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03-07-2020
बिजली मंत्री आरके सिंह ने किया ऐलान, चीन से नहीं करेंगे बिजली उपकरण आयात

नई दिल्ली। बिजली मंत्री आरके सिंह ने शुक्रवार के कहा कि भारत अब चीन जैसे देशों से बिजली उपकरणों का आयात नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाना जरूरी है क्योंकि ऐसा नहीं होने पर क्षेत्र व्यावहारिक नहीं होगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिए आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ''प्रायर रेफरेंस कंट्री (पूर्व संदर्भित देशों) से उपकरणों की आयात की अनुमति नहीं होगी। इसके तहत हम देशों की सूची तैयार कर रहे हैं लेकिन इसमें मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान शामिल हैं।''
'प्रायर रेफरेंस कंट्री की श्रेणी में उन्हें रखा जाता है जिनसे भारत को खतरा है या खतरे की आशंका है। मुख्य रूप से इसमें वे देश हैं जिनकी सीमाएं भारतीय सीमा से लगती हैं। इसमें मुख्य रूप से पाकिस्तान और चीन हैं। उन्होंने राज्यों से भी इस दिशा में कदम उठाने को कहा।


सिंह ने यह बात ऐसे समय कही जब हाल में लद्दाख में सीमा विवाद के बीच भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए। उन्होंने कहा, ''काफी कुछ हमारे देश में बनता है लेकिन उसके बावजूद हम भारी मात्रा में बिजली उपकरणों का आयात कर रहे हैं। यह अब नहीं चलेगा। देश में 2018-19 में 71,000 करोड़ रुपये का बिजली उपकरणों का आयात हुआ,जिसमें चीन की हिस्सेदारी 21,000 करोड़ रुपए है।'' मंत्री ने यह भी कहा,'दूसरे देशों से भी उपकरण आयात होंगे,उनका देश की प्रयोगशालाओं में गहन परीक्षण होगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसमें 'मालवेयर और 'ट्रोजन होर्स का उपयोग तो नहीं हुआ है। उसी के बाद उसके उपयोग की अनुमति होगी।'' मालवेयर ऐसा साफ्टवेयर या प्रोग्राम होता है,जिससे फाइल या संबंधित उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं ट्रोजन होर्स मालवेयर सॉफ्टवेयर है जो देखने में तो उपयुक्त लगेगा लेकिन यह कंप्यूटर या दूसरे सॉफ्टवेयर को नुकसान पहुंचा सकता है। बिजली क्षेत्र में सुधारों का खाका रखते हुए उन्होंने कहा कि वितरण कंपनियां जब तक आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं होंगी, तब तक यह क्षेत्र व्यावहारिक नहीं होगा।

उन्होंने राज्यों से बिजली संशोधन विधेयक, 2020 को लेकर कुछ तबकों द्वारा फैलायी जा रही भ्रांतियों को आधारहीन करार दिया। कुछ तबकों में यह दावा किया जा रहा है कि इस संशोधित विधेयक के जरिये केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों को छीनना चाहती है। सिंह ने स्पष्ट किया कि केंद्र का कोई ऐसा इरादा नहीं है बल्कि सुधारों का मकसद क्षेत्र को टिकाऊ और उपभोक्ता केंद्रित बनाना है। सिंह ने यह भी कहा कि मंत्रालय दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना, एकीकृत बजली विकास योजना (आईपीडीएस) और उदय को मिलाकर नई योजना ला रहा है। उन्होंने कहा कि इस नई योजना में राज्य जितना चाहेंगे, उन्हें अनुदान और कर्ज के रूप में पैसा मिलेगा लेकिन उन्हें बिजली क्षेत्र में जरूरी सुधार करने होंगे ताकि वितरण कंपनियों की स्थिति मजबूत हो सके।

02-07-2020
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जाएगी

रायपुर। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन के लिए शिक्षण सत्र 2020-21 में रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। वर्तमान में राज्य में 42 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें से 25 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के लिए पद संरचना की स्वीकृति प्रशासकीय विभाग द्वारा जारी की जा चुकी है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास विभाग के सचिव डीडी सिंह ने यह जानकारी राज्य स्तरीय आदिम जाति कल्याण, आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति संचालक मंडल की बैठक में दी। संचालक मंडल की बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में पूर्व से संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय परिसर में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पोटर््स की स्थापना की जाएगी। इसके लिए सूरजपुर के भैय्याथान, राजनांदगांव और धमतरी जिले के नगरी के स्कूल का प्रस्ताव भेजा गया है। यह केन्द्र 5 करोड़ रूपए की लागत से स्थापित किया जाएगा। यहां भवन और खेल उपकरण, न्यूनतम एक व्यक्तिगत खेल एवं एक समूह खेल की सुविधा होगी। यहां स्टॉफ में कोच, मनोवैज्ञानिक, न्यूट्रीशनिस्ट इसके अतिरिक्त कम्यूनिटी खेल के लिए भी कोच होगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी लाभान्वित हो सकेंगे।


