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24-12-2019
झारखंड में भाजपा की हार के 5 कारण, लोकसभा चुनाव के बाद 7 महीने में ही वोट शेयर 18% घटा : प्रकाशपुंज पांडेय 

रायपुर। राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुंज पांडेय ने झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि विधानसभा चुनाव 2019 में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन पार्टी यानी आजसू के सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर निकलने का भाजपा को खामियाजा भुगतना पड़ा। वहीं, विपक्षी दलों झामुमो, कांग्रेस और राजद का महागठबंधन एकजुट रहा। उसने समय रहते सीटों का बंटवारा किया। भाजपा के आक्रामक प्रचार के विपरीत सुदूर इलाकों में रैलियां की और गठबंधन के नेताओं के साथ मंच साझा किया। इन्हीं वजहों से महागठबंधन के दलों को पिछली बार के मुकाबले 14 सीटों का फायदा हुआ और उसने भाजपा से सत्ता छीन ली।

1. भाजपा का वोट शेयर लोकसभा चुनाव में 51% था, विधानसभा चुनाव में 33% रह गया - 

7 महीने पहले मई 2019 में जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे, तो भाजपा ने 51% वोट हासिल कर 54 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई थी। 35 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की लीड 50 हजार से अधिक थी। इनमें 16 विधानसभा क्षेत्रों में लीड मार्जिन 90 हजार से ज्यादा था। भाजपा ने राज्य की 14 में से 11 लोकसभा सीटें भी जीती थीं। आजसू भी उसके साथ जिसे 1 सीट मिली थी। इसी वजह से भाजपा को झारखंड में सत्ता में वापसी की उम्मीद थी। झारखंड का ट्रेंड भी बताता है कि लोकसभा चुनाव की तुलना में विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर लगभग 10% गिरता है। इस हिसाब से भाजपा का वोट शेयर 51% से घटकर 41% पर टिकता, तो भी वह सत्ता में वापसी कर लेती। लेकिन कुर्मी-कोयरी समेत पिछड़े और दलितों के बीच ठीक-ठाक आधार रखने वाली सहयोगी पार्टी आजसू उससे छिटक गई। उसे चुनाव में 8% वोट मिले। नतीजा यह हुआ कि भाजपा का वोट शेयर भी अनुमानित 41% से 8 फीसदी और कम होकर 33% पर रह गया।

2. रघुवर दास की जमीन खिसकी - 

राज्य में पिछड़ा बहुल 26 विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा को सत्ता हासिल होती थी, वहां उसे सबसे ज्यादा घाटा हुआ। पूर्वी जमशेदपुर में अवैध 86 बस्तियों को नियमित बनाने का सवाल ऐसा तना कि मुख्यमंत्री रघुवर दास का आधार ही खिसक गया। वे इन बस्तियों को नियमित नहीं कर पाए। नतीजा यह हुआ कि वे जमशेदपुर पूर्वी सीट पर अपनी ही सरकार में कभी मंत्री रहे सरयू राय से पिछड़ गए। उधर, भाजपा के लक्ष्मण गिलुआ भी चक्रधरपुर में तीसरे स्थान पर खिसक गए।

