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26-08-2020
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने वकील से पूछा, अपनी जमीन की कीमत बढ़ाना तो नहीं चाहते...

रायपुर। हाईकोर्ट की खंड पीठ में मंगलवार को एक रोचक मामला आया। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान खंड पीठ ने आशंका जाहिर करते हुए विधि अधिकारी को यह पड़ताल करने निर्देशित किया कि याचिकाकर्ता की गांव के बाहर जमीन तो नहीं है। जहां से सड़क निर्माण की मांग कर अपनी जमीन की कीमत बढ़ाना चाहता हैं। पूरे मामले की रिपोर्ट पेश करने खंड पीठ ने कहा है। इसके बाद अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह बाद का समय दे​ दिया। बता दें कि गरियाबंद जिले के ग्राम छुरा निवासी मानसिंह साहू ने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर गांव के भीतर से सड़क निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है।

याचिका के अनुसार राजिम से ग्राम छुरा तक मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सड़क निर्माण के लिए विभागीय अधिकारियों ने जो रूट तय किया है। उसके अनुसार ग्राम छुरा की बस्ती से होकर निर्माण कार्य करना बताया जा रहा है। गांव के भीतर बीच बस्ती से सड़क बनाने की स्थिति में सांस्कृतिक भवन, सामुदायिक भवन सहित अन्य शासकीय भवनों को तोड़ना पड़ेगा। इससे सरकारी धन की क्षति होगी। भवनों को तोड़ने के बाद नए सिरे से भवन निर्माण के लिए फंड जारी करना पड़ेगा। याचिका के अनुसार बीच बस्ती के बजाय गांव के बाहर से होकर सड़क निर्माण की जाए। चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की खंड पीठ में मामले की सुनवाई हुई।

20-08-2020
न्यायालय में मुकदमा चलाने का डर दिखाकर वकील बनकर की लाखों रूपए की ठगी

रायपुर। न्यायालय में मुकदमा होने का डर दिखाकर लाखों रुपये की वसूली करने की रिपोर्ट तेलीबांधा थाने में दर्ज की गई है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार तेलीबांधा मौलीमाता मंदिर पानी टंकी निवासी राजेश साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि इंटरनेट के माध्यम से नौकरी की तलाश कर रहा था तभी कुछ लोगों से ईमेल के जरिए बात हुई। ईमेल से बातचीत के दौरान प्रार्थी को इमेल में ही कन्फर्मेशन लिया था व मुझे ये बताया गया की कंपनी एक एप्लीकेशन देगा और उसमे कुछ वीडियो भेजना था। कम्पनी द्वारा ईमेल में एक साधारण लिखित में इकरारनाम (ईमेल) लिया गया था। इसमें लिखा था कि मैं कम्पनी के साथ जुड़कर काम करने का इकरारनामा ईमेल पर, होने के बाद आनलाइन बातचीत हुई। इसके बाद किसी भी तरह से संपर्क नहीं हो पाया परन्तु अगस्त माह में एक युवती का मेरे मोबाइल पर कॉल आया और अहमदाबाद गुजरात न्यायालय में केस फाइल होने की बात कही गई। फोन में कहा गया कि आपके ऊपर केस फाइल किया गया है। केस को पूरी तरह ख़त्म करने के लिए 10,500 रूपये जमा करने बोला गया। युवती  ने बैंक का खाता संख्या दी व कहा कि यह पैसा सरकार के खाते में जमा किया जायेगा और अगर नहीं जमा किये तो आपको न्यायालय से आदेश मिलेगा। प्रार्थी ने बताया कि दूसरे दिन फिर एक अन्य युवती का कॉल आया और कहा कि आपको 15,550 रू जमा करना पड़ेगा। यह रकम आपकी सबसे आखरी रकम होगी इसके बाद किसी को भी रकम नहीं देनी है कहकर पैसा जमा करा लिये। इस तरह से अलग-अलग नंबर से पीडि़त के मोबाइल फोन पर न्यायालय का डर दिखाकर व कॉल करने वाले ने स्वयं को वकील बताकर 1 लाख 35 हजार 2 सौ रुपये की धोखाधड़ी कर ठगी कर लिया। घटना की रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 420,34 के तहत अपराध कायम कर मामले की जांच में जुटी हुई है।

