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13-01-2021
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने निजी स्कूलों को जारी किए 101 करोड़ रुपए

रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बुधवार को प्रदेश के 4 हजार 473 निजी स्कूलों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति राशि 101 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह राशि सीधे उनके खाते में आनलाइन ट्रांसफर की गई है। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है जहां सिर्फ कोरोना काल में 51,985 बच्चों को प्रवेश दिलाकर व्यवस्थित तरीके से ऑनलाइन राशि भेजी गई है। अब तक शिक्षा के अधिकार के तहत 33 लाख 65 हजार 552 विद्यार्थी लाभांवित हुए हैं।शिक्षा के अधिकार के मामले में छत्तीसगढ़ के इस मॉडल को ओडिशा, झारखंड और आसाम राज्यों में भी अपनाया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार शिक्षा के अधिकार की राशि ऑनलाइन स्कूलों को प्रदान की गई है। लंबे समय से यह मांग बार बार आ रही थी कि निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत आने वाले वंचित वर्ग के बच्चों की फीस समय पर नहीं मिल पा रही है। इसलिए राशि राज्य से सीधे खाते में भुगतान की व्यवस्था की गई है। इस पहल से पूरी व्यवस्था पारदर्शी होगी। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बावजूद वर्तमान शैक्षणिक सत्र में जनवरी 2021 की स्थिति में 51 हजार 985 बच्चे प्रवेश ले चुके हैं। वर्ष 2019. 20 में प्रदेश के निजी विद्यालयों को शिक्षण स्कूल की प्रतिपूर्ति के लिए भुगतान योग्य 5 हजार 403 विद्यालय थे। इनमें से 759 विद्यालयों ने कोई दावा नहीं किया। 16 ऐसे विद्यालय हैं, जिनका बैंक विवरण नहीं हैं। 143 विद्यालयों का बैंक खाता व्यक्ति विशेष के नाम से हैं। परीक्षण के बाद वास्तविक भुगतान योग्य विद्यालयों की संख्या 4 हजार 473 है। वर्ष 2018.19 एवं 2019.20 के शेष भुगतान के लिए आवश्यक राशि 7 करोड़ 67 लाख 455 रूपए है। वर्ष 2020.21 में 51 हजार 985 बच्चों ने प्रवेश लिया। शिक्षा के अधिकार के तहत अध्ययनरत छात्रों की संख्या 33 लाख 65 हजार 552 है। वर्ष 2020.21 के लिए आवश्यक राशि 159 करोड़ रुपए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री के आवास कार्यालय में कार्यक्रम के दौरान संचालक लोक शिक्षण एवं समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक जितेन्द्र कुमार शुक्ल, कार्यक्रम के सहायक संचालक व नोडल अधिकारी अशोक कुमार बंजारा, सहायक संचालक प्रशांत पाण्डेय, बैंक के अधिकारी और इन्डस एक्शन संस्था के पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

06-08-2020
आमचो बस्तर रेडियो लाऊडस्पीकर से पढ़ाई व्यवस्था का निरीक्षण किया कलेक्टर रजत बंसल ने

रायपुर/जगदलपुर। बस्तर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत भाटपाल में संचालित आमचो बस्तर रेडियो लाउडस्पीकर से पढ़ाई व्यवस्था का जायजा लिया कलेक्टर रजत बंसल ने। इस दौरान उन्होंने ग्राम के बच्चों और उनके पालकों से लाउडस्पीकर से पढ़ाई व्यवस्था पर चर्चा किए। सभी ने इस व्यवस्था की सराहना किए। कलेक्टर बंसल ने बच्चों से प्राप्त किए शिक्षा से मिली सीख का भी आँकलन किए। 

