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14-08-2020
कोविड संकट के दौरान दूसरे प्रदेशों से छत्तीसगढ़ लौटे 5022 प्रवासी श्रमिक मनरेगा के तहत हुए पंजीकृत

दुर्ग। जिला पंचायत द्वारा बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत  पंजीकृत कर काम दिया जा रहा है। जिला पंचायत सीईओ  सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के उद्देश्य से अब तक जनपद पंचायत दुर्ग में 1528, जनपद पंचायत धमधा में 1748 और जनपद पंचायत पाटन में 1952 इस प्रकार अब तक 5 हजार 228 प्रवासी श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है। इन पंजीकृत मजदूरों में से  1027 मजदूरों को काम भी मिल गया है और वो अपने अपने गाँव में मनरेगा के तहत संचालित विभिन्न परियोजनाओं में काम भी करने लगे हैं। 

 

 

19-07-2020
निर्देश : अब राज्य के जीएसटी पंजीकृत व्यवसायियों से करना होगा बाहरी एजेंसियों को सामान खरीदी 

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि छत्तीसगढ़ में कार्य करने वाली राज्य के बाहर की एजेंसियां तथा प्रदायक कार्य के क्रियान्वयन में उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री का क्रय राज्य में जीएसटी पंजीकृत व्यवसायियों से करें। बघेल ने मुख्य सचिव को जारी निर्देश में कहा है कि शासन के सभी विभागों को उनके द्वारा क्रय की जाने वाल समस्त सामग्रियों के सीएसआईडीसी के माध्यम से रेट कान्ट्रेक्ट निर्धारित करने तथा राज्य में जीएसटी पंजीकृत प्रदायकों से क्रय करना अनिवार्य किए जाने के आदेश पूर्व में ही जारी किए जा चुके हैं। निर्माण विभागों, विद्युत मंडल तथा कुछ अन्य विभागों द्वारा बड़े कार्याें के लिए राष्ट्रीय स्तर से निविदाएं आमंत्रित की जाती है। यह संभव है कि अन्य राज्यों की निर्माण एजेंसियों एवं प्रदायकों को वह कार्य मिल जाए। इस दशा में भी यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि राज्य के बाहर की निर्माण एजेंसी अथवा प्रदायक द्वारा कार्य के क्रियान्वयन में उपयोग में लायी जाने वाले सामग्री राज्य में जीएसटी पंजीकृत व्यवसायियों से क्रय की जाए।

30-06-2020
Video: नए सब्जी विक्रेताओं और पंजीकृत विक्रेताओं के बीच आपस में ठनी, दुकान लगाने को लेकर हो रहा विरोध

रायगढ़। कोरोना के संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने संजय मार्केट के सब्जी विक्रेताओं को संडे मार्केट में दुकान लगाने की वैकल्पिक व्यवस्था की थी। लेकिन नए और अनरजिस्टर्ड सब्जी विक्रेताओं के दुकान लगाने से अब संजय मार्केट के लगभग 400 पंजीकृत सब्जी विक्रेताओं ने विरोध प्रकट किया है। नए सब्जी विक्रेता व संजय मार्किट के रजिस्टर्ड सब्जी विक्रेताओं के बीच अब दुकान लगाने को लेकर आपस मे ही ठन गई है। संजय मार्केट के सब्जी विक्रेताओं इस बात का विरोध दर्ज किया है और कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्या बताने की बात कही है। बढ़ते कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए संडे मार्केट में सब्जी विक्रेताओं को दुकान लगाने की अनुमति जिला प्रशासन ने दी थी। आज निगम के अधिकारियों द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर दुकान लगाने वाले फुटकर सब्जी विक्रेताओं को जाकर इस बात की हिदायत दी गई कि वह सभी सब्जियों की दुकान आप संडे मार्केट में लगाएं। लेकिन जब यह नए सब्जी विक्रेता इतवारी बाजार में सब्जी दुकान लगाई तो संजय मार्केट के सब्जी विक्रेताओं के साथ जगह को लेकर इनके बीच विवाद उत्पन्न हो गया। संजय मार्केट के सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि लॉक डाउन की अवधि में कई नए सब्जी विक्रेता शहर में विभिन्न स्थानों पर सब्जी की दुकान लगा रहे हैं जो कि पंजीकृत विक्रेता नहीं है ऐसे में वर्तमान में जब सब्जी विक्रेताओं की संख्या हजारों में पहुंच गई है। तब संजय मार्केट के पंजीकृत सब्जी विक्रेताओं को स्थान की दिक्कत उत्पन्न हो रही है सब्जी विक्रेताओं ने अपनी शिकायत जिला कलेक्टर से करने की बात कही है।

