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13-04-2020
20 सालों तक फुटबॉल के दीवानों पर जादू छाया रहा नॉटली कॉस्टर का,उनसा न कोई हुआ न होगा

 रायपुर। बचपन से फुटबॉल के दीवाने थे वे। जब मौका मिलता वे फुटबॉल लेकर घर के आंगन में या सामने मैदान में खेलने में रम जाते थे। फुटबॉल के लिए उनबकी दीवानगी यूँही नहीं थी। वे खुद भी फुटबाल के जादूगर थे। बहुत कम उम्र में ही उन्हें स्कूल नेशनल खेलने का मौका मिला और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हम बात कर रहे हैं शहर के अपने समय के मशहूर फुटबॉल सितारे नॉटली कॉस्टर की। नॉटली कॉस्टर यानी फुटबॉल,फुटबॉल यानी नॉटली कॉस्टर। दूर-दूर से लोग उनका खेल देखने आते थे। फुटबॉल तो मानो उनके पैर से प्यार करती थी। उनके पैरों से लिपटे ही रहा करती थी। कमाल की जादूगरी थी उनके पैरों में। और तेजी तो मानो वे हवा से बातें करते थे। जब मैदान में उतरते थे, चारों ओर से शुरू होता नॉटली नॉटली नॉटली। 1960 में वे इंफाल में स्कूल नेशनल खेलें। 61 में इंदौर 62 में कोलकाता में उन्होंने स्कूल नेशनल में अपनी कला का जौहर दिखाया। साल 70 आते आते वे संतोष ट्रॉफी के लिए मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने लगे। 70 में कोलकाता 71 में बेंगलुरु 72 में चेन्नई और 73 में गोवा में उन्होंने फुटबॉल के मैदान में अपनी जादूगरी दिखाई। उसके बाद स्टेट बैंक मैं उनका चयन हो गया और वे स्टेट बैंक की तरफ से खेलने लगे। भोपाल सर्कल की ओर से वे 75 से 79 तक खेलते रहे। अहमदाबाद,विजयवाड़ा और कोलकाता में उन्होंने अपनी कला का जौहर दिखाया। स्टेट बैंक से ही रिटायर होने के साथ ही उन्होंने फुटबॉल को भी अलविदा कह दिया। स्टेट बैंक में चुने जाने से पहले उन्होंने होलीक्रॉस बैरन बाजार स्कूल में पढ़ाया भी। उनका शिष्य होने का सौभाग्य मुझे भी मिला। उस दौर में फुटबॉल में भिलाई का दबदबा हुआ करता था। भिलाई जिमखाना क्लब की ओर से वे खेला करते थे और उनके साथ खेला करते थे डॉक्टर सुबीर मुखर्जी,जहीर भाई,आनंद वर्मा और मोहित खान यह पांचो खिलाड़ी तब पांच पांडव कहलाया करते थे। उसके बाद पीपीएसए यानी पूर्व प्रवीर संघ यहां बना और वे आखिर तक पीपीएस के लिए खेलते रहे। नॉटली कॉस्टर उस दौर एक चमकता नक्षत्र फुटबॉल का जिसने छत्तीसगढ़ को फुटबॉल के नक्शे पर अलग पहचान दी।

13-12-2019
कलेक्टर डोमन सिंह ने बाल गृह के बच्चों के साथ मनाया अपना जन्मदिन

कोरिया। कलेक्टर डोमन सिंह एक अलग पहचान रखने वाले कोरिया कलेक्टर ने अपना जन्मदिन कलेक्ट्रेट कार्यालय एवं अधिकारी के बीच ना मना कर कोरिया जिला के बाल गृह( बालक) छोटे-छोटे बच्चे के साथ अपना जन्मदिन बच्चे के हाथों से केक काट कर मनाया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाई एवं उपहार दिए। कोरिया कलेक्टर ने बच्चों के साथ अपना बचपन एवं अपना अनुभव बच्चों के साथ याद किए। बाल गृह के बच्चे कलेक्टर के जन्मदिन मना कर उत्साहित हुए।

 

13-11-2019
इस अभिनेत्री ने किया अपने साथ हुए भेदभाव का खुलासा, बोलीं- ये बात...

