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24-02-2021
आदिवासियों की जमीन खरीदी मामला,सांसद गोमती साय पहुंचीं जांच टीम के साथ पीड़ित परिवार के गांव

अंबिकापुर। जशपुर जिला में कोरवा आदिवासियों की जमीन नियम विरुद्ध खरीदी करने के मामले में जांच समिति बनाई गई थी। रायगढ़ के सांसद गोमती साय की अध्यक्षता में 6 सदस्य जांच टीम पीड़ित परिवार के गांव पहुंची। उनसे पूरी वस्तुस्थिति से अवगत हुए। भाजपा की यह टीम अपनी रिपोर्ट प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को रायपुर को सौंपेंगी।

 

19-01-2021
कड़कनाथ आदिवासियों की कड़की दूर कर करेंगे कड़क-कड़क नोटो की बरसात, भूपेश है तो सब सम्भव है

सुकमा/रायपुर। आदिवासियों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भूपेश बघेल सरकार पूरी ताकत लगा रही है। खासकर सुदूर नक्सल प्रभावित और पिछड़े इलाके में। सुकमा में भी सरकार का पशुधन विकास विभाग आदिवासियों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए बहुत सी योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर रहा है। मुर्गी पालन बकरी पालन शुगर पालन शबरी लेयर फार्मिंग बैकयार्ड कुक्कुटपालन जैसी योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। ऐसी योजनाओं से हितग्राही आर्थिक मजबूती स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। गरीबी उन्मूलन योजनाओं के तहत महिला स्व सहायता समूह को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य पशुधन विकास विभाग ने सुकमा की ग्राम पंचायत केरला पाल के 11 स्व सहायता समूह को 50-50 कड़कनाथ चूजे व दाना प्रदान किया था। इससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक करने में मदद मिल सके। कड़कनाथ के चूजों को महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं काफी समय देती है।वे उसकी देखभाल अच्छे से कर रही हैं। और अब उनका कहना है कि कड़कनाथ नस्ल की मुर्गियों की बाजार में अच्छी खासी कीमत है। अपने पौष्टिक गुणों के कारण यह साधारण प्रजाति की मुर्गियों की तुलना में दो से 3 गुना महंगी बिकती है। महंगी होने के बावजूद भी लोग इसे खरीदने से कतराते नहीं है। स्थानीय बाजार में कड़कनाथ बड़ी आसानी से 800 रुपए किलो की दर से बिक जाते हैं। स्व सहायता समूह की महिलाओं का कहना है कि कड़कनाथ उनकी कड़की दूर करने में सहायक साबित होंगे।

14-01-2021
भूपेश बघेल ने कहा- अहिंसा का कोई विकल्प नहीं, लोग हिंसा से ऊब गए

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार को वर्धा के गांधी सेवाग्राम आश्रम पहुँचे हैं। यहां वे प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्हाने कहा कि अहिंसा का कोई विकल्प नहीं, लोग हिंसा से ऊब गए हैं। दो सालों में नक्सली घटनाओं में कमी आई है। नक्सल से निपटने आदिवासियों का विश्वास जीत रहे हैं। हम नक्सल क्षेत्र में विश्वास के साथ विकास पर काम कर रहे हैं। नक्सली इलाकों में लघु वनोपज और फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट लगा रहे हैं। वही सीएम के बयान पर विपक्षी पार्टी भाजपा ने पलटवार किया है। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नक्सलवाद की जननी है। नक्सलियों की गोली का जवाब गोली से देना चाहिए। 1 शहीद के बदले 10 नक्सलियों को मारना चाहिए। कांग्रेस की नीति से नक्सलवाद ख़त्म नहीं होगी। सरकार को संयुक्त आपरेशन पर फ़ोकस करना चाहिए।

04-01-2021
मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे आदिवासियों को पुलिस ने रोका,तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

कोरबा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में वनाधिकार के सवाल पर मुख्यमंत्री से अपनी बात कहने और ज्ञापन देने जा रहे सैकड़ों आदिवासियों को प्रशासन ने रास्ते में रोक दिया और मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में लॉक डाउन के दौरान पाली विकासखंड के उड़ता गांव में वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को बेदखल करने और रैनपुर में गलत तरीके से दावों को खारिज कर कब्जाधारियों को बेदखल करने का मामला सामने आया है। कोरबा निगम के क्षेत्र में वन भूमि पर बसे आदिवासियों को पट्टा देने के लिए तो प्रशासन तैयार ही नहीं है। इन घटनाओं को केंद्र में रखकर माकपा ने वनाधिकार का मुद्दा उठाया था और सैकड़ों आदिवासियों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की घोषणा की थी। छत्तीसगढ़ किसान सभा से जुड़े लगभग पचास गांवों के 500 से अधिक किसान इस मुद्दे पर गंगानगर में एकत्रित हुए।

