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18-06-2020
उच्च न्यायालय के आदेशों की अवेलहना कर रहे अधिकारी, हाथियों की मौत करंट से होने के बावजूद मौन : नितिन सिंघवी

रायपुर। धरमजयगढ़ में गुरुवार को हुई हाथी की मौत के मामले में रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने विद्युत वितरण कंपनी और वन विभाग के अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि विद्युत वितरण कंपनी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रही है। वन क्षेत्रों में मापदंडों से नीचे जा रही बिजली लाइनों और लटकते तारों और बेयर कंडक्टर को कवर्ड तारों में बदलने से बचने के लिए रुपए 1674 करोड़ खर्च करने से बच रही है। इसके कारण से हाथी समेत अन्य वन्य प्राणियों की मौतें करंट से हो रही है। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद कुल 157 हाथियों की मृत्यु हुई है। इसमें से 30 प्रतिशत हाथियों की मृत्यु विद्युत करंट के कारण हुई है।सिंघवी ने आरोप लगाया कि विद्युत वितरण कंपनी ना तो सुधार कार्य करा रही है, ना ही अपने वित्तीय प्रबंध से 1674 करोड़ की व्यवस्था कर रही है। हद तो तब हो गई जब वन विभाग लगातार ऊर्जा विभाग को पत्र लिख रहा था, तो 9 माह बाद मार्च 2020 में ऊर्जा विभाग ने वन विभाग को पत्र लिखकर फिर कहा कि विद्युत वितरण कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार रुपए 1674 करोड़ उपलब्ध कराएं। इससे स्पष्ट है कि विद्युत वितरण कंपनी न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर रही है। न्यायालयों के आदेशानुसार सुधार कार्य भी नहीं करा रही है,इससे हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों  की मौतें हो रही है।याचिका के निर्णय 12 मार्च 2019 में विद्युत करंट से हाथियों की मृत्यु धरमजयगढ़ क्षेत्र में अधिक होने के कारण धर्मजयगढ़ क्षेत्र में प्रगति पर ठोस कदम उठाने के निर्देश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दिए थे। परंतु उसके बाद भी आज हाथी की मौत धर्मजयगढ़ के क्षेत्र में होने से ही स्पष्ट होता है

कि विद्युत वितरण कंपनी किसी भी रुप से न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं कर रही है। करंट से  7 हाथियों की  मौत के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से 4 करोड रुपए की पेनल्टी ओड़िशा विद्युत वितरण कंपनी पर लगाए जाने के निर्णय का हवाला देते हुए जून 2019 में छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी ने अपने सभी अधीनस्थों को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया कि विद्युत करंट से हाथियों व अन्य वन्य प्राणियों की हो रही मौतों के प्रकरणों में राज्य विद्युत वितरण कंपनी के जिला अधिकारियों के विरुद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972, इंडियन पेनल कोड 1860 एवं इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के अंतर्गत कोर्ट में चालान की कार्यवाही की जाए। विद्युत लाइन में हुकिंग करने से जिस भूस्वामी की जमीन पर वन्य प्राणी का मृत शरीर पाया जाता है, उसको अपराधी मानते हुए कोर्ट चालान की कार्यवाही की जाए।प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने फील्ड के अपने समस्त अधिकारियों से यह जानना चाहा कि वर्ष 2019 में उन्होंने ऐसे प्रकरणों में विद्युत वितरण कंपनी और भू स्वामियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की है? परंतु पिछले एक वर्ष में 8 रिमाइंडर भेजे जाने के बाद में भी अधीनस्थों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को यह नहीं बताया कि विधुत करंट से वन्य प्राणियों की मौत के मामले में उन्होंने क्या कार्रवाई की। इससे स्पष्ट है कि वन विभाग के फील्ड के अधिकारी विद्युत करंट से वन्यजीवों की मौत के मामले में बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।सिंघवी ने कहा कि धरमजयगढ़ में हो रही विद्युत करंट से हाथियों की मौत के मामले में उच्च न्यायालय की ओर से भी चिंता जताने के बावजूद आज विद्युत करंट से हाथी की मौत चिंतनीय है। मामले में विद्युत वितरण कंपनी के इंजीनियर और वन विभाग के लापरवाह अधिकारी जिम्मेदार हैं, इनके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए।

