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21-10-2020
तीन दिनों से जारी है धरना प्रदर्शन,अधिकारियों को उनकी सुध लेने की फुर्सत तक नहीं

धमतरी। राजीव ग्राम दुगली के पास वसुंधरा में रहने वाले आदिवासियों ने जमीन के पट्टे की मांग को लेकर जिला मुख्यालय धमतरी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। शहर के रामबाग मैदान में उनका धरना प्रदर्शन पिछले तीन दिनों से जारी है, पर अधिकारियों को उनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं मिल रही है। परिवार समेत राशन पानी लेकर धरने पर बैठे इन आदिवासियों ने बताया कि वे सभी भूमिहीन हैं और दुगली के पास वसुंधरा धोबाकछार की आबादी जमीन पर झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं और यहीं जमीन पर खेती कर गुजर बसर कर रहे हैं। काबिज जमीन के पट्टे की मांग वे वर्ष 1993 से लगातार कर रहे हैं। इस बीच 6-7 लोगों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उल्टे कब्जा करने के आरोप में उन्हें दो बार जेल भेजा जा चुका है।

इनमें से एक प्रकरण में अदालत से सभी बरी हो चुके हैं और दूसरा प्रकरण लंबित है। इस बीच वन विभाग और ग्रामवासियों ने तीन साल पहले उनकी झोपड़ियों को तोड़कर अंदर रखे सारे सामानों को नष्ट कर दिया था और उनके साथ मारपीट भी की थी। इस अत्याचार के बावजूद वे सभी न्याय के लिए न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं। उनका साफ कहना है कि वे सभी पिछले 27 सालों से वसुंधरा धोबाकछार की जमीन पर काबिज हैं और इसका पट्टा हासिल करने के इंतजार में उनके साथियों की एक एककर मौत भी हो रही है। इसलिए अब पट्टा हासिल करने के लिए सभी लोग मरते दम तक संघर्ष करते रहेंगे।

 

16-10-2020
वनाधिकार आवेदनों की पावती नहीं दिए जाने पर सैकड़ों आदिवासियों ने किया पंचायत का घेराव 

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के बैनर तले कोरबा जिले के पाली विकासखंड के रैनपुर खुर्द ग्राम पंचायत का घेराव करके सैकड़ों आदिवासी धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि वनाधिकार दावे का आवेदन लेकर उन्हें पावती दी जाए और पंचायत, सरपंच व सचिव न आवेदन लेने को तैयार है, न पावती देने को। ग्रामीणों ने इस इंकार को लिखित में देने की मांग को भी नकार देने के बाद ये ग्रामीण पंचायत कार्यालय का घेराव करके धरने पर बैठ गए हैं। पंचायत के अंदर न किसी को जाने दिया जा रहा है, न कार्यालय से किसी को बाहर निकलने दिया जा रहा है। ग्रामीण जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाने की मांग कर रहे हैं। सुबह 11 बजे से जारी किसान सभा का घेराव इन पंक्तियों के लिखे जाने तक जारी है और आवेदन लेकर पावती मिलने पर ही आदिवासी ग्रामीण घेराव खत्म करने की बात कह रहे हैं।

पंचायत के इस घेराव का नेतृत्व प्रशांत झा, जवाहर कंवर, दीपक साहू आदि कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां राज्य सरकार ने आदिवासियों को वनाधिकार देने के बढ़-चढ़कर दावे किए जा रहे हैं, वहीं वास्तविकता यह है कि वनाधिकार दावों के आवेदन तक नहीं लिए जा रहे हैं या फिर उन्हें पावती ही नहीं दी जा रही है। जबकि वनाधिकार कानून के तहत आवेदन लेना, उसकी पावती देना और दावेदारी निरस्त होने पर आवेदनकर्ता को लिखित सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन जिले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। रैनपुर ग्राम पंचायत का घेराव इसका जीता-जागता सबूत है।

07-10-2020
आदिवासियों को नक्सली हिंसा से बचाने के लिए बस्तर पुलिस है : सुंदरराज पी

