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23-09-2020
सिर्फ दंतेवाड़ा तक नहीं पूरे प्रदेश में पीडीएस घोटाला और हेरा फेरी चल रही : महेश गागड़ा 

रायपुर। पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने प्रदेश सरकार के संरक्षण में पूरे प्रदेश में पीडीएस घोटाले और हेरा फेरी का आरोप लगाया हैं। उन्होंने कहा है कि, दंतेवाड़ा के कटेकल्याण और गुड़से से पीडीएस चावल की हेरा फेरी का मामला प्रदेश सरकार की कथनी और करनी के फर्क को उजागर करता है। एक तरफ यह सरकार आदिवासियों का हितैषी होने का ढोंग करती हैं और दूसरी ओर सरकार के नाक के नीचे खुलेआम आदिवासियों के पीडीएस चावल को हड़पने का खुला खेल चल रहा हैं। उन्होंने कहा कि, कोरोना संकट के समय में आदिवासी क्षेत्र से पीडीएस चावल की हेराफेरी अफरा-तफरी की घटना का सामने आना प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर न सिर्फ प्रश्न खड़ा करता हैं, अपितु कांग्रेस सरकार के जल जंगल जमीन की रखवाली के ढोल की पोल खोलता है। ऐसी असंवेदनशील सरकार में आदिवासियों का चावल हड़प लिया जाता हैं। यह कड़वी मगर भूपेश सरकार के कार्यपद्धति की सच्चाई हैं। 
उन्होंने कहा कि भूपेश सरकार के पौने दो वर्ष के छोटे से कार्यकाल में पीडीएस चावल की हेरफेर और हड़प नीति का यह कोई पहला मामला नहीं हैं। इससे पूर्व भी जबसे कांग्रेस के हाथ में प्रदेश की बागडोर हैं। ऐसे पीडीएस चावल हड़पने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। दुर्भग्यपूर्ण हैं कि किसी भी मामले में यह सरकार गंभीर नहीं दिखी और न ही कोई कार्रवाई हुई। पूर्व मंत्री गागड़ा ने कहा कि कांग्रेस के नेता और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब विपक्ष में थे तो पीडीएस के चावल के नाम पर खूब मगरमच्छ के आंसू बहाते थे। विपक्ष से सत्ता प्राप्ति करने तक भाजपा नेताओं पर झूठे और बेगुनियाद आरोप लगा राजनीतिक रोटी सेकते थे ।आज जब इनके सरकार में इन्हीं के नाक के नीचे आदिवासियों का चावल हड़पा जा रहा तब शायद सेकी हुई राजनीतिक रोटी मुंह में स्वाद दे रही होगी। इसलिए जुबां नहीं खोल रहे हैं। यह दुर्भग्यपूर्ण और निंदनीय हैं। गागड़ा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की हैं। प्रदेशभर में पीडीएस वितरण की समीक्षा कर गड़बड़ियों को दूर करने और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की हैं।

20-09-2020
विद्यामितानों की मांग जायजः कौशिक

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि प्रदेश भर के धरनारत विद्या मितान शिक्षकों की मांग जायज है। इस पर प्रदेश की सरकार गंभीर नहीं है। इस मुद्दे पर जब सदन में मांग उठाई गई थी तब सरकार ने भरोसा दिलाया था कि विद्यामितानों के हित में फैसला जल्द ही लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि अब न्याय नहीं मिलने से विद्यामितान धरना देने को विवश हैं। पूरे प्रदेश में युवा बेरोजगार छले जा रहे हैं। वादा पूरा करने के नाम पर कुछ भी नही हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस कोरोना काल में जब शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं,सरकार को संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनके मांगों को तत्काल पूरा करना चाहिये। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि प्रतिपक्ष के दबाव के सामने विद्यामितानों की मांग पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार को विवश होना पड़ेगा। विद्यामितानों के प्रदर्शन को हमारा पूरा सर्मथन है।

 

20-09-2020
कोरोना संकट से निपटने प्रदेश सरकार के पास कारगर नीति नहीं : अमर अग्रवाल