क्या है रुपए 1674 करोड़ का मामला?
छत्तीसगढ़ में लगातार विद्युत करंट से हाथियों की हो रही मौतों के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका क्रमांक 5/2018  नितिन सिंघवी विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य नामक याचिका लंबित रहने के दौरान विद्युत वितरण कंपनी ने अपना पक्ष रखा था। कहा था कि वन क्षेत्रों से नीचे जा रही विद्युत लाइनों और लटकते हुए तारों और बेयर कंडक्टर (नंगे तारों) को कवर्ड कंडक्टर में बदलने के लिए वन विभाग, विद्युत वितरण कंपनी को रुपए 1674 करोड़ रुपए दे तो वह  एक वर्ष के अंदर में सभी सुधार कार्य कर देगी। छत्तीसगढ़ शासन ने इस राशि की मांग भारत सरकार व पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से की। जवाब में भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णयों का हवाला देते हुए पत्र लिखकर आदेशित किया था। कहा था कि करंट से हाथियों और अन्य वन्य प्राणियों की मृत्यु के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी जवाबदेह है। वर्णित सुधार कार्य विद्युत वितरण कंपनी अपने वित्तीय प्रबंध से करेगी। एक वर्ष पूर्व 19 जून को प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी ने प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को भारत सरकार के निर्णय से अवगत कराया था। 15 दिन के अंदर कार्य योजना तैयार कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी को भेजने को कहा था। वन विभाग के प्रमुख सचिव ने भी प्रमुख सचिव ऊर्जा को पत्र लिखकर 1674 करोड़ रुपए स्वयं के वित्तीय प्रबंध से करके आवश्यक सुधार कार्य करने के लिए कहा था। अन्यथा की स्थिति में न्यायालय के आदेश के अनुसार वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 और उसके अंतर्गत निर्मित नियम, इंडियन पेनल कोड 1860, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 तथा अन्य सुसंगत विधियों के अंतर्गत डिस्कॉम के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

30-05-2020
विचाराधीन बंदियों के अंतरिम जमानत की अवधि 30 जून तक बढ़ाई गई

दुर्ग। हाई पावर कमेटी उच्च न्यायालय छग बिलासपुर के द्वारा दिए गए निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के द्वारा केन्द्रीय जेल दुर्ग में विरूद्ध 186 विचाराधीन बंदियों के अंतरिम जमानत आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे। तद्पश्चात् संबंधित न्यायालय द्वारा विचारोपरांत विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत का लाभ 30 अप्रैल 2020 की तिथि तक प्रदान किया गया था। हाई पावर कमेटी  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा अंतरिम जमानत पर रिहा किए गए विचाराधीन बंदियों की अवधि में 30 जून 2020 तक के लिए बढ़ा दी गई है। छग उच्च न्यायालय बिलासपुर के हाईपावर कमेटी के द्वारा पारित दिशा-निर्देश पर विचाराधीन बंदियों के अंतरिम जमानत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के द्वारा संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किए गए है। ऐसे विचाराधीन बंदी जो दिशा-निर्देश के अनुरूप अंतरिम जमानत पर रिहा किए गए है, उन्हें प्राधिकरण के द्वारा यह सेवा निःशुल्क प्रदान की गई है।

24-04-2020
विचाराधीन बंदियों को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि 31 मई बढ़ी

दुर्ग। हाई पावर कमेटी उच्च न्यायालय छग बिलासपुर के द्वारा दिए गए निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के द्वारा केन्द्रीय जेल दुर्ग में विरूद्ध 155 विचाराधीन बंदियों के अंतरिम जमानत आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे। तद्पश्चात् संबंधित न्यायालय द्वारा विचारोपरांत विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत का लाभ 30 अप्रैल की तिथि तक प्रदान किया गया था। हाईपावर कमेटी  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा अंतरिम जमानत पर रिहा किए गए विचाराधीन बंदियों की अवधि में 31 मई तक के लिए बढ़ा दी गई है। उच्च न्यायालय बिलासपुर के हाई पावर कमेटी के द्वारा पारित दिशा-निर्देश पर से विचाराधीन बंदियों के अंतरिम जमानत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के द्वारा संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किए गए है। ऐसे विचाराधीन बंदी जो दिशा-निर्देश के अनुरूप अंतरिम जमानत पर रिहा किए गए है, उन्हें प्राधिकरण के द्वारा यह सेवा निःशुल्क प्रदान की गई है।