मुंबई। अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा है कि वह बॉलीवुड में कई बार भेदभाव का सामना कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि एक बार एक मेल को-स्टार को काम के लिए जितने पैसे दिए गए थे उन्हें उसका सिर्फ 5 फीसदी मिला था जबकि दोनों का करियर ग्राफ सेम था। हालांकि, भूमि ने कहा कि बॉलीवुड में अब बदलाव आ रहा है। भूमि पेडनेकर ने कहा कि सभी ने कभी न कभी भेदभाव का सामना किया है। उन्होंने कहा कि वह बचपन में थोड़ी मोटी थीं, जिसे लेकर उन्हें चिढ़ाया जाता था। उन्होंने कहा कि हर चीज समस्या है, चाहे आप छोटे हाइट के हैं या आप बहुत लंबे हैं या आपके चेहरे का रंग डॉर्क है। भूमि पेडनेकर की फिल्म बाला बॉक्स ऑफिस पर शानदार कलेक्शन कर रही है।

11-11-2019
क्राई के येलो फेलो अभियान को मुंबई में मिली शानदार प्रतिक्रिया

मुंबई। बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले अग्रणी भारतीय गैर लाभकारी संगठन, क्राई चाइल्ड राइट्स एंड यू ने जीवन के सभी क्षेत्रों से लोगों को आज कार्टर रोड पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने और येलो फेलो बनकर खुशनुमा बचपन का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित किया।
मुंबई का कार्टर रोड एमपी थिएटर लोगों से भरा नजर आया जिन्होंने अनूठे तरीकों से पीले मोजे पहनकर अभियान के लिए प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया और अपनी तस्वीरों को  हैश टैग येलो फेलो का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। इसके अलावा झुग्गियों के बच्चों धरावी रॉक्स के परफॉर्मेंस ने दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। जिन्होंने रीसायकल किए गए जंग से म्यूजिकल इंस्ट्रमेंट बनाकर अपना यह अनूठा परफॉर्मेंस दिया। साथ ही जुबा इंस्ट्रक्टर भक्ति सोनावाने और टू द कल्चर द्वारा निर्मित स्ट्रीट कल्चर एवं हिप—हाप के एक ग्रुप ने परफॉर्मेंस के साथ शाम को और भी रंगीन बना दिया।


धरावी रॉक्स की बचपन की धुन के कवर वर्जन पर परफॉर्मेंस दिया इसे प्रतिभाशाली गली ब्वॉय अंकुर तिवारी ने कंपोज किया है और उनके साथ बेनी दयाल श्यामली खोल घड़ी ने मिलकर इसे गाया है। येलो फेलो राय का पुरस्कार विजेता अभियान है। बच्चों के खुशहाल बचपन के अधिकार के बारे में जागरूकता बढ़ाना इस अभियान का उद्देश्य है। 2018 में लांच किया गया यह अभियान इस साल के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। क्योंकि  क्राई खुशहाल बचपन को सुनिश्चित करने की अपनी यात्रा में 40 सालों का जश्न मना रहा है। अभियान के साझेदारों में शामिल हैं मेट्रो शूज इसका मर्चेंडाइजिंग पाटनर है। स्कूप व्हूप इसक कंटेंट पार्टनर है। इसके अलावा विराट कोहली सहित कई सेलिब्रिटी भारत के बच्चों के लिए इस अभियान को अपना समर्थन दे रहे हैं।  क्रिएन रबादी, रीजनल डायरेक्टर ने कहा कि क्राई पिछले 40 सालों से बाल अधिकारों के पक्ष में काम कर रहा है और आने वाले समय में भी अपने इन प्रयासों को जारी रखेगा। पिछले साल शुरुआत के जाने के बाद येलो फेलो अभियान को शानदार प्रतिक्रिया मिली है। हमें उम्मीद है कि इस साल भी लोग क्राई के सहयोग से बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने में अपना योगदान देंगे।
 

 

15-09-2019
ऐसा लगा फार्म हाऊस में नही क्लास रूम में बैठे हो और बचपन लौट आया हो

रायपुर। बचपन के दोस्त स्कूल पास करने के बाद जब आज मिले तो लगा नही 4 दशक गुज़र चुके है, ऐसा लगा कि कल की ही बात हो। वही हंसना, वही एक दूसरे को छेड़ना, चिढाना, पोल खोलना, लगा कि बचपन लौट आया है। सब कीर्ति जैन के फार्म में इकट्ठा हो चुके थे और वाट्सएप्प ग्रुप में भी सभी के पहुंचने की खबर दे दी गई। मैं स्कूल लाइफ का लेट लतीफ अपने पुराने स्टाइल से लेट ही चल रहा था कि फोन बजा और हमेशा की तरह कांति का डायरेक्ट सवाल कान में गूंजा। कहां है तू, मैं भी बिना चुके बोला बस पहुंच गया हूँ और पहुंचते पहुंचते कीर्ति जैन का फोन, वो भी गुस्से में ही था, बोला सब आ गए है तेरे लिए रुके है। और तब तक मैं उसके फार्म हाऊस पहुंच चुका था।

