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20-08-2019
चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में स्थापित, अंतरिक्ष में भारत की एक और बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 मंगलवार सुबह चंद्रमा की कक्षा में स्थापित हो गया और इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नाम एक और बड़ी उपलब्धि हो गई। चंद्रयान-2 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था। इसरो वैज्ञानिकों ने सुबह 8.30 से 9.30 बजे के बीच चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा LBN#1 में प्रवेश कराया। अब चंद्रयान-2, 118 किमी की एपोजी (चांद से कम दूरी) और 18078 किमी की पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) वाली अंडाकार कक्षा में अगले 24 घंटे तक चक्कर लगाएगा। इस दौरान चंद्रयान की गति को 10.98 किमी प्रति सेकंड से घटाकर करीब 1.98 किमी प्रति सेकंड किया गया।  20 अगस्त यानी मंगलवार को चांद की कक्षा में चंद्रयान-2 का प्रवेश कराना इसरो वैज्ञानिकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन, हमारे वैज्ञानिकों ने इसे बेहद कुशलता और सटीकता के साथ पूरा किया। 7 सितंबर को चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट बाहुबली के जरिए प्र‍क्षेपित किया गया था।

13-08-2019
कल धरती की कक्षा छोड़ देगा चंद्रयान-2 और चांद की तरफ  बढ़ेगा 

नई दिल्ली। चंद्रयान-2  बुधवार को धरती की कक्षा छोड़ देगा और फिर यह चांद पर पहुंचने के लिए 'चंद्रपथ' पर अपनी यात्रा शुरू कर देगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक इसे चंद्रपथ पर डालने के लिए बुधवार सुबह एक महत्वपूर्ण अभियान प्रक्रिया को अंजाम देंगे। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के तीन बजे से सुबह चार बजे के बीच अभियान प्रक्रिया 'ट्रांस लूनर इंसर्शन' (टीएलआई) को अंजाम दिया जाएगा। इसरो ने कहा कि चंद्रयान-2 के 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने और सात सितंबर को इसके चंद्र सतह पर उतरने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष के। सिवन ने सोमवार को कहा कि 14 अगस्त को तड़के लगभग साढ़े तीन बजे हम 'ट्रांस लूनर इंजेक्शन' नामक अभियान प्रक्रिया को अंजाम देने जा रहे हैं। इस अभियान चरण के बाद 'चंद्रयान-2' धरती की कक्षा को छोड़ देगा और चांद की तरफ  बढ़ जाएगा। 20 अगस्त को हम चंद्र क्षेत्र में पहुंचेंगे। यह उल्लेख करते हुए कि 'चंद्रयान-2Ó बीस अगस्त को चांद के इर्द-गिर्द होगा, उन्होंने कहा कि  हमने चांद के आस-पास सिलसिलेवार अभियान प्रक्रियाओं को अंजाम देने की योजना बनाई है और अंतत: सात सितंबर को हम चांद पर इसके दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेंगे। इसरो अब तक 'चंद्रयान-2' को पृथ्वी की कक्षा में ऊपर उठाने के पांच प्रक्रिया चरणों को अंजाम दे चुका है। 

 

 

12-08-2019
20 अगस्त को पहुंचेगा चंद्रमा की कक्षा में चंद्रयान-2

अहमदाबाद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष के. सिवन ने सोमवार को कहा कि भारत के दूसरे चंद्र अभियान चंद्रयान-2  के 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने की संभावना है और सात सितंबर को यह चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। उन्होंने अहमदाबाद  में संवाददाताओं से कहा कि अंतरिक्ष यान दो दिनों बाद पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलना शुरू करेगा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक समझे जाने वाले डॉ. विक्रम साराभाई की जन्मशती समारोह में हिस्सा लेने सिवन अहमदाबाद पहुंचे थे। इसरो प्रमुख ने कहा कि 3850 किलोग्राम के चंद्रयान-2 में तीन हिस्से हैं जिसमें एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर है। अभियान के तहत 22 जुलाई को प्रक्षेपण कार्यक्रम के बाद सात सितंबर को यह चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के बाद हमने पांच बार प्रक्रिया को अंजाम दिया। चंद्रयान-2 का समग्र हिस्सा फिलहाल धरती के इर्द गिर्द घूम रहा है। अगली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया बुधवार सुबह में शुरू होगी। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त को तड़के साढ़े तीन बजे हम ट्रांस लूनर इंजेक्शन नामक प्रक्रिया शुरू करेंगे। इस प्रक्रिया में चंद्रयान-2 पृथ्वी की कक्षा से बाहर होकर चंद्रमा की ओर बढ़ेगा। इसके बाद 20 अगस्त को हम चंद्रमा  की कक्षा में पहुंचेंगे। सिवन ने कहा कि फिलहाल अंतरिक्ष यान बहुत अच्छा कर रहा है और इसकी सभी प्रणाली सही से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसरो में वैज्ञानिक आगामी दिनों में खासकर दिसंबर में काफी व्यस्त होंगे जब अंतरिक्ष एजेंसी छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का अभियान शुरू करेगी।