 

 

14-04-2020
न्याय मित्र ने नगर निगम आयुक्त को लिखा पत्र, कहा-नगर निगम के फेल होने के कारण पीलिया का भय बढ़ रहा

रायपुर/बिलासपुर। रायपुर में फैले पीलिया के प्रकोप के चलते छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की ओर से जनहित याचिका 30/2014 मुकेश देवांगन विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य में नियुक्त न्याय मित्र अधिवक्ता सौरभ डांगी ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने को याद दिलाया है। न्याय मित्र ने पत्र में उल्लेखित किया है कि 2 मई 2018 को उच्च न्यायालय ने रायपुर के कुछ क्षेत्रों में,जिनमें नयापारा मोवा भी शामिल है के संबंध में टैंकरों से स्वच्छ पानी की व्यवस्था कराने के लिए आदेश जारी किया था और वह आदेश अभी भी लागू है। गौरतलब है कि नगर पालिक निगम की तरफ से तब बताया था कि नहर पारा और मोवा में पांच डेडीकेटेड टैंकर लगाकर के 25 ट्रिप पानी सप्लाई किया जा रहा है।

न्याय मित्र ने पत्र में उल्लेखित किया है कि वह पूर्णता अवगत है कि नगर पालिक निगम कोविड-19 से भी जूझ रहा है,परंतु पीलिया के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वास्तव में वर्तमान परिस्थिति में नागरिकों को पीलिया के सामान बीमारियों से बचाना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। न्याय मित्र होने के नाते उन्होंने निगम को सुझाव दिया है कि वे पीने योग्य पानी उसी मैकेनिज्म से पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाएं। जैसा कि उच्च न्यायालय में निर्धारित किया है और तत्काल ही वहां की नालियों से जाने वाली पीने के पाइप लाइन को बदलें। इसके बाद क्लोरिनेटेड पानी ही नागरिकों को पिलाया जाएं।

पत्र में चिंता व्यक्त करते हुए न्याय मित्र डांगी ने लिखा है कि यह बड़े दुख की बात है कि एक तरफ तो जनता कोविड-19 से जूझ रही है दूसरी तरफ नगर निगम के फेल होने के कारण पीलिया का भय बढ़ रहा है। गौरतलब है कि मुकेश देवांगन के केस में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं मनोज परांजपे, अमृतो दास एवं सौरभ डांगी को न्याय मित्र नियुक्त किया था किया है,जिन्होंने पूर्व में रायपुर शहर के विभिन्न वार्डों, अस्पतालों भाटागांव स्थित वाटर फिल्टर प्लांट वहां की लैब और शहर से जा रही पाइप लाइनों का निरीक्षण कर उच्च न्यायालय को अपने सुझाव दिए थे, जिनका पालन करने के आदेश उच्च न्यायालय ने समय-समय पर जारी किए है। पत्र दिखने के लिए यहां क्लिक करें...  

 

 

15-03-2020
ग्रामीण बैठक मे गरमाया बेजा कब्जा हटवाने का मसला

रायपुर। ग्राम टेकारी मे पौनी-पसारी लगाने आहूत ग्रामीणों की बैठक में ग्रामीण व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक बेजा कब्जाधारी द्वारा किये गए अवैध कब्जा अब तक न हटने का मसला गरमाया रहा। नवनिर्वाचित सरपंच व ग्रामीण सभा अध्यक्ष द्वारा इस संबंध मे ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा मंदिरहसौद नायब तहसीलदार सहित वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने व तहसीलदार द्वारा अवैध कब्जा हटवाने पँचायत द्वारा नियत किये जाने वाले तिथि पर मय पुलिस बल उपस्थित रहने का आश्वासन दिये जाने की जानकारी देते हुए बताया कि पंचायत ने बेजा कब्जाधारी को एक बार फिर आसन्न 17 मार्च तक स्वेच्छा से बेजा कब्जा हटा लेने संबंधी लिखित सूचना भेजी थी जिसे लेने से इँकार करने पर चस्पा करने की कार्यवाही की गयी है। ग्रामीणों ने एकस्वर मे गांव की व्यवस्था को बिगड़ने से बचाने किसी भी हालत मे इस बेजा कब्जा को हटवाने व एकजुट रहने की बात कही ।