 

31-07-2020
छत्तीसगढ़ में बनी हिंदी फिल्म 'माय क्लाइंट्स वाइफ' आज होगी रिलीज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बनी पहली सस्पेंस थ्रीलर फिल्म 'माय क्लाइंट्स वाइफ' की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ आज होने जा रही है। माय क्लाइंट्स वाइफ नाम भले ही अंग्रेजी में है, लेकिन हिंदी में बनी फिल्म है। फिल्म के डायरेक्टर प्रभाकर मीना भास्कर पंत हैं। बेहद कम बजट व संसाधनों में बनी इस इस फिल्म को सिनेमाहॉल में प्रदर्शित करना एक महंगा खर्च है, इसलिए इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल रिलीस किया जा रहा है। 31 जुलाई को भारत के साथ साथ अमेरिका, दुबई एवं अन्य कई देशों में भी इस फिल्म को रिलीज किया जा रहा है। फिल्म की विशेषता यह भी है कि इसके 3-4 प्रीव्यू रायपुर व मुंबई में हो चुके हैं। फिल्मों में रूचि रखने वाले व समीक्षकों को बुलाकर उनसे फीडबैक भी लिए गए हैं।

अलग ही तरह की सस्पेंस स्टोरी -

फिल्म माय क्लाइंट्ल वाइफ में अलग तरह का सस्पेंस है। कहानी एक वकील की है। इसमें पति-पत्नी के बीच कोई वारदात होती है। वकील इस केस की वकालत करता है। इसमें पति-पत्नी दोनों अलग-अलग तरह के जोरदार तर्क व साक्ष्य देते हैं, जिससे वकील पशोपस में पड़ जाता है। केस की छानबीन व गहराई में जाने पर वकील को लगता है कि केस बेहद जटिल है। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है नाटकीय घटनाक्रम में परते-दर-परते उधड़ती चली जाती हैं। जो न सिर्फ वकील, बल्कि पुलिस को हिलाकर रख देती हैं। इन्हीं सबके बीच दर्शकों को बेहद रोमांच महसूस होता है और वह अंत तक फिल्म से बंधा रहता है।

फिल्म की शूटिंग के दौरान रोचक नजारे भी सामने आए। फिल्म का एक दृश्य बूढ़ातालाब के पास फिल्माया जा रहा था। अपराधी को पकड़ने पुलिस उसके पीछे भाग रही थी, तब वहां से असली पुलिस गुजरी उसे लगा कि वाकई कोई घटना हो रही है। पीसीआर वैन में सवार पुलिस अपराधी के पीछे लग गई और उसे बाजू से पकड़ कर धर दबोचा। असलियत सामने आने पर सबने खूब मजा लिया। फिर सीन का रि-टेक किया गया। छत्तीसगढ़ पुलिस की सक्रियता देख मुंबई की फिल्म यूनिट के लोग काफी प्रभावित हुए। वे मुंबई में शूटिंग के दौरान होने वाले जनता के अवरोध, ट्रैफिक, पुलिस की बंदिश से होने वाली परेशानियों की अपेक्षा रायपुर में शूटिंग करके बेहद सहज महसूस करते रहे।

ख्यात कलाकार फिल्म में -
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता 'फिल्मिस्तान' और वेब सिरिस "फॅमिली मैन" / असुर के मशहूर कलाकार शारीब हाशमी, अभिनेत्री अंजली पाटिल ( न्यूटन, फाइंडिंग फेनी, काला (रजनीकांत) हैं, जो एनएसडी पुणे से हैं। अंजली ने कई श्रीलंकाई फिल्मों में काम किया है। फिल्म रक्तचरित्र और गुलाल में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले अभिमन्यु सिंह की भी फिल्म में प्रमुख भूमिका है। उन्होंने अक्षय कुमार की अगली फिल्म सूर्यवंशी में भी बड़ी भूमिका निभाई है. 

