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26-02-2020
तकनीकी पहलुओं के आदान प्रदान से होगा नरवा परियोजना का काम

बीजापुर। जिले में नरवा परियोजना के तहत 4 नालों को चिन्हांकित कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई हे। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर ही चिन्हांकित नालों में रीच टू वैली सिद्धान्त के अनुसार कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों में जल संरक्षण संरचनाओं जैसे बोल्डर चेक डेम, गेबियन स्ट्रक्चर, चेक डेम आदि संरचनाओं को लिया गया है। जल संरक्षण संरचनाओं के निमाज़्ण में तकनीकी पहलुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कलेक्टर केडी कुंजाम के मार्गदर्शन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत पोषण लाल चंद्राकर ने वन विभाग एवं महात्मा गांधी नरेगा के तकनीकी अमलों को तकनीकी पहलुओं को आपस में आदान प्रदान कर कार्य करने के निर्देश दिए थे। ताकि परियोजना अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण संरचना निर्माण हो।

इसी उद्देश्य को लेकर 26 फरवरी को ग्राम पंचायत संगमपल्ली में वन विभाग के अंतर्गत चल रहे बोल्डर चेक डेम व गेबियन स्ट्रक्चर के काम को जिले के सभी जनपद के तकनीकी सहायकों को दिखाने के लिए जिला वन मंडलाधिकारी दिनेश कुमार साहू एवं जिला पंचायत सीईओ की उपस्थिति में निरीक्षण कार्यक्रम रखा गया था। चंद्राकर ने बताया कि जिले में कुल 4 नालों को नरवा परियोजना के तहत चिन्हांकित कर कार्य किया जाना है। इनमे 1 नाले वन विभाग, 11 इन्द्रावती रिजर्व टाइगर एवं 19 नाले पंचायत एवम ग्रामीण विकास विभाग से बनाये जाने हैं। जल संरक्षण संरचनाओं के तकनीकी पहलुओं के आदान प्रदान के लिए जिला के सभी तकनीकी अमलों को वन विभाग के द्वारा बनाये जा रहे संरचनाओं को निरीक्षण करने ले जाया गया था, ताकि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण कार्य हो।

 

26-02-2020
खबर का असर: देर से ही सही वन विभाग आया सख्ती में, तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाएगा पिंजरा

गरियाबंद। बहेराबुड़ा गांव में लगातार तेंदुए का दहशत बड़ता जा रहा है। इससे ग्रामीण परेशान है। यहां तेंदुए की दहशत से परेशान ग्रामीणों की खबर चलाए जाने के बाद वन विभाग हरकत में आया है और तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं जिन संभावित स्थानों पर तेंदुवा जा सकता है ऐसे तीन स्थानों पर नाइट विजन कैमरा लगाया जा रहा है। वन विभाग ग्लिब्स न्यूज की खबर के बाद से इस आतंकी तेंदुआ को पकड़ने के लिए प्रयासरत नजर आ रहा है।

एक ही गांव में बार-बार तेंदुए के घुसने से दहशत में आए ग्रामीण तेंदुए को पकड़ने की मांग ग्लिब्स न्यूज के माध्यम से प्रशासन के समक्ष रख चुके थे। इसके बाद वन विभाग सक्रिय हुआ और तेंदुए को पिंजरे में कैद करने के लिए अनुमति ली। इसके बाद पिंजरा गांव भिजवाया गया है और फिलहाल पिंजरा लगाने का कार्य जारी है। पिंजरे में एक बकरी के बच्चे को रखा जाएगा और उस का लालच देकर तेंदुए को पकड़ने की कोशिश की जाएगी।

 

25-02-2020
30 लाख रुपए के ऑक्सीजन जोन को भी नही छोड़ा कब्जाधारियों ने, वन विभाग कर रही अफसर के आदेश का इंतजार

कवर्धा। सरोदा बांध के पास वन विभाग ने करीब 30 लाख रुपए खर्च कर ऑक्सीजन जोन का निर्माण कीया है। इसमें कई प्रकार के पेड़ पौधे लगाए गए है। इनकी सुरक्षा के लिए चारो तरफ घेरा भी किया गया है, लेकिन बाहर से आये बैगा आदिवासी यहां पेड़ो को काट कब्जा करने लग गए है। इन बैगाओं को किसी से कोई डर नही है। वन विभाग के अफसर भी कार्रवाई करने से बचते दिखाई दे रहे है। अधिकारियों के अनुसार इन्हें भगाने का प्रयास किया जा चुका है, लेकिन वे फिर वापस आ जाते है। पर्यटक स्थल व सागौन जैसे कीमती प्लांटेशन में पेड़ों को नुकसान पहुंचकर ऑक्सीजन जोन के अंदर ही अतिक्रमण कर कब्जा कर रहे है। इसके बाद भी वन विभाग के अफसर बड़े अधिकरियों के आदेश का इंतजार कर रहे है।

