GLIBS
25-07-2020
अशोक गहलोत ने कहा, राष्ट्रपति के सामने लगाएंगे गुहार, पीएम निवास के बाहर करेंगे विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली। राजस्थान में जारी सियासी घमासान में रोज नए मोड़ आ रहे है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायक दल की बैठक में कहा कि जरूरत पड़ने पर हम राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन जाएंगे और यदि आवश्यक हो, तो हम पीएम के निवास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन करेंगे। अशोक गहलोत का यह बयान राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा विधानसभा का सत्र नहीं बुलाए जाने के संबंध में आया है। बता दें कि अशोक गहलोत अपने समर्थक विधायकों के साथ शुक्रवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की थी और विधानसभा का सत्र बुलाए जाने की मांग की थी। राज्यपाल द्वारा सत्र नहीं बुलाए जाने पर कांग्रेस और उसके समर्थक विधायकों ने शुक्रवार को राजभवन में चार घंटे से अधिक समय तक धरना दिया।
शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के एक होटल में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक बुलाई और विधायकों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ने पर हम राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन जाएंगे। यदि आवश्यक हो, तो हम पीएम के निवास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन करेंगे।"

गहलोत ने कहा कि अगर राज्यपाल के कुछ सवाल हैं तो वह सचिवालय स्तर पर समाधान कर सकते हैं। उन्होंने कहा,'हमेशा विपक्ष मांग करता है कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए। यहां सत्ता पक्ष कह रहा है कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए जहां दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वहीं विपक्ष कह रहा है कि हम ऐसी मांग ही नहीं कर रहे। यह क्या पहेली है। मुझे उम्मीद है कि कलराज मिश्र जिनका अपना एक व्यक्तित्व है और जिनका दिल्ली में भी पक्ष-विपक्ष सम्मान करता रहा है, वह दबाव में नहीं आएंगे क्योंकि उन्होंने संवैधानिक पद की शपथ ली है।' राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 107 और बीजेपी के पास 72 विधायक हैं। यदि 19 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया जाता है तो राज्य विधानसभा की मौजूदा प्रभावी संख्या घटकर 181 हो जाएगी, जिससे बहुमत का जादुई आंकड़ा 91 पर पहुंच जाएगा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए बहुमत कायम रखना आसान होगा। 

 

23-07-2020
कर्ज़ नहीं, कैश दो

कोरबा। मजदूर-किसान संगठनों के देशव्यापी आह्वान पर गुरुवार को कोरबा जिले में गांवों, मजदूर बस्तियों में केंद्र की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। केंद्र और राज्य सरकार से किसान विरोधी, गांव विरोधी नीतियों को वापस लेने, गरीबों को खाद्यान्न और नगद राशि से मदद करने, कोयला और रेलवे सहित अन्य सार्वजनिक उद्योगों के निजीकरण पर रोक लगाने, मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये रोजी देने, मजदूर-किसान विरोधी अध्यादेशों और प्रशासकीय आदेशों को वापस लेने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सार्वभौमिक बनाने और सभी लोगों का कोरोना टेस्ट किये जाने की मांग की गई। किसान सभा के नेता जवाहर सिंह कंवर ने बताया कि जिले में छत्तीसगढ़ किसान सभा के आह्वान पर "कर्ज़ नहीं, कैश दो" और "हम देश नहीं बिकने देंगे" के नारे के साथ कोविड-19 प्रोटोकॉल के फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खेतों और गांव की गलियों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

04-07-2020
भाजपा सांसदों और डॉ. रमन सिंह के घर का आज घेराव करेगी एनएसयूआई, प्रधानमंत्री का जलाएंगे पुतला

रायपुर। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन शनिवार को छत्तीसगढ़ में भाजपा के 8 सांसदों और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के घर का घेराव करेगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। एनएसयूआई के प्रदेश प्रवक्ता तुषार गुहा ने बताया कि केंद्र सरकार की गरीब कल्याण रोजगार योजना में कांग्रेस शासित राज्य होने की वजह से भेदभाव करते हुए छत्तीसगढ़ के किसी भी जिले को सम्मिलित नहीं किया गया। आज भारतीय जनता पार्टी रोजगार के मुद्दे पर राजनीति कर रही है। इसी के विरोध में प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा की अगुवाई में यह प्रदर्शन किया जाएगा। राजधानी में राजीव चौक सुभाष स्टेडियम के सामने से दोपहर में यह प्रदर्शन शुरु होगा।