रैली शुरू होने से पहले गंगानगर में सभा भी हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे। सभा को माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, पार्षद राजकुमारी कंवर, सूरती कुलदीप, सीटू नेता वीएम मनोहर, एसएन बेनर्जी, जनाराम कर्ष, छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेता जवाहर सिंह कंवर, मानसिंह कंवर, हेम सिंह, दिलहरण चौहान, नंदलाल कंवर, दीपक साहू, जनवादी महिला समिति की प्रदेश संयोजक धनबाई कुलदीप आदि ने संबोधित किया। सभा के बाद सभी ट्रेक्टरों में सवार होकर मुख्यमंत्री से मिलने कोरबा के लिए रवाना हुए। लेकिन पांच किमी चलने के बाद ही उनके काफिले को प्रशासन ने रोक दिया। मुख्यमंत्री से एक प्रतिनिधिमंडल को मिलाने के माकपा नेताओं के आग्रह को भी उसने स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। माकपा ने प्रदर्शन करते हुए दीपका तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कोरबा नगर निगम के सबसे पिछड़े क्षेत्र बांकीमोंगरा में विकास के लिए 50 बिस्तरों का अस्पताल और शासकीय कॉलेज खोलने, भूविस्थापितों की समस्याएं हल करने और बंद पड़े उद्योगों को पुनर्जीवित करने की भी मांग की गई है। प्रदर्शन में शत्रुहन दास, रामप्रसाद, नरेंद्र साहू, हुसैन, दिलहरण बिंझवार, पुरुषोत्तम कंवर, रघु, संजय, देवकुंवर, तेरसबाई, डीएल टण्डन, कान्हा अहीर आदि कार्यकर्ताओं उपस्थित थे।

 

21-10-2020
तीन दिनों से जारी है धरना प्रदर्शन,अधिकारियों को उनकी सुध लेने की फुर्सत तक नहीं

धमतरी। राजीव ग्राम दुगली के पास वसुंधरा में रहने वाले आदिवासियों ने जमीन के पट्टे की मांग को लेकर जिला मुख्यालय धमतरी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। शहर के रामबाग मैदान में उनका धरना प्रदर्शन पिछले तीन दिनों से जारी है, पर अधिकारियों को उनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं मिल रही है। परिवार समेत राशन पानी लेकर धरने पर बैठे इन आदिवासियों ने बताया कि वे सभी भूमिहीन हैं और दुगली के पास वसुंधरा धोबाकछार की आबादी जमीन पर झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं और यहीं जमीन पर खेती कर गुजर बसर कर रहे हैं। काबिज जमीन के पट्टे की मांग वे वर्ष 1993 से लगातार कर रहे हैं। इस बीच 6-7 लोगों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उल्टे कब्जा करने के आरोप में उन्हें दो बार जेल भेजा जा चुका है।

इनमें से एक प्रकरण में अदालत से सभी बरी हो चुके हैं और दूसरा प्रकरण लंबित है। इस बीच वन विभाग और ग्रामवासियों ने तीन साल पहले उनकी झोपड़ियों को तोड़कर अंदर रखे सारे सामानों को नष्ट कर दिया था और उनके साथ मारपीट भी की थी। इस अत्याचार के बावजूद वे सभी न्याय के लिए न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं। उनका साफ कहना है कि वे सभी पिछले 27 सालों से वसुंधरा धोबाकछार की जमीन पर काबिज हैं और इसका पट्टा हासिल करने के इंतजार में उनके साथियों की एक एककर मौत भी हो रही है। इसलिए अब पट्टा हासिल करने के लिए सभी लोग मरते दम तक संघर्ष करते रहेंगे।

 

16-10-2020
वनाधिकार आवेदनों की पावती नहीं दिए जाने पर सैकड़ों आदिवासियों ने किया पंचायत का घेराव 

