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16-09-2020
राज्य में तत्काल मेडिकल इमरजेंसी लागू करने के साथ टोटल लॉक डाउन करें सरकार : अमित जोगी

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा है कि कोरोना कैपिटल रायपुर में कोवडी-9 की R_O मतलब बेसिक रिप्रोडक्टिव रेट मात्र 7 दिनों में 0.7 से 7 पार कर चुकी है, जो अपने आप में वर्ल्ड रिकार्ड है। R ये बताता है कि संक्रमण कितनी गति से फैल रहा है। R=7 का मतलब एक संक्रमित व्यक्ति 7 लोगों को संक्रमित कर रहा है, जबकि कोरोना महामारी के चरम में भी इटली के लोमबारडी और अमरीका के न्यूयॉर्क में R=5.6 से ज्यादा नहीं बढ़ा था। ऐसे में छत्तीसगढ़ में अगले 30 दिनों में 1-2 लाख लोग गंभीर रूप से संक्रमित होने की संभावना हैं, जबकि प्रदेश में उपचार क्षमता इसकी 5 प्रतिशत भी नहीं है। यह राज्य की कांग्रेस सरकार के 13 कोरोना वॉरिअर्स और  केंद्र की भाजपा सरकार दोनों की विफलता का अब तक का सबसे बड़ा प्रमाण है।

अमित जोगी ने कहा है कि राजनीति अपनी जगह है लेकिन छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महामारी को रोकने के लिए मेडिकल इमरजेंसी (चिकित्सा आपातकाल)  लागू करने के साथ टोटल लॉक डाउन करने के अलावा अब भूपेश सरकार के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। अमित जोगी ने कहा है कि लॉक डाउन के दौरान सभी राशनकार्ड धारियों को प्रतिमाह 6000 रुपए भी प्रदान किया जाए ताकि विपरीत परिस्थितियों मे लोगों को थोड़ी सी राहत मिलें। अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ में टोटल लॉक डाउन साथ ही कोरोना मेडिकल इमरजेंसी पर तत्काल यह निर्णय लेने का भी मांग सरकार से की है। अमित ने मांग की है कि सभी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का फ्री में इलाज। रोकथाम के लिए 100000  निशुल्क टेस्ट प्रतिदिन। मृतक के परिवार वालों को 10 लाख रुपए का मुआवजा। लॉक-डाउन के दौरान सभी राशनकार्ड धारियों को 6000  प्रतिमाह दिया जाए।

 

15-09-2020
राज्य के सभी जिला अस्पतालों और 38 निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों का इलाज जारी

रायपुर। कोविड मरीजों की सुविधा के लिए राज्य के सभी 29 जिला अस्पतालों, डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ,कोविड केयर सेंटर में उनके उपचार और देख भाल की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा राज्य के 38 निजी अस्पतालों को भी कोविड मरीजों के उपचार करने की स्वीकृति दी गई है जिसमें रायपुर के 20 ,बिलासपुर और दुर्ग के सात-सात, रायगढ़ के दो , राजनांदगांव और धमतरी का एक-एक निजी अस्पताल शामिल है। इसके अलावा कोविड 19 के लक्षण रहित एवं कम लक्षण वाले मरीजों के लिए 186 सरकारी कोविड केयर सेंटर निशुल्क खोले गए हैैैं। साथ ही 14 निजी चिकित्सालयों ने पेड आइसोलेशन सेंटर भी खोले हैं। राज्य के निम्नलिखित निजी चिकित्सालायों के द्वारा कोविड-19 से संक्रमित मरीजों को भर्ती कर उपचार प्रदान किया जा रहा है।
 
राज्य के निम्नलिखित निजी चिकित्सालायों के द्वारा कोविड-19 से संक्रमित लक्षण रहित एवं माइल्ड लक्षण वाले मरीजों को पेड आइसोलेशन सेंटर (हॉटल/अन्य भवन) भर्ती कर उपचार प्रदान किया जा रहा है। ज्ञात हो कि प्रदेश में मेकाहारा के अलावा कुल 29 कोविड अस्पताल और 186 कोविड केयर सेंटर है । इन अस्पतालों में 3551 बेड और कोविड केयर सेंटर में 25560 बेड उपलब्ध हैं। इसके अलाावा 560 से अधिक आक्सीजन युक्त बेड भी उपलब्ध हैं।


