंसिंग टू-वे कम्युनिकेशन से बच्चों को होमवर्क भी दिया जाता है।

अधिकारियों ने बताया कि चयनित स्कूलों में सिर्फ वाई-फाई कनेक्टिविटी के खर्च पर बच्चों को एलसीडी, प्रोजेक्टर, लैपटॉप या मोबाइल पर कनेक्ट करके लाइव (जीवंत) पढ़ाई कराई जा रही है। योजना के पीछे विभाग का उद्देश्य वंचित स्कूलों के बच्चों की ई-क्लास लगवाकर उनकी अधिगम प्रक्रिया सुनिश्चित करना और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए तैयार करना है। प्रदेश के जिन स्कूलों में विशेष विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है, वहां की समस्या को दूर करने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र नवा रायपुर के माध्यम से शून्य बजट में दो जुगाड़ स्टूडियो बनाए गए है। यहां विषय विशेषज्ञ पहले तो अपनी विषय वस्तु का वीडियो शूट करवाते है और फिर उसका रिव्यू कर उसे राज्य के यू-ट्यूब चैनल डीइएल छत्तीसगढ़ पर अपलोड किया जाता है। विद्यार्थी इसे देखते है और समझ के आधार पर दिए गए कार्य को हल भी करते है। पॉयलेट प्रोजेक्ट में जिन 12 स्कूलों को चयनित किया गया है, उनमें चाम्पा, खरोरा, बेमेतरा, सेल, कोमाखान, बालोद, मुंगेली, खौना, सांकरा, नवापारा ( 2 स्कूल), बरना स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में से प्रत्येक स्कूल में एक समन्वयक नियुक्त किया गया है। जो बच्चों को वीडियो दिखाकर और ऑनलाइन क्लास के दौरान तकनीकी सहायक के रूप में उपस्थित रहते हैं।

07-02-2020
200 से अधिक स्कूलों में एनिमेशन के जरिए पढ़ेंगे बच्चे

रायपुर। राज्य के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शालाओं के बच्चों में एनिमेशन के प्रति रूचि को देखते हुए अब उन्हें इसी पैटर्न पर पढ़ने नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जटिल टॉपिक को रूचिकर बनाने के लिए जिज्ञासा परियोजना अंतर्गत कम्प्यूटर और मोबाइल के माध्यम से एनिमेशन से कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को शिक्षा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। जिज्ञासा परियोजना के तहत चिन्हांकित स्कूलों में मनोरंजन के साथ-साथ पढ़ाई के लिए पाठ्यक्रम पर केन्द्रित अलग-अलग गेम बनाए गए हैं, जो एनिमेशन आधारित हैं। जिज्ञासा परियोजना में राज्य के 200 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों का चिन्हांकन किया गया है। इस परियोजना के तहत चयनित किए गए स्कूलों के बच्चों को एनिमेशन से पढ़ाया जाएगा। खेल-खेल में बच्चों को गतिविधियां सिखाई जाएगी। डिजिटल पैटर्न पर तैयार किए गए खेल ग्रामीण परिवेश में हैं, बच्चे टाईपिंग करना और माउस चलाना सीखेंगे। उद्देश्य है कि बच्चे कम्प्यूटर फ्रैण्डली बने। जिज्ञासा परियोजना अंतर्गत रायपुर जिले के 90 स्कूलों के 140 प्रधानपाठक और संकुल समन्वयकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में डिजिटल माध्यम से शिक्षण के विधिओं को बताया और समझाया गया।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि जिज्ञासा परियोजना के तहत जिला रायपुर में 90, दुर्ग में 100 और राजनांदगांव में 10 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक चयनित की गई है। कक्षा पहली से आठवीं तक प्रारंभिक स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए यह परियोजना संचालित की जा रही है। परियोजना के माध्यम से डिजिटल शिक्षण विधियां बतायी जाएगी। वोडाफोन-आइडिया के कापोर्रेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत संस्था आईपीई ग्लाबल सेंटर फॉर नॉलेज एडं डेव्हलपमेंट द्वारा यह कार्यक्रम तैयार किया गया है। शिक्षकों की शिक्षण विधि और कौशल में डिजिटल माध्यम में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर गुणात्मक सुधार लाना इसका मुख्य उद्देश्य है। परियोजना के तहत शिक्षकों और विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता विकास के माध्यम से स्कूलों में शिक्षण प्रक्रिया में सुधार लाना, एक मेंटरशिप मॉडल के माध्यम से मजबूत राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रम विकसित करना है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों की क्षमताओं को समृद्ध करना उनका मुख्य उद्देश्य है।