रायपुर/बिलासपुर। प्रदेश के पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने रविवार को पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने  कहा कि छत्तीसगढ़ में जिस तेजी से कोरोना का संक्रमण फैल रहा है। उससे निपटने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा कोई ठोस कारगर नीति नहीं बनाने से छत्तीसगढ़ में आम जनता के बीच कोरोना को लेकर भययह संशय का वातावरण बन गया है। उन्होंने कहा कि आम जनता के जानमाल की रक्षा करना किसी भी राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। लेकिन छत्तीसगढ़ में हालत यह है कि प्रभावी और ठोस शासकीय नीति के अभाव में राज्य के कोई व्यक्ति अगर कोरोना पॉजिटिव हो जाता है तो उसके मन में यह भय और संशय बन जाता है कि पता नहीं अब उसका जीवन रहेगा अथवा नहीं।

19-09-2020
राज्य सरकार करे लॉकडाउन को लेकर सभी वर्ग से संवाद,प्रदेश में एक साथ हो 15 दिनों तक लॉकडाउनः कौशिक

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के भयावह स्वरूप को लेकर प्रदेश सरकार को लगातार आगाह कर रहे हैं,लेकिन प्रदेश सरकार कोरोना को लेकर गंभीर ना ही पहले थी न वर्तमान में है। कोरोना के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिये प्रदेश की सरकार को सभी वर्ग से चर्चा करनी चाहिये। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उद्योगपति, व्यापारियों और आमजनों से वर्तमान हालत पर सरकार को चर्चा कर के पूरे प्रदेश में एक साथ ही लॉकडाउन लगाने पर उचित कदम उठाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिलावार लॉकडाउन लगाये जाने के बजाय पूरे प्रदेश में एक साथ ही लागू किया जाना चाहिये। वही इस समय पर लॉकडाउन को लेकर सारा कमान प्रदेश सरकार को अपने हाथों पर लेना चाहिये।  इसके साथ ही दो सप्ताह के लिये लॉकडाउन लगाने की जरूरत है ताकि कोरोना के हो रहे लगातार विस्तार की गति पर विराम लग सके। एक सप्ताह का लॉक डाउन पर्याप्त समय नही है। इसके सार्थक परिणाम भी नही आयेंगे। उन्होंने कहा प्रदेश में सक्रिय केस की संख्या को प्रदेश सरकार छुपा रही है। इसके चलते स्थिति और बिगड़ती जा रही है। अब हालत तो यहां तक बिगड़ चुके हैं कि मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए भी विवाद होने लगे हैं। वहीं प्रदेश में परिस्थियां बेहतर हो इसके लिये भी कोई कारगर कोशिशे नही जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि प्रदेश में पहले ही लॉक डाउन लग जाना चाहिये था।

समय रहते कोरोना पर अंकुश लगाने के लिये ठोस पहल की जाती और लॉकडाउन लगा दिया जाता तो जो हालत बिगड़ते जा रहे हैं वो काबू में किया जा सकता था। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि कोरोना पर अंकुश लगाने के लिये समाज के हर वर्ग की सहभागिता जरूरी है लेकिन इस दिशा मे प्रदेश सरकार की ओर से कोई पहल नही की जा रही है। इस समय पर सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लेना चाहिये। लेकिन एक समय सामाजिक संस्थाओं ने सहयोग देना चाहा तो प्रदेश सरकार ने इस पर रूचि नही दिखाई। इसके कारण सामाजिक संगठनों का फिर जुड़ाव नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में 1 सितंबर की स्थिति में सक्रिय मरीज़ 15,533 थे वहीं 19 सिंतबर की  स्थिति में 36,580 सक्रिय केस के साथ  सातवें स्थान  पर हैं। मौत के मामले पर 17 वें स्थान पर और जांच के मामले पर 20वें स्थान पर हैं। इसके साथ ही एक्टिव केस के प्रतिशत  मामले में भी 44.8 प्रतिशत के साथ प्रथम स्थान पर हैं। अगर रिकवरी संख्या मामले में देखें तो 19वें स्थान पर हैं परंतु रिकव्हरी अनुपात के मामले में अभी भी छत्तीसगढ़ 54.4 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे 35 वे नंबर पर स्थित है, जो चिंता की बात है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में एक साथ लॉकडाउन को दो सप्ताह तक किये जाने पर तत्काल विचार किया जाना चाहिये।

