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07-11-2020
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पहल,उत्पादों की पहली खरीदी के लिए महापौर देंगे अपनी 2 माह की सैलरी

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई के महापौर एवं भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने शहर की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें स्वरोजगार देने एवं आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मदर्स महिला मार्केट का निर्माण करा रहे हैं। इसमें 35000 महिलाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है। मदर्स महिला मार्केट में प्रोडक्ट की पहली खरीदी के लिए यादव ने विधायक की 2 माह की सैलरी देने की घोषणा की है। निगमायुक्त ऋतुराज रघुवंशी के निर्देश पर मार्केट का निर्माण तीव्र गति से किया जा रहा है। महिलाओं के लिए विशेष तौर पर बनाए जा रहे पावर हाउस के समीप महिला मार्केट में शहरवासियों को एक ही कैंपस में बेहतर खाद्य के प्रोडक्ट उपलब्ध कराने के लिए निगम सभागार में महिलाओं के द्वारा की जा रही तैयारियों को लेकर बैठक हुई। बैठक में सिटी लेवल फेडरेशन की महिलाएं उपस्थित रहे। मार्केट के संचालन करने की कार्य योजना को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इससे पूर्व निगम के राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों के साथ महापौर ने पृथक से बैठक लेकर कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा करते हुए कुछ बिंदुओं पर परिवर्तन के लिए निर्देश दिए।

गुणवत्ता पूर्वक खाद्य पदार्थ के प्रोडक्ट को विक्रय करने के लिए खाद्य एवं औषधि विभाग से पंजीयन कार्य पूर्ण कर लिया गया है। बैठक में उपायुक्त तरुण पाल लहरें, सहायक परियोजना अधिकारी फणींद्र बोस, मिशन मैनेजर एकता शर्मा, शिबा राबर्ट एवं सीएलएफ की महिलाएं मौजूद रही। सुपर बाजार एवं मॉल जैसी होंगी सुविधाएं महिलाओं के लिए बनाए जाने वाले मार्केट परिसर में हरियाली के साथ ही भवन का भीतरी हिस्सा पूर्णत: वातानुकूलित रहेगा इसे बड़े शॉपिंग मॉल के तर्ज पर बनाया जा रहा है, महिला समूह की बैठक व्यवस्था के साथ ही कैंटीन की सुविधा इस स्थल पर उपलब्ध होगी,जिसका संचालन महिलाएं करेंगी। तकरीबन एक करोड़ 48 लाख की लागत से बनने वाले महिला मार्केट पूरी तरह से महिलाओं के लिए होगा जहां महिला समूह अपने उत्पादों का विक्रय करेंगी। महापौर देवेंद्र यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल महिला मार्केट में पंजीकृत महिला समूह द्वारा निर्मित किए जाने वाले विभिन्न उत्पाद जैसे सजावटी सामान, कपड़े के थैले, साबुन, निरमा, हस्तशिल्प, चिप्स, पापड़, चटाई, फिनाइल, कपड़े, ज्वेलरी आइटम, ब्यूटी पार्लर, अचार, पोहा, दही, पनीर, खोवा, गुलाल अगरबत्ती, धूप बत्ती, इत्यादि को विक्रय करने का एक बेहतर प्लेटफार्म मिलेगा। स्थल पर डोम शेड का भी निर्माण किया जाएगा जहां महिलाओं को समान निर्मित करने स्टाल प्रदान किया जाएगा। महिला मार्केट में गजीबों, आवागमन के लिए रास्ता, सौंदर्यीकरण, छाया के लिए शेड महिलाओं एवं पुरुषों के लिए शौचालय एवं कैंटीन का निर्माण किया जाएगा, पार्किंग व्यवस्था होगी।

 

19-10-2020
कलेक्टर ने कहा, स्वसहायता समूहों के बनाए उत्पादों का हो प्रचार प्रसार, मिले बेहतर मार्केट

