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30-01-2020
मुस्लिम महिला नमाज के लिए मस्जिद में प्रवेश के लिए स्वतंत्र : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों की तरह ही नमाज के लिए मस्जिदों में प्रवेश की अनुमति होती है। पीठ अनेक धर्मों में व केरल के सबरीमला मंदिर समेत धर्मस्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से संबंधित कानूनी और संवैधानिक मुद्दों पर विचार कर रही है। सचिव मो.फजलुर्रहीम ने वकील एमआर शमशाद के माध्यम से दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि धार्मिक पाठों, शिक्षाओं और इस्लाम के अनुयायियों की धार्मिक आस्थाओं पर विचार करते हुए यह बात कही जा रही है कि मस्जिद के भीतर नमाज अदा करने के लिए महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश की अनुमति है, इसलिए कोई मुस्लिम महिला नमाज के लिए मस्जिद में प्रवेश के लिए स्वतंत्र है। इसमें कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं को अलग स्थान दिया गया है क्योंकि इस्लाम की शिक्षाओं के अनुसार उन्हें मस्जिद या घर पर जहां चाहें वहां नमाज पढ़ने पर उतना ही धार्मिक पुण्य मिलेगा। 

12-12-2019
अयोध्या मामला पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिकाएं

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं। बता दें कि 9 नवंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया था। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इन पुनर्विचार याचिकाओं पर चैंबर में विचार किया। पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति धनंजय चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना शामिल थे। फैसला सुनाने वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई चूंकि अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उनके स्थान पर संविधान पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को शामिल किया गया है।
न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई कार्यसूची के अनुसार संविधान पीठ चैंबर में कुल 18 पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार किया। इनमें से नौ याचिकायें तो इस मामले के नौ पक्षकारों की हैं जबकि शेष पुनर्विचार याचिकायें तीसरे पक्ष ने दायर की। इस मामले में सबसे पहले दो दिसंबर को पहली पुनर्विचार याचिका मूल वादी एम.सिदि्दक के कानूनी वारिस मौलाना सैयद अशहद रशिदी ने दायर की थी। इसके बाद 6 दिसंबर को मौलाना मुफ्ती हसबुल्ला, मोहम्मद उमर, मौलाना महफूजुर रहमान, हाजी महबूब और मिसबाहुद्दीन ने दायर कीं। इन सभी पुनर्विचार याचिकाओं को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन प्राप्त है। 

 

02-12-2019
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट नहीं, पुनर्विचार याचिका दायर

नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अयोध्या केस में सुनाए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। यह याचिका मौलाना सैयद अशद रशीदी की ओर से दायर की गई है, जो अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के 10 याचिकाकतार्ओं में से एक हैं। यह पुनर्विचार याचिका इस विवाद में मूल वादकारियों में शामिल एम. सिद्दीक के कानूनी वारिस मौलाना सैयद अशद रशीदी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि फैसला त्रुटिपूर्ण है और इस पर संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत पुनर्विचार की जरूरत है। पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को राहत के मामले में संतुलन बनाने का प्रयास किया है, हिंदू पक्षकारों की अवैधताओं को माफ किया गया है और मुस्लिम पक्षकारों को वैकल्पिक रूप में पांच एकड़ भूमि का आबंटन किया गया है जिसका अनुरोध किसी भी मुस्लिम पक्षकार ने नहीं किया था।

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम आज सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर नहीं कर रहे हैं। हमने समीक्षा याचिका तैयार की है और हम इसे 9 दिसंबर से पहले किसी भी दिन दायर कर सकते हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अयोध्या मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका की बात करने वाले लोग बिखराव और टकराव का माहौल पैदा करने की कोशिश में हैं लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या का मुद्दा अब खत्म हो गया है और इसे अब उलझाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए क्योंकि देश की शीर्ष अदालत ने सर्वसम्मति के फैसले में इस मामले को हल कर दिया है।

17-11-2019
अयोध्या मामला : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू दाखिल कर सकते है मुस्लिम पक्षकार, अंतिम फैसला आज

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दाखिल किए जाने की उम्मीद बढ़ गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बुलावे पर शनिवार को नदवा पहुंचे मुस्लिम पक्षकारों ने रिव्यू दाखिल करने के बोर्ड के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की रविवार को होने वाली बैठक के बाद इसका एलान हो सकता है। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय की सर्वोच्च संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में रविवार को नदवा में कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक होने जा रही है। इसमें फैसले के खिलाफ रिव्यू दाखिल करने समेत अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

बोर्ड के पदाधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद की पैरोकारी कर रहे मुस्लिम पक्षकारों को शनिवार को नदवा बुलाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर विचार-विमर्श किया। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस पर असहमति जताते हुए रिव्यू दाखिल करने की घोषणा की थी। बोर्ड का मानना रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कहीं न कहीं आस्था की बुनियाद पर आधारित है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के तमाम साक्ष्यों का संज्ञान लेकर मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण न होने की बात स्वीकार की लेकिन अपने फैसले में कहीं न कहीं साक्ष्यों की जगह आस्था को तरजीह दी। बोर्ड मानता है कि रिव्यू दाखिल करना कानूनी प्रक्रिया होने के साथ ही सांविधानिक अधिकार भी है। मुस्लिम पक्षकारों ने बोर्ड के विचारों पर अपनी सहमति जता दी है। बोर्ड की ओर से मुस्लिम पक्षकारों से महासचिव मौलाना वली रहमानी, सचिव मौलाना उमरैन महफूज रहमानी, जफरयाब जीलानी, मौलाना अतीक बस्तवी ने चर्चा की।  

बोर्ड के सचिव एडवोकेट जफरयाब जीलानी ने बताया कि बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब अली के प्रतिनिधि आजम, स्व. हाजी अब्दुल अहद के बेटे हाजी असद, महफूजुर्रहमान और फारूख के बेटे उमर ने रिव्यू दाखिल करने पर सहमति दे दी है। एक पक्षकार मिजबाहुद्दीन किन्हीं कारणों से नदवा नहीं पहुंच पाए, उन्होंने फोन पर अपनी सहमति दी है। स्व. हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी भी नहीं पहुंच सके। उनसे कहा गया है कि अगर वे सहमत हैं तो रविवार को बोर्ड की बैठक में शामिल हों। सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी को भी बैठक में शामिल होने का न्योता भेजा गया है। जीलानी ने बताया कि पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्यों के सामने पक्षकारों की सहमति पर चर्चा की जाएगी। बैठक में कोर्ट में रिव्यू दाखिल करने को लेकर फैसला किया जाएगा। वकालतनामे पर हस्ताक्षर कराए जाने को लेकर उन्होंने बताया कि महफूजुर्रहमान अपना अधिवक्ता बदलना चाहते थे, इसलिए उनसे वकालतनामे पर हस्ताक्षर करवाया गया है।

09-11-2019
पुनर्विचार याचिका पर मुस्लिम बोर्ड की बैंठक के बाद करेंगे फैसला : जफरयाब जिलानी

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। मुस्लिम पक्ष की ओर से पीसी करते हुए जिलानी ने कहा कि फैसले के बाद शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखें। यह किसी की जीत या हार नहीं है। हम आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे। हालांकि फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने आगे कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कार्यकारी बोर्ड की बैठक के बाद फैसला लिया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या नहीं। हालांकि अभी के आधार पर मुझे लगता है कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जानी चाहिए।

 

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