 

16-09-2020
सरकार झूठे दावे कर जमीनी सच्चाई से मुंह चुरा रही : विष्णुदेव साय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रदेश सरकार न तो कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ़्तार को रोक पा रही है और ना ही कोरोना के नाम पर लूट और कालाबाजारी पर काबू कर पा रही है। साय ने आरोप लगाया है कि, प्रदेश सरकार के असंवेदनशीलता के चलते प्रदेश के कोरोना संक्रमितों को चौतरफा आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। प्रदेश सरकार रोज झूठे दावे करके जमीनी सच्चाई से मुंह चुरा रही है। साय ने कहा है कि जबसे प्रदेश में निजी अस्पतालों को कोरोना संक्रमितों के इलाज की अनुमति दी गई है,कोरोना मरीज जांच और उपचार के नाम पर कदम-कदम पर लूटे जा रहे हैं। अब तो हद हो गई है कि कोरोना संक्रमितों के सामने रेमडेसिवीर (इंजेक्शन) का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार की विफलता के चलते अब लोगों की जान से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। जीवनरक्षक माने जा रहे इस इंजेक्शन की कीमतें आसमान छू रही है और इंजेक्शन की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका कृत्रिम अभाव पैदा कर इस इंजेक्शन की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। लोगों को 24 सौ रुपए का यह इंजेक्शन 7 से 8 हजार रुपए में खरीदना पड़ रहा है। कोरोना से मौतों के बढ़ते आंकड़ों से भयभीत और चिंतित लोग अपना सब कुछ दांव पर लगाने को विवश हैं। लोगों की जान से हो रहे इस खिलवाड़ को रोक पाने में विफल साबित हो रही प्रदेश सरकार के लिए ये हालात शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब मरने के लिए काफी हैं।

 

16-09-2020
राज्य शासन ने डॉ.आरके सिंह को बनाया प्रभारी डीएमई,डॉ.निगम को भेजा गया अंबिकापुर,आदेश जारी  

रायपुर। प्रदेश सरकार ने अधिष्ठाता/चिकित्सकों को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित किया है। अधिष्ठाता डॉ आरके सिंह शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर को प्रभारी संचालक संचालनालय चिकित्सा शिक्षा रायपुर के पद पर पदस्थ किया गया है। इसी तरह डॉ. पीके निगम विभागाध्यक्ष चर्म एवं रतिज रोग विभाग पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर को  प्रभारी अधिष्ठाता शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर के पद पर पदस्थ किया गया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव राजीव अहिरे ने आदेश जारी किया है। बता दें कि,पूर्व डीएमई डॉ. एसएल आदिले पर भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोप लगे हैं। दुष्कर्म के आरोप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. आदिले को तत्काल पद से हटा दिया था। अब डीएमई के रिक्त पद की सरकार ने डॉक्टर आरपी सिंह को जिम्मेदारी दी है। डॉ. सिंह को प्रभारी डीएमई बनाया गया है।

15-09-2020
सरकार ने सिर्फ कोरोना मामलों को ही नहीं, रेत की कीमतों को भी दुगुनी होने दिया : सच्चिदानंद उपासने 

