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24-10-2020
आयकर भरने की तिथि फिर आगे बढ़ी, अब 31 दिसंबर तक जमा कर सकते हैं रिटर्न

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने एक बार फिर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब आम नागरिक वर्ष 2019-20 के लिए अपना रिटर्न 31 दिसंबर 2020 तक दायर कर सकते हैं। पहले इसके लिए अंतिम तारीख 30 नवंबर 2020 तय की गई थी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक व्यक्तिगत करदाताओं के लिये वित्त वर्ष 2019-20 का आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की समय-सीमा एक महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि जिन करदाताओं के खाताओं की ऑडिट करने की जरूरत है, उनके लिये आईटीआर दाखिल करने की समय-सीमा दो महीने बढ़ाकर 31 जनवरी 2021 कर दी गई है।
सरकार ने इससे पहले मई में भी करदाताओं को अनुपालन में राहत देते हुए वित्त वर्ष 2019-20 के आईटीआर भरने की समय-सीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी थी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा, ‘जिन करदाताओं के लिये आयकर रिटर्न भरने की समय-सीमा विस्तार से पहले 31 जुलाई 2020 थी, उनके लिये समय-सीमा 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी गई है।’ इसी तरह जिन करदाताओं के खाताओं की ऑडिट किये जाने की जरूरत है और जिनकी समयसीमा पहले 31 अक्टूबर 2020 थी, वे अब 31 जनवरी 2021 तक आईटीआर भर सकते हैं। सीबीडीटी ने कहा कि करदाताओं को आईटीआर भरने में अधिक समय देने के लिये समय-सीमा बढ़ायी गई है।

03-10-2020
राहत: केद्र सरकार ने किया ऐलान, दो करोड़ तक के ऋण पर मिलेगी ब्याज में छूट

नई दिल्ली। कर्जदारों को सरकार ने राहत दी हैै। लॉकडाउन में 6 महीने के ईएमआई के स्थगन पर बैंक से कर्ज लेने वाले आम लोगों और छोटे तथा मझोले कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र ने शनिवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान घोषित किए गए किस्त स्थगन के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्ज के ब्याज पर ब्याज छह महीने के लिए नहीं लिया जाएगा। केंद्र ने कहा कि इस संबंध में सरकार अनुदान जारी करने के लिए संसद से उचित अधिकार मांगेगी। अनुदान सरकार द्वारा पहले घोषित किए गए गरीब कल्याण और आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत एमएसएमई को दिए गए 3.7 लाख करोड़ रुपये और आवास ऋण के लिए दिए गए 70,0000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त होगा।

केंद्र सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय द्वारा दिए गए एक हलफनामे में कहा गया कि किस्त स्थगन की अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज के संबंध में खास श्रेणियों में सभी कर्जदारों को राहत मिलेगी, चाहें उन्होंने किस्त स्थगन का लाभ उठाया हो या नहीं। हलफनामे में कहा गया, ‘इसलिए, सरकार ने फैसला किया है कि छह महीने की किस्त स्थगन अवधि के दौरान चक्रवृद्धि ब्याज की माफी कर्जदारों की सबसे कमजोर श्रेणी तक सीमित होगी। कर्जदारों की इस श्रेणी के तहत दो करोड़ रुपये तक के एमएमएमई ऋण और व्यक्तिगत ऋण पर ब्याज पर ब्याज माफ किया जाएगा।'सरकार ने ऋणों को आठ श्रेणियों में बांटा है, जिनमें एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग), शिक्षा, आवास, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, क्रेडिट कार्ड बकाया, ऑटो ऋण, व्यक्तिगत ऋण और उपभोग आधारित ऋण शामिल हैं। सरकार ने हलफनामे में आगे कहा है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था,जिसकी ऋण राशि दो करोड़ रुपये से अधिक है, वह ब्याज पर ब्याज से छूट के लिए पात्र नहीं होगा।

 

