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04-06-2020
मुख्यमंत्री की पहल अन्य राज्यों में फंसे 78 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिकों को 53 ट्रेनों से वापस छत्तीसगढ़ लाया गया

रायपुर। नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लाॅकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों तथा अन्य लोगों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर वापस लाने का सिलसिला लगातार जारी है। इब तक 53 ट्रेनों के माध्यम से 78 हजार श्रमिकों सहित अन्य लोगों को वापस लाया जा चुका है। राज्य सरकार द्वारा अन्य प्रदेशों से श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए कुल 59 श्रमिक स्पेशल ट्रेन तय की गई है, इनमें से 40 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों सहित बसों की सुविधा के लिए 3 करोड़ 97 लाख 88 हजार 490 रूपए की राशि खर्च की गई है। श्रम मंत्री डाॅ. शिवकुमार डहरिया ने बताया कि भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा प्रवासी श्रमिकों को वापस छत्तीसगढ़ लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए विभिन्न रेल मण्डलों को श्रमिकों के यात्रा व्यय के लिए आवश्यक राशि का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लाॅक डाउन के कारण श्रमिकों को जो छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं पर पहुंच रहे है एवं राज्य से होकर गुजरने वाले सभी श्रमिकों के लिए नाश्ता, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण एवं परिवहन की निःशुल्क व्यवस्था से श्रमिकों कोे काफी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ की सभी सीमाओं पर पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को, चाहे वो किसी भी राज्य के हो, उन्हें छत्तीसगढ़ का मेहमान मान कर शासन-प्रशासन के लोग उनकी हरसंभव मदद कर रहे हैं।डाॅ. डहरिया ने बताया कि श्रम विभाग के अधिकारियों का दल गठित कर विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, नियोजकों एवं प्रबंधकों से समन्वय कर श्रमिकों के लिए राशन एवं नगद आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के 26 हजार 205 श्रमिकों को 38 करोड़ 26 लाख रूपए बकाया वेतन का भुगतान भी कराया गया है। वहीं लाॅक डाउन के द्वितीय चरण में 21 अप्रैल से शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 1 लाख 4 हजार 749 श्रमिकों को पुनः रोजगार उपलब्ध कराया गया है और छोटे-बड़े 1405 से अधिक कारखानों में पुनः कार्य प्रारंभ हो गया है।

 

28-05-2020
त्रिपुरा में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को लाने रायपुर से दो बस रवाना

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर गुरुवार को रायपुर से दो बस त्रिपुरा रवाना हुई।  त्रिपुरा में राज्य के 70 श्रमिक फंसे हैं। कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन के कारण छत्तीसगढ़ के 70 श्रमिकों के त्रिपुरा में फंसे होने की सूचना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मिली। तत्काल उन्होंने श्रम एवं परिवहन विभाग के सचिव को त्रिपुरा से श्रमिकों की सकुशल वापसी की व्यवस्था तय करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर दो बस श्रमिकों को लाने त्रिपुरा रवाना की गई।

 

28-05-2020
अहमदाबाद से स्पेशल ट्रेन में चांपा पहुंचे 553 श्रमिक, मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद

रायपुर। स्पेशल ट्रेनों से लॉक डाउन में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों और अन्य लोगों की छत्तीसगढ़ वापसी का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में अहमदाबाद से चांपा श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 553 श्रमिक यात्री जांजगीर-चांपा जिले के चांपा जक्शन रेलवे स्टेशन पहुंचे। इनमें 510 जांजगीर-चांपा जिले के, 16 छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के और 27 यात्री अन्य राज्यों के शामिल है।अझिकारियों ने बताया कि ट्रेन के चांपा स्टेशन आने से पूर्व ही प्लेटफार्म को सैनिटाइज किया गया। श्रमिकों को प्लेटफार्म पर उतारते समय सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखा गया। उनके सामानों को सैनिटाइज किया गया। इसके बाद विकासखंडवार बनाए गए शिविरों में श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद श्रमिकों को जिला प्रशासन की पहल पर बाजोरिया फाउंडेशन और चांपा सेवा संस्थान के माध्यम से भोजन के पैकेट और पेयजल उपलब्ध कराया गया। इसके बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए सभी श्रमिकों को बसों से क्वारेंटाइन सेटरों के लिए रवाना किया गया। दो श्रमिकों ने बताया कि अहमदाबाद के पास ग्राम देवरी में ईट बनाने के काम के लिए नवंबर माह से गए हुए थे। मार्च में लौटने की तैयारी थी लेकिन लॉक डाउन के कारण दो माह तक बिना काम के वहां रूकना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन की सुविधा मिलने से उनकी घर वापसी संभव हुई है। उन्होंने श्रमिकों की चिंता करने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया है।

