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14-05-2020
केन्द्र सरकार के आर्थिक पैकेज से देश की अर्थव्यवस्था नई दिशा में आगे बढ़ेगी : विक्रम उसेंडी

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि इस बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पहले चरण में प्रस्तुत विवरण आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करेगा। प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने घोषित आर्थिक पैकेज में सूक्ष्म, मध्यम व लघु कुटीर तथा गृह उद्योगों (एमएसएमई) को संजीवनी प्रदान की है। इस आर्थिक पैकेज से न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा अपितु उत्पादन के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को वैश्विक पहचान मिलेगी और भारत आत्मनिर्भरता के मामले में दुनिया के सामने अपनी मिसाल पेश करेगा।

उसेंडी ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान करके इन उद्योगों के विस्तार का धरातल तैयार किया गया है। मुश्किलों से जूझते लघु व कुटीर उद्योगों के लिए किए गए प्रावधानों से देश के औद्योगिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में इन उद्योगों को बराबरी का अवसर देने के लिए केंद्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए तक के सरकारी टेंडर को गलोबल की श्रेणी से हटाकर एमएसएमई सेक्टर के लिए आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है।

24-03-2020
कोरोना संकट : आयकर रिटर्न की तारीख बढ़कर हुई 30 जून, आधार-पैन लिंक का समय भी बढ़ा

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बड़ा एलान किया है। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की डेडलाइन बढ़ाकर 30 जून 2020 किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी है। इसके साथ ही 30 जून तक डिलेड पेमेंट की ब्याज दर को 12 फीसदी से घटाकर 9 फीसदी किया गया। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि आधार-पैन लिंक कराने की तारीख को भी आगे बढ़ा दिया गया है। अब 30 जून तक करा सकेंगे। पहले इसकी तारीख 31 मार्च थी। बता दें कि देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 500 के करीब पहुंच चुकी है और नौ लोगों की मौत हो चुकी है।

14-03-2020
सरकार ने यस बैंक के पुनर्गठन की योजना को दी मंजूरी, 18 मार्च को हटा दी जाएगी कामकाज की पाबंदियां

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ने पांच मार्च को यस बैंक पर कामकाज पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी थी। इस योजना के तहत निवेश को लेकर अन्य वित्तीय संस्थानों से बातचीत किया जा रहा है। बता दें कि इसमें ग्राहकों के लिए एक माह के दौरान 50,000 रुपए तक निकासी सीमा तय की गई थी। नगदी के संकट से जूझ रहे यस बैंक ग्राहकों को नकदी निकासी पर लगी पाबंदी से जल्दी राहत मिलने वाली है। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, यस बैंक पर लगी रोक 18 मार्च की शाम छह बजे से हटा दी जायेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यस बैंक के रिकंस्ट्रक्शन स्कीम 2020 को जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। साथ ही कहा कि वित्तीय संकट से जूझ रहे यस बैंक से नकद निकासी पर रोक और अन्य पाबंदियों को एसबीआई की राहत पैकेज योजना के अधिसूचित होने के 3 दिन के भीतर हटा लिया जाएगा। यही नहीं उन्होंने बताया कि यस बैंक के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी होने के अगले 7 दिनों के अंदर नए बोर्ड का गठन होगा, जिसमें एसबीआई के 2 डायरेक्टर भी शामिल होंगे।

सीतारमण ने आगे कहा कि इस बीच, निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी ने 1,000-1,000 करोड़ रुपए निवेश की घोषणा की है। इस निवेश से आईसीआईसीआई बैंक की यस बैंक में 5 प्रतिशत से अधिक इक्विटी हिस्सेदारी हो जायेगी। वहीं एक्सिस बैंक 60 करोड़ शेयर खरीदने के लिये 600 करोड़ रुपए निवेश करेगा। इसके अलावा कोटक महिन्द्रा बैंक ने भी 500 करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की है।

21-02-2020
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले मनीष सिसोदिया, राजधानी के लिए की ये मांग