07-02-2020
रचनात्मक और सृजनात्मक प्रवृत्तियों से बनेगा प्रगतिशील समाज : डॉ. प्रेमसाय सिंह  

रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक और सृजनात्मक प्रवृत्तियों का विकास करने के लिए शिक्षकों को मंच प्रदान करना सराहनीय पहल है। डॉ. टेकाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने और बिना किसी लागत के नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन अरबिंदो सोसायटी और एचडीएफसी बैंक द्वारा किया गया था। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री ने छत्तीसगढ़ में इनोवेशन हैंडबुक नामक नवीन शिक्षा विचारों कीे मैनुअल का विमोचन किया और इस पुस्तिका में योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों, शिक्षाविदों और नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि एक सशक्त और प्रगतिशील समाज के निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। हमें उनके प्रयासों को स्वीकार करने के साथ ही उन्हें लगातार समर्थन और बढ़ावा देना चाहिए। ऐसे प्रयासो से न केवल हम अपने समाज को आगे बढ़ाते है, बल्कि भावी पीढ़ी को भी सशक्त और प्रगतिशील बनाने की दिशा में कार्य करते हैं। उन्होनें इस आयोजन के लिए अरबिंदो सोसायटी और एचडीएफसी बैंक की सराहना की।

इनोवेशन हैंडबुक में शिक्षकों को शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शून्य लागत से आयोजित की जाने वाली रचनात्मक और सृजनात्मक गतिविधियों के साथ ही बच्चों में उच्च प्रभाव डालने वाले विचारों को शामिल किया गया हैं। शिक्षकों को बच्चों के साथ इंटरैक्टिव होने और अनुभवनात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई थी। इस प्रदर्शनी में बिना किसी लागत से शिक्षा में नवाचार तथा अभिनव विचारों पर मुख्य फोकस किया गया था। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद  पी.दयानंद और बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। छत्तीसगढ़ में इनोवेशन हैंडबुक एक नवाचार पुस्तिका है, जिसमें शिक्षकों द्वारा स्वयं पढ़ाये गये नवीन शिक्षण विचारों का संकलन है। यह शून्य लागत, उच्च प्रभाव वाले विचार, एचडीएफसी बैंक के-टीचिंग-द-टीचर(3T) प्रोग्राम का हिस्सा है, जो परिवर्तन के तहत तत्कालिन बैंक के एन-सीआर के अंतर्गत आता हैं। यह कार्यक्रम अरबिंदो सोसायटी के साथ साझेदारी में चलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में 3T कार्यक्रम के तहत 29 हजार से भी अधिक स्कूलों में एक लाख साठ हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया हैं। इनोवेशन हैंडबुक से राज्य के 17 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। देश में कार्यक्रम के तहत केन्द्र शासित प्रदेशों सहित 26 राज्यों के 17 लाख से अधिक शिक्षकों के विचार आंमत्रित करने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए स्कूल में चयनित विचारों को लागू करने के लिए प्रशिक्षित किया गया हैं। पूरे देश में इस कार्यक्रम के तहत पूर्व में दो लाख से अधिक सरकारी स्कूलों में एक करोड़ आठ लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभांवित किया है।


 

07-02-2020
राज्य समन्वय समिति की बैठक, शैक्षिक आवश्यकताओं पर हुई चर्चा

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला की अध्यक्षता में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में राज्य समन्वय समिति की बैठक हुई। बैठक में आगामी शिक्षा सत्र के लिए राज्य की शैक्षिक आवश्यकताओं पर विचार कर कार्ययोजना को अंतिम रूप प्रदान किया गया। यह बैठक प्रतिवर्ष खण्डवार क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान एनसीईआरटी भोपाल की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य में आयोजित की जाती है। बैठक में संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद तथा प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा पी.दयानंद, संचालक लोक शिक्षण जितेन्द्र शुक्ला, सचिव माध्यमिक शिक्षा मण्डल वीके गोयल, अतिरिक्त संचालक एससीईआरटी, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण आरएन सिंह, सहायक संचालक समग्र शिक्षा डॉ. एम. सुधीश उपस्थित थे। बैठक में क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल के प्राचार्य नित्यानंद प्रधान और सचिव राज्य समन्वय समिति छत्तीसगढ़ द्वारा आगामी वर्ष के लिए राज्य की शैक्षिक आवश्यकताओं की प्रस्तुति दी गई। बैठक का संयोजन क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल के डॉ. एनसी ओझा और एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के सुशील राठौर ने किया।
 

