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13-02-2020
370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में होगा पहला पंचायत चुनाव, 1 हजार से अधिक सीटें  है खाली

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पहली बार राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों की तारीखों का एलान हो गया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। जम्मू-कश्मीर के हर ब्लॉक में खाली पड़े पदों के लिए पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। इस पंचायत चुनाव में बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव 5 मार्च से 20 मार्च तक कराए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में इस पंचायत चुनाव को 8 चरणों में संपन्न कराया जाएगा। बता दें कि कश्मीर के कुछ इलाकों में चुनाव नहीं कराए जा सके थे। ये चुनाव उन्हीं इलाकों में होंगे। आयोग ने बताया कि प्रदेश में सरपंच की 1011 सीटें खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए लंबे समय से चुनाव की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिस पर अब विराम लग गया है। 

 

13-02-2020
प्रधानमंत्री ने लोगों से की ईमानदारी से टैक्स भरने की अपील  

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में बुधवार को लोगों से भारत के विकास में टैक्स भरने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब कोई सरकार आर्थिक विकास के लिए छोटे शहरों पर फोकस कर रही है। भारत अब वक्त बर्बाद नहीं करेगा और विश्वास के साथ आगे बढ़ेगा। केंद्रीय बजट 50 खबर डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। देश में कुछ लोग टैक्स नहीं भरते हैं और इससे बचने के रास्ते निकाल लेते हैं तो इसका भार ईमानदारी से टैक्स भरने वालों पर पड़ता है। यह अविश्वसनीय है, लेकिन सच है कि देश में सिर्फ 2200 लोगों ने ही सालाना एक करोड़ से अधिक की आय दिखाई है। हमारी सरकार ने टैक्स भरने के दौरान होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए असेसमेंट के तरीके में बदलाव कर रही है। अब अधिकारियों को यह पता नहीं चलेगा कि वह किसका टैक्स असेस करेगा, जिसका असेसमेंट हो रहा है, वह किस शहर का है। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश बेहद कम हो गई है। हम उन गिने चुने देशों में शामिल होंगे, जो करदाताओं के अधिकारों को लागू करने वाला चार्टर लाएगा। आगे कहा कि सरकार ने छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था पर ध्यान देते हुए उन्हें सम्मान दिया। इन शहरों को राष्ट्रीय राजमार्गों और उड़ान योजना के तहत बनने वाले एयरपोर्ट से जोड़ा जा रहा है। इन शहरों में सैकड़ों पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले गए।

पीएम ने कहा, उनकी सरकार ने बीते आठ महीनों के दौरान फैसलों की सेंचुरी लगाई। यह अपने आप में अभूतपूर्व है। 2019 में सरकार बनने के बाद हमने जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया, दिल्ली की अवैध कॉलोनियों को नियमित किया। हमारी सरकार ने तीन तलाक, बालश्रम के खिलाफ कानून, ट्रांसजेंडरों के अधिकारों का कानून, कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती, मोटर वाहन कानून, बोडो समझौता, राम मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट का गठन, आर्टिकल 370 व नागरिकता संशोधन कानून का वादा पूरा किया।

 

06-02-2020
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर लगा पीएसए

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर श‍िकंजा और कस गया है। गुरुवार को प्रशासन ने इन दोनों नेताओं पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लगा दिया। पिछले साल अगस्‍त में जम्‍मू-कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही ये दोनों नेता नजरबंद चल रहे हैं। इनके साथ दो अन्य नेताओं पर भी पीएसए लगाया गया है। बता दें कि उमर के पिता तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस चीफ फारूक अब्दुल्ला पहले से ही पीएसए के तहत बंद हैं। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को छह महीने ऐहतियातन हिरासत में लिए जाने की अवधि गुरुवार को समाप्त हो रही थी। ये सभी नेता पिछले वर्ष पांच अगस्त के बाद से ऐहतियातन हिरासत में रखे गए थे। अब इन पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लगा दिया गया है। पुलिस के साथ पहुंचे मैजिस्ट्रेट ने महबूबा के आवास पर जाकर उन्‍हें इस आदेश के बारे में जानकारी दी। महबूबा इसी बंगले में नजरबंद हैं। इसके अलावा जिन दो अन्य नेताओं पर पीएसए लगाया गया, उनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के सीनियर नेता अली मोहम्मद सागर और पीडीपी के सरताज मदनी शामिल हैं। पूर्व विधायक बशीर अहमद वीरी पर भी पीएसए लगने की खबरें आ रही थीं, लेकिन बाद में उन्हें रिहा किए जाने की सूचना है। जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) उन लोगों पर लगाया जा सकता है,जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो। 1978 में शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था। 2010 में इसमें संशोधन किया गया था,जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम 6 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है।

