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17-09-2020
कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले लोकसभा में अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने बिल के विरोध में चेतावनी देते हुए ऐलान किया था कि केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल कृषि संबंधी विधेयकों के विरोध में सरकार से इस्तीफा देंगी। बता दें कि केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार में अकाली दल की एकमात्र प्रतिनिधि थीं। हरसिमरत कौर ने इस्तीफे की जानकारी ट्वीट के जरिए दी है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व।
लोकसभा में बोलते हुए आज सुखबीर सिंह बादल ने साफ कहा कि शिरोमणि अकाली दल इस बिल का सख्त विरोध करता है। हर बिल, जो देश के लिए हैं, देश के कुछ हिस्से उसे पसंद करते हैं, कुछ हिस्सों में उसका स्वागत नहीं होता है, किसानों को लेकर आए इन तीन बिलों से पंजाब के 20 लाख हमारे किसान प्रभावित होने जा रहे हैं। 30 हजार आढ़तिए, 3 लाख मंडी मजदूर, 20 लाख खेत मजदूर इससे प्रभावित होने जा रहे हैं। सुखबीर बादल ने कहा, 'शिरोमणि अकाली दल किसानों की पार्टी है और वह कृषि संबंधी इन विधेयकों का विरोध करती है।’ निचले सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘ शिरोमणि अकाली दल ने कभी भी यू-टर्न नहीं लिया। बादल ने कहा, 'हम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथी हैं। हमने सरकार को किसानों की भावना बताई, हमने इस विषय को हर मंच पर उठाया। हमने प्रयास किया कि किसानों की आशंकाएं दूर हों लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।'
लोकसभा में कांग्रेस के अलावा दूसरे विपक्षी दलों ने बिल का विरोध किया है। कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कृषि उपज एवं कीमत आश्वासन संबंधी विधेयकों को ‘किसान विरोधी’ करार देते हुए गुरुवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि इन विधेयकों से जमाखोरी, कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा तथा उद्योगपतियों एवं बिचौलियों को फायदा होगा जबकि किसान बर्बाद हो जाएंगे। वहीं, भाजपा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी भारत बनाने के लिए यह कानून बन रहा है जो ऐतिहासिक साबित होगा। ये विधेयक कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये महत्वपूर्ण कदम हैं जो किसानों को मजबूत और समृद्ध बनाएंगे।

19-08-2020
जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डे दिए जाएंगे लीज पर,केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन और हवाई अड्डों जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से पट्टे पर देने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। फरवरी 2019 में प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के बाद पीपीपी मॉडल के माध्यम से अडानी एंटरप्राइजेज ने छह हवाई अड्डों ‘लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी’ के परिचालन के अधिकार हासिल किये थे। ये छह हवाई अड्डे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के स्वामित्व में हैं। अडानी एंटरप्राइजेज ने 14 फरवरी 2020 को एएआई के साथ तीन हवाई अड्डों ‘अहमदाबाद, मंगलुरु और लखनऊ’ के लिये समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। मंत्रिमंडल ने इन तीन हवाई अड्डों को अडाणी को पट्टे पर देने के प्रस्ताव को जुलाई 2019 में मंजूरी दी थी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मंत्रिमंडल ने पीपीपी मॉडल के माध्यम से जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डों को पट्टे पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कोविड-19 के कारण एएआई ने इस साल जून में अडाणी को इन तीन हवाई अड्डों अहमदाबाद, मंगलुरु और लखनऊ’ का प्रबंधन संभालने के लिये तीन और महीने दिए। इसका मतलब है कि उसे इनका प्रबंध सभालने के लिए 12 नवंबर तक का समय है। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक ट्वीट में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र के दूरदर्शी नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण निर्णय में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम में स्थित तीन अन्य हवाई अड्डों को पीपीपी आधार पर पट्टे पर देने की मंजूरी दे दी है।’ उन्होंने कहा, ‘इन हवाई अड्डों पर पीपीपी से न सिर्फ हवाई यात्रियों को कुशल और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मुहैया कराने में मदद मिलेगी, बल्कि राजस्व बढ़ाने में भी एएआई को मदद मिलेगी। इससे एएआई टियर- II और टियर III शहरों में अधिक हवाई अड्डों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।’

 

 

19-08-2020
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी सीईटी के लिए राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को साझा पात्रता परीक्षा (सीईटी) आयोजित करने के लिए राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी दी। सीईटी के लिए राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्वतंत्र भारत के बड़े ऐतिहासिक सुधारों में से एक बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इसे अहम फैसला बताते हुए कहा कि एजेंसी के गठन से करोड़ों युवाओं को फायदा होगा। सीईटी के जरिए अब कई तरह के टेस्ट की जरूरत नहीं होगी,जिससे अभ्यर्थियों का समय और संसाधन बचेगा। इससे पारदर्शिता को भी बहुत बड़ा बल मिलेगा। बैठक के बाद सूचना एव प्रसारण मंत्री जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि युवाओं को फिलहाल नौकरी के लिए कई अलग अलग परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। ऐसी परीक्षाओं के लिए अभी लगभग 20 भर्ती एजेंसियां हैं और परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थियों को दूसरे स्थानों पर भी जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में परेशानियां दूर करने की मांग काफी समय से की जा रही थी।