ज्ञात हो कि कोविड-19 काल में जिला प्रशासन के नवाचार लाउडस्पीकर से पढ़ाई व्यवस्था को अब पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। इस व्यवस्था का प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री व जिला प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने सराहना की थी। ग्राम पंचायत भाटपाल में लाउडस्पीकर से पढ़ाई व्यवस्था का सफल प्रयोग के उपरांत जिले के कई पंचायतों में इसका उपयोग किया जा रहा है। इस लाऊडस्पीकर से बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ कोविड-19 के प्रति जागरूकता का प्रचार, कृषि, पोषण, स्वास्थ्य की भी जानकारी दी जा रही है।

01-07-2020
डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने स्वेच्छानुदान से जरूरतमंदों को दी 10.40 लाख रूपए की सहायता राशि

रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने स्वेच्छानुदान मद से जरूरतमंदों की सहायता प्रदान की है। उन्होेंने बलरामपुर जिले के विकासखंड वाड्रफनगर क्षेत्र में एक दिवसीय प्रवास के दौरान स्वेच्छानुदान मद से 156 हितग्राहियों को 10 लाख 40 हजार रूपए की राशि का चेक वितरित किया। डॉ. टेकाम ने वाड्रफनगर विकासखंड के रघुनाथ नगर वाड्रफनगर के शासकीय स्कूल में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली 1409 बालिकाओं को साइकिल वितरण की। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.टेकाम कहा कि कोरोना काल में भी साइकिल वितरण का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने एक दिवसीय प्रवास के दौरान विकासखंड वाड्रफनगर के सरना सहकारी समिति में बन रहे धान खरीदी चबूतरा निर्माण का भी अवलोकन किया। डॉ. टेकाम ने ग्राम पंचायत झापर में उचित मूल्य दुकान से चावल के वितरण में अनियमितता की शिकायत पर तत्काल वाड्रफनगर के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को जांच कर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर हरिहर प्रसाद यादव, अशोक जायसवाल, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल सदस्य जयप्रकाश जायसवाल, जनपद सदस्य अनिल जायसवाल, राजेश जायसवाल सहित जिला प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

23-06-2020
शिक्षा के मुख्य स्तंभ बालक, पालक और शिक्षक: डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम

रायपुर। यदि शिक्षक अपना काम ठीक नहीं करे तो बच्चों की पढ़ाई ठप्प हो जाएगी। उसी प्रकार विद्यार्थी शिक्षक के निर्देशानुसार घर पर और स्कूल में नियमित पढ़ाई नहीं करें तो स्कूल का परिणाम अच्छा नहीं आएगा। स्कूल के संचालन और दिन-प्रतिदिन के कार्यों की देखरेख पालक नहीं करें और बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दें, तो स्कूल के होने और न होने का कोई अर्थ नहीं होगा। प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने इस आशय के विचार आज पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों, विद्यार्थियों और पालकों के बीच के संबंध को मजबूत करने के लिए प्रदेशव्यापी ’गुरू तुझे सलाम’ अभियान के तीसरे चरण के कार्यक्रम में पालकों से रूबरू होते हुए व्यक्त किए।स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूलों के संचालन के लिए प्रमुख स्तंभ हैं- शिक्षक-विद्यार्थी और पालक। इनका स्कूल के विकास के लिए मिलकर योगदान देना अत्यंत आवश्यक है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा यह प्रयास पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम अंतर्गत ’गुरू तुझे सलाम’ अभियान में सफल होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि सभी पालक सक्रिय हैं और न केवल अपने बच्चों के लिए ऑनलाईन पाठों को लाभ उठाने मोबाइल और डाटा देते हैं, बल्कि स्वयं भी इस पोर्टल से जुड़कर पालकों के लिए उपलब्ध करावाएं गए मंच का बेहतर उपयोेग करते हुए आज राज्य स्तर तक पहुंच गए हैं। डॉ. टेकाम ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के सभी स्कूलों में शाला प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूल में अच्छा कार्य करने के लिए इन समितियों की सक्रियता बहुत आवश्यक है। शाला प्रबंधन समिति में मुख्यतः पालकों को ही शामिल किया जाता है। ताकि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में अच्छी पढ़ाई की सुविधा दिलवाने में मदद कर सकें और गुणवत्ता के मामले में बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरते। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से पालकों द्वारा जो महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, उसके आधार पर आगे स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