रायपुर/जगदलपुर। नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर  आईजी सुंदरराज पी. ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद 1769 निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की हत्या करने वाले नक्सलियों संगठन को आदिवासियों के ऊपर अत्याचार का बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। जनविरोधी हरकतों के कारण से आपसी मतभेद एवं एक-दूसरे की हत्या करने वाले नक्सली संगठन के खात्मा की झलक नजर आ रही है।


आईजी ने कहा कि नक्सलियों की दिग्भ्रमित एवं गुमराह प्रचार-प्रसार के जाल में नहीं फंसेगी। बस्तर की जनता निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की नक्सलियों की ओर से की गई हत्याओं का चौतरफा विरोध को देखते हुए पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के डरपोक सचिव पापाराव अपना नाम बदलकर मोहन के नाम से जारी किया। बेबुनियाद एवं झूठा प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के इस मनगढंत एवं निराधार प्रेस विज्ञप्ति में बस्तर क्षेत्र के मूल वासियों के जानमाल की रक्षा करना सुरक्षा बल एवं पुलिस की प्राथमिकता है। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए नक्सली हिंसा से बस्तर के आदिवासियों की रक्षा करने के लिए बस्तर पुलिस संकल्पित।

20-08-2020
हमारी सरकार किसानों, गरीबों, आदिवासियों, मजदूरों के हितों की रक्षा करने वाली है : राहुल गांधी

रायपुर। सांसद राहुल गांधी ने किसानों, गरीबों, आदिवासियों और जरूरतमंद लोगों की मदद की योजनाओं के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बताया है। राहुल गांधी आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से राज्य के किसानों, तेंदूपत्ता संग्राहकों और गोबर विक्रेता ग्रामीणों के खाते में 1737.50 करोड़ रुपए की राशि के अंतरण के लिए समारोह में शामिल हुए।राहुल गांधी ने आगे कहा कि हमारी सरकार किसानों, गरीबों, आदिवासियों, मजदूरों के हितों की रक्षा करने वाली सरकार है। छत्तीसगढ़ राज्य में इन वर्गों की भलाई के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हम किसानों, गरीबों, आदिवासियों, मजदूरों के हितों की रक्षा इसलिए करते हैं, क्योंकि हम समझते हैं कि हिंदुस्तान को आगे ले जाने वाले यही लोग हैं। इनके हितों की रक्षा किए बिना देश आगे नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश में दो अर्थव्यवस्थाएं हैं एक संगठित अर्थव्यवस्था, जिसमें बड़ी-बड़ी कंपनियां शामिल हैं, दूसरी असंगठित अर्थव्यवस्था,जिसमें हमारे किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और लाखों-करोड़ों गरीब लोग हैं। हमारी सरकारें दोनों अर्थव्यवस्थाओं में संतुलन बनाकर काम करती हैं।इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य में किसानों, ग्रामीणों, मजदूरों एवं आदिवासियों को विभिन्न योंजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से मदद पहुंचाकर हम राजीव जी के सपनों को साकार करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस समारोह में अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा, राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया ने भी आनलाइन शिरकत की।बघेल ने बताया कि आज अंतरित की जा रही राशि में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के दूसरी किस्त के 1500 करोड़ रुपए, गोधन न्याय योजना के 4 करोड़ 50 लाख रुपए और तेंदूपत्ता संग्राहकों के प्रोत्साहन पारिश्रमिक के 232.81 करोड़ रुपए शामिल हैं। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरूआत 21 मई को राजीव गांधी की शहादत पुण्यतिथि के अवसर पर की गई थी।

उसी दिन पहली किस्त के 1500 करोड़ रुपए 19 लाख किसानों के खातों में सीधे अंतरित किए गए थे। छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना के तहत किसानों को चार किश्तों में 5750 करोड़ रुपये की आदान सहायता राशि दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत राज्य शासन द्वारा दो रूपए प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। आज 77 हजार 97 गोबर विक्रेता ग्रामीणों एवं पशुपालकों को 4 करोड़ 50 लाख रुपए का दूसरा भुगतान किया गया है। वहीं  राज्य के तेंदूपत्ता संग्राहकों को आज 233 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है, इससे पूर्व वर्ष 2018 संग्रहण वर्ष में 371 करोड़ रुपए का पारिश्रमिक वितरित किया गया था। इससे राज्य के 12 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 4000 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से तेंदूपत्ता की खरीदी का वादा हमने निभाया है।इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, मुख्य सचिव आर.पी. मंडल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू और अमिताभ जैन विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