वहीं दूसरी ओर इतवारी बाजार में सब्जी मार्केट लगने का स्थानीय निवासी भी पुरजोर विरोध कर रहे हैं और उन्होंने भी निगम आयोग और जिला कलेक्टर को आवेदन दिया है जिस पर उन्होंने इतवारी बाजार में मूलभूत समस्या नहीं होने का हवाला देते हुए कोरोना के संक्रमण को देखते हुए इतवारी बाजार में सब्जी मार्केट नहीं लगाने की मांग की है।इतवारी बाजार शहर के मध्य स्थित है और इसके चारों ओर रिहायशी क्षेत्र है जो अत्यंत घनी आबादी का है। ऐसे में यदि सैकड़ों की संख्या में सब्जी की दुकानें इतवारी बाजार में लगाई जाती हैं तो इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। संजय मार्केट के सब्जी विक्रेताओं का विरोध अपनी जगह जायज है क्योंकि यह वह सब्जी विक्रेता है जो सालों से निगम के पंजीकृत सब्जी व्यवसाई हैं। ऐसे में यदि कोरोना के संक्रमण काल और लॉक डाउन की अवधि में नए ने लोग सब्जी बेचने का कारोबार शुरू किया है तो ऐसे में संजय मार्किट के सब्जी व्यवसायी अपनी दुकान लगाने के परेशान हो रहे है। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन को पहल करने होगा और वर्षो से सब्जी का व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को प्राथमिकता के साथ स्थान की व्यवस्था करनी होगी।

30-04-2020
कम श्रमिकों के नियोजन देख बिफरे जिला पंचायत सीईओ, थमाया नोटिस

बीजापुर। शासन के निर्देशानुसार महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत कार्यों में पंजीकृत परिवारों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद जिले में कम श्रमिकों के नियोजन को देखते हुए जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी पोषण चंद्राकर ने जिले के सभी जनपद सीईओ और कार्यक्रम अधिकारी को नोटिस जारी कर 1 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। ज्ञात हो कि जनपद पंचायत बीजापुर में कुल 36 में से 9 ग्राम पंचायतों में कुल 2648 श्रमिक नियोजित किये गए हैं। जनपद पंचायत उसूर में कुल 39 में से 14 ग्राम पंचायतों में कुल 1016 श्रमिक नियोजित किये गए हैं। जनपद पंचायत भोपालपटनम में कुल 35 में से 18 ग्राम पंचायतों में कुल 2098 श्रमिक नियोजित किये गए हैं। जनपद पंचायत भैरमगढ़ में कुल 60 में से 23 ग्राम पंचायतों में कुल 3495 श्रमिक नियोजित किये गए हैं।

इस स्थिति को देखते हुए जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी पोषण चंद्राकर ने इसे संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्य के प्रति उदासीनता माना है। सभी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर क्षेत्रान्तर्गत पंजीकृत श्रमिकों के 70 प्रतिशत मजदूरों को कार्य उपलब्ध कराना प्राथमिकता के तौर पर हो। इसका पालन प्रतिवेदन स्वयं उपस्थित होकर दे, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी। नोटिस मिलने वाले अधिकारी जनपद पंचायत बीजापुर के सीईओ प्रदीप वैद्य, भोपालपटनम सीईओ एस बी गौतम, उसूर के सीईओ एस डी बंजारे, भैरमगढ़ के सीईओ योगेश यादव है। इनके अलावा योजना से जुड़े जनपद पंचायत बीजापुर पी ओ बिच्चेम ताती, भोपालपटनम पी ओ डिम्पल वट्टी, उसूर पी ओ अनुज तिर्की, भैरमगढ़ के पी ओ खेमचंद साहू हैं।

22-01-2020
सुविधा : अब विशेष छात्र-छात्राएं परीक्षा में ले जा सकते हैं बेसिक कैलकुलेटर

