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12-08-2020
शिवरतन ने पूछा : क्या प्रदेश सरकार नाकामियों की पोल खुलने से डरकर विस में चर्चा के बजाय मुँह चुराने को विवश हो गई?

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व विधायक शिवरतन शर्मा ने प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र चार दिनों का रखे जाने पर प्रदेश सरकार पर कटाक्ष किया है। शिवरतन ने पूछा कि क्या प्रदेश सरकार अपनी नाकामियों की पोल खुलने से इतनी भयभीत हो गई है कि अब वह विधानसभा में भी चर्चा करने के बजाय मुँह चुराने को विवश हो गई है? हर मोर्चे पर विफल प्रदेश सरकार एक गहरे अपराध-बोध से जूझ रही है, ऊपर से हाल के एक सर्वे ने सरकार और सत्तारूढ़ दल की जमीन खिसका दी है। इतनी कम अवधि का सत्र रखकर सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश के हित में कोई सार्थक चर्चा करने को वह तैयार नहीं है।

शर्मा ने कहा कि विधानसभा में चर्चा करने और प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देने से सरकार डर रही है और इसीलिए वह सिर्फ चार दिनों का सत्र बुला रही है अन्यथा कोई कारण नहीं है कि सत्र की अवधि इतनी कम रखी जाए। जब सरकार कोरोना संक्रमण के नजरिए से रोज हर विधायक को टेस्ट कराके ही विधानसभा में प्रवेश करने देगी तो फिर यह व्यवस्था तो लंबी अवधि के सत्र के लिए भी संभव थी। प्रदेश को हजारों करोड़ रुपए के कर्ज से लाद चुकी प्रदेश सरकार अपनी तमाम योजनाओं की मिट्टी-पलीद कर चुकी है। कोरोना के मोर्चे पर निकम्मेपन का परिचय दे चुकी है। क्वारेंटाइन सेंटर्स और अब कोविड अस्पताल तक अस्वाभाविक मौत के केंद्र बनते जा रहे हैं। कोरोना की जाँच रिपोर्ट संबंधित संदिग्ध मरीज की मौत के बाद भी नहीं मिल रही है। कोरोना से मृत मरीजों का तीन-चार दिनों तक अंतिम संस्कार तक नहीं किया जा सक रहा है। शिवरतन ने कहा कि अपने नाकारापन को ढँकने और प्रदेश के सामने अपने छलावों के पदार्फाश से बचने के लिए ही प्रदेश सरकार सिर्फ चार दिनों का विधानसभा सत्र बुलाकर अपनी जिम्मेदारी से मुँह चुराने में लगी है।

 

 

31-07-2020
Breaking : छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 25 से 28 अगस्त तक

रायपुर। छत्तीसगढ़ की पंचम विधानसभा का सातवां सत्र 25 अगस्त 2020 से शुरू होगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रमुख सचिव चन्द्रशेखर गंगराड़े ने इस संबंध में विज्ञप्ति जारी की है। बताया गया कि यह मानसून सत्र चार दिन 25 से 28 अगस्त तक चलेगा। इसमें कुल 4 बैठकें होगी। इस सत्र में वित्तीय कार्य के साथ ही अन्य शासकीय कार्य भी होंगे।

06-09-2019
रायपुर जिले में अब तक 648.8 मिमी औसत वर्षा

रायपुर। चालू मानसून सत्र के दौरान रायपुर जिले में एक जून से अब तक कुल 648.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कलेक्टर कार्यालय के भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार गत दिवस रायपुर तहसील में 11.3 मिमी, अभनपुर में 47 मिमी, आंरग में 4.4 मिमी और तिल्दा में 1 मिमी वर्षा हुुई हैं। अब तक रायपुर तहसील में 650.3 मिमी, आरंग में 880.4 मिमी, अभनपुर में 608.5 मिमी और तिल्दा तहसील में 456 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।

 