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा है कि, प्रदेश सरकार ने पिछले 13 दिनों में सिर्फ कोरोना मामलों को ही दुगुना नहीं होने दिया, बल्कि रेत की कीमतें भी दुगुनी होने दीं। अगस्त के आखिरी में 16 से 18 हजार रुपए में बिकी रेत अब 32 हजार रुपए में मिल रही है। एक ओर प्रशासन रेत घाटों के बंद होने और सिर्फ रेत संग्रहण केंद्रों से ही रेत आपूर्ति का दावा कर रहा है, जबकि दूसरी ओर जमीनी सच इसके ठीक उलट है। रेत घाट और संग्रहण केंद्रों पर रेत माफियाओं का कब्जा हो चला है और इनके सिंडीकेट को प्रदेश के दो मंत्रियों व कुछ अन्य प्रभावी नेताओं का संरक्षण मिलने के कारण प्रशासन इसमें हाथ डालने की हिम्मत नहीं कर रहा है। उपासने ने आरोप लगाया है कि, भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी में लिप्त दिख रही प्रदेश सरकार जिस तरह माफियाओं को संरक्षण देकर एक नए तरह का आतंकराज कायम  पर उतारू है, उससे प्रदेश संत्रस्त हो चला है। रेत, शराब और जमीन माफिया कांग्रेस की सरकार आते ही एकाएक सक्रिय हो गए हैं और वे अपने अपराध-कर्मों में आड़े आने वालों पर जानलेवा हमला तक कर रहे हैं। प्रदेश सरकार इन माफियाओं व आपराधिक तत्वों को संरक्षण देकर उनका दुस्साहस बढ़ाने का ही काम कर रही है। उपासने ने कहा है कि,चुनाव के दौरान सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस ने जितने भी लोक-लुभावन वादे किए थे, सत्ता में आते ही कांग्रेस की सरकार ने उनको ताक पर रखकर प्रदेश के हर वर्ग के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इसकी कीमत कांग्रेस सरकार को समय आने पर चुकानी ही पड़ेगी।

15-09-2020
भयावह कोरोना संकट में भी सरकार को झूठे दावे और प्रचार कर वाहवाही बटोरने की सूझी है : डॉ. रमन

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि, प्रदेश सरकार कोरोना के खिलाफ जारी जंग विफल हो रही है। न तो संसाधन जुटाकर उपलब्ध करा पा रही है, न संक्रमण के फैलाव को रोक पा रही है, न अस्पतालों में कोई व्यवस्था कर पा रही है, न मरीजों को इलाज के लिए अस्पतालों में बिस्तर दिला पा रही है। प्रदेश सरकार के रवैए से संत्रस्त प्रदेश का हर वर्ग अब कोरोना काल में अपनी जान दांव पर लगाकर रोज हजारों की संख्या में सड़क पर आंदोलन करने उतर रहा है। इससे संक्रमण का खतरा और फैलाव प्रदेश स्तर पर होने की आशंका बलवती होती जा रही है। प्रदेश सरकार अब इन आंदोलनों को भी रोक नहीं पा रही है। डॉ. सिंह ने कहा है कि, प्रदेश ने देश और राजधानी ने देश के कई बड़े शहरों को कोरोना संक्रमण के फैलाव में पीछे छोड़ दिया है। ऐसी भयावह स्थिति में भी प्रदेश सरकार को झूठे दावे और  प्रचार करके वाहवाही बटोरने की सूझी पड़ी है। भाजपा की पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपानीत राजग सरकार अपने पहले कार्यकाल में स्वास्थ्य सुविधा देते हुए क्रमश: स्मार्ट कार्ड और आयुष्मान भारत योजना के तहत जरुरतमंद मरीजों को निशुल्क इलाज दे रही थी। प्रदेश सरकार ने 50 हजार रुपए तक और केंद्र सरकार ने 5 लाख रुपए तक के इलाज को निशुल्क कर दिया था।  सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजनीतिक प्रतिशोध की ओछी मानसिकता का परिचय देकर इन दोनों ही योजनाओं को बंद कर दिया। यदि प्रदेश सरकार ने जनकल्याण की इन योजनाओं को जारी रखा होता,तो आज प्रदेश के लोगों को कोरोना समेत अन्य बीमारियों के इलाज में राहत मिलती।