सचिव डीडी सिंह ने प्रदेश में निर्माणाधीन 9 आदर्श आवासीय विद्यालय भवनों का कार्य 15 अगस्त से पूर्व पूरा करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग के अधिकारी को दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण सत्र 2020-21 में नवीन प्रस्तावित 19 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। संचालक शम्मी आबिदी ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में 4 बालिका एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना का प्रस्ताव है। इसके लिए रायगढ़ जिले के विकासखण्ड घरघोड़ा के ग्राम छर्राटांगर, सूरजपुर जिले के विकासखण्ड प्रेमनगर के ग्राम पार्वतीपुर, सरगुजा जिले के विकासखण्ड बतौली के ग्राम शिवपुर और उत्तर बस्तर कांकेर जिले के विकासखण्ड नरहरपुर में बालिका विद्यालय की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की परीक्षा में इस वर्ष कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 98.03 प्रतिशत और कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 94.22 प्रतिशत रहा है। परीक्षा परिणाम के आंकलन के उपरांत उत्कृष्ट शिक्षक, विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा। बैठक में कोविड-19 के संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई को प्रोत्साहित करने के संबंध में चर्चा की गई।


बैठक में जानकारी दी गई कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय प्रवेश नीति 2020-21 में सीटों के आरक्षण में निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जनजाति के विशेष पिछड़ी जनजाति कमार, अबूझमाड़िया, पहाड़ी कोरबा, बिरहोर, बैगा, पण्डों और भुंजिया के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। अनुसूचित जनजाति के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। एकलव्य विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकतम दो बच्चों को डे-स्कालर के रूप में विद्यालय में अध्ययन की सुविधा प्रदान की जाएगी। गैर आदिवासी विद्यार्थियों के लिए कक्षा 6वीं में स्वीकृत सीट का 5 प्रतिशत स्थानीय समुदाय के बच्चों के लिए आरक्षित होगा (विद्यालय के निर्माण में भूमिदान एव अन्य विकास कार्य में सहयोग करने वाले परिवार), नक्सल प्रभावित परिवार के बच्चों को भी प्रवेश में प्राथमिकता मिलेगी।
बैठक में अपर सचिव वित्त सतीश पाण्डेय, स्कूल शिक्षा विभाग के अपर संचालक आरएस सिंह, महिला एवं बाल विकास की उपसचिव एफ केरकेट्टा, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग  डीके मिश्रा, प्राचार्य शिक्षा महाविद्यालय रायपुर जे.एक्का और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

02-07-2020
हरियर छत्तीसगढ़ योजना के तहत राज्य को हरा भरा बनाने के लिए स्टेडियम में किया गया पौधरोपण

रायपुर /मुंगेली। हरियर छत्तीसगढ़ योजना के तहत जिले को और अधिक हरा-भरा बनाने के लिए जिला  मुख्यालय मुंगेली के नवागढ़ रोड स्थित डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में वृहद मात्रा में पौधरोपण कर अभियान का आगाज किया गया। जिला पंचायत के अध्यक्ष लेखनी सोनू चंद्राकर और कलेक्टर पीएस एल्मा ने छायादार और आयुर्वेदिक औषधि से भरपूर नीम का पौधा रोपित कर अभियान की शुरूवात की। कलेक्टर एल्मा ने बताया कि जिले को और अधिक हरा-भरा बनाने के लिए मानसून के दौरान बड़ी संख्या मे फलदार और छायादार पौधे लगाये जाएगें। पौधे चिंहाकित क्षेत्रो, स्कूलो, आंगनबाडी केंद्रों और विभिन्न कार्यालयो के प्रांगण मे लगाये जाएंगे। उन्होंने बताया कि रोपित किये गये और रोपित किये जाने वाले पौधो की देखभाल और उनकी संरक्षण तथा संवर्धन करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रोपित किये गये पौधे बडे़ होकर पेड़ बनेगे और  हमें शुद्ध वायु आक्सीजन प्रदान करेगे। जिसे हमारे भावी पीढी भी याद करेंगे।  उन्होने पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए आम लोगो को भी बड़ी संख्या मे पौधा रोपण करने की सलाह दी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी लगभग 200 विभिन्न प्रजातियों के पौधो का रोपण कर वृहद पौधा रोपण अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।

