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16-09-2020
सूर्य करेंगे राशि परिवर्तन, कन्या राशि में प्रवेश कहलाती है कन्या संक्रांति, जानिए क्या फल देंगे सूर्यदेव

रायपुर। कन्या राशि में सूर्यदेव का प्रवेश कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार 12 राशियां हैं और जब भी सूर्यदेव एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं तो उस राशि की संक्रांति आरंभ हो जाती है। संक्रांति का पुण्यकाल बेहद विशेष माना जाता है। सूर्य का प्रत्येक माह राशि में परिवर्तन करना संक्रांति कहलाता है और इस संक्रांति को स्नान, दान और पितरों के तर्पण आदि के लिए शुभ माना जाता है। आज सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिष में सूर्य की इस घटना को कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

कन्या संक्रांति भी अपने आप में विशेष है। कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की उपासना की जाती है। भगवान विश्वकर्मा की उपासना से कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। कार्यक्षेत्र और व्यापार में आने वाली परेशानियां दूर हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति को सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त हो जाए तो उसे समाज में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और सरकारी नौकरी आदि प्राप्त होती है।

24-05-2020
इस बार सात दिन ही तपेगा नौतपा, कल से शुरूआत

रायपुर। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस बार आज रात 2 बजकर 32 मिनट पर सूर्य है रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। नौतपा की शुरुआत आज रात से ही हो जाएगी लेकिन सूर्य की तपन का प्रभाव 25 मई से माना जाएगा। इसका कारण सातवें दिन शुक्र ग्रह अस्त होना है। यहीं कारण है कि इस बार नौतपा के नौ दिनों की बजाय सात दिनों तक ही सूर्य अपना तीव्र प्रभाव दिखाएगा।  तारीख नक्षत्र प्रभाव 25 मई मृगशिरा शाम को तेज गर्मी, 26 मई राहू प्रधान मंगल सूर्खी गर्मी, 27 मई गुरु प्रधान पुनर्वसु उमस वाली गर्मी, 28 मई शनि प्रधान पुष्य तेज हवा-बूंदाबांदी, 29 मई बुध प्रधान आश्लेषा तेज गर्मी, 30 मई केतु प्रधान मघा उमस, तेज गर्मी, 31 मई सूर्य प्रधान उत्तरा फाल्गुनी प्रचंड गर्मी, शाम को बारिश जैसा मौसम होने की संभावना है।

27-12-2019
ग्रामीणों और बच्चों ने सोलर फिल्टर के माध्यम से देखा सूर्य ग्रहण का नजारा

कोंडागांव। ग्राम बनजुगानी, कोदागांव, कोकोड़ी, कुसमा व कारसिंग के ग्रामीण एवं बच्चों समेत काफी संख्या में लोगों ने गुरूवार सुबह वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण देखा, लेकिन कुछ हिस्सों में बादल छाए होने के कारण लोगों को निराशा हुई। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं द्वारा यह दुर्लभ नजारा को सोलर फिल्टर के माध्यम से आसानी से सूर्यग्रहण के नज़ारे को दिखाया गया। गुरुवार को सुबह 08:17 बजे से 10:57 बजे के बीच सूर्यग्रहण लगा रहा जिसे देखने के लिए बच्चों एवं ग्रामीणों में कौतूहल का विषय रहा। ग्रामीण व बच्चों को सूर्यग्रहण में होने वाली सूर्य, पृथ्वी व चन्द्रमा के परिक्रमा व उनके अक्षीय-कक्षीय गति से के बारे में बताया गया। साथ ही उन्हें नग्न आंखों से सूर्यग्रहण को देखने से होने वाली परेशानियों व उन परेशानियों के कारणों से भी अवगत कराया गया। नग्न आंखों से न देखकर सोलर फिल्टर का इस्तेमाल कर दूरदर्शी के माध्यम से सूर्यग्रहण का नजारा देखकर सभी उत्साहित हुए। जिसमे खगोल विज्ञान की चर्चा कर गांव-समुदाय के लोग सूर्यग्रहण से भली भांति से परिचित हुए। साथ ही संस्था के कार्यकर्ताओं ने बताया कि जब चन्द्रमा अपने अक्षीय गति से गति करते हुए सूर्य व पृथ्वी के बीच आ जाती है तब सूर्यग्रहण का संयोग बनता है। ग्रामीणों व बच्चों ने सूर्यग्रहण के बारीकी को समझा।

