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19-09-2020
किसानों की चिंता है तो हरेक फसल का ज्यादा से ज्यादा समर्थन मूल्य घोषित करे मोदी सरकार : राजेंद्र साहू    

दुर्ग। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री राजेंद्र साहू ने केंद्र सरकार के कृषि विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए कहा है कि इससे देश के लाखों किसानों को जबर्दस्त आर्थिक नुकसान होगा। राजेंद्र ने कहा कि यह विधेयक किसान विरोधी होने के साथ-साथ जनविरोधी भी है। कृषि विधेयक से कार्पोरेट घराने मुनाफा कमाएंगे जबकि किसान एग्रीमेंट के जाल में फंस जाएंगे। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य तक नहीं मिल पाएगा। राजेंद्र साहू ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने पर कार्पोरेट घराने किसानों से एग्रीमेंट करेंगे। किसानों की फसल या उपज खरीदकर पूंजीपति घराने जमाखोरी करेंगे। भरपूर भंडारण करने के बाद कालाबाजारी भी करेंगे और मुनाफा कमाएंगे। कार्पोरेट घरानों के शिकंजे में आने से किसानों को अपनी खेती की जमीन से भी वंचित होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां और कृषि उपज मंडी किसानों को संबल प्रदान करते हैं। केंद्र सरकार के विधेयक से सहकारी समिति संस्था और मंडी व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। कृषि विधेयक के आने से सहकारी समितियों के माध्यम से बीज-खाद खरीदी और नगद ऋण लेने की व्यवस्था के साथ समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। राजेंद्र साहू ने कहा कि अगर मोदी सरकार को वास्तव में किसानों की फिक्र है और किसानों को सही मायनों में लाभ पहुंचाना चाहते हैं तो किसानों की हर फसल का समर्थन मूल्य ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने का साहसिक फैसला करें। पूरे देश में किसानों की हर फसल की खरीदी बढ़े हुए समर्थन मूल्य पर करने से संबंधित विधेयक लाएं। केंद्र सरकार किसान विरोधी कृषि विधेयक लाकर किसानों और देशवासियों पर कुठाराघात करने वाले फैसले लेना बंद करे।

 

 

19-09-2020
केंद्र सरकार ने कहा, सियाचिन में तैनात सैनिकों के खाने की पौष्टिकता में कोई कमी नहीं

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धस्थल सियाचिन में तैनात सैनिकों को दिए जाने वाले भोजन की पौष्टिकता में कोई कमी नहीं है और यह पर्याप्त से अधिक है। तृणमूल कांग्रेस सदस्य शांता छेत्री ने राज्यसभा में सरकार से सवाल किया था कि क्या सिचाचिन में तैनात सैनिकों द्वारा ली जा रही कैलोरी की मात्रा में 82 प्रतिशत तक की कमी है। इसके लिखित जवाब में रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाइक ने कहा, ‘जी, नहीं। ऐसा कोई मामला नहीं आया है। एक दिन के लिए मानक राशन में ऊर्जा खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त कैलोरी होती है।’ उन्होंने बताया कि राशन मानकों को जलवायु की विभिन्न परिस्थितियों में सैनिकों के ऊर्जा खर्च के अनुसार एक सैनिक की पोषण संबंधी आवश्यकता के आधार पर निर्धारित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सियाचिन जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों (12000 फुट से अधिक) में इस प्रकार की परिस्थितियों में ऊर्जा खर्च की आपूर्ति के लिए राशन के विशेष मानक प्राधिकृत हैं।

रक्षा कायिकी एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (डीआईपीएएस) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए नाइक ने बताया 12000 फुट से अधिक ऊंचाई पर तैनात सैन्य दलों के लिए कुल ऊर्जा खर्च 4270 किलो कैलोरी है जबकि मौजूदा राशन 5350 किलो कैलोरी का है। उन्होंने कहा,‘अतः यह देखा जा सकता है कि राशन से कैलोरी सेवन पर्याप्त से अधिक है।’ रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि सभी स्थानों पर सैन्य दलों की पसंद के साथ-साथ पोषण संबंधी आवश्यकताओं की आपूर्ति करते हुए रक्षा खाद्य निर्देशनों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण राशन जारी सुनिश्चित करने के लिए एक सु-व्यवस्थित मजबूत तंत्र है। उन्होंने कहा, ‘सियाचिन में भी सदैव सैन्य दलों की पसंद और उनकी पोषण संबंधी आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तायुक्त राशन सुनिश्चित किया जाता है।’ ज्ञात हो कि सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा सैन्य क्षेत्र है। यह हिमालय के पूर्वी काराकोरम पर्वत श्रंखला में स्थित है। ठंड में यहां तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है। 