ज्ञातव्य हो कि बीते करीब पौने दो साल से ग्राम मे शासन द्वारा आबँटित ढाई डिसमिल भूमि से लगे करीबन 900 वर्गफीट भूमि पर रहमान खान नामक व्यक्ति द्वारा किये गये अवैध कब्जा का मामला चर्चा मे है। अपने विवाहिता पुत्री के नाम इस बेजा कब्जा की भूमि पर प्रधानमंत्री आवास बनवाने के प्रयास व इस पर ग्राम पँचायत सहित ग्रामसभा द्वारा आपत्ति किये जाने पर उसके पुत्री व परिवार वालों द्वारा अप्रिय  स्थिति लाने की धमकी दिये जाने से पँचायत ने पँचायत राज अधिनियम के तहत प्रस्ताव पारित कर भू राजस्व सँहिता के प्रावधान के तहत एक माह के भीतर बेजा कब्जा हटवाने तहसीलदार सहित एस डी ओ.आरँग, जिलाधीश व सँभागायुक्त को ज्ञापन सौंपा था व थाना मे भी जानकारी दी थी।

तहसीलदार द्वारा इसके खिलाफ बेजा कब्जा का मामला भी दर्ज किया गया था और मिली जानकारी के अनुसार बीते दिनों तहसीलदार ने पँचायत को बेजा कब्जा हटवाने निर्देशित किया। बैठक मे इस पर नवनिर्वाचित सरपंच नँदकुमार यादव, उपसरपंच घनश्याम वर्मा के साथ पूर्व सरपंचद्वय रामानँद पटेल व गणेश लहरे सहित ग्रामीण सभा अघ्यक्ष हुलासराम वर्मा उपाध्यक्ष छेदन वर्मा ,कोषाध्यक्ष अशोक नायक, बाल समाज वाचनालय के अध्यक्ष नरेन्द्र वर्मा व भूपेन्द्र शर्मा द्वारा बीते 7 मार्च को नायब तहसीलदार सहित वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंप उच्च न्यायालय के निर्णयों के परिपेक्ष्य मे बेजा कब्जा हटवाने का वैधानिक दायित्व सँबँधित तहसीलदार का होने व पँचायत द्वारा हटवाने पर बेजा कब्जाधारी के परिवार द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न किये जाने की आशंका व्यक्त की गयी जिस पर तहसीलदार ने पुलिस बल सहित नियत तिथि पर मौजूद रहने का आश्वासन दिया गया।

बैठक मे ग्रामवासियों ने आज तक ग्रामीण व्यवस्था के तहत ही बिना प्रशासनिक सहयोग के अवैध कब्जों को समयानुसार व आवश्यकतानुसार हटाये जाने व इसका ज्वलंत उदाहरण गौरवपथ व टेकारी-अमेरी सड़क मार्ग मे नाली निर्माण के लिये बेजाकब्जाधारियोँ द्वारा स्वेच्छा से कब्जा हटाने की बात रखते हुए ग्रामीण व्यवस्था को चुनौती दे रहे इस बेजा कब्जा को हटवाने पूरे ग्राम के एकजुट होने की बात कही। इस बेजा कब्जाधारी द्वारा बेजा कब्जा हटवाने मे पक्षपातपूर्ण रव्वैया अपनाये जाने सँबँधी प्रशासनिक अधिकारियों को की जा रही कथित भ्रामक शिकायत के सँबँध मे बैठक मे निर्णय लिया गया कि ऐसे किसी कब्जाधारी का नाम बतलाये जाने पर ग्रामीण व्यवस्था के तहत उनका भी अवैध कब्जा हटवाया जावेगा व न मानने पर प्रशासनिक सहयोग लिया जावेगा। सरपँच ने इस बेजा कब्जाधारी को दिये गये सूचनापत्र मे लिखित मे इसकी जानकारी देने का अनुरोध किये जाने की भी बात बतलायी। साथ ही आसन्न 17 मार्च तक स्वेच्छा से कब्जा न हटाये जाने की स्थिति मे तहसीलदार से एक सप्ताह के भीतर पुलिस बल मौजूद रहने की तिथि सुनिश्चित कर पँचायत को अवगत कराने का आग्रह किये जाने की जानकारी भी दी ताकि पँचायत कब्जा हटवाने की तैयारी कर सके ।