 

01-07-2020
2 जुलाई को शैक्षणिक संस्थान के संचालक मंडल की बैठक

रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के राज्य स्तरीय आदिम जाति कल्याण आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति संचालक मंडल की बैठक 2 जुलाई को आयोजित की गई है। यह बैठक महानदी भवन मंत्रालय नवा रायपुर में दोपहर 12 बजे से होगी।

 

29-06-2020
प्रदेश में अब तक लक्ष्य का डेढ़ गुना के करीब संग्रहित हुआ साल बीज   

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में वर्तमान में साल बीज का संग्रहण जोरों पर है। चालू सीजन के दौरान अब तक लक्ष्य के डेढ़ गुना तक अर्थात् 58 करोड़ रुपए की राशि के 2 लाख 90 हजार 203 क्विंटल साल बीज का संग्रहण हो चुका है। इनमें केशकाल तथा गरियाबंद वनमंडल में अपने लक्ष्य के तिगुना से अधिक साल बीज का संग्रहण हो गया है। इस संबंध में प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ संजय शुक्ला ने बताया कि राज्य में चालू वर्ष के दौरान 2 लाख क्विंटल साल बीज के संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित है।  छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमें वनमंडलवार केशकाल में लक्ष्य 19 हजार क्विंटल के विरूद्ध 12 करोड़ 35 लाख रूपए की राशि के 61 हजार 740 क्विंटल और गरियाबंद में लक्ष्य 6 हजार क्विंटल के विरूद्ध 3 करोड़ 68 लाख रुपए के 18 हजार 404 क्विंटल साल बीज का संग्रहण हो चुका है। इसी तरह दक्षिण कोण्डागांव में 15 करोड़ रुपए के 75 हजार 147 क्विंटल, जगदलपुर में 10 करोड़ रुपए के 50 हजार 103 क्विंटल, पूर्व भानुप्रतापपुर में 3 करोड़ 84 लाख रुपए के 19 हजार 199 क्विंटल तथा धमतरी में दो करोड़ 62 लाख रुपए के 13 हजार 87 क्विंटल साल बीज का संग्रहण हो चुका है। 


वन मंडलवार जशपुर में 2 करोड़ 61 लाख रुपए के 13 हजार 61 क्विंटल, धरमजयगढ़ में एक करोड़ 69 लाख रुपए के 8 हजार 435 क्विंटल, कवर्धा में एक करोड़ 34 लाख रुपए के 6 हजार 696 क्विंटल तथा नारायणपुर में एक करोड़ 16 लाख रुपए के 5 हजार 792 क्विंटल साल बीज का संग्रहण किया गया है। कांकेर में 86 लाख रुपए के चार हजार 280 क्विंटल, कोरबा में 50 लाख रुपए के 2 हजार 480 क्विंटल, खैरागढ़ में 47 लाख रुपए के 2 हजार 360 क्विंटल, मरवाही में 36 लाख रुपए के एक हजार 806 क्विंटल, सुकमा में 35 लाख रुपए के एक हजार 785 क्विंटल साल बीज का संग्रहण हो चुका है। वन मंडलवार रायगढ़ में 28 लाख रुपए के 1 हजार 392 क्विंटल, सरगुजा में 18 लाख रुपए के 897 क्विंटल, पश्चिम भानुप्रतापपुर में 17 लाख रुपए के 861 क्विंटल कटघोरा में 13 लाख रुपए के 641 क्विंटल तथा बलौदाबाजार में 13 लाख रुपए के 635 क्विंटल साल बीज का संग्रहण हुआ है। बिलासपुर में 10 लाख रुपए के 519 क्विंटल, सूरजपुर में 8 लाख रुपए के 395 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 5 लाख रुपए के 244 क्विंटल, महासमुंद में दो लाख रुपए के 113 क्विंटल साल बीज का संग्रहण हो चुका है। कोरिया में 1 लाख 34 हजार रुपए के 67 क्विंटल तथा बलरामपुर में एक लाख 26 हजार रुपए के 63 क्विंटल साल बीज का संग्रहण हुआ है।

