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08-09-2020
एलएसी पर रेजांग ला में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने, समझौतों का उल्लंघन, चीन ने की फायरिंग

नई दिल्ली। चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया है। पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे रेजांग ला के पास भारत-चीन सैनिकों के बीच अब भी गतिरोध जारी है। 30-40 चीनी सैनिकों की टुकड़ी वहां मौजूद है। सूत्रों के मुताबिक, तीन दिन से लगातार चीनी सैनिक उन चोटियों पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं,जहां भारतीय सैनिक तैनात हैं। जिस तरह पहले पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-4 में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने थे, उसी तरह अब तनाव का सबसे बड़ा पॉइंट रेजांग ला के पास की चोटियां बन गई हैं।भारत ने कहा है कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने एलएसी पर फिर से उकसावे की कार्रवाई की और द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करते हुए फायरिंग भी की।

यह एलएसी पर गोली नहीं चलाने की वर्षों पुरानी नीति का उल्लंघन है। चीन पेंगोंग लेक के दक्षिणी छोर पर स्थित पहाड़ियों पर कब्जा करना चाहता है। इस कोशिश में उसके सैनिक बार-बार उधर कूच करते हैं, लेकिन भारतीय सेना की किलेबंदी के सामने उनकी एक नहीं चल रही है। 29-30 अगस्त की रात भी चीनी सैनिकों ने यही किया था जिसे भारत की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स ने अच्छी तरह नाकाम कर दिया।दरअसल चीन की दीर्घावधि योजना भारत को अस्थिर करने की है। इसके लिए वो 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव पैदा करता रहता है। उसे लगता है कि इससे भारत की राजनीति में उथल-पुथल मचेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताकतवर छवि को नुकसान पहुंचेगा। इस ख्वाब को पूरा करने के लिए वह अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की मदद ले रहा है जो पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना को उलझाए रखने के लिए नियंत्रण रेखा पर ताबड़तोड़ फायरिंग करता है।

 

 

22-07-2020
राजनाथ सिंह ने कहा, वायुसेना को बदलते वक्त के साथ तकनीक में आ रहे बदलावों को अपनाने की जरूरत 

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख में भारत एवं चीनी सेनाओं के बीच तनाव एवं तैनाती कम करने के प्रयासों की बुधवार को सराहना की और साथ ही भारतीय वायुसेना को आगाह किया कि वह किसी भी विपरीत परिस्थिति के लिए हर क्षण तैयार रहे।रक्षा मंत्री यहां वायुसेना के कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वायुसेना के मुख्यालय वायु भवन में बुधवार को हुए इस सम्मेलन को एयर चीफ मार्शल आरके सिंह भदौरिया ने भी संबोधित किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अपनी संप्रभुता की रक्षा करने का किसी राष्ट्र का संकल्प, उस देश की जनता का सशस्त्र सेनाओं की क्षमता पर विश्वास से मजबूत होता है। उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव घटाने के प्रयासों की सराहना की और साथ ही यह भी कहा कि वायुसेना को किसी भी विपरीत स्थिति का सामना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वायुसेना में आने वाले दिनों में स्वदेशी तकनीक का प्रयोग बढ़ाया जाएगा। रक्षा मंत्री ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ की नियुक्ति और रक्षा उत्पादन प्राधिकरण के गठन के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच तालमेल एवं एकीकरण के क्षेत्र में हुई प्रगति पर भी संतोष व्यक्त किया।रक्षा मंत्री ने कहा कि वायुसेना को बदलते वक्त के साथ तकनीक में आ रहे बदलावों को अविलंब अपनाने की जरूरत है। नैनो तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में क्षमता विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने वायुसेना के कमांडरों को आश्वासन दिया कि सशस्त्र सेनाओं की वित्तीय एवं अन्य हर प्रकार की जरूरतों को पूरा किया जाएगा।वायुसेना प्रमुख ने कमांडरों को संबोधित करते हुए कहा कि वायु सेना अल्पकालिक तथा सामरिक खतरों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और वायुसेना की सभी यूनिट दुश्मन की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने में सक्षम हैं।