 
 

10-09-2020
भूपेश सरकार कृषि कार्यों को मनरेगा से जोड़ने, मजदूरी दर बढ़ाने सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव केन्द्र को भेजेगी

रायपुर। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कृषि कार्य को मनरेगा से जोड़ने, शहरी मनरेगा, मनरेगा की मजदूरी दर बढ़ाने, मनरेगा में 200 दिनों का रोजगार देने के प्रावधान के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर, केन्द्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक में गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए मनरेगा से वर्मी टांका निर्माण के कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि, गौठान समितियों से वर्मी टांका निर्माण के लिए जितनी मांग आती है, उन्हें तत्काल स्वीकृति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की बैठक में ये निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री निवास पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव उपस्थित थे। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वनमंत्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि सभी धान खरीदी केन्द्रों में चबूतरों के निर्माण और चबूतरों पर शेड निर्माण के कार्यो को भी प्राथमिकता देते हुए शीघ्रता से पूर्ण किया जाए। राज्य के हर धान संग्रहण केन्द्र में एक शेड का निर्माण अवश्य हो।

बैठक में जानकारी दी गई कि, प्रदेश में 4649 चबूतरों के निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई है। इनमें से 4630 चबूतरों का निर्माण हो चुका है। मुख्यमंत्री बघेल ने इस वर्ष मनरेगा से राज्य में 5500 गौठानों के निर्माण की स्वीकृति देने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, राज्य में वर्तमान में लगभग 4500 गौठानों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। ऐसे गौठानों में जहां स्व-सहायता समूह आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, वहां आजीविका केन्द्र के निर्माण की स्वीकृति प्राथमिकता के आधार पर देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि, मनरेगा के तहत नर्सरी, कुंआ और डबरी निर्माण और नहर लाइनिंग के कराए गए कार्यों से लोगों को मिलने वाले लाभ के बारे में सर्वे कराया जाना चाहिए। इसी तरह जिले की उपयोगी डायवर्सन सिंचाई योजनाओं की नहर लाईनिंग का कार्य पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कराया जाए, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधाओं का भरपूर लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री बघेल ने यह भी कहा कि, जिन क्षेत्रों में पानी में हैवीमेटल्स, आरसेनिक, फ्लोराइड, आयरन की शिकायत है, वहां गांव वालों को सतही जल का उपयोग पेयजल के लिए करने के लिए जागरूक किया जाए।

खेतों में डबरी और कूपों का निर्माण कराया जाना चाहिए, जिससे पानी की रिचार्जिंग हो सके और जरूरत के समय फसलों की सिंचाई में इसका उपयोग किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि, वन अधिकार पट्टे प्राप्त हितग्राहियों को जमीन पर फलदार वृक्ष लगाने, बड़े वृक्षों के बीच हल्दी, अदरक, तीखूर जैसी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाए। मनरेगा से भूमि विकास और जमीन को घेरने के कार्य कराए जाएं। कृषि विभाग के माध्यम से हितग्राहियों की जमीन पर ट्यूबवेल खनन कराकर क्रेडा के माध्यम से सोलर पंप स्थापित किए जाएं, जिससे फसलों के लिए सिंचाई की सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया जाए। बैठक में मुख्य सचिव आरपी मंडल, अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन और सुब्रत साहू, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, खाद्य विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, आदिमजाति कल्याण विभाग के सचिव डीडी सिंह, मनरेगा आयुक्त मोहम्मद अब्दुल कैसर हक शामिल हुए। विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के सदस्य और अधिकारी बैठक में वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े।

 

08-09-2020
मरवाही अरण्य फल प्रसंस्करण से खुला आय का अवसर, सीताफल पल्प के निर्माण से 61 लाख रूपए की आय अनुमानित