 

28-01-2020
मोदी का पड़ोसी देश पर वार, कहा-हराने में लगेंगे मात्र दस दिन

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में नेशनल कैडेट कोर के एक कार्यक्रम में मंगलवार को  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। इसमें उन्होंने एनसीसी के कैडेटों को संबोधित किया। उन्होंने आतंकवाद को पनाह देने वाले पड़ोसी देश पाकिस्तान पर बिना उसका नाम लिए निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि पड़ोसी देश को हराने में हमें दस दिन भी नहीं लगेंगे। पड़ोसी देश तीन बार जंग हार चुका है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश प्रॉक्सी वॉर लड़ रहा है। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, ‘’कश्मीर भारत की मुकुटमणि है। 70 साल बाद वहां से आर्टिकल 370 को हटाया गया। हम जानते हैं कि हमारा पड़ोसी देश हमसे तीन-तीन युद्ध हार चुका है। हमारी सेनाओं को उसे धूल चटाने में हफ्ते-दस दिन से ज्यादा समय नहीं लगता। उन्होंने कहा, ‘’आज युवा सोच है। युवा मन के साथ देश आगे बढ़ रहा है और इसलिए वह सर्जिकल स्ट्राइक करता है, एयर स्ट्राइक करता है और आतंक के सरपरस्तों को उनके घर में जाकर सबक सिखाता है। पीएम मोदी ने कहा, ‘’आज दुनिया में हमारे देश की पहचान, युवा देश के रूप में है. देश के 65 फीसदी से ज्यादा लोग 35 साल से कम उम्र के हैं. देश युवा है, इसका हमें गर्व है, लेकिन देश की सोच युवा हो, ये हमारा दायित्व होना चाहिए। उन्होंने कहा ‘’जो लोग काम चलाने वाली प्रवृत्ति के होते हैं उनके लिए कल कभी नहीं आता। इस स्थिति को मेरे आज का युवा भारत, मेरे भारत का युवा, स्वीकारने के लिए तैयार नहीं है। वो छटपटा रहा है कि स्वतंत्रता के इतने साल हो गए, चीजें कब तक ऐसे ही चलती रहेंगी? पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘’युवा देश बदलना चाहता है, स्थितियां बदलना चाहता है। इसलिए उसने तय किया है कि अब टाला नहीं जाएगा, अब टकराया जाएगा, निपटा जाएगा. यही है युवा सोच, यही है युवा मन, यही है युवा भारत। विपक्ष पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘’दशकों पुरानी समस्याओं की सुलझा रही हमारी सरकार के फैसले पर जो लोग सांप्रदायिकता का रंग चढ़ा रहे हैं, उनका असली चेहरा भी देश देख चुका है और देख रहा है। मैं फिर कहूंगा कि देश देख रहा है, समझ रहा है, चुप है, लेकिन सब समझ रहा है।

10-01-2020
इंटरनेट पर पूरा बैन लगाना बहुत सख्त कदम, गैरज़रूरी फैसले वापस ले सरकार : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद घाटी में इंटरनेट और लोगों की आवाजाही बंद करने जैसी पाबंदियों पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर पूरा बैन लगाना बहुत सख्त कदम है। लोगों को अपनी असहमति जताने का हक है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को गैर जरूरी आदेश वापस लेने को कहा है। जम्मू-कश्मीर में एसएमएस सेवा चल रही है। लेकिन मोबाइल इंटरनेट और घरों में लगे ब्रांडबैंड बंद हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या-क्या कहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘’सरकार को कोई भी आदेश देने से पहले संतुलन बनाना चाहिए। इंटरनेट पर पूरा बैन बहुत सख्त कदम है। लोगों को अपनी असहमति जताने का पूरा हक है।’’ कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर रोक तभी लग सकती है, जब सुरक्षा को गंभीर खतरा हो।