04-02-2020
प्रदेश में शिक्षकों को अंग्रेजी सिखाने चलेगा कैम्पेन 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को अंग्रेजी सिखाने के लिए विशेष अभियान चलेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा माह अप्रेल में उत्साही शिक्षकों के लिये अंग्रेजी में बोलने संबंधी कक्षाओं का आयोजन किये जाने का निर्णय लिया गया है। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला द्वारा इस कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक प्रतिभागियों को तत्काल अपना नाम लिंक में भेजते हुए तैयारी करना शुरू करने कहा है। राज्य में माह अप्रेल में एक हजार इच्छुक शिक्षकों को अंग्रेजी सिखाने के लिए कैम्पेन का आयोजन किया जाएगा।
   

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस कैम्पेन के लिए कुछ रोचक नियम बनाए गए हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं होगी- जिसमें केवल इच्छुक विद्यार्थियों को विभिन्न बैचेस में आमंत्रित किया जाएगा। कक्षा के भीतर एवं बाहर केवल अंग्रेजी में ही बात करनी होगी। गलत बोलने पर उनका मजाक न उड़ाकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। स्रोत व्यक्तियों द्वारा कोई भाषण अदि न देकर केवल गतिविधियाँ होंगी। गतिविधियों को इस प्रकार से डिजाइन किया जाएगा कि सभी शिक्षक अपनी सतत सहभागिता दे सके। अधिकारियों ने बताया कि तीन-चार दिवसीय कैम्प में मुख्य रूप से समय सारिणी भी तैयार की गई है। इसमें शिक्षकों को प्रोत्साहन करने के लिए व्याख्यान, बोलना शुरू करने के लिए हिचकिचाहट दूर करने की गतिविधियां (आइस-ब्रेकर), अंग्रेजी भाषा में फिल्मों को पहले हिन्दी एवं अंग्रेजी टायटल के साथ, उनसे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर समूह चर्चा का आयोजन-प्रस्तुतीकरण, प्रत्येक सत्र के लिए गार्जियन एंजल चुनकर रोचक तरीकों से सत्र का प्रतिवेदन साझा करना, अंतिम दिन अंग्रेजी में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यकर्मों का आयोजन, विभिन्न कोचिंग संस्थाओं एवं विशेषज्ञों से सहयोग लेकर रूपरेखा तैयार की जाएंगी।

31-01-2020
सुकमा में शिक्षक सीखेंगे स्पोकन इंग्लिश, सरकारी स्कूलों में होगी इंग्लिश मीडियम में पढाई

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा है कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद में एक हजार शिक्षकों को स्पोकन इंग्लिश का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। आगामी शिक्षा सत्र 2020-21 से कक्षा पहली से बारहवीं तक जिला मुख्यालय सुकमा में इंग्लिश मीडियम स्कूल का संचालन किया जाएगा। डॉ. शुक्ला ने जिला मुख्यालय सुकमा के सभाकक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग के काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान प्राथमिक शाला पावारास ईजीएल क्लास का अवलोकन किया और बच्चों से चर्चा की। बैठक में कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक उपस्थित थे।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने कहा कि स्कूलों में प्रत्येक सोमवार को संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया जाए और बच्चों से इस संबंध में कम से कम 5 प्रश्न पूछे जाए। उन्होंने कहा कि संकुल स्तर पर बच्चों को पठन-पाठन का मूल्यांकन माताएं करेंगी। संकुल, विकासखण्ड स्तर और जिला स्तर पर स्कूलों को सम्मानित किया जाएगा। कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों को पाठ्यक्रम स्थानीय बोली, भाषा द्विभाषा में अनुवाद सिखाने के लिए वीडियो के माध्यम से पढ़ाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल में शैक्षणिक वातावरण निर्माण के लिए उचित होगा कि शिक्षक कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों से स्थानीय बोली-भाषा में बात करें। संकुल स्तर पर स्थानीय बोली गोण्डी, हल्बी, दोरली, ध्रूरवा बोली के प्रशिक्षण का आयोजन किया जाए। स्कूल अंतर्गत बोली भाषा बोलने वाले का सर्वे कर उसकी जानकारी संकिलित की जाए। बच्चों को रोचक ढंग से शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर यूट्यूब के माध्यम से भी शिक्षा दी जाए। उन्होंने कहा कि भाषा ज्ञान के लिए अप्रैल माह से पठन विषय पर विशेष कक्षा संचालित की जाए।