नई दिल्ली। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री शुक्रवार दिन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले। दोनों नेताओं के बीच में काफी देर बैठक चली। मनीष सिसोदिया ने इस बैठक को सकारात्मक बताया। मनीष सिसोदिया ने सीतारमण से मिलने के बाद कहा कि दिल्ली के विकास को लेकर हमारी सकारात्मक बातचीत हुई। मैंने उनसे मांग की कि केंद्रीय करों में दिल्ली की जो हिस्सेदारी है उसे वह हमें दें। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को देखेंगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से केजरीवाल ने बुधवार को की थी मुलाकात
बेहद तल्ख चुनावी जंग जीतकर सत्ता हासिल करने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। गृह मंत्री के कृष्णा मेनन मार्ग स्थित आवास में दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान दिल्ली के विकास से जुड़े मसलों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से वार्ता में कहा कि गृह मंत्री के साथ बैठक काफी सार्थक रही। इसमें दिल्ली के अलग-अलग मुद्दों पर विमर्श हुआ। मोटे तौर पर सहमति बनी कि दिल्ली के विकास के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को मिलकर काम करना चाहिए। इसे दोनों ने स्वीकार किया और मिलकर काम करने का निर्णय लिया। शाहीन बाग से जुड़ा सवाल पूछने पर केजरीवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई।

बाद में अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा कि दिल्ली में अधिकार और जिम्मेदारी का बंटवारा है। दिल्ली देश की राजधानी है और इसके विकास के लिए केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे। महिला सुरक्षा समेत विभिन्न मामलों पर साथ मिलकर काम होगा, ताकि किसी भी तरह के मतभेद से बचा जा सके। उल्लेखनीय है कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली के चुनाव में अपनी-अपनी पार्टी का चेहरा थे। भाजपा व आप की तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ तीखी बयानबाजी हुई थी। इससे चुनावी माहौल काफी तल्ख हो गया था। दिल्ली में सरकार बनने के बाद दोनों की पहली मुलाकात काफी सकारात्मक रही।

 

06-02-2020
चेक वापसी के 40 लाख मुकदमे लंबित, कैट ने कहा, गठित हो फास्ट ट्रैक कोर्ट

रायपुर। कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को आज भेजे गए एक पत्र में कॉन्फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश में  चेक वापसी की संख्या में हो रही तेजी पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है के लिए सबसे महत्वपूर्ण और ज्वलंत मुद्दा बन गया है। इसके चलते देश में हो रहे व्यापार में चेक की साख कम हो गई है, जबकि  देश में चेक बैंकिंग लेनदेन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कैट ने कहा है की चेक वापसी के मामलों में न्यायालयों से न्याय प्राप्त करने के लिए देश में पूरे व्यापारिक समुदाय को बेहद लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से जूझना पड़ता है,लेकिन उसके बाद भी पैसा नहीं मिलता है। कैट ने वित्त मंत्री को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 138 में संशोधन लाने के साथ इस महत्वपूर्ण मुद्दे से प्रभावी रूप से निपटने के लिए एक तत्काल विकल्प के रूप में बाउंस चेक के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का सुझाव दिया है। निर्मला सीतारमण को भेजे पत्र में कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने विधि आयोग की 213वीं रिपोर्ट पर उनका ध्यान आकर्षित किया है,जिसमें कहा गया है कि देश में  लगभग 40 लाख चेक बाउंस के मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायालयों में लंबित मामलों में चेक बाउंस के मामले एक बड़ा हिस्सा है। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए।

 