जानिए आप कहाँ और कैसे देख सकते है यह फिल्म -

डिस्ट्रीब्यूशन और कॉन्टेंट क्रिएशन व्यवसाय से जुड़ी भारत की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक शेमारू के जरिये फिल्म को रिलीज़ किया जा रहा है। यह एक नई शुरुवात इसलिए है क्योंकि इस प्लेटफॉर्म पर फ्राइडे रिलीज़ फिल्मों की तर्ज पर हर हफ्ते फ्राइडे को एक फिल्म ऑनलाइन रिलीज़ करने की योजना है। जिसके लिए बाकायदा 'BookMyShow' जैसी कंपनी से टिकट बुक करके फिल्म को देखा जा सकेगा। ये फॉर्मेट अमेरिका में पहले से ही प्रचलित है लेकिन भारत में इसे पहली बार लाया जा रहा है। अब जबकि कोविड 19 के बाद हालात थिएटर्स में जाके देखने लायक बचे नही तो ऐसे में ऑनलाइन रिलीज़ में नए प्रयोगों का होना लाज़मी है। शानदार कंटेंट प्रदान करने वाली कंपनी मीडिया और मनोरंजन कंपनी Shemaroo एंटरटेनमेन्ट लिमिटेड ने एक pay-per-movie सर्विस लॉन्च की है। यानी अब आप सिर्फ एक फिल्म का भुगतान कर कोरोना महामारी (Covid-19) में भी घर बैठै movie का आनंद ले सकते हैं। जबकि अमेरिकी कंपनी Netflix और amazon prime पर लोगों को एक महीने या एक साल का सब्सक्रिप्शन पैकेज लेना पड़ता है तब जाकर वह नई फिल्म देख पाते हैं। Shemaroo जो नया स्कीम लॉन्च कर रहा है, इसमें आपकों कोई सब्सक्रिप्शन नहीं करना पड़ेगा। कंपनी के मुताबिक, BookMyShow की तरह ShemarooMe पर मात्र में 100 रुपये में टिकट बुक कर फिल्म के रिलीज होने के बाद तीन दिनों तक movie को जितनी बार देखना चाहते हैं उतनी पार देख सकते हैं। रिलीज होने के बाद फिल्म को ShemarooMe Box Office पर देखा जा सकता है।

15-07-2020
तंजावूर में बांस की टोकरी बनाकर जीवनयापन करने वाले वकील को चीफ जस्टिस ने भेजे 10 हजार रुपए 

रायपुर/बिलासपुर। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल में तमिलनाडु तंजावूर के वर्ष 2010 के विधि स्नातक के.उत्थमकुमारन की कहानी के अखबारों में प्रकाशन के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन ने उन्हें उपहार स्वरूप 10 हजार रुपए का चेक भेजा है। बता दें कि कोविड-19 के कारण बीते तीन माह से कोर्ट में कामकाज बंद होने से के. उत्थमकुमारन जैसे अन्य वकीलों की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी है। आर्थिक बदहाली के दौर में वे अपने पुरखों के धंधे की ओर लौट गए हैं और बांस की टोकरी बनाकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

न्यायालीयन कामकाज के दौर में वे प्रति माह 25 हजार रुपए कमा लेते थे। काम बंद होने से आय का बड़ा जरिया खत्म हो गया है। पुस्तैनी व्यवसाय को उन्होंने थाम लिया है। कोरोना संक्रमण काल में कई राज्यों के हाई कोर्ट के अलावा अधीनस्थ न्यायालयों में कामकाज बंद है। तमिलानाडु भी इससे अछूता नहीं है। यहां भी एक वकील के. उत्थमकुमारन बांस की टोकरी बनाकर जीवनयापन करने को मजबूर हैं। इसकी जानकारी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन को लगी। उन्होंने वकील के नाम 10 हजार रुपये का चेक उपहार स्वरूप भेजा है।

14-07-2020
सुप्रीम कोर्ट में आज गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों के एनकाउंटर की जांच पर सुनवाई

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों के एनकाउंटर पर मंगलवार को सुनवाई होगी। सीजेआई एसए बोबडे की पीठ में सुप्रीम कोर्ट अपनी निगरानी में सीबीआई से मामले की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।बता दें कि गैंगस्टर विकास दुबे के पुलिस एनकाउंटर की जांच के लिए न्यायिक आयोग बनाने की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने खरिज कर दी है। सोमवार को न्यायमूर्ति पीके जायसवाल और न्यायमूर्ति केएस पवार ने एक स्थानीय वकील की जनहित याचिका पर, याची की ओर से इसे वापस लेने के आधार पर फैसला सुनाया। उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने कहा है कि सरकार ने पहले ही हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति शशिकांत अग्रवाल का न्यायिक आयोग गठित कर दिया है। एसआईटी प्रकरण की जांच कर रही है।