 

21-07-2020
एलएसी पर चालबाज चीन पर नजर रखेगा शक्तिशाली ड्रोन 'भारत', रडार पर भी नहीं आएगा पकड़

नई दिल्ली। भारत-चीन में पूर्वी लद्दाख की सीमा पर तनाव की स्थिति लंबे समय से बरकरार है। इस बीच भारतीय सेना को एक ऐसा ड्रोन मिला है, जिससे भविष्य में चीन के गलत मंसूबों पर पानी फिर जाएगा। डीआरडीओ ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में सटीक निगरानी करने के लिए 'भारत' नाम का ड्रोन सेना को दिया है। रक्षा सूत्रों ने कहा, 'भारतीय सेना को पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चल रहे विवाद में सटीक निगरानी के लिए ड्रोन की आवश्यकता थी। इसके लिए, डीआरडीओ ने भारत ड्रोन प्रदान किया है।' भारत ड्रोन का निर्माण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला द्वारा किया गया है। ड्रोन की 'भारत' श्रृंखला को 'विश्व के सबसे चुस्त और हल्के निगरानी ड्रोन' के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता है। यह डीआरडीओ द्वारा भारत में ही बनाया गया है।

डीआरडीओ के सूत्रों ने कहा, 'छोटा, लेकिन अभी तक का शक्तिशाली ड्रोन बड़ी सटीकता के साथ किसी भी स्थान पर काम करता है। अग्रिम रिलीज तकनीक के साथ यूनिबॉडी बायोमिमेटिक डिजाइन निगरानी मिशनों के लिए उपयुक्त है। ड्रोन दुश्मनों का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस है और कार्रवाई कर सकता है।'ड्रोन को अत्यधिक ठंडे मौसम के तापमान में भी काम करने के लिए सक्षम बनाया गया है और इसे आगे के मौसम के लिए विकसित किया जा रहा है। ड्रोन पूरे मिशन के दौरान वीडियो भी देता रहता है। इसके साथ ही रात में यह गहरे जंगलों में छिपे मनुष्यों का पता लगा सकता है। सूत्रों ने कहा कि ड्रोन को इस तरह से बनाया गया है,जिससे रडार को इसे ढूंढना भी असंभव हो जाता है।

 

12-07-2020
ऐसा क्या हुआ कि मोदी राज में चीन ने जमीन छीन ली: राहुल गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को एक बार फिर लद्दाख गतिरोध को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहते चीन ने भारत की जमीन छीन ली। गांधी ने एक ट्वीट के साथ खबर साझा की है, जिसमें एक रक्षा विशेषज्ञ के हवाले से आरोप लगाया गया है कि सरकार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के पीछे हटने को लेकर मीडिया को 'गुमराह' कर रही है और गलवान घाटी में पीछे हटना भारत के लिए हानिकारक है। उन्होंने ट्वीट किया,'ऐसा क्या हुआ कि मोदीजी के रहते भारत माता की पवित्र ज़मीन को चीन ने छीन लिया?' गांधी लद्दाख में गतिरोध को लेकर मोदी और उनकी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भारत की जमीन चीन के 'हवाले' करने का भी आरोप लगाया है।बता दें कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच बीते 8 सप्ताह से पूर्वी लद्दाख में विभिन्न स्थानों पर गतिरोध बना हुआ है। हालांकि, अब सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। 

 

 