 

26-05-2020
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को स्वत: संज्ञान में लिया, 28 मई को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। लॉक डाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों की समस्याओं और मुसीबतों का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 28 मई के लिए सूचीबद्ध किया है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग करने को कहा है।जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट इस मामले पर 28 मई को सुनवाई करेगा।कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ओर से कमियां रही हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को आवास, भोजन और यात्रा की सुविधा देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है। बता दें कि लॉक डाउन के चलते लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर उन राज्यों में फंस गए थे जहां वह काम करने गए थे। आय और भोजन का कोई साधन न होने के चलते कई श्रमिक घर जाने के लिए पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पर निकल गए थे। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने इन मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन और बस सुविधा संचालित करने का फैसला किया था। मजदूरों के पलायन के बाद मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं सामने आई हैं। कहीं, गर्भवती महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया और उसके कुछ घंटे बाद फिर यात्रा शुरू कर दी। वहीं, कुछ मजदूरों की ट्रेन के नीचे आ जाने से हुई मौत ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। 

 

12-05-2020
Video: जम्मू में फंसे प्रदेश के मजदूरों ने वीडियो बनाकर लगाई मदद की गुहार

रायगढ़। देशव्यापी लॉक डाउन के कारण अपना घर छोड़कर दूसरे राज्य में कमाने खाने गए लाखों मजदूर अन्य किसी राज्य में फंसे हुए हैं। कोरोना त्रासदी के कारण हर दुख दर्द और तकलीफ को झेलते हुए तड़प रहा है। टकटकी लगाए निगाहों से किसी मददगार के आने की उम्मीद कर रहा है। लॉक डाउन की भयानकता से आज मजदूर वर्ग सबसे अधिक पीड़ा से पीड़ित है और अपने जीवन के लिए भूख प्यास और आवास से जूझता हुआ कोरोना से कम जिंदगी जीने के लिए जंग लड़ रहा है। जम्मू में फंसे मजदूरों ने वीडियो के माध्यम से जानकारी शेयर की है। इसमें छत्तीसगढ़ के रायगढ़, सारंगढ़, जांजगीर चाम्पा, बिर्रा, जैजेपुर सहित दर्जनों गांवों के लगभग 40 से अधिक मजदूर जम्मू के नरवाल ईलाके में फंसे हुए हैं और उनके पास किसी प्रकार से सरकार द्वारा कोई मदद नहीं पहुंच पा रही है। भूखमर्री व तकलीफ को झेलते सभी मजदूर अपने परिवार सहित हाई रिस्क पर जीवन जी रहे हैं। कुछ की तो उम्मीदें टूट चुकी हैं और कुछ हिम्मत रखते हुए उम्मीद के साथ अपनी बातों से सरकार पर गुस्सा निकालते हुई मदद की अपील कर रहे हैं कि हमारी मदद करें नहीं तो हम तो ऐसे ही किसी सड़क पर मर जाएंगे। जम्मू से भेजे गए वीडियो में रविन्द्र कुमार नामक व्यक्ति गांव कोतमरा, थाना सारंगढ़ जिला रायगढ़ का खुद को बता रहा है।

12-05-2020
वंदे भारत मिशन का छठा दिन, आज 12 विशेष उड़ानों के जरिए विदेशों में फंसे भारतीय पहुंचेंगे स्वदेश

