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11-02-2020
 स्वास्थ्य सचिव ने किया जिला अस्पताल का  निरीक्षण

रायपुर। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक ने जिला अस्पताल पंडरी का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान मिशन संचालक डॉ प्रियंका शुक्ला भी मौजूद रही। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से बात की और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी ली।  स्वास्थ्य सचिव ने जिला अस्पताल में चल रही गतिविधियों का बरीकी से अवलोकन किया। उन्होंने तीन माह पूर्व घुटने का ऑपरेशन हुए मरीज जावेद खान से बातचीत की और अस्पताल प्रबंधन द्वारा किए जा रहे उपचार और सुविधाओं की भी जानकारी ली। लाभार्थी जावेद खान ने अस्पताल प्रबंधन द्वारा नियमित रूप से किये  जा रहे उपचार की सराहना और प्राप्त होने वाली सुविधाओं की भी जानकारी स्वास्थ्य सचिव को दी ।इस दौरान सिविल सर्जन डॉ रवि तिवारी और अन्य स्टाफ भी मौजूद थे ।
स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक सिंह ने सिविल सर्जन रवि तिवारी को निर्देश दिया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन होना चाहिए। उन्होंने कहा सूचना शिक्षा संचार(आईईसी) का बेहतर रूप से प्रयोग किया जाना चाहिए । ओपीडी में आए मरीजों की संपूर्ण जांच की जाए और एनसीडी के तहत आने वाले रोगियों की नियमित जांच और जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा टीकाकरण के लिए आए बच्चों के खेल स्थल और परिसर की साफ सफाई अच्छे से रखी जानी चाहिए। स्वास्थ्य सचिव ने कहा व्यवस्था में कोई भी कमी होती है तो विभाग को तुरंत अवगत करवाया जाए । 
 

06-02-2020
छह माह के बच्चे के पेट में मिला भ्रूण, डॉक्टर भी रह गए दंग

नई दिल्ली। बक्सर जिले के अरियांव गांव निवासी मोइनुद्दीन के छह माह के पुत्र इरफान के पेट में जन्म के बाद से ही दर्द रहता था। बच्चें को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ले जाया गया। शिशु विभाग के 15 डॉक्टरों की टीम ने दो घंटे के दुर्लभ ऑपरेशन के बाद सफलता प्राप्त की। छह माह के बच्चे के पेट से साढ़े तीन माह का डेढ़ किलो का भ्रूण निकला है। 
डॉक्टरों ने बताया कि भ्रूण का पेट, हाथ व सिर विकसित था लेकिन धड़कन नहीं चल रही थी। यदि कुछ दिनों तक और भ्रूण बच्चे के पेट में रहता तो उसकी जान तक जा सकती थी। कभी-कभी गर्भवती महिला के पेट में जुड़वा गर्भ होने की संभावना होती है। ऐसे में एक शिशु विकसित हो पाता है और दूसरा शिशु पहले शिशु के पेट में कैद हो जाता है। 
मोइनुद्दीन ने बताया कि सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज कराकर परेशान हो गया, लेकिन किसी ने इतने छोटे बच्चे की सर्जरी करने की जोखिम नहीं उठाया। इसके बाद किसी ने पीएमसीएच में इलाज कराने की बात कही। उसके पेट में हरदम दर्द रहता था और लगातार पेट फूलता जा रहा था। 20 जनवरी को परिजन इलाज के लिए उसे पीएमसीएच में भर्ती कराया। जांच रिपोर्ट में पेट में भ्रूण निकला तो डॉक्टर भी दंग रह गए। यहां पर बुधवार को बच्चे का ऑपरेशन हुआ है।  

01-02-2020
डीजीपी अवस्थी ने एमएमसी जोन की ली बैठक, नक्सलियों के विरुद्ध तेज ऑपरेशन चलाने के  दिये निर्देश