01-10-2020
सितंबर में बढ़ा जीएसटी संग्रह, पहुंचा 95,000 करोड़ के पार

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को माल एवं सेवा कर संग्रह के आंकड़े जारी किए।  इसके अनुसार सितंबर में जीएसटी संग्रह में सुधार देखने को मिला। सितंबर में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 95,480 करोड़ रुपये रहा। जबकि इससे पहले अगस्त में इसमें एक फीसदी की कमी आई थी और यह 86,449 करोड़ रुपये रहा था। यानी सितंबर में यह 9031 करोड़ ज्यादा रहा है। जुलाई में यह आंकड़ा 87,422 करोड़ रुपये था। जीएसटी संग्रह जून के 90,917 करोड़ रुपये था। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सीजीएसटी वसूली 17,741 करोड़ रुपये रही, जो अगस्त में 15906 करोड़ रुपये थी। वहीं एसजीएसटी वसूली अगस्त के 21,064 करोड़ रुपये के मुकाबले सितंबर में 23,131 करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान आईजीएसटी 47,484 करोड़ रुपए रहा। सरकार ने आईजीएसटी से 21,260 करोड़ रुपये सीजीएसटी और 16,997 करोड़ रुपए एसजीएसटी का नियमित निपटान किया। सितंबर 2019 के मुकाबले इस साल रेवेन्यू में चार फीसदी का उछाल आया है।

 

 

05-09-2020
वित्त मंत्रालय ने कहा, सरकारी भर्ती पर कोई रोक नहीं लगाई गई, पहले की तरह ही होंगी भर्तियां

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा है कि सरकारी पोस्ट की भर्ती पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। सरकारी एजेंसियों जैसे एसएससी, यूपीएससी, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, आदि के जरिए भर्तियां पहले की ही तरह की जाएंगी। मंत्रालय ने आगे कहा कि व्यय विभाग (4 सितंबर 2020) का जो सर्कुलर है, वो पदों के निर्माण के लिए आंतरिक प्रक्रिया से संबंधित है और यह किसी भी तरह से भर्ती को प्रभावित नहीं करता है।चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे में भारी वृद्धि की आशंका के बीच सरकार ने शुक्रवार को सभी मंत्रालयों/विभागों से गैर- जरूरी खर्चों को कम करने को कहा था। सरकार ने मंत्रालयों/विभागों से परामर्शकों की नियुक्ति की समीक्षा करने, आयोजनों में कटौती करने और छपाई के लिए आयातित कागत का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी थी।व्यय विभाग ने कहा था कि वित्त मंत्रालय ने खर्च के बेहतर प्रबंधन पर ये निर्देश सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता को सुधारने, गैर-विकासात्मक खर्च को नियंत्रित करने और महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाली योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करने को ध्यान में रखते हुए दिए हैं।

विभाग की ओर से जारी एक कार्यालय ज्ञापन में कहा गया था, 'मौजूदा राजकोषीय स्थिति तथा सरकार के संसाधनों पर दबाव को देखते हुए गैर-प्राथमिकता वाले खर्चों को कम करने और तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। ताकि प्राथमिकता वाले खर्च के लिए संसाधन सुनिश्चित किए जा सकें।'मंत्रालय ने कहा था कि परामर्शकों का शुल्क तय करते समय इस बात की सावधानी बरती जाए कि इससे उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता और मात्रा प्रभावित नहीं हो। नए पदों के सृजन के बारे में कहा गया है कि इनपर प्रतिबंध रहेगा। कुछेक मामलों में व्यय विभाग की अनुमति से नए पदों का सृजन किया जा सकता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि यदि एक जुलाई, 2020 के बाद यदि कोई नया पद बनाया गया है, जिसके लिए व्यय विभाग की मंजूरी नहीं ली गई है, और इस पर यदि नियुक्ति नहीं हुई है, तो इसे रिक्त ही रखा जाए।

 

24-08-2020
वित्त मंत्रालय ले कहा, जीएसटी में टूथपेस्ट व साबुन जैसी आम वस्तुओं पर टैक्स हुआ कम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मोर्चे पर करदाताओं को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि रोजमर्रा में काम आने वाले उत्पाद जैसे बालों का तेल, टूथपेस्ट और साबुन जैसी आम उपयोग की वस्तुओं की कर दर पूर्व-जीएसटी युग के 29.3 फीसदी से कम होकर 18 फीसदी हो गई है।