28-06-2020
भूपेश बघेल की देशभर के चार्टर्ड अकाउंटेंट से चर्चा, औद्योगिक नीति और राज्य की अर्थव्यवस्था पर मंथन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक नीति और प्रादेशिक अर्थव्यवस्था पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और देशभर के चार्टर्ड अकाउंटेंट मंथन कर रहे हैं। वेबिनार के माध्यम से यह चर्चा जारी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट का यह वेबिनार है। इसमें देशभर के चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हुए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ औद्योगिक गतिविधि को तेज करने के संबंध में चर्चा हो रही है। उद्योगोें की संभावनाओं और रोजगार के अवसर पैदा करने सहित कोरोना काल में आई चुनौतियों पर बात कर रहे हैं। वेबिनार में उद्योग और बिजनेस क्षेत्र के कई लोग मौजूद हैं।

26-06-2020
अजय चंद्राकर ने गोवंश और राज्य के प्रतीक चिन्ह का अपमान किया : आरपी सिंह 

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आरपी सिंह ने पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय से पूछा है कि आखिरकार भाजपा को गौमाता, सनातन हिंदू धर्म छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ की अस्मिता और छत्तीसगढ़ के राजकीय प्रतीक चिन्ह से इतनी नफरत क्यों है? भाजपा का असली चेहरा अजय चंद्राकर के दो ट्वीट आने के बाद बेनकाब हो गया है। उन्होंने गोवंश और छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतीक चिन्ह का अपमान किया है। प्र्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि छत्तीसगढ़ का राजकीय प्रतीक चिन्ह कोई सामान्य तस्वीर नहीं है बल्कि यह छत्तीसगढ़ की जनता के मान सम्मान और अस्मिता का प्रतीक है।

यह प्रतीक चिन्ह हमें हमारी सांस्कृतिक धरोहर, फसल उत्पादन, विद्युत उत्पादन और समृद्धि वनों की विरासत से जोड़ता है। छत्तीसगढ़ के राजकीय प्रतीक चिन्ह की तुलना गोबर से करके अजय चंद्राकर ने अपनी मानसिक स्थिति और भाजपा के विचारों को स्पष्ट उजागर कर दिया। देखना अब यह है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु देव साय क्या इसे गंभीरता से लेते हुए अजय चंद्राकर पर कोई कार्रवाई करेंगे या अपनी मौन सहमति प्रदान करेंगे। अब वक्त आ चुका है जब भाजपा तय कर ले या तो वह गौ माता सनातन हिंदू धर्म और छत्तीसगढ़ वासियों के पक्ष में है या खिलाफ।

25-06-2020
किसान मूल्य अध्यादेश को राज्य में लागू करने की मांग का कांग्रेस ने किया विरोध

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने किसानों के लिए केंद्र की ओर से लाए गए किसान मूल्य अध्यादेश को राज्य में लागू करने मांग की थी। इस मांग का कांग्रेस ने विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि मोदी को खुश करने रमन किसान विरोधी अध्यादेश लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस अध्यादेश को लागू करने की मांग की अकुलाहट से एक बार फिर से भाजपा और रमन सिंह का किसान विरोधी चेहरा सामने आया है। केंद्र सरकार का अध्यादेश किसान मूल्य आश्वासन और खेत पर समझौता सेवाएं अध्यादेश मूलत: किसान विरोधी है। यह अध्यादेश बिचौलियों और मुनाफाखोरों को प्रोत्साहन देने वाला है। इस अध्यादेश से मंडी व्यवस्था नष्ट  हो जाएगी। शुक्ला ने कहा है कि मंडी में किसानों को उनके उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने को सुनिश्चित करने का प्रावधान है। मंडी में पंजीकृत व्यापारी ही किसानों से उनकी उपज खरीद सकते हैं। नए अध्यादेश में कोई भी पेनकार्डधारी व्यक्ति किसान से खरीदी कर सकता है। इस  अध्यादेश के बाद किसान को उसके उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए कोई भी प्रावधान नहीं है।

