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10-12-2020
इंस्पायर अवार्ड पंजीयन में छत्तीसगढ़ तृतीय स्थान पर, चयनित प्रतिभागियों को मॉडल बनाने मिलते हैं 10 हजार रूपए

रायपुर। विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रूचि और रूझान बढ़ानेए उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्क क्षमता का विकास करने, नन्हें बाल वैज्ञानिकों को अवसर प्रदान करने के लिए इंस्पायर अवार्ड योजना संचालित है। छत्तीसगढ़ राज्य के 14 हजार 520 विद्यालयों के पूर्व माध्यमिक और हाई स्कूल स्तर की कक्षा 6वीं से 10वीं तक के होनहार बालक.बालिकाएं इसमें शामिल हो सकते हैं। वर्तमान में देश में कोविड.19 के कारण निर्मित असामान्य परिस्थितियों के बावजूद भी छत्तीसगढ़ राज्य में 44 हजार 338 का पंजीयन कर देश में तृतीय स्थान पर है। राज्य के 8 जिलों राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर, धमतरी, कोरबा, जांजगीर.चांपा, कबीरधाम और सूरजपुर में पंजीयन की स्थिति विशेष रूप से सराहनीय है।राज्य में संचालित सभी शासकीय विद्यालयों, अशासकीय अनुदान प्राप्त और अशासकीय विद्यालय ;हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम में संचालित कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थी तथा रजिस्टर्ड मदरसों के कक्षा 6वीं से 8वीं तक समस्त बालक बालिकाएं इसमें शामिल हो सकते हैं। स्टार्टअप इंडिया इनिसिएटिव प्रोग्राम के तहत भारत सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय नई दिल्ली एवं नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान भारतए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार का स्वायत्तशासी संस्थान ;एनआईएफद्ध के द्वारा इंस्पायर अवार्ड मानक प्रतियोगिता प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है।

शिक्षा सत्र 2020.21 से राज्य के सभी सीबीएसई स्कूल सीआईएससीई संबद्ध स्कूल और केन्द्रीय विद्यालय संगठन के कक्षा कक्षा 6वीं से 10वीं तक के 10 वर्ष से 15 वर्ष तक आयु वर्ग के सभी विद्यार्थी भी इंस्पायर अवार्ड मानक के राज्य के स्कूलों के लिए आयोजित जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। प्रत्येक विद्यालय से अधिकतम 5 विद्यार्थियों के बेस्ट आइडिया मॉडल का चयन कर उनका ऑनलाइन पंजीयन कराया जा सकता है। इसके लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान देश भर के कक्षा 6वीं से 10वीं तक के सभी स्कूलों से आवेदन प्रेषित किए जा सकते हैं। इस संबंध में विद्यालयों के संस्था प्रमुख कक्षा 6वीं से 10वीं तक विद्यार्थियों की एक आइडिया प्रतियोगिता आयोजित कर श्रेष्ठ पांच आइडिया का चयन कर नवाचार का नामांकन इंस्पायर अवार्ड मानक के वेब पोर्टल पर कर सकते हैं।देशभर से प्राप्त विचारों में से सर्वश्रेष्ठ एक लाख विचारों का चयन कर उन्हें जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 10 हजार रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। यह राशि विद्यार्थियों के बैंक खाते में सीधे जमा की जाती है। जिला स्तरीय प्रदर्शनी में चयनित छात्र को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में भाग लेना होता है। राज्य स्तर पर चयनित प्रतिभागी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान द्वारा देशभर के विभिन्न तकनीकी संस्थान के सहयोग से मेंटरिंग सहयोग प्रदान किया जाता है। यहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रतिकृति प्रोटोटाईप बनाने के बारे में जानकारी दी जाती है। जिससे राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में बेहतर प्रतिकृति प्रदर्शित की जा सके।

राष्ट्रीय प्रदर्शनी से 60 नवप्रवर्तन का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया जाता है। राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान, राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किए गए सभी बच्चों के नवप्रवर्तन की उपयोगिता, व्यवसायिकता की संभावनाओं को परख कर उन्हें पूर्ण इन्क्यूबेशन सहायता उपलब्ध कराता है। इन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान की अन्य योजनाओं के साथ जोड़ने का प्रयास करता है। सभी प्रतिकृति को वार्षिक नवप्रवर्तन एवं उद्यमिता उत्सव में प्रदर्शित किया जाता है।इंस्पायर अवार्ड मानक प्रतियोगिता के राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को जिन्होंने स्वर्ण, रजत, कांस्य पदक या सांत्वना पुरस्कार जीता है। उन्हें इन्द्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलाजी दिल्ली में बीटेक में 10 नंबर का बोनस अंक और राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को 6 नंबर का बोनस अंक दिया जाता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर चयनित कुछ प्रतिभागियों को सकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए और मानक के अनुसार चयन किया जाता है। इन चयनित प्रतिभागियों को जापान जाने के साथ ही अन्य देश.विदेश की प्रतियोगिताओं में भी भाग लेने का अवसर मिलता है। देशभर में राज्य, जिला, विकासखण्ड स्तर के पदाधिकारियों और विद्यालयीन शिक्षकों के लिए राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय और स्थानीय कार्यशाला के आयोजन के माध्यम से इंस्पायर अवार्ड मानक के उद्देश्य और देशभर से प्राप्त नए आइडियाए इनोवेशन के बारे में जानकारी भी दी जाती है।