3. भाजपा सरकार से आदिवासी नाराज़ हुए - 

जल-जंगल-ज़मीन के सवाल पर आदिवासी सरकार से नाराज़ थे। राज्य में उद्योगों के लिए लैंड बैंक बनाए जा रहे थे। आदिवासी इस ज़मीन को अपना मानते थे। छोटा नागपुर टेनेंसी एक्ट और संथाल परगना टेनेंसी एक्ट में सरकार ने संशोधन की कोशिश की थी। आदिवासी मान रहे थे कि उनकी ज़मीन उद्योगों को देने के लिए यह कोशिश हो रही है। भारी विरोध के चलते इन क़ानूनों में संशोधन तो नहीं हुआ, लेकिन आदिवासियों की नाराज़गी बढ़ गई। अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित 28 सीटों में 20 झामुमो-कांग्रेस गठजोड़ के खाते में गईं। भाजपा को यहां 5 सीटों का सीधा नुकसान हुआ। सत्ता में रहते हुए पारा शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका की नाराज़गी केंद्रीय योजनाओं के बूते हुए विकास के काम पर कुछ ऐसी भारी पड़ती दिखी कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री की डबल इंजन की सरकार की गुहार काम नहीं आई। साथ ही भाजपा का फोकस केंद्र की योजना पर ही रहा। भाजपा ने पूरे चुनाव में केंद्रीय योजनाओं की डिलिवरी जैसे आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान राशि का प्रचार किया था। प्रधानमंत्री ने अपनी कुछ फ्लैगशिप योजनाओं को भी झारखंड से ही लॉन्च किया था। राम मंदिर, नागरिकता कानून जैसे मसले उठाए। इनमें कहीं भी स्थानीय लोगों से जुड़े सवाल नहीं थे। शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं के मुद्दों पर उन्होंने बात नहीं की।

4. महागठबंधन पहले से तैयार था, चुनाव घोषित होते ही भाजपा से दूर हुई आजसू - 

झामुमो-कांग्रेस-राजद गठजोड़ ने चुनाव घोषणा से पहले ही सीटों का बंटवारा कर जमीन पर कवायद शुरू कर दी थी। वहीं, भाजपा-आजसू गठजोड़ चुनाव घोषणा के बाद टूटा। आजसू पिछले 5 साल भाजपा के साथ सत्ता में थी। सीटों के बंटवारे के सवाल पर भाजपा ने पुराने सहयोगी आजसू पार्टी को खोया। भाजपा ने मंत्री सरयू राय का टिकट काट दिया। दूसरे दलों से आए नेताओं को भी टिकट दिए गए। ये दोनों ऐसी चूक थीं, जो चुनावी हवा का रुख भाजपा के खिलाफ करने में मददगार साबित हुईं।

5. महागठबंधन ने गुरिल्ला प्रचार शैली अपनाई, बड़ी रैलियां नहीं कीं - 

भाजपा के बड़े नेताओं की कारपेट बॉम्बिंग शैली में किए गए प्रचार के उलट गठबंधन के नेताओं ने प्रचार की गुरिल्ला शैली अपनाई। बड़ी सभाएँ नहीं कीं। सुदूर इलाकों में कई-कई बार हेलिकॉप्टर से उतरे। अलग-अलग प्रचार किए। मौका देख मंच साझा किया। उनकी रणनीति कामयाब रही।

23-12-2019
झारखंड:  रघुवर दास ने मुख्‍यमंत्री पद से दिया इस्‍तीफा

रांची। मुख्‍यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राज्‍यपाल द्रौपदी मुर्मू को इस्‍तीफा सौंप दिया। रघुवर ने राज्य की जनता का धन्यवाद दिया और कहा कि वह जनता के आदेश को सहर्ष स्वीकार करते हैं लेकिन उन्होंने इस हार को पार्टी की नहीं बल्कि अपनी व्यक्तिगत हार बताई। इससे पूर्व दास ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मेरी व्यक्तिगत हार है, यह भाजपा की हार नहीं है। उन्होंने चुनाव के परिणामों और रुझानों पर कहा, ‘लगता है कि भाजपा विरोधी सभी मतों का ध्रुवीकरण हो गया और उनके एकजुट हो जाने से ही हमें हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में जनता का आदेश शिरोधार्य होता है। अतः जो भी जनादेश मिलेगा उसका हम सहर्ष स्वागत करेंगे। 