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप वन मंत्री मो.अकबर के निर्देशन में राज्य में वन विभाग द्वारा वनवासियों को वनोपजों के संग्रहण के साथ-साथ प्रसंस्कण और विपणन से भी जोड़कर उन्हें अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए हरसंभव पहल की जा रही है। इस तारतम्य में प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि राज्य के मरवाही वनमण्डल के अंतर्गत सीताफल के संग्रहण, प्रसंस्करण तथा विपणन के लिए एक सहकारी समिति ’मरवाही अरण्य फल प्रसंस्करण उद्योग’ का गठन किया गया है। इससे क्षेत्र के 3 हजार 250 वनवासी परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। यहां चालू वर्ष में लगभग 60 टन सीताफल पल्प के निर्माण से 61 लाख रूपए की आय अनुमानित है। इस तरह ’मरवाही अरण्य फल प्रसंस्करण उद्योग’ से वनवासियों के लिए अधिक से अधिक आय अर्जित करने का अवसर खुल गया है।

मरवाही अरण्य फल प्रसंस्करण में सीताफल के साथ-साथ वनों में पाए जाने वाले फलों जैसे- तेंदू, चार, भेलवा, महुआ, तथा जामुन आदि का मूल्य संवर्धन, पल्प निर्माण, आईस्क्रीम, कैंडी, बर्फी लड्डू जैसे उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इसकी स्थापना में लगभग 60 लाख रूपए का व्यय अनुमानित है। चालू वर्ष के दौरान लगभग 240 टन सीताफल क्रय का लक्ष्य रखा गया है। इसका संचालन दानीकुण्डा वन प्रबंधन समिति द्वारा किया जाएगा। समिति द्वारा क्षेत्र में सीताफल का न्यूनतम मूल्य 10 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित कर क्रय किया जाएगा। इससे संग्राहकों को एक लाख 44 हजार रूपए का प्रत्यक्ष लाभ होगा। विगत वर्षों में क्षेत्र में व्यापारियों द्वारा 4 से 5 रूपए प्रति किलोग्राम में क्रय कर बड़े शहरों में इसे 40 से 50 रूपए प्रति किलोग्राम विक्रय किया जाता रहा है। अब क्षेत्र के वनवासियों को समिति से अधिक लाभ मिलेगा। इसी तरह चालू वर्ष में ही 60 टन सीताफल पल्प निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा सह उत्पाद के रूप में 36 टन बीज प्राप्त होगा। जिसे आर्गेनिक कीटनाशक उत्पादकों को विक्रय किया जाएगा। मरवाही अरण्य फल प्रसंस्करण द्वारा पल्प के निर्माण में 78 प्रति किलोग्राम का व्यय अनुमानित है। जिसका वर्तमान बाजार मूल्य 150 रूपए प्रति किलोग्राम है। इस तरह 60 टन सीताफल पल्प के निर्माण से 61 लाख 20 हजार रूपए की राशि का लाभ अनुमानित है। भविष्य में इसी समिति द्वारा सीताफल के साथ-साथ तेंदू, चार, भेलवा, महुआ, तथा जामुन से पल्प निर्माण, आईस्क्रीम, कैंडी, बर्फी लड्डू का निर्माण किया जाएगा और इसे रेलवे स्टेशनों, मॉलों तथा संजीवनी केन्द्रों में भी विक्रय किया जाएगा।

 

07-09-2020
राज्य में मनरेगा मजदूरी भुगतान के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 67 करोड़ मंजूर किए