बीच-बीच में आदेशों की समीक्षा होनी चाहिए- सुप्रीम कोर्ट

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, ‘’धारा 144 लगते समय भी गहराई से विचार होना चाहिए।’’ कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह सभी आदेश प्रकाशित करे। भविष्य में भी ऐसा हो ताकि किसी के लिए उसे चुनौती देना आसान हो। कोर्ट ने कहा, ‘’इंटरनेट पर एक समय सीमा के लिए ही रोक लगनी चाहिए और बीच-बीच में समीक्षा होनी चाहिए।’’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार अपने सभी आदेशों को दोबारा देखे। जो गैरज़रूरी हैं, उन्हें वापस ले। कोर्ट ने कहा कि चिकित्सा जैसी आपातकालीन बुनियादी सेवाओं में कोई बाधा न आए और सरकार सभी तरह के आदेशों की समीक्षा करे और उन्हें प्रकाशित करे। कोई भी आदेश न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का होगा पालन- सरकारी सूत्र

वहीं, सरकारी सूत्रों ने बताया है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट के हर आदेश का पालन किया जाएगा।

पाबंदियों को लेकर दाखिल की गई थी SC में याचिका

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें जम्मू-कश्मीर में मोबाइल-इंटरनेट सेवा बंद करने और लोगों की आवाजाही पर रोक के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर कही हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पाबंदियां अवैध तरीके से लगाई गई, इनके जरिए लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया। आर्टिकल 370 हटाने का फैसला हुए कई महीने हो गए, लेकिन अब भी कई तरह के प्रतिबंध जारी हैं।

 

09-12-2019
नागरिक संशोधन बिल: शिवसेना ने दिया भाजपा का साथ, संजय राउत ने कही ये बात..

नई दिल्ली। महाराष्ट्र चुनाव में जीत के बाद सत्ता को लेकर घमासान के बाद अलग हुई भाजपा और शिवसेना में नागरिक संशोधन बिल को लेकर सहमत बनी है। नागरिक संशोधन बिल को लेकर शिवसेना ने भाजपा को समर्थन दिया है। हालांकि कुछ बातों में अपनी नीति भी स्पष्ट कर दी है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाना चाहिए। इसमें हम भाजपा के साथ हैं। शिवसेना नेता ने ट्वीट कर कहा है कि, 'गैरकानूनी घुसपैठियों को देश से बाहर फेंका जाना चाहिए। प्रवासी हिंदुओं को नागरिकता भी दी जानी चाहिए।'उन्होंने आगे कहा कि 'अमित शाह जी, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें और उन्हें 25 वर्षों तक मताधिकार न दें। इस पर आप क्या कहते हैं? और हां, कश्मीरी पंडितों का क्या हुआ? क्या वह आर्टिकल 370 हटने के बाद वापस कश्मीर लौट गए।'

 

18-11-2019
शीतकालीन सत्र: लोकसभा में हुआ फारुक अब्दुल्ला की रिहाई को लेकर हंगामा 

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में आज सोमवार को सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्ष ने सरकार पर नेशनल कांफ्रेंस नेता के फारुक अब्दुल्ला की गैरमौजूदगी को लेकर जमकर निशाना साधा। बता दें कि फारुक अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने के बाद से ही नजरबंद हैं। लोकसभा में टीएमसी के सांसद सौगत राय ने कहा कि डॉ.फारुक अब्दुल्ला यहां पर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि या तो सरकार को निर्देश दीजिए कि उन्हें रिहा किया जाए या फिर गृहमंत्री सदन में बयान में दें। सदन में सौगत राय के बयान के बाद तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने फारुक अब्दुल्ला को लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया। कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और डीएमके ने जमकर नारेबाजी करनी शुरू की। सदन में इन दलों के नेताओं ने विपक्ष पर हमला बंद करो, फारुक अब्दुल्ला को रिहा करे का नारा लगाना शुरू कर दिया। ये तमाम सांसद लगातार मांग करते रहे कि फारुक अब्दुल्ला को रिहा किया जाए। 