इसे देखते हुए मंत्रिमंडल ने साझा पात्रता परीक्षा लेने के लिए ‘राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी’ के गठन का निर्णय किया गया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया और कहा कि प्रारंभ में तीन एजेंसियों की परीक्षाएं राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के दायरे में आएंगी। एक अधिकारी ने बताया कि शुरू में इसके दायरे में रेलवे भर्ती परीक्षा, बैंकों की भर्ती परीक्षा और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) आएंंगे। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में हासिल स्कोर तीन साल तक मान्य होंगे। परीक्षा आयोजित करने के लिए हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) की मेरिट लिस्ट तीन साल तक मान्य रहेगी। इस दौरान उम्मीदवार अपनी योग्यता और पसंद के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। अब राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी केंद्र कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) का आयोजन करेगी। सरकारी नौकरी के चयन के लिए विभिन्न परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यर्थियों को अब एक ही परीक्षा में बैठना होगा। सरकार के सचिव सी चंद्रमौली ने कहा कि केंद्र सरकार में लगभग बीस से ज्यादा भर्ती एजेंसियां हैं। हम अब तक सिर्फ तीन एजेंसी की परीक्षा को कॉमन बना रहे हैं। 

 

 

02-08-2020
नई शिक्षा नीति में स्कूली बच्चों को सुबह पौष्टिक नाश्ता का प्रस्ताव, होगी छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मध्याह्न भोजन के साथ सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को नाश्ता मुहैया कराने का प्रावधान रखने का भी प्रस्ताव है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई इस शिक्षा नीति में कहा गया है कि सुबह के समय पोषक नाश्ता मिलना ज्ञान-संबंधी असामान्य मेहनत वाले विषयों की पढ़ाई में लाभकर हो सकता है। इसी के मद्देनजर नई शिक्षा नीति में प्रस्ताव किया गया है कि मध्याह्न भोजन के दायरे का विस्तार कर उसमें नाश्ते का प्रावधान जोड़ा जाए। शिक्षा नीति में कहा गया, ‘जब बच्चे कुपोषित या अस्वस्थ होते हैं तो वे बेहतर रूप से सीखने में असमर्थ हो जाते हैं। इसलिए, बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य सहित) पर ध्यान दिया जाएगा। पोषक भोजन और अच्छी तरह से प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं, काउंसलर, और स्कूली शिक्षा प्रणाली में समुदाय की भागीदारी के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली के अलावा विभिन्न सतत उपायों के माध्यम से कार्य किया जाएगा।’ इसमें कहा गया, ‘शोध बताते हैं कि सुबह के समय पोषक नाश्ता ज्ञान-संबंधी असामान्य मेहनत वाले विषयों की पढ़ाई में लाभकारी हो सकता है।

इसलिए बच्चों को मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त साधारण लेकिन स्फूर्तिदायक नाश्ता देकर सुबह के समय का लाभ उठाया जा सकता है।’ जिन स्थानों पर गरम भोजन संभव नहीं है,उन स्थानों पर साधारण लेकिन पोषक भोजन मसलन मूंगफली या चना गुड़ और स्थानीय फलों के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है।नई शिक्षा नीति में कहा गया है,‘सभी स्कूली छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जाए और उनका शत प्रतिशत टीकाकरण हो। इसकी निगरानी के लिए स्वास्थ्य कार्ड भी जारी किए जाएंगे।’ नई नीति में प्रस्ताव किया गया है कि पांच साल की उम्र के पहले सभी बच्चों को ‘प्रारंभिक कक्षा’ या ‘बालवाटिका’ को भेजा जाए। इसमें कहा गया है, ‘प्रारंभिक कक्षा में पढ़ाई मुख्य रूप से खेल आधारित शिक्षा पर आधारित होगी और इसके केंद्र में ज्ञान-संबंधी, भावात्मक और मनोप्ररेणा क्षमताओं के विकास को रखा गया है। मध्याह्न भोजन कार्यक्रम का विस्तार प्राथमिक स्कूलों की प्राक्-प्रवेश कक्षाओं में भी किया जाएगा।’ शिक्षा नीति के तहत पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई उनकी मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी, बोर्ड परीक्षाओं के महत्व को इसमें कुछ कम किया गया है।

29-07-2020
नई शिक्षा नीति में स्कूल से लेकर कॉलेज तक 5+3+3+4 पैटर्न पर होगी पढ़ाई

