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27-07-2019
Exclusive : प्रशासन प्राकृतिक धरोहरों को सहेजने में उदासीन, अस्तित्व खोता जा रहा कुंदरूपारा का तालाब

बालोद। कहते हैं तालाब शहर के इकोलाजी को संतुलित रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे न केवल जल स्तर बना रहता है। बल्कि जीव-जंतुओं का संतुलन भी बनाए रखता है। लेकिन बालोद शहर में एक ऐसा तालाब भी देखा जा सकता है जहां तैरती मिलती है शराब की बोतलें, डिस्पोजल ग्लास और प्लास्टिक का कचरा। बालोद नगरपालिका क्षेत्र के इस कुंदरूपारा तालाब की दशा देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगरपालिका का प्रशासन प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण, इकोलॉजी और जल स्तर बनाए रखने को लेकर कितनी गंभीर है। जिला योजना समिति के सदस्य नितेश वर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा है कि नगरपालिका की उदासीनता के कारण यह तालाब अपने मूल आस्तित्व को खोता जा रहा है। कुंदरूपारा के तालाब के लिए निकाय प्रशासन न तो कोई इंतजाम किया है और न ही इसे सहेजने के प्रयास होते दिख रहे हैं।

इधर शराब की तैरती बोतल, उधर स्नान
तालाब में एक ओर पानी में तैरती शराब की बोतलें, डिस्पोजल ग्लास और प्लास्टिक कचरा नजर आता है तो दूसरी ओर लोग स्नान करते नजर आते हैं। कुंदरूपारा का यह तालाब सालों से लोगों के स्नान, ध्यान के लिए उपयोगी रहा है। आज भी मोहल्ले के अलावा आसपास के लोग इस तालाब में स्नान करने के लिए आते हैं।

तालाब बना मयखाना, अंधेरा में जमकर छलकता है जाम
मंदिरा प्रेमियों ने कुंदरूपारा के इस तालाब को मयखाना बना रखा है। अंधेरा होते ही छलकने शराब के जाम छलकने लगते हंै। तालाब में शराब की बोतले और डिस्पोजल ग्लास फेकने से पानी प्रदुषित हो रहा है। पानी के अलावा तालाब पार में भी बड़ी मात्रा में शराब की बोतलें और प्लास्टिक कचरा पड़ा हुआ है।

कचरे के ढेर पर तालाब
कुंदरूपारा, आमापारा, शिकारीपारा के अलावा और अन्य मोहल्लों के निस्तारी के काम आने वाला यह तालाब कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है। यदि यही हालात रहे तो कुछ सालों में तालाब का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। कभी भी कोई गंभीर बीमारी पैर पसार सकती है।

एक ही तालाब तालाब पर बार-बार लाखों रुपये खर्च
सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि, नगरपालिका के वर्तमान 4 साल 6 माह के कार्यकाल में निकाय प्रशासन द्वारा एकमात्र तालाब पर लाखों रुपये खर्च किये गए शहर के अन्य तालाबों को दरकिनार किया गया। जिसके चलते शहर के बाकी तालाब अपना अस्तित्व बचाने सफाई और अन्य विकास कार्यों की बाट जोह रहे हैं।

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