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14-05-2021
छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस का इलाज सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में होगा,एडवाइजरी जारी

रायपुर। राज्य शासन ने ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) के संबंध में एडवाइजरी जारी की है। राज्य के विभिन्न अस्पतालों में ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) प्रकरणों से ग्रसित मरीज के प्रकरण आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए राज्य के तकनीकी समिति के विशेषज्ञों की ओर से अनुशंसित स्टैन्डर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकाॅल राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को जारी किया है। राज्य में ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) का इलाज सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में किया जाएगा।
ब्लैक फंगस की सामान्य जानकारी व उससे बचने के उपाय
ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) एक फंगल संक्रमण है। यह उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है जो दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित हैं और दवाइयां ले रहे हैं। इससे उनकी प्रतिरोधात्मक क्षमता प्रभावित होती है। यदि व्यक्ति के शरीर में यह फंगस सूक्ष्म रूप में शरीर के अन्दर चला जाता है तो उसके साइनस या फेफड़े प्रभावित होंगे।इससे गंभीर बीमारी हो सकती है। यदि इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं किया गया तो यह घातक हो सकती है।

यह बीमारी किसे हो सकती है
यह बीमारी कोविड-19 मरीजों में जो डायबीटिक मरीज हैं या अनियंत्रित डायबीटिज वाले व्यक्ति को, स्टेरोइड दवाइयां ले रहे व्यक्ति को या आईसीयू में अधिक समय तक भर्ती रहने से यह बीमारी हो सकती है। यदि निम्नानुसार लक्षण दिखे तो चिकित्सक से तुरंत सम्पर्क करना चाहिए।

इस बीमारी के लक्षण
आंख/नाक में दर्द और आंख के चारों ओर लालिमा, नाक का बंद होना, नाक से काला या तरल द्रव्य निकलना, जबड़े की हड्डी में दर्द होना, चेहरे में एक तरफ सूजन होना, नाक/तालु काले रंग का होना, दांत में दर्द, दांतों का ढ़िला होना, धुंधला दिखाई देना, शरीर में दर्द होना, त्वचा में चकते आना, छाती में दर्द, बुखार आना, सांस की तकलीफ होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति में परिवर्तन आना।

इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है
धूल भरे स्थानों में मास्क पहनकर, शरीर को पूरे वस्त्रों से ढंक कर, बागवानी करते समय हाथों में दस्ताने पहन कर और व्यक्तिगत साफ-सफाई रख कर।

 

14-02-2020
एमबीबीएस पास करने पर दो वर्ष अनिवार्य शासकीय सेवा, काउंसलिंग 22 को

रायपुर। 2019-20 में छत्तीसगढ़ के चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस उत्तीर्ण अनुबंधित छात्र-छात्राओं को दो वर्ष अनिवार्य शासकीय सेवा देनी है। इसके लिए 22 फरवरी को संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं इन्द्रावती भवन में काउंसलिंग होगी। काउंसलिंग सुबह 11 बजे से शुरु होगी। इस काउंसलिंग में वर्ष 2019-20 में चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस उत्तीर्ण अनुबंधित छात्र छात्राओं को मूल दस्तावेज और दो सत्यापित फोटो कॉपी के साथ मौजूद रहना होगा।

15-06-2019
चिकित्सा महाविद्यालयों में सुरक्षा कड़ी करने स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस अधीक्षकों को लिखा पत्र

 

रायपुर। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखा है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देश पर विभागीय सचिव निहारिका बारिक सिंह ने मेडिकल कॉलेज वाले जिलों रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ और सरगुजा के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखा है। उन्होंने पुलिस अधीक्षकों को चिकित्सा महाविद्यालयों में स्थापित पुलिस चौकियों में बल की संख्या की समीक्षा करने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने कहा है। उन्होंने इस संबंध में की गई कार्यवाही से अवगत कराने भी कहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में कोलकाता में चिकित्सा महाविद्यालय में जूनियर डॉक्टरों से मारपीट और राज्य के कुछ अस्पतालों में पिछले दिनों जूनियर डॉक्टरों से हुई हाथापाई के मद्देनजर मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा कड़ी करने का आग्रह पुलिस से किया है। चिकित्सा महाविद्यालयों के डॉक्टरों और विद्यार्थियों ने भी इस संबंध में चिंता जाहिर की थी। मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विभाग गंभीर है।
स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि मेडिकल कॉलेजों में रोज सैकड़ों की संख्या में गंभीर और अति गंभीर मरीज इलाज कराने आते हैं। आपाधापी और तनाव की स्थिति में कई बार मरीजों और डॉक्टरों के बीच अप्रिय स्थिति निर्मित हो जाती है। इस स्थिति से निपटने और इलाज की सुचारू व्यवस्था के लिए मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम जरूरी हैं।

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