06-07-2020
गलवान घाटी में 2 किमी पीछे हटे चीनी सैनिक

नई दिल्ली। भारत चीन सीमा पर एक सप्ताह से चल रहे तनाव के बीच बड़ी खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी सेना गलवान घाटी से 2 किलोमीटर पीछे हट गई है। पूर्वी लद्दाख के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 15 जून की घटना के बाद चाइनीज पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिक उस स्थान से इधर आ गए थे,जो भारत के मुताबिक एलएसी है। भारत ने भी अपनी मौजूदगी को उसी अनुपात में बढ़ाते हुए बंकर और अस्थायी ढांचे तैयार कर लिए थे। दोनों सेनाएं आंखों में आंखें डाले खड़ी थीं।कमांडर स्तर की बातचीत में 30 जून को बनी सहमति के मुताबिक चीनी सैनिक पीछे हटे या नहीं,  इसको लेकर रविवार को एक सर्वे किया गया। अधिकारी ने बताया, चीनी सैनिक हिंसक झड़प वाले स्थान से दो किमी पीछे हट गए हैं। अस्थायी ढांचे दोनों पक्ष हटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बदलवा को जांचने के लिए फिजिकल वेरीफिकेशन भी किया गया है।

वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस गलवान घाटी पर अपना दावा जताकर चीन भारत के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रहा है, उसी गलवान नदी के तट पर अब चीनी सेना की मुश्किलें बढ़ गईंं हैं। गलवान नदी के किनारे चीन की तैनाती नहीं हो पा रही है, क्योंकि नदी का जल स्तर तेज गति से बढ़ने के कारण गलवान के किनारों पर लगे चीनी सेना के कैम्प बह गए हैंं।ड्रोन की तस्वीरों से पता चलता है कि चीनी पीएलए के टेंट गलवान के बर्फीले बढ़ते पानी में पांच किलोमीटर गहराई में बह गए हैंं। काफी तेजी से बर्फ पिघलने के कारण नदी के तट पर इस समय स्थिति खतरनाक है। चीन यहां से पीछे हटने के बाद अधिक से अधिक नई तैनाती करने में जुट गया है लेकिन गलवान, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग झील में मौजूदा स्थिति के चलते चीनी सेना की तैनाती लंबे समय के लिए अस्थिर हो गई है।

27-06-2020
एलएसी पर चीन की हरकतों पर भारत ने किया एयर डिफेंस मिसाइलों को तैनात

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टर्स की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत ने अत्याधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों को पूर्वी लद्दाख में तैनात कर दिया है। यदि चीन के किसी विमान ने एलएसी को पार किया तो इन मिसाइलों के जरिए उन्हें हवा में ही ध्वस्त किया जा सकता है।सरकारी सूत्रों ने बताया,'सीमा पर मौजूदगी और ताकत को बढ़ाने के क्रम में भारतीय सेना और इंडियन एयरफोर्स ने एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात कर दिया है, ताकि पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के लड़ाकू विमान या हेलीकॉप्टर्स यदि कोई दुस्साहस करते हैं तो उनको ध्वस्त किया जा सके।'
सूत्रों ने बताया कि भारत को जल्द ही एक मित्र देश से बेहद शक्तिशाली एयर डिफेंस सिस्टम मिलने जा रहा है, जिसे तैनात किया जा सकता है और इससे पूरे इलाके की रक्षा होगी। दुश्मन के किसी विमान को रोका जा सकता है।  
सूत्रों ने बताया कि चीन के हेलीकॉप्टर्स एलएसी के बेहद करीब उड़ रहे हैं।

मौजूदा तनाव वाले सभी स्थानों पर चीनी विमान उड़ रहे हैं, जिनमें दब सेक्टर नॉर्थ (दौलत बेग ओल्डी सेक्टर), गलवान घाटी, पेट्रोलिंग पॉइंट 14, 15, 17 और 17 ए के अलावा पैंगोंग त्सो फिंगर 3 इलाके के नजदीक उड़ रहे हैं।भारत के बेहद तेज एयर डिफेंस मिसाइलों में आकाश मिसाइल भी शामिल है,जो बेहद तेज गति से उड़ रहे लड़ाकू विमानों और ड्रोन को भी कुछ ही सेकंड में मारकर जमीन पर गिरा सकता है। मोडिफिकेशन के बाद इसे पहाड़ों पर तैनाती के लिए तैयार किया जा चुका है।पूर्वी लद्दाख में भारत के लड़ाकू विमान भी गरज रहे हैं। आसपास के एयरबेस से उड़ान भरने वाले ये लड़ाकू विमान हथियारों से पूरी तरह लोड होते हैं और जरूरत पड़ने पर बिना वक्त गंवाए अपने मिशन को अंजाम दे सकते हैं। भारत का सर्विलांस सिस्टम दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। 