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के बैनर तले कोरबा जिले के पाली विकासखंड के रैनपुर खुर्द ग्राम पंचायत का घेराव करके सैकड़ों आदिवासी धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि वनाधिकार दावे का आवेदन लेकर उन्हें पावती दी जाए और पंचायत, सरपंच व सचिव न आवेदन लेने को तैयार है, न पावती देने को। ग्रामीणों ने इस इंकार को लिखित में देने की मांग को भी नकार देने के बाद ये ग्रामीण पंचायत कार्यालय का घेराव करके धरने पर बैठ गए हैं। पंचायत के अंदर न किसी को जाने दिया जा रहा है, न कार्यालय से किसी को बाहर निकलने दिया जा रहा है। ग्रामीण जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाने की मांग कर रहे हैं। सुबह 11 बजे से जारी किसान सभा का घेराव इन पंक्तियों के लिखे जाने तक जारी है और आवेदन लेकर पावती मिलने पर ही आदिवासी ग्रामीण घेराव खत्म करने की बात कह रहे हैं।

पंचायत के इस घेराव का नेतृत्व प्रशांत झा, जवाहर कंवर, दीपक साहू आदि कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां राज्य सरकार ने आदिवासियों को वनाधिकार देने के बढ़-चढ़कर दावे किए जा रहे हैं, वहीं वास्तविकता यह है कि वनाधिकार दावों के आवेदन तक नहीं लिए जा रहे हैं या फिर उन्हें पावती ही नहीं दी जा रही है। जबकि वनाधिकार कानून के तहत आवेदन लेना, उसकी पावती देना और दावेदारी निरस्त होने पर आवेदनकर्ता को लिखित सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन जिले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। रैनपुर ग्राम पंचायत का घेराव इसका जीता-जागता सबूत है।

07-10-2020
आदिवासियों को नक्सली हिंसा से बचाने के लिए बस्तर पुलिस है : सुंदरराज पी

रायपुर/जगदलपुर। नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर  आईजी सुंदरराज पी. ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद 1769 निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की हत्या करने वाले नक्सलियों संगठन को आदिवासियों के ऊपर अत्याचार का बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। जनविरोधी हरकतों के कारण से आपसी मतभेद एवं एक-दूसरे की हत्या करने वाले नक्सली संगठन के खात्मा की झलक नजर आ रही है।


आईजी ने कहा कि नक्सलियों की दिग्भ्रमित एवं गुमराह प्रचार-प्रसार के जाल में नहीं फंसेगी। बस्तर की जनता निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की नक्सलियों की ओर से की गई हत्याओं का चौतरफा विरोध को देखते हुए पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के डरपोक सचिव पापाराव अपना नाम बदलकर मोहन के नाम से जारी किया। बेबुनियाद एवं झूठा प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के इस मनगढंत एवं निराधार प्रेस विज्ञप्ति में बस्तर क्षेत्र के मूल वासियों के जानमाल की रक्षा करना सुरक्षा बल एवं पुलिस की प्राथमिकता है। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए नक्सली हिंसा से बस्तर के आदिवासियों की रक्षा करने के लिए बस्तर पुलिस संकल्पित।

20-08-2020
हमारी सरकार किसानों, गरीबों, आदिवासियों, मजदूरों के हितों की रक्षा करने वाली है : राहुल गांधी