23-12-2019
झारखंड: गठबंधन की जीत पर नरेंद्र मोदी ने हेमंत सोरेन को दी बधाई

नई दिल्ली। झारखंड विधानसभा चुनाव में झामुमो, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन को जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है। नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर हेमंत सोरेन को बधाई दी है तो वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रदेश की जनता का भी धन्यवाद किया है। मोदी ने ट्वीट किया, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले जेएमएम गठबंधन तो जीत के लिए बधाई। राज्य की सेवा के लिए उन्हें शुभकामनाएं। मोदी ने एक और ट्वीट में कहा, मैं झारखंड की जनता को भी धन्यवाद देता हूं। राज्य ने कई सालों तक भाजपा को राज्य की सेवा करने का अवसर दिया। भाजपा के कार्यकर्ताओं और उनके प्रयासों की भी सराहना करता हूं। हम आने वाले समय में राज्य के लोगों के मुद्दों को उठाते रहेंगे। बता दें कि झारखंड में 81 सीटों पर बहुमत के लिए 41 सीटों की जरूरत है। गठबंधन को 46 सीटें मिली हैं। चुनाव में झामुमो को 25, कांग्रेस को 13 और राजद को 1 सीट पर निर्णायक बढ़त है। ऐसे में गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया है। वहीं भाजपा को 25 सीटें मिली हैं।

23-12-2019
किसी का भरोसा नहीं टूटने दूंगा :  हेमंत सोरेन

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने इस जनादेश का सम्मान करते हुए सभी मतदाताओं को धन्यवाद दिया है। उन्होंने झारखंड में किसी की उम्मीद नहीं टूटने का भरोसा देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इसलिए झारखंड राज्य बना था, उस उद्देश्य को पूरा किया जाए। हेमंत सोरेन ने इस परिणाम को पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष शिबू सोरेन के परिश्रम और समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने इस परिणाम के लिए गठबंधन में शामिल राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस जनादेश का सम्मान करने की बात करते हुए कहा, अभी कई चीजें स्पष्ट हुई हैं, जबकि कई चीजें अभी अस्पष्ट हैं। जल्द ही गठबंधन के अन्य साथियों के साथ मिल बैठकर आगे की बातें तय कर ली जाएंगी।

23-12-2019
कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन की जीत का मोहन मरकाम ने किया स्वागत

रायपुर। झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन की जीत पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि भाजपा की विभाजनकारी नीतियों को झारखंड की जनता ने खारिज कर दिया है। भाजपा को सीटों में जबर्दस्त गिरावट और कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत से स्पष्ट है कि अब देश ने भाजपा की कांग्रेस मुक्त भारत की अवधारणा को खारिज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि अब तो भाजपा अपनी चिंता करें। कांग्रेस के साथ देश की जनता का पूरा समर्थन है।

 

23-12-2019
एक साल के भीतर भाजपा ने गंवाया पांचवा राज्य, झारखंड में गठबंधन की सरकार बनना तय

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव परिणामों के रुझान को देखते हुए राज्य की सत्ता से भाजपा की विदाई तय हो गई है। दो साल के अंदर हुए चुनावों में यह सातवां राज्य है जहा से एनडीए ने सत्ता गवां दी है। यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन को बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। दिसंबर 2017 में देश के लगभग 72% आबादी और 75% भूभाग वाले 19 राज्यों में एनडीए या भाजपा की सरकार थी। झारखंड में हारने के बाद एनडीए की सरकार देश के 42 फीसदी आबादी पर ही बचेगी। वर्तमान में 16 राज्यों में एनडीए सत्ता पर काबिज है। बिहार में नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़ भाजपा के साथ आ गए जहां 2020 में चुनाव होना है। बता दें कि पहले मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ही सरकार थी। लेकिन कांग्रेस ने एक साल पहले हुए चुनावों के दौरान यहां भाजपा के हाथों से सत्ता छीन ली।