30-06-2020
Video: भाजयुमो ने बेरोजगारी भत्ता देने की मांग को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

दुर्ग। मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह करने वाले बेरोजगार युवक के समर्थन में तथा कांग्रेस सरकार द्वारा युवाओं को नौकरी देने व बेरोजगारी भत्ता देने के वादा पूरा करने की मांग को लेकर जिला भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा प्रदेश भाजयुमो के आव्हान पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पुराना बस स्टैंड में पुतला दहन कर विरोध प्रकट किया गया। जिला भाजयुमो अध्यक्ष दिनेश देवांगन ने कहा कि राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व में 18 माह के कांग्रेस शासन काल में बेरोजगारों के प्रति छतीसगढ़ की सरकार के द्वारा निरन्तर अपनाई जा रही उपेक्षापूर्ण नीति से प्रदेश के युवा त्रस्त है,जिसका ताजा उदाहरण मुख्यमंत्री निवास के सामने धमतरी जिले के एक ग्रामीण बेरोजगार युवक द्वारा किये गए आत्मदाह की घटना है।

चुनाव पूर्व सत्ता पाने कांग्रेस ने जो बेरोजगारों को अपने घोषणपत्र में 10 लाख युवाओं को शासकीय नौकरी देने 25 सौ प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने जैसे जो सब्जबाग दिखाया था उससे अब बेरोजगार व्यथित है व आक्रोशित है। पुतला दहन करने वालों में प्रमुख रूप से भाजपा जिला उपाध्यक्ष रजा खोखर ,वरिष्ठ भाजपा नेता अजय तिवारी, जिला महामंत्री नितेश साहू, उपाध्यक्ष राहुल पंडित, मंत्री राहुल दीवान ,मीडिया प्रभारी राजा महोबिया, गौरव शर्मा, अनुपम मिश्रा, मंडल अध्यक्ष निलेश अग्रवाल ,अजय चंद्राकर, मनीष साहू ,विनीत ताम्रकार, बंटी चौहान , निरंजन दुबे, रितिक साहू ,सुभाष सोनी  सहित बड़ी संख्या में भाजयुमो के कार्यकर्ता उपस्थित थे।        

25-06-2020
पेट्रोल वृद्धि को लेकर युवा कांग्रेस ने किया विरोध प्रदर्शन

अम्बिकापुर। युवा कांग्रेस सरगुजा के तत्वाधान में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राकेश गुप्ता, ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष हेमंत सिन्हा के उपस्थिति में युवा कांग्रेस एवं एनएसयूआई के द्वारा उल्टा कपड़ा पहन कर हाथों में धान का बीड़ा लेकर स्थानीय घड़ी चौक में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि आज 9 बार लगातार तेल के दामो में वृद्धि ये दिखाती है कि केंद्र सरकार उद्योगपति की सरकार है क्योंकि इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि पेट्रोल से ज्यादा डीजल का दाम है,जिससे बड़े उद्योग तो चलेंगे पर किसान खेती नही कर पाएंगे। जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि सरकार कि नीति पेट्रोल से महँगा डीजल ये दर्शाती है कि सरकार पेट्रोल की गाड़ियों की सेल बढ़ाने ये सोची समझी तरीके से ये सरकार के द्वारा किया गया है। विरोध प्रदर्शन में राकेश गुप्ता, हेमंत सिन्हा ,जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष अजय सिंह,प्रमोद चौधरी पप्पन सिन्हा,गुरप्रीत,राजा धंजल,दिनेश शर्मा,उपेंद्र गुप्ता, एनएसयूआई सरगुजा जिला अध्यक्ष हिमांशु जायसवाल, विषेक गुप्ता,बंटी,मिंकू शुक्ला,शेखर,देवा ,निखिल,कृष्णा यादव,शलभ आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।

 

