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14-01-2020
जेएनयू मामला : एबीवीपी ने जलाया वामपंथियों का पुतला

कोरबा। जेएनयू मामले को लेकर एबीवीपी का देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। इस कड़ी में मंगलवार को जमनीपाली नगर कोरबा ने एनटीपीसी गेट पर विरोध प्रदर्शन कर वामपंथियों का पुतला जलाया। इसमें नगर के सभी कार्यकारिणी सदस्य, विद्यार्थी व आम नागरिक उपस्थित हुए। 

 

11-01-2020
लोकल गाड़ियों से टोल टैक्स लेने का व्यापारियों ने किया विरोध

राजनांदगांव। शहर से महज 11 किलोमीटर दूर के ग्राम ठाकूरटोला के पास स्थित टोल प्लाजा में शुक्रवार को राजनांदगांव  शहर के व्यापारियों और आम जनता सहित सभी राजनीतिक दलों के लोगो ने लगभग डेढ़ घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। जिससे लगभग 11 किलोमीटर तक जाम लग गया। नेशनल हाइवे पर स्थित टोल प्लाजा मे फास्ट टैग के लागू होने के बाद से राजनांदगांव शहर की सीजी 08 नम्बर की गाड़ियों को फ्री नही किया जा रहा है जबकि इसके पहले   इन गाडि़यों को फ्री किया गया था, लेकिन टोल प्लाजा में सीजी 08 की गाडि़यों से भी 90 रूपये टोल टैक्स काटा जा रहा है  जिसका विरोध शहर की जनता के साथ साथ सभी राजनीतिक दलों ने भी किया और आज टोल प्लाजा पर जोरदार प्रदर्शन कर सीजी 08 की गाड़ियों को  फ्री  करने के लिए आंदोलन किया। राजनांदगांव में एनएच 6 बनने के बाद से पूर्व मे राजनांदगांव की 08 गाड़ियों को टोल टैक्स से छूट दी गई थी, लेकिन फास्ट टैग के लागू होने के बाद से शहर की सभी गाड़ियों पर भी टोल टैक्स काटने को लेकर विरोध के स्वर उठने के बाद पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने डेढ़ घंटे चले आंदोलन में टोल प्लाजा के अधिकारियों से नियम और कायदे की जानकारी चाही लेकिन मौजूदा अधिकारियों ने एनएच का हवाला देकर कुछ भी करने  फैसला लेने से इंकार कर दिया। आखिरकार प्रदर्शन कर रहे सभी ने टोल प्लाजा के बेरीकैट को हटा कर सभी गाडिय़ों को बिना टोल टैक्स के जाने दिया, लेकिन इस दौरान टोल प्लाजा से लगभग 11 किलोमीटर दूर तक जाम लग गया। वहीं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने 14 जनवरी तक इस मामले का हल निकालने  का आश्वासन दिया है।

 

11-01-2020
जेएनयू में हुए विवाद के विरोध में एनएसयूआई ने चलाया सिग्नेचर कैंपेन

रायगढ़। डिग्री कॉलेज में एनएसयूआई रायगढ़ द्वारा एक सिग्नेचर कैंपेन अभियान चलाया गया। जेएनयू में हुए विवाद के विरोध में यह सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया। पूरे देश में जेएनयू में हुई घटना के खिलाफ हर छात्र संगठन अपने अपने तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इसी कड़ी में आज रायगढ़ एनएसयूआई ने भी डिग्री कॉलेज में छात्रों के द्वारा एक सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया। यह सिग्नेचर कैंपियन आरएसएस, बीजेपी और एबीवीपी के खिलाफ चलाया गया एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार अपनी बातों को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। इसका जीता जागता उदाहरण जेएनयू में देखने को मिला।