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा दसवीं और बारवीं के छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने इस संबंध में एक नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि विद्यार्थी कक्षा दसवीं और बारवीं बोर्ड परीक्षा में कैलकुलेटर लेकर जा सकते हैं। सीबीएसई ने इसी साल से ये सुविधा देनी शुरू की है। हालांकि ये सुविधा सिर्फ उन छात्रों के लिए है जो विशेष हैं। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक सन्यम भारद्वाज ने इस संबंध में स्कूलों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि 'कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2020 में बोर्ड ने उन छात्रों को बेसिक कैलकुलेटर ले जाने की अनुमति देने का फैसला किया है, जो विशेष रूप से सक्षम बच्चों की श्रेणी में आते हैं। यानी सीएसडब्ल्यूएन (CSWN) की श्रेणी में आते हैं।'

कैसे ले सकते हैं लाभ - बोर्ड द्वारा दी गई इस सुविधा का लाभ सिर्फ वे छात्र-छात्राएं उठा सकते हैं, जो पहले से ही सीएसडब्ल्यूएन श्रेणी के तहत 2020 परीक्षा के लिए पंजीकृत हैं। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए ऐसे छात्र-छात्राओं को अपने स्कूलों के पास 28 जनवरी 2020 तक आवेदन करना है। इसके बाद संंबंधित स्कूलों के प्राचार्य उन आवेदनों को संबंधित सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय में भेजेंगे। सीबीएसई ने कहा है कि जो छात्र-छात्राएं विशेष रूप से सक्षम बच्चों की श्रेणी में आते हैं, लेकिन इसके तहत पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें बोर्ड द्वारा दी गई इस सुविधा का लाभ परीक्षा के दौरान नहीं मिल सकेगा। गौरतलब है कि साल 2018 की परीक्षा के दौरान सीबीएसई ने विशेष रूप से सक्षम श्रेणी के तहत आने वाले बच्चों को कंप्यूटर और लैपटॉप का इस्तेमाल करने की छूट दी थी।  

 

19-01-2020
प्रदेश के बेरोजगारों से छल करना शर्मनाक : विजय शर्मा

रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा अध्यक्ष विजय शर्मा ने प्रदेश सरकार पर बेरोजगारों के साथ मजाक का आरोप लगाकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार बेरोजगारों के सपनों को उड़ान भरने का मौका देने के बजाय उनसे जिस तरह का छलावा कर रही है वह बेहद शर्मनाक है। बेरोजगारों को हर माह बेरोजगारी भत्ता देने का वादा करके सत्ता में आई कांग्रेस सरकार न तो बेरोजगारों के लिये रोजगार का इंतजाम कर पायी है और न ही अब तक बेरोजगारी भत्ते का कहीं अता-पता नजर आया है। आदिवासियों के साथ छलावे का यह एक नया मामला है कि नारायणपुर जिले का रोजगार दफ्तर युवा बेरोजगारों को रोजगार दिलाने में फिसड्डी साबित हुआ है। इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस रोजगार कार्यालय में पंजीकृत एक भी बेरोजगार को पिछले एक वर्ष में सरकारी नौकरी नहीं मिल पायी है। बावजूद इसके सरकार पाँच लाख रोजगार देने का झूठा दावा प्रदेश को परोस रही है। भाजयुमो अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार स्पष्ट करे कि ये पाँच लाख रोजगार वह किस चश्में से देख रही है? जो स्थिति नारायणपुर जिले की है, वही स्थिति पूरे प्रदेश की है। अब जिन युवाओं से भी प्रदेश कांग्रेस ने बेरोजगारी के फॉर्म भरवाए थे, उन युवाओं को प्रदेश सरकार से अपना हक मांगना चाहिये। उन्होंने कहा कि जांजगीर-चाँपा जिले में कुक और अटेंडेंट भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने के बाद स्वास्थ्य विभाग अभ्यर्थियों को डिमाण्ड ड्राफ्ट वापस तो लौटा रहा है मगर बेरोजगार अभ्यर्थी जब यह डीडी लेकर बैंक पहुँच रहे हैं तो, 70 फीसदी राशि शुल्क के नाम पर काटी जा रही है। यह बेरोजगारों के लिये दूबर को दो असाढ़ वाली स्थिति है। प्रदेश सरकार युवाओं के लिये रोजगार के अवसर ढूँढ नहीं पा रही है, उन्हें बेरोजगारी भत्ता दे नहीं रही है और डीडी शुल्क के नाम पर उनका पैसा काटा जा रहा है। यह पूरी स्थिति शर्मनाक है। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच होनी चाहिए।

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