 

 

19-09-2020
पूर्व वित्तमंत्री ने कृषि विधेयकों पर केंद्र सरकार को घेरा,कहा- भाजपा अपने खुद के बनाए जाल में फंस गई है

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम ने कृषि संबंधी विधेयकों के खिलाफ सभी विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए शनिवार को कहा कि हर पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किसानों के साथ है या फिर ‘कृषकों की जीविका को खतरे में डाल रही भाजपा के साथ ह उन्होंने यह दावा भी किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़े कांग्रेस के घोषणापत्र में किसानों से किए वादों को भाजपा तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है, जबकि इस सरकार ने काॉरपोरेट के समक्ष समर्पण कर दिया है। पूर्व वित्त मंत्री ने एक बयान में कहा,‘भाजपा अपने खुद के बनाए हुए जाल में फंस गई है।'दशकों तक यह व्यापारियों के वर्चस्व वाली पार्टी रही और अब भी है। वस्तुओं और सेवाओं के अभाव वाली अर्थव्यवस्था का इनके द्वारा दोहन किया गया। इंदिरा गांधी द्वारा हरित क्रांति लाने और पीवी नरसिंह राव एवं मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए उदारीकरण के बाद हालात बदलने लगे।’ चिदंबरम के मुताबिक, 'आज हमारे यहां गेहूं और चावल जैसी उपज अधिक मात्रा में पैदा हो रही हैं। किसानों की ताकत की बुनियाद पर कांग्रेस की सरकारों ने खाद्य सुरक्षा प्रणाली बनाई, जिसके बाद 2013 में खाद्य सुरक्षा कानून बना।

हमारी खाद्य सुरक्षा प्रणाली के तीन स्तंभ- न्यूनतम समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘कांग्रेस ने 2019 में इन्हीं बुनियादी सिद्धांत के आधार पर घोषणापत्र तैयार किया था। प्रधानमंत्री और भाजपा के प्रवक्ता ने कांग्रेस के घोषणापत्र को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया है।’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हमने वादा किया था कि कृषि उत्पादक कंपनियों/संगठनों को प्रोत्साहित करेंगे ताकि किसानों की लागत, प्रौद्योगिकी और बाजार तक पहुंच हो सके। हमने यह भी कहा था कि उचित बुनियादी ढांचे तथा बड़े गांवों एवं छोटे कस्बों में सहयोग से कृषि बाजार स्थापित किए जाएंगे ताकि किसान अपनी उपज ला सकें और खुलकर बेच सकें।’उन्होंने आरोप लगाया, ‘हमारा वादा स्पष्ट है, लेकिन मोदी सरकार ने कारपोरेट और व्यापारियों के समक्ष समर्पण कर दिया है।’ चिदंबरम ने कहा, ‘कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को हर मंच पर इन विधेयकों का विरोध करने के लिए हाथ मिलाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये मौजूदा स्वरूप में कानून नहीं बनें। हर पार्टी को यह रुख तय करना होगा कि वह किसानों के साथ है या फिर किसानों की जीविका को खतरे में डाल रही भाजपा के साथ है।’गौरतलब है कि लोकसभा ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी।
 

17-09-2020
चांपा सहित 3 गांवों को कलेक्टर ने किया कंटेनमेंट जोन घोषित, वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध 

जांजगीर-चांपा। कलेक्टर यशवंत कुमार ने नगर पालिका चांपा के कुछ वार्डों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया है। उन्होंने केंद्र सरकार के गृह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ शासन के जारी मार्गदर्शन के परिपालन में चांपा नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 15, 17, 24 व 27 चांपा तहसील के ग्राम बम्हनीडीह वार्ड क्रमांक 2 व 4, जैजैपुर तहसील के ग्राम भोथीडीह वार्ड नंबर 5 और ग्राम दतौद वार्ड क्रमांक 13 को कंटेनमेंट जोन घोषित किया है। कंटेनमेंट जोन में अतिआवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति तथा अपरिहार्य स्वास्थगत आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर कंटेनमेंट जोन में आने-जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

