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25-09-2020
भाजपा नेताओं ने पं.दीनदयाल उपाध्याय को किया याद, साय ने कहा-सादगी, शुचिता और सरलता के थे प्रतीक 

रायपुर। पं.दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने निवास पर तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उनकी सेवा भावना को याद किया। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भाजपा के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का संबोधन सुना। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने भी अपने राजधानी स्थित निवास पर पं. दीनदयाल उपाध्याय के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित था। वे शुचिता और सरलता के प्रतीक थे। राष्ट्रवाद और अंतयोदय की जो अलख पं. दीनदयाल उपाध्याय ने जगायी, आज भाजपा उसी के आलोक में श्रेष्ठ भारत के निर्माण में लगी है। उनके इन्हीं विचार पर पार्टी की सरकारें काम कर रही है। राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने अपने दिल्ली स्थित निवास पर पं.उपाध्याय के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। सांसद पाण्डेय ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय हमारे आदर्श हैं, वो बेहद साधारण जीवन जीने वाले नेता थे। उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए भाजपा के कार्यकर्ता तन-मन और समर्पण भाव से देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
संगठन महामंत्री पवन साय ने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पुष्पांजलि अर्पित कर पं. उपाध्याय का पुण्य स्मरण किया और श्रद्धांजलि दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का उद्बोधन भी भाजपा प्रदेश कार्यालय में सुना।

रायपुर लोकसभा सांसद सुनील सोनी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता पंडितजी का जीवन एक संदेश है। प्रत्येक कार्यकर्ता उनके जीवन से बहुत कुछ सीख सकता है। उनके विचारों में मुझे क्या मिला नहीं बल्कि मैने राष्ट्र के प्रति क्या समर्पित किया मुख्य है।  विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने पं.दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पंडित उपाध्याय एक प्रखर राष्ट्रवादी विचारक थे। उन्होंने अपने विचारों व कर्तव्य निष्ठा से भारतीय राजनीति में अद्वितीय आदर्श स्थापित किया। उन्होंने देश को अंत्योदय व एकात्म मानववाद जैसी प्रगतिशील विचारधारा देने का काम किया है। उनका संपूर्ण जीवन देश की संस्कृति और देश की अखंडता के लिए समर्पित रहा है। देश को अंत्योदय का मंत्र देते हुए उन्होंने पंक्ति में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को पंक्ति में खड़े प्रथम व्यक्ति तक लाने की परिकल्पना की,जिसके लिए उनका संपूर्ण जीवन समर्पित रहा। पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने कहा कि पं. उपाध्याय एक ऐसे युगद्रष्टा थे,जिनके बोये गए विचारों व सिद्धांतों के बीज ने देश को एक वैकल्पिक विचारधारा दी। उनकी विचारधारा सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए थी। भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने, सुभाष राव, शिवरतन शर्मा, संजय श्रीवास्तव, नलिनीश ठोकने, नरेश गुप्ता, संदीप शर्मा, राजीव कुमार अग्रवाल, प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सत्यम दुवा, गौरीशंकर श्रीवास, संजुनारायन सिंह ठाकुर, अनुराग अग्रवाल, राजीव चक्रवर्ती, उमेश घोरमोड़े, अमित चिमनानी, सहित भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

22-07-2020
तिरंगे को मिली थी आज ही के दिन राष्‍ट्रीय ध्‍वज की उपाधि...

रायपुर। आज वो दिन है जिस दिन देश के तिरंगे को मिली राष्‍ट्रीय ध्‍वज की उपाधि। देश के आजाद होने के बाद संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 22 जुलाई 1947 को ही तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया था। राष्ट्रीय ध्वज हमारे राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है, जो तीन रंगों से बना है इसलिए इसे तिरंगा कहा जाता है। तिरंगे में सबसे ऊपर गहरा केसरिया, बीच में सफ़ेद और सबसे नीचे गहरा हरा रंग बराबर अनुपात में है। सफेद पट्टी के मध्‍य में है गहरे नीले रंग का अशोक चक्र।  

केसरिया रंग  -
तिरंगे में सबसे उपर केसरिया रंग होता है। यह आध्यात्म का बोध कराता है, देश की समृद्धि , संपन्नता और त्याग और बलिदान को दर्शाता है। 

सफ़ेद रंग - 
तिरंगे के मध्य में सफेद रंग होता है यह सफेद रंग सुख शांति को दर्शाता है। यह रंग हमें प्रेरणा देता है कि हमेशा सत्य की राह पर चले और हमारे जीवन में सदैव सुख और शांति बनी रहे। 