दुर्ग। कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने जिला पंचायत अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि बीते दिनों उन्होंने स्वसहायता समूहों के उत्पाद देखें हैं। यह उत्पाद काफी आकर्षक हैं और इस नाते कुछ समूहों ने विदेशों में भी उत्पाद भेजे हैं। यह बहुत अच्छा संदेश है इसे आगे ले जाना चाहिए। लोग कहीं भी हों, उन्हें  हमारे डिजाइनर उत्पाद मिल पाएं, इसलिए कार्य करें। इसके लिए अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-मार्केट पर भी फोकस करें ताकि बहुत बड़ा डिजिटल मार्केट भी ये कैप्चर कर पाएं। कलेक्टर ने कहा कि इनकी डिजाइनिंग बहुत अच्छी है इसमें विशेषज्ञों की मदद से और भी निखार लाएं। गुणवत्ता और बेहतर करने की कोशिश हो, उत्पादों की रेंज बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि दीपावली को लेकर विशेष तौर पर फोकस करें। स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन के लिए यह शानदार मौका है। इस समय डिमांड काफी होगी, अभी से इसके लिए कार्य करें। किसी भी तरह की मदद की जरूरत है तो उन्हें उपलब्ध कराएं। जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि इसके लिए बाजार से एनआरएलएम की टीम जुड़ी हुई है।

जहां जहां से मांग सृजित हो सकती है वहां संपर्क किया गया है और इसे समूहों के माध्यम से सप्लाई किया जाएगा। समूहों के पास काफी काम आ रहा है। उन्होंने बताया कि समूहों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए विशेष पहल की जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि एनआरएलएम योजना का दायरा काफी विस्तृत होता है। इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो सकता है और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है। कलेक्टर ने बैठक में मनरेगा की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जून तक के काम चिन्हांकित कर रख लें। अधिकाधिक लोग 100 दिन का लक्ष्य प्राप्त करें, यह कोशिश हो। कार्य काफी गुणवत्तापूर्वक हों, यह भी देख लें। उन्होंने कहा कि नरवा योजनाओं के माध्यम से भूमिगत जल का स्तर काफी बढ़ेगा। यह काफी अहम प्रोजेक्ट्स हैं और इस दिशा में विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि नरवा के लिए चिन्हांकित स्थलों में विशेषज्ञों के निर्देश के अनुरूप निर्माण हो, यह सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने पंद्रहवें वित्त की राशि से हो रहे कार्यों की जानकारी भी ली। जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि इस राशि के माध्यम से पेयजल एवं बुनियादी संरचना आदि के कार्य कराए जा रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविकामूलक गतिविधियों को बढ़ावा देना सबसे अहम है। इस दृष्टि से विशेष काम होना चाहिए।

 

12-05-2020
बस्तर के किसानों ने लॉक डाउन में बेची 4500 मिट्रिक टन की सब्जियां 

रायपुर/जगदलपुर। लॉक डाउन के अवधि में कृषकों को उद्यानिकी फसलों के विक्रय करना एक चुनौती बन गया था और ऐसे स्थिति में कृषकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था। कृषकों को फसलों को ओंने पौने दाम में बेचने पर विवश होना पड़ रहा था या फिर कृषकों ने फसल की तुड़वाई बंद कर दी थी। इसके निराकरण के लिए प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे के निर्देशानुसार जगदलपुर उद्यान विभाग के अधिकारी और मैदानी अमले ने कृषकों से सम्पर्क की। उन्होंने समाधान के लिए कलेक्टर डॉ. अय्याज तम्बोली से निवेदन किए की तत्काल इसका निराकरण करें। कलेक्टर ने सब्जी वाहनों के लिए परिवहन पास जारी करते हुए पुलिस विभाग को भी सहयोग करने के निर्देशित किया। उद्यान विभाग जगदलपुर ने बड़े सब्जी व्यापारियों से आग्रह किया कि वे लोग अधिक से अधिक सब्जियों की खरीदी करें।

