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08-07-2020
हाथियों के संरक्षण में प्रदेश सरकार नाकाम : कौशिक

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कोरबा जिले में 8 जुलाई को एक हाथी की हुई मौत पर चिंता व्यक्त करते कहा कि प्रदेश सरकार हाथियों के संरक्षण की दिशा में पूरी तरह से नाकाम है। प्रदेश में वन अमला भी इस दिशा में सही काम नहीं कर पा रहा है। इसके चलते हाथियों की लगातार मौतें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 9 जून से लेकर 8 जुलाई तक एक महीने के भीतर में करीब सात हाथियों की मौत हुई हैं,जो चिंता का विषय है। हर चौथे दिन एक हाथी की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मसले पर प्रदेश सरकार को गंभीरता से कठोर कदम उठाते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अब तक सूरजपुर जिले में दो, बलरामपुर व धमतरी जिले में एक -एक हाथियों के साथ रायगढ़ जिले में दो हाथियों की मौत एक माह के भीतर हुई है। अब फिर से कोरबा जिले में एक हाथी की मौत से प्रदेश के वन विभाग के कामकाज पर सवाल उठना लाजमी है। उन्होंने कहा कि पूरे मसले पर सरकार को उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर जांच करनी चाहिए ताकि स्पष्ट हो सके कि आखिरकार इन हाथियों की मौत के पीछे की वजह क्या है? ताकि पता चल सके कि संदिग्ध परिस्थितियों में हाथियों की मौतें कैसे लगातार हो रही है।

 

22-06-2020
वन विभाग में फिर बड़ा फेरबदल,23 आईएफएस अधिकारियों के तबादले

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक हाथियों की मौत से भूपेश सरकार की नजर अब वन विभाग पर जम गई है। सरकार ने फिर वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस बार 23 आईएफएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस संबंध में वन विभाग के संयुक्त सचिव ने आदेश जारी किया है। पीसी पांडे अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्य योजना, नया रायपुर में पदस्थ किया गया है। एसएस बजाज को अपर प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, नवा रायपुर प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया गया है। एसएसडी बड़गैय्या को मुख्य वन संरक्षक कांकेर, रमेश चंद्र दुग्गा को वन मंडल अधिकारी मुंगेली,नायर विष्णुराज नरेंद्रन को संचालक अचानकमार अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व बिलासपुर,आयुष जैन उप संचालक,उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व,शमा फारूकी वनमंडलाधिकारी कटघोरा, अशोक कुमार पटेल संचालक कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान, जगदलपुर में पदस्थ किया गया है।

 

19-06-2020
हाथियों की मौत : भूपेश सरकार का बड़ा एक्शन,पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ सहित 3 डीएफओ की छुट्टी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक 6 हाथियों की मौत के मामले में भूपेश सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अतुल शुक्ला सहित डीएफओ धरमजयगढ़ प्रियंका पाण्डेय,डीएफओ बलरामपुर प्रणय मिश्रा और डीएफओ बैकुंठपुर राजेश कुमार चंदेले को हटा दिया गया है। डीएफओ धरमजयगढ़ प्रियंका पाण्डेय ने तो कटहल खाकर हाथी की मौत हो जाने की बात कही थी। बहरहाल छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग के संयुक्त सचिव भोस्कर विलास संदिपान की ओर से जारी आदेश के मुताबिक वन विभाग के 9 अधिकारियों का तबादला किया गया है। पीव्ही नरसिंग राव को अतुल शुक्ला का जगह पदस्थ किया गया है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अतुल कुमार शुक्ला अरण्य भवन नवा रायपुर अटल नगर को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (राज्य अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं जलवायु परिवर्तन) एवं निदेशक छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर बनाया गया है। इसी तरह प्रधान मुख्य वन संरक्षक (राज्य अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं जलवायु परिवर्तन) एवं निदेशक छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर पी.व्ही. नरसिंग राव को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरण्य भवन नवा रायपुर अटल नगर में पदस्थ किया गया है।वनमंडलाधिकारी कोरिया वन मंडल, बैकुण्ठपुर राजेश कुमार चंदेले को उप वन संरक्षक-कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरण्य भवन रायपुर, वन मंडलाधिकारी केशकाल मणिवासगन एस. को वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़, संचालक गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुण्ठपुर ईमोतेसु आओ को वनमंडलाधिकारी कोरिया बनाया गया है। इसी तरह वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़ प्रियंका पाण्डेय को उप वन संरक्षक-कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरण्य भवन रायपुर, वन मंडलाधिकारी बलरामपुर प्रणय मिश्रा को उप वन संरक्षक-कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरण्य भवन रायपुर और उप सचिव वन विभाग गणवीर धम्मशील को वनमंडलाधिकारी केशकाल बनाया गया है। इसके अलावा उप प्रबंधक मुख्य वन संरक्षक कार्यालय सरगुजा वृत्त अम्बिकापुर लक्ष्मण सिंह को प्रभारी वन मंडलाधिकारी बलरामपुर पदस्थ किया गया है।