रायपुर। डीजीपी डीएम अवस्थी ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय में एमएमसी जोन (महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़) के नक्सल विरोधी अभियान की समीक्षा की। एमएमसी जोन में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, कवर्धा, मध्यप्रदेश के बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, महाराष्ट्र के भंडारा, गोंदिया, नागपुर और गढ़चिरौली जिलों की सीमाओं में नक्सली विरोधी अभियान की समीक्षा की गई। डीएम अवस्थी ने राजनांदगांव और कवर्धा के पुलिस अधिकारियों से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से लगे इलाकों में नक्सली मूवमेंट की जानकारी ली। उन्होंने आईजी और राजनांदगांव, कवर्धा पुलिस अधीक्षक को आगामी 5 माह की नक्सल विरोधी रणनीति बनाने के निर्देश दिये। डीजीपी अवस्थी ने निर्देश दिये कि राजनांदगांव में आईटीबीपी और जिला फोर्स की मदद से, कवर्धा में छत्तीसगढ एसटीएफ, सशस्त्र बल और जिला बल के माध्यम से तेज ऑपरेशन चलाया जाए। डीजीपी ने कहा कि आज की बैठक के एक सप्ताह बाद वे स्वयं राजनांदगांव और कवर्धा में बैठक लेकर निर्देशों के परिपालन में ऑपरेशन की रणनीति की समीक्षा करेंगे।  डीजीपी अवस्थी ने नक्सलियों के विरुद्ध तेज ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिये। बैठक में आईजी विवेकानंद, ज्वाइंट डायरेक्टर आईबी जयदीप सिंह, कवर्धा, राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक और एसआईबी के अधिकारी उपस्थित रहे।

 

05-01-2020
निशुल्क नेत्र शिविर में 200 लोगों की हुई आंखों की जांच

गुना। रोटरी भवन में निशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। इसमें 200 मरीजों की आंखों की जांच कराई गई, जिसमें 85 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन होगा। शिविर का शुभारंभ रोटरी क्लब के सदस्यों किया गया। विकास जैन नखराली ने बताया कि रोटरी भवन गुना में रविवार सुबह 10 बजे निशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। इसमें सद्गुरु सेवा संघ के चिकित्सक डॉ.समीक्षा जैन एवं नेत्र सहायक देवेंद्र शर्मा द्वारा आधुनिक मशीनों से मरीजों की जांच की गई। जांच के दौरान 200 से अधिक मरीजों का का परीक्षण हुआ। इसमें 85 मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिन्नर सद्गुरु सेवा संघ नेत्र चिकित्सालय लटेरी बस द्वारा भेजा गया। 100 मरीजों को निशुल्क दवाई दी गई। इस मौके पर रोटरी क्लब के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

 

राकेश किरार की रिपोर्ट 

 

31-12-2019
जनरल बिपिन रावत ने मनोज मुकुंद नरवाने को सौंपी थल सेना की कमान

नई दिल्ली। देश के नए थल सेना प्रमुख के रूप में मंगलवार को जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने कमान संभाल ली है। पूर्व सेना प्रमुख बिपिन रावत ने उन्हें सेना की कमान सौंप दी है। एम एन नरवाने देश के 28वें सेना प्रमुख होंगे और अगले तीन साल तक इस पद पर बने रहेंगे। नरवाने 59 साल के हैं। वहीं जनरल बिपिन रावत 65 साल की उम्र तक देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस होंगे।

नरवाणे आतंक विरोधी अभियानों और चीन मामलों के एक्सपर्ट

एमएम नरवाने सेना में शौर्य और समर्पण के लिए, परम विशिष्ठ सेवा मेडल, अति विशिष्ठ सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ठ सेवा मेडल से सम्मानित हैं। 39 साल की गौरवमयी सेवा के बाद मनोज मुकुंद नरवाने आज भारतीय थल सेना के शिखर पर पहुंच गए हैं। जून 1980 में सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट की सातवीं बटालियन से नौकरी की शुरुआत करने वाले नरवाने को आतंक विरोधी अभियानों और चीन मामलों का एक्सपर्ट माना जाता है।