 

10-08-2020
आदिवासियों के पिछड़ेपन की जिम्मेदार कांग्रेस को अनर्गल प्रलाप शोभा नहीं देता : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने कांग्रेस नेताओं के आदिवासियों के लिए बहाए जा रहे घड़ियाली आँसुओं पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि जिस कांग्रेस ने आदिवासियों को पिछड़ेपन और भुखमरी से उबरने नहीं दिया, उसे आदिवासियों के नाम पर अनर्गल प्रलाप करना शोभा नहीं देता। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय पर तानाकशी करने से पहले कांग्रेस के लोग अपना दामन झाँक लें तो उनकी करतूतें आसमान को भी रोने के लिए मजबूर कर देंगीं।गागड़ा ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने शासनकाल को नहीं भूलना चाहिए जब बस्तर से लेकर सरगुजा तक आदिवासी मूलभूत सुविधाओं रोटी, कपड़ा, मकान, बेहत शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक के मोहताज बनाकर रखे गए थे। अन्याय की पराकाष्ठा करने वाले कांग्रेस के सत्ताधीश आज भाजपा पर किस मुँह से आक्षेप कर रहे हैं जबकि कांग्रेस की मौजूदा प्रदेश सरकार भी आदिवासियों के साथ छल-कपट का व्यवहार कर रही है।

गागड़ा ने कहा कि आदिवासियों की धार्मिक भावनाओं के साथ हो रहे शर्मनाक खिलवाड़ तक को नहीं रोक पाने वाले कांग्रेस के नेता पहले यह बताएँ कि पिछले दो साल से आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस अब तक क्यों नहीं मिला? इन आदिवासी संग्राहकों के वृद्ध लोगों की पेंशन और बच्चों की छात्रवृत्ति पिछले दो साल से क्यों रोक दी गई है? तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए नई बीमा योजना की नौटंकी रचकर आदिवासियों को भरमाने में जुटी कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने पहले से चल रही बीमा योजना का समय पर नवीनीकरण क्यों नहीं कराया? कांग्रेस नेता आदिवासियों के विकास के लिए भाजपा की तारीफ भले न करें पर झूठ बोलने से बेहतर यही है कि वे चुप तो रह ही सकते हैं।

 

09-08-2020
विश्व आदिवासी दिवस पर मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया गया सम्मानित

दुर्ग। विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उन्होंने आदिवासियों के हितों के लिए राज्य में चलाए जा रहे प्रयासों जनता के बीच रखा। इस अवसर पर वन भूमि पर बरसों से रह रहे लोगों को वन अधिकार पट्टा का वितरण करने के साथ आदिवासी अंचल के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। जिला स्तर पर दुर्ग जिले में प्रयास आवासीय विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। इसमें कक्षा 10वीं उत्कृष्ट अंक अर्जित करने वाले 3 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इनमें धमतरी निवासी कुमारी दीपिका एवं रूपेश कुमार को एडीएम प्रकाश सर्वे ने प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया।

 

29-07-2020
छत्तीसगढ़ के दिनदुखियों व आदिवासियों का दुःख दर्द दूर करने का संकल्प ले कर आई है राज्यपाल अनुसुईया उइके