जहां कॉलेज कैंपस में घुसकर पुलिस एवं अन्य अपराधिक तत्वों ने छात्रों के साथ मारपीट की यह घटना काफी निंदनीय है हम इसका विरोध करते हैं और इस विरोध प्रदर्शन में पुरे कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी एनएसयूआई का समर्थन किया। छात्र-छात्राओं का भी कहना था कि छात्रों पर बर्बरता और अत्याचार निंदनीय है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर सरकार अब भी नहीं जागी तो आगे छात्र सड़क पर उतर कर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। आज के एनएसयूआई के कार्यक्रम को एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश पांडे और जिला अध्यक्ष आरिफ हुसैन के नेतृत्व में किया गया आज के सिग्नेचर कैंपियन में एनएसयूआई के दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ ही साथ कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भी हस्ताक्षर कर अपना विरोध प्रदर्शन किया।

 

09-01-2020
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, सीएए को लेकर याचिका पर सुनवाई तभी जब हिंसा रुके

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि वह सीएए को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई उस वक्त करेंगे जब नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में हो रहा हिंसक प्रदर्शन खत्म होगा। मुख्य न्यायाधीश का यह बयान ऐसे समय में आया जब नागरिकता संशोधन एक्ट को संवैधानिक करार देने के लिए एडवोकेट विनीत धांडा ने याचिका दायर करके सुनवाई की अपील की है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि काफी हिंसा हो रही है। इस बेंच की अगुवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे कर रहे हैं, जिसमें जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल हैं।

एडवोकेट धांडा की याचिका पर बेंच ने कहा कि आखिर हम इस कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई किए बगैर ऐसा फैसला दे दें। बेंच ने पूछा कि आखिर हम कैसे किसी कानून को संसद में संवैधानिक कहते हैं? संसद द्वारा पास किए गए कानून में हमेशा संवैधानिकता का अनुमान है। आप एक समय में काननू के छात्र रह चुके हैं, आपको पता होना चाहिए, मैं पहली बार इस तरह की प्रार्थना सुन रहा हूं। कोर्ट को कानून की वैद्यता को देखना पड़ेगी, ना कि यह फैसला देना है कि यह कानून संवैधानिक है। बेंच की ओर से कहा गया कि देश मुश्किल समय का सामना कर रहा है, हमारी कोशिश शांति को बनाने की होनी चाहिए, यह याचिकाएं इस लक्ष्य की प्राप्ति में कतई सहायक नहीं हैं। बता दें कि विनीत कौर धांडा ने कोर्ट से यह अपील की है कि वह निर्देश दे कि सीएए को लेकर तमाम अखबारों, टीवी मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रचार किया जा सकता है और इसको लेकर सफाई दी जा सकती है, यह प्रचार किया जा सकता है कि यह कानून संविधान की मूल भावना के खिलाफ नहीं है और ना ही देश के नागरिकों के खिलाफ है। साथ ही याचिका में अपील की गई है कि बेंच मुख्य चुनाव आयोग को निर्देश दे कि जो भी दल इस कानून भ्रम फैला रहे हैं उनकी पहचान करे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। साथ ही याचिका में कहा गया है कि बेंच तमाम राज्य सरकारों को निर्देश दे कि इस कानून का पालन करना अनिवार्य है।

 

07-01-2020
छात्रों की आवाज को दबाने भाजपा और आरएसएस ने दिल्ली पुलिस,गुंडों का इस्तेमाल किया : कांग्रेस