 

07-03-2020
त्वरित न्याय दिलाने में आपसी समझौता महत्वपूर्ण, छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश जहां है कमर्शियल कोर्ट 

रायपुर। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति एवं पूर्व मुख्य न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय नवीन सिन्हा ने कहा है कि लोगों को त्वरित न्याय मिले। इसके लिए जरूरी है कि छोटे-छोटे मामलों को आपसी समझौते से निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालयीन प्रकरणों के निपटारे के लिए न्यायाधीशों को बेहतर तैयारी करनी चाहिए, जिससे वे प्रकरणोें पर अपने निर्णय शीघ्रता से दे सके। इसके साथ ही उन्होंने न्यायालयीन प्रकरणों के तेजी से निपटारे के लिए नई तकनीक के इस्तेमाल और वकीलों के प्रशिक्षण के लिए अकादमी प्रारंभ करने की आवश्यकता पर बल दिया। सिन्हा आज 'भारतीय न्यायालयों में लम्बित प्रकरणों के कारणों का विश्लेषण एवं उनके निदान के चरण' पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन महाधिवक्ता कार्यालय के द्वारा उच्च न्यायालय के ऑडिटोरीयम में किया गया। 

 न्यायाधीश सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार न्यायालयों की अधोसंरचना विकास के लिए कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश है, जहां कमर्शियल कोर्ट स्थापित किया गया है, जहां आनलाइन फाइलिंग की सुविधा दी जा रही है। न्यायालयीन प्रकरणों को तेजी से निपटारे के लिए न्यायाधीशों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में कोई मामला लंबित होता है तो इसके प्रक्रियागत व्यावहारिक, सामाजिक, प्रोफेशनल, लीगल सहित कई पहलू होते हैं। सिन्हा ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामले के संबंध में यह भी विचारणीय है कि क्या न्यायालयों की संख्या कम है। न्यायाधीशों एवं वकीलों के प्रशिक्षण की जरूरत है, इन सभी मुद्दों पर विचार करना होगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने मुख्यअतिथि का परिचय देते हुए उनके द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा, न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव सहित सभी न्यायाधीश, अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक रंजन तिवारी, आलोक बक्शी, फौजिया मिर्जा,  अमृतो दास, सभी उप महाधिवक्तागण, शासकीय अधिवक्ता, पैनल लायर्स, स्टेट बार काउन्सिल एवं हाईकोर्ट बार काउन्सिल के पदाधिकारी, हाईकोर्ट रजिस्ट्री अधिकारी आदि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

06-03-2020
टिकटॉक बैन पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई, याचिका खारिज करने की अपील

नई दिल्ली। सोशल मीडिया वीडियो एप टिकटॉक का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। कुछ ही समय में दुनिया भर में मशहूर हो चुके टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है। इस याचिका के खिलाफ अब टिकटॉक, हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच चुका है। उसने उच्च न्यायालय से यह याचिका खारिज करने की दरख्वास्त की है। टिकटॉक ने अपने बचाव में कहा कि 'सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69 ए के तहत एक प्रक्रिया निर्धारित है। इसके अनुसार अगर व्यक्ति को किसी भी ऑनलाइन सामग्री से आपत्ति होती है तो वह नोडल अधिकारी से संपर्क कर उसे हटाने की मांग कर सकता है।' बता दें कि पिछले साल नवंबर महीने में इस ऐप के जरिए आपराधिक घटनाएं को बढ़ावा मिलने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की गई थी।