 

21-10-2019
बाल वैज्ञानिकों ने किया चम्पारण, मुक्तांगन और नवा रायपुर का भ्रमण

रायपुर। 46वीं जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान गणित और पर्यावरण प्रदर्शनी का आयोजन राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में किया गया। प्रदर्शनी का समापन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने 19 अक्टूबर को किया। प्रदर्शनी में देशभर से आए 400 से अधिक बच्चों और शिक्षकों ने 20 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल चम्पारण, पुरखौती मुक्तांगन, अंतरराष्ट्रीय वीर नारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम और नवा रायपुर में मंत्रालय, संचालनालय (इन्द्रावती भवन) का अवलोकन किया। बाल वैज्ञानिक इन स्थलों को देखकर काफी प्रफुल्लित हुए और वे छत्तीसगढ़ से मीठी यादें लेकर लौट रहे हैं। रविवार को सभी बाल वैज्ञानिकों और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। 400 से अधिक बाल वैज्ञानिक और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को चम्पारण में हाई सेकेण्डरी स्कूल में देखकर गांव बच्चे वहां पहुंचे और सुआ नृत्य की प्रस्तुति देकर मन मोह लिया। चम्पारण में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.श्री रूपधर दीवान शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में सभी बच्चों और शिक्षकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। चम्पारण स्कूल पहुंचने पर शिक्षकों का स्वागत अभनपुर के बीईओ मोहम्मद इकबाल, बीआरसी चम्पारण और सीएसीसी ने किया। बाल विज्ञान प्रदर्शनी का पांच दिन में 30 हजार से अधिक नागरिकों ने अवलोकन किया। इनमें 24 हजार से अधिक स्कूली बच्चे और 6 हजार से अधिक कॉलेज के विद्यार्थी शामिल है। बाल विज्ञान प्रदर्शनी के अंतिम दिन सुकमा, बीजापुर एवं रायपुर जिले के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में बस्तर संभाग से आए हुए सुकमा और बीजापुर के छात्रों में प्रदर्शनी को लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया। छात्र-छात्राओं ने बताया कि वे इसके अलावा विज्ञान भवन विधानसभा भवन का भ्रमण करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग, एससीईआरटी के संयुक्त संचालक योगेश शिवहरे, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक प्रशांत पाण्डेय, एससीईआरटी के सहायक प्राध्यापक दीपांकर भौमिक,  संजय गुहे,  ज्योति चक्रवर्ती भी उपस्थित थीं। 

19-10-2019
राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी के समापन पर मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने किया बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन

रायपुर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने देशभर से आए सभी बाल वैज्ञानिकों से अपील की है कि मानव समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए अपने अविष्कारों से जीवन को सुगम और सरल बनाने की दिशा में नई पहल प्रारंभ करें। गुरू रूद्रकुमार शनिवार को राजधानी के रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में आयोजित पांच दिवसीय 46वीं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणित और पर्यावरण प्रदर्शनी के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में उपस्थित देशभर से आए बाल वैज्ञानिकों और शिक्षकों को बधाई और शुभकामना देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने अतिथियों के साथ प्रदर्शनी के स्टालों का भ्रमण कर बाल वैज्ञानिकों से मुलाकात कर जानकारी ली और उनका उत्साहवर्धन किया। समारोह में अतिथियों द्वारा स्मारिका का विमोचन भी किया गया। मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य 14 से 18 वर्ष के जिज्ञाषु बच्चों को उनके विज्ञान, गणित की समझ, नवाचार, क्षेत्रीय और वैश्विक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के लिए मंच प्रदान करना है। बच्चों को गणित एवं विज्ञान के माध्यम से मानव जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रदर्शनी में बच्चों को अपने कार्यों के प्रदर्शन और उन्हें दर्शकों व साथियों के साथ आदान-प्रदान करने का अवसर मिला। प्रदर्शनी ने बच्चों की राष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता और गुणवत्तापूर्ण मॉडलों के प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी की मुख्य थीम ’जीवन की चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक समाधान’ है, इसलिए प्रत्येक प्रतिभागी मानव जीवन को सुगम और सरल बनाने की दिशा में गणित और विज्ञान के माध्यम से वैज्ञानिक तरीकों की खोज करने के लिए अपनी बुद्धि, कौशल का उपयोग कर रहा है।

मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परम्परा और लोक कलाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से देशभर से आए हुए बाल वैज्ञानिकों को विज्ञान के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की कला और परम्परा तथा संस्कृति को सीखने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए विधायक कुलदीप जुनेजा ने कहा कि प्रदर्शनी का अवलोकन करते समय बच्चों द्वारा जिस तरीके से अपने मॉडल के विषय में जानकारी देकर समझाया जा रहा था, उससे प्रतीत हो रहा है कि यह बच्चे देश नहीं दुनिया में भी नाम रोशन करेंगे। एनसीईआरटी के संयोजक प्रो.दिनेश कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आयोजित यह प्रदर्शनी अद्वितीय रही। 1971 से बच्चों की जिज्ञासा के लिए एक मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आयोजकों द्वारा की गई व्यवस्था सराहनीय है। यह छत्तीसगढ़ सरकार की राज्य के बच्चों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल ने भी उद्घाटन के समय प्रदर्शनी में बच्चों के साथ दो घंटे से अधिक का समय दिया। राष्ट्रीय प्रदर्शनी में 34 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश के 139 मॉडल प्रस्तुत किए गए, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य के बच्चों द्वार 19 मॉडल प्रस्तुत किए गए। उन्होंने इसके साथ प्रदर्शनी में आए प्रतिभागियों, संस्थाओं की जानकारी भी दी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की संयुक्त संचालक डॉ. सुनीता जैन ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि प्रदर्शनी में राज्य की कला और संस्कृति से देशभर से आए बच्चों को परिचित कराने के लिए लर्निंग कैम्प का आयोजन किया गया। 600 शिक्षकों का मेगा शो का पहली बार आयोजन किया गया। सुबह के समय में 8 वैज्ञानिकों ने व्याख्यान देकर बच्चों को तकनीकी जानकारी दी। संध्या के समय छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के साथ ही देशभर से आए प्रतिभागियों ने अपने राज्य की कला और संस्कृति की शानदान प्रस्तुति दी। इसके अलावा राज्य शासन की प्रमुख योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी का प्रदर्शन मॉडल के माध्यम से किया गया। राज्य के विभिन्न जिलों से आए स्कूली बच्चों ने प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ ही राजधानी के प्रमुख स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण भी किया। राष्ट्रीय प्रदर्शनी ने राष्ट्रीय मेला का रूप लिया और यह कार्यक्रम स्मृति को सजोने लायक बना। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की संयुक्त संचालक डॉ. योगेश शिवहरे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर नेताजी सुभाषचन्द्र वार्ड की पार्षद दिशा धोतरे, पूर्व पार्षद राकेश धोतरे, आयोजन के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ.आशीष कुमार श्रीवास्तव, एनसीईआरटी की प्रो. सुनीता फरक्या, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग गौरव द्विवेदी, संचालक लोक शिक्षण एस.प्रकाश, संचालक एससीईआरटी पी. दयानंद उपस्थित थे।

 

19-10-2019
 राष्ट्रीय बाल विज्ञान प्रदर्शनी : देशभर के बाल वैज्ञानिकों ने सीखी छत्तीसगढ़ की विभिन्न कलाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोक गीत, नृत्य और संपूर्ण कलाओं से राष्ट्रीय बाल विज्ञान प्रदर्शनी में देशभर से आए बाल वैज्ञानिकों और शिक्षकों को परिचित कराया गया। इसके लिए लर्निंग कैम्प के माध्यम से विभिन्न परम्परागत नृत्य, विभिन्न कलाओं, पारम्परिक वस्तुओं का प्रदर्शन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद कार्यालय के परिसर में 15 से 19 अक्टूबर तक किया गया। इसमें सरगुजा के सैला, कर्मा, बायर, रायगढ़ के जशपुरिया करमा, सरहुल, बस्तर के गौर, रेला, पाटा, लेजा, गेड़ी, दुर्ग का राउत नाचा, खड़ी साज, राजनांदगांव का पोश कोलांग, बिलासपुर और कोरबा का गौरा-गौरी, बार नृत्य, रायपुर का डंडा, सुआ और पंथी नृत्य की शानदार प्रस्तृति लोक कलाकारों द्वारा दी गई।  छत्तीसगढ़ राज्य में आयोजित यह प्रदर्शनी अब तक आयोजित अन्य राज्यों में आयोजित प्रदर्शनी से अलग थी। प्रदर्शनी में विज्ञान के साथ कला की खुशबू भी बिखर रही थी। विभिन्न कलाओं के लर्निंग कैम्प से जुड़ने से विज्ञान के लिए भी कुछ अच्छा हो सकता है, इसका प्रयास राज्य द्वारा किया गया। लर्निंग कैम्प के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध कलाकारों में सरगुजा की भित्ती कला की सुन्दरी बाई और गोदना कला की रामकेली बाई सहित लौह शिल्प और बस्तर के तुमा आर्ट के कलाकारों ने देशभर से आए बाल कलाकारों, शिक्षकों और यहां प्रदर्शनी देखने के लिए हर आने-जाने वाले का ध्यान आकर्षित किया। 
        