रायपुर। प्रदेश में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) मजदूरी भुगतान के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 67 करोड़ 1  लाख रूपए स्वीकृत किए हैं। प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा के अंतर्गत अब तक 26 लाख 9 हजार परिवारों को सीधे रोजगार उपलब्ध कराते हुए 2148 करोड़ 70 लाख रूपए से अधिक का मजदूरी भुगतान किया जा चुका है। इसमें राज्य शासन की ओर से मनरेगा श्रमिकों को उपलब्ध कराए गए 50 अतिरिक्त दिनों के रोजगार के एवज में 96 करोड़ 33 लाख रूपए का मजदूरी भुगतान भी शामिल है। राज्य मनरेगा आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार द्वारा मजदूरी मद में इस वर्ष अब तक कुल 2271 करोड़ 89 लाख रूपए स्वीकृत किए गए हैं। इसमें 67 करोड़ एक लाख रुपए की स्वीकृति अभी 4 सितम्बर को मिली है। कुल स्वीकृत राशि में से 2052 करोड़ 37 लाख रूपए प्रदेश को मजदूरी भुगतान के लिए प्राप्त हुए हैं। योजनांतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 26 लाख से अधिक परिवारों के 48 लाख 87 हजार मनरेगा श्रमिकों को नौ करोड़ 55 लाख मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसमें चार करोड़ 81 लाख मानव दिवस रोजगार 24 लाख 58 हजार महिला श्रमिकों के द्वारा सृजित किया गया है। प्रदेश में इस साल अब तक 83 हजार 642 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।

 

03-09-2020
मुख्य सचिव ने ली बैठक, राज्य की नदियों से जल उपलब्ध कराने के संबंध में की चर्चा

रायपुर। मुख्य सचिव आरपी मंडल की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की 48वीं बैठक हुई। बैठक में विभिन्न जलप्रदाय योजनाओं, विद्युत उत्पादन केन्द्रों और औद्योगिक संस्थानों को राज्य की विभिन्न नदियों से जल उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में महासमुंद के सरायपाली और बसना आवर्धन जलप्रदाय योजना, राजनांदगांव के अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़ जलप्रदाय आवर्धन योजना, बेमेतरा के बेरला जलप्रदाय आवर्धन योजना, जांजगीर-चांपा के सक्ती समूह और जांजगीरनैला आवर्धन जल प्रदाय योजना, बिलासपुर के बिल्हा, पेन्ड्रा आवर्धन जल प्रदाय योजना, मुंगेली के मुंगेली और लोरमी आवर्धन जल प्रदाय योजना, कबीरधाम के कवर्धा आवर्धन जल प्रदाय योजना, कोरिया के बैकुंठपुर आवर्धन जल प्रदाय योजना, रायपुर के बीरगांव आवर्धन जल प्रदाय योजना, कोरबा के छुरीकला और धनरास, छुरीखुर्द, चोरभट्ठी, आई.टी.आई., गोपालपुर समूह आवर्धन जल प्रदाय योजना के लिए वार्षिक आधार पर पेयजल आबंटन सहित विभिन्न औद्योगिक संस्थानों, कोल वॉशरी और विद्युत उत्पादन केन्द्रों को जल प्रदाय के संबंध में चर्चा की गई।

रायपुर के रायखेड़ा स्थित रायपुर एनर्जेन लिमिटेड, नारायणपुर और कांकेर जिले में प्रस्तावित रावघाट आयरन ओर माईनिंग प्रोजेक्ट, बिलासपुर के घुटुकू स्थित पारस पॉवर एण्ड कोल बेनीफिकेशन, दंतेवाड़ा के किरंदुल औरहिरोली के निकट प्रस्तावित आयरन ओर प्रोजेक्ट एनएमडीसी, जांजगीर चांपा के ग्राम बलौदा स्थित क्लिन कोल इंटरप्राइजेस, रायपुर के औद्योगिक विकास केन्द्र बोरई की जल प्रदाय योजना, ग्राम बहेसर के निकट प्रस्तावित एन.आर. स्पंज प्राईवेट लिमिटेड, रायगढ़ के ग्राम पाली स्थित मां काली एलॉयज उद्योग प्राईवेट लिमिटेड, ग्राम तराईमाल में स्थापित बीएस स्पंज प्राईवेट लिमिटेड, बस्तर के ग्राम घमरमुंड में प्रस्तावित जीएस एनर्जी प्राईवेट लिमिटेड, सूरजपुर के ग्राम माडर में प्रस्तावित उमा पॉवर प्रोजेक्ट्स और जांजगीर चांपा के ग्राम बिरगहनी में स्थित कोल वॉशरी हिन्द एनर्जी एण्ड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड को जल प्रदाय करने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, जल संसाधन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, खनिज विभाग के सचिव अन्बलगन पी., नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव अलरमेल मंगई डी. सहित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