कंटेनमेंट जोन के निवासी बिना अनुमति के अपने घरों से बाहर किसी भी परिस्थिति में नहीं निकलेंगे। क्षेत्र के अंतर्गत सभी दुकानें, आफिस एवं अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान आगामी आदेश तक पूर्णतः बंद रहेंगे। वाहनों के आवागमन पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। अति आवश्यक होने पर पृथक से आदेश प्रसारित किया जाएगा। कानून-व्यवस्था, कंटेनमेंट जोन को सील करने एवं गश्त करने के लिए आवश्यक पुलिस व्यवस्था के लिए पुलिस अधीक्षक एवं अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंटेनमेंट क्षेत्र में केवल एक प्रवेश एवं निकास द्वार की व्यवस्था के लिए पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता को दायित्व सौंपा गया है।

17-09-2020
राज्यों का बकाया जीएसटी देने की मांग पर संसद परिसर में विपक्ष ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। विपक्षी दलों ने गुरुवार को संसद परिसर स्थित महात्मा गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया और राज्यों के बकाया जीएसटी के भुगतान की मांग की। विपक्षी दलों मेंटीआरएस, टीएमसी, डीएमके, आरजेडी, आप, एनसीपी, समाजवादी पार्टी और शिवसेना के सांसदों ने प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि केंद्र ने राज्यों को दो विकल्प दिए थे। केंद्र दृढ़ता से इस बात पर कायम है कि राज्यों को उत्तरोत्तर प्रक्रिया के माध्यम से ऋण लेना चाहिए।दूसरी ओर बड़ी संख्या में राज्य इस बात पर अड़े हैं कि केंद्र को उधार लेना चाहिए और उन्हें जीएसटी एक्ट में किए गए वादे के मुताबिक बकाया का भुगतान करना चाहिए।

दोनों के अपनी-अपनी बात पर अवर्ती से जीएसटी से जुड़ा विवाद गहरा गया है। देश के तकरीबन 10 राज्य ऐसे हैं जो केंद्र की दलील से इत्तेफाक नहीं रखते और वे खुलकर विरोध कर रहे हैं। इन राज्यों का कहना है कि वे केंद्र के प्रस्ताव को ठुकरा देंगे। इन राज्यों की मांग है कि प्रधानमंत्री खुद इस मामले में हस्तक्षेप कर इसे सुलझाएं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, दिल्ली, पुडुचेरी, पंजाब और झारखंड ने खुले तौर पर केंद्र सरकार के प्रस्तावों को खारिज किया है। साथ ही इन राज्यों ने मांग की है कि केंद्र सरकार को उधार लेना चाहिए और राज्यों के बकाया का भुगतान करना चाहिए। 

16-09-2020
एलएसी पर तनाव: केंद्र सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक,राजनाथ,गोयल,गहलोत,आजाद हुए शामिल

नई दिल्ली। एलएसी पर चीन के साथ टेंशन के बीच मोदी सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, थावरचंद गहलोत, प्रहलाद जोशी और वी.मुरलीधरन, राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और टी.शिवा  शामिल हुए। बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से चीन के साथ विवाद पर लोकसभा में दिए गए बयान के बाद हो रही है। इस सर्वदलीय बैठक में सरकार की ओर से संसद सत्र के आने वाले दिनों के प्लान की बात की गई। कांग्रेस पार्टी की ओर से एलएसी  के मसले पर विचार-विमर्श की मांग रख सकती है। बता दें कि संसद सत्र में सरकार की ओर से चीन मसले पर बयान दिया गया है, लेकिन विपक्ष की ओर से पूरे विवाद पर विस्तार से चर्चा की बात कही जा रही थी। इसको लेकर कांग्रेस ने लोकसभा में विरोध भी जताया था। लेकिन अब सरकार की ओर से चर्चा के लिए इस बैठक को बुलाने पर जोर दिया गया है।

 

 

14-09-2020
कृषि विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ जिले के अनेकों गांवों में हुए प्रदर्शन