रायपुर। सांसद राहुल गांधी ने किसानों, गरीबों, आदिवासियों और जरूरतमंद लोगों की मदद की योजनाओं के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बताया है। राहुल गांधी आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से राज्य के किसानों, तेंदूपत्ता संग्राहकों और गोबर विक्रेता ग्रामीणों के खाते में 1737.50 करोड़ रुपए की राशि के अंतरण के लिए समारोह में शामिल हुए।राहुल गांधी ने आगे कहा कि हमारी सरकार किसानों, गरीबों, आदिवासियों, मजदूरों के हितों की रक्षा करने वाली सरकार है। छत्तीसगढ़ राज्य में इन वर्गों की भलाई के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हम किसानों, गरीबों, आदिवासियों, मजदूरों के हितों की रक्षा इसलिए करते हैं, क्योंकि हम समझते हैं कि हिंदुस्तान को आगे ले जाने वाले यही लोग हैं। इनके हितों की रक्षा किए बिना देश आगे नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश में दो अर्थव्यवस्थाएं हैं एक संगठित अर्थव्यवस्था, जिसमें बड़ी-बड़ी कंपनियां शामिल हैं, दूसरी असंगठित अर्थव्यवस्था,जिसमें हमारे किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और लाखों-करोड़ों गरीब लोग हैं। हमारी सरकारें दोनों अर्थव्यवस्थाओं में संतुलन बनाकर काम करती हैं।इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य में किसानों, ग्रामीणों, मजदूरों एवं आदिवासियों को विभिन्न योंजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से मदद पहुंचाकर हम राजीव जी के सपनों को साकार करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस समारोह में अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा, राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया ने भी आनलाइन शिरकत की।बघेल ने बताया कि आज अंतरित की जा रही राशि में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के दूसरी किस्त के 1500 करोड़ रुपए, गोधन न्याय योजना के 4 करोड़ 50 लाख रुपए और तेंदूपत्ता संग्राहकों के प्रोत्साहन पारिश्रमिक के 232.81 करोड़ रुपए शामिल हैं। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरूआत 21 मई को राजीव गांधी की शहादत पुण्यतिथि के अवसर पर की गई थी।

उसी दिन पहली किस्त के 1500 करोड़ रुपए 19 लाख किसानों के खातों में सीधे अंतरित किए गए थे। छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना के तहत किसानों को चार किश्तों में 5750 करोड़ रुपये की आदान सहायता राशि दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत राज्य शासन द्वारा दो रूपए प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। आज 77 हजार 97 गोबर विक्रेता ग्रामीणों एवं पशुपालकों को 4 करोड़ 50 लाख रुपए का दूसरा भुगतान किया गया है। वहीं  राज्य के तेंदूपत्ता संग्राहकों को आज 233 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है, इससे पूर्व वर्ष 2018 संग्रहण वर्ष में 371 करोड़ रुपए का पारिश्रमिक वितरित किया गया था। इससे राज्य के 12 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 4000 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से तेंदूपत्ता की खरीदी का वादा हमने निभाया है।इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, मुख्य सचिव आर.पी. मंडल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू और अमिताभ जैन विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

 

10-08-2020
आदिवासियों के पिछड़ेपन की जिम्मेदार कांग्रेस को अनर्गल प्रलाप शोभा नहीं देता : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने कांग्रेस नेताओं के आदिवासियों के लिए बहाए जा रहे घड़ियाली आँसुओं पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि जिस कांग्रेस ने आदिवासियों को पिछड़ेपन और भुखमरी से उबरने नहीं दिया, उसे आदिवासियों के नाम पर अनर्गल प्रलाप करना शोभा नहीं देता। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय पर तानाकशी करने से पहले कांग्रेस के लोग अपना दामन झाँक लें तो उनकी करतूतें आसमान को भी रोने के लिए मजबूर कर देंगीं।गागड़ा ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने शासनकाल को नहीं भूलना चाहिए जब बस्तर से लेकर सरगुजा तक आदिवासी मूलभूत सुविधाओं रोटी, कपड़ा, मकान, बेहत शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक के मोहताज बनाकर रखे गए थे। अन्याय की पराकाष्ठा करने वाले कांग्रेस के सत्ताधीश आज भाजपा पर किस मुँह से आक्षेप कर रहे हैं जबकि कांग्रेस की मौजूदा प्रदेश सरकार भी आदिवासियों के साथ छल-कपट का व्यवहार कर रही है।

गागड़ा ने कहा कि आदिवासियों की धार्मिक भावनाओं के साथ हो रहे शर्मनाक खिलवाड़ तक को नहीं रोक पाने वाले कांग्रेस के नेता पहले यह बताएँ कि पिछले दो साल से आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस अब तक क्यों नहीं मिला? इन आदिवासी संग्राहकों के वृद्ध लोगों की पेंशन और बच्चों की छात्रवृत्ति पिछले दो साल से क्यों रोक दी गई है? तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए नई बीमा योजना की नौटंकी रचकर आदिवासियों को भरमाने में जुटी कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने पहले से चल रही बीमा योजना का समय पर नवीनीकरण क्यों नहीं कराया? कांग्रेस नेता आदिवासियों के विकास के लिए भाजपा की तारीफ भले न करें पर झूठ बोलने से बेहतर यही है कि वे चुप तो रह ही सकते हैं।

 

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