31-12-2019
अगले 5 साल में 102 लाख करोड़ इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर लाएगी सरकार : निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। अगले 5 साल में इंफ्रास्ट्रक्चर में 102 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पूरे किए जाएंगे, जिसमें से 25 लाख करोड़ रुपए ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च होने हैं। यह बात मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। इस दौरान वित्त सचिव राजीव कुमार और आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती भी मौजूद थे। निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार अपने वादों को लेकर प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने 15 अगस्त को अपने भाषण में कहा था कि अगले पांच सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100 लाख करोड़ निवेश किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने बताया कि इसके लिए गठित टास्क फोर्स ने 102 लाख करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की पहचान की है। वित्त मंत्री ने बताया कि चिह्नित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मॉनीटर करने के लिए नेशनल पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को-ऑर्डिनेशन मेकनिज्म की शुरुआत की जाएगी। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तहत 2.5 लाख करोड़ रुपए पोर्ट और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए हैं, जबकि 3.2 लाख करोड़ रु कोर डिजिटल इंफ्रा प्रोजेक्ट होंगे। इसके अलावा 16 लाख करोड़ रु सिंचाई, ग्रामीण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं के लिए है। साथ ही 16 लाख करोड़ का इंफ्रा प्रोजेक्ट होगा,जिसमें मोबिलिटी के प्रोजेक्ट शामिल है। उन्होंने कहा कि इस नतीजे पर पहुंचने से पहले करीब 70 अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ विस्तृत चर्चा की गई, इसके बाद इन प्रोजेक्ट्स को फाइनल किया गया है। उन्होंने बताया कि चार महीनों में 70 बैठकें हुईं,जिनमें 102 लाख करोड़ रु के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले 6 सालों में सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहा है। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर इनपर 51 लाख करोड़ रु खर्च किए, जो जीडीपी का 5-6 फीसदी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पहचान की गई ढांचागत परियोजनाओं की निगरानी के लिये राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाओं के लिये समन्वय प्रणाली की शुरुआत की जायेगी। केन्द्र, राज्यों ने पिछले छह साल के दौरान बुनियादी परियोजनाओं पर 51 लाख करोड़ रुपये खर्च किये, अगले पांच साल में 100 लाख करोड़ रुपये और निवेश किये जायेंगे। 

26-10-2019
राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे खट्टर

नई दिल्ली। भाजपा विधायक दल की बैठक शनिवार को चंडीगढ़ में होगी, जिसमें खट्टर को फिर से विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पार्टी महासचिव अरुण सिंह बतौर पर्यवेक्षक उपस्थित रहेंगे। इसके बाद भाजपा और जजपा की संयुक्त बैठक भी होगी, जिसमें समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक भी मौजूद रहेंगे। यहां पर सरकार बनाने के लिए खट्टर को नेता चुना जाएगा। विधायक दल की बैठक के बाद खट्टर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। बताया जा रहा है वे शनिवार को ही हरियाणा में सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, जननायक जनता पार्टी (जजपा) के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला भी आज राज्यपाल से करीब 11 बजे मुलाकात करने वाले हैं, जहां वे अपने विधायकों का भाजपा के लिए समर्थन पत्र सौंपेंगे।

भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया जिसने 90 सदस्यीय विधानसभा में 10 सीटें जीती हैं। उप मुख्यमंत्री जजपा से होगा। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जजपा नेता दुष्यंत चौटाला के साथ नई दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा से और उपमुख्यमंत्री क्षेत्रीय दल जजपा से होगा।

किसी पार्टी को नहीं मिला बहुमत, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी

राज्य विधानसभा चुनाव में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, हालांकि भाजपा 40 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। चुनाव नतीजे आने के बाद भारतीय जनता पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े से छह सीट पीछे रह गई। चुनाव में कांग्रेस को 31 सीटों पर जीत मिली है, जबकि जननायक जनता पार्टी को 10 और इंडियन नेशनल लोकदल और हरियाणा लोकहित पार्टी को एक-एक सीट मिली हैं। स्वतंत्र उम्मीदवारों ने सात सीटों पर जीत दर्ज की है।

2014 की तुलना में इस बार कम हुआ मतदान

हरियाणा में सोमवार को 68 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था जो 2014 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में कुछ कम था। उस वर्ष 76.54 प्रतिशत मतदान हुआ था। वर्ष 2014 में भाजपा ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस को 15 सीटें मिली थी। इंडियन नेशनल लोकदल ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी और बहुजन समाज पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल को एक-एक सीट मिली थी। पांच निर्दलीय थे। इस बार 105 महिलाओं समेत 1,169 उम्मीदवार मैदान में थे।

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