कोरबा। जिले में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और भूमि अधिकार आंदोलन के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा जारी किसान विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ और ग्रामीण जनता की आजीविका बचाने की मांग पर अनेकों गांवों में किसानों ने संसद सत्र के पहले दिन गांव में विरोध प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश समेत दिल्ली में समन्वय समिति से जुड़े संगठन हजारों की उपस्थिति वाले एक विशाल धरना की भी अगुआई की।छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेता जवाहर सिंह कंवर ने आरोप लगाया कि इन कृषि विरोधी अध्यादेशों का असली मकसद न्यूनतम समर्थन मूल्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था से छुटकारा पाना है। उन्होंने कहा कि देश का जनतांत्रिक विपक्ष और किसान और आदिवासी इन कानूनों का इसलिए विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे खेती की लागत महंगी हो जाएगी, फसल के दाम गिर जाएंगे, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी बढ़ जाएगी और कार्पोरेटों का हमारी कृषि व्यवस्था पर कब्जा हो जाने से खाद्यान्न आत्मनिर्भरता भी खत्म जो जाएगी।

यह किसानों और ग्रामीण गरीबों की बर्बादी का कानून है।प्रदेश और जिले में आज किसान प्रदर्शनों के जरिये केंद्र सरकार से पर्यावरण आंकलन मसौदे को वापस लेने, कोरोना संकट के मद्देनजर ग्रामीण गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न और नगद राशि से मदद करने, मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये रोजी देने, व्यावसायिक खनन के लिए प्रदेश के कोल ब्लॉकों की नीलामी और नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण रद्द करने, किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2 लागत मूल्य का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में देने और उन्हें बैंकिंग तथा साहूकारी कर्ज़ के जंजाल से मुक्त करने, आदिवासियों और स्थानीय समुदायों को जल-जंगल-जमीन का अधिकार देने के लिए पेसा कानून का क्रियान्वयन करने की भी मांग की गई।

इसी तरह राज्य की कांग्रेस सरकार से भी सभी किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध कराने, बोधघाट परियोजना को वापस लेने, हसदेव क्षेत्र में किसानों की जमीन अवैध तरीके से हड़पने वाले अडानी की पर्यावरण स्वीकृति रद्द करने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, किरंदुल की आलनार पहाड़ी को आरती स्पॉन्ज को न सौंपने, पंजीकृत किसानों के धान के रकबे में कटौती बंद करने, सभी बीपीएल परिवारों को केंद्र द्वारा आवंटित प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज वितरित करने, वनाधिकार दावों की पावती देने, हर प्रवासी मजदूर को अलग मनरेगा कार्ड देकर रोजगार देने और भू-राजस्व संहिता में कॉर्पोरेटपरस्त बदलाव न करने की मांग की गई।किसानसभा ने ग्राम सभा के फ़र्ज़ीकरण के जरिये दंतेवाड़ा की आलनार पहाड़ को बेचे जाने के खिलाफ आदिवासियों के संघर्ष का समर्थन भी किया है और उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिसिया दमन की निंदा की है। गांव में हो रहे प्रदर्शन को किसान नेताओं जवाहर सिंह कंवर, मुखराम, के साथ माकपा पार्षद सुरती कुलदीप, माकपा जिला सचिव प्रशांत झा,डीएल टंडन,जनकदास,नरेंद्र साहू,हुसैन ने भी किसानों को संबोधित किया।

13-09-2020
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से अचानक गायब हो गए किसानों के नाम

कवर्धा। केंद्र सरकार ने किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना कि शुरुआत की है। इस योजना के तहत पंजीकृत किसानों को हर वर्ष 6 हजार रुपए उनके खाते में डाले जाने थे। लेकिन अचानक इस योजना से किसानों के नाम गायब होते गए। इससे किसान अधिक परेशान है। वही केंद्र सरकार की इस योजना को छलावा बता रहे हैं। कबीरधाम जिले में 1 लाख 64 हजार पंजीकृत किसान है। लेकिन पहली किस्त जिले के 1 लाख 16 हजार 485 किसानों को योजना की पहली किस्त यानी दो दो हजार रुपए मिले, लेकिन यह पांचवी क़िस्त तक जाते किसानों की संख्या आधे से भी कम हो गई। किसानों के नाम योजना से गायब होने के बाद किसानों को अधिकारियों के चक्कर लगाना पड़ रहा है, लेकिन साफ्टवेयर से ही किसानों के नाम गायब हो गए है। 