रायपुर। राज्यपाल अनुसुइया उइके परंपरागत अवधारणाओं के विपरीत आम आदमियों दिनदुखियों और आदिवासियों के लिए काम करने का संकल्प लेकर यहां आई है और राज्यपाल के रूप में उन्होंने यह सब करने की पूरी कोशिश की। उनके एक साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस एक साल में राज्यपाल ने समाज के हर तबके से मुलाकात की। छत्तीसगढ़ के हर पक्ष को जाना। आत्मसमर्पित नक्सलियों से मुलाकात की और हर समस्या की जड़ तक जाकर उसे समझने और सुलझाने की कोशिश की। राज्यपाल के रूप में उनका एक साल बेहद सफल माना जा सकता है। उनका आम आदमी से सीधा संपर्क भी उनके राज्य के प्रति लगाव को साबित करता है। 16 जुलाई 2019 वह दिन था जब अनुसुईया उइके राष्ट्रीय जनजाति आयोग के कार्यालय में उत्तरप्रदेश के कलेक्टरों से वहां के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े समस्या के समाधान के लिए चर्चा कर रही थी। तभी यह खबरें चलने लगीं कि उन्हें छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का दायित्व सौंपा गया। उन्हें इस बात का अंदेशा नहीं था कि उन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इसलिए उन्होंने खुद तस्दीक की। एक तरफ उन्हें आयोग के कार्यकाल पूर्ण करने से पहले पहले थोड़ा अचरज हुआ पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर खुशी भी हुई। 

उन्होंने 26 जुलाई की शाम तक अपने बचे हुए कामकाज को निपटाया और 27 जुलाई 2019 को छत्तीसगढ़ पहुंची। छत्तीसगढ़ पहुंचते ही उन्हें अहसास हो गया था कि यह वह राज्य है जिसकी 32 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासियों की है और आधे से अधिक भूभाग 5वीं अनुसूची क्षेत्र अर्थात आदिवासी बाहुल्य इलाका है। शपथ से पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर नारायण सिंह को नमन किया और उसके बाद उन्होंने शपथ की प्रक्रिया पूर्ण की। चूंकि उइके ने यह संकल्प लेकर ही छत्तीसगढ़ पहुंची थी कि मुझे जो दायित्व मिला है, उसके परम्परागत अवधारणा के विपरीत आम लोगों, आदिवासियों और दीन-दुखियों के लिए काम करेंगी। सबसे पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की समस्या को जानने के लिए सर्व आदिवासी समाज के राजभवन आने पर उन्होंने घंटों छत्तीसगढ़ की खासियत और यहां की समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति उनके दरवाजे पर पहुंचता है तो उनकी समस्या सुने बिना उन्हें जाने न दें, इसके लिए कठिन प्रक्रिया का पालन न करें। कुछ ही दिनों में उनकी सक्रियता की जानकारी छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में पहुंची और अभी तक जो कभी राजभवन के दरवाजे भी नहीं पहुंचे थे, वे छत्तीसगढ़ के अति पिछड़ी जनजाति के लोग थे। उन्हें किसी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। उइके को जैसे ही जानकारी मिली उन्हें अंदर बुलाया और अपने कार्यालय में उनका अभिवादन किया और उनकी समस्या सुनी ही नहीं, उनके समाधान के लिए तुरंत कार्यवाही की और कुछ दिनों के भीतर उनकी वर्षों से लंबित विशेष भर्ती प्रक्रिया को शासन ने हरी झंडी दे दी। 