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और एनएसयूआई प्रभारी शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि जेएनयू अटैक और खूनखराबे का पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी व्यापक विरोध हो रहा है। छत्तीसगढ़ के सभी विश्वविद्यालयों में एनएसयूआई ने विरोध प्रदर्शन किया है,जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि आज अहमदाबाद में भी एबीवीपी के गुंडों ने जेएनयू अटैक और खूनखराबे का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर फिर से हमला किया। भाजपा और आरएसएस के राजनैतिक स्वार्थो के लिये छात्रों का दमनचक्र चलाया जा रहा है। त्रिवेदी ने कहा है कि गुण्डों और पुलिस को मोहरा बनाने वाली भाजपा और एबीवीपी बेनकाब हो गई है। जेएनयू छात्रसंघ पर एबीवीपी का कब्जा न हो पाने की बौखलाहट में खूनखराबा किया गया। जेएनयू के छात्रों पर हथियारबंद नकाबपोशो ने हमला किया और जिन पर हमला हुआ उन निर्दोष छात्रों पर आपराधिक मामले बनाये जा रहे है। यह तो दमन की इंतेहा हो गयी है। यह भाजपा सरकार की तानाशाही है। पुलिस और वाइस चांसलर इसी दमन की कड़ी का हिस्सा बन चुके है। विरोध के स्वर भाजपा और आरएसएस को बर्दाश्त ही नहीं है। छात्रों की आवाज को दबाने के लिये भाजपा और आरएसएस ने दिल्ली पुलिस और गुंडों का जो इस्तेमाल किया गया है, इसके लिये इतिहास कभी मोदी और शाह को माफ नहीं करेगा। जेएनयू की हिंसा में नकाबपोश असामाजिक तत्वों को जिस तरह से घुसने की छूट दी गई और खून खराबा करने के बाद सुरक्षित निकलने दिया गया, उससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार इन असामाजिक तत्वों को संरक्षण दे रही है। छात्रों को निशाना बनाने में भाजपा सरकार और भाजपा से जुड़े संगठन पूरी ताकत से लगे है। गिरफ्तारी तो दूर की बात है, केन्द्र की भाजपा सरकार के इशारों पर मौन खड़ी दिल्ली पुलिस ने हमलावरों को पहचानने या उनके नकाब हटवाने तक की कोई कोशिश भी नहीं की।

 

07-01-2020
जेएनयू कैंपस पहुंचीं दीपिका पादुकोण, विवि में हुई हिंसा के विरोध प्रदर्शन में हुईं शामिल

नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण मंगलवार शाम को जेएनयू कैंपस पहुंचीं। दीपिका शाम 7.45 बजे जेएनयू कैंपस पहुंचीं। यहां पर दीपिका हिंसा के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल हुईं। यहां वो करीब 10 मिनट तक रूकी। इससे पहले दीपिका पादुकोण ने विरोध प्रदर्शन को लेकर एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि "यह देखकर मुझे गर्व होता है कि हम अपनी बात कहने से डरे नहीं हैं। चाहे हमारी सोच कुछ भी हो, लेकिन मेरे ख्याल से हम देश और इसके भविष्य के बारे में सोच रहे हैं, ये अच्छी बात है।"

02-01-2020
वाराणसी में लगाई गई 365 में से 359 दिन धारा 144 :  प्रियंका गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि साल 2019 में प्रधानमंत्री के खुद के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 365 दिन में से 359 दिन धारा 144 लगाई गई है। प्रियंका ने सवाल करते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री लोगों से कहते हैं कि डरने की कोई बात नहीं है? प्रियंका ने एक समाचार वेबसाइट की खबर शेयर करते हुए ये ट्वीट किया है। बता दें नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। कई जगह प्रदर्शन अब भी जारी हैं। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में तो प्रदर्शनों ने हिंसक रूप से लिया था। इसके बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लगाई गई थी। विपक्षी पार्टियां इस कानून के पास होने के बाद से सरकार की आलोचना कर रही हैं। इससे पहले प्रियंका ने उत्तर प्रदेश की पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के वक्त लखनऊ पुलिस पर गला दबाने का आरोप लगाया था। 

26-12-2019
ममता बनर्जी ने छात्रों से कहा, करते रहें बिना डरे विरोध प्रदर्शन

कोलकाता। प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के विरोध में एक रैली निकाली। इस दौरान ममता ने कहा कि सभी छात्र अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखें। लोकतांत्रिक तरीके से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए ऐसे ही प्रदर्शन करें। उन्होंने मंगलोर हिंसा में मरने वाले दो लोगों के परिवारों को 5-5 लाख रुपए देने का ऐलान भी किया। ममता ने कहा कि कर्नाटक में प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों के परिवार से मिलने के लिए तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा। बता दें एक दिन पहले ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने मंगलोर हिंसा में मरने वाले लोगों को मुआवजा तब तक नहीं देने की बात कही, जब तक मामले की जांच खत्म ना हो जाए। छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन ममता ने छात्रों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन का पूरा समर्थन किया।