11-06-2020
Video: अस्पताल में काली पट्टी लगाकर कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन

रायगढ़। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की नर्सेस और स्टॉफ, ड्यूटी तो आम दिनों की तरह ही दे रहे हैं। लेकिन ये अपनी कुछ मांगों को मनवाने के लिए काली पट्टी लगाकर विरोध भी जता रहे हैं। यही सूरत-ए-हाल तकरीबन सभी वार्डों का है। दरअसल, कोरोना काल में काम करने के बावजूद डीए में कटौती और इंक्रीमेंट पर रोक लगाने के ख़िलाफ़ शासकीय कमर्चारी-अधिकारी फेडरेशन की मांगों को पूरा करवाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी संघ भी सामने आ गया है। यही नहीं, कोरोना संकट के इस दौर में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों ने 50 लाख का बीमा और जोखिम भत्ता की मांग पर भी अडिग हैं। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के सभी कर्मचारी काली पट्टी लगाकर काम कर रहे हैं। इनका कहना है कि जब तक शासन उनकी मांग पूरी नहीं करती है, तब तक यह विरोध चलता रहेगा। वहीं 1 जुलाई को प्रदेश भर में मुख़ालफ़त भी की जाएगी।स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मांग भी की है कि इनको वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए। वहीं, कर्मचारी और पेंशनरों को जुलाई 2019 और जनवरी 2020 से कुल 9 प्रतिशत महंगाई भत्ता भुगतान की सौगात भी मिले। बहरहाल, कोरोना वायरस के कहर के बीच अपनी जान को जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाने वाले कर्मचारियों की सैलरी में 30 फीसदी कटौती हो रही है तो जनवरी के डीए भी रोक दिया गया है।  यही वजह है कि अपनी मांगों को मनवाने को लेकर अस्पताल के कर्मचारी काली पट्टी लगाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 

 

07-06-2020
वाम पार्टियों ने केन्द्र सरकार को बताया मजदूर विरोधी, 16 जून को मनाएंगे विरोध दिवस

रायपुर। वाम पार्टियों ने मोदी सरकार पर मजदूर और गरीब विरोधी होने का आरोप लगाया है। 16 जून को सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ गरीबों और प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को केंद्र में रखकर छत्तीसगढ़ की पांच वामपंथी पार्टियां विरोध दिवस मनाएगी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के संजय पराते ने बताया कि अनियोजित लॉक डाउन के कारण इस देश के गरीबों के सामने जो रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ है, उसको हल करने में मोदी सरकार पूरी तरह विफल रही है। 15 करोड़ अतिरिक्त लोग बेरोजगार हो गए हैं, बड़ी तेजी से भुखमरी बढ़ रही है और प्रवासी मजदूर किसी सरकारी सहायता के बिना आज भी पैदल अपने गांवों की ओर लौटने के लिए मजबूर हैं। इतने संकट में भी आम जनता की आजीविका की रक्षा तथा उसे सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा देने के लिए कदम उठाने के बजाय मोदी सरकार कारपोरेट हितों की रक्षा के लिए ही प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 की जीडीपी 4 प्रतिशत रहने से स्पष्ट है कि देश की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने में मोदी सरकार की कॉपोर्रेटपरस्त और जनविरोधी नीतियों की बहुत बड़ी भूमिका है। राजस्व संग्रहण में 2.3 लाख करोड़ रुपयों की कमी आई है और अब इसका पूरा भार आम जनता पर डाला जा रहा है। राज्यों से बिना विचार-विमर्श किये जिस तरीके से तालाबंदी की गई, उसमें लॉक-डाऊन के बुनियादी सिद्धांतों का पालन ही नहीं किया गया। नतीजा यह कि उससे न तो देश में कोरोना महामारी पर काबू पाया जा सका है और न ही आम जनता को राहत देने के कोई कदम उठाये गए हैं। आम जनता बेकारी, भुखमरी और कंगाली की कगार पर पहुंच चुकी है।वाम नेताओं ने कहा कि आज अर्थव्यवस्था जिस मंदी में फंस चुकी है, उससे निकलने का एकमात्र रास्ता यह है कि आम जनता के हाथों में नगद राशि पहुंचाई जाए तथा उसके स्वास्थ्य और भोजन की आवश्यकताएं पूरी की जाए, ताकि उसकी क्रय शक्ति में वृद्धि हो और बाजार में मांग पैदा हो। उसे राहत के रूप में "कर्ज नहीं, कैश चाहिए"।पराते ने कहा कि प्रदेश की सभी वामपंथी पार्टियां, उनके कार्यकर्ता और समर्थक इन ज्वलंत मांगों पर आम जनता को लामबंद करेंगे और 16 जून को फिजिकल डिस्टेंसिंग व कोविड-19 के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन होगा।

