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29-01-2020
सीएम की पाठशाला में भूपेश बघेल ने कहा, धरना-प्रदर्शन, हड़ताल में बंद नहीं होंगे स्कूल-कॉलेज

रायपुर। राजधानी रायपुर के विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने बुधवार को सीएम की पाठशाला कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सफलता, शिक्षा, सफल लीडर, गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा,परीक्षा के डर से उबरने जैसे विषयों पर रोचक सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने रोचक शैली और सहज-सरल भाषा में विद्यार्थियों के प्रश्नों के जवाब दिए। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी छात्र-छात्राओं में मुख्यमंत्री से प्रश्न पूछने की होड़ लगी रही। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि आप लोगों में सवाल पूछने की उत्सुकता है। यह जानकर मुझे अच्छा लगा। सवाल पूछने से ही व्यक्ति का विकास होता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि जब तक उनके प्रश्न का जवाब ना मिल जाए तब तक कोशिश करते रहें।

कार्यक्रम में एक छात्र ने मुख्यमंत्री से पूछा कि रायपुर में धरना, प्रदर्शन और बंद के दौरान स्कूलों में व्यवधान न हो। इसके लिए सरकार ने क्या व्यवस्था की है? मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि धरना,प्रदर्शन और हड़ताल के दौरान स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई में व्यवधान नहीं आए और विद्यार्थियों को असुविधा न हो। जबरदस्ती स्कूल-कॉलेज बंद कराने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक छात्रा के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को जिला स्तर पर आयोजित होने वाली खेल-कूद प्रतियोगिताओं में शामिल होने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में वन-डे और इंटरनेशनल क्रिकेट मैच आयोजित करने की पहल की जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का बच्चों को भ्रमण भी कराया जाएगा। स्कूलों की छुट्टी के समय लगने वाले जाम के संबंध में प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि शाला प्रबंधन और जिला प्रशासन को स्कूलों की छुट्टी के समय कुछ अंतराल रखने के लिए व्यवस्था के निर्देश दिए जाएंगे।

विद्यार्थियों ने सफलता की परिभाषा के संबंध में प्रश्न पूछे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य निर्धारित करना और उसे हासिल करना ही सफलता है। लक्ष्य आप स्वयं निर्धारित करें। एक बार फेल होने पर कोई असफल नहीं होता। अपनी सफलता आपको खुद निर्धारित करनी चाहिए। सफलता के लिए जरूरी गुणों के संबंध में उन्होंने कहा कि सफलता के लिए स्व-अनुशासन जरूरी है। जब शारीरिक रूप से मजबूत रहेंगे, तभी स्वस्थ्य तन में स्वस्थ मन का वास होगा और अच्छे विचार आएंगे। सफलता के लिए समय का सदुपयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। मेहनत विवेकपूर्ण तरीके से समर्पण के साथ की जानी चाहिए। भूपेश बघेल ने शिक्षा के संबंध में कहा कि शिक्षा विद्यार्थियों को हुनरमंद बनाने वाली और उनकी प्रतिभा को निखारने वाली होनी चाहिए। शिक्षा विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण देने वाली होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने सफल लीडर के संबंध में पूछे गये प्रश्न के सवाल में कहा कि जो समाज को दिशा दे, समाज सुधार के लिए जीवन समर्पित करे दे,जिसका समाज निर्माण में योगदान हो,जो समाज को जोड़कर रखे और जो समाज को आगे बढ़ाए। वही सही मायने में लीडर है। महात्मा गांधी और सुभाषचन्द्र बोस ने देश की सेवा की। वे हमारे लीडर हैं।

एक छात्रा ने पूछा कि स्टूडेंट लाइफ में आप एक्जाम के टेंशन से कैसे उबरते थे। मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा कि अपने डर को आप स्वयं दूर कर सकते हैं। कोई दूसरा नहीं। सभी लोगों को किसनी ना किसी चीज से डर लगता है। राजनीतिज्ञ को चुनाव आने पर डर लगने लगता है, लेकिन डर के आगे ही जीत है। आप बुद्धि के साथ मेहनत करेंगे तो सफलता निश्चित मिलेगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। जब आत्मविश्वास आएगा तो कोई भी आपको पराजित नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि जब कोई समस्या आए तो घबराए नहीं उसके निदान के बारे में सोचें और जो सबसे अच्छा विकल्प है उस पर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आपको जिन चीजों से डर लगता है उसकी सूची बनाएं और रोज सोने के पहले संकल्प लें कि मैं नहीं डरूंगा ऐसा करने पर आप अपने डर के बारे में सोचेंगे और उसे दूर करने का उपाय करेंगे। आपके डर का कारण आप ज्यादा बेहतर जानते हैं। इसलिए डर से उबरने में आपसे बढ़ि़या दूसरा सहयोगी नहीं हो सकता।

बच्चों ने मुख्यमंत्री से कुछ व्यक्तिगत प्रश्न भी पूछे। एक छात्रा ने पूछा कि आपको संघर्ष से सफलता मिली कैसा महसूस करते हैं। हम विद्यार्थी इससे क्या सीख सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं इस पद पर आऊंगा। यह मेरा लक्ष्य भी नहीं था। मेरा लक्ष्य जनसेवा, किसानों,गरीबों की सेवा था। मुझे जिम्मेदारी मिलती गई और मैं इस मुकाम तक पहुंचा। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि राजनीति हो या शिक्षा,व्यवसाय या उद्योग हो इसमें शार्टकट नहीं होता। हम जिस क्षेत्र में हो वहां कठोर परिश्रम करना चाहिए। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि ना तो मेरे माता-पिता ने मुझे डाक्टर,इंजीनियर बनने के लिए दबाव डाला और ना ही मैंने अपने बच्चों पर। विद्यार्थियों को स्वयं तय करना चाहिए कि आगे क्या बनना है। पं.दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम लगभग डेढ़ हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी योजना के संबंध में कहा कि इससे नदी-नाले रिचार्ज होंगे, गौठानों में पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था होगी। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। पशुओं के गौठानों में रहने से फसल चराई और सड़क दुर्घटना जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी। यह योजना पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग को रोकने में भी सहायक होगी।