डोकलाम-आतंकवा से निपटना बड़ी चुनौती

नरवाने को पूर्वोत्तर भारत और जम्मू-कश्मीर के अशांत क्षेत्रों में काम करने का लंबा अनुभव है। ये श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ भारतीय सेना के ऑपरेशन पवन का भी हिस्सा रह चुके हैं। इन्होंने म्यामांर में भारत के डिफेंस अताचे के तौर पर काम किया है। आनेवाले वक्त में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और डोकलाम जैसी चीन की चालबाजियों से निपटना इनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। सर्विस रूल्स के मुताबिक, सेनाध्यक्ष तीन साल या 62 साल की उम्र तक अपने पद पर बना रह सकता है, जबकि तीन स्टार प्राप्त जनरल (लेफ्टिनेंट जनरल, एयर मार्शल और वाइस एडमिरल) 60 साल की उम्र होने पर रिटायर हो जाते हैं।

15-12-2019
एमपी के ऑपरेशन क्लीन की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में कब चलेगा भूमाफिया के खिलाफ अभियान

रायपुर। मध्यप्रदेश के इंदौर में भूमाफियाओं के खिलाफ ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बड़े-बड़े भूमाफिया अब वहां से भागते फिर रहे हैं। पुलिस धड़ाधड़ एफआईआर दर्ज कर रही है। इंदौर पुलिस ने एक ही दिन में 13 एफआई आरदर्ज की है। और तीन भूमाफिया को गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस आरोपियों के पॉलिटिकल कनेक्शन को भी तलाश रही है। अवैध होटल रेस्टोरेंट बार इनके खिलाफ भी अभियान चला रही है इंदौर पुलिस। पड़ोसी और छत्तीसगढ़ के मूल राज्य मध्यप्रदेश में हो रही कार्यवाही पर यहां की जनता की भी नजर है। उन्हें आस है कि इस तरह की कार्रवाई छत्तीसगढ़ में भी जल्द होगी। छत्तीसगढ़ में भू माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात भाजपा सरकार में लगातार होती रही लेकिन कार्रवाई कभी नहीं हुई। सरकार बदलने के बाद भूमाफिया से पीड़ित लोगों में उम्मीद जागी है कि भूमाफिया अब बच नहीं पाएंगे। आज भी धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग और अवैध कॉलोनाइजिंग का काम शुरू है। बड़े-बड़े भूमाफिया जिनके खिलाफ एक नहीं कई प्रकरण दर्ज है मजे से घूम रहे हैं। और एक इंदौर पुलिस है, जिसने एक ही दिन में तीन भूमाफिया शिवनारायण बब्बू और हेमन्त को दमदारी से गिरफ्तार कर लिया। ऐसी ही कार्रवाई यहां भूमाफिया से पीड़ित लोग चाह रहे हैं। देखना होगा यहां की पुलिस और प्रशासन कब जागता है। और भूमाफिया के मकड़जाल में फंसे आम उपभोक्ताओं को कब बचाता है।

01-12-2019
मध्यप्रदेश : नसबंदी के बाद महिलाओं को लिटाया जमीन पर, नहीं मिली स्ट्रेचर,एंबुलेंस की सुविधा

भोपाल। मध्यप्रदेश के छतरपुर में सरकारी अस्पतालों में नसबंदी सर्जरी के बाद मरीजों को फर्श पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिन महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन हुआ, उन्हें ऑपरेशन के बाद अस्पताल में बेड तक नहीं मिला। इसके कारण महिला मरीजों को बेड के बजाय जमीन पर लिटा दिया गया। नसबंदी करवाने आईं महिलाओं के लिए एंबुलेंस तक सुविधा नहीं थी, वो अपने खर्चे पर अस्पताल पहुंची थीं। इलाज के बाद मरीजों को स्ट्रेचर भी नहीं मिला, जिसकी कारण उन्हें परिवार के लोग हाथों में उठाकर बाहर लेकर गए।

इसको लेकर सिविल सर्जन से पूछा गया तो उन्होंने कहा,'प्रतिदिन नसबंदी के लगभग 30 मामले हैं। बिस्तर की सुविधा प्रदान करने के लिए, हमें बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है। विदिशा में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। विदिशा के लेटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी शिविर में अस्पताल के बेड की बजाय महिलाओं को फर्श पर पड़ा देखा गया। नसबंदी के बाद महिलाओं को ठंड के इस मौसम में जमीन पर ही लेटा दिया गया। इस पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. केएस अहिरवार का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

12-11-2019
सवा साल का मासूम सयांश अब हो रहा सुपोषित...