मंत्रालय ने कहा कि पहले 230 उत्पाद सबसे ऊंचे 28 फीसदी के कर स्लैब में आते थे। आज 28 फीसदी का स्लैब सिर्फ अहितकर और लग्जरी की वस्तुओं पर लगता है। इनमें से 200 उत्पादों को निचले कर स्लैब में स्थानांतरित किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि आवास क्षेत्र पांच फीसदी के कर स्लैब के तहत आता है। वहीं सस्ते मकानों पर जीएसटी की दर को घटाकर एक फीसदी कर दिया गया है। सिनेमा टिकट पर पहले 35 फीसदी से 110 फीसदी तक कर लगता था, लेकिन जीएसटी शासन में यह 12 फीसदी और 18 फीसदी तक है। दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुएं शून्य या पांच फीसदी स्लैब में हैं। फ्रिज, वॉशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, वुड ब्रेनर और मिक्सर, जूस निकालने वाली मशीन, शेवर, हेयर क्लिपर, वॉटर हीटर, हेयर ड्रायर, इलेक्ट्रिक स्मूथिंग आयरन, 32 इंच तक के टेलीविजन पर पहले कर की दर 31.3 फीसदी थी, अब ये उत्पाद 18 फीसदी के जीएसटी कर दायरे में हैं।

05-06-2020
कोरोना का सरकारी योजनाओं पर असर, मार्च 2021 तक कोई नई योजना शुरू नहीं करेगी सरकार

नई दिल्ली। लॉकडाउन से पस्त हुई इकोनॉमी का असर सरकार की योजनाओं पर भी दिखने लगा है। कोरोना संकट के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर के बीच मोदी सरकार ने शुक्रवार को अहम फैसला लिया। केन्द्र सरकार ने आदेश जारी कर कहा है कि सभी मंत्रालय किसी नई योजना की शुरुआत न करें। सभी अपना ध्यान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना या आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित योजनाओं पर केंद्रित करें।

केंद्र मौजूदा वित्त वर्ष (2020-21) में कोई भी नई सरकारी योजना की शुरुआत नहीं करेगा। वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों को नई योजनाओं को इस वित्त वर्ष के आखिर तक शुरू नहीं करने के लिए कहा है। हालांकि सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजनाओं पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई है।  

वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार कोई भी सरकारी योजनाओं को इस साल स्वीकृति नहीं दी जाएगी। पहले से ही स्वीकृत नई योजनाओं को 31 मार्च, 2021 या फिर अगले आदेशों तक स्थगित किया जाता है। बदलती प्राथमिकताओं के साथ संसाधनों का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करने की आवश्यकता है। इसमें 500 करोड़ से ऊपर की किसी नई परियोजना की शुरुआत 1 साल तक निलंबित रखने को कहा गया है।

23-04-2020
लॉक डाउन: सरकार ने कहा,33 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिली राहत

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने कोविड-19 के प्रकोप से लोगों को राहत देने के लिए लॉक डाउन के दौरान अपनी ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 33 करोड़ से ज्यादा लोगों तक 31,235 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद पहुंचाई गई है। इसके अलावा 20 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के जन धन अकाउंट में 10,025 करोड़ रुपए ट्रांसफर हुए हैं।मंत्रालय ने बताया कि 2.82 करोड़ बुजुर्ग लोगों, विधवाओं एवं दिव्यांग लोगों के लिए 1405 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। पीएम किसान योजना की पहली किस्त में आठ करोड़ किसानों को 16,146 करोड़ रुपए का ट्रांसफर और ईपीएफ योगदान के रूप में 68,775 प्रतिष्ठानों को 162 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ है। इससे 10.6 लाख कर्मचारियों को फायदा पहुंचा है।

इससे पहले लॉक डाउन के दौरान राज्यों को राहत देने के लिए वित्त मंत्रालय केन्द्रीय करों एवं शुल्कों में राज्यों के हिस्से के तौर पर 46,038 करोड़ रुपये से अधिक की अप्रैल की किस्त जारी करने पर अपनी मंजूरी दे चुका है। लॉक डाउन का असर अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े इस सुनिश्चित करने के लिए सरकार की तरफ से कई राहत भरे उपाय किए गए हैं। नाबार्ड सहित अन्य बैकों को हजारो करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों का कर्ज आसान बनाने के लिए रिवर्स रेपो रेट में कमी है।इस बीच प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए सरकार और उपाय करने जा रही है। उन्होंने बुधवार को कहा कि तालाबंदी की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव और उसे उबारने के लिए कुछ और मौद्रिक एवं वित्तीय प्रोत्साहन के बारे में सरकार सोच रही है। आर्थिक सलाहकार ने उम्मीद जतायी कि तीन मई तक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा चालू हो जाएगा।