24-01-2020
प्रदेश के शैक्षणिक संस्थाओं में होगी संविधान पर चर्चा, स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश

रायपुर। प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थाओं में अब हर सोमवार को प्रार्थना के बाद संविधान से संबंधित विभन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए प्रदेश के सभी संभाग के आयुक्त और जिला कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जारी निर्देश के अनुसार माह के प्रथम सप्ताह में संविधान की प्रस्तावना पर चर्चा होगी, वहीं दूसरे सप्ताह में संविधान में उल्लेखित मौलिक अधिकार, तीसरे सप्ताह में मौलिक कर्तव्य और चौथे सप्ताह में राज्य के नीति निदेशक तत्व पर चर्चा आयोजित की जाएगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन संविधान दिवस के अवसर पर यह घोषणा की थी कि प्रदेश के शैक्षणिक संस्थाओं में छात्र-छात्राओं को संविधान की जानकारी देने के लिए प्रत्येक सोमवार को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि बच्चों को इसकी समुचित जानकारी हो सके।

20-01-2020
मेयर इन कौंसिल का गठन, कार्य ठीक से नहीं होने पर 6 माह में हटाया जाएगा : एजाज ढेबर 

रायपुर। महापौर एजाज ढेबर ने आज शाम नगर निगम मुख्यालय में अपनी 14 सदस्यीय मेयर इन कौंसिल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो 14 विभाग हमारे पास है और 14 विभाग अभी काम करेंगे। पहली बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि हर 6 माह में सभी विभागों के कामकाजों की समीक्षा होगी और यदि विभागों में ठीक से काम नहीं होगा तो उन्हें 6 माह में हटा भी दिया जाएगा। पूर्व महापौर के कार्यकाल में स्कूल शिक्षा विभाग सरकार के पास जाने पर उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय के दिशा निर्देश हमें प्राप्त हुए हैं, पूर्व में क्यों हटाया गया इसका जवाब पूर्व महापौर देंगे, अभी 14 विभाग है और इसके लिए मेयर इन कौंसिल का गठन किया गया है। महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि हमारी कोशिश है कि नगर निगम के स्कूलों को दिल्ली की तर्ज पर बनाया जाएगा। इसके लिए 24 जनवरी को महापौर, सभापति प्रमोद दुबे, स्मार्ट सिटी के अधिकारी, सीनियर पार्षद दिल्ली के शासकीय स्कूलों का निरीक्षण करने जाएंगे और कोई एक स्कूल को यहां पायलेट प्रोजेक्ट के आधार पर चलाएंगे। उन्होंने कहा कि जैसे एमआईसी का गठन किया गया है, जल्द ही जोन अध्यक्षों की भी नियुक्ति की जाएगी। महापौर ने कहा कि अंतर्राज्यीय बस स्टैंड के लिए भी उच्च स्तर पर बात चल रही है, जो ट्रस्ट की जमीन का विवाद है उसमें जल्द ही निर्णय होगा और मामला सुलझाकर संचालन शुरू किया जाएगा।

महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि मेयर इन कौंसिल में ज्ञानेश शर्मा को लोक कर्म विभाग, रितेश त्रिपाठी सामान्य प्रशासन एवं विधि विधायी विभाग, श्रीकुमार मेनन नगरीय नियोजन एवं भवन अनुज्ञा,अंजनी विभार राजस्व विभाग ,सतनाम पनाग जल कार्य विभाग,नागभूषण राव यादव खाद्य, लोक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विभाग, अजीत कुकरेजा अग्नि शमन विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग, समीरअख्तर वित्त लेखा एवं अंकेक्षण विभाग, सहदेव व्यवहार गरीबी उप शमन एवं सामाजिक कल्याण विभाग, द्रौपदी हेमंत पटेल महिला एवं बाल विकास विभाग,सुंदर जोगी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग, जितेन्द्र अग्रवाल खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग, सुरेश चन्नावार पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग और आकाश तिवारी संस्कृति, पर्यटन, मनोरंजन एवं विरासत संरक्षण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
 

20-01-2020
Big Breaking : गौरव द्विवेदी को आबकारी और वाणिज्य विभाग का चार्ज, आलोक शुक्ला, सिद्धार्थ कोमल को भी बड़ी जिम्मेदारी