सब बाहर ही खड़े बतिया रहे थे और सबके सबने मुझे देखते ही जो शोर मचाया,ऐसा लगा की स्कूल में अचानक छुट्टी हो गई हो। रमेश कलश अपने सदाबहार डायलॉग माई डियर, माई डियर कहकर गले। लगा,तो ऐसा लगा ज़माने में इससे निश्छल प्रेम कही मिल ही नहीं सकता, फिर गले मिलने का सिलसिला मुकेश कोटेचा, चरनजीत गिल, केविन कास्टर, रमेश जैन, कांति पटेल, हरविंदर खनूजा, अशोक खटवानी, अशोक प्रितवानी, नरेंद्र प्रितवानी, रविन्द्र पाल, नरेंद्र पाल मुबीन खान, ललित वाढेर, डॉ.ललित मोहन शुक्ला, डॉ.अवलोक शुक्ला, राजू लालचंद, किशोर भूतड़ा, अधीर श्रीवास्तव, प्रवीण जोशी, राजीव लूथरा सब जमकर गले मिले, एक दूसरे की खिंचाई की। तभी याद अनिल रूपरेला नहीं पहुंचा है, उसे फोन लगाया वो भी हाज़िर उसके साथ आया हरजीत जुनेजा,और जान चेरियन। फिर तो समा बंध गया। स्कूल की खट्टी मीठी यादों के साथ काले खट्टे जले चूरन वाले साई चाट वाले चंदू तक को याद कर डाला। शैतानियों की तो फेहरिस्त बहुत लंबी है और उसका ज़िक्र यहां करके लोगों का दिल जलाना भी ठीक नहीं सब सोचेंगे कि इन लोगो ने 40 साल पहले ऐसी मस्ती की, जो हम आज तक नही कर पाते। कुछ साथियों की अनुपस्थिति खली और कुछ का दुनिया छोड़ जाना भी। बहरहाल रमेश जैन, कीर्ति जैन, राजू लालचंद, कांति पटेल की देखरेख में बना स्वाद का खजाना खाना भी यादगार रहा।

उसके बाद कार्यक्रम की बागडोर श्रीमती कीर्ति जैन ने संभाली और अपने रोचक अंदाज़ में उन्होंने खेल का आयोजन किया। इसी बीच बेहद मधुर आवाज और सधे हुए सुरों में पिरो कर एक गीत श्रीमती संदीप गर्ग ने पेश किया, फिर तो लाइन लग गई गायकों की। डॉ. ललित मोहन शुक्ला ने तो गायकी में भी महारथ साबित कर दी। सबका सवाल एक ही था, स्कूल में क्यों नही गाता था। फिर हरजीत जुनेजा ने कविता पाठ से सबका दिल जीत लिया।

मुकेश कोटेचा के माउथ आर्गन की धुन के सभी दीवाने रहे है और सबकी फरमाइश पूरी की मुकेश कोटेचा ने। मोबिन ने भी अपनी स्कूल के ज़माने की कव्वाली गाकर सबको वापस बचपन लौटा दिया। अनिल रूपरेला ने तो एक के बाद एक गाने गाकर महफ़िल ही लूट ली। तालियां बटोरने की छोटी सी कोशिश मैंने भी की। फिर सबके बिछड़ने का समय आया तो सब एक नही कई कई बार एक दूसरे से हाथ मिलाते गले मिलते और यही कहते चलता हूँ मिलते रहना और थोड़ी देर बाद फिर वहीं के वहीं। अबे तू गया नहीं, तू भी तू नही गया बे। सच किसी का वापस जाने का मन तो न था पर बिछुडना जरूरी था दोबारा मिलने के लिए। और  फिर सब रवाना हुए हर दो महीने में इकट्ठा होने के संकल्प के साथ।

 

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