02-11-2019
अस्त होते सूर्य देवता को व्रतियों ने दिया अर्घ्य

कोरबा। बालको नगर में आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य देवता की पूजा की गई। रविवार को सभी व्रती श्रद्धालु उगते सूर्य को अर्ध्य देकर अपना व्रत तोड़ेंगे। इसके पश्चात ही यह व्रत संपन्न होगी। इस महापर्व में व्रत करता के साथ परिवार व अन्य श्रद्धालु गण भी भारी संख्या में उपस्थित रहे।यह छठ पूजा पूर्णतः सूर्य देव को समर्पित होता है। इस व्रत में 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखा जाता है। व्रती सूर्य देव को अर्घ्य देते समय पानी में खड़े रहते हैं, जो एक कठोर तप के समान होता है। किन्तु आस्था के आगे सब कुछ सहज व सरल प्रतीत होता है। 

 

02-11-2019
छठ महापर्व : डूबते सूर्य को आज अर्घ्य अर्पित करेंगीं माताएं

मुंगेली। जिले में चार दिवसीय छठ पूजा के तीसरे दिन शनिवार शाम व्रत रखने वाली महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देगी। इसके लिए नगर में इस वर्ष विशेष रूप से छठ घाट बनाया गया है। शहर में निवासरत बिहारी समुदाय विगत कई वर्षो से छठ पूजा मना रहे हैं। इस वर्ष पुल पारा के पास छठ घाट में नगर पालिका द्वारा विशेष साफ-सफाई कर विशेष तैयारी की गई है। छठ पर्व का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इसमें माताएं संतान की खुशहाली के लिए छत्तीस घंटो तक निर्जला व्रत रखती है। महिलायें पानी में खड़े होकर डूबते हुये सूर्य को अर्घ्य देतीं है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व के अंतिम दिन सूर्य की उपासना करते हुए उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत खोलती है। शहर स्थित घाट में आज शनिवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

08-08-2019
सूर्य की किरणों में छुपा है जीवन का रहस्यः प्रो.एचपी सिंह

रायपुर। भारत सरकार के विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से पांच दिवसीय 6 से 10 अगस्त तक 19वां इस्पायर कैम्प पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में प्रायोजित किया जा रहा है। इसका गुरुवार को तीसरा दिन रहा। इंस्पायर कैम्प के तिसरे दिन देश के जाने माने वैज्ञानिक प्रो. एससी भट्टाचार्य जाधवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो.एचपी सिंह एंव गंगाधर मेहर संम्बलपुर उड़ीसा यूनिवर्सिटी के प्रो.एके पति का व्याख्यान हुआ।
इंस्पायर कैम्प के तीसरे दिन की शुरूआत देश के जाने-माने वैज्ञानिक प्रो. एचपी सिंह के व्याख्यान से हुआ। प्रो. सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के भौतिकी एंव खगोल भौतिकी विभाग से आए हुए थे। प्रो. सिंह ने अपने व्याख्यान की शुरूआत बहुत ही रोचक ढंग से करते हुए ब्रम्हाण्ड के साईज के बारे में बताया। इसके लिए उन्होंने विवि के प्रेक्षागृह व्याख्यान कक्ष के साईज से शुरू कर, रायपुर शहर, फिर छत्तीसगढ़ फिर पृथ्वी की साइज, चंद्रमा की दूरी, तत्पश्चात् सूर्य की दूरी के बारे में बताया, जिसके एक एस्ट्रोनाॅमिक यूनिट कहा जाता है। जैसे-जैसे हम आकाश में आगे बढ़ते जाते है। हम उतने ही छोटे होते जाते है। अतः खगोल विज्ञान में मीटर या किलोमीटर का उपयोग न कर लाईट ईयर (प्रकाश वर्ष) का उपयोग किया जाता है। सबसे करीब तारे से पृथ्वी तक रोशनी पहुॅचने में चार साल का समय लग जाता है। हमारी आकाश गंगा का विस्तार 1,00,000 प्रकाश वर्ष है। ब्रम्हाण्ड में ऐसे कई आकाश गगॅाएं है, जिनका विस्तार काफी दूर-दूर तक है। ऐसा माना जाता है कि ब्रम्हाण्ड का निर्माण 14 बिलियन ईयर पहले हुआ था। हमारी सौर मण्डल का निर्माण 4.5 बिलियन ईयर पहले हुआ। पूरे ब्रम्हाण्ड के समयकाल की तुलना में हम इंसानों का जीवनकाल बहुत ही कम है। विभिन्न आकाशीय पिण्डों/तारों का अध्ययन केवल वहाॅ से आने वाली किरणों को समझ कर किया जा सकता है क्योकि वहाॅ तक जाना मुश्किल है। इन किरणों का विश्लेषण कर तारों के चमक, आकार, साईज, तापमान, रासायनिक तत्व, द्रव्यमान, वर्णक्रम, रंग, घूर्णन गति, चुंम्बकीय क्षेत्र, हवा, आयु, दूरी तथा गति आदि महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की जा सकती है। 