धमतरी। ग्राम पंचायत बोड़रा निवासी कृषक चंदन साहू एवं रजनी साहू के सवा साल के पुत्र सयांश अब सुपोषित होने की ओर अग्रसर है। सयांश के जन्म के समय में उसका वजन सामान्य था। जन्म के बाद उसका तालू कटा होने की वजह से स्तनपान करने में कठिनाई होने लगी और सयांश का वजन अपेक्षाकृत नहीं बढ़ा। आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक-02 बोड़रा की कार्यकर्ता सविता साहू द्वारा गृहभेंट कर वजन माप लिया गया, तब पता चला कि सयांश का वजन जन्म की अपेक्षा कम होता जा रहा है। अस्पताल में इलाज कराने पर पता चला कि सयांश का तालू कटा है, जिसकी वजह से वह स्तनपान नहीं कर पा रहा और उसका वजन दिन-ब-दिन कम होता जा रहा था। साथ ही उसे उल्टी-दस्त की शिकायत भी होने लगी। इसके बाद सयांश को जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में भी भर्ती कराया गया। कटे तालू के लिए चिरायु दल द्वारा शिविर लगाकर ऑपरेशन के लिए चिन्हांकन किया गया तथा सयांश का वजन आठ किलोग्राम होने के बाद ऑपरेशन करने की बात कही गई। 

प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण योजना शुरू कर जहां कुपोषित बच्चों, गर्भवती और शिशुवती माताओं को अण्डा, दूध सहित गर्म पका भोजन दिए जाने की कवायद की जा रही है। वहीं जिले के ग्राम पंचायत बोड़रा की सरपंच फुलवा बाई द्वारा कुपोषित मासूम सयांश को गोद लेकर उसे सुपोषित करने के उद्देश्य से 12 सितंबर से प्रतिदिन एक लीटर दूध दिया जा रहा है। इससे सयांश का वजन 4.7 ग्राम से बढ़कर अब 5.3 हो गया है। उनके द्वारा यह दूध छः माह तक दिया जाएगा।
ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत बोड़रा में तीन आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं,जिसमें से केन्द्र क्रमांक-01 रेड केन्द्र है। यहां 12 से अधिक कुपोषित बच्चे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के तहत इसे रेड केन्द्र कहा गया है। यहां 3-6 वर्ष तक के 13 बच्चे दर्ज हैं, जिसमें से 7 मध्यम कुपोषित हैं। इसी तरह 8 गर्भवती और 7 शिशुवती माताएं दर्ज हैं। इस केन्द्र को यथासंभव पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा गोद लिया गया है तथा पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा लड्डू बनाने की सामग्री और चना-मूंग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू होने के पहले महिलाएं आंगनबाड़ी केन्द्र में खाना खाने आने में रूचि नहीं लेती थीं, किन्तु खाने में अण्डा दिए जाने के बाद केन्द्र में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ी है। इसी तरह बच्चों में भी परिवर्तन आया है। दो बच्चे मध्यम कुपोषण से सामान्य में आए हैं, वहीं तीन बच्चों के वजन में परिवर्तन आया है। वासिनी का वजन 9.3 से 9.9 किलोग्राम, राजकुमार का वजन 12 से 12.5 और भामिनी का वजन 9.4 ये 9.8 हो गया है। शेष बच्चों के वजन में भी 200 से 300 ग्राम की बढ़ोत्तरी हुई है। 

 

08-11-2019
छह माह के शिशु का लीवर ट्रांसप्लांट चुनौती था, मिली सफलता : डॉ. स्वप्निल शर्मा