इस परिस्थिति में किसान शोषण का शिकार होंगे। यह किसानों को बाजार के जोखिम के अधीन सौपने की साजिश है। कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला आरोप लगाया है कि इस अध्यादेश के साथ ही लाया गया दूसरा अध्यादेश तो छोटे मंझोले किसानों को बर्बाद कर बड़े कॉरपेट सेक्टर को खेत ठेके में सौंपने का षड्यंत्र है। नए कानून में कंपनिया किसानों से उनके खेत ठेके पर लेकर खेती कर सकेंगी। किसानों से ठेके पर खेत लेने वाली कंपनिया किसानों को बराबर का पार्टनर रखेगी। उनको मुनाफे का बराबर हिस्सा देगी। इस भागीदारी पर अध्यादेश मौन है। इस कानून के माध्यम से किसानों को उनकी ही जमीनों पर मजदूर बनाने की तैयारी की जा रही है। भाजपा और मोदी ने वायदा तो 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने का किया था, लेकिन हकीकत में किसानों को उनके खेती किसानी से बेदखल करने के लिए कानून बना रहे हैं।

 

25-06-2020
जून महीने में अब तक हुई 247.7 मिमी वर्षा

रायपुर। राज्य में अब तक जून महीने में 247.7 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। 25 जून की सुबह तक औसत 4 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। यह जानकारी राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम ने दी है। कंट्रोल रूम के मुताबिक राज्य में 1 जून से अब तक कुल 247.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार सूरजपुर में 0.3 मिमी, कोरिया में 1.0 मिमी, गरियाबंद में 4.5 मिमी, महासमुन्द में 1.2 मिमी, धमतरी में 1.1 मिमी, बिलासपुर में 0.2 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। इसी तरह गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही में 1.5 मिमी, बालोद में 0.4 मिमी, कोण्डागांव में 1.0 मिमी, कांकेर में 0.5 मिमी, तथा दंतेवाड़ा में 0.3 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड हुई है।

24-06-2020
निराश्रितों व अन्य राज्यों से आये श्रमिकों को निशुल्क भोजन व खाद्यान्न पैकेट वितरण जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशानुरूप राज्य के सभी जिलों में गरीबों, अन्य स्थानों के श्रमिकों और निराश्रित लोगों को निःशुल्क भोजन व खाद्यान्न पैकेट उपलब्ध कराए जाने का सिलसिला जारी है। कोरोना संक्रमण के कारण लॉक डाउन के कारण जरूरतमंदों की मदद के लिए राज्य भर में जगह-जगह लगाए गए राहत शिविरों में 23 जून को 55 हजार 191 जरूरतमंदों, श्रमिकों एवं निराश्रितों को निःशुल्क भोजन एवं खाद्यान्न पैकेट उपलब्ध कराया गया। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए मास्क, सैनिटाइजर एवं दैनिक जरूरत का सामान भी जिला प्रशासन, रेडक्रॉस तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की सहयोग से जरूरतमंदों को लगातार मुहैया कराया जा रहा हैं। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 23 जून को स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से 1363 मास्क व सैनिटाइजर, साबुन आदि का वितरण जरूरतमंदों को किया गया है।

यह उल्लेखनीय है कि जिलों में प्रशासन ने समाजसेवी संस्थाओं एवं दानदाताओं के सहयोग से संचालित राहत शिविरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक 1 करोड़ 4 लाख 23 हजार 476 लोगों को निःशुल्क भोजन और खाद्यान्न पैकेट उपलब्ध कराया है। स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से कोरोना संक्रमण के बचाव के लिए अब तक 49 लाख 76 हजार 888 मास्क सैनिटाइजर एवं अन्य सामग्री का निःशुल्क वितरण जन सामान्य को किया गया है। प्रदेश में 23 जून को शासन एवं समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से बिलासपुर जिले में सर्वाधिक 13,799 लोगों को निःशुल्क भोजन और राशन प्रदाय किए जाने के साथ ही उन्हें कोरोना संक्रामक बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए मास्क व अन्य सामग्री का वितरण किया गया है। इसी तरह सुकमा जिले में 732, राजनांदगांव जिले में 274, रायगढ़ में 7975, बस्तर में 11,751, कांकेर में 1066, बीजापुर में 240, जशपुर में 8924, कोरिया में 84, बालोद में 54, कबीरधाम में 3310, बलौदाबाजार में 95, धमतरी में 1194, महासमुंद में 2409, बलरामपुर में 2850, कोरबा में 452, रायपुर में 118, कोण्डागांव में 607 तथा गरियाबंद में 2620 जरूरतमंदों को राशन और अन्य सहायता उपलब्ध करायी गई हैं।

24-06-2020
मिर्च की खेती को बढ़ावा : मिर्च प्रोसेसिंग यूनिट लगाने 55 लाख रुपए की स्वीकृति