लोकसभा के स्पीकर ने विपक्ष को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि मैं सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हूं। आप लोग अपनी सीटों पर जाइए, यह सदन नारेबाजी के लिए नहीं है बल्कि चर्चा और बहस के लिए है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कश्मीर के हालात पर सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सरकार के उस फैसले की भी निंदा की जिसके तहत यूरोपीय यूनियन के सांसदो को कश्मीर का दौरा करने दिया। चौधरी ने अब्दुल्ला को नजरबंद किए जाने को अत्याचार बताया। चौधरी ने कहा कि आज 108 दिन हो गए और फारुक अब्दुल्ला अभी भी नजरबंद हैं। ये क्या जुल्म हो रहा है, उन्हें संसद में लाना चाहिए, यह उनका संवैधानिक अधिकार है। वहीं डीएमके नेता टीआर बालू ने कहा कि फारुक अब्दुल्ला को नजरबंद किया जाना गैर कानूनी है, उन्होंने लोकसभा स्पीकर से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

24-10-2019
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, जम्मू कश्मीर में आखिर कब तक जारी रखेंगे पाबंदियां

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा है कि आखिर कब तक उसका जम्मू कश्मीर में पाबंदियां जारी रखने का इरादा है। 5 अगस्त को आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने के बाद जम्मू कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सरकार ये सवाल किया है। कोर्ट इस मामले पर 5 नवंबर को फिर से सुनवाई करेगा। सु्प्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान केंद्र से पूछा, कब तक आप यह प्रतिबंध लागू रखेंगे? दो महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। हमें एक निश्चित समय दें और कोई दूसरा विकल्प भी तलाशें। अदालत ने कहा कि कई बार पाबंदियां भी लगानी होती है लेकिन प्रतिबंधों को वक्त-वक्त पर रिव्यू भी किया जाना चाहिए। जस्टिस एनवी रमन्ना ने वक्त-वक्त पर पाबंदियों पर रिव्यू की बात कही तो इस पर केंद्र सरकार की तरफ से पेश सलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि,जो पाबंदियां लगी हैं उनका रोजाना रिव्यू किया जाता है।

तुषार मेहता ने कहा कि बहुत कम इलाके अब ऐसे हैं, जहां पाबंदियां हैं। ज्यादातर इलाकों, करीब 99 फीसदी क्षेत्र में कोई पाबंदी नहीं है। सुनवाई कर रही पीठ ने राज्य में इंटरनेट पर लागू प्रतिबंध के बारे में भी सवाल किया। इस पर सॉलिसीटर जनरल ने अदालत को बताया कि इंटरनेट पर प्रतिबंध है और ये इसलिए जारी रखा गया है क्योंकि सीमा-पार से इसके दुरुपयोग की आशंका बहुत ज्यादा है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करते हुए सूबे को दो हिस्सों में बांट दिया था। 5 अगस्त से ही केंद्र ने जम्मू कश्मीर में भारी पाबंदियां लगाई थीं। संचार के साधनों को बंद कर दिया था और नेट भी रोक दिया गया था। वहीं ज्यादातर नेता भी नजरबंद कर लिए गए थे। पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं।

 

18-10-2019
पीएम मोदी ने कहा-आर्टिकल 370 के जिक्र पर कांग्रेस के पेट में होता है दर्द

सोनीपत। हरियाणा के चुनावी दंगल में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में सोनीपत के गोहाना हलके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जनता को संबोधित किया। इस दौरान अपने भाषण में उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब तो देश भी जान गया है कि जब आर्टिकल 370 का जिक्र होता है तो कांग्रेस के पेट में दर्द होता है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के बारे में ऐसे बयान दिए कि जिसका फायदा पाकिस्तान ने उठाया। वह इन बयानों के आधार पर दुनिया में अपना केस मजबूत करने में जुटा है। यह कांग्रेस और पाकिस्तान के बीच कैसी केमेस्ट्री है। यह दर्द और हमदर्द का रिश्ता लगता है। पीएम ने कहा कि हरियाणा वीरों की धरती है। हरियाणा के लोगों ने लोकसभा चुनाव में बड़े-बड़े नेताओं को सबक सिखाया और उनका अहंकार तोड़ डाला। पीएम मोदी ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम लिए बिना उन पर जमकर हमले किए। पीएम ने कहा कि कि अखाड़ा चाहे कुश्ती का हो या युद्ध का मैदान हो, तिरंगा की शान बुलंद करने में हरियाणा का नौजवान सबसे आगे रहा है। मोदी ने जनता से सवाल पूछते है कहा कि क्या मुझे हरियाणा की इस भावना को बुलंद करना चाहिए कि नहीं, क्या मुझे देशहित में फैसले लेने चाहिए कि नहीं। क्या देशहित राजनीति से ऊपर होना चाहिए कि नहीं, हरियाणा की जो भावना है, वह कांग्रेस और उसके जैसे दलों के कान में नहीं पड़ रही है। बता दें कि हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। इसी दिन महाराष्ट्र के भी 288 सीटों के लिए विधानसभा का चुनाव होना है। इसके तीन दिन बाद यानी 24 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आएंगे। 