31-08-2020
Video : कोरोना काल में प्रदेशवासियों के लिए भाजपा नेताओं का योगदान शून्य : शैलेश

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, भाजपा के सारे सांसद और विधायक कोरोना संकट के समय छत्तीसगढ़ की जनता के साथ नहीं खड़े हुए। यह बेहद दुखद है कि, भाजपा नेताओं की वफादारी प्रधानमंत्री के प्रति तो दिखती है, लेकिन छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ की जनता के हितों और हकों के प्रति नहीं। 

शैलेश ने कहा है कि, राज्य की जनता भाजपा नेताओं के चाल और चरित्र दोनों को देख रही है और यह समझ भी रही है। शैलेश ने आरोप लगाए हैं कि, भाजपा नेताओं को छत्तीसगढ़ में कोरोना के नाम पर राजनीति करनी है, लेकिन छत्तीसगढ़ के लोगों की किसी तरह की सहायता करने या करवाने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है।

27-08-2020
जीएसटी परिषद की बैठक में राज्यों को क्षतिपूर्ति के दो विकल्पों पर हुई चर्चा..

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की 41वीं बैठक में गुरुवार को राज्यों को मुआवजा देने की बात कही जा रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त सचिव ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण जीएसटी कलेक्शन में भारी गिरावट आई है। जीएसटी कंपेनसेशन कानून के मुताबिक देखा जाए तो राज्यों को मुआवजा दिए जाने की आवश्यकता है। वित्त सचिव ने कहा, वित्त वर्ष 2019-20 में केंद्र ने राज्यों को जीएसटी कंपेनसेशन के रूप में 1.65 लाख करोड़ रुपये दिए। इसमें मार्च में दिए गए 13806 करोड़ भी शामिल है। वित्त वर्ष 2019-20 में सेस कलेक्शन 95444 करोड़ रहा। बैठक में यह भी कहा गया कि चालू वित्त वर्ष (2020-21) जीएसटी कलेक्शन में 2.35 लाख करोड़ रुपए की कमी की आशंका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पांच घंटे चली जीएसटी परिषद की बैठक में राज्यों को क्षतिपूर्ति के दो वकिल्पों पर चर्चा की गई। राज्यों को मुआवजा राशि की भरपाई के लिए दो ऑप्शन दिए गए हैं। पहला- केंद्र खुद उधार लेकर राज्यों को मुआवजा दे। दूसरा- आरबीआई से उधार लिया जाय। राज्य 7 दिनों के भीतर अपनी राय देंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जिन विकल्पों पर चर्चा हुई, वे केवल चालू वित्त वर्ष के लिए हैं, जीएसटी परिषद अगले साल अप्रैल में एक बार फिर मामले पर विचार करेगी।  वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण ने कहा कोरोना वायरस महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में गिरावट आ सकती है। राजस्व सचिव ने कहा है कि महान्यायवादी ने यह राय दी है कि जीएसटी संग्रह में आने वाली कमी की भरपाई भारत की संचित निधि से नहीं की जा सकती है। बता दें कि राज्यों को मई, जून, जुलाई और अगस्त यानी चार महीने का मुआवजा नहीं मिला है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में वित्त मामलों की स्थायी समिति को बताया कि उसके पास राज्यों को मुआवजा देने के लिए पैसे नहीं हैं। जीएसटी परिषद की बैठक के बाद राजस्व सचिव ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह पर बहुत बुरा असर पड़ा है। महान्यायवादी ने यह राय दी है कि जीएसटी संग्रह में आने वाली कमी की भरपाई भारत की संचित निधि से नहीं की जा सकती। वित्त वर्ष 2020-21 में जीएसटी संग्रह में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी रही है, इसमें से केवल 97,000 करोड़ रुपये की कमी का कारण जीएसटी क्रियान्वयन है। शेष कमी का कारण महामारी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पांच घंटे चली जीएसटी परिषद की बैठक में राज्यों को क्षतिपूर्ति के दो विकल्पों पर चर्चा की गई। वित्त मंत्री ने कहा कि जिन विकल्पों पर चर्चा हुई, वे केवल चालू वित्त वर्ष के लिए हैं, जीएसटी परिषद अगले साल अप्रैल में एक बार फिर मामले पर विचार करेगी। कोरोना वायरस महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में गिरावट आ सकती है। राजस्व सचिव ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में अप्रैल-जुलाई के लिए राज्यों का बकाया 1.5 लाख करोड़ रुपये है।