इस कार्यक्रम में प्रदेश के 28 जिलों से चयनित पालकों ने ऑनलाइन शिक्षण के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के संयुक्त संचालक योगेश शिवहरे, सहायक संचालक समग्र शिक्षा डॉ. एम.सुधीश, सहायक संचालक एवं मीडिया प्रभारी प्रशांत कुमार पाण्डेय, सत्यराज आर,आशीष गौतम भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में गजेन्द्र कुमार साहू (बालोद), राजू सोढ़ी (बीजापुर), शिव कुमार धु्रव (बिलासपुर), मनीष कुमार (धमतरी), महेश साहू (दुर्ग), गणेश राम (गौरला-पेण्ड्रा-मरवाही), महेन्द्र पोढ़ (जांजगीर -चांपा), सेवर सिंह (जशपुर), शिव साहू (कबीरधाम), नीलकंठ सिन्हा (कांकेर), सूरज कुमार (कोरिया), विरेन्द्र ठाकुर (महासमुन्द), सतीश कुमार जायसवाल (मुंगेली), बसन्त कुमार लावत्रे (नारायणपुर), बलराम देवांगन (रायपुर), राजेश दास मोंगरे (राजनांदगांव), मड़वाडी पैकरा (सूरजपुर), बंधनराम (सरगुजा) और सुनीता मानिकपुरी (बलौदाबाजार), बिफना मण्डल (बलरामपुर), अनीता नेताम (बस्तर), रूखसाना बानो (बेमेतरा), यमुना ठाकुर (दंतेवाड़ा), मंजु श्रीवास (गरियाबंद), बसन्ती यादव (कोंडागांव), सहोदरा बाई (कोरबा), कविता निषाद (रायगढ़), शहनाज खान (सुकमा) आदि पालक इस कार्यक्रम में ऑनलाईन जुड़ कर अपना विचार व्यक्त किये।

 

02-06-2020
स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर का होना आवश्यक : डॉ. टेकाम

रायपुर। प्रदेश के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर का होना आवश्यक है। कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए छात्रावास-आश्रमों के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभाग द्वारा संचालित छात्रावास-आश्रमों के अधीक्षकों के प्रशिक्षण कार्यशाला में उपरोक्त बातें कहीं। डॉ. टेकाम ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले छात्रावास-आश्रमों को पुरस्कृत किया जाएगा। डॉ.टेकाम ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 3 हजार 278 छात्रावास-आश्रमों संचालित हैं, जिनमें लगभग 2 लाख बच्चे रहते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाई-लिखाई का अच्छा वातावरण प्रदान करना अधीक्षकों की जवाबदारी है। अधीक्षक यह प्रयास करें कि छात्रावास-आश्रमों में रहने वाले बच्चे अच्छे से पढ़े ताकि वे बेहतर कैरियर का निर्माण कर सके। छात्रावास-आश्रमों में शुद्ध पेयजल के लिए आरओ वाटर यूनिट की व्यवस्था के साथ किचन की साफ-सफाई और खाद्यान्न सामग्री को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी केन्द्रों की रंगाई पोताई की जाए और वहां व्यवस्थित पुस्तकालय की स्थापना की जाए। केरियर कॉउंसिंलिंग के लिए पुस्तकालय में समाचार पत्र-पत्रिकाएं भी उपलब्ध रहें।डॉ. टेकाम ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए सुबह का वातावरण सबसे अच्छा होता है। अधीक्षक पालक के रूप में बच्चों की देखभाल करें। जहां छात्रावास-आश्रमों में स्थान रिक्त हैं वहां मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बाड़ी विकास के कार्य किए जाएं। आश्रम-छात्रावासों का ऐसा वातावरण बनाएं जहां जाने की इच्छा हो। बच्चों की मानसिकता के आधार पर विषय का चयन कर केरियर कॉउंसिंलिंग प्रदान किया जाए। स्थानीय बोली के माध्यम से बच्चों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों का वातावारण बेहतर बनाने में अधीक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का आयोजन छात्रावास-आश्रमों को बेहतर बनाने के लिए किया गया है, इसका लाभ बच्चों को मिलेगा।विभाग की संचालक शम्मी आबिदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण का प्रभाव बच्चों पर न पड़े समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां कर ली जाएं। क्वारेंटाईन सेंटर पूर्ण तरह से सेनिटाइज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय का सहयोग लिया जाए। इसी प्रकार कर्मचारियों की सुरक्षा भी जरूरी है। इस अवसर पर उपायुक्त संजय गौड़, के.आर. परस्ते, सहायक संचालक अरविन्द जायसवाल, प्राचार्य प्रयास कन्या छात्रावास परिसर रायपुर मंजूला तिवारी, प्रशिक्षक बी.आर. साहू भी उपस्थित थे।