30 लाख रुपए का ऑक्सीजन जोन

वन विभाग पर्यटक स्थल सरोदा बांध व गार्डन को देखते हुए दो अलग-अलग किस्तों में करीब 30 लाख रुपये खर्च कर ऑक्सीजन जोन का निर्माण किया गया। लेकिन विभाग की देख रेख नही होने के कारण अंदर में ही अतिक्रमण करी कब्जा कर घर बनाने लगे है। यहां पेड़ो को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद भी अफसर ध्यान नही दे रहे है। 30 लाख रुपए के ऑक्सीजन जोन को बचा पाने में जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नही दे रहे है।

वहीं इस मामले में जब वन विभाग के रेंजर अंकित पाण्डेय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सरोदा बांध स्थित प्लांटेशन में कुछ बैगा आदिवासी कब्जा कर आवास बना लिए है। जिन्हें भगाया गया था, लेकिन वे फिर आ गए। इसकी जानकारी बड़े अधिकारी को दिया गया है। आगे की कार्रवाई के लिए आदेश का इंतजार है। 

24-02-2020
एक महीने बाद फिर गांव में पहुंचा तेंदुआ, बकरी का किया शिकार, ग्रामीणों में दहशत का माहौल

गरियाबंद। जिले के बहेराबुडा गांव के लोग इन दिनों तेंदुए की दहशत से शाम को घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। तेंदुए को गांव के आस-पास घूमते देखा गया है। एक महीने पहले तेंदुए ने जीस घर में घुसकर 2 बकरियों को अपना शिकार बनाया था। उसी घर में घुसकर तेंदुए ने फिर एक बकरी का शिकार किया है। इस घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। गांव के सरपंच मनीष ध्रुव सहित ग्रामीणों ने वन विभाग से पिंजड़ा लगाकर इस आतंकी तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। ग्रामीणों में इस बात की भी दहशत है कि अगर तेंदुआ पकड़ा नहीं गया तो गांव के बच्चों को अपना शिकार न बना ले।

14-02-2020
तेन्दूपत्ता संग्रहण की तैयारी शुरू, मो. अकबर ने सभी आवश्यक व्यवस्था पूरी करने के दिए निर्देश
   

रायपुर। वन मंत्री मो. अकबर के मार्गदर्शन में वन विभाग की ओर से राज्य में चालू वर्ष 2020 में तेन्दूपत्ता संग्रहण की तैयारी के तहत शाख कर्तन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। वन मंत्री अकबर ने विभागीय अधिकारियों को तेन्दूपत्ता संग्रहण के सीजन में अच्छी गुणवत्ता का अधिक से अधिक तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए हर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में तेन्दूपत्ता का संग्रहण पारिश्रमिक वर्ष 2018 में दो हजार 500 रूपये प्रति मानक बोरा था, जिसे वर्तमान सरकार की ओर से वर्ष 2019 में बढ़ाकर चार हजार रूपये प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2019 में 15 लाख 6 हजार 883 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का पारिश्रमिक लगभग 603 करोड़ रूपये तेन्दूपत्ता संग्राहकों को वितरित किया गया है। इसके फलस्वरूप तेन्दूपत्ता संग्रहण में वर्ष 2018 की दर की तुलना में वर्ष 2019 में लगभग 226 करोड़ रूपये की अतिरिक्त आय तेन्दूपत्ता संग्राहकों को हुई है। प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ संजय शुक्ला की ओर से हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों और 31 जिला यूनियनों के प्रबंध संचालकों को तेन्दूपत्ता संग्रहण के सुुचारू संचालन संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में 31 लघु वनोपज सहकारी यूनियनों के माध्यम से 901 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के जरिये तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य होता है। प्रदेश में वर्तमान में तेन्दूपत्ता संग्रहण के पूर्व क्षेत्र में शाख कर्तन का कार्य संचालित है। इसे आगामी माह मार्च के प्रथम सप्ताह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अच्छी गुणवत्ता का तेन्दूपत्ता संग्रहित होने से तेन्दूपत्ता संग्राहकों को अधिक पारिश्रमिक के साथ-साथ उन्हें उनके द्वारा संग्रहित मात्रा के अनुपात में अधिक से अधिक प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) भी प्राप्त होता है। जिला यूनियनों को शाख कर्तन कार्य के सुचारू रूप से संचालन के लिए आवश्यक राशि लगभग 11 करोड़ रूपये उपलब्ध करायी गई है, ताकि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को शाख कर्तन कार्य का भुगतान समय से किया जा सके। इसी तरह तेन्दूपत्ता संग्रहण के पूर्व गोदामों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इनमें गोदामों के मरम्मत संबंधी कार्य फरवरी माह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देशित किया गया है। 