मार्च 2018 से पहले आंध्र प्रदेश में भी भाजपा-टीडीपी गठबंधन की सरकार थी। लेकिन, स्पेशल स्टेटस को लेकर हुए विवाद के बाद भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार बनाई और जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बनें। महाराष्ट्र में भी हाल में ही हुए विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद के कारण भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूट गया। इसके बाद शिवसेना ने एनडीए का साथ छोड़ा और कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। जम्मू-कश्मीर में भी पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली भाजपा ने जून 2018 में गठबंधन से नाता तोड़ लिया था। जिसके बाद राज्य में पहले राज्यपाल शासन और बाद में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाट दिया गया है। इनमें से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा है जहां चुनाव होना बाकी है। लद्दाख में विधानसभा नहीं है।

कर्नाटक, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में सरकार बनाई

भाजपा ने भले ही इन सात राज्यों में सरकार गवां दी लेकिन इस दौरान उसने कर्नाटक, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में सरकार बनाई भी है। जिससे उसके हार का अंतर कुछ कम हुआ है। 

 

23-12-2019
झारखंड विधानसभा चुनाव : शुरुआती रुझान में गठबंधन को पूर्ण बहुमत, भाजपा को झटका

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव की मतगणना सोमवार सुबह से प्रारम्भ हो चुकी है। अब तक 81 सीटों के मिले रुझानों में भाजपा 27 विधानसभा सीटों पर आगे चल रही है। झामुमो, कांग्रेस और राजद का गठबंधन 43 विधानसभा सीटों पर आगे चल रहा है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास आगे, हेमंत सोरेन एक सीट पर आगे, दूसरी पर पीछे

प्रारंभिक रुझानों के अनुसार मुख्यमंत्री रघुवर दास जमशेदपुर पूर्व विधानसभा सीट पर आगे चल रहे हैं लेकिन जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन बरहेट सीट पर भाजपा उम्मीदवार से आगे और दुमका विधानसभा सीट पर भाजपा से ही पीछे चल रहे हैं।

भाजपा को झटका

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 74 सीटों को रुझान आए हैं। जिनमें जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी को 39, भाजपा को 26, जेवीएम को 4, बसपा को दो, आजसू को 2 और सीपीआईएमएल को एक सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है।
 
हेमंत सोरेन बनेंगे सीएम : तेजस्वी यादव

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उन्हीं के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है। झारखंड में राजद के चार उम्मीदवार आगे चल रहे हैं।

23-12-2019
झारखण्ड में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना बता रहे शुरुआती रुझान, यानी एक्ज़िट पोल के दावे शुरआत में ही फुस्स

रायपुर।झारखंड विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना बता रहे हैं इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनल। वही इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनल जो कल तक भाजपा की एकतरफा पराजय का दावा कर रहे थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन की जीत को तय बता रहे थे। ये नतीजे नहीं शुरूआती रुझान है वह भी पोस्टल बैलट के। अभी ईवीएम खुलना बाकी है। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनल के पंडितों ने अभी से किंगमेकर खोजना शुरू कर दिया है। पुराने गठबंधन के टूटने और नये गठबंधन बनने की संभावनाएं भी तलाशनी शुरू कर दी है।

जबकि नतीजे आना शेष है। अगर यही रुझान नतीजों में परिवर्तित होते हैं तो हर बार अपने एग्जिट पोल का दावा करने वाले न्यूज़ चैनल क्या इस बात को स्वीकार करेंगे कि उनका एग्जिट पोल हमेशा की तरह इस बार भी तुक्का था जो तीर नहीं बन पाया। बहरहाल शुरुआती रुझान तो सारे न्यूज़ चैनलों के एग्जिट पोल को खारिज कर रहे हैं जो एक प्रकार से उनके चुनावी परिणामों को प्रभावित करने और अपने हिसाब से मोड़ने के प्रयास को असफल साबित करते नजर आ रहे हैं। जीत हार तो परिणाम के बाद तय होगी होगी लेकिन फिलहाल एग्जिट पोल पर एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान तो लगता नजर आ रहा है।