द्वितिय चरण में प्रो.एससी भट्टाचार्य का व्याख्यान दैनिक जीवन में रसायन विज्ञान की महत्वता से हुआ, प्रो. ने अपने व्याख्यान में सर्फेस केमेस्ट्री के माध्यम से, सुबह दांत साफ करने की पेस्ट, चाय, काॅफी, साबुन, तेल, परफियूम, नेल पाॅलिस, फेस पाउडर से लेकर रात की दवा खाने तक रसायन विज्ञान किस प्रकार हमारे दैनिक जीवन से जुड़ी हुई है इसकी जानकारी बच्चों को दी, उन्होंने अम्ल तथा क्षार जैसे तत्वों की सांद्रता पीएच स्केल से कैसे नापी जाती है, गंदे कपड़े साबुन लगाने पर कैसे साफ हो जाते है एंव कोलाईडी विलयन क्या होता है कैसे बनाया जाता एंव दैनिक जीवन में इनकी उपयोगिता को भी समझाया साथ ही प्रो. ने नैनों पार्टिकल से तैयार नैनो टियूब, नैनों मेडिसीन के बारे में बच्चों से चर्चा की तथा नैने पार्टिक्ल किस-किस तत्वों से बनाया जाता है एंव नैनो पार्टिकल को मेडिकल साईंस में किस प्रकार दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है इसकी भी जानकारी दी। प्रो. ने बच्चों को बायोफर्टीलाईजर की उपयोगिता एंव किस प्रकार बनाया जाता है यह भी बताया। बच्चें प्रो. से काफी प्रश्न किये जैसेः इलेक्ट्रान की डेंसेटी कैसे नापी जाती है, स्पेक्ट्राॅसकोपी कैसे कार्य करता है, एलोपेथी, होमियोपेथी एवं आयुर्वेदिक दवायों में क्या अंतर हैं, अम्ल कैसे किसी भी चीजों को जला देती है प्रश्न पूछे गये इन सभी जिज्ञासु प्रश्नों का जवाब प्रो. ने बच्चों को काफी रचनात्मक ढंग से समझाया इस पर बच्चों ने नई जानकारी प्राप्त कर काफी उत्साहित रहें।