05-09-2019
रायपुर जिले में अब तक 632.9 मिमी औसत वर्षा

रायपुर। चालू मानसून सत्र के दौरान रायपुर जिले में एक जून से अब तक कुल 632.9 मिमी. औसत वर्षा दर्ज की गई है। कलेक्टर कार्यालय के भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार गत दिवस रायपुर तहसील में 3 मिमी. अभनपुर में 4 मिमी. और तिल्दा में 8.6 मिमी. वर्षा हुुई हैं। अब तक रायपुर तहसील में 639 मिमी., आरंग में 876 मि.मी.,अभनपुर में 561.5 मिमी. और तिल्दा तहसील में 455 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई है।

18-07-2019
विधानसभा मानसून सत्र: निजी स्कूलों में फीस और अंडा वितरण को लेकर हुआ हंगामा

रायपुर। एक दिन स्थगित रहने के बाद गुरुवार को विधानसभा की कार्रवाई शुरू हुई। मानसून सत्र के चौथे दिन बेलतरा विधायक रजनीश कुमार सिंह ने निजी स्कूलों में बढ़ती फीस का मामला उठाया। उन्होंने पूछा कि कितने निजी स्कूल संचालित है? कितने निजी स्कूल मान्यता प्राप्त? निजी स्कूलों में शुल्क निर्धारण के क्या नियम? जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने सदन में बताया कि कुल 690 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल संचालित है। बिना मान्यता के एक भी नहीं है। आरटीई के तहत कक्षा 1 से 8वीं तक के लिए शुल्क का प्रावधान है, उसी के तहत निर्धारण हो रहा है। 9वीं से 12वीं तक के लिए निर्धारण का कोई प्रावधान नहीं।
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने स्कूल शिक्षा मंत्री से पूछा कि फीस नियामक आयोग का गठन कब तक होगा? प्रेमसाय सिंह ने नियमों का हवाला देते हुए इसे प्रक्रियाधीन बताया। जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में हंगामा किया। गुरुवार को मिड मिल में अंडा दिए जाने का मामला फिर उठाया और सदन में जमकर हंगामा हुआ। 
शून्यकाल में भाजपा विधायकों ने इस विषय को उठाते हुए चर्चा की मांग की। विपक्ष के विधायक जब अपनी बातें रख रहे थे तब सत्तापक्ष के सदस्यों के द्वारा लगातार शोर किया जाता रहा। विपक्षी सदस्यों ने सभापति से सत्तापक्ष के विधायकों को शांत कराने की मांग की पर विधायक नहीं माने। अंतत: भाजपा विधायकों ने सदन से बायकॉट कर दिया और सदन को दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया।

03-07-2019
विधानसभा का मानसून सत्र 12 से 26 जुलाई तक, पूछे जाएंगे कुल इतने प्रश्न...

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 12 जुलाई से शुरू होने वाला है। विधानसभा का यह सत्र 12 से 26 जुलाई तक चलेगा। इस सत्र में विधानसभा के सदस्य की ओर से विधानसभा में विभिन्न मुद्दों पर प्रश्न पूछे जाएंगे। विधानसभा से मिली जानकारी के अनुसार इसमें 14 जुलाई को 30 तारांकित और 9 आतारांकित प्रश्न पूछे जाएंगे। 14 जुलाई को कुल 39 प्रश्न पूछे जाएंगे। 18 जुलाई को विधानसभा के सदस्यों की ओर से तारांकित और आतारांकित मिलकर कुल 108 प्रश्न पूछे जाएंगे।

19 जुलाई को कुल तारांकित 80 प्रश्न और कुल आतारांकित 42 प्रश्न पूछे जाएंगे। 20 जून को कुल तारांकित 235 और कुल आतारांकित  186 प्रश्न पूछे जाएंगे। 21 जून के विधानसभा सदस्य कुल तारांकित 319 और कुल आतारांकित 272 प्रश्न पूछेंगे। 22 जुलाई को कुल तारांकित 390 और कुल आतारांकित 345 प्रश्न पूछे जाएंगे। इस प्रकार 24 जुलाई को कुल तारांकित 456 और कुल आतारांकित 407 प्रश्न पूछ जाएंगे। 25 जुलाई को कुल तारांकित 483 और कुल आतारांकित 440 प्रश्न पूछे जाएंगे। 26 जुलाई को कुल तारांकित 495 और कुल आतारांकित 451 प्रश्न पूछे जाएंगे। 