उन्होंने छात्रों से कहा कि बिना डरे प्रदर्शन करते रहें। जब तक एनआरसी और सीएए को वापस नहीं ले लिया जाता, तब तक प्रदर्शन करते रहें। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने वादों को पूरा नहीं किया है। उन्होंने येदियुरप्पा पर निशाना साधते हुए ये बात कही। दरअसल पहले तो येदियुरप्पा ने प्रदर्शनकारियों को मुआवजा देने का ऐलान किया था लेकिन जब मंगलोर पुलिस ने एक वीडियो जारी कर कहा कि ये प्रदर्शन योजनाबद्ध तरीके से हुए थे। तब येदियुरप्पा ने जांच से पहले मुआवजा देने से मना कर दिया।
सीएए यानी नागरिकता संशोधन कानून के तहत तीन देशों (अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश) से उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने वाले गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को 6 साल यहां रहने के बाद भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी। मुस्लिम समुदाय के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। हालांकि मुस्लिम समुदाय के लोग भी 11 साल तक भारत में रहने के बाद यहां की नागरिकता हासिल कर सकते हैं। वहीं एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर अभी केवल असम में ही लागू हुआ है।

20-12-2019
नागरिकता कानून: उत्तरप्रदेश में विरोध प्रदर्शन के दौरान 6 लोगों की मौत

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश में हो रहे प्रदर्शन और हिंसा में 6 लोगों की मौत हुई। इसकी पुष्टि यूपी के डीजीपी ने की है। बिजनौर में दो, मेरठ, संभल, फिरोजाबाद और कानपुर में एक-एक लोगों की मौत हुई है। पुलिस का दावा है कि गोली नहीं चलाई गई है। वहीं पुरानी दिल्ली में भी शाम को प्रदर्शन उग्र हो गया और हालात को संभालने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। दिल्ली गेट इलाके में भी गाड़ियों में आग लगाने की खबर सामने आई। बता दें कि दिल्ली के सदर बाजार, नबी करीम, दरियागंज, सीलमपुर, सीमापुरी, नंद नगरी और दिल्ली गेट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 

20-12-2019
नागरिकता कानून: देश भर में विरोध प्रदर्शन, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने फूंकी कार

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के कई इलाकों में विरोध-प्रदर्शन जारी है। नागरिकता कानून के खिलाफ गुरुवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, अहमदाबाद, मुंबई समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। दिल्ली के दरियागंज में प्रदर्शनकारियों ने कार में आग लगा दी। लखनऊ में हिंसक प्रदर्शन हुए और आगजनी भी कई गई, जिसमें एक की मौत हो गई। वहीं कर्नाटक में भी प्रदर्शन के दौरान दो की मौत हो गई। दिल्ली में एहतियातन आज भी कई मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा गया, जिनमें अभी जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जसोला विहार शाहीन बाग मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों के रुख को देखते हुए शुक्रवार की सुबह ही लखनऊ, बेंगलुरु, मंगलुरु समेत देश के कई हिस्सों में आज भी धारा 144 लागू रही। कई जगह इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई। यूपी के बहराइच में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बुलंदशहर में प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आग लगाई। पुणे और नागपुर में लोगों ने नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन किया। 

 

20-12-2019
नीतीश कुमार ने कहा, बिहार में लागू नहीं होगा एनआरसी

पटना। देश के कुछ शहरों नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि राज्य में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर लागू नहीं किया जाएगा। नागरिकता कानून को लेकर नीतीश कुमार ने कोई बयान नहीं दिया है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता कानून के पक्ष में वोट किया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमारे रहते अल्पसंख्यकों की उपेक्षा नहीं होगी। विपक्षी राजद और कांग्रेस का नाम लिए उनकी ओर इशारा करते हुए नीतीश ने कहा 'जो लोग भड़का रहे हैं, उन्होंने अपने राजपाट के दौरान उन्हें कौन सी सुविधाएं दी। हमलोगों ने हर वर्ग के लिये काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा था बिहार के हितों के साथ-साथ राज्य के इलाकों के विकास के लिये काम करते रहेंगे। 

 

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