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का पुन: नामकरण शिक्षा मंत्रालय किया गया है। नई शिक्षा नीति में बड़े बदलाव करते हुए भाषा के विकल्प को बढ़ा दिया गया है। अब छोटे बच्चों को शुरुआत से ही स्थानीय भाषा के साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा दिए जाने का प्रस्ताव है। नई शिक्षा नीति में कक्षा छह से आठवीं के बीच कम से कम दो साल का लैंग्वेज कोर्स भी कराये जाने का प्रस्ताव है। इसके साथ-साथ नई शिक्षा नीति में सरकार ने छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके लिए 3 से 18 साल के छात्रों के लिए 5+3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है। इसके तहत छात्रों की शुरुआती स्टेज की पढ़ाई के लिए 5 साल का प्रोग्राम तय किया गया है। इनमें 3 साल प्री-प्राइमरी और क्लास-1 और 2 को जोड़ा गया है। इसके बाद क्लास-3, 4 और 5 को अगले स्टेज में रखा गया है। इसके अलावा क्लास-6, 7, 8 को तीन साल के प्रोग्राम में बांटा गया है। आखिर क्लास-9, 10, 11, 12 को हाई स्टेज में रखा गया है। एक्सट्रा कैरिकुलर एक्टिविटीज को मेन कैरिकुलम में शामिल किया जाएगा। गिफ्टेड चिल्ड्रेन एवं गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। कक्षा 6 के बाद से ही वोकेशनल को जोड़ जाएगा। नई  शिक्षा नीति के तहत नेशनल क्यूरिकुलम फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा,जिसमें ईसीई, स्कूल, टीचर्स और एडल्ट एजुकेशन को जोड़ा जाएगा। बोर्ड एग्जाम को भाग में बांटा जाएगा। बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में लाइफ स्किल्स को जोड़ा जाएगा। वर्ष 2030 को हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। विद्यालयी शिक्षा के निकलने के बाद हर बच्चे के पास कम से कम लाइफ स्किल होगी।

03-06-2020
किसानों के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, अनाज, दाल, प्याज आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से होंगे बाहर

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को साढ़े छह दशक पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी ताकि अनाज, दलहन और प्याज सहित खाद्य वस्तुओं को नियमन के दायरे से बाहर किया जा सके।  उम्मीद है कि इससे इन वस्तुओं का व्यापार मुक्त तरीके से किया जा सकेगा और इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।मंत्रिमंडल ने कृषि उपज के बाधा मुक्त व्यापार को सुनिश्चित करने के लिए कृषि उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सहायता) अध्यादेश, 2020' को भी मंजूरी दी। सरकार ने किसानों की स्थिति को, प्रोसेसर, एग्रीगेटर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के सामने सशक्त बनाने के लिए मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 पर 'किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौते' को भी मंजूरी दी।कैबिनेट के फैसलों की घोषणा करते हुए,कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,‘इससे कृषि क्षेत्र की सूरत बदलेगी और इसके साथ-साथ भारत के किसानों की मदद करने की दिशा में इसका दूरगामी प्रभाव होगा।’ उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रस्तावित संशोधन से अत्यधिक विनियामकीय हस्तक्षेप के संबंध में निजी निवेशकों को आशंकायें खत्म होंगी।तोमर ने कहा कि 'कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020' राज्य कृषि उपज विपणन कानून के तहत अधिसूचित बाजारों के अहाते के बाहर अवरोध मुक्त अंतर-राज्य और अन्य राज्यों के साथ व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा, ‘यह देश में व्यापक रूप से विनियमित कृषि बाजारों को खोलने का एक ऐतिहासिक कदम है।तोमर ने कहा कि मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अध्यादेश, 2020 पर किसानों के (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौते से किसान, किसी प्रकार के शेषण के भय के बिना, प्रोसेसर, एग्रीगेटर, बड़े खुदरा विक्रेताओं, निर्यातकों आदि से समान स्तर पर जुड़ने के लिए सशक्त होंगे।

04-03-2020
10 सरकारी बैंकों के विलय के बाद बनेंगे 4 बड़े बैंक, केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुआ निर्णय

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कई प्रस्‍तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्‍तावों में कंपनी कानून में संशोधन,10 सरकारी बैंकों का आपस में विलय कर चार बड़े बैंक बनाने और एयर इंडिया के विनिवेश के लिए एफडीआई नीति में बदलाव जैसे प्रस्‍ताव शामिल हैं। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि मंजूरी मिलने के बाद पीएसयू बैंकों का विलय एक अप्रैल से प्रभावी होगा।
उल्‍लेखनीय है कि सरकार ने पंजाब नेशनल बैंक के साथ ओबीसी और यूनाइटेड बैंक का विलय करने की घोषणा की है। इसके अलावा केनरा बैंक और सिंडीकेट का विलय किया जाएगा।