03-06-2020
भाजपा में गुटबाजी, खुलेआम विरोध प्रदर्शन पर ध्यान दे नवनियुक्त अध्यक्ष : विकास तिवारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकास तिवारी ने भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष विष्णुदेव साय को उनकी नियुक्ति के लिए बधाई देते हुए कहा है कि अध्यक्ष को पहले अपने घर की चिंता करनी चाहिए फिर प्रदेश सरकार और कांग्रेस पार्टी पर बयान जारी करना चाहिए। प्रवक्ता विकास ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को लगातार तीन बार सरकार बनाने का मौका प्रदेश की जनता ने दिया। लेकिन भाजपा और रमन सरकार के पापों का घड़ा छलकने लगा तो प्रदेश की जनता ने चौथी बार मात्र 15 सीटों पर भाजपा को सिमटा कर रख दिया। इसके बाद भी लगातार हुए विधानसभा उपचुनावों,नगरी निकाय,नगर पालिका एवं पंचायतों के चुनाव में भी भाजपा का सूपड़ा साफ प्रदेश की जनता ने कर दिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सरकार के जन हितेषी कार्यों पर जनता ने मुहर लगाया और उन पर पूरा भरोसा किया,जिसके कारण कि हाल ही में देश में हुए सी वोटर सर्वे में प्रदेश के 8 जनता ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ईमानदार नेतृत्व पर भरोसा जताया है और कोरोना कोविड 19 महामारी के संघर्ष के दिनों में उन्हें ईमानदार नेतृत्वकर्ता बताया है,जिसे देख भाजपा जो पहले ही रसातल में चली गई है और भी गहरे सदमे में आ गई है।

31-05-2020
शहरवासियों ने कहा सौंदर्यीकरण के नाम पर सप्रे शाला मैदान से खिलवाड़ न करें, विरोध जारी

रायपुर। राजधानी के बूढ़ातालाब के किनारे स्थित सप्रे शाला मैदान का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। जिसे लेकर शहरवासी विरोध में उतर गए है। बता दें कि कल से ही यह विरोध प्रदर्शन जारी है। शहरवासियों का कहना है कि शरह में खेल मैदानों का दुरूपयोग किया जा रहा है। खेल मैदानों में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही है। खेल मैदानों का दुरूपयोग बंद किया जाना चाहिए। सप्रे शाला मैदान की एक इंच भी खेल जमीन कम नहीं होने देंगे।

28-05-2020
राहत और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग पर किसानों ने किया दूसरे दिन भी आंदोलन

कोरबा। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति से जुड़े 300 से अधिक संगठनों के आह्वान पर जिले में छत्तीसगढ़ किसान सभा के आह्वान पर दूसरे दिन भी गांवों में किसानों, आदिवासियों और प्रवासी मजदूरों ने अपने-अपने घरों से गांवों में एकत्रित होकर मोदी सरकार द्वारा कोरोना संकट से निपटने के तौर-तरीकों पर अपना विरोध जाहिर किया और ग्रामीणों को वास्तविक राहत और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग करते हुए पूर्व में अधिग्रहित जमीन मूल किसानों को वापस करने की मांग की।किसानों के आंदोलन को समर्थन करते हुए माकपा की पार्षद सुरती कुलदीप और राजकुमारी कंवर ने किसानों के बीच जाकर पूर्व में अधिग्रहित जमीन मूल किसानों को वापस करने और किसानों की समस्या की तख्ती लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए।किसान सभा के संयोजक नंदलाल कंवर  ने बताया कि जिलों में किसानों द्वारा दो दिन तक सैकड़ों गांव में विरोध प्रदर्शन हुआ है।