 

18-06-2020
उच्च न्यायालय के आदेशों की अवेलहना कर रहे अधिकारी, हाथियों की मौत करंट से होने के बावजूद मौन : नितिन सिंघवी

रायपुर। धरमजयगढ़ में गुरुवार को हुई हाथी की मौत के मामले में रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने विद्युत वितरण कंपनी और वन विभाग के अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि विद्युत वितरण कंपनी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रही है। वन क्षेत्रों में मापदंडों से नीचे जा रही बिजली लाइनों और लटकते तारों और बेयर कंडक्टर को कवर्ड तारों में बदलने से बचने के लिए रुपए 1674 करोड़ खर्च करने से बच रही है। इसके कारण से हाथी समेत अन्य वन्य प्राणियों की मौतें करंट से हो रही है। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद कुल 157 हाथियों की मृत्यु हुई है। इसमें से 30 प्रतिशत हाथियों की मृत्यु विद्युत करंट के कारण हुई है।सिंघवी ने आरोप लगाया कि विद्युत वितरण कंपनी ना तो सुधार कार्य करा रही है, ना ही अपने वित्तीय प्रबंध से 1674 करोड़ की व्यवस्था कर रही है। हद तो तब हो गई जब वन विभाग लगातार ऊर्जा विभाग को पत्र लिख रहा था, तो 9 माह बाद मार्च 2020 में ऊर्जा विभाग ने वन विभाग को पत्र लिखकर फिर कहा कि विद्युत वितरण कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार रुपए 1674 करोड़ उपलब्ध कराएं। इससे स्पष्ट है कि विद्युत वितरण कंपनी न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर रही है। न्यायालयों के आदेशानुसार सुधार कार्य भी नहीं करा रही है,इससे हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों  की मौतें हो रही है।याचिका के निर्णय 12 मार्च 2019 में विद्युत करंट से हाथियों की मृत्यु धरमजयगढ़ क्षेत्र में अधिक होने के कारण धर्मजयगढ़ क्षेत्र में प्रगति पर ठोस कदम उठाने के निर्देश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दिए थे। परंतु उसके बाद भी आज हाथी की मौत धर्मजयगढ़ के क्षेत्र में होने से ही स्पष्ट होता है

कि विद्युत वितरण कंपनी किसी भी रुप से न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं कर रही है। करंट से  7 हाथियों की  मौत के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से 4 करोड रुपए की पेनल्टी ओड़िशा विद्युत वितरण कंपनी पर लगाए जाने के निर्णय का हवाला देते हुए जून 2019 में छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी ने अपने सभी अधीनस्थों को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया कि विद्युत करंट से हाथियों व अन्य वन्य प्राणियों की हो रही मौतों के प्रकरणों में राज्य विद्युत वितरण कंपनी के जिला अधिकारियों के विरुद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972, इंडियन पेनल कोड 1860 एवं इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के अंतर्गत कोर्ट में चालान की कार्यवाही की जाए। विद्युत लाइन में हुकिंग करने से जिस भूस्वामी की जमीन पर वन्य प्राणी का मृत शरीर पाया जाता है, उसको अपराधी मानते हुए कोर्ट चालान की कार्यवाही की जाए।प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने फील्ड के अपने समस्त अधिकारियों से यह जानना चाहा कि वर्ष 2019 में उन्होंने ऐसे प्रकरणों में विद्युत वितरण कंपनी और भू स्वामियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की है? परंतु पिछले एक वर्ष में 8 रिमाइंडर भेजे जाने के बाद में भी अधीनस्थों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को यह नहीं बताया कि विधुत करंट से वन्य प्राणियों की मौत के मामले में उन्होंने क्या कार्रवाई की। इससे स्पष्ट है कि वन विभाग के फील्ड के अधिकारी विद्युत करंट से वन्यजीवों की मौत के मामले में बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।सिंघवी ने कहा कि धरमजयगढ़ में हो रही विद्युत करंट से हाथियों की मौत के मामले में उच्च न्यायालय की ओर से भी चिंता जताने के बावजूद आज विद्युत करंट से हाथी की मौत चिंतनीय है। मामले में विद्युत वितरण कंपनी के इंजीनियर और वन विभाग के लापरवाह अधिकारी जिम्मेदार हैं, इनके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए।

क्या है रुपए 1674 करोड़ का मामला?
छत्तीसगढ़ में लगातार विद्युत करंट से हाथियों की हो रही मौतों के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका क्रमांक 5/2018  नितिन सिंघवी विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य नामक याचिका लंबित रहने के दौरान विद्युत वितरण कंपनी ने अपना पक्ष रखा था। कहा था कि वन क्षेत्रों से नीचे जा रही विद्युत लाइनों और लटकते हुए तारों और बेयर कंडक्टर (नंगे तारों) को कवर्ड कंडक्टर में बदलने के लिए वन विभाग, विद्युत वितरण कंपनी को रुपए 1674 करोड़ रुपए दे तो वह  एक वर्ष के अंदर में सभी सुधार कार्य कर देगी। छत्तीसगढ़ शासन ने इस राशि की मांग भारत सरकार व पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से की। जवाब में भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णयों का हवाला देते हुए पत्र लिखकर आदेशित किया था। कहा था कि करंट से हाथियों और अन्य वन्य प्राणियों की मृत्यु के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी जवाबदेह है। वर्णित सुधार कार्य विद्युत वितरण कंपनी अपने वित्तीय प्रबंध से करेगी। एक वर्ष पूर्व 19 जून को प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी ने प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को भारत सरकार के निर्णय से अवगत कराया था। 15 दिन के अंदर कार्य योजना तैयार कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी को भेजने को कहा था। वन विभाग के प्रमुख सचिव ने भी प्रमुख सचिव ऊर्जा को पत्र लिखकर 1674 करोड़ रुपए स्वयं के वित्तीय प्रबंध से करके आवश्यक सुधार कार्य करने के लिए कहा था। अन्यथा की स्थिति में न्यायालय के आदेश के अनुसार वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 और उसके अंतर्गत निर्मित नियम, इंडियन पेनल कोड 1860, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 तथा अन्य सुसंगत विधियों के अंतर्गत डिस्कॉम के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

13-06-2020
आठ हजार गौ वंशों की भूख से मौत पर बृजमोहन चुप रहे, अब हाथियों की मौत के बहाने कर रहे सवाल : विकास तिवारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत पर विधायक बृजमोहन अग्रवाल के बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने पलटवार किया है। विकास ने कहा कि आज हाथियों के मौत पर प्रदेश को कब्रगाह की संज्ञा देने वाले भाजपा के पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में लगभग आठ हजार से अधिक गौवंश की मौत भूख से हुई थी और लगातार गौवंशों की हत्या और तस्करी अनवरत चल रही थी। लगातार भाजपा चुनाव में गौ माता और गौवंश की बात तो करती थी लेकिन उन्हीं के शासनकाल में और जबकि विधायक बृजमोहन अग्रवाल खुद इस विभाग के प्रमुख रहे उस समय पूर्व गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष ने गौवंश के चारे और भोजन में घोटाले पर सनसनीखेज बयान दिया था। और कहा था कि इसलिए गौवंश को कम भोजन दिया जाता था। इतने बड़े खुलासे पर तत्कालीन कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की चुप्पी प्रदेश की जनता के समझ से परे थी।

विकास तिवारी ने कहा कि प्रदेश में हाथियों पर जो मौत हुई है उस पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर संजीदा और गंभीर हैं। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने एक जांच कमेटी गठित की है जो अपनी रिपोर्ट 30 दिन के अंदर प्रस्तुत करेगी लेकिन पूर्व कृषि मंत्री और भाजपा के विधायक बृजमोहन अग्रवाल को प्रदेश की जनता और गौ प्रेमियों को यह बताना चाहिए कि उन्होंने प्रदेश में उनके शासनकाल में हुए आठ हजार से अधिक गौवंश की भूख से मौत पर कौन सी जांच कमेटी गठित की थी और किन-किन दोषियों पर उन्होंने अपने अधो हस्ताक्षर युक्त कार्रवाई करने के लिए आदेश जारी किए थे। केवल हाथियों की मौत पर बयान देकर अपने समय में हुए गौवंश की भूख से मौत भारतीय जनता पार्टी का क्या कहना है यह बात प्रदेश की जनता जानना चाहती है। विकास ने कहा पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने गौ माता और गोवंश के हत्यारों पर कार्यवाही करने के लिए अपने अधो हस्ताक्षर युक्त आदेश यदि जारी किए थे तो उसको जनता के सामने लाना भाजपा का दायित्व है।

13-06-2020
छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत शर्मनाक, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? : बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। प्रदेश में हाथियों की मौत पर सरकार को चौतरफा दबाव झेलना पड़ रहा है। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने हाथियों की मौत पर सरकार और वन विभाग पर निशाना साधा है। बृजमोहन ने कहा कि प्रदेश में हाथियों की मौत शर्मनाक है आखिर आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। वनाच्छादित छत्तीसगढ़ अब हाथियों की कब्रगाह बनता जा रहा है। बृजमोहन ने प्रदेश में 48 घण्टे के अंदर शावक सहित तीन वयस्क हाथियों की मौत पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरगुजा संभाग में हाथियों के मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। 48 घण्टे के भीतर ही लगातार दो हाथियों की संदिग्ध मौत के बाद बलरामपुर वनमंडल के राजपुर वनपरिक्षेत्र के जंगल में तीसरे हाथी का शव बरामद हुआ है।

सभी हाथियों की मौत संदिग्ध अवस्था में हुई है। वन विभाग का इतना बड़ा अमला होने के बाद भी सब सोए हुए है, वहाँ मिला हाथी का शव चार पांच दिन पुराना है जिससे दुर्गंध आ रही है, शव सड़ गया है वह भी ग्रामीण के माध्यम से विभाग को को पता चला। हाथियों के मौत के बाद भी विभाग की नींद नहीं टूटी है। अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हाथियों का आवागमन लगातार होता रहा है, पर कभी एैसी स्थिति नहीं हुई। विशालकाय प्राणी, हाथियों की हत्या इस तरह हो रही है, तो जंगल में अन्य छोटे जानवरों की क्या स्थिति होगी यह सोचनीय विषय है। 18 हाथियों के झुंड में अब सिर्फ 10 हाथी रह गए हैं। 5 हाथी अभी भी गायब हैं। वन विभाग का इतना बड़ा अमला व निगरानी दल के बावजूद लगातार हाथियों के मौत से अनेक सवाल खड़े हो रहे है। बृजमोहन ने हाथियों की लगातार मौत की उच्च स्तरीय जांच करते हुए दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है।

11-06-2020
48 घंटे में एक गर्भस्थ शिशु समेत चार हाथियों की मौत, वन अमले में मचा हड़कंप

अंबिकापुर/राजपुर। सरगुजा संभाग ने 48 घंटे के भीतर एक गर्भस्थ सावक समेत चार हाथियों के  मौत से वन अमले में हड़कंप सा मच गया है। वन अमला एवं वाइल्डलाइफ की टीम यह नहीं समझ पा रही है कि हाथियों की मौत क्यों और किस कारणों से हो रही है। पहली मौत के संबंध में पशु चिकित्सकों ने बताया था कि हथनी की मौत प्रसव पीड़ा की वजह से हुई थी। साथ ही मृत हथनी के अमाशय में संक्रमण पाया गया था। जबकि 24 घंटे बाद ही उसी स्थान पर दूसरी हथिनी का शव मिला। रायपुर से विशेषज्ञों व डॉक्टरों की टीम जांच व पीएम करने पहुंची थी लेकिन हाथियों द्वारा शव को घेर लिए जाने से उसका पीएम नहीं हो सका।

इधर अभी दूसरे हाथी के मौत का खुलासा नहीं हो सका था तभी बलरामपुर जिले के राजपुर वन परीक्षेत्र अंतर्गत गोपालपुर व अतौरी सर्किल के दरबारी महुआ वनक्षेत्र में एक और हथिनी का शव मिला है। 48 घंटे के भीतर 4 हथियों का शव मिलने से शासन-प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। लोगों के बीच यह चर्चा है कि हथनियों की मौत किसी बीमारी से हो रही है या इसके पीछे किसी का हाथ है जो इन हाथियों के मौतों को सील सिलसिलेवार दे रहा हो।

22-09-2019
नंदनकानन चिड़ियाघर में फैला जानलेवा वायरस, अब तक चार हाथियों की मौत

भुवनेश्वर। ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर में एक वायरस की वजह से चार हाथियों की मौत हो गई। ओडिशा सरकार ने इस वायरस से निपटने के लिए असम और केरल के विशेषज्ञों से सहायता मांगी है। इन हाथियों के बच्चों की मौत एंडोथेलियोट्रोफिक हर्प्स वायरस (ईईएचवी) की वजह से एक महीने के भीतर हुई है। ईईएचवी वायरस ज्यादातर हाथियों के 15 साल तक के बच्चों को प्रभावित करता है। ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री बी कारूखा ने बताया कि राज्य सरकार ने असम और केरल के विशेषज्ञों से संपर्क किया है। वहां भी इसी तरह के वायरस ने हाथियों की जान ली थी। इस तरह के वायरस को फैलने को रोकने के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए राज्य सरकार ने विशेषज्ञों से सहायता मांगी है। मंत्री ने बताया कि जेल के आठ हाथियों में से चार की मौत इस वायरस की वजह से हुई है। हाथियों को बचाने की कोशिश जा रही है। हालिया मौत शनिवार रात में हुई। एक मादा हाथी ‘गौरी' की मौत हुई। बचे हुए चार हाथियों में से तीन व्यस्क हैं। मंत्री ने कहा कि ज्यादातर हाथी राज्य के अलग-अलग जंगल क्षेत्र से लाए गए हैं। उनके रक्त के नमूने लिए जाएंगे ताकि इस वायरस को जंगल में फैलने से रोका जा सके। नंदनकानन चिड़ियाघर के उप निदेशक जयंत दास ने कहा कि चिड़ियाघर में हाथियों की जान बचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसकी कोई जानकारी नहीं है कि वायरस से बाकी बचे हाथी प्रभावित हैं या नहीं। 

 

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