06-02-2020
तेंदुए की लाश कुंए में मिली,वन अमले लाया ईको सेंटर

गरियाबंद। जोबा क्षेत्र के केरा गांव में एक तेंदुए की लाश बीते 2 दिनों से एक कुंए में पड़ी हुई थी। वन विभाग इसकी भनक तक नहीं लगी। वन विभाग को एक चरवाहे के माध्यम से सूचना मिली। इसके आधार पर वन विभाग ने तेंदुए की लाश को गरियाबंद से दूर ईको सेंटर में लाकर रखा है। जबकि केराबारा गांव या फिर उप वन परिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय जोबा में लाया जाना था किंतु 20 किलोमीटर दूर इको सेंटर में लाश रखना अनेक शंका पैदा करता है। लाश को वन मुख्यालय में भी पर्याप्त जगह रखने की थी फिर भी इको सेंटर पर रखना अनेक शंकाओं को जन्म देता है। वन विभाग द्वारा बताया जा रहा है कि उक्त तेंदुए का पोस्टमार्टम अगले दिन डॉक्टरों की उपस्थिति में किया जाएगा और इस वक्त वन विभाग के उच्च अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। सारी घटनाओं को लेकर गरियाबंद क्षेत्र में तरह-तरह के चर्चे हो रहे हैं। 

 

06-02-2020
केंद्रीय विश्वविद्यालय में पहुंचा बाइसन, वन विभाग की टीम पकड़ने में नाकाम

रायपुर। बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीते दिन बाइसन दिखते ही विश्वविद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। वन विभाग की टीम को जैसे ही बाइसन की सूचना मिली तत्काल मौके पर डीएफओ से लेकर बिलासपुर वन परिक्षेत्र के तमाम अधिकारी रेस्क्यू टीम को बुलवाकर उसे पकड़ने की कोशिश में भीड़ गए। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार में भीड़ देखकर बाइसन इंजीनियरिंग महाविद्यालय के पीछे पेड़ों में चला गया। जिसके बाद बाइसन दोबारा नजर नहीं आया। आपको बता दें कि चारों तरफ काफी पेड़ों की अधिकता के कारण पहले भी यहां चीतल दिखाई  दिया है, लेकिन बाइसन पहली बार देखा गया। फिलहाल अभी तक वन विभाग की टीम बाइसन को पकड़ नहीं पाई है।

27-01-2020
गांव में बाघ के पैरों के मिले निशान, फैली सनसनी, वन विभाग ने ग्रामीणों को किया सतर्क

कांकेर। शहर से मात्र 7 किमी की दूरी में स्थित ग्राम पंचायत आतुरगांव के पास बाघ के पैरों के निशान मिलने से सनसनी फैल गई है। वन विभाग के अफसरों में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही सीसीएफ समेत वन विभाग के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया है। साथ ही ग्रामीणों को भी सतर्क रहने हिदायत दी गई। विदित हो कि कुछ ही दिनों पूर्व चारामा ब्लॉक के मैनखेड़ा व भोथा में बाघ के पैरों के निशान देखे गए थे। इसके बाद अब जिला मुख्यालय के इतने पास बाघ के पैरों के निशान देखे जाने से वन विभाग सकते में है। ग्रामीणों ने सुबह आतुरगांव के पास नदी के रेत और आस-पास किसी बड़े जानवर के पैर के निशान देख वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने बाघ के पैर के निशान होने की पुष्टि की। हालांकि अब तक बाघ को किसी ने देखा नहीं है लेकिन विभाग आतुरगांव में मिले पद चिन्ह को बाघ का पद चिन्ह होना बता रही है। सूचना मिलते ही सीसीएफ सहित विभिन्न अधिकारी कर्मचारी मौके पर पहुंच मुआयना करते क्षेत्र के समस्त वन कर्मचारियों को सर्तक एवं अपने क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए है। उक्त मामले पर सीसीएफ जेआर नायक ने बताया कि इलाके में इतने बड़े पैरों के निशान नहीं देखे गए हैं, जो निशान मिले हैं वह बाघ के पैरों के ही हैं। इसको देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा गया है। बाघ को ढूंढने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

 

24-01-2020
भालू के हमले से महिला की मौत, मृतक के परिजनों को वन विभाग ने दी सहायता राशि

कोरबा। बालको वन परिक्षेत्र के ग्राम बेला में एक 70 वर्षीय वृद्ध महिला गौरा-गौरी पूजा देखकर आ रही थी। इस दौरान एक भालू ने उसके ऊपर हमला कर दिया। और उसकी दोनों आंखें और शरीर के अन्य अंगों को भालू ने नोच डाला था। महिला की चीख पुकार सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और किसी तरह भालू को खदेड़ा गया। महिला को उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया था जहाँ उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बालको क्षेत्र में भालू हमले से महिला की मौत से लोग दहशत में हैं ज्ञात रहे कि बालको क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भालू की उपस्थिति रहतीं है, जो आए दिन क्षेत्र मे भी विचरण करते रहते हैं। घटना की सूचना मिलते ही वनकर्मी जिला अस्पताल पहुंचे और मृतक के परिजनों को सहायता राशि दी। बालको के कालोनियों में भालू अक्सर डेरा डाले रहते हैं जिसे लेकर वन विभाग ने कई बार अलर्ट भी जारी किया है।

 

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