इसके साथ ही इस याचिका में युवाओं पर बुरा प्रभाव पड़ने और लोगों की मृत्यु होने की बात भी कही गई। कोर्ट की तरफ से इस टिकटॉक के जरिए दी गई दलीलों पर जवाब देने के लिए दूसरे पक्ष को जवाब देने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद की जाएगी। टिकटॉक पर बीते कुछ समय से स्कल ब्रेकर चैलेंज काफी ट्रेंड कर रहा है। यह चैलेंज टिकटॉक के बाद दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पहुंच गया। इसके चलते वीडियो बनाते हुए बच्चों द्वारा खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

05-03-2020
हाईकोर्ट ने खारिज किया बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का फैसला, मामला जिला सह.केंद्रीय बैंक में सीईओ की नियुक्ति का

दुर्ग। जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन सीईओ व्ही.के. गुप्ता के ईओडब्लू की गिरफ्त में आने के बाद रिक्त हुए पद पर चेयरपर्सन प्रीतपाल बेलचंदन द्वारा 10 अगस्त 2017 को लेखाधिकारी एसके निवसकर को बैंक का सीईओ नियुक्त कर दिया गया था। इस नियुक्ति पर संचालक मंडल की सहमति भी ले ली गई थी। संचालक मंडल द्वारा सीईओ पद पर की गई इस नियुक्ति को अमान्य करते हुए छग राज्य सहकारी बैंक महाप्रबंधक द्वारा एस.के. जोशी की नियुक्ति सीईओ पद पर की गई थी। इस पर आपत्ति करते हुए इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौति दी गई थी। उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने 19 जनवरी 2018 को दिए गए अपने फैसले में संचालक मंडल द्वारा की गई नियुक्ति को अवैधानिक करार दिया गया था। इस पर की गई अपील की सुनवाई पश्चात डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को बदलते हुए संचालक मंडल द्वारा लिए गए निर्णय को विधि सम्मत माना था। 

उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच के इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की गई थी। इस पर सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय वाय. चंद्रचूर्ण व अजय रस्तोगी की संयुक्त खंडपीठ में की गई। खंडपीठ ने एसके जोशी के पक्ष में निर्णय देते हुए सिंगल बेंच हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ के दिए गए फैसले को सही ठहराया है। पदभार बिना लौटाए जाने के बाद जोशी ने संचालक मंडल की नियुक्ति को चैलेंज करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उन्होंने निवसरकर की पदस्थापना को अवैध करार देते हुए मामले में फैसला तक नियुक्त पर रोक लगाने की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर नियुक्ति पर स्टे आर्डर जारी किया। इसके बाद जोशी ने 5 मई 2017 को पदभार ग्रहण किया था।

 

01-03-2020
राष्ट्रपति कोविंद आज आएंगे छत्तीसगढ़, दीक्षांत समारोह में कल होंगे शामिल

रायपुर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज 1 मार्च को दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर आ रहे हैं। 2 मार्च को गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। इसके पूर्व आज सुबह रायपुर विमानतल पहुंच कर हेलीकॉप्टर से बिलासपुर स्थित विवि के हेलीपैड पहुंचेंगे। शाम 6 बजे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से मुलाकात करेंगे। 2 मार्च की सुबह दीक्षांत समारोह में शामिल होकर रायपुर पहुंचेंगे, फिर यहाँ से दिल्ली रवाना होंगे।

08-02-2020
1000 करोड़ का एनजीओ घोटाला, सीबीआई की टीम पहुंची रायपुर,अफसरों से हो सकती है पूछताछ

रायपुर। प्रदेश में कथित 1000 करोड़ के एनजीओ घोटाले की जांच के लिए सीबीआई की टीम रायपुर पहुंच चुकी है। सीबीआई की टीम भोपाल से जांच के लिए रायपुर पहुंची है। बताया गया कि दो से तीन दिनों में समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा सकती है। सीबीआई ने विभाग के सचिव को पत्र लिखकर दस्तावेज की मांग की है। इसके पूर्व इस मामले में सरकार की ओर से बिलासपुर हाईकोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। दायर याचिका में सरकार की ओर से कहा गया था कि सीबीआई की जगह इस मामले को राज्य पुलिस को सौंपा जाए। बताया गया कि उच्च न्यायालय ने विगत दिनों एक आदेश जारी कर घोटाले में शामिल अफसरों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

 

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