ऐसे में याचिका महत्वहीन और खारिज करने लायक है। उन्होंने इससे संबंधित सरकार की अधिसूचना भी पेश की, जिसका कोर्ट ने अवलोकन किया। इस पर याची नंदिता भारती ने याचिका को यह कहते हुए वापस लेने की गुजारिश की कि उसे नई याचिका दाखिल करने की इजाजत दी जाए। कोर्ट ने याचिका खारिज कर भविष्य में जरूरत पड़ने पर नई पीआईएल दाखिल करने को कहा है।

09-07-2020
विकास दुबे गिरफ्तारी मामला: लखनऊ के दो वकीलों को लिया गया हिरासत में,पूछताछ जारी

लखनऊ। उज्जैन के महाकाल मंदिर से कुख्यात अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ के दो वकीलों को भी उज्जैन से पुलिस हिरासत में लिया गया है। ये दोनों वकील निजी गाड़ी से उज्जैन गए थे। पुलिस उनसे विकास दुबे से कनेक्शन की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि कहीं इन्होंने ही तो विकास दुबे की मदद नहीं की क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा देते हुए विकास मध्यप्रदेश कैसे पहुंच गया ये बड़ा सवाल है। पुलिस उसके गुर्गों का सफाया करने में लगी रही और विकास दुबे उज्जैन पहुंच गया। अब सवाल उठ रहा है आखिर वहां तक पहुंचने में विकास की मदद कौन कर रहा था। कहा तो यह जा रहा था कि उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे सभी राज्यों की पुलिस विकास दुबे को लेकर हाईअलर्ट पर थी, बावजूद इसके वह कानपुर से दिल्ली होते हुए हरियाणा के फरीदाबाद शहर जा पहुंचा था। इसके बाद हरियाणा से मध्यप्रदेश तक आ गया। यहां पुलिस की चुस्ती और मुस्तैदी पर सवाल उठना लाजमी भी है। आखिर राज्यों की सीमा और टोल नाकों पर तैनात पुलिसकर्मी और सीसीटीवी कैमरे क्या केवल खानापूर्ति के लिए लगे हुए थे। बुधवार तक विकास दुबे की लोकेशन फरीदाबाद और एनसीआर बताई जा रही थी लेकिन यहां से वो उज्जैन कैसे पहुंचा, ये सवाल अब भी अनसुलझा है। फरीदाबाद से उज्जैन तक का सफर सड़क मार्ग से करने पर कम से कम 14 घंटे का समय लगता है। दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 774 किलोमीटर है। अब इस सवाल का जवाब या तो पुलिस दे सकती है या फिर खुद विकास की वो उज्जैन कैसे पहुंचा।

 

09-07-2020
बार काउंसिल एक हजार वकीलों को करेगी मदद, 14 सौ को पहले मिल चुकी है सहायता राशि

रायपुर/बिलासपुर। लॉक डाउन के दौरान काम ठप रहने से छत्तीसगढ़ में भी वकीलों की हालत खराब है। स्टेट बार काउंसिल की ओर से पूर्व में 1400 से ज्यादा वकीलों को सहायता राशि दी जा चुकी है। अब एक हजार और वकीलों को मदद दी जा रही है। लॉक डाउन में निचले कोर्ट बन्द हैं। वही हाईकोर्ट में भी सीमित काम हो रहा है। इससे खासतौर पर जूनियर वकीलों के समक्ष आर्थिक संकट हो रहा है। काम ठप होने पर बार कौंसिल ने जरूरतमंद वकीलों की मदद की घोषणा की तो आर्थिक मदद के लिए लगभग ढाई हजार आवेदन मिले। प्रदेश में वकीलों की संख्या 28 हजार है। मदद के आवेदनों की संख्या अभी और बढ़ने का अनुमान है।