26-06-2020
पूर्वी लद्दाख में थल और वायु सेना ने किया युद्धाभ्यास, सुखोई और चिनूक ने भरी उड़ान

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने चीन के साथ जारी सीमा विवाद और तनाव के बीच लेह में युद्धाभ्यास किया। लेह में भारतीय थल सेना और वायुसेना ने साझा युद्धाभ्यास किया। इस युद्धाभ्यास में फाइटर और ट्रांसपोर्ट विमान शामिल हुए। युद्धाभ्यास का मकसद दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना था। इस युद्धाभ्यास में सुखोई लड़ाकू विमान और चिनूक हेलिकॉप्टर शामिल हैं।रिपोर्ट के अनुसार लद्दाख के लेह क्षेत्र में भारतीय सेना और वायुसेना का युद्धाभ्यास चल रहा है। इसमें भारतीय सेना के सुखोई-30 एमकेआई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं।

साथ ही सेना की रसद सामग्री और सिपाहियों को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए हरक्यूलिस और अलग-अलग मालवाहक विमान भी हिस्सा ले रहे हैं।भारतीय सेना को मालूम है कि वर्तमान गतिरोध के कारण लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर रक्षा कवच को कम नहीं किया जा सकता है। अभी भी चीन गलवान घाटी, पैंगॉन्ग झील और दौलत बेग ओल्डी इलाके में चीनी सेना की तैनाती पहले जैसी बनी है। ऐसे में भारत किसी स्तर पर अपनी तैनाती को कम नहीं रखना चाहता है। 

26-06-2020
पूर्वी लद्दाख के दौरे से लौटे सेना प्रमुख ने की रक्षा मंत्री से मुलाकात, दी स्थिति की जानकारी

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच चले आ रहे सैन्य गतिरोध के बीच जमीनी हालात का जायजा लेने के बाद वहां से लौटे सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने शुक्रवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को ताजा स्थिति की जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार जनरल नरवणे ने सिंह को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले दिनों के घटनाक्रम वहां की गतिविधियों और सेना की तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बता दें कि राजनाथ सिंह भी रूस दौरे से वापस आये हैं,जहां उन्होंने रूसी नेतृत्व के साथ विभिन्न मुद्दों पर द्विपक्षीय बैठक की और द्वितीय विश्व युद्ध के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित विक्टरी परेड में हिस्सा लिया। लद्दाख के दो दिन के दौरे पर गए जनरल नरवणे ने अस्पताल जाकर गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के दौरान घायल हुए सैनिकों से मुलाकात की। उन्होंने चीनी सैनिकों के साथ 15 जून की रात गलवान में दो-दो हाथ करने वाले सैनिकों को सम्मान पत्र भी दिया। इस झड़प में सेना के एक कर्नल सहित सेना के 20 सैनिक शहीद हो गये थे। झड़प में चीनी सेना के भी कई सैनिक हताहत हुए थे। 

 

22-06-2020
सेना प्रमुख नरवणे करेंगे लेह, कश्मीर का दौरा,एलएसी पर करेंगे तैनातियों की समीक्षा

