GLIBS
19-09-2018
Brigade Pradeep : नक्सल इलाकों में फोर्स को काम करने नहीं दिया जा रहा : ब्रिगेडियर प्रदीप 

रायपुर। कारगिल में पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ने वाले बिग्रेडियन प्रदीप यदु ने आज प्रेसवार्ता में सरकार के खिलाफ जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नक्सल इलाकों में फोर्स को काम नहीं करने दिया जा रहा है। जब से भाजपा की सत्ता में आई है सैनिकों के पास जंगल लड़ने गोला-बारुद तक नहीं है। बिग्रेडियर प्रदीप यदु ने कहा कि सरकार फौज के राशन में भी कटौती कर रही है। केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन को मंजूरी तो दे दी लेकिन उसे सही तरीके से लागू नहीं किया गया है।

वैन रैंक वन पेंशन को केंद्र सरकार ने मंजूरी तो दे दी है पर अब तक इसे सही रूप से लागू नहीं किया गया है। इसके विरोध में सेवानिवृत्त सैनिकों को 1190 दिन हो गए जंतर-मंतर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। सेना के जवानों के पेंशन को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई। प्रदीप यदु ने कहा कि सेना में जवानों को 15 से 20 हजार रुपए पेंशन मिलता है जबकि अन्य सिविलियंस को 90 से 95 हजार रुपए पेंशन मिलता है। 

 

 

18-09-2018
Rafael : राफेल सौदे के विरोध में कांग्रेस ने किया प्रदर्शन
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, केंद्र सरकार पर जमकर बोला हमला
06-09-2018
SC/ST Act: सवर्णों के एससी-एसटी एक्ट के विरोध में प्रतापपुर बाजार रहा बंद

प्रतापपुर। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार अधिनियम को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए नए नियम के विरोध में भारत बन्द के आव्हान पर आज प्रतापपुर पूर्ण रूप से बन्द रहा, नगर की व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के साथ शैक्षणिक संस्थान भी बन्द रहे। इस दौरान सामान्य वर्ग के लोगों ने कहा कि हमारा विरोध किसी जाति से नहीं वरन सरकार द्वारा थोपे गए गलत कानून से है। जिसके कारण देश में जातिय संघर्ष बढ़ रहा है तथा यह लड़ाई सरकार के खिलाफ है जो हमारे अधिकार की लड़ाई है।

गौरतलब है कि एससी/एसटी एक्ट को लेकर कुछ महीने पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि मामले में उच्च स्तरीय जांच के बाद ही आरोपी की गिरफ्तारी होगी, इस एक्ट के बढ़ते दुरुपयोग के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने कानून में कई संशोधन किए थे जिसके बाद न्यायालय के इस फैसले को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन करते हुए अधिसूचना ला दिया जिसके तहत मामले की जांच के बिना ही आरोपी की गिरफ्तारी, जमानत नहीं मिलना सहित अन्य नियम बना दिये जिसके बाद सामान्य वर्ग के लोगों में सरकार के इस फैसले के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया क्योंकि उस एक्ट का ज्याददत्तर दुरुपयोग होता है और यह प्रमाणित हो चुका है कि सत्तर प्रतिशत फर्जी केस होते हैं।

सरकार के इस फैसले के विरोध में सामान्य वर्ग कर लोगों ने भारत बन्द करने का आव्हान किया था ताकि सरकार पर कानून में संशोधन के लिए दबाव बना सके,इसी क्रम में आज प्रतापपुर भी पूर्णतः बन्द रहा,सुबह से ही सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानें बन्द रहीं,नगर के सभी शैक्षणिक संस्थान भी बन्द रहा।इस दौरान सामान्य वर्ग के लोगों ने कहा कि हमारा विरोध किसी जाति को लेकर नहीं है बल्कि सरकार द्वारा जबरन थोपे गए कानून का है जो स्वच्छ समाज के हित में नहीं है, इस तरह के कानून से देश में जातिय संघर्ष बढ़ रहा है क्योंकि इसके दुरुपयोग से आपस द्वेष की भावना बढ़ रही है जो न देश के हित में है और नहीं आम आदमी के।हम सरकार के इस कदम का विरोध करते हैं तथा गुजारिश करते हैं कि एक्ट को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के हिसाब से लागू करें अन्यथा इसके विरोध में भविष्य में उग्र आंदोलन किये जाएंगे, इस दौरान राष्ट्रपति के नाम एसडीएम प्रतापपुर को ज्ञापन भी सौंपा गया, बन्द को सफल बनाने तथा एक्ट के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सक्रिय रहे।

06-09-2018
SC/ST Act: एससी-एसटी एक्ट के विरोध में मालीघोरी बंद

बालोद। केंद्र सरकार की तरफ से एसटी-एससी एक्ट में किए गए संशोधन के बाद गुरुवार सवर्ण संगठनों ने भारत बंद का आव्हान किया है। मालीघोरी के व्यापारियों ने भी बंद का समर्थन किया है। मालीघोरी के बजार चौक बस स्टैंड एवं आसपास के इलाकों की दुकान बंद रही।

मालीघोरी में ग्राम के सभी व्यापारी बधुओं के द्वारा अपना दुकान बंद कर इस एक्ट का विरोध किये इस विरोध में ग्राम के प्रमुख संजय दुबे जी ,मुकेश जैन जी ,नेमा राम देशमुख जी ,राकेश साहु जी,राकेश जैन,मंझले खान जी,तिलक साहू जी, फिरोज तिगाला जी सरपंच,बबलू गुप्ता जी,बलमकुण्ड गुप्ता ,कमलेश जैन। मुकेश जैन संदीप नाहर  ,नथमल नाहटा  ,बबलू देशमुख ,खूबलाल भट्ट,यासीन खान ,गेंदलाल देशमुख ,आदि का सहयोग रहा।

06-09-2018
High Alert: सवर्णों का आज भारत बंद, सभी राज्यों में हाई अलर्ट, मध्य प्रदेश में धारा 144 लागू

नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट के तहत आज भारत बंद का एलान किया है। भारत बंद कई सवर्ण संगठनों द्वारा बुलाया गया है। सभी को केंद्र सरकार के इस फैसले से आपत्ति है। मामला संवेदनशील होने के कारण खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में भारत बंद का असर दिखना शुरू हो गया है। 

मध्यप्रदेश :

भारत बंद को देखते हुए मध्यप्रदेश के दस जिलों में धारा 144  लागू की गई है। मध्यप्रदेश के भिंड, ग्वालियर, मोरेना, शिवपुरी, अशोक नगर, दतिया, श्योपुर, छत्तरपुर, सागर और नरसिंहपुर में धारा 144 लागू की गई है. इस दौरान यहां पर पेट्रोल पंप, स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे। बता दें कि इससे पहले एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को 'भारत बंद' बुलाया था, तब सबसे ज्यादा हिंसा मध्य प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में हुई थी। इस वजह से इस बार प्रशासन 'भारत बंद' को देखते हुए पूरी तरह सतर्क है।

राजस्थान:

एससी/एसटी एक्ट में संशोधन लाए जाने के विरोध में राजस्थान में अगड़ी जातियों ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया है। गुरुवार सुबह भारत बंद का असर यहां भी दिखना शुरू हