GLIBS
11-09-2020
सचिव आर.प्रसन्ना ने अधिकारियों से कहा, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान पर प्रभावी रूप से करें काम

कांकेर। राज्य शासन द्वारा दिये गये निर्देशानुसार जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन शुरू हो गया है तथा गर्भवती एवं एनिमिक महिलाओं और आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को गरम भोजन का वितरण किया जा रहा है। महिला बाल विकास विभाग के सचिव आर. प्रसन्ना एवं कलेक्टर केएल चौहान ने उद्यान, पशुचिकित्सा और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में उन्होंने कुपोषण कम करने एवं मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्राम पंचायत के गौठानों में निर्मित मुर्गी सेट में एनआरएलएम के महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से मुर्गी पालन कर अण्डा उत्पादन को बढ़ावा देकर उसका उपयोग आंगनबाडी केन्द्रों में करने के लिए निर्देश दिये। सभी आंगनबाडी केन्द्रों, स्कूलों, आश्रम शालाओं तथा छात्रावासों में अधिक से अधिक मुनगा के पौधेरोपण करने के निर्देश भी दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी किशनक्रांति टंडन, उप संचालक पशुचिकित्सा सेवाएं एलपी सिंह, सीडीओपी सीएस मिश्रा, सहायक संचालक उद्यानिकी व्हीके गौतम, आंकाक्षी जिला फेलो अंकित पिंगले और नेहा सिंह, परियोजना अधिकारी कांकेर त्रिभुवन ध्रुव, चारामा शकुंतला कोमरे, दुर्गूकोंदल सुमन नेताम, नरहरपुर निर्मला ध्रुव उपस्थित थीं।

 

08-09-2020
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से छत्तीसगढ़ कुपोषण से मुक्ति की ओर

रायपुर/बिलासपुर। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से छत्तीसगढ़ को कुपोषण से मक्ति मिल रही है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान 2 अक्टूबर 2019 से जिले के सभी एकीकृत बाल विकास परियोजना क्षेत्रों में शुरू हुआ था। योजना के तहत मध्यम कुपोषित व गंभीर कुपोषित बच्चों का चयन कर उन्हें रेडी टू ईट के अतिरिक्त विशेष आहार पौष्टिक लड्डू के रूप में प्रदाय किया जा रहा है।  इस अभियान से दो वर्ष 10 माह की स्वरा कुपोषण से मुक्त हो गई है। उसका वजन लगातार बढ़ रहा है और वह बार-बार बीमार भी नहीं पड़ती। उसके स्वास्थ्य में तेजी से हो रहे सुधार से उसके परिवार वालों की चिंता दूर हो गई है। योजना के तहत स्वरा माता कुमारी बाई पिता  मानु गौड़ आंगनबाड़ी केन्द्र एरमसाही 3 सेक्टर दर्राभाठा, एकीकृत बाल विकास परियोजना सीपत का चयन मध्यम कुपोषित बच्चे के रूप में किया गया था। स्वरा को जब अक्टूबर 2019 में इस योजना के तहत शामिल किया गया था तब उसकी उम्र 2 वर्ष 10 माह थी और वजन 9.900 ग्राम था और स्वरा का वजन लगातार कम हो रहा था।

योजना के जोड़ने के पश्चात कार्यकर्ता, सहायिका व पर्यवेक्षक ने सतत् रूप से बालिका के घर जाकर उसे कुपोषण से मुक्त करने के लिये शासन की योजनाओं का लाभ दिया। बाल संदर्भ योजना के तहत आवश्यक दवाई प्रदान की गयी और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत अतिरिक्त आहार के रूप में पौष्टिक लड्डू उसे नियमित रूप से खिलाया गया। बालिका के परिवार को साफ-सफाई व पौष्टिक आहार का नियमित सेवन कराने के लिये प्रेरित किया गया जिससे स्वरा का भोजन के प्रति अभिरूचि बढ़ी और परिवार को पोषक तत्वों की महत्ता का ज्ञान हुआ फलस्वरूप स्वरा का वजन बढ़ने लगा, 6 माह पश्चात उसका वजन 12.200 किलोग्राम हो गया। स्वरा पहले बार-बार बीमार होती थी, अब उसके स्वास्थ्य में सुधार होने के कारण अब वह बीमार नहीं पड़ती है। बालिका के परिवार को भोजन में विविधता लाकर उसे रूचिपूर्ण बनाने और किचन गार्डन में पौष्टिक सब्जी लगाकर उसका सेवन करने के बारे में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियमित रूप से उन्हें सलाह देती है।

01-09-2020
56 हजार से अधिक बच्चों की हुई पोषण जांच, कुपोषण के कारणों का पता लगा रहे डाॅक्टर

कोंडागांव। जिले से कुपोषण को पूर्ण रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत जिले मे अभिनव प्रयोग के तहत कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा के मार्गदर्शन में जिले में वृहद स्तर पर ’नंगत पीला’ (स्वस्थ बच्चा) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में नंगत पीला कार्यक्रम द्वारा जिले के 1827 आंगनबाड़ी केन्द्र में दर्ज 57000 बच्चों को इससे जोड़ा गया है। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन एवं महिला स्व-सहायता समूहों के द्वारा सभी 6 माह से 6 वर्ष के बच्चो का 5 जुलाई से 30 जुलाई तक वजन लिया गया। चूकिं पूर्व में वजन त्यौहार 2019 के पश्चात बच्चों में कुपोषण के स्तर की जांच के लिए वजन त्यौहार दोबारा नहीं मनाया गया था। इसलिए जुलाई 2020 में कलेक्टर के आदेश पर सुपोषण अभियान के अतंर्गत नंगत पीला कार्यक्रम की कार्ययोजना तैयार कर वर्तमान में कुपोषण की स्थिति की जानकारी के लिए सभी बच्चों का वजन लिया जा रहा है।

पूर्व में वजन त्यौहार 2019 के अनुसार जब 57000 बच्चों का वजन लिया गया था उसमें लगभग 19975 बच्चे  कुपोषित पाये गये थे परंतु वर्तमान में नंगत पीला कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 56000 से अधिक बच्चों का वजन लिया गया है। इसमें 43990 बच्चे सामान्य पोषण स्तर पर पाये गये वहीं 10650 बच्चे मध्यम कुपोषित एवं 2052 बच्चे गंभीर कुपोषित पाये गये है।इस कार्यक्रम के संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक आंगनबाड़ी में एमयूएसी टेप, हाइट चार्ट एवं वजन की मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीएमएफ फण्ड से सहायता प्रदान की जा रही है। कुछ आंगनबाड़ी केन्द्रो में वजन मशीन की अनुपलब्धता को देखते हुए वजन मशीन को खरीदे जाने का कार्य आगामी दिनों में पूर्ण कर लिया जायेगा। 26 अगस्त से मध्यम एवं कुपोषित बच्चों के स्क्रीनिंग टेस्ट का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा 18 अगस्त को कार्यशाला आयोजित कर जिले के समस्त स्वास्थ्य से जुड़े मेडिकल आफिसर, आयुष डाॅक्टर, चिरायु दल एवं आरएमए डाॅक्टर्स को कार्यक्रम के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।

इन स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रत्येक कुपोषित बच्चो की स्वास्थ्य जांच निकटतम जांच केन्द्र में लाकर की जा रही है। इन बच्चों की जांच के दौरान बच्चों के परिजनों एवं स्वयं बच्चे से विशेषज्ञों द्वारा तैयार प्रश्नावली के आधार पर कुपोषण के संभावित कारणो का पता लगाने का प्रयास किया जायेगा। इस प्रश्नावली के साथ बच्चो की वर्तमान फोटो एवं बायोडाटा  भी लिया जायेगा। इस प्रश्नावली के माध्यम से बच्चे में कुपोषण के सामाजिक, व्यवहारिक, परंपरागत एवं आर्थिक कारणों पर जोर दिया जायेगा। इस प्रश्नावली में कुपोषण के मुख्य कारणो जैसे माता-पिता का कम उम्र में विवाह होना, 2 बच्चों के बीच जन्म का अन्तर ना होना, माता-पिता के आर्थिक  स्थिति ठीक नहीं होने से पौष्टिक भोजन का ना मिलना, मौसमी बीमार होने पर उचित देखभाल ना होना, स्थानीय स्तर पर स्वच्छ पानी का उपलब्ध ना होना पर जोर देने के साथ व्यवहारिक कारणों जैसे खान-पान सही समय पर न करना, माता-पिता मे मद्यपान की आदतें, रात्रि में बिना खाये सोने की आदत,नवजात शिशु को प्रारंभ में स्तनपान ना कराने जैसी आदतों को भी इस प्रश्नावली मे शामिल किया गया है।

कारणों का पता लगाने के पश्चात बच्चों में कुपोषण के कारणों के अनुरूप उन्हें दवाई एवं सलाह के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जावेगा। यह कार्य ग्राम की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों एवं स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जायेगा। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत मे प्रशासन द्वारा एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी। जो माह में कम से कम दो बार उक्त पंचायत के आंगनबाड़ी केन्द्र का निरीक्षण करेगा एवं शासन द्वारा हितग्राहियों को उपलब्ध कराये जा रहे योजना एवं सेवाओं का समीक्षा करेगा। जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों के बैठक मे अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगा। यह योजना माह सितम्बर 2020 से मार्च 2021 तक संचालित किया जायेगा और अन्त में पुनः सभी बच्चो की स्क्रिीनिंग टेस्ट की जायेगी। इस प्रकार एक समावेशी प्रयास के माध्यम से जिले को कुपोषण के दंश से मुक्ति दिलाने का एक प्रयास नंगत पीला कार्यक्रम बनकर उभरेगा। इस कार्यक्रम से कई बच्चे कुपोषण को मात देकर उत्तम भविष्य को पा सकेंगें।

09-08-2020
कमरछठ पर महिलाओं ने संतान को स्वस्थ्य व सुपोषित रखने  की ली शपथ

रायपुर। कमरछठ यानी हलषष्ठी का पर्व भादों माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को आज मनाया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कमरछठ पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने महिलाओं व बच्चों को सुपोषित करने को लेकर शपथ दिलाई। इस मौके पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने व्रत रखने वाली गर्भवती व शिशुवती माताओं स्वयं व बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य व पोषित आहार के संबंध में जानकारियां दी। छत्तीसगढ़ अंचल में मनाएं जाने वाले कमरछठ पर्व संतान के स्वास्थ्य व महिलाओं के पोषण पर आधारित है। व्रत के बाद 6 प्रकार की भाजी, पसहर चावल व भैंस की दूध, दही व घी से बने प्रसाद को ग्रहण करती हैं।गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं को स्तनपान के प्रति भी सजग रहते हुए 6 माह तक शिशु को सिर्फ मां का दूध पिलाने का आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने शपथ दिलाई। इन दिनों 1 अगस्त से 7 अगस्त तक स्तनपान जागरुकता सप्ताह भी मनाया गया। गुढियारी सेक्टर की पर्यवेक्षक रीता चौधरी ने बताया कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए व्रत के दौरान सामाजिक दूरी का पालन करते हुए बार-बार साबून से हाथ धोने और मास्क लगाने का संकल्प लिया गया।

वहीं महिलाओं ने तख्ती पर लिख कर बच्चों को पौष्टिक आहार देने का संदेश भी दिया। कमरछठ पर्व पर भाजी के पोषण को लेकर व्रत रखने वाली माताओं ने सेल्फी पाइंट पर फोटो भी खिंचवाएं। सेल्फी पाइंट में पोषण को लेकर संदेश देते हुए-हलषष्ठी की कृपा अपार-सुपोषित हो हर घर द्वार... दिया।महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार पांडे ने बताया, शिशु व माता के कुपोषण को दूर करने के लिए सुपोषण अभियान व स्तनपान सप्ताह संचालित किए जा रहे हैं। जिले में पहचान किए गए एनिमिक महिलाओं व गंभीर कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए स्थानीय पर्व एवं त्यौहारों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में 11397 गभर्वती महिलाएं व 14826 शिशुवती माताएं पंजीकृत की गयी हैं। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत जिले में 23546 बच्चों के कुपोषित होने की पहचान की गई हैं । इनमें गंभीर रुप 4500 बच्चे कुपोषित हैं।

 

07-07-2020
गरियाबन्द जिले के स्कूलों, आंगनबाड़ी व छात्रावासों आश्रमों में मुनगा लगाकर मुनगा महाअभियान

रायपुर/ गरियाबंद। शासन के निर्देशानुसार गरियाबंद जिले में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से जोड़ते हुए जिले के सभी ऑगनबाडी, स्कूलों और छात्रावास आश्रम में मुनगा के पौधा लगाकर इस मुनगा महाअभियान की शुरुआत की गई। राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करते हुए पौधारोपण के पहले चरण में प्रोटीन, विटामिन,आयन एवं अन्य पोषक तत्वों के मुख्य स्त्रोत मुनगा के पौधा का रोपण किया गया। राज्य सरकार की मंशा अनुसार गरियाबंद जिले के 288 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 1452 नग मुनगा पौधा तथा 392 स्कूल में 2782 नग मुनगा पौधा एवं 21 छात्रावास आश्रम में 159 नग मुनगा पौधा इस प्रकार कुल 700 स्थानों में 4393 नग मुनगा पौधा का रोपण किया गया। वनमण्डल गरियाबंद अंतर्गत वन परिक्षेत्र, गरियाबंद नवागढ़,धवलपुर,मैनपुर,इंदागांव, परसुली,छुरा,पाण्डुका और फिंगेश्वर में व्यापक तौर पर जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकगण की उपस्थिति में और ग्रामीणों के पूर्ण सहयोग से मुनगा महाअभियान कार्यक्रम को सफल बनाया गया।

वनमण्डलाधिकारी मयंक अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2020-21 में वन विभाग की ओर से पौधारोपण का कार्यक्रम तीन चरणों में किया जाएगा। आगामी 11 जुलाई 2020 को बाड़ी योजना के अंतर्गत संयुक्त वन प्रबंधन समितियों क्षेत्र में आने वाले हितग्राहियों, परिवारों और सदस्यों को फलदार व सब्जी प्रजाति के बीज उपलब्ध कराए जाएंगी, ताकि वर्षा ऋतु में यह अपने घरों के बाड़ियों में लगाकर व्यापक तौर पर लाभ अर्जित कर सकें। इसी प्रकार लगभग 1 लाख सीडबॉल वन विभाग के द्वारा तैयार किए गए है, जो कि आगामी तारीख को विभिन्न स्थानों पर रोपण किए जाएंगे। इसी प्रकार 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के अवसर पर गौठान एवं आवर्ती चराई क्षेत्र तथा चारागाह में फलदार,छायादार पौधा रोपण करने के उद्देश्य से वृक्षारोपण की तैयारियों व्यापक तौर पर चल रही है। गरियाबंद वनमण्डल अंतर्गत विभिन्न स्थानों में मुनगा महाअभियान कार्यक्रम को सफल बनाने जनप्रतिनिधियों पदाधिकारियों, शिक्षकगण, छात्र-छात्राओं और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा।

 

07-07-2020
वन ग्राम लोहझर के कुपोषित बच्चे हुए सामान्य,मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का असर दिखने लगा

रायपुर/गरियाबंद। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत मिले पौष्टिक आहार, बिस्कीट, सोया,चिकी और देवभोग ‘घी‘ का असर साफ दिखने लगा है। आज से छः माह पहले इस केन्द्र में 1 गंभीर कुपोषित और 2 मध्यम कुपोषित बच्चे दर्ज थे। सतत निगरानी,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा पर्यवेक्षक के मेहनत से तीन माह में ही सभी बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए है। छुरा परियोजना के सेक्टर सोरिद अंतर्गत वंनाचल क्षेत्र में स्थित ग्राम वन लोहझर-02 (करपीदादर) आंगनबाड़ी केंद्र का यह प्रयास रंग लाया है। सेक्टर की पर्यवेक्षक खिलेश्वरी साहू बताती है कि इस केन्द्र में छः माह से तीन वर्ष के कुल 14 बच्चे और तीन से छः वर्ष के कुल 15 बच्चे दर्ज है।

इस केंद्र में तीन कुपोषित बच्चों खुमेश कुमार,संजय और राजलक्ष्मी को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में हम सब एक टीम की तरह एक जुट हुए और लगातार इन बच्चों पर केन्द्रित होकर कार्य करते रहे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन के द्वारा बच्चों के घर जाकर लगातार सम्पर्क किया गया एवं बच्चों की देखभाल,साफ-सफाई, स्वच्छता, स्वास्थ्य आदि के बारे में प्रदर्शन और समझाइश दी गई। इससे  बच्चों के स्वास्थ्य में काफी सुधार देखा गया और वे पूरी तरह कुपोषण से मुक्त हो गए। उन्होंने बताया कि इसके अलावा आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को विभिन्न गतिविधियों के द्वारा शिक्षा भी दिया जा रहा है। इससे उनके शरीरिक और मानसिक विकास होता है। जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत पौष्टिक आहार प्रदाय किया जा रहा है। इससे कुपोषित बच्चे तेजी से सामान्य हो रहे है। कोविड-19 के कारण बच्चों को उनके घर पर ही पौष्टिक आहार पहुंचा के दिया जा रहा है। साथ ही गर्भवती और शिशुवती माताओं को भी पौष्टिक आहार घरों तक पहुंचाकर दिया जा रहा है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सार्थकता साबित हो रही है।

 

06-07-2020
सुपोषण अभियान से जुड़ा पौधरोपण: राज्य में ‘मुनगा’ पौधरोपण का विशेष अभियान शुरू

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पौधरोपण को मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से जोड़ते हुए 6 जुलाई को वन विभाग द्वारा ‘मुनगा’ पौधरोपण के विशेष अभियान की शानदार शुरूआत हो गई है। इसके अंतर्गत राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के सभी शासकीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और छात्रावास-आश्रमों में प्रोटीन, विटामिन और आयरन के प्रचुर स्रोत मुनगा के पौधे लगाए गए। इस अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य भर में शासन-प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों नेे सहयोग किया। मुख्यमंत्री बघेल के निर्देश पर कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए शुरू किया गया यह अभियान सुपोषण की राह में अहम भूमिका निभाएगा।
उच्च शिक्षामंत्री उमेश पटेल ने खरसिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चपले के हाईस्कूल परिसर में मुनगा का पौधा लगाकर महाभियान का शुभारंभ किया। कबीरधाम जिले में 50 हजार से अधिक मुनगे के पौधे लगाकर इस अभियान की शुरूआत की गई। यहां एक हजार 611 स्कूलो, 87 आश्रम छात्रावासों तथा 816 आंगनबाड़ी और आस-पास की जगह में प्रति स्थल कम-से-कम 5 मुनगा पौधे का रोपण किया गया है। बस्तर जिले के सभी शासकीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और छात्रावास-आश्रमों में ’मुनगा का पोषण दूर करेगा कुपोषण, कुपोषण के खिलाफ वार, मुनगा बनेगा हथियार’ जैसे नारों के साथ मुनगा के पौधे का रोपण किया गया। बकावण्ड कन्या स्कूल में बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल और कालीपुर के आंगनबाड़ी केंद्र में जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन मुनगा पौधे का रोपण कर अभियान में शामिल हुए। बीजापुर स्थित आदर्श कन्या रेसीडेन्सीयल स्कूल परिसर में क्षेत्रीय विधायक एवं उपाध्यक्ष बस्तर विकास प्राधिकरण विक्रम मण्डावी ने मुनगा पौधरोपण किया।

नारायणपुर जिले में जनप्रतिनिधियों द्वारा तेलसी आंगनबाड़ी केन्द्र में मुनगा रोपण कर महाभियान की शुरुआत की गई। वन विभाग द्वारा यहां के 193 आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और छात्रावासों में 1150 मुनगा के पौधे लगाये जाएंगे। कांकेर जिले में विधायक शिशुपाल शोरी ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय ईच्छापुर के परिसर में मुनगा के पौधों का रोपण कर जिले के सभी 2 हजार 442 विद्यालयों और 188 आश्रम-छात्रावास एवं 2 हजार 108 आंगनबाड़ी केन्द्रों के परिसरों में मुनगा रोपण अभियान शुरू किया। बिलासपुर जिले में तखतपुर विधायक रश्मि सिंह ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला सकरी के परिसर में मुनगा पौधा रोपण कर इस महाअभियान को शुरू किया। जशपुर नगर में विधायक विनय भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष रायमुनी भगत ने भागलपुर स्थित बीटीआई प्रशिक्षण केन्द्र और रानीबगीचा में पौधरोपण करके पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन करने का संदेश दिया गया। इसके साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय में मुनगा, आम,नीम के पौधे लगाए गए।

उल्लेखनीय है कि मुनगा सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। मुनगें का फल और भाजी का उपयोग कुपोषण को दूर करने सहायक है। पौष्टिकता से भरपूर मुनगा को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह डायबिटीज से लेकर कैंसर जैसीे भयंकर बीमारियों तक के लिए चमत्कारी होता है। यह भी बताया जाता है कि मुनगा मल्टीविटामिन से भरपूर होता है। इसकी पत्तियों में प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन बी-6, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई पाया जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इसमें आयरन, मैगनीशियम, पोटेशियम और जिंक जैसे मिनरल भी पाए जाते हैं। राज्य के स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और छात्रावास-आश्रमों में इसके रोपण से मुनगा सहजता से उपलब्ध होगा वहीं इन संस्थाओं के परिसरों में हरियाली सहित पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

06-07-2020
कबीरधाम जिले में वन महोत्सव के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत हुई

रायपुर/कवर्धा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कबीरधाम जिले में वन महोत्सव के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत हुई है। इस अभियान से जोड़ते हुए जिले के सभी स्कूल, आश्रम, छात्रावास, आंगनबाड़ी केन्द्र और स्वास्थ्य केन्द्रों के आसपास खाली भूमि पर 50 हजार से अधिक मुनगे के पौधे लगाकर इस अभियान की शुरूआत की गई। राज्य सरकार की कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पनाओं को साकार करते हुए पौधरोपण के पहले चरण में प्रोटीन, विटामिन और आयरन के मुख्य स्त्रोत मुनगे के पौधे रोपित किए गए। शासन की मंशा के जिले के एक हजार 611 स्कूलो, 87 आश्रम छात्रावासों और 816 आंगनबाड़ी में प्रति स्थल कम-से-कम 5 मुनगा पौधा का रोपण किया गया है। कवर्धा के होली किंग्डम पब्लिक स्कूल में वन महोत्सव के उपलक्ष्य में जिला स्तरीय पौधारोपण की शुरूआत की गई। नगर पालिका अध्यक्ष  ऋषि शर्मा ने पौधरोपण करते हुए कहा कि मुख्यमत्री भूपेश बघेल की मंशानुसार पूरे प्रदेश भर में मुनगे के पौधे लगाएं जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत प्रदेश को कुपोषण मुक्त राज्य बनाने की पहल की गई है। इस अभियान को मूर्त रूप देने में मुनगा के पौधे का भी महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा। उन्होंने कहा है कि मुनगा के पौधे स्वास्थ्य के दृष्टि से बहुत लाभदायक है। मुनगा और मुनगे की पत्तियों में प्रचुर मात्रा मे विटामिन, प्रोटिन, आयरन और जिंक जैसे मिनरल भी पाएं जाते हैं।

वनमंडल अधिकारी दिलराज प्रभाकर ने बताया कि जिले में पौधारोपण का कार्यक्रम तीन चरणों में होगा। आगामी 11 जुलाई को बारी योजना के अंतर्गत संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के क्षेत्र में आने वाले हितग्राही परिवारों और सदस्यों को विभाग द्वारा तीन हजार किलोग्राम फल तथा तीन सौ किलोग्राम सब्जी के बीच उपलब्ध करवाएं जाएंगे, ताकि इस वर्षा ऋतु में वह लोग अपने घरों की बाड़ियों में इन बीजों को बोकर लाभ प्राप्त कर सकें। उसी प्रकार 20 जुलाई को होने वाले हरेली तिहार के लिए गौठान, आवर्ती चराई क्षेत्र तथा चारागाह में फलदार, छायादार तथा बहुउद्देशीय पौधारोपण की तैयारियां जिला कबीरधाम में जोर शोर से चल रही हैं। जिले के प्रथम चरण में लगभग 50 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया गया है। इसके अलावा विभिन्न प्रजाति के डेढ़ लाख से अधिक पौधेरोपित किया गया। मुनगा पौधा के अतिरिक्त सतपर्णी, कदम, बादाम,  बरगद, सेमल, महोगनी, मौलश्री, पीपल, रेन ट्री, सिल्वर ओक, काजू, चीकू, अमरूद, शीशम, साल, चंदन, अशोक, आम, कचनार, अमलतास, गुलमोहर, नीम, करंज, अर्जुन, सीताफल, कटहल, साबुन, शीशू ,रक्त चंदन, जामुन, इमली, खम्हार, आंवला, केसिया, पैलटाफॉर्म, बेल,  सिरस, सिंदूर और कुल्लू प्रजातियों के पौधे भी लगाए गए।

वन क्षेत्रों में खाली पड़ी शासकीय और राजस्व भूमियों पर ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए एक लाख सीडबॉल का फैलाव किया गया है। सामुदायिक भूमिया जैसे, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, मुक्तिधाम, सामुदायिक भवन आदि पर भी श्रमदान से जनप्रतिनिधियों की  सहभागिता के साथ वृक्षारोपण का कार्य करवाया जा रहा है। राजकीय भूमि जैसे, थाना, अस्पताल, पंचायत भवन, आदि स्थलों पर भी गणमान्य नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विभिन्न विभागों द्वारा वृहद स्तर पर वृक्षारोपण का कार्य किया गया है। वन विभाग द्वारा विभागीय वृक्षारोपण कार्य के अंतर्गत अब तक एक लाख 33 हजार 302 पौधों का वृक्षारोपण वन क्षेत्रों में करवा गया है। पौधा प्रदाय योजना में  31 हजार 174 और मनरेगा अंतर्गत तैयार निशुल्क पौधे में से अब तक 70 हजार पौधा निशुल्क प्रदाय करवाया जा चुका है। उसी प्रकार वाहन द्वारा घर पहुंच निःशुल्क पौधा प्रदाय योजना के अंतर्गत अब तक वन विभाग द्वारा एक हजार 269 नागरिकों को 11 हजार 558 पौधा वाहन से घर पहुंचा कर निःशुल्क प्रदाय किया जा चुका है।

 

03-07-2020
रायपुर के जनपदों में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के जारी कार्यों की हुई समीक्षा,समय और गुणवत्ता पर जोर

रायपुर। जिले के सभी जनपद पंचायत में शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा,गरवा,घुरूवा और बाड़ी में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा सीईओ डॉ.गौरव कुमार सिंह ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से की। उन्होंने प्राथमिकता वाले कार्यों की वर्तमान प्रगति की समीक्षा की। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयावधि में शेष कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिला एवं बाल विकास की ओर से संचालित मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के सभी केंद्रों से उपयोगिता प्रमाण-पत्र दो दिवस में जमा करने के साथ ही चयनित आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के कार्य को समयसीमा में पूर्ण करने कहा। इसी तरह समाज कल्याण विभाग की ओर से नान डीपीटी के 12 हजार पेंशन प्रकरणों को मिशन मोड में कार्य कर सभी पात्र लोगों को पेंशन जारी करने कहा। सभी दिव्यांगजनों का यूडीआईडी कार्ड संवेदनशीलता से तत्काल  तैयार करने कहा। जनपद पंचायतो के विभिन्न गांव में बनाए गए दुकानों में जनरल स्टोर का कार्य महिला समूहों और चारों विकासखंडों में 2-2 क्लस्टर में बांट कर पृथक-पृथक आय उत्पादक गतिविधियां आरम्भ करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।

उन्होंने गोठानो में पशुपालन संबधी कार्य की समीक्षा की। पशुओं का समय पर वेक्सीनेशन और  मुर्गी,बकरी पालन के लिए आवश्यक सभी व्यवस्था करने अधिकारियों को निर्देश दिए। जिले के सभी गौठानों में बीज की उपलब्धता तय करने के साथ-साथ उपलब्ध डबरी और तालाबों में मछली पालन का कार्य तत्काल प्रारंभ करने कहा। जहां डबरी नहीं है, वहां तुरंत निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर जमा करने के निर्देश दिए। इसी तरह सभी गौठानों में मशरूम कल्टीवेशन का कार्य प्राथमिकता से करने कहा। आरईएस की ओर से धान चबूतरा,आंगनबाड़ी व ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर इन्हें समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश अनुविभागीय अधिकारी आरईएस को दिए। इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस नम्रता जैन भी उपस्थित थी।

14-06-2020
'मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान' को मिली सफलता, 67 हजार से अधिक बच्चे हुए कुपोषण से मुक्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान‘ और विभिन्न योजनाओं के एकीकृत प्लान से बच्चों में कुपोषण दूर करने में बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2019 में किये गये वजन त्यौहार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 9 लाख 70 हजार बच्चे कुपोषित थे, इनमें से मार्च 2020 तक 67 हजार 889 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए हैं। इस तरह कुपोषित बच्चों की संख्या में लगभग 13.79 प्रतिशत की कमी आई है। जो कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग में एक बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार प्रदेश के 5 वर्ष से कम उम्र के 37.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण और 15 से 49 वर्ष की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थे। इन आंकड़ों को देखे तो प्रदेश में 9 लाख 70 हजार बच्चे कुपोषित थे। इनमें से अधिकांश आदिवासी और दूरस्थ वनांचल इलाकों के बच्चे थे। इन आंकड़ों को नई सरकार एक चुनौती के रूप में लिया और  ‘कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ‘ की संकल्पना के साथ महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 से पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की है। अभियान की सफलता के लिए इसमें जन-समुदाय को भी शामिल किया गया है।

प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर सहित वनांचल के कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की शुरूआत की गई। दंतेवाड़ा जिले में पंचायतों के माध्यम से गर्म पौष्टिक भोजन और धमतरी जिले में लइका जतन ठउर जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसे आगे बढ़ाया गया। जिला खनिज न्यास निधि का एक बेहतर उपयोग सुपोषण अभियान के तहत गरम भोजन प्रदान करने की व्यवस्था की गई। इसकी सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने इस अभियान को 2 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में लागू किया। इस अभियान के तहत चिन्हांकित बच्चों को आंगनवाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर निशुल्क पौष्टिक आहार और कुपोषित महिलाओं और बच्चों को गर्म पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई है। एनीमिया प्रभावितों को आयरन पोलिक एसिड, कृमिनाशक गोली दी जा रही है। प्रदेश को आगामी 3 वर्षों में कुपोषण से मुक्त करने का लक्ष्य के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों की ओर से समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं। कुपोषण प्रभावित बच्चों और महिलाओं को निशुल्क काउंसलिंग और परामर्श सेंवाएं देने के साथ नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है। सुपोषण रथ, शिविरों और परिचर्चा के माध्यम से जनजागरूकता के प्रयास भी हो रहे हैं। इसी की एक कड़ी के रूप में एनीमिया के स्तर और स्वास्थ्य सुधार के लिए बस्तर जिले में शुरू किये गए मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान और स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत किचन गार्डन बागवानी को पोषण के लिए अनूठी राह बताते हुए यूनिसेफ ने सराहना की है।

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