 

15-05-2020
पढ़ाई के सथ विभिन्न कलाओं के गुर भी सिखेंगे बच्चें, डॉ. प्रेमसाय सिंह ने शुरू किया ''आई एम द वन कार्यक्रम''

रायपुर। पढ़ई तुहंर दुआर वेबपोर्टल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप शिक्षा विभाग ने और वृहद स्वरूप दे दिया है। इस पोर्टल में आई एम द वन कार्यक्रम को भी अब शामिल किया गया है। इसके जरिए स्कूली बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अब विभिन्न कलाओं की भी शिक्षा दी जाएगी। बच्चे अपनी रूचि के अनुसार इस वेबपोर्टल के माध्यम से अपनी कला-प्रतिभा को भी निखार सकेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय में आई एम द वन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्कूल शिक्षा विभाग की इस पहल से स्कूली बच्चें ग्रीष्म अवकाश में पढ़ाई के साथ ही मनोरंजक ढंग विभिन्न कलाओं को सीख सकेंगे।  

इस कार्यक्रम के ऑनलाईन प्रोग्राम में देश के प्रसिद्ध क्रिकेटर वीवीएस लक्षमण, फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी, किशनगढ़ शैली के चित्रकार पद्मश्री तिलक गीताई, योग गुरू आचार्य प्रतिष्ठा और कोरियोग्राफर सुमीत नामदेव के दिशा-निर्देशन में स्कूली बच्चे, क्रिकेट, योग, कोरियोग्राफी, पेंटिंग, फोटोग्राफी आदि के गुर सीख सकेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि पढ़ई तुंहर दुआर वेबपोर्टल में पाठ्यपुस्तकों के अलावा अब बच्चों को मनोरंजक ढंग से विभिन्न कलाओं की शिक्षा के लिए शॉर्ट-टर्म कोर्स उपलब्ध होंगे। डॉ.टेकाम ने छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षकों, पालकों और बच्चों से अपील की है कि लॉक डाउन के समय और बाद में भी अपने बच्चों को नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित करें। इससे बच्चों की रूचि, जिज्ञासा एवं बौद्धिक विकास में वृद्धि होगी।

डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि राज्य में स्कूल 20 मार्च से बंद हैं। इतनी लंबी अवधि तक बच्चों का घर पर रहना एक बहुत मुश्किल काम है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विगत माह 7 अप्रैल को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने ऑनलाईन व्यवस्था पढ़ई तुंहर दुआर के नाम से शुरू की। इस योजना के राज्य में उत्साहजनक नतीजे मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक 20 लाख से अधिक बच्चे और एक लाख 80 हजार से अधिक शिक्षक इस कार्यक्रम से जुड़ गए हैं। इसके अलावा महाविद्यालयीन विद्यार्थी और प्राध्यापक भी इससे जुड़ते जा रहे हैं।