15-09-2020
प्रदेश सरकार निजी स्कूलों के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही : बृृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश के निजी स्कूलों के बच्चों को स्कूल प्रारंभ होने के 5 माह बाद भी निशुल्क पुस्तक उपलब्ध नहीं होने को  गंभीर लापरवाही बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि, प्रदेश सरकार निजी स्कूलों के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने पूछा है कि क्या प्रदेश के निजी स्कूलों के बच्चे इस प्रदेश के बच्चे नहीं। बृजमोहन ने कहा है कि, शासकीय स्कूल के भी 50 प्रतिशत बच्चों को अभी तक पुस्तक नहीं मिल पाई है। जब कोरोना काल में स्कूल ही नहीं खुल रहे हैं और ऑनलाइन पढ़ाई की बात की जा रही है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि, बिना पुस्तक के ऑनलाइन पढ़ाई कैसे हो रही होगी। बच्चे क्या पढ़ रहे होंगे। शासकीय व अशासकीय छोटे-छोटे स्कूलो में पढ़ रहे गरीब बच्चों के पालक इस कोरोना काल में जब आर्थिक मार से गुजर रहे है बाजार से पुस्तक कैसे खरीद पाएंगे।

अग्रवाल ने कहा है कि, प्रदेश में स्कूली बच्चों को निशुल्क पुस्तकों का वितरण की ओर कोई देखने वाला भी नही है। कोई मॉनिटरिंग का सिस्टम नहीं है। डिपों में पुस्तकें पड़ी हुई है, जहां से स्कूलों को पुस्तक वितरण ही नहीं किया जा रहा है। स्कूलों के संचालक लगातार विभाग व डिपो के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। अभी भी सितंबर माह में स्कूलों से दुबारा दर्ज संख्या मांगी जा रही है। पुस्तक वितरण की बात तो दूर अभी विभाग दर्ज संख्या को लेकर ही उलझी हुई है और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। अग्रवाल ने कहा कि, यह स्थिति प्रदेश में पहली बार पैदा हुई है कि स्कूली बच्चों को 5-5 माह बाद भी निशुल्क पुस्तक ही नहीं मिल पा रही है, सरकार की इच्छा शक्ति होती तो डाक या कोरियर से भी प्रत्येक बच्चो के घर में पुस्तक पहुंचाया जा सकता था। अगर बच्चों को पुस्तक उपलब्ध करा दिया जाता तो कम से कम बच्चे स्कूल प्रारम्भ न हो पाने की स्थिति में अपने घरों में पढ़ाई कर पाते। पूरे प्रदेश के 28 जिलों में अमूमन यही स्थिति है और विभाग का इस ओर ध्यान ही नहीं है।

 

14-09-2020
प्रदेश सरकार ऊंट के मुंह में जीरे के समान चिकित्सा व्यवस्था देकर व्यर्थ में ही गाल बजा रही है : शिवरतन शर्मा 