इन विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से प्रशांत झा,जनकदास, जवाहर सिंह कंवर, श्यामशुन्दर की अगुवाई में जिले के विभिन्न गांव में प्रदर्शन हुआ। माकपा ने भी किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया।मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए जिले में किसानों ने राज्य में कांग्रेस की भूपेश सरकार से  पूर्व में अधिग्रहित जमीन मूल किसानों को वापस करने ,किसान न्याय योजना की राशि एकमुश्त देने, मक्का की सरकारी खरीद किये जाने, प्रवासी मजदूरों के साथ मानवीय व्यवहार करने और उनका कोरोना टेस्ट किये जाने की भी मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार को आत्मप्रचार छोड़कर राहत के वास्तविक कदमों पर ध्यान देना चाहिए और बिना पर्याप्त बजट के मनरेगा में काम देने का ढिंढोरा भी नहीं पीटना चाहिए। उन्होंने कहा कि अप्रैल माह में मात्र 38 प्रतिशत परिवारों को ही औसतन 12 दिनों का काम दिया गया है।

उन्होंने सभी प्रवासी मजदूरों को एक अलग परिवार मानकर काम और राशन देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चार लाख गैर-पंजीकृत छत्तीसगढ़ी मजदूर आज भी बाहर फंसे हुए हैं और उन्हें वापस लाने की कोई योजना सरकार के पास नहीं है।किसान नेताओ ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए घोषित पैकेज को किसानों और ग्रामीण गरीबों के साथ धोखाधड़ी बताया है और कहा है कि इसका लाभ खेती-किसानी करने वालों को नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में व्यापार करने वाली कॉर्पोरेट कंपनियों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पैकेज किसानों और प्रवासी मजदूरों की रोजी-रोटी, उनकी आजीविका और लॉक डाउन में उनको हुए नुकसान की भरपाई नहीं करती।

उन्होंने प्रवासी मजदूरों की दयनीय दशा के बारे में झूठा हलफनामा देकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।इन सभी संगठनों ने ग्रामीण परिवारों को अगले छह माह तक 10000 रुपये की मासिक नगद मदद देने, हर जरूरतमंद व्यक्ति को अगले छह माह तक 10 किलो खाद्यान्न हर माह मुफ्त देने, खेती-किसानी और आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई 10000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से करने, किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2 लागत मूल्य का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में देने, किसानों को बैंकिंग और साहूकारी कर्ज़ के जंजाल से मुक्त करने और प्रवासी मजदूरों को बिना यात्रा व्यय वसूले उनके घरों तक सुरक्षित ढंग से पहुंचाने और पहुंच चुके मजदूरों को 5000 रुपये प्रवास भत्ता देने की मांग केंद्र सरकार से की है।

12-03-2020
दिल्ली हिंसा: पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पीएफआई अध्यक्ष परवेज और सचिव इलियास को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली हिंसा मामलों की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष परवेज और सचिव इलियास को गिरफ्तार किया है। बता दें कि इन दोनों पर दिल्ली हिंसा भड़काने का आरोप है। स्पेशल सेल ने शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन और पीएफआई के संबंधों की जांच करते हुए दोनों की गिरफ्तारी की है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। यह पूछताछ फंडिंग को लेकर भी हो रही है। बता दें कि इलियास दिल्ली के शिव विहार इलाके का रहने वाला है। उसके उपर प्रदर्शनों के दौरान लोगों को फंड मुहैया कराने का आरोप है। पीएफआई के अध्यक्ष परवेज और सचिव इलियास से पहले, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पीएफआई के एक सदस्य दानिश को गिरफ्तार किया था। दानिश को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान दुष्प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि दानिश पीएफआई के काउंटर इंटेलिजेंस विंग का प्रमुख है और एंटी सीएए प्रोटेस्ट में काफी सक्रिय रहा है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दानिश व उससे जुड़े नेटवर्क के लोग किस तरह से सीएए के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में काम कर रहे हैं। 

 

Advertise, Call Now - +91 76111 07804