रायपुर। लीवर ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। बात जब 6 माह के शिशु के लीवर ट्रांसप्लांट की बात हो तो यह ऑपरेशन किसी चुनौती से कम नहीं है। रायपुर के कुंदु परिवार में कोलकाता में जन्मे पीयूष को बिलारी अत्रेसिया (पित्त संबंधी समस्या थी) कोलकाता, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक के अस्पताल में भी बच्चे के माता-पिता को जांच के उपरांत बच्चे की बीमारी का हल नहीं मिला। मुंबई में फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंद में छत्तीसगढ़ के निवासी डॉ. स्वप्निल शर्मा ने जांच के उपरांत उक्त शिशु के आपरेशन को चुनौती मानते हुए इलाज शुरू किया। 12 से 14 घंटे तक चलने वाले उक्त आपरेशन में अंतत: उन्हें सफलता मिली। उक्त सफलता की जानकारी उन्होंने रायपुर प्रेसक्लब पहुंचकर पत्रकारवार्ता में मीडिया से साझा की।

डॉ. शर्मा ने बताया कि उक्त ऑपरेशन के दौरान शिशु के पेट में भरे पानी को निकालकर अन्य स्थितियों को सकारात्मक बनाने में उन्हें अपनी शल्य क्रिया के दौरान अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ी। उक्त आपरेशन में उनके सहयोगी डॉ. गौरव गुप्ता, कन्सल्टेंट लीवर ट्रांसप्लांट एंड एचबीपी सर्जरी ने और उनकी टीम ने बच्चे की नानी के लीवर का कुछ हिस्सा निकालकर पीयूष के लीवर में जोड़ा। उक्त आपरेशन में साढ़े सोलह लाख की लागत आती है। तीस प्रतिशत की छूट के उपरांत बच्चे के माता पिता ने जनसहयोग से तीस लाख रूपए की राशि बच्चे के इलाज में व्यय की। उन्होंने बताया कि रायपुर हर महीने के दूसरे शनिवार को साहू डायग्नॉस्टिक सेंटर फरिश्ता काम्पलेक्स में आते हैं। 9 नवंबर 14 दिसंबर एवं 11 जनवरी को वे उक्त संस्थान में सुबह 11 से 2 बजे एवं शाम को 4 बजे से 6 बजे के मध्य मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहेंगे।

09-10-2019
लिंग परिवर्तन के बाद ट्रांसजेंडर की मौत, परिवार ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप

 

रायपुर। राजधानी के डीकेएस सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल में ट्रांसजेडर की मौत का मामला सामने आया है। एक वर्ष पूर्व लिंग परिवर्तन के बाद लड़की बनने वाले ट्रांसजेंडर की डीकेएस में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है तो वहीं डीकेएस के डॉक्टर इसे लापरवाही नहीं मान रहे हैं। परिजनों का कहना है कि मृतका को भूखा रखकर ऑपरेशन किया और अगले ही दिन उसकी मौत हो गई। वहीं डॉक्टर ने कहा कि मृतका का एक वर्ष पूर्व ऑपरेशन हुआ था और इंफेक्शन के कारण उसकी मौत हुई इसमें डॉक्टर की कोई लापरवाही नहीं है। फिलहाल दो दिनों से शव मेकाहारा के चीरघर में है और अब तक परिजनों को शव नहीं सौंपा गया है। बताया गया कि 30 वर्षीया माया नारायण बिलासपुर निवासी थी। 10 माह पूर्व अगस्त 2018 में उसने लिंग परिवर्तन कराया था। ऑपरेशन के बाद वह स्वस्थ तो थी लेकिन कुछ महीने बाद उसकी तबीयत बिगडऩे लगी। कुछ दिनों पूर्व उसे रायपुर के डीकेएस अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 7 अक्टूबर की रात उसकी मौत हो गई। आज दो दिन बीत जाने के बाद भी उसका शव परिजनों को नहीं सौंपा गया है। बिलासपुर से आया परिवार अंबेडकर अस्पताल में चीरघर के सामने शव के इंतजार में बैठा है।