हरा रंग -
तिरंगे में अंतिम रंग हरा होता है। यह हरा रंग देश में हरियाली खुशहाली और प्रगति का प्रतिक होता है। यह संदेश देता है की सभी के जीवन में खुशहाली बनी रहे देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और देश का हर व्यक्ति तरक्की करे। 

13-07-2020
कोरोना योद्धाओं के लिए तैयार हो रहीं थीम आधारित कलात्मक राखियां

रायपुर। कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ रहे कोरोना योद्धाओं की कलाई सजाने स्व-सहायता समूह की महिलाएं आकर्षक और मनमोहक राखियां तैयार कर रही हैं। रक्षाबंधन के त्यौहार के लिए ये राखियां धमतरी जिले के छाती गांव स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर में तैयार की जा रहीं हैं। कोरोना संकट में काम कर रहे अलग-अलग विभागों के लिए बनाई जा रहीं ये राखियां उनके कर्तव्य और सेवाओं पर आधारित रहेंगी। पुलिस विभाग की राखी में तिरंगा, स्वास्थ्य विभाग की राखी में रेड क्रॉस का प्रतीक, स्वच्छ भारत मिशन की राखी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चश्मा तथा अन्य विभागों की राखियों में भी प्रतीकात्मक स्वरूप अंकित किया जाएगा। बांस और गोबर से बनी इन सुन्दर और कलात्मक राखियों से कोविड को हराने में लगे स्वास्थ्य, पुलिस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आदिवासी विकास, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वच्छ भारत मिशन के 10 हजार से अधिक भाइयों की कलाई सजेंगी।

जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नम्रता गांधी ने बताया कि महिला समूहों  द्वारा तैयार की जा रही बांस की कलात्मक राखियां कोविड वॉरियर्स को समर्पित है, जो दिन-रात लोगों की सेवा में लगे हुए हैं। अब तक पुलिस विभाग और पंचायत विभाग के लिए एक-एक हजार, स्वास्थ्य विभाग के लिए 2 हजार, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए 3 हजार पांच सौ, महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 2 हजार और आदिवासी विकास विभाग के लिए लगभग पांच सौ राखी के ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा अन्य विभागों, नगर से विभिन्न गैरसरकारी संगठनों, क्लबों तथा सामाजिक संस्थाओं की मांग पर भी बांस और गोबर से निर्मित खूबसूरत राखियां तैयार की जाएंगी।

29-07-2019
चंबा का ऐतिहासिक मिंजर मेला शुरू, हिंदू-मुस्लिम की एकता का माना जाता है प्रतीक  

चंबा। 28 जुलाई से चंबा का मिंजर मेला शुरू हो गया है। भगवान रघुवीर और लक्ष्मी नारायण को मिर्जा परिवार द्वारा जरी और गोटे की बनी मिंजर चढ़ाने के साथ ही चंबा का ऐतिहासिक मिंजर मेला शुरू हो गया। विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने  चंबा के ऐतिहासिक चौगान में ध्वजारोहण कर इस मेले का शुरुआत की। कहने को तो भाई-बहन के अटूट प्रेम की निशानी भी है, लेकिन मुस्लिम परिवार गोटे से मिंजर तैयार कर भगवान लक्ष्मीनाथ और रघुवीर भगवान को चढ़ाता है। कुल मिलाकर मिंजर मेला भाई-बहन के प्यार के साथ-साथ आपसी प्रेमभाव को भी दर्शाता है। श्रावण में उत्तरी भारत में नदी के किनारे अथवा झूलों की बहार में मेले लगते हैं। हिमाचल राज्य के पूर्वोत्तर और हिमालय की पश्चिमोत्तर सीमावर्ती भीतरी तराई में स्थित रावी घाटी प्राकृतिक सौंदर्य से रसा-बसा स्थान है। यहां कबिलयाई मूल का चम्बायाली समुदाय निवास करता है। इस क्षेत्र में आज भी प्रागैतिहासिक कालीन सांस्कृतिक एवं सामाजिक मान्याताओं के दर्शन होते हैं। श्रावण में वर्षा ऋतु में चंबा का मिंजर मेला अति महत्वपूर्ण है। यह चंबा की सांस्कृतिक विरासत में शामिल है। अगले रविवार को मिंजर के रावी में विसर्जन के साथ ही ये मेला समाप्त होगा।  विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने लोगों को मिंजर मेले की मुबारकबाद देते हुए कहा कि मैं मुख्यमंत्री का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मिंजर मेले की शुरुआत के लिए उन्हें मुख्य अतिथि के तौर पर मौका दिया है।

 

 

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