उइके यह जानती थी कि छत्तीसगढ़ के लोगों में इतनी सरलता है कि कई बार उन्हें अपनी बात रखने में भी संकोच होता है और इसी कारण छोटी-छोटी समस्या भी नहीं सुलझती। उन्होंने इसके लिए पहल की और बिना किसी विशेष प्रोटोकाल के समस्याओं से जुड़े आवेदन स्वीकार करना शुरू किए और उसके लिए एक ‘ट्रेकिंग सिस्टम’ बनाने के निर्देश दिए, जिससे उनकी समस्या का समाधान कागजों में न हो, जमीनी स्तर में हो। उइके ने निरंतर मीडिया और आम जनता से संपर्क बनाएं रखा, तभी उन्हें आदिवासी जिला गरियाबंद के ग्राम सुपेबेड़ा की जानकारी मिली, जहां के कई लोग किडनी की बीमारी से काल-कलवित हो गए थे। यह सिलसिला रूक नहीं रहा था। उन्होंने सारे निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द किया और स्वयं सुपेबेड़ा पहुंची और ग्रामीणों से मिलकर समस्या की वास्तविकता को जाना और उस मंच से ही आवश्यक निर्देश दिए। यही नहीं, उन्होंने अपना व्यक्तिगत मोबाईल नंबर आम जनता को दिया और कहा कि वे किसी भी समस्या के लिए राजभवन आएं और सीधे बात करें। आगे उनकी तकलीफों का ध्यान वे स्वयं रखेंगी। उनकी पहल पर स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री ने मंच से ही 24 करोड़ के कार्यों की घोषणा की जो करीब 15 वर्षों से लंबित था। साथ राज्यपाल ने 132 के.वी. विद्युत सब स्टेशन को प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उइके का मानना है कि योजनाएं काफी सारी बनती है लेकिन उनका क्रियान्वयन और असल व्यक्ति को लाभ पहुंचना जरूरी है। इसलिए वे स्वयं नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले पहुंची और अधिकारियों की बैठक ली। योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति और वास्तविकता को जाना। यही नहीं जब मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मंडल के अन्तर्गत गेज परिवर्तन कार्य के लिए अधिग्रहित जमीन के किसानों को भारतीय रेलवे द्वारा नौकरी देने में विलंब होने पर राज्यपाल ने स्वयं हस्तक्षेप किया और उन्हें कुछ महीने के भीतर ही नौकरी मिल गई। 

छत्तीसगढ़ की ज्वलंत समस्या नक्सलवाद के संबंध में उइके का मानना है कि उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए आदिवासियों के साथ संवेदनशीलता के साथ पेश आएं और उनके हाथों में काम दें। इसके लिए वे स्वयं आत्मसमर्पित नक्सलियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वे आत्मसमर्पण तो किया लेकिन उनके रहने और रोजगार की पुख्ता व्यवस्था होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आत्मसमर्पित नक्सलियों को पक्के मकान देने का आग्रह किया और उन्होंने तुरंत इसकी घोषणा भी की। उइके कुलाधिपति के रूप में दीक्षांत समारोह में शामिल होकर मार्गदर्शन दिया बल्कि कोई विद्यार्थी उनके समक्ष समस्याओं को लेकर पहुंचा तो उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए कुलपति और अधिकारियों की बैठक लेकर मौके पर ही समाधान किया। उइके दीन-दुखियों की मदद के लिए हमेशा संजीदा रही और इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कैंसर बीमारी से पीड़ित मरीज के परिजनों ने एक सामान्य से पत्र के माध्यम से संपर्क किया तो उन्होंने बिना किसी देरी के मदद की। यही नहीं एक सजायाफ्ता कैदी के परिजनों ने सजामाफी की गुहार लगाई तो उनकी परिस्थितियों को देखते हुए मानवता का परिचय देकर उन्हे सजा माफी दी। जब पूरा देश और प्रदेश कोरोना संकट से जूझ रहा था, तब राज्यपाल उइके अपने आप को निवास तक सीमित न कर सक्रिय हुई और लॉक डाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों और नागरिकों एवं विदेश में फंसे विद्यार्थियों को अपने घर पहुंचने की व्यवस्था कराई। साथ ही कोरोना वॉरियर्स की हौसलाअफजाई भी करती रही।




 

 

 

 

24-07-2020
बृजमोहन ने कहा- कांग्रेस सरकार, वन विभाग अपनी-अपनी नाकामी को छुपाने के लिए रोज नई-नई कहानी गढ़ रहे है