करमा नृत्य
    करमा नृत्य, करमा त्यौहार के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है। जिसमें अंचल के महिला व पुरूष मांदर की थाप पर करमा गीत गाते हुए एक साथ कदम का संचालन कर थिरकते है। यह त्यौहार भाद्रपद शुक्लपक्ष एकादषी से प्रारंभ होकर दषहरा तक आयोजित किया जाता है।

शैला नृत्य
    सरगुजा अंचल का यह प्रसिद्ध नृत्य है, जिसे पुरूषों द्वारा किया जाता है। ये हाथ में डंडा लिए मांदर की थाप पर एक दूसरे से डंडा मिलाते हुए कदमों का संचालन करते है। शैला नृत्य दीवाली के बाद फसल कटने की खुषी में की जाती है। शैला दल गांव-गांव जाकर हर घर में अपनी प्रस्तुति देते है। घर परिवार की समृद्धि की कामना करते है बदले में परिवार के लोग नेंग स्वरूप चावल और पैसा देते है। 


बायर नृत्य
    बायर नृत्य - बैषाख माह के कृष्ण पक्ष तिथि को षिव पार्वती के विवाह के आयोजन के अवसर पर किया जाता है। स्थानीय बोली में गाये जाने वाले विवाह गीतों में षिव पार्वती की आराधना की जाती है। इस नृत्य में स्त्री तथा पुरूष दोनों ही शामिल होते हैं।

पहाड़ी गौरा लोक नृत्य
    कोरबा जिले के कवँरान पाट क्षेत्र का सरगुजा में गौरा उत्सव प्रत्येक वर्ष इस माह में मनाया जाता है। इस नृत्य में वानांचल क्षेत्र में संपन्न होने वाले विवाह शैली व परंपरा को शंकर पार्वती के विवाह के रूप में प्रगट कर गांव जनों के मंगल कामना व गांव के खुषहाली के लिए मनाया जाता है। प्रायः देखा गया है कि इस लोक नृत्य में ढोल, मांदर, झांझ और मोहरी के स्वर लहरी पर अनायास ही पैर थिरकने लगता है और नाच-नाच कर गाकर इस नृत्य को किया जाता है। इस लोकनृत्य के माध्यम से अगली पीढ़ी अपने संस्कार को सीख जाती है और वही समाज में परिलक्षित होता है।

17-10-2019
बाल वैज्ञानिकों के मॉडल देखने छात्रों में दिखा उत्साह

रायपुर। 46वीं जवाहर लाल नहेरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी में देश के 27 प्रदेशों के बाल वैज्ञानिक द्वारा प्रदर्शित विज्ञान के मॉडलों को देखने के लिए छात्रों में अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनी को देखने के लिए प्रदेश के सुदूर वंनाचलों के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा, जशपुर और कोरिया जिले के छात्रों ने भी बाल वैज्ञानिकों द्वारा प्रदर्शित मॉडल को देखा एवं उसके संबंध में जाना। दूरस्थ क्षेत्र के स्कूल के छात्रों ने देशभर के हम उम्र के बाल वैज्ञानिकों के द्वारा तैयार विज्ञान कीे बारीकियों के प्रयोग को देखकर बहुत खुश हुए और उनमें भी विज्ञान के मॉडल बनाने की रूचि जगी है।
राजधानी रायपुर के शंकरनगर स्थित बीटीआई मैदान में पांच दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी को देखने के लिए प्रदेश के सभी जिलों के छात्रों में रूचि देखी जा रही है। राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी के तीसरे दिन नक्सल प्रभावित जिला दंतेवाड़ा के कक्षा दसवीं एवं ग्यारहवीं में पढ़ने वाले 100 छात्रों को लेकर सहायक खंड शिक्षा अधिकारी रावटे और एपीसी आर्या पहुंचे हैं। सुदूर वंनाचल के परसपाल, बड़े गुडरा, चोलनार, तोंगपाल और पोटाकेबिन धनीमरका के छात्र शामिल हैं। इसी प्रकार जशपुर और कोरिया जिले के छात्र बड़ी संख्या में राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी देखने पहुंचे और विज्ञान के बारीकियों के प्रयोग को देखे तथा उनमें भी विज्ञान के क्षेत्र में रूचि पैदा हुई।

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