20-12-2019
झारखंड विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में 16 सीटों के लिए 70.87 प्रतिशत मतदान

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव के पांचवें और अंतिम चरण में संथाल क्षेत्र की 16 विधानसभा सीटों के लिए आरंभिक आंकड़ों के अनुसार कुल 70.87 प्रतिशत मतदान हुआ। शुक्रवार शाम पांच बजे मतदान का समय समाप्त होने तक विधानसभा की 16 सीटों के लिए अतिम चरण में कुल 70.87 प्रतिशत मतदान हुआ है। अंतिम चरण में 236 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 40,05,287 मतदाताओं ने शाम पांच बजे तक ईवीएम मशीनों में बंद कर दिये। इन सीटों में से सात सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित हैं। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनय कुमार चौबे ने बताया कि अंतिम एवं पांचवें चरण के लिए शाम पांच बजे तक प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से 70.87 प्रतिशत मतदान रिकार्ड किया गया है।
उन्होंने बताया कि शाम पांच बजे तक राजमहल विधानसभा सीट पर 67.23 प्रतिशत, बोरियो सीट पर 71.58, बरहेट सीट पर 70.07 प्रतिशत, लिट्टीपाड़ा सीट पर 70.01 प्रतिशत, पाकुड़ पर रिकार्ड 76.10, महेशपुर पर 74.81, शिकारीपाडा पर 72.50, नाला पर 78.01, जामताड़ा पर 74.77, दुमका पर 59.73, जामा पर 65.27, जरमुंडी पर 71.53 प्रतिशत, सारठ पर 75.97, पोडैयाहाट पर 69.61, गोड्डा पर 68.54 और महगामा सीट पर 67.23 प्रतिशत मतदान की खबर है। पांचवे और अंतिम चरण की सीटों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से सुबह सात बजे मतदान प्रारंभ हुआ और तड़के ही बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केन्द्रों पर मतदान के लिए पहुंच गये और पिछले चार चरणों की तुलना में अंतिम चरण में सर्वाधिक मतदान हुआ। उन्होंने बताया कि इन सभी सीटों के लिए कुल 5389 मतदान केंद्र बनाए गए थे,जिनमें शहरी क्षेत्र में 269 और ग्रामीण क्षेत्र में 5120 मतदान केंद्र स्थित थे। ये सभी मतदान केंद्र 4096 मतदान केंद्र भवनों में स्थित थे।
इन मतदाताओं में 20,49,921 पुरुष, 19,55,336 महिला, 30 तृतीय लिंग के और 93,779 नए मतदाता (18-19 साल के) थे। इसके अलावा 80 साल से ज्यादा आयु के 41,505 और 49,446 दिव्यांग मतदाता शामिल थे।

20-12-2019
झारखंड विधानसभा चुनाव : पांचवें चरण की 16 सीटों पर मतदान जारी, 236 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव के पांचवें और अंतिम चरण में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का गढ़ माने जाने वाले संथाल क्षेत्र की 16 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी है। अंतिम चरण के मतदान में 40,05,287 मतदाता 236 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इन 16 सीटों में से सात सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित हैं। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में इनमें से छह सीटें जेएमएम ने और पांच भाजपा ने जीती थीं। नक्सल प्रभावित बोरियो, बरहेट, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर और शिकारीपाड़ा में मतदान दोपहर तीन बजे तक होगा जबकि अन्य 11 सीटों पर शाम पांच बजे तक मतदान होगा। कुल 28 मतदान केंद्रों के कर्मियों को हेलीकाप्टरों से उनकी तैनाती के केंद्रों तक पहुंचाया गया है। दूरदराज के कुल 84 इलाकों में सैटेलाइट फोन की व्यवस्था की गई है। इस आखिरी चरण में पूर्व मुख्यमंत्री और जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन, राज्य के कई मंत्रियों और झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव के भाग्य का फैसला आज वोटिंग मशीनों में बंद हो जाएगा। 
 

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