रायपुर। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश के वनमंत्री मो.अकबर के बयान पर पलटवार किया है। बृजमोहन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, सरकार, विभाग अपनी-अपनी नाकामी को छुपाने के लिए रोज नई-नई कहानी गढ़ रहे है। उन्होंने वन मंत्री को इस मुद्दे पर कहा कि अगर सरकार आदिवासियों के बीमा, बोनस, लाभांश, छात्रवृत्ति के मामले में सही है तो मीडिया व जनता के सामने श्वेतपत्र जारी कर दस्तावेज क्यों प्रस्तुत नहीं करती। बृजमोहन ने वन मंत्री से प्रश्न किया कि बीमा की नवीनीकरण की अंतिम तिथि क्या 31 मई 2019 थी। क्या 31 मई 2019 अंतिम तिथि को राज्य सरकार ने बीमा का नवीनीकरण करा लिया था। क्या दो सत्र का आदिवासियों का बोनस व लाभांश का पैसा बैंक में जमा कर ब्याज कमाया जा रहा है। क्या तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासी परिवार को दो सीजन का बोनस 597 करोड़ दे दिया है, नही तो क्यों? क्या आदिवासियों की सहकारी समितियों को लाभांश का 432 करोड़ वितरित कर दिया है, नहीं तो क्यों? क्या तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासियों के बच्चों को 2 सत्र की छात्रवृत्ति दे दी गई है, नहीं तो क्यों? बीमा योजना बंद करने से पहले दूसरी योजना लाई गई थी। बीमा योजना के बंद होने से व दूसरी योजना चालू नहीं कर पाने के कारण इस बीच जो हजारों संग्राहक प्रभावित परिवार हैं उसे कैसे व किस मद से सहायता करेंगे?
बृजमोहन ने कहा कि आखिर इन सब विषयों पर वन मंत्री चुप क्यों हैं? क्यों नहीं इस सब विषयों पर दस्तावेज सामने रखते। सिर्फ बयानबाजी कर अपनी गलतियों पर पर्दा नहीं डाल सकते। अगर सरकार आज ही तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीमा, बोनस, लाभांश छात्रवृत्ति के मामले व पूर्व बीमा व योजना व ये जो श्रम विभाग की योजना की बात कर रहे हैं। उनकी राशि सहित सभी अंतर को बताते हुए तत्काल श्वेत पत्र जनता के सामने जारी करे। दूध का दूध व पानी का पानी प्रदेश की जनता के सामने आ जायेगा। सरकार की लापरवाही से ही बीमा बंद हुआ है। सरकार को तो इस लापरवाही की जांच करवाकर दोषी सभी लोगो को दंडित करना चाहिए, जिन्होंने आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय किया है।

17-07-2020
आकांक्षी जिले में हो रहा वनोपज संग्रहण का बेहतर कार्य : गुरु रूद्रकुमार


रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में कांकेर, कोण्डागांव और नारायणपुर आकांक्षी जिले वनोपज संग्रहण का बेहतर कार्य कर रहे हैं। प्रभारी मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप आकांक्षी जिले विकास के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए महुआ की खरीदी 17 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए कर दिया है। इसका लाभ सीधे आदिवासी संग्राहक परिवारों को मिला है। लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी का दायरा भी सरकार ने बढ़ाया है। अब 31 प्रकार के लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इससे आदिवासी संग्राहक परिवारों को अब उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलने लगा है। मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने कहा कि आंकाक्षी जिलों में विकास और निर्माण के कार्य बेहतर तरीके से संचालित हो रहे है।

उन्होंने इसके लिए तीनों जिलों के अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी क्षेत्रों के विकास और यहां के लोगों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लघु वनोपज जो आज से कुछ साल तक औने-पौने दाम पर बेचने के लिए आदिवासी विवश हुआ करते थे। प्रदेश सरकार अब उसकी खुद खरीदी समर्थन मूल्य पर करने लगी है। इससे संग्राहक के परिवारों को न सिर्फ फायदा हुआ है, बल्कि उनका उत्साह भी बढ़ा है। यही वजह है कि इस साल मात्र छह महीने की अवधि में ही लघु वनोपज संग्रहण का सालाना लक्ष्य पूरा हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपजों के संग्रहण और खरीदी के मामले में देश के अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन द्वारा इमली ऑटी, ईमली फूल, महुआ बीज, चार गुठली, साल बीज, महुआ फूल, चरोटा बीज, हर्रा, आंवला, बायबिडिंग, बहेड़ा साबूत, शहद, कुसमी लाख, रंगीन लाख, धवई फूल, कालमेघ, नागरमोथा, जामुन बीज, बेल गुदा, कूल्लू गोंद, फूल झाड़ू, कॉच बीज, करंज बीज, कालकांगनी, कुसुम बीज, तिखुर, माहुल, भेलवा, हर्रा कचरिया, बेहड़ा कचरिया, ईमली बीज, काजू बीज, वनजीरा इत्यादि लघु वनोपज की खरीदी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किया जा रहा है। कांकेर वन वृत्त के जिला वनोपज सहकारी समिति कांकेर के अंतर्गत ग्राम स्तर के संग्रहण केन्द्रों व हॉट-बाजार स्तर के संग्रहण केन्द्रों में 11 हजार 207 संग्राहकों से 1 करोड़ 94 लाख 49 हजार 302 रुपए के लघु वनोपज खरीदे गए हैं।