डॉ. टेकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में इसके लिए आइडिया टेक्नोवेशन ने इस अवधि में राज्य में बच्चों के लिए उनका विशेष कार्यक्रम आई एम द वन के निशुल्क उपयोग किए जाने का प्रस्ताव दिया है। इस कार्यक्रम में बच्चों और बड़ों के लिए बहुत सारे आकर्षक और उपयोगी ऑनलाइन कोर्सेस हैं, जो बहुत अच्छी गुणवत्ता के बनाए गए हैं। इस कार्यक्रम से सहजता से जुड़ा जा सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाईट cgschool.in (सीजीस्कूलडॉटइन) पर मोबाइल से इसमें पंजीयन कर सीधे जुड़ सकते हैं और विभिन्न कोर्सेस में से अपनी इच्छा के कोर्स में शामिल होकर सुविधानुसार निर्धारित समय में इसे पूरा कर सकते हैं।

06-05-2020
वनवासियों को जमीन का मिले वाजिब हक: टेकाम


रायपुर। आदिम जाति तथा अनसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि जंगल को बचाने का काम वनवासियों ने ही किया है। वनों का संरक्षण और वनवासियों को उनका अधिकार मिले,जिससे उनकी जीविका उपार्जन सुनिश्चित हो सके। वनवासियों को उनकी जमीन का वाजिब हक मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर वनाधिकार मान्यता पत्र क्रियान्वयन के लिए डॉ. टेकाम बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला पंचायतों के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विभाग के सचिव डीडी सिंह भी उपस्थित थे। प्रशिक्षण के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए।डॉ. टेकाम ने कहा कि संचार क्रांति के माध्यम से जिला पंचायत प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों पर विकास के साथ ही वनाधिकार अधिनियम के पालन की जिम्मेदारी भी है। पंचायत प्रतिनिधि अपने जिले में 13 दिसंबर 2005 से पहले परम्परागत रूप से वनों में निवास कर रहे है उन्हें वनाधिकार मान्यता पत्र प्रदान किए जाने है। डॉ. टेकाम ने बताया कि प्रदेश में मार्च 2020 तक 8 लाख 11 हजार 200 प्राप्त आवेदनों में से 4 लाख 19 हजार 825 प्रकरणों पर वनाधिकार पत्र दिए गए है। इसी प्रकार सामुदायिक वनाधिकार के लिए प्राप्त 35 हजार 588 आवेदनों में से 28 हजार वनाधिकार पत्र वितरित किए जा चुके है। पंचायत प्रतिनिधि अपने जिलों में वनवासियों को पात्रता अनुसार वनाधिकार मान्यता पत्र दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। वनाधिकार कानून का क्रियान्वयन संवैधानिक रूप से हो। उन्होंने बताया कि नियम और क्रियान्वयन के लिए सदस्यों को विभाग द्वारा मार्गदर्शिका भेजी गई है। इसमें दावा-आपत्ति संबंधी आवेदन का प्रारूप भी है। इसके अनुसार जानकारी देकर संबंधित पात्र हितग्राही को नियमानुसार मदद दी जा सकती है।