यूनियन बैंक के साथ आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का विलय होगा। इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक का आपस में विलय होगा। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सिव‍िल एविएशन सेक्‍टर में विदेशी निवेश के नियमों में भी ढील देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद एयर इंडिया में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश का भी रास्‍ता साफ हो गया है। मंत्रीमंडल ने कंपनी कानून में भी बदलाव को मंजूरी दी है,जिसके तहत 40 कानूनों को आपराधिक दर्जा से बाहर किया जाएगा। इस बदलाव के बाद अब घरेलू कंपनियां विदेश में लिस्‍ट हो पाएंगी।

 

29-01-2020
गर्भपात की अवधि में बदलाव को केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी, आगामी सत्र में लाया जाएगा विधेयक    

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गर्भपात कराने की अनुमति के लिए अधिकतम सीमा 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह करने की अनुमति दी। इसका उद्देश्य गर्भपात अधिनियम (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट) 1971 में संशोधन करना है। इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि मंत्रिमंडल ने गर्भपात कराने की अनुमति के लिए अधिकतम सीमा 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह करने की मंजूरी दे दी है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें 20 सप्ताह में गर्भपात कराने पर मां की जान खतरे में होती है, लेकिन 24 सप्ताह में गर्भपात कराना सुरक्षित होगा। 

 

05-12-2019
भारत को इसराइल बना देगा नागरिकता संशोधन विधेयक : असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल गई। इसके जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इस बिल में मुस्लिम समुदाय के लिए नागरिकता देने की बात नहीं कहीं गई है। इस बिल को अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है। वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियां इस बिल के विरोध में उतर आई हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को लेकर सरकार को घेरते हुए, उनकी मंशा पर सवाल उठाए हैं।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक बिल लाने के पीछे की सरकार की मंशा है कि वह हिंदुस्तान को एक धर्म आधारित देश बना दें। इस बिल के लागू होने के बाद हिंदुस्तान और इसराइल में अब कोई फर्क नहीं रहेगा। संविधान में धर्म के आधार पर नागरिकता देने की कोई बात ही नहीं है। उन्होंने सवाल पूछा कि अगर कोई नास्तिक होगा तो आप क्या करेंगे? इस तरह का कानून बनाने के बाद हम पूरी दुनिया में हमारा मजाक बनेगा। भाजपा सरकार हिंदुस्तान के मुसलमानों को संदेश देना चाहती है कि आप अव्वल दर्जे के शहरी नहीं हैं बल्कि दूसरे दर्जे के शहरी हैं।

ओवैसी ने कहा कि अगर मीडिया रिपोर्ट सही है कि पूर्वोत्तर राज्यों को प्रस्तावित सीएबी कानून से छूट दी जाएगी, तो यह मौलिक अधिकारों से संबंधित अनुच्छेद 14 का घोर उल्लंघन होगा क्योंकि आपके पास इस देश में नागरिकता पर दो कानून नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह धर्म के आधार पर नागरिकता देगा, जो हमारे संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। औवेसी ने कहा कि सीएबी लाना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक अपमानजनक होगा क्योंकि आप द्वी-राष्ट्र सिद्धांत को पुनर्जीवित कर रहे हैं। एक भारतीय मुस्लिम के रूप में, मैंने जिन्ना के द्वी-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज कर दिया। अब आप एक कानून बना रहे हैं, जिसमें दुर्भाग्य से, आप द्वी-राष्ट्र सिद्धांत की याद दिला रहे हैं।

03-07-2019
तीन हवाई अड्डों के निजीकरण को मंत्रिमंडल की मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अहमदाबाद, लखनऊ और मेंगलुरु हवाई अड्डों संचालन का जिम्मा निजी हाथों में सौंपने के फैसले पर बुधवार को अपनी मुहर लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहाँ संसद भवन एनेक्सी में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि अहमदाबाद, लखनऊ और मेंगलुरु हवाई अड्डे सार्वजनिक निजी साझेदारी के आधार पर लंबी अवधि के लीज पर निजी कंपनियों को दिये जायेंगे। अभी इन हवाई अड्डों का संचालन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के पास है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पिछले दिनों छह हवाई अड्डों के निजीकरण के लिए निविदा आमंत्रित की थी। सभी छह हवाई अड्डों के लिए इस साल फरवरी में अदानी समूह की बोली को मंत्रालय ने मंजूरी दी थी। ये तीनों हवाई अड्डे उसी का हिस्सा हैं जिनके निजीकरण को आज मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गयी। जावड़ेकर ने बताया कि इन तीनों हवाई अड्डों से एएआई को जितनी आमदनी होती है, लीज पर देने से उसकी 10 गुणा राशि एकमुश्त मिल जायेगी। इसके अलावा निजी संचालकों को होने वाले मुनाफे में भी उसकी हिस्सेदारी होगी।

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