रायपुर। राज्य में किसानों को ज्यादा लाभदायक फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के ग्राम लोरो में मिर्च की खेती को बढ़ावा देने के लिए मिर्च प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया जा रहा है। जशपुर कलेक्टर द्वारा मिर्च प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 55 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। यूनिट लग जाने से मिर्च की खेती को बढ़ावा मिलेगा। प्रोसेसिंग यूनिट लगने से किसानों को इसका सार्थक लाभ सीधे मिलेगा। सन्ना क्षेत्र में किसान मिर्च की अच्छी फसल लेते हैं। जिला प्रशासन द्वारा मिर्च की खेती को और अधिक बढ़ावा देने के लिए किसानों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया जा रहा है।

खेती को बढ़ावा देने के लिए मिर्च प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया जा रहा है। जशपुर कलेक्टर द्वारा मिर्च प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 55 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। यूनिट लग जाने से मिर्च की खेती को बढ़ावा मिलेगा। प्रोसेसिंग यूनिट लगने से किसानों को इसका सार्थक लाभ सीधे मिलेगा। सन्ना क्षेत्र में किसान मिर्च की अच्छी फसल लेते हैं। जिला प्रशासन द्वारा मिर्च की खेती को और अधिक बढ़ावा देने के लिए किसानों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया जा रहा है।

19-06-2020
तीन बाल विवाह रोके महिला व बाल विकास,चाइल्ड लाइन और पुलिस की संयुक्त टीम ने

रायपुर/सूरजपुर।  समाज में कई बुराइयां हैं,जिनमें से एक बाल विवाह भी है। महिला बाल विकास विभाग राज्य में सक्रिय रूप से बाल विवाह रोककर नाबालिग बच्चों का जीवन बचाने में लगा है। सूरजपुर जिले में विभाग की संयुक्त टीम की सक्रियता से एक दिन में तीन बाल विवाह रोकने में सफलता मिली है। टीम में महिला एवं बाल विकास,चाइल्ड लाइन,पुलिस विभाग के अधिकारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल थे। उन्होंने कल्याणपुर गांव की कक्षा नवमी की नाबालिग छात्रा सहित नकना और तिवरागुड़ी गांव में एक बालक और एक बालिका का बाल विवाह रूकवाया।जिला कार्यक्रम अधिकारी मुक्तानंद खुटे ने बताया कि उन्होंने बाल विवाह की जानकारी लगते ही संयुक्त टीम को रवाना किया। कल्याणपुर गांव में कक्षा 9वीं में अध्ययरत 17 वर्ष 10 माह  वर्षीय बालिका की बारात आने ही वाली थी। परिवार को समझाइश देकर विवाह रुकवाया गया और बारात को तत्काल रास्ते से ही वापस किया गया। इसी तरह जानकारी मिली कि जिले के ग्राम नकना और तिवरागुड़ी में एक बालक और बालिका के विवाह के अनुमति के लिए आवेदन लगाया गया था। अनुमति नहीं मिलने के बावजूद दोंनो विवाह कराए जा रहे हैं। संयुक्त टीम पहले नकना गई और वहां 20 वर्ष 10 माह के लड़के का विवाह किया जा रहा था। परिवारजन को समझाया गया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अन्तर्गत यह विवाह अपराध की श्रेणी में आता है,क्योंकि वर ने विवाह के लिए निर्धारित 21 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। साथ ही  कोरोना संक्रमण के दौरान बिना अनुमति के विवाह किया जा रहा है। इस पर परिवार पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। समझाईश पर पारिवारिक सदस्य विवाह को स्थगित करने के लिए मान गये।संयुक्त टीम उमापुर पण्डरीपानी, तिवरागुड़ी भी पहुंची। यहां एक 17 वर्षीय बालिका केे विवाह की तैयारी चल रही थी। मध्यप्रदेश के सीधी निवासी वर पक्ष से बात करने पर पता चला कि 19 जून को वे सीधी से बारात लेकर विवाह के लिए छत्तीसगढ़ आने वाले हैं। इसे देखते हुए बालिका समेत उसके पिता,चाचा अन्य सदस्यों को समझाया गया। बालिका की कम उम्र होने के कारण उन्हें विवाह की अनुमति भी नहीं मिली थी। टीम के सदस्य परिवार को विवाह स्थगित करने के लिए तैयार करने के साथ ही वर पक्ष को भी मोबाइल के माध्यम से जानकारी देते हुए समझाकर बाल विवाह रोकने में सफल रहे।

 

 

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