मृतका माया की मां मधुलता ने घटना के बारे में जानकारी दी। मधुलता ने कहा कि हम यहां माया का जेंडर चेंज कराने आए थे जिस पर डॉक्टर ने चेंज हो जाने का आश्वासन दिया। जेंडर चेंज होने के बाद उसके चेकअप के लिए हम लगातार आते थे। ऑपरेशन के छह महीने बाद 12 अगस्त को हम वापस डीकेएस आए। उसके बाद 17 तारीख से बच्ची के खत्म होने तक खाना बंद था। इसके बाद फिर ऑपरेशन हुआ जिसके पूर्व पेट का पानी खाली नहीं करने का आरोप मधुलता ने लगाया है।  मधुलता ने आगे कहा कि बाद में पेट से पानी निकल रहा था। हम लोग अच्छी लड़की लेकर आए थे जो यहां गंभीर हो गई। इसके बाद जब उसकी हालत ज्यादा खराब होने लगी तो डॉक्टर हड़बड़ा गए। डॉ गोयनका ने हमसे ऑपरेशन की बात की। इसके बाद 6 अक्टूबर को डॉक्टर ने माया का बड़ा ऑपरेशन किया और 7 अक्टूबर को माया की मौत की खबर डॉक्टर ने हमें दी। मधुलता ने कहा कि उनकी बेटी आईएएस की तैयारी कर रही थी। अब उसका सपना उसी के साथ चला गया। मेरी बच्ची का शव तक नहीं सौंपा जा रहा है।



परिजनों की मदद के लिए पहुंची थीं मितवा समिति की रवीना
किन्नरों के अधिकारों के लिए काम करने वाली मितवा समिति की रवीना ने ग्लिब्स से कहा कि माया का पिछले साल दिसंबर में सेक्स चेंज ऑपरेशन हुआ था। सेक्स चेंज ऑपरेशन होने के बाद कॉम्प्लीकेशन आते हैं। जिसके बाद हमें फॉलोअप करना होता है। हमने डॉक्टर से बात की तो डॉक्टर का कहना है कि मरीज फॉलोअप में नहीं आ रही थी। जबकि हमारा मानना है माया बहुत जागरूक थी और फॉलोअप में आती थी। हमें लगता है कि डॉक्टर की लापरवाही का केस है। हम मेडिकल रिपोर्ट को इंडिया लेवल के किसी बड़े एक्सपर्ट से दिखाएंगे और कहीं भी गलती हुई है तो प्रशासन से मांग करेंगे और डॉक्टर को सस्पेंड कराएंगे।

मामले में अस्पताल का पक्ष रखते हुए डीकेएस के डॉक्टर हेमंत शर्मा ने कहा कि बिलासपुर की रहने वाला माया नारायण ने सर्जरी कराई थी। सर्जरी 14 दिसंबर 2018 को हुई थी। माया की सर्जरी डॉक्टर दक्षेश शाह ने की थी। वे काफी लम्बे समय से सेवाएं दे रहे हैं। उनकी विगत सभी सर्जरी सक्सेस रही है। रविवार को एमएस सर्जन, प्लास्टिक सर्जन और यूरो सर्जन ने मिलकर माया की सर्जरी की थी। सर्जरी के दौरान पता चला कि उसे इन्फैक्शन था जिससे वह सेप्टिक में चली गई थी। इसके बाद हार्ट फेल होने के कारण उसकी मौत हो गई। ऐसा कहा जाना कि उसमें लापरवाही हुई है ऐसा नहीं है। हमारे डॉक्टर अच्छी से अच्छी सेवाएं देते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