बार काउंसिल  के कोषाध्यक्ष अब्दुल वहाब खान ने बताया कि पहली किस्त में 1089 वकीलों को तीन-तीन हजार रुपए की मदद दी गई थी। दूसरी क़िस्त में 332 वकीलों को इतनी ही मदद दी गई। यह मदद बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मिले 45 लाख के फंड से दी गई है। बाकी एक हजार वकीलों को भी अब 3-3 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। बार काउंसिल की सामान्य निधि से मदद दी जाएगी। कोषाध्यक्ष ने बताया कि राज्य शासन से भी मदद की जरूरत है ताकि जरूरत के अनुसार वकीलों की और मदद की जा सके। लेकिन राज्य शासन की ओर से अब तक कोई मदद नहीं की गई जबकि प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।

हाईकोर्ट ने भी दिया है आदेश :

इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक जनहित भी दायर की जा चुकी है। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए ट्रस्टी कमेटी को बैठक करने और राज्य शासन को मदद करने का आदेश दिया है।

11-06-2020
वकीलों को हो रही आर्थिक परेशानी, गौबिनाथ साहू ने छत्तीसगढ़ बार काउंसिल के सदस्यों को लिखा पत्र

सूरजपुर। जिले के विधि प्रकोष्ट अध्यक्ष गैबीनाथ साहू ने कोरोना महामारी के दौरान सरकार द्वारा लॉक डाउन किये जाने से जिले के वकीलों के आर्थिक परेशानी को देखते हुए छत्तीसगढ़ बार काउंसिल के चेयरमैन, बार काउंसिल आफ इंडिया सदस्य, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन बिलासपुर सेक्रेटरी को पत्र लिखा है। इसमें आर्थिक परेशानी को देखते हुए आर्थिक पैकेज की मांग की है साहू ने अपने पत्र में लिखते है कि विश्व व्यापी कोरोना माहामारी के इस संकट की घडी में न्यायालीन कार्य भी प्रभावित हुआ है, ऐसे समय में वकीलों के पास भीषण आर्थिक समस्या उत्पन्न हो चुकी है, हो सकता है की हजारों वकीलों के सामने खाद्यान समस्या भी हो रही है। बार काउंसिल एवं बार एसोसिएसन ही ऐसे समय में वकीलों की मदद कर सकती है, क्योकि उनके बनाने का उद्देश्य वकीलों का कल्याण है, लेकिन आज तारीख तक वकीलों को किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान नहीं की गयी है।

कुछ जिला बार ने अपने तरफ से या कुछ वकीलों ने व्यक्तिगत तौर पर सहायता की है, लेकिन वैधानिक संस्था बार काउंसिल से कुछ भी मदद नहीं मिल पा रही है, यह प्रक्रिया 3 माह से चल रही है। उच्च न्यायालय ने अपने एक प्रकरण में wpPIL / 33 / 2020 राजेश केशरवानी विरुद्ध राज्य में 6 मई को यह आदेश दिया है। इसमें महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य योजना बनने को तैयार है वकीलों की मदद करने लिए। बार काउंसिल योजना बनाने में मदद करें, अपनी योजना का प्रस्ताव भेजे। इसके बाद भी आज तक बार काउंसिल द्वारा कोई भी योजना बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को नहीं सौंपा है। इसके कारण वकीलों को कोई आर्थिक मदद नहीं हो पा रही है। शीघ्र राज्य सरकार को माहाधिवक्ता के माध्यम से अपनी तरफ से योजना का स्वरूप सौंपे जिसमें राज्य सरकार नियम बनाकर वकीलों की आर्थिक मदद करने की मांग की है।

20-03-2020
निर्भया केस : हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, फांसी का समय नजदीक