 

26-08-2020
स्थल-सीमा से घिरे राज्यों में छत्तीसगढ़ को निर्यात की तैयारियों के हिसाब से चौथी रैंकिंग, नीति आयोग ने जारी की सूची

रायपुर। नीति आयोग ने छत्तीसगढ़ को निर्यात की तैयारियों के हिसाब से देश में स्थल-सीमा (Landlocked) से घिरे राज्यों में चौथे स्थान पर रखा है। नीति आयोग द्वारा अलग-अलग श्रेणी के राज्यों में निर्यात की तैयारियों के आधार पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए निर्यात तैयारी सूचकांक (Export Preparedness Index) जारी की गई है। नीति आयोग ने राज्यों की भौगोलिक स्थिति के आधार पर उन्हें समुद्र तटीय, हिमालयन, स्थलीय भूभाग से घिरे और केंद्रशासित प्रदेशों में वर्गीकृत कर अलग-अलग वर्गों में रैंकिंग प्रदान की है। स्थलीय भूभाग (Landlocked) से घिरे राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ को 55.95 अंकों के साथ चौथी रैंकिंग मिली है। इस वर्ग में राजस्थान, तेलंगाना और हरियाणा ही छत्तीसगढ़ से आगे हैं।

 

26-08-2020
अब राज्य के अंदर और बाहर दौड़ेगी बसे, परमिट वाले वाहनों को परिवहन विभाग ने दी हरी झंडी

रायपुर। एक राज्य से दूसरे राज्य एवं अखिल भारतीय पर्यटक परमिट वाले यात्री वाहनों के संचालन की अनुमति परिवहन विभाग ने दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बुधवार को प्रदेश के परिवहन आयुक्त ने इन बसों के संचालन की अनुमति देने के संबंध में आदेश जारी कर दिया है। यात्री बसों के परिचालन के लिए परिवहन आयुक्त द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। जारी गाइडलाइन के अनुसार यात्री वाहनों को जारी अनुज्ञापत्र के सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा और केवल निर्धारित स्टापेज पर ही वाहनों को रोका जा सकेगा। यात्रा के दौरान बसों के चालक, परिचालक एवं समस्त यात्रियों को अनिवार्य रूप से चेहरे पर मास्क लगाना होगा। परिचालक के द्वारा यात्रियों के बस में चढ़ते, बैठते व उतरते समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। बस संचालक नियमित अंतराल में वाहनों को सैनेटाइज कराएंगे। बसों के सैनेटाइजेशन के लिए सोडियम हाईपोक्लोराईट के जैसे रसायनों का छिडकाव किया जा सकता है। वाहन चालक एवं परिचालक को कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