ये है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना 
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि इस योजना के तहत सरकार किसानों के बैंक खातों में हर साल 6000 रुपये जमा करती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसान के खाते में डाली जाती है। इस योजना के तहत सरकार किसानों के बैंक खातों में हर साल 6000 रुपये जमा करती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसानों के खाते में डाली जाती है। ताकि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सके।

देखिए कैसे कम होते गए किसान
जिले में करीब 1 लाख 64 हजार पंजीकृत किसान है, जिसमें से 116485 किसानों को पहली क़िस्त मिली। इसके बाद दूरी क़िस्त 102427 किसानों को मिली, तीसरी क़िस्त में 71447 किसानों की मिली, चौथी क़िस्त में 56288 किसानों को मिली इसके बाद पांचवी क़िस्त मात्र 11138 किसानों को सम्मान निधि की राशि मिल पाई है। वही छटवी क़िस्त में भी किसानों की संख्या काफी कम कर देने की जानकारी मिल रही है। इस प्रकार अचानक योजना से किसानों के नाम गायब हो गए। इससे किसान परेशान है। 

वर्जन
किसानों का लगातार पंजीयन किया जा रहा है। पंजीकृत सभी किसानों की लिस्ट योजना के लिए भेजी गई है। लेकिन केंद्र से ही कम किसानों की लिस्ट आई है। लिस्ट के आधार पर सीधे खाते में राशि डाली जाती है। 
मोरध्वज डड़सेना, डिप्टी डारेक्टर, कृषि विभाग कबीरधाम

10-09-2020
कर्ज लेकर भी प्रदेश सरकार किसानों और दीगर मदों के भुगतानों को एकमुश्त चुकता नहीं कर पा रही : उपासने  

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने प्रदेश सरकार के फिर 700 करोड़ रुपए का कर्ज लिए जाने पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि,यह देश की संभवत: पहली राज्य सरकार होगी जो सत्ता में आने के बाद से केवल कर्ज लेने वाली सरकार का खिताब हासिल करेगी। प्रदेश की बेहतर आर्थिक स्थिति की शेखी बघारते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल घूम-फिरकर दो ही काम कर रहे हैं, एक केंद्र सरकार से जब-तब पैसे मांगने के लिए चिठ्ठियां लिखना और दूसरा, घूम-फिरकर रिजर्व बैंक से कर्ज लेना। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा है कि, प्रदेश सरकार अपने आर्थिक संसाधनों के विकास और अथोर्पार्जन के नए स्रोत विकसित करने के बजाय लगातार कर्ज लेकर छत्तीसगढ़ पर कर्ज का बोझ बढ़ाती ही जा रही है। मंगलवार को राज्य सरकार ने फिर जो 700 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है, वह उसे आने वाले तीन वर्षों में 5.09 फीसदी की ब्याज दर के साथ लौटाना होगा। अभी प्रदेश सरकार 360.80 करोड़ रुपए का मासिक ब्याज चुका रही है। मार्कफेड और नान के लगभग 5 हजार करोड़ रुपए के भुगतान के लिए प्रदेश सरकार ने 700 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर अब भी पूरे भुगतान के उद्देश्य में कामयाब नहीं हो पाएगी। किसानों के विभिन्न भुगतानों के लिए प्रदेश सरकार शुरू से कर्ज लेकर ही काम चला रही है। अभी हाल ही किसानों की अंतर राशि की दूसरी किश्त और गौ-धन गोबर योजना के भुगतान के लिए भी प्रदेश सरकार 13सौ करोड़ रुपए का कर्ज लिए बैठी है। एक तरफ प्रदेश सरकार कर्ज पे कर्ज लिए जा रही है और जब जीएसटी के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने कर्ज लेने को कहा तो मिथ्या राजनीतिक प्रलाप करते मुख्यमंत्री बघेल ने इससे मना करके उल्टे केंद्र सरकार को कर्ज लेकर प्रदेश के जीएसटी की राशि के भुगतान की बात कहकर अपने सत्तावादी अहंकार में चूर बड़बोलेपन का परिचय दिया था। उपासने कहा कि कर्ज लेकर भी प्रदेश सरकार अपने किसानों और दीगर मदों के भुगतानों को एकमुश्त चुकता नहीं कर पा रही है, यह प्रदेश सरकार की अक्षमता और नासमझी का परिचायक है।

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