प्रशिक्षण में बताया गया कि वनाधिकार अधिनियम 2006 में संसद के द्वारा पारित हुआ और जनवरी 2008 से लागू हुआ है। हजारों वर्षों से आदिवासी जंगल में निवास कर रहे है। उस जमीन की जानकारी अभिलेख में दर्ज नहीं होने से वनवासियों को योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाई हो रही है। अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित आदिवासी और परम्परागत अन्य वनवासियों को वनाधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया जाना है। जंगलों में जिस जमीन पर वे 13 दिसंबर 2005 से पूर्व काबिज है और वहां वास्तविक रूप से जीविकापार्जन पर निर्भर है। व्यक्तिगत पात्र हितग्राहियों को अधिकतम 10 एकड़ तक काबिज भूमि पर दावा करने का अधिकार है। वनभूमि में सभी प्रकार के जंगल शामिल हैं। वनाधिकार व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से प्रदान किए जाने है। विशेषरूप से कमजोर जनजातियों को धारा-3-ए के तहत पर्यावास का अधिकार दिया गया है। छत्तीसगढ़ के अधिसूचित क्षेत्र में 5 हजार 55 ग्राम पंचायत है जिसके अंतर्गत 10 हजार ग्राम आते है। अधिनियम के तहत प्रत्येक गांव के लिए कम से कम एक ग्रामसभा का अनिवार्य रूप से गठन होना चाहिए। एक से अधिक भी ग्रामसभा गठित की जा सकती है। ग्रामसभा की पहली बैठक में सभी मतदाओं में से न्यूनतम 10 सदस्य और 15 सदस्य की समिति गठित होती है। इसमें दो तिहाई आदिवासी और एक तिहाई महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। अध्यक्ष और सचिव का चयन वनाधिकार समिति करती है। पंचायत प्रतिनिधि यह ध्यान दे की ग्राम स्तर पर गठित समिति नियमानुसार सही ढंग से कार्य करें।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि ग्रामसभा की ओर से वनाधिकार समिति को दावा-आपत्ति प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिग्रहित किया जाता है। दावा-पत्र को पंजीयन कर रजिस्टर में दर्ज करें। समिति के सदस्य दावाकर्ता की जमीन का निरीक्षण करें। निरीक्षण के समय दावाकर्ता या उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति मौके पर उपस्थित रहे। समिति निरीक्षण के समय दावाकर्ता की काबिज जमीन की जानकारी साक्ष्य के रूप में दे। रिपोर्ट तैयार करने के पश्चात वनाधिकार समिति उसे ग्रामसभा में प्रस्तुत कर दावा-आपत्ति पर जानकारी देगी। ग्रामसभा संकल्प पारित करेगी। यह संकल्प दावा-आपत्ति के 50 प्रतिशत व्यक्तियों की उपस्थिति में होना आवश्यक है। ग्रामसभा संकल्प पारित कर सूची खंडस्तरीय समिति को भेजेगी। खंडस्तरीय समिति के अध्यक्ष अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सहित छह सदस्य होते है। यह समिति खसरा-नक्शा उपलब्ध कराती है। खंडस्तरीय समिति दावा-आपत्ति का सूक्ष्म परीक्षण करती है। खंड स्तरीय समिति के निर्णय से संतुष्ट नहीं होने पर 60 दिन के अंदर जिला स्तरीय समिति में दावा-आपत्ति की जा सकती है। दावा की स्वीकृति और निरस्ती की जानकारी सदस्यों को रखनी चाहिए। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति में वनमण्डलाधिकारी और सहायक आयुक्त आदिवासी के साथ जिला पंचायत के तीन सदस्यों में से दो आदिवासी और एक महिला सदस्य होते है। वनाधिकार मान्यता पत्र प्रदान करने का अधिकार जिला स्तरीय समिति को है। दावा को निरस्त करने का अंतिम अधिकार भी जिला स्तरीय समिति को है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मार्गदर्शन के लिए समिति गठित है। 

 

14-03-2020
मंत्री जी भूल गए हैं मिनीमाता की पुण्यतिथि नहीं जयंती है, स्मरण करने की बजाए दी श्रद्धांजलि

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शनिवार को शायद भूलवश अपने ट्विटर हैंडल पर समाजसेविका स्व. मिनी माता के जन्मदिन को पुण्यतिथि बताया है। वे भूल गए हैं कि मिनीमाता की पुण्यतिथि नहीं जयंती है और उन्होंने इसलिए स्मरण करने की बजाए उन्हें श्रद्धांजलि दे दी है। मंत्री टेकाम ने अपने ट्वीट में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली प्रख्यात समाजसेविका मिनी माता जी को पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने आगे लिखा कि आपके आदर्श और विचार हम सभी को बुराइयों से लड़ने की प्रेरणा देती हैं। बता दें कि मिनीमाता छत्तीसगढ़ प्रदेश की पहली महिला सांसद रही और वे पांच बार सांसद चुनीं गईं। समाज का पिछड़ापन दूर करने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। छुआछूत मिटाने के लिए उन्होंने इतना काम किया कि मिनी माता को लोग मसीहा के रूप में देखा करते थे।