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व विधायक शिवरतन शर्मा ने कोरोना संक्रमण के इलाज की व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। शर्मा ने कहा है कि एक ओर प्रदेश में रोज हजारों कोरोना संक्रमितों के मामले सामने आ रहे हैं और दूसरी तरफ प्रदेश सरकार ऊंट के मुंह में जीरे के समान चिकित्सा व्यवस्था देकर व्यर्थ में ही गाल बजा रही है। कोरोना के मोर्चे पर प्रदेश सरकार की सोच व तैयारियां उसकी अक्लमंदी और समझ पर सवाल खड़ा कर रही हैं। शर्मा ने कहा है कि सितंबर की शुरुआत से ही प्रदेश में जिस रफ़्तार के साथ कोरोना का संक्रमण बढ़ा है, उसे देखकर यह लग रहा है कि छत्तीसगढ़ बहुत जल्द देश का कोरोना संक्रमण वाला अव्वल राज्य हो जाएगा। जिस छत्तीसगढ़ की तुलना न्यूजीलैंड से करके और राहुल गांधी के टिप्स का हवाला देकर प्रदेश सरकार कोरोना मुक्त छत्तीसगढ़ के दावे करती इठला रही थी, उस छत्तीसगढ़ के हर गली-मुहल्लों में कोरोना संक्रमण को पहुंचाकर प्रदेश सरकार ने अपने निकम्मेपन की इबारत खुद अपने हाथों लिख दी है। शर्मा ने कहा है कि, हजारों-हजार कोरोना मरीजों के लिए महज 560 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था करके प्रदेश सरकार को अपनी वाहवाही कराने में जरा-सी भी शर्म महसूस क्यों नहीं हो रही है? जिस छत्तीसगढ़ में रोजाना ढाई से तीन हजार कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं, वहां 22 हजार बेड्स का दावा करने वाली प्रदेश सरकार के मौजूदा इंतजाम देखकर उसकी अक्लमंदी पर तरस आ रहा है। सरकार का यह रवैया फिर यह साबित कर रहा है कि, प्रदेश सरकार की सूझबूझ और समझ पर पूरी तरह पाला पड़ गया है और वह इस महामारी से निपटने के लिए कतई गंभीर और संवेदनक्षम नहीं है। प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अब भी आंखों पर पट्टी बांधे, कानों में रुई ठूसे और मुंह में दही जमाए बैठे हैं। वे न तो प्रदेश के कोविड सेंटर्स का मुआयना करना जरूरी समझ रहे हैं और न ही प्रदेश के सभी लोगों को साथ और विश्वास में लेकर इस जंग का मुकाबला करने तैयार हैं। प्रदेश के कोविड सेंटर्स में न तो पर्याप्त चिकित्सा उपकरण हैं, न ही ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। मरीजों को इलाज के अस्पतालों में भर्ती तक नहीं किया जा रहा है, जो मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, उनके फेफड़ों की जांच के लिए एक्स-रे मशीन नहीं है।  मरीजों को समय पर चाय, नाश्ता, काढ़ा, भोजन और दवाएँ तक समय पर नहीं मिल पा रही हैं।  कोरोना टेस्टिंग में छत्तीसगढ़ 20वें स्थान पर है।

14-09-2020
चिटफंड निवेशकों के शीघ्र भुगतान की मांग, राज्यपाल के नाम सौंपा खून से हस्ताक्षरित ज्ञापन

रायपुर। छत्तीसगढ़ नागरिक अधिकार समिति की ओर से चिटफंड निवेशकों के शीघ्र भुगतान की मांग पर प्रार्थियों के खून से हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन राजभवन पहुंचकर सौंपा गया। सोमवार को पूर्व घोषणानुसार समिति के कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के सचिव आरपी पांडे से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि प्रदेश के 20 लाख निवेशकों के अनुमानित 50 हजार करोड़ रुपयों के शीघ्र भुगतान की व्यवस्था की जाये। 7 सूत्रीय ज्ञापन में रकम वापसी हेतु ठोस व समयबध्द कार्य योजना प्रस्तुत करने, निक्षेपको के हित अधिनियम को उसके मूल स्वरूप में लागू करने, समस्त फरार संचालकों की गिरफ्तारी करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा भुगतान हेतु प्रदेश सरकार से विशेष कोष का गठन करने की मांग भी की गई है ताकि देनदारी की तुलना में कम सम्पत्तिवाली कंपनियों के निवेशकों का पूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि भविष्य में इस प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए वर्तमान में कार्यरत कंपनियों को कड़ी जांच के दायरे में रखा जाये।

वर्तमान में रायपुर सहित सभी प्रमुख जिलों में कार्यरत विशेष न्यायालयों में जारी सुनवाई की प्रक्रिया को तीव्र किया जाये। नागरिक अधिकार समिति के अध्यक्ष शुभम साहू ने जानकारी दी है कि सारे मुद्दों को राजभवन के सचिव स्तर के अधिकारी आरपी पांडे ने ध्यान से सुना तथा प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। आज प्रतिनिधिमंडल में शुभम साहू, हेमलाल पटेल, मोहन तम्बोली, लोचन साहू, कामता साहू, विजय यादव, मनीष पटेल, रमेश निषाद, गोपी निषाद, दुर्गेश साहू, विकास तम्बोली शामिल थे। नागरिक अधिकार समिति ने कोरोना संक्रमण के दौर में निवेशकों के शीघ्र भुगतान पर जोर देते हुये कहा है कि इससे ठगी के शिकार हो चुके लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। समिति ने इस मुद्दे पर सरकार की टाल मटोल की नीति को अब और ज्यादा बर्दाश्त न करते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

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