इसी तरह कांकेर वन वृत्त अंतर्गत कोण्डागांव जिले के वनमण्डल केशकाल और दक्षिण कोण्डागांव को मिलाकर 99 हजार 667 संग्राहकों से 36 करोड़ 92 लाख 14 हजार 980 रुपए के लघु वनोपज खरीदे गये हैं। केशकाल वनमण्डल अंतर्गत 38 हजार 58 संग्राहकों से 15 करोड़ 45 लाख 70 हजार 525 रुपए के लघु वनोपज की खरीदी की गई है। इसी कड़ी में दक्षिण कोण्डागांव वनमण्डल अंतर्गत 61 हजार 609 संग्राहकों से 21 करोड़ 46 लाख 44 हजार 455 रुपए के लघु वनोपज खरीदे गए हैं। नारायणपुर जिले में 17 हजार 623 संग्राहकों से 5 करोड़ 85 लाख 13 हजार 488 रुपए के लघु वनोपज की खरीदी की गई है।

29-06-2020
आदिवासियों को बुरी तरह छला है कांग्रेस सरकार ने : भाजपा

रायपुर। भाजपा नेता विक्रम उसेण्डी, केदार कश्यप और महेश गागड़ा ने संयुक्त बयान में अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन से मिलने के लिए जा रहे आदिवासियों को भगाने के प्रयास की कड़ी निंदा की है। भाजपा नेताओं ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक वनवासियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। पहले खरीदी में धोखा केवल 3 दिन खरीदी करने के बाद खरीदी बंद, 2 साल का बकाया बोनस, बीमा कवर न देना, शिक्षा प्रोत्साहन के तहत तेंदुपत्ता संग्रहकर्ताओं के बच्चों को छात्रवृत्ति न देना और भुगतान को लेकर अनिश्चितता से बस्तर के आदिवासीजन काफी आक्रोश में हैं। वहां उनकी तकलीफ सुनने वाला कोई नहीं है। शासन की लगातार उपेक्षा ने उन्हें आंदोलन करने पर मजबूर कर दिया है। आंदोलनरत भाइयों से केवल कांग्रेस जनप्रतिनिधि को ही मिलने दिया और भाजपा व अन्य राजनीतिक दल के लोगों को मिलने से रोक दिया गया जो राज्य सरकार का तानाशाही रवैय्या है। भाजपा नेताओं ने कहा कि बहुत दु:खद है कि अपने हक से वंचित वनवासी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। वोट लेने के लिये उन्हें कांग्रेस द्वारा बुरी तरह छला गया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि दो साल का बोनस न देने के बाद खरीदी बन्द होने के कारण संग्राहकों को तेंदूपत्ता नदी में फेंकना पड़ा है, पड़ोसी प्रदेश में सस्ते दामों पर बेचना पड़ा। जबकि कांग्रेस सरकार ने सत्ता पाने के लिए झूठे वादे किए, गंगाजल की झूठी कसम खाई, सत्ता में आते ही अपने सभी वादों को यह सरकार भूल बैठी है। ऐसी सरकार पर समाज को भरोसा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल सरकार हर मोर्चे पर फेल साबित हुई है।

 

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