बस में यात्रा के दौरान सोशल, फिजिकल डिस्टेंसिंग एवं कोविड-19 के नियंत्रण के लिए शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी समस्त दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी है। यात्रा के दौरान यात्रियों, चालक द्वारा धुम्रपान, पान, गुटका, खैनी इत्यादि खाना एवं थूकना प्रतिबंधित रहेगा। चालक के केबिन में प्रवेश वर्जित होगा। बस में केबिन नहीं होने की दशा में प्लास्टिक अथवा पर्दे से केबिन का निर्माण कर चालक को यात्रियों के संपर्क से अलग रखा जाना सुनिश्चित करेंगे। गाइडलाइन के अनुसार बस मालिक के द्वारा बसों के संचालन के मार्ग अनुसार एवं तिथिवार चालक एवं परिचालक का रिकार्ड संधारित करेंगे। यात्रियों को यात्रा के दौरान ई-पास प्राप्त करने की बाध्यता नहीं रहेगी। बस में यात्रा करने वाले यात्रीगण किस स्थान से किस गंतव्य स्थान तक यात्रा कर रहे हैं उसकी नामजद सूची बनाकर रखेंगे जिसे प्रशासन द्वारा मांगे जाने पर कांन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए उपलब्ध कराएंगे। गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के तहत सभी अन्तर्राज्यीय सार्वजनिक परिवहन सेवाओं, साधनों के संचालन को स्थगित रखा गया था।

 

26-08-2020
प्रदेश के सवा लाख से अधिक किसानों को 518 करोड़ से अधिक बीमा दावा राशि का भुगतान

रायपुर। रबी फसल मौसम वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य के एक लाख 25 हजार 388 कृषकों को अब तक 518 करोड़ 20 लाख 74 हजार रूपए की दावा राशि का भुगतान किया जा चुका है। रबी फसलों की बीमा का सर्वाधिक लाभ राज्य के बेमेतरा जिले के किसानों को मिला है। बेमेतरा जिले के 39 हजार 740 कृषकों को 215 करोड़ 19 लाख 35 हजार रूपए की दावा राशि प्रदाय की गई है। राजनांदगांव जिला रबी फसल बीमा दावा के मामले में प्रदेश में दूसरे नम्बर पर है। राजनांदगांव जिले में रबी फसलों के बीमा के तहत 37 हजार 485 किसानों को 162 करोड़ 93 लाख एक हजार रूपए की दावा राशि का भुगतान हुआ है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में रबी फसलों की क्षति के एवज में बलरामपुर जिले के 537 कृषकों को 30 लाख 58 हजार रूपए की दावा राशि का भुगतान किया गया है। इसी तरह जांजगीर-चांपा जिले के 60 कृषकों को एक लाख 67 हजार रूपए, जशपुर जिले के 24 कृषकों को 30 हजार रूपए, कवर्धा जिले के 28 हजार 166 हजार कृषकों को 78 करोड़ 59 लाख 89 हजार रूपए एवं मुंगेली जिले के 3503 कृषकों को 5 करोड़ 9 लाख 98 हजार रूपए का दावा भुगतान किया गया है।

रबी फसलों के बीमा के तहत बालोद जिले के 2095 किसानों को 5 करोड़ 13 लाख 20 हजार रूपए, बलौदाबाजार के 137 किसानों को 22 लाख 69 हजार रूपए, बस्तर के 73 कृषकों को 3 लाख 59 हजार रूपए, बिलासपुर जिले के 849 किसानों को 34 लाख 72 हजार रूपए, दंतेवाड़ा जिले के 32 कृषकों 83 हजार रूपए, धमतरी जिले के 202 किसानों को 52 लाख 24 हजार रूपए, दुर्ग जिले के 11 हजार 105 किसानों को 49 करोड़ 4 लाख 61 हजार रूपए, गरियाबंद के 15 किसानों को एक लाख 15 हजार रूपए, कोण्डागांव के 12 किसानों को एक लाख 2 हजार रूपए, कोरबा के 30 किसानों को 8 हजार रूपए, कोरिया जिले के 224 किसानों को 16 लाख 4 हजार रूपए, रायगढ़ जिले के चार किसानों को 43 हजार रूपए, रायपुर के 101 किसानों को 17 लाख 9 हजार रूपए, सुकमा जिले के 10 किसानों को 16 हजार रूपए, सूरजपुर जिले के 178 किसानों को 7 लाख 4 हजार रूपए, सरगुजा के 599 किसानों को 29 लाख 82 हजार रूपए तथा कांकेर जिले के सात किसानों को 15 हजार रूपए की दावा राशि का भुगतान किया जा चुका है।


 

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