इन प्रयासों का सार्थक नतीजा मिला जहां लॉक डाउन के प्रारम्भ में मिर्च का भाव 4 से 6 रुपए प्रति किलो मिला वो अब 11-13 रुपए प्रतिकिलो मिल रहा है। इसी प्रकार टमाटर प्रतिकिलो 3-4 रुपए से बढ़कर 8-10 रुपए हो गया। प्रतिकिलो 1-2 रुपए की दरपर विक्रय हो रहा खीरा अब प्रतिकिलो 5-7 रुपए कृषकों को मिल रहा है। जिले के बकावंड, तोकापाल बस्तर के मिर्च, टमाटर और खीरा का निर्यात रायपुर, भिलाई, नागपुर (महाराष्ट्र), हैदराबाद (तेलंगाना), ओड़ीसा और मध्यप्रदेश राज्य में किया गया। अबतक विभागीय प्रयास से लगभग 4500 मिट्रिक टन (3000 मि.टन मिर्च, 500 टन टमाटर और 100 टन खीरा) सब्जियों का विक्रय किया गया है। मिर्च, टमाटर खीरा के साथ-साथ बैगन एवं करेला की बिक्री को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

19-10-2019
गांव के युवा बांस से बना रहे हैं आकर्षक कलाकृतियां

कोरिया। कोरिया वन मंडल की सराहनीय पहल आज पूरे प्रदेश के लोगों के लिए मिसाल बनी हुई है। यहां बांस के उत्पादों के माध्यम से युवाओं को रोज़गार से जोड़ा जा रहा है। सोनहत के एक छोटे से गांव आनंदपुर नर्सरी में युवाओं का बांस के नए-नए उत्पाद बनाने का जुनून काबिले तारीफ है। बांस से तैयार किए जा रहे घरेलू साज-सज्जा व दैनिक उपयोगी वस्तुएं देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के हुनरबाज किस तरह से इस व्यवसाय को गति दे सकते हैं। आनंदपुर नर्सरी में युवा वर्ग इस कार्य में कार्यरत है। जिनके द्वारा मनमोहक साज्य सज्जा की वस्तुएँ जैसे फ्लावर पार्ट,कुर्सी, टेबल, मोबाइल स्टैंड, जैसे कई सामानों का निर्माण किया गया है। बांस से बने सामान वास्तव में इको फ्रेंडली होते हैं। इसे प्लास्टिक के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में बांस से बने सामानों की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है।

ये व्यवसाय स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने में मददगार साबित हो सकता है। इस व्यवसाय से क्षेत्र के युवा आत्मनिर्भर हो सकते हैं, साथ ही रोज़ी-रोटी की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं के पलायन में भी कमी आ सकती है। वर्तमान में नर्सरी में 20 युवा कार्यरत हैं। जो नेट के माध्यम से सीखकर बांस के बम्बू से अच्छे से अच्छा दैनिक उपयोग का सामान तैयार कर रहे हैं। यहां से निर्मित सामान स्थानीय लोगों के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हिना खलखो महिला समूह अध्यक्ष  ने बताया कि कड़ी मेहनत से बांस के बम्बू को आकार दे कर साज-सज्जा की वस्तुएं तैयार की जा रही है।  पूर्व में आसाम के प्रशिक्षुओं द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था। आज हम यू ट्यूब के जरिये भी अनेको आइटम बांस से तैयार कर रहे, जिसमें कोरिया वन मंडल का पूरा सहयोग मिल रहा है। जल्द ही जिला मुख्यालय में दुकान खोलकर बिक्री की जाएगी। आज समूह 20 सदस्यों में काम कर रहा है। मार्केट में आने के बाद मांग बढ़ेगी,जिसके कारण और लोगो को जोड़ कर रोजगार भी मुहैया कराया जाएगा। अब जल्द ही कोरिया वन मंडल के द्वारा जिला मुख्यालय में दुकान खोल कर इन वस्तुओं का विक्रय किया जाएगा, जो छतीसगढ़ में जिले को एक नई पहचान दे सकेगा।

 

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