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10-01-2020
प्रियंका गांधी का वाराणसी दौरा आज, जेल भेजे गए प्रदर्शनकारियों से करेगी मुलाक़ात 

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी शुक्रवार को वाराणसी दौरे पर रहेंगी। पहले वह राजघाट स्थित संत रविदास मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी। इसके बाद सीएए के विरोध पर जेल भेजे गए 65 प्रदर्शनकारियों से संवाद करेंगी। वह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में जीते हुए पदाधिकारियों से भी मुलाकात करेंगी। गुरुवार को कांग्रेस के नेताओं ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया। प्रियंका के काशी आगमन को लेकर दिनभर कांग्रेस कार्यकर्ता तैयारियों में जुटे रहे। पूर्व मंत्री अजय राय, पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, प्रदेश महासचिव विश्वविजय समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रविदास मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, एयरपोर्ट से प्रियंका राजघाट आएंगी। वह संत रविदास मंदिर में दर्शन के अलावा मां गंगा का पूजन भी करेंगी।

देर रात तक बरकरार रहा असमंजस

प्रशासन की ओर से जारी प्रियंका के कार्यक्रम के अनुसार, प्रियंका गांधी के एयरपोर्ट से गुलेरिया कोठी तक कार्यक्रम की सूचना दी गई है। गुलेरिया कोठी पर ही संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया है। हालांकि बनारस कांग्रेस की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। पदाधिकारियों ने कहा कि देर रात तक नए स्थान का चयन किया जाएगा, जहां वह जेल जाने वालों और बजरडीहा पीड़ितों से मिलेंगी।

सादे कपड़े में तैनात रहेगी पुलिस

प्रियंका के बनारस दौरे को लेकर प्रशासनिक महकमा भी सतर्क है। बृहस्पतिवार को सुरक्षाधिकारियों की बैठक में प्रियंका गांधी के कार्यक्रम को लेकर दिशा निर्देश जारी किए गए। प्रियंका के बाबतपुर से राजघाट तक मार्ग पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। सादे कपड़े में भी पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।

मृत बच्चे की दादी को सौंपा 50 हजार का चेक

प्रियंका के दौरे से पहले गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बजरडीहा की घटना में मृत बच्चे की दादी शहनाज अख्तरी को 50 हजार रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान यूपी के सह प्रभारी बाजीराव खाड़े, निजी सचिव संदीप, प्रजानाथ शर्मा, जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल, महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे आदि मौजूद रहे।

25-11-2019
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- स्थायी होगा रविदास मंदिर, कोई लकड़ी का केबिन नहीं

नई दिल्ली। दिल्ली के संत रविदास मंदिर ध्वस्तीकरण मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। अदालत ने मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि यह एक स्थायी इमारत होगी न कि लकड़ी का बना कोई अस्थायी केबिन। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही 10 अगस्त 2019 को डीडीए ने मंदिर ध्वस्त किया था। इसके बाद हजारों की संख्या में एससी/एसटी वर्ग के लोग दिल्ली पहुंचे थे और यहां प्रदर्शन किया था, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया था। बता दें कि इस मामले में भीम आर्मी के संयोजक चंद्रशेखर समेत पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तों के साथ संत रविदास मंदिर की 400 वर्ग गज जमीन सरकार की ओर से बनाई जानेवाली समिति को सौंपने के केंद्र सरकार के फैसले पर मुहर लगाई। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि वह अब रविदास मंदिर के लिए आवंटित किए जाने वाले क्षेत्र को बढ़ाएगी।

19-08-2019
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- हमारे आदेश को न दें राजनीतिक रंग 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित संत रविदास मंदिर को गिराने के उसके आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों को ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक रूप से या प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था संबंधी कोई स्थिति उत्पन्न न हो। पीठ ने कहा कि हर चीज राजनीतिक नहीं हो सकती। धरती पर किसी के भी द्वारा हमारे आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने नौ अगस्त को कहा था कि वनक्षेत्र को खाली करने के उसके पूर्व आदेश पर अमल न कर गुरु रविदास जयंती समारोह समिति ने बड़ी गलती की है। बता दें कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानते हुए मंदिर को गिरा दिया था।

इसके बाद से चारों ओर विरोध हो रहा है। पंजाब के जालंधर सहित कई शहरों में सड़कों को जाम कर प्रदर्शन किया किया गया। दिल्ली-हरियाणा में भी लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। बता दें कि दिल्ली के तुगलकाबाद में संत रविदास का एक भव्य मंदिर था।  इस मंदिर में एक खास वर्ग के साथ-साथ सिख समाज भी इसमें आस्था रखता है। डीडीए का आरोप है कि मंदिर का निर्माण जंगल की जमीन पर किया गया था। इस बारे में कई बार इसे हटाने के लिए कहा गया, लेकिन संत रविदास जयंती समारोह समिति ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी मंदिर को जंगल की जमीन से नहीं हटाया गया, तब जाकर 9 अगस्त को एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को ढहाए जाने का आदेश जारी किया और डीडीए के दस्ते ने उस मंदिर को वहां से हटा दिया।

 

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