 

23-01-2020
सुभाषचन्द्र बोस की जयंती पर निगम मुख्यालय के सामने आयोजित हुए कई कार्यक्रम

रायपुर। सुभाषचन्द्र बोस की जयंती के अवसर पर स्कूलों के बच्चों ने तेलीबांधा चौक से रैली का आयोजन किया। रैली कालीबाड़ी चौक से होते हुए व्हाइट हाउस में समाप्त हुई। बंगाली कालीबाड़ी समिति के पूर्व सचिव अरुण भद्रा ने कार्यक्रम के बारे में बताया कि ये कार्यक्रम सुबह से देर रात तक चलेगा। उन्होंने कहा कि ये आयोजन राजधानी में पहली बार किया जा रहा है। साथ ही नगर निगम मुख्यालय के सामने देशभक्ति कार्यक्रम एवं छत्तीसगढ़ी और बंगाली फूड स्टॉल का भी आनंद राजधानीवासी उठा सकते हैं। अरुण भद्रा ने बताया कि युवाओं एवं आम जनता के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि लोगों में देश भक्ति की भावना बनी रहे। देश की आजादी में महापुरुष के बलिदान और योगदान से युवा और आनेवाली पीढ़ी अवगत हो सके।

पूजा गर्ग की रिपोर्ट


 

03-10-2019
सीएम भूपेश बघेल की सावरकर पर टिप्पणी से सदन में हंगामा, विपक्ष ने बहिर्गमन कर दिया धरना

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र के समापन दिवस गुरुवार को सीएम भूपेश बघेल की सावरकर को लेकर की गई टिप्पणी से विपक्ष ने नाराजगी जताई। विपक्ष ने  टिप्पणी पर जमकर हंगामा किया और विलोपित करने की मांग की। इस पर सीएम भूपेश बघेल ने शब्द वापस लेने से इंकार कर दिया। विपक्ष के सदस्यों ने वीर सावरकर के समर्थन में नारे लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया और विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना दिया। दरअसल सीएम भूपेश बघेल ने महात्मा गांधी पर चर्चा के समापन पर कहा कि आज का राष्ट्रवाद भयानक किस्म का हिंसक है, अराजक और उत्तेजित इस राष्ट्रवाद में जीवन का कोई सम्मान नहीं है। ये राष्ट्रवाद बाहर से आया हुआ है, इसकी जड़ें जर्मनी और इटली से गढ़ी हुई हैं। मैंने पढ़ा है कि सावरकर के बुलावे पर गांधी लंदन में उनके पास गए थे, उस वक्त दोनों ने रामायण का उदाहरण दिया और महात्मा गांधी ने कहा कि रावण जैसे शक्तिशाली से सत्य ही जीतता है तो  दूसरी तरफ  सावरकर ने कहा था कि दुष्टता का नाश उसी तरह से होता है। सीएम बघेल ने कहा कि अपने भाषण में शिवरतन शर्मा ने कहा था कि गांधी आरएसएस की शाखाओं में जाते थे। दरअसल गांधी अपने विरोधियों के पास भी जाते थे। बृजमोहन अग्रवाल और नेता प्रतिपक्ष ने अपने भाषण में कहा कि सरकार गांधी के बताए रास्ते पर नहीं चल रही। अब मैं 9 महीने का हिसाब दूं या फिर 15 सालों की समीक्षा करूं? हम सब यहां हैं तो गांधी की विचारधारा की वजह से ही। हमें आजीविका का अधिकार, शिक्षा का अधिकार कांग्रेस की सरकार से ही संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अजय चंद्राकर ने सदन में उल्लेख किया था कि महात्मा गांधी चाहते तो भगत सिंह को बचा सकते थे, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि गांधी ने वायसराय को चिट्टी लिखी थी। नेहरू जेल में जाकर मिले थे। भूपेश बघेल ने पूछा कि जरा ये बताएं कि उनके नेता कब भगत सिंह के साथ खड़े रहे? सिर्फ  गोडसे, सावरकर ही गांधी से असहमत नहीं थे, सुभाषचन्द्र बोस भी असहमत थे, अंबेडकर भी असहमत थे, कई ऐसे दूसरे भी थे जो असहमत थे, लेकिन उन लोगों ने हत्या नहीं की। सुभाषचंद्र बोस ने सेना बनाई थी और सबसे पहले महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा था। सीएम ने कहा कि इतिहास गवाह है कि सावरकर छिपकर मारने से पीछे नहीं हटते थे। सीएम बघेल ने बीजेपी विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आपके लिए सावरकर वीर है, लेकिन हमारे लिए गांधी वीर है। इतिहास में ये साक्ष्य भी है कि गोडसे सावरकर का शिष्य था। सीएम भूपेश बघेल की इस टिप्पणी पर भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि सावरकर को बाइज्जत बरी किया गया था। अजय चंद्राकर ने भूपेश बघेल के शब्दों को विलोपित करने की मांग की। जवाब में भूपेश बघेल ने कहा कि मैं अपने शब्द वापस नहीं लूंगा। सदन में भारी हंगामे के बीच विपक्ष के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही से बहिर्गमन किया। हंगामे के मध्य भी सीएम बघेल ने अपनी बात जारी रखी।

 

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