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28-11-2019
देश में मुस्लिम नहीं हिन्दू बिगाड़ते है शांति-सौहार्द वाले बयान पर राजीव धवन ने दी सफाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष और सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील रहे राजीव धवन ने हिंदुओं को लेकर दिए बयान पर सफाई दी है। राजीव धवन ने बयान दिया था कि 'देश में शांति-सौहार्द हिन्दू बिगाड़ते हैं मुस्लिम नहीं'। इसकी जमकर आलोचना हो रही है। वहीं राजीव धवन का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। अपने बयान पर सफाई देते हुए राजीव धवन ने कहा कि, 'यह टीवी द्वारा की गई शरारत है। मैं जब हिंदुओं की बात करता हूं तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं सभी हिंदुओं की बात कर रहा हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'जब बाबरी मस्जिद मामले में हिंदू शब्द का इस्तेमाल होता है तो इसका मतलब संघ परिवार होता है। मैंने कोर्ट में कहा था कि जिन्होंने बाबरी मस्जिद ढहाया वे लोग हिंदू तालिबान हैं। मैं संघ परिवार के उन वर्गों की बात कर रहा हूं जो हिंसा और लिंचिंग जैसी चीजों के लिए समर्पित हैं'।

बता दें कि, मुस्लिम पक्ष और सुन्नी वक्फ बोर्ड को भले ही सुप्रीम कोर्ट से फैसले में निराशा मिली हो, लेकिन उनकी पैरवी करने वाले राजीव धवन ने खूब वाहवाही बटोरी थी। सुप्रीम कोर्ट में करीब 40 दिन चली मैराथन सुनवाई में धवन ने अपनी दलीलों से पीठ का दिल जीत लिया था। पीठ ने उस वक्त कहा था कि, हम वरिष्ठ वकील डॉ राजीव धवन की शैली से प्रभावित हुए। उन्होंने जिस तरह पूरी सुनवाई के दौरान दलीलें रखीं और साथ ही अपने विपक्षी वकीलों को बोलने का मौका दिया वह काबिल ए तारीफ था। पूरी सुनवाई के दौरान उन्होंने जिस तरह से धैर्य, सत्य और न्याय के लिए सहयोग किया वह सराहनीय है। सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने एक बार यह भी कहा था कि सीजेआई सब सवाल सिर्फ उनसे ही पूछ रहे हैं जबकि हिंदू पक्ष के वकील से कुछ नहीं पूछा जा रहा, इस पर सीजेआई ने हिंदू पक्ष के वकील से भी कई सवाल पूछ डाले। हालांकि राजीव धवन ने कई बार अपना आपा भी खोया था, सुनवाई के अंतिम दिन तो उन्होंने हिंदू पक्ष की ओर से पेश किया गया नक्शा भी फाड़ दिया था। धवन को मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी करने के लिए जान से मारने की धमकी भी मिली थी।

सीजेआई से बहस के बाद छोड़ी थी वकालत

74 वर्षीय राजीव धवन ने सीजेआई दीपक मिश्रा के साथ दिल्ली सरकार बनाम केंद्र के मामले में अदालत की सुनवाई के दौरान बहस के बाद 11 दिसंबर 2017 को उन्होंने वकालत छोड़ने का फैसला किया था। बाद में मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी के लिए वह तैयार हो गए थे। 

02-09-2019
मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद-पुराण के आधार पर नहीं

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को मुस्लिम पक्षकारों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने हिंदू पक्ष की तरफ  से पेश की गई दलीलों को काटते हुए कहा कि मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद और स्कंद पुराण के आधार पर नहीं। उन्होंने हिंदू पक्ष के परिक्रमा वाले दलील पर कहा कि लोगों का उस स्थान की परिक्रमा करना धार्मिक विश्वास को दिखाता है। यह कोई सबूत नहीं है। वर्ष 1858 से पहले के गजेटियर का हवाला देना भी गलत है। अंग्रेजों ने लोगों से जो सुना लिख लिया। इसका मकसद ब्रिटिश लोगों को जानकारी देना भर था। मुस्लिम पक्षकार के वकील ने रामायण को काल्पनिक काव्य करार दिया। राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा कि कहा जा रहा है कि विदेशी यात्रियों ने मस्जिद का जिक्र नहीं किया। लेकिन मार्को पोलो ने भी तो चीन की महान दीवार के बारे में नहीं लिखा था।

मामला कानून का है। हम इस मामले में किसी अनुभवहीन इतिहासकार की बात को नहीं मान सकते हैं। हम सभी अनुभवहीन ही हैं। इस पर कोर्ट ने राजीव धवन से कहा कि आपने भी हाईकोर्ट में ऐतिहासिक तथ्य रखे थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि आपने (राजीव धवन) भी कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य दिए हैं। कोई ऐसा साक्ष्य है, जिसपर दोनों ने भरोसा जताया हो? इससे पहले राजीव धवन ने कहा कि महाभारत एक इतिहास है और रामायण एक काव्य है। इस पर जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है? धवन ने कहा काव्य तुलसीदास द्वारा कल्पना के आधार पर लिखी गई थी। इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि कुछ तो साक्ष्य के आधार पर लिखा जाता होगा। धवन ने दलील देते हुए कहा कि हम सिर्र्फ  इसलिए इस पक्ष को मजबूती से देख रहे हैं, क्योंकि वहां कि शिला पर एक मोर या कमल था। इसका मतलब यह नहीं है कि मस्जिद से पहले एक विशाल संरचना थी।

17-07-2019
कर्नाटक : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के इस्तीफे पर लें फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के 15 बागी विधायकों की याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुना दिया है। फैसले में कोर्ट ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लें। लेकिन अध्यक्ष पर किसी समस सीमा में फैसला लेने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायकों को भी विधानसभा में मौजूद होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। बता दें इस फैसले से 14 महीने पहले बनी कुमारस्वामी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। विधायकों द्वारा दायर इस याचिका में कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की गई थी। इस मामले में मंगलवार को कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार पर सवाल उठाए हैं।

वहीं बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष आर रमेश कुमार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह बहुमत खो चुकी सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से अनुरोध किया कि इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने का स्पीकर को निर्देश देने संबंधी अंतरिम आदेश जारी रखा जाएगा। रोहतगी ने कहा कि अगर विधानसभा की कार्यवाही होती है तो इन विधायकों को व्हिप के आधार पर सदन में उपस्थित रहने से छूट दी जानी चाहिए क्योंकि मौजूदा सरकार अल्पमत में हैं। मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि बागी विधायक सरकार को गिराना चाहते हैं। ये विधायक चाहते हैं स्पीकर के अधिकारों के मामले में अदालत दखल दे।

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