 

13-02-2020
छत्तीसगढ़ के हर कमिश्नरेट में सीपीसी की समस्या का समाधान करने अधिकारी नियुक्त, व्यापारी लें लाभ

रायपुर। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार को एके चौहान, प्रिंसीपल चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़) जोन से मुलाकात की। कैट के पदाधिकारियों ने एके चौहान को आयकर के संबध में सुझाव का ज्ञापन सौंपा। प्रिंसीपल चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स ने ज्ञापन का अवलोकन कर कहा कि सीपीसी की समस्याओं के लिए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के हर कमिश्नरेट में एक अधिकारी की नियुक्ति हो चुकी है। व्यापारी इसका लाभ ले सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अन्य मांगों को वित्त मंत्रालय में सबंधित विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के लिए भेजा जाएगा। एके चौहान से मुलाकात के दौरान कैट पदाधिकारी अमर पारवानी, मगेलाल मालू, जितेन्द्र दोशी, परमानन्द जैन, राम मंधान, सुरिन्दर सिंह, जितेन्द्र गोलछा, राकेश अग्रवाल सहित सीए रवि ग्वालानी सहित अन्य शामिल थे। 

आयकर के संबध में दिए गए ये सुझाव :

05-01-2020
महाराष्ट्र सरकार में हुआ मंत्रालयों का बंटवारा, जाने किसे मिले कौन से विभाग

मुंबई। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 30 दिसंबर को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। शनिवार शाम को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। देर रात राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को उद्धव ठाकरे की तरफ से मंत्रालयों के बंटवारे की सूची मंजूरी के लिए भेजी गई थी। जिस पर आज सुबह उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए हैं। सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को वित्त मंत्रालय सौंपा गया है। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अनिल देशमुश को गृह मंत्री बनाया गया है। यहां जानिए कौन सी पार्टी को कौन-कौन से मंत्रालय मिले

एनसीपी को मिले ये विभाग

अनिल देशमुख- गृह विभाग
अजित पवार- वित्त व नियोजन
जयंत पाटिल- सिंचाई विभाग
छगन भुजबल- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति
दिलीप वल्से पाटिल- आबकारी और श्रम मंत्रालय
जीतेंद आव्हाद- आवास
राजेश टोपे- स्वास्थ्य
राजेंद्र शिंगणे- खाद्य एवं औषधि प्रशासन
धनंजय मुंडे- सामाजिक न्याय

कांग्रेस की झोली में आए ये विभाग

नितिन राउत- ऊर्जा
बालासाहेब थोराट- राजस्व
वर्षा गायकवाड़- स्कूली शिक्षा
यशोमति ठाकुर- महिला और बाल कल्याण
केसी पाडवी - आदिवासी विकास
सुनील केदार- डेयरी विकास व पशुसंवर्धन
विजय वड्डेटीवार- ओबीसी कल्याण
असलम शेख- कपड़ा, बंदरगाह
अमित देशमुख- स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति
शिवसेना के हिस्से आए ये विभाग
आदित्य ठाकरे- पर्यावरण, पर्यटन
एकनाथ शिंदे- नगरविकास
सुभाष देसाई- उद्योग
संजय राठोड़- वन
दादा भुसे- कृषि
अनिल परब- परिवहन, संसदीय कार्य
संदीपान भुमरे- रोजगार हमी (ईजीएस)
शंकरराव गडाख- जल संरक्षण
उदय सामंत- उच्च व तकनीकी शिक्षा
गुलाब राव पाटिल- जलापूर्ति

शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने राज्य में मंत्रियों के विभागों के वितरण को लेकर चर्चा की थी। उद्धव ठाकरे ने नवंबर में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ कांग्रेस के दो विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। 