रायपुर। मंत्रालय में सचिव स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल हुए है। राज्य सरकार ने 17 से अधिक आईएएस अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए गए है। आलोक शुक्ला को राज्य शासन ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। आलोक शुक्ला को स्कूल शिक्षा विभाग का प्रमुख सचिव के साथ-साथ माध्यमिक शिक्षा मंडल और व्यापम का सीईओ बनाया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल में सीईओ के पद से गौरव द्विवेदी मुक्त कर आबकारी और वाणिज्य विभाग का पदभार सौंपा गया है वहीं उनके अन्य विभाग यथावत रहेंगे। सिद्धार्थ परदेशी को भी बड़ी जिम्मेदारी दी है। उन्हें पीड्ब्ल्यूडी के साथ-साथ सड़क विकास निगम का एमडी बनाया गया है।

एके टोप्पो को समाज कल्याण के सचिव पद से मुक्त कर बिलासपुर रेवन्यू बोर्ड भेजा गया है ।

संगीता पी को सचिव वाणिज्यकर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

अन्बल्गन पी को संस्कृति सचिव विभाग का एडिश्नल प्रभार सौंपा गया है।

प्रसन्ना आर को सचिव सहकारिता, समाज कल्याण एवं प्रद्योगिकी विभाग का सचिव बनाया गया है।

धनंजय देवागन को सचिव कृषि एवं रजिस्ट्रार सहकारी संस्थाएं बनाया गया।

मुकेश बंसल को वर्तमान विभाग यथावत रखते हुए कमिश्नल ट्राइबल बनाया गया है।

सुबोध सिंह को सचिव पीएचई बनाया गया है।

डीडी सिंह को सिकरेट्री जीएडी होंगे।

रीता शांडिल्य को सुबोध सिंह की जगह राजस्व सचिव बनाया गया है।

एस प्रकाश को विशेष सचिव पंचायत बनाया गया है।

समीर विश्नोई चिप्स के सीईओ एवं ज्वाइंट इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी होंगे।

अनुराग पांडेय को सचिव वाणिज्य एवं उद्योग अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

धर्मेंश साहू डायेरक्टर ओडीएफ होंगे।

रमेश कुमार शर्मा को आयुक्त वाणिज्य कर की जिम्मेदारी दी गई है। 

10-01-2020
राज्य स्तरीय कुकिंग स्पर्धा मैं बीजापुर जिले ने मारी बाजी, किया पहले इनाम पर कब्जा

बीजापुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कुकिंग स्पर्धा में बीजापुर जिले के महिला स्व सहायता समूह का भोजन सबसे स्वादिस्ट रहा। स्पर्धा में बीजापुर ने पहला स्थान प्राप्त किया। निर्णायकों के साथ ही बच्चों ने भी भोजन को चखकर बताया। बीजापुर जिले के महिला स्व सहायता समूह को प्रथम स्थान हासिल होने पर विजेताओं को 7 हजार रूपये एवं स्मृति चिन्ह पुरस्कार दिया गया। शिक्षा विभाग द्वारा पहली बार स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले महिला स्व सहायता समूहों के लिए कुकिंग स्पर्धा आयोजित की गई थी। स्पर्धा ब्लाक स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर हुई। इसमें 7 एवं 8 जनवरी 2020 को जेआर दानी शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या शाला कालीबाड़ी चौक रायपुर में आयोजित स्पर्धा में राज्य के 26 जिलों के 52 स्व सहायता समूहों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता दो चरणों में हुई,जिसमें प्रथम चरण में सभी प्रतिभागियों को अपनी पसंद का व्यंजन बनाना था। इसमें खास बात यह रही कि इसमें प्राथमिक स्कूल के 10 बच्चों के लिए भोजन बनाया गया था। इसमें लागत उतनी ही लगाई थी,जितनी मध्यान्ह भोजन योजना के तहत राज्य शासन से उपलब्ध कराई जाती है। प्रथम चरण में 52 टीमों में से 16 टीमों को द्वितीय चरण के लिए चयनित किया गया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन 16 टीमों के मध्य पुनः प्रतियोगिता हुई। इसमें सभी प्रतिभागियों को एक ही व्यंजन बनाने का टाॅस्क दिया गया था। इसमें बीजापुर जिले के महिला स्व सहायता समूह द्वारा सबसे स्वादिष्ट एवं गुणवत्तायुक्त बनाकर प्रथम स्थान हासिल किया।

 

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