नई दिल्ली। वंदे भारत मिशन के तहत दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भारतीयों का आना जारी है। आज यानी मंगलवार को इस मिशन का छठा दिन है। मिशन के छठे दिन विदेश से 12 उड़ानें भारतीय नागरिको को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में पहुंचेंगी। इन उड़ानों में एआई- 1375 मनीला से अहमदाबाद, एआई-162 लंदन से हैदराबाद, एआई-144 नेवार्क-मुंबई-अहमदाबाद, एआई 0381 सिंगापुर से दिल्ली, एआई 1242 ढाका से श्रीनगर,एआई1924 दम्मम से कोच्चि, एआई 1377 कुआलालंपुर से मुंबई, एआई 1375 मनीला से दिल्ली, आईएक्स 350 मस्कट से चेन्नई, आईएक्स 814 दुबई से कन्नूर, आईएक्स 384 दुबई से मंगलूरू और आईएक्स 485 सिंगापुर-बंगलूरू-कोच्चि आने वाली उड़ानें शामिल हैं। बता दें कि लॉक डाउन के कारण विदेश में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए वंदे भारत मिशन गुरुवार से शुरू हुआ था। बता दें कि इस मिशन के जरिए कोरोना लॉक डाउन में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा रहा है। वंदे भारत मिशन के पांचवें दिन, आठ विशेष उड़ानों में विभिन्न देशों के 1,667 भारतीय नागरिकों को वापस लाया गया।

09-05-2020
जल्द मिल सकती है 3 ट्रेनों को छत्तीसगढ़ के लिए अनुमति, पढ़े पूरी खबर

रायपुर। लॉक डाउन में दूसरे प्रदेशों में फंसे हजारों मजूदर की वापसी के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर विशेष ट्रेन चलाने का आग्रह किया था। इस पर केंद्र सरकार तीन ट्रेन राज्य को देने की सैद्धांतिक अनुमति दे सकती है। अधिकारिक सूत्रों की माने तो प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए नई दिल्ली, जम्मू और सूरत से ट्रेन रवाना किए जाने की केंद्र से अनुमति मिली है। अब गुजरात, दिल्ली और जम्मू में फंसे छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूर अपने घर इन ट्रेनों से लौट सकेंगे। सीएम भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के प्रवासी श्रमिकों की वापसी के लिए देश के विभिन्न शहरों से 28 ट्रेनों के संचालन करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कुछ दिन पहले लिखे पत्र में जम्मू से रायपुर-बिलासपुर 7 ट्रेनें, लखनऊ से रायपुर-बिलासपुर 3 ट्रेनें, कानपुर से रायपुर-बिलासपुर 2 ट्रेनें, चेन्नई से रायपुर-बिलासपुर 1 ट्रेन, बंगलौर से रायपुर-बिलासपुर 1 ट्रेन, पुणे से रायपुर-बिलासपुर 2 ट्रेनें, इलाहाबाद से बिलासपुर 1 ट्रेन, दिल्ली से रायपुर-बिलासपुर 3 ट्रेनें, हैदराबाद-सिकंदराबाद से रायपुर-बिलासपुर 3 ट्रेनें, विशाखापट्नम से रायपुर 1 ट्रेन, सूरत-अहमदाबाद से रायपुर 1 ट्रेन, कोलकाता से रायपुर 1 ट्रेन, जयपुर से रायपुर 1 ट्रेन, पटना से दुर्ग 1 ट्रेन के संचालन का आग्रह किया था।

03-05-2020
स्पेशल ट्रेन में सफर के लिए मजदूरों को कितना देना होगा किराया,क्या -क्या मिलेगी सुविधा, रेलवे ने तय किए नियम

 नई दिल्ली। देश के कई महानगरों में फंसे मजदूरों को घर वापस ले जाने के लिए राज्य सरकारों की मांग पर रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत की है। भारतीय रेलवे ने रविवार को सभी जोन्स के लिए गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनें तभी चलेंगी जब कम से कम 90 फीसदी सीटों के लिए बुकिंग की जाए। रेलवे ने किराया, खाना, पानी, सुरक्षा को लेकर हर बात स्पष्ट कर दी है।रेलवे की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है,'सभी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें नॉन स्टॉप होंगी और एकमात्र गंतव्य के लिए होगी। सामान्यत: ये 500 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए होंगी। ट्रेनों को बीच के किसी स्टेशन पर नहीं रोका जाएगा। एक ट्रेन में (मिडिल बर्थ को छोड़कर) करीब 1200 लोग सफर कर सकते हैं।' गाइडलाइंस में कहा गया है कि जिस राज्य से यात्रा प्रारम्भ होगी वहां की सरकार को यात्रियों का समूह तैयार करना होगा। ट्रेन में यात्रियों की संख्या क्षमता से 90 फीसदी से कम नहीं हो सकती है। रेलवे ने कहा कि स्थानीय राज्य सरकार यात्रियों को टिकट सौंपेगी और उनसे टिकट वसूल करके एकत्रित राशि रेलवे को सौंपेगी। यह भी कहा गया है कि जिस राज्य से ट्रेन खुलेगी वहां की सरकार को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करनी है ताकि केवल वे ही लोग स्टेशन परिसर में आ पाएं जिन्हें मंजूरी दी गई है और जिनके पास टिकट मौजूद है।