नई दिल्ली। सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवने जमीनी हालात का जायजा लेने इस सप्ताह लेह और कश्मीर का दौरा करेंगे। जनरल नरवणे का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ अत्यधिक तनाव बना हुआ है।
सेना प्रमुख बल की तैयारी के साथ ही चीन के साथ एलएसी पर और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तैनातियों की समीक्षा करेंगे। दोनों देशों के कॉर्प्स कमांडरों ने सीमा के मुद्दे को सुलझाने और पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने के लिए मोलदो में सोमवार को बैठक की। बढ़ रहे तनाव के बीच, चीन की आक्रामकता जारी रहने की स्थिति में भारत जवाब के रूप में सभी सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। भारत ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के 826 किलोमीटर के दायरे में अपनी तरफ तैयारियों को भी बढ़ा दिया है।

 

21-06-2020
रक्षा मंत्री ने की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक,कहा-सेनाएं चौकस और सतर्क रहें

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ एक महीने से भी अधिक समय से चले आ रहे गतिरोध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ स्थिति की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार रूस में विक्टरी डे परेड कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सोमवार को रूस रवाना होने से पहले  राजनाथ सिंह ने लद्दाख में जमीनी हालात और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सेना की तैयारियों का जायजा लिया। तीनों सेनाओं के प्रमुखों से कहा गया कि सेनाएं चौकस और सतर्क रहें तथा थल, जल और हवाई सीमा पर चीनी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कुछ जगहों पर अतिक्रमण की चीन की नापाक कोशिशों के कारण गत पांच मई से क्षेत्र में सैन्य गतिरोध बना हुआ है। इसी गतिरोध के दौरान दोनों ओर के सैनिकों में गत 15 जून की रात हिंसक झड़प हुई। चीन ने सोची समझी योजना और साजिश के तहत इस झड़प को अंजाम दिया,जिसमें एक कर्नल सहित सेना के 20 जवान शहीद हो गये थे। इसके बाद से ही दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सैन्य जमावड़ा बढा रखा है और सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। राजनाथ सिंह लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के घटनाक्रम पर बराबर नजर रखे हुए हैं और वह समय समय पर शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा करते रहे हैं।

09-06-2020
पूर्वी लद्दाख में पीछे हटी चीनी सेना, कई जगहों पर ढाई किलोमीटर पीछे किए सैनिक

नई दिल्ली। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में कई बिंदुओं पर अपने सैनिकों की तैनाती को कम किया है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने गलवां क्षेत्र में, पैट्रोलिंग बिंदु 15 और हॉट स्प्रिंग एरिया से अपने सैनिकों और युद्धक वाहनों को ढाई किलोमीटर पीछे किया है। भारत ने भी अपनी कुछ टुकड़ियां पीछे हटाई हैं। दोनों देशों के बीच विवाद की शुरुआत पिछले महीने हुई थी जब चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास सैन्य निर्माण और सेना को तैनात करना शुरू कर दिया। इसमें पेगोंग त्सो झील और गलवां घाटी शामिल हैं। चीनी सैनिक विवादित क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों के साथ कई बार आमने-सामने हो चुके हैं। विवाद को हल करने के लिए दोनों देशों के बीच बाचचीत का दौर जारी है। जानकारी के अनुसार भारतीय सेना के कुछ सदस्य चुशुल में चीन के साथ अगले कुछ दिनों में वार्ता कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य दल के सदस्य चुशुल में हैं और वे अगले कुछ दिनों में होने वाली बातचीत की तैयारी कर रहे हैं। टीम को सेना मुख्यालय और सरकारी अधिकारियों से मामले के समाधान में मदद करने के लिए निर्देश और आदेश दिए गए हैं। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच छह जून को सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत हुई। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया था। वहीं चीन की तरफ से दक्षिण झिंजियांग सैन्य जिला कमांडर मेजर जनरल लियू लिन थे। यह बैठक मोल्डो में हुई थी। इस वार्ता का जमीन पर कोई तत्कालिक परिणाम नहीं निकला क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के विपरीत गतिरोध की स्थिति में बने हुए हैं। दोनों पक्ष समस्या का हल खोजने के लिए राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए थे। सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि चीन के साथ सैन्य और राजनयिक स्तरों पर वार्ता जारी है।

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