तृतीय चरण में गंगाधर मेहर युनिवर्सिटी, सम्बलपुर उड़ीसा के कुलपति प्रो.एके पति का व्याख्यान जैविक घड़ी पर हुआ उनका शीर्षकः क्यों जीवविज्ञानी चाहते है कि सभी स्टाइगोबाइटिक/शैलीगत मछलियाॅं जैविक घड़ी युक्त न हो? क्या हम जैविक घड़ी के होने या न होने की पहेली को हल कर सकते? उन्होनें जैविक घड़ी पर प्रकाश डालते हुये बताया की नेमाचिलस एवेजार्डी नामक मछली बहते पानी की एक छोटी मछली है जो कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर छग की पहाड़ियों की गहरी गुफाओं में निवास करती है। नेमाचिलस एवेजार्डी एक विशिष्ट शैलीगत मछली है। जो कि सम्पूर्ण विश्व में शैलीगत मछलीयों की 18 फैमलीयों से संबंधित लगभग 86 प्रजातियां पाई गई है। इन जीवों की भूमिगत वातावरण में रहने हेतु इनमें कई विशेषतांए निहीत होती है। जेैसे दृष्टिकार्यिकी में कमी, अरंजकता, मेटाबोलीसम दर में कमी, भोजन की कमी के लिये बेहतर प्रतिरोधकता, सर्केडियन घड़ी क्रियाविधी का आंशिक या पूर्ण प्रतिगमन एंव अन्य कई व्यवाहारिक लक्ष्णों का परिवर्धन या विलोपन इत्यादि। उन्होंने बताया की वे भूमिगत जीवन के लिए अनुकूल विकासवादी प्रकियों को समझने के लिये एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते है। हाइपोजियन/भूमिगत जीवों में जैविक घड़ियों से संबंधित अध्ययन करना काफी रोचक है। क्योंकि वे निरंतर अधेंरे निश्चित तापमान और आर्द्रता में रहते है। इसके विपरित एंमफीबीयन भूमि पर रहने वाले जीव वातावरण में दिन रात का चक्र पुर्वानूमान योग्य है। और जैविक लय को तालबद्ध करने के लिये जाना जाता है। शैलीगत मछलियों में कार्यात्मक जैविक घड़ी की उपस्थिती के समर्थन में कुछ साक्ष्य बच्चों के सामने प्रस्तुत कियें। उन्होंने प्रकाश रहित संकेतों की भूमिका को भी समझाया। जो सम्भवतः नेमाचिलस एवेजार्डी की जैविक घड़ियों एंव कुटुम्बंर गुफा में रहने वाले अन्य जीवों के लिये एक जाइटगेबर के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को बताया।उन्होंने भूमिगत जीवों में जैविक घड़ी निहित रहित होने की पहेली को हल करने काफी व्यापक रूप से समझाया। व्याख्यान पश्चात् छात्रों को रविशंकर विवि के विभिन्न अध्ययन शालाओं फार्मेसी, गणित स्टेेटिक्स, लाईफ साईंस, लाईब्रेरी, फिजिक्स, बायोटेकनोलाॅजी जैसे प्रयोगशालाओं में भ्रमण कर छात्र-छात्राओं को प्रयोगिक कार्य कर विज्ञान के रहस्यों से रूबरू कराया । इंस्पायर इंटर्नशिप के चौथे दिन ड़ाॅ कल्लोल घोष (रसायन), डॉ़. सुनेत्रा गिरधर (एस्ट्रोफिजिक्स) एवं सिद्धांत अग्रवाल (एमबीबीएस) द्वितीय वर्ष के छात्र का व्याख्यान होगा

 

20-05-2019
25 से नौतपा, तीन दिन तक रहेगी भीषण गर्मी, जून में बारिश के योग 

नवापारा राजिम। रोहिणी नक्षत्र में नौतपा के 9 दिन के दौरान गर्मी बढऩे के साथ तेज हवा व आंधी चलने की संभावना है जिसमें बूंदाबांदी और हल्की बारिश भी हो सकती है। पंचांग की गणना के अनुसार सूर्य को रोहिणी में प्रवेश 25 मई की रात 8.20 बजे होगा। सूर्य का रोहिणी प्रवेश 8 जून को शाम 6.20 बजे तक रहेगा। इस दृष्टि से सूर्य का रोहिणी की कक्षा में तकरीबन 15 दिन का संचरण होगा। इन 15 में प्रथम नौ दिन नौपता के माने जाते हैं। इस दौरान मान्यता यह होती हैं कि जब ग्रहों की दृष्टि संबंध तथा चंद्र का दैनिक संचार की गणना से अलग राशियों से संपर्क होता हैं। तब वातावरण में तपिश की स्थिति का पानी गिरने की स्थिति बनती है। मान्यता यह भी हैं कि रोहिणी में तेज गति से पानी का गिरना अच्छा माना जाता हैं। बारिश के लिए सिस्टम सक्रिय होगा। इस बार भी मौसम विभाग के अनुमान लगाया हैं कि 25 मई तक तेज गर्मी पडऩे के बाद बारिश के लिए सिस्टम सक्रिय होगा। स्थानीय प्रभाव का भी असर होगा। वजह यह रहेगा कि सूर्य की तपिश कम होगी। 25, 26 और 27 मई को तपिश बढ़ेगी। इस दौरान बूंदाबांदी भी होगी फिर तीन दिन यानी 28, 29, 30 मई को उमस बढऩे के साथ हल्की बारिश के आसार हैं। 31 मई व 1 और 2 जून को तेज हवा और आंधी तूफान के साथ बारिश के योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रम्हदत्त शास्त्री, पं. कन्हैया महाराज, पं. रमाकांत महाराज के अनुसार मंगल-राहु का अंगारक योग और शनि-केतु की युति का तम सप्तक दृष्टि संबंध वातावरण में गर्मी पैदा करेगा। उमस बढ़ेगा और प्राकृतिक परिवर्तन के संकेत देगा।

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