29-12-2019
देश में चलेगी 150 निजी ट्रेन, रेलवे ने किया 100 रेलमार्गो का चयन

नई दिल्ली। रेलवे की मंजूरी के बाद से देश में प्राइवेट ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। रेलवे ने 150 प्राइवेट ट्रेनों के परिचालन के लिए 100 रेलमार्गों का चयन किया है। जनवरी में इन रूट के लिए बोलियां लगने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 19 दिसंबर को वित्त मंत्रालय के अधीन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (पीपीपीएसी) द्वारा प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी देने के साथ ही निजी ऑपरेटर्स द्वारा ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ हो गया। इस पहल के साथ ही यात्री रेलगाडिय़ों के परिचालन में रेलवे की मोनोपॉली भी खत्म होने जा रही है। इन रेल मार्गो का किया गया चयन प्रमुख मार्गों में मुंबई-वाराणसी व्हाया जबलपुर-इटारसी, मुंबई-पुणे व्हाया जबलपुर-इटारसी, सूरत-वाराणसी (व्हाया जबलपुर-इटारसी), मुंबई-लखनऊ, मुंबई-नागपुर, नागपुर-पुणे, सिकंदराबाद-विशाखापट्टनम, पटना-बेंगलुरु, पुणे-पटना, चेन्नै-कोयंबटूर, चेन्नै-सिकंदराबाद, सूरत-वाराणसी तथा भुवनेश्वर-कोलकाता शामिल हैं। कुछ अन्य मार्गों में नई दिल्ली से पटना, इलाहाबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, कटरा, गोरखपुर, छपरा तथा भागलपुर का भी चयन किया गया है। इन मार्गों के चयन में वाणिज्यिक व्यवहार्यता पर अधिक ध्यान दिया गया है। 100 मार्गों में से 35 नई दिल्ली से कनेक्ट होंगे, जबकि 26 मुंबई से, 12 कोलकाता से, 11 चेन्नै से तथा आठ बेंगलुरु से कनेक्ट होंगे। इन मार्गों में गोरखपुर-लखनऊ, कोटा-जयपुर, चंडीगढ़-लखनऊ, विशाखापट्टनम-तिरुपति तथा नागपुर-पुणे शामिल हैं।

01-12-2019
देश की नई महालेखा नियंत्रक बनीं सोमा रॉय बर्मन

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने रविवार को एक जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने 1986 बैच की भारतीय सिविल लेखा सेवा अधिकारी सोमा रॉय बर्मन को नया महालेखा नियंत्रक नियुक्त किया गया है। बर्मन 24वीं महालेखा नियंत्रक हैं तथा इस पद पर पहुंचने वाली सातवीं महिला हैं। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने बर्मन को महालेखा नियंत्रक नियुक्त किया है। इससे पहले बर्मन अतिरिक्त महालेखा नियंत्रक के पद पर थीं। नियुक्ति एक दिसंबर 2019 से प्रभावी है। बर्मन ने 33 साल के करियर में गृह मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, उद्योग मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और नौवहन, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में विभिन्न पदों पर काम किया है।

 

29-11-2019
देश की अर्थव्यवस्था बदहाल, 4.5 फीसदी पर पहुंची जीडीपी

नई दिल्ली। वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में विकास दर 4.5 फीसदी रही। सुस्ती के चलते पहली तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इन आंकड़ों को जारी किया था। यह छह साल (26 तिमाही) में सबसे कम है। इससे कम 4.3 फीसदी जनवरी-मार्च 2013 में रही थी। जीडीपी ग्रोथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सुस्ती की वजह से ज्यादा प्रभावित हुई। इस सेक्टर की ग्रोथ (-)1 फीसदी रही। पिछले साल सितंबर तिमाही में 4.9 फीसदी थी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि आज जारी हुए जीडीपी के आंकड़े कहीं से भी मंजूर नहीं है। हमें 8-9 फीसदी से बढऩा चाहिए था। जीडीपी में पहली तिमाही के मुकाबले इस बार आधा फीसदी की ज्यादा गिरावट दूसरी तिमाही में हुई है। केवल आर्थिक नीतियों में बदलाव से इसका हल नहीं निकलेगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल काफी मजबूत हैं। तीसरी तिमाही से जीडीपी में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।  सर्वे में कहा गया कि रिजर्व बैंक एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। तीन से पांच दिसंबर चलने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट को घटाकर 4.90 फीसदी पर की जा सकती है। सर्वे में शामिल अधिकतर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि घरेलू कर्ज की धीमी रफ्तार और कंपनियों के घटते मुनाफे की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार पकडऩे में समय लगेगा।

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