21-09-2019
एक ग्राम की मछली को हुआ ट्यूमर, मालिक ने ऑपरेशन में खर्च किये नौ हजार

नई दिल्ली। इंग्लैंड के ब्रिस्टस स्थित वेट्स वेटरनरी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक ऐसी मछली के पेट से ट्यूमर निकाला है, जिसका वजन मात्र एक ग्राम था। लगभग 40 मिनट तक चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने ट्यूमर को निकाल दिया। इसी के साथ ये मछली सर्जरी कराने वाली दुनिया की सबसे छोटी मरीज बन गई है। यह मछली मोली प्रजाति की गोल्ड फिश है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस छोटी मछली की कीमत महज 89 रुपये है, लेकिन इसके ऑपरेशन में लगभग 9000 रुपये खर्च हुए। इस मछली का जिस अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, उसमें इससे पहले गिरगिट, छिपकली, सांप और मगरमच्छ जैसे जीवों की भी सर्जरी हो चुकी है। अस्पताल में काम करने वाली सोन्या माइल्स के मुताबिक, इस गोल्ड फिश के मालिक को उसके पड़ोसी ने कुछ हफ्ते पहले ही उसे तोहफे में दिया था। पहले तो सब ठीक लगा, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही मछली के पेट के निचले हिस्से में एक गांठ बन गया। इसके बाद उसका मालिक उसे लेकर अस्पताल पहुंचा, जहां तत्काल उसका ऑपरेशन किया गया। सोन्या माइल्स ने ऑपरेशन के बारे में बताते हुए कहा कि पहले मछली को एक कंटेनर में डाल दिया गया। उसके बाद जब वो शांत हो गई तो उसे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया और पेट में मौजूद ट्यूमर को मुंह की नली से निकाल दिया गया। इसके बाद उसके पेट को वाटरप्रूफ पेस्ट से बंद कर दिया गया और कुछ देर के बाद उसे ऑक्सीजन युक्त पानी में डाल दिया गया। सबकुछ ठीक-ठाक रहने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। 

 

 

16-09-2019
18 सितंबर तक जारी रहेगा संपूर्ण नेत्र सुरक्षा अभियान, गांवो में किया जा रहा मरीजों का पंजीयन

कोंडागांव। संपूर्ण नेत्र सुरक्षा अभियान जिले के विकासखंड केशकाल में दिनांक 11 सितंबर 2019 से 18 सितंबर 2019 तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत नेत्र विकारों से ग्रसित मरीजों को घर-घर जाकर पता किया जा रहा है। इस अभियान मे जिले के समस्त नेत्र सहायक अधिकारीयो द्वारा विकासखंड केशकाल के प्रत्येक गांव में भ्रमण कर स्वास्थ्य संयोजक एवं मितानिनो के सहयोग से विभिन्न नेत्र विकारों के मरीजों का सर्वेक्षण परीक्षण एवं पंजीयन का कार्य किया जा रहा है। नेत्र सहायक अधिकारी अनिल वैद्य द्वारा बताया गया कि ग्राम भ्रमण के दौरान दोनों आंखों से मोतियाबिंद के मरीजों का पंजीयन एवं परीक्षण कर उनको ऑपरेशन की व्यवस्था करवा कर विकासखंड केशकाल को मोतियाबिंद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही अन्य नेत्र रोगों जैसे कि कंजक्टिविटीज, कचिया, बिंद ग्लूकोमा, लो विजन डायबिटिक, रेटिनोपैथी, कार्नेल ओपेसिटी, ऑप्टिक नर्व ट्रेकोमा, दृष्टि दोष, प्रेस बायोपिक, स्थाई दृष्टि हीनता आदि अन्य मरीजों का सर्वेक्षण पंजीयन एवं परीक्षण का कार्य किया जा रहा है।

इनमे सामान्य नेत्र रोगियों को त्वरित उपचार कर एवं गंभीर नेत्र रोगियों को उच्च संस्थानों में इलाज हेतु रिफर किया जा रहा है एवं मृत्यु पश्चात नेत्रदान करने हेतु जागरूकता भी लायी जा रही है जिससे दृष्टिहीन मरीज फिर से दुनिया देख सकें। नोडल अधिकारी अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम डॉ एचके बघेल द्वारा विकासखंड केशकाल के समस्त आम नागरिकों से अपील कि गई   है कि वे इस अभियान के साथ सहयोग कर अपने एवं अपने परिवारों को सभी प्रकार के नेत्र रोगों से सुरक्षित रखें एवं नेत्र परीक्षण करवाकर संपूर्ण नेत्र सुरक्षा की जानकारी प्राप्त करें।

 

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