लवे दिए गए गंतव्य के लिए टिकट प्रिंट करेगी और स्थानीय राज्य सरकार प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। राज्य सरकार उन टिकटों को उनके द्वारा तैयार लिस्ट के मुताबिक यात्रियों को टिकट सौंपेगी और उनसे किराया वसूल करेगी। किराया एकत्रित करके राज्य सरकार रेलवे के पास जमा कराएगी।जहां से यात्रा की शुरुआत होगी उस राज्य सरकार को खाने के पैकेट्स और पीने के पानी का भी इंतजाम करना होगा। यदि यात्रा 12 घंटे से अधिक के लिए होगी तो एक समय का खाना रेलवे की ओर से दिया जाएगा।  सभी यात्रियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है। प्रशासन को सभी यात्रियों को इसकी जानकारी देनी है। साथ ही यात्रियों को आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के बाद वहां की राज्य सरकार यात्रियों को रिसीव करेगी। स्थानीय प्रशासन को स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन और आगे की यात्रा आदि की व्यवस्था करनी होगी। वहां सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। रेलवे ने यह भी कहा है कि यदि सुरक्षा या हाइजीन से संबंधित नियमों का यदि किसी भी चरण में उल्लंघन होता है तो श्रमिक स्पेशल ट्रेन की सेवा रद्द की जा सकती है।

02-05-2020
बाहर से आने वाले श्रमिकों के क्वारंटीन की होगी पुख्ता व्यवस्था, तय किए गए स्थल

दुर्ग। लॉक डाउन में दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों की जिले में वापसी की स्थिति में उनके स्वास्थ्य परीक्षण, क्वारंटीन एवं क्वारंटीन सेंटर की सुविधाओं के संबंध में पुख्ता तैयारियां शुरू हो गई हैं। जनपद मुख्यालय में एवं पंचायतों में क्वारंटीन सेंटर होंगे। क्वारंटीन के लिए स्कूलों को चुना गया है। सभी क्वारंटीन सेंटर में पानी-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित कर लिया गया है। जिन केंद्रों को चुना गया है उन्हें सैनिटाइज करने के निर्देश दिए गए हैं। क्वारंटीन सेंटर में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी जरूरी निर्देशों के पालन के संबंध में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। श्रमिकों के आते ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। स्वास्थ्य परीक्षण में किसी तरह के लक्षण नहीं पाए जाने पर उन्हें चौदह दिन के क्वारंटीन में रखा जाएगा। इस दौरान स्थानीय अमला लगातार इस बात की मानिटरिंग करेगा कि बाहर से आने वाले लोग पूरी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहें। बैठक में सीईओ ने अधिकारियों को कहा कि स्थानीय अमला बाहर से आने वाले किसी भी ग्रामीण की सूचना मिलने पर तुरंत उसके क्वारंटीन की और आवश्यक स्वास्थ्य जांच की कार्रवाई करे। सीईओ ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों एवं क्वारंटीन केंद्रों में कोविड आपात सेल से जुड़े अधिकारियों के नंबर चस्पा किए जाएं ताकि किसी भी तरह का फीडबैक देने में ग्रामीणों को आसानी हो और फीडबैक मिलते ही व्यवस्था और बेहतर करने के लिए जुट जाएं। बैठक के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, कार्यक्रम अधिकारी, कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा, अनुविभागीय अधिकारी, उपसंचालक कृषि, अनुविभागीय अधिकारी, सिंचाई विभाग, अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, उपअभियंता उपस्थित रहे ।

बीजाभाट सचिव निलंबित
बैठक में सीईओ ने ग्राम पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों की समीक्षा भी की। ग्राम पंचायत बीजाभाठ की समीक्षा के दौरान यहां कार्य स्वीकृत होने के बावजूद आरंभ नहीं कराया गया था। अतएव यहां के सचिव गिरिजा शंकर वर्मा को निलंबित करने के निर्देश उन्होंने दिये। सीईओ ने कहा कि मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और उपयोगी संरचनाओं का निर्माण सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

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