12-06-2019
विधानसभा का सबसे छोटा सत्र, विपक्ष से डरी कांग्रेस सरकार : नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भूपेश सरकार द्वारा विधानसभा का सबसे छोटा सत्र आहूत किये जाने पर गंभीर आपत्ति की है। कौशिक ने कहा कि भूपेश सरकार मूल रूप से तानाशाही की भावना के साथ काम करने वाली सरकार है। इतने बड़े जनादेश के बावजूद शासन द्वारा सदन का सामना करने के प्रति अनिच्छुक दिखना यह जाहिर करता है कि वह विपक्ष से बुरी तरह डरी हुई है। कौशिक ने कहा कि मानसून सत्र में चर्चा लायक दर्जनों बड़े मुद्दे हैं, जिसपर विस्तार से चर्चा होना चाहिए। विधानसभा चुनाव में चुनावी लाभ के लिए बड़े-बड़े वादे  करना और अब लगभग उन सभी वादों से मुकर जाने की स्थिति, नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी, किसानों की कर्ज माफी, आदिवासियों का बढ़ता असंतोष, गंभीर होती नक्सल समस्या, वेतन विसंगति, प्रदेश की बेकाबू होती, आर्थिक स्थिति, शराबबंदी का शिगूफा और इस पर रोज उजागर होते घोटाले समेत अनेक विषय ऐसे हैं, जो छत्तीसगढ़ के भविष्य से जुड़े हुए हैं।

ये ऐसे विषय हैं जिस पर प्रदेश को विकास की राह तय होती है। श्री कौशिक ने कहा कि लाखों युवाओं को रोजगार का वादा करके सत्ता में आयी कांग्रेस ने अभी तक इन सबसे संबंधित कोई विजन प्रस्तुत नहीं किया है, प्रदेश शासन तमाम रचनात्मक विषयों को छोड़ कर केवल प्रतिशोध की राजनीति, बदलापुर और गुटीय राजनीति में उलझी है। निश्चय ही इन तमाम मुद्दों पर शासन को जवाब देना भारी पड़ जाता, इसलिए मानसून सत्र के नाम पर महज रस्म अदायगी कर निकल जाने की फिराक में है सरकार। यह घोर आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र से लेकर प्रदेश तक लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सतत अनादर कांग्रेस की परिपाटी रही है। अब पार्टी को इससे बाहर निकल कर वास्तविक विषयों का सामना करना होगा। ऐसा कर ही कांग्रेस सरकार संविधान के शपथ के प्रति प्रतिबद्ध हो सकती है। 

श्री कौशिक ने मानसून सत्र को पर्याप्त लंबा करने की मांग की है, उन्होंने कहा कि सदन में भले भाजपा के पास कम संख्या बल है लेकिन, पार्टी ने यह साबित किया है कि वह लोकहित से जुड़े मुद्दे पर पार्टी पर्याप्त प्रखर और मुखर है। शासन को विपक्ष का समाना करना ही होगा, भाजपा छत्तीसगढ़ और उसके भविष्य से जुड़े ही मुद्दे पर सदन से लेकर सड़क तक की लड़ाई पहले की भांति ही, लड़ती रहेगी। अगर सरकार यह समझ रही है कि सत्र को छोटा कर वह अपने दायित्व से बच जायेगी, तो उसे इस मुगालता से बाहर आना होगा। कौशिक ने विधायी परंपराओं के प्रति विनम्र और विपक्ष के प्रति सहिष्णु होने की चेतावनी देते हुए शासन से अपने निर्णय पर फिर से विचार करने की मांग की है। बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 12 से 19 जुलाई तक चलेगा। मानसून सत्र 12 जुलाई से छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रारंभ होगा। विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। 12 से 19 जुलाई तक चलने वाले इस सत्र में 6 बैठकें होगीं।  

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