05-02-2020
किसानों से नहीं होगी वादाखिलाफी, जरूरत पड़ी तो तिथि पर भी होगा विचार : डॉ. प्रेमसाय सिंह

रायपुर। मिलिये मंत्री से कार्यक्रम में बुधवार को राजीव भवन पहुंचे मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाजपा का आरोप निराधार है, हमने किसानों से जो वादा किया है उसे पूरा किया जाएगा। धान खरीदी की तिथि आगे बढ़ाने की लगातार मांग पर उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर उस पर भी विचार किया जाएगा। जितने किसानों का पंजीयन हुआ है, प्रति एकड़ 15 क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी, 2500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। हमारा लक्ष्य 85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के साथ ही सभी पंजीकृत किसानों का धान खरीदना है। यह विपक्ष ऐसा कह रहा है कि अधिक किसानों को धान का समर्थन मूल्य ना देना पड़े, इसलिए कम से कम धान खरीदा जाएगा तो ऐसी कोई बात नहीं है।

मंत्री टेकाम ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है जहां पर धान का भुगतान 2500 रुपए प्रति क्विंटल किया जाएगा। हमने कहा है तो वह भी देंगे। सीमेंट को लेकर विपक्ष के आरोप पर मंत्री टेकाम ने कहा कि पूरा भारत जानता है कि बड़े-बड़े उद्योगपतियों को संरक्षण कौन देता है और जहां तक सीमेंट के दर वृद्धि की बात है तो यह भारत सरकार करती है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के बयान पर उन्होंने कहा कि हम लोग अंग्रेजी शिक्षक की व्यवस्था कर रहे हैं। अभी जो 15000 शिक्षकों की भर्ती होगी, उसमें ज्यादातर शिक्षक साइंस और अंग्रेजी के रहेंगे। जहां-जहां आवश्यकता है, वहां पर भर्ती की जाएगी। हर ब्लाक में प्राइमरी स्कूल, एक मिडिल स्कूल में अच्छी शिक्षा मिल सके इसलिए हमने सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर शुरूआत की है। हर जिले में एक मॉडल स्कूल बनाया जाएगा। स्पोकन इंग्लिश की ट्रेनिंग शिक्षकों को दी जाएगी, ताकि वे लोग और अच्छे ढंग से पढ़ा सकें। सरकार बनने के बाद पहला काम यह किया गया है कि जगरगुंडा और बस्तर के बंद पड़े स्कूलों को चालू कराया गया। इसी तरह जहां भी आवश्यकता होगी उसे हम चालू करवाएंगे।

26-01-2020
डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली 

रायपुर। जिला मुख्यालय सूरजपुर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सूरजपुर के स्टेडियम ग्राउण्ड में आज 26 जनवरी 2020 को 71वें गणतंत्र दिवस मुख्य समारेाह प्रातः 09 बजे मुख्य अतिथि छत्तीगसढ़ शासन के मंत्री स्कूल शिक्षा, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा सहकारिता विभाग डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने गणतंत्र दिवस के रंगारंग समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर परेड की सलामी ली। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर देश-भक्ति से ओत-प्रोत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा परेड निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का प्रदेश की जनता के नाम संदेश का वाचन किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि द्वारा शांति के प्रतीक सफेद कपोत एवं रंग-बिरंगे गुब्बारे आकाश में छोड़े। इसके बाद परेड में शामिल सशस्त्रधारी जवानो द्वारा तीन चक्र में हर्ष फायर किया गया।

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