 

 

06-08-2019
चंद्रयान-2 पहुंचा चंद्रमा के पास, पांचवी बार पृथ्वी की कक्षा सफलतापूर्वक बदली

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 ने मंगलवार को दोपहर बाद पृथ्वी की कक्षा पांचवी बार सफलतापूर्वक बदली। इसके साथ ही अब यह चंद्रमा के और पास पहुंच गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने ट्वीट करके कहा,“आज चंद्रयान-2 ने पांचवीं बार पृथ्वी की कक्षा बदली। चंद्रयान-2 ने मंगलवार को अपराह्न तीन बजकर चार मिनट पर पांचवीं बार सफलतापूर्व कक्षा बदली। उन्होंने कहा कि चंद्रयान सभी मापदंड़ों पर सही ढ़ंग से काम कर रहा है। इससे पहले 24 जुलाई को अपराह्न 2.52 बजे पहली बार चंदयान ने कक्षा बदली थी। इसके बाद 26 जुलाई को दूसरी बार,29 जुलाई को तीसरी बार और दो अगस्त को चौथी बार चंद्रयान ने पृथ्वी की कक्षा बदली थी। चंद्रयान-2 का 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण हुआ था, जिसके 16 मिनट बाद ही यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया था। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं, जो 48 दिन में तीन लाख 844 किमी की यात्रा पूरी करके चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं। पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं। चंद्रयान-2 के 20 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने की संभावना है और चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच संपर्क स्थापित करना है।

 

20-05-2019
25 से नौतपा, तीन दिन तक रहेगी भीषण गर्मी, जून में बारिश के योग 

नवापारा राजिम। रोहिणी नक्षत्र में नौतपा के 9 दिन के दौरान गर्मी बढऩे के साथ तेज हवा व आंधी चलने की संभावना है जिसमें बूंदाबांदी और हल्की बारिश भी हो सकती है। पंचांग की गणना के अनुसार सूर्य को रोहिणी में प्रवेश 25 मई की रात 8.20 बजे होगा। सूर्य का रोहिणी प्रवेश 8 जून को शाम 6.20 बजे तक रहेगा। इस दृष्टि से सूर्य का रोहिणी की कक्षा में तकरीबन 15 दिन का संचरण होगा। इन 15 में प्रथम नौ दिन नौपता के माने जाते हैं। इस दौरान मान्यता यह होती हैं कि जब ग्रहों की दृष्टि संबंध तथा चंद्र का दैनिक संचार की गणना से अलग राशियों से संपर्क होता हैं। तब वातावरण में तपिश की स्थिति का पानी गिरने की स्थिति बनती है। मान्यता यह भी हैं कि रोहिणी में तेज गति से पानी का गिरना अच्छा माना जाता हैं। बारिश के लिए सिस्टम सक्रिय होगा। इस बार भी मौसम विभाग के अनुमान लगाया हैं कि 25 मई तक तेज गर्मी पडऩे के बाद बारिश के लिए सिस्टम सक्रिय होगा। स्थानीय प्रभाव का भी असर होगा। वजह यह रहेगा कि सूर्य की तपिश कम होगी। 25, 26 और 27 मई को तपिश बढ़ेगी। इस दौरान बूंदाबांदी भी होगी फिर तीन दिन यानी 28, 29, 30 मई को उमस बढऩे के साथ हल्की बारिश के आसार हैं। 31 मई व 1 और 2 जून को तेज हवा और आंधी तूफान के साथ बारिश के योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रम्हदत्त शास्त्री, पं. कन्हैया महाराज, पं. रमाकांत महाराज के अनुसार मंगल-राहु का अंगारक योग और शनि-केतु की युति का तम सप्तक दृष्टि संबंध वातावरण में गर्मी पैदा करेगा। उमस बढ़ेगा और प्राकृतिक परिवर्तन के संकेत देगा।

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