15-10-2019
फारूक अब्दुल्ला की बहन और बेटी हिरासत में, कर रहीं थीं प्रदर्शन

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद फारूक अब्दुल्ला की बहन और बेटी को मंगलवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। अब्दुल्ला की बहन सुरैया और बेटी साफिया श्रीनगर में आर्टिकल 370 हटाए जाने को लेकर एक विरोध प्रदर्शन में पहुंची थीं। दोनों को पुलिस ने हिरासत में लिया। 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्ज खत्म किए जाने के बाद से ज्यादातर नेता नजरबंद हैं। फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला भी हिरासत में हैं। फारूक अब्दुल्ला पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगाया गया है। 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने संसंद में बिल लाकर जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी कर दिया था। राज्य को दो केंद्रशासित राज्यों में बांट दिया है। इसके बाद से सूबे में तनाव का माहौल है। खासतौर से कश्मीर में दो महीने से ज्यादा से कर्फ्यू जैसे हालात हैं। हाल ही में पाबंदियों में छूट दी गई है, जिसके बाद मंगलवार को श्रीनगर में सरकार के फैसले के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन हो रहा था, जिसमें साफिया और सुरैया पहुंची थीं। जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 

 

05-10-2019
डीसी कार्यालय के बाहर हुआ आतंकी हमला, 10 लोग घायल

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में शनिवार को आतंकवादी हमले में 10 लोग घायल हो गए। इसमें एक बच्चा भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक, डेप्युटी कमिश्नर के कार्यालय के सामने आतंकवादियों ने ग्रेनेड से हमला किया गया। घटना के बाद इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। वहीं, घायलों को अस्पताल भेजा गया है। हमलावरों के निशाने पर डीसी ऑफिस के बाहर तैनात कर्मचारी थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, भीड़ भरे इलाके में हुए हमले में 10 लोग जख्मी हुए हैं। इनमें एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी, एक पत्रकार और एक बच्चा शामिल है। घायलों को इलाज के लिए तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया है। हमले के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मी मुस्तैद हो गए हैं और इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। इसके अलावा आतंकियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। बता दें कि शनिवार को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के फैसले के दो महीने पूरे हुए हैं।

05-10-2019
एक को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों से भारत के अच्छे संबंध : विदेशमंत्री एस जयशंकर

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने से बौखलाया पाकिस्तान दुनियाभर में भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने में लगा हुआ है। हालांकि पाकिस्तान को चीन का साथ छोड़कर किसी भी देश से इस मसले में सहयोग नहीं मिला है। ज्यादातर देशों ने पाकिस्तान को हिदायत दी है कि वह अपनी सरजमीं से आतंकवाद का खात्मा करे, तभी भारत के साथ उसके संबंध बेहतर हो सकते हैं। इन सबके बीच भारत के विदेशमंत्री एस जयशंकर ने वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में पाकिस्तान पर चुटकी लेते हुए कहा, 'मैं बताना चाहूंगा कि एक को छोड़कर भारत के सभी पड़ोसी राष्ट्र से बेहतर संबंध हैं और वह क्षेत्रीय सहयोग में हर दिन नया इतिहास लिख रहे हैं। इस मौके पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्‍तान के साथ विभिन्‍न मुद्दों- कश्‍मीर, ट्रेड वॉर की बात की। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के अध्यक्ष बोरगे ब्रेंडे से बातचीत के दौरान विदेशमंत्री ने कहा, शायद ही किसी को यह अनुमान था कि अनुच्छेद 370 संविधान में एक अस्थायी व्यवस्था थी। आर्टिकल 370 लागू होने के कारण जम्मू कश्मीर राज्य में कई राष्ट्रीय कानून लागू नहीं होते थे. ये सब उनके लिए नई बातें थीं।

 

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