रायपुर। निर्भया के दोषियों की याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। करीब 2 घण्टे चली सुनवाई के बाद देर रात हाई कोर्ट के जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने याचिका खारिज कर दी। दोषियों ने फांसी से बचने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को चुनोती देने एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन बचाव पक्ष के कोई तर्क काम नहीं आए। दोषियों के वकील एपी सिंह का कहना है कि वे लोग आदेश मिलते ही सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इधर निर्भया के माता पिता का कहना है कि आज पूरी रात जागेंगे और दरिंदों को फांसी पर लटका कर ही घर जाएंगे। बहरहल चारों दोषियों को फांसी 20 मार्च सुबह साढ़े 5 बजे देने का दिन और समय तय हुआ है, जिसकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। कुछ ही घण्टे बाकी है। तिहाड़ जेल में फांसी की पूरी तैयारी कर ली गई है। जल्लाद भी तैयार है। इस बीच अब दोषियों के वकील एपी सिंह सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार से मिलने जा रहे हैं। फांसी रोकने आखरी प्रयास सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने की तैयारी की जा रही है। इधर निर्भया की माँ ने कहना है कि हम भी सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं लेकिन पूरा विश्वास है कि दरिंदों को सुबह साढ़े 5 बजे फांसी जरूर मिलेगी।

16-03-2020
कोरोना वायरस के कारण सुप्रीम कोर्ट भी सतर्क, सिर्फ गंभीर मामलों की होगी सुनवाई

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण सु्प्रीम कोर्ट भी काफी सतर्क हो गया है। ऐसे में अब सोमवार से केवल अर्जेंट मामलों की सुनवाई होगी। शुक्रवार को कोरोना वायरस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने ये फैसला लिया है। साथ ही कहा है कि मामले से जुड़े वकीलों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को कोर्ट रूम में जाने की अनुमति नहीं होगी। कोरोना के खौफ में जी रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर हैं। दिल्ली के एक और कोरोना पीड़ित मरीज को ठीक होने का बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक दिल्ली के दो मरीज अब तक कोरोना के संक्रमण को हराकर ठीक हो चुके हैं। सफदरजंग अस्पताल से जिस दूसरे कोरोना पीड़ित मरीज को ठीक होने के बाद छुट्टी मिली है, वह उत्तम नगर इलाके का रहने वाला है। इस मरीज को मार्च के पहले सप्ताह में सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया था और 6 मार्च को इसमें वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी।

01-03-2020
भू-विस्थापित की याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा प्रबंधन से जवाब

रायपुर। कुसमुंडा के वीर सिंह ने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि एसईसीएल प्रबंधन ने कुसमुंडा ओपन कॉस्ट खदान के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। वर्ष 1983 में उसकी जमीन अधिग्रहित की गई है। इस दौरान भू-विस्थापितों को खदान में नौकरी देने की बात भी हुई थी। याचिकाकर्ता ने याचिका में आगे कहा है कि भू-अर्जन अधिनियम के तहत भू-विस्थापित को नौकरी देनी है। इसके बाद भी एसईसीएल प्रबंधन ने अब तक नौकरी नहीं दी। भू-विस्थापित की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एसईसीएल के सीएमडी और मानव संसाधन विभाग की जनरल मैनेजर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।  

13-02-2020
निर्भया मामला : अब दोषी विनय शर्मा की ओर से दी गई मानसिक स्थति खराब होने की दलील

नई दिल्ली। निर्भया मामले में दोषी विनय शर्मा ने मानसिक स्थति खराब होने की दलील देकर फांसी से माफी की मांग की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज करने के खिलाफ दोषी विनय शर्मा की याचिका पर फैसला शुक्रवार के लिए सुरक्षित रख लिया है। निर्भया केस में दोषी विनय के वकील ने फांसी टालने के लिए पैंतरा इस्तेमाल करते हुए कहा,'विनय शर्मा की मानसिक स्थिति सही नहीं है,मानसिक रूप से प्रताड़ित होने की वजह से विनय मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहा है, इसलिए उसको फांसी नही दी जा सकती है।' वकील एपी सिंह ने कहा,'मेरे क्लाइंट को जेल प्रशासन द्वारा कई बार मानसिक अस्पताल में भेजा गया उसको दवाइयां दी गई। किसी को मानसिक अस्पताल तब भेजा जाता है जब उसकी मानसिक स्थिति सही नहीं हो। एपी सिंह ने कहा कि विनय शर्मा की मानसिक स्थिति सही नहीं है, मानसिक रूप से प्रताड़ित होने की वजह से विनय मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहा है इसलिए उसको फांसी नही दी जा सकती है। एपी सिंह ने कहा यह विनय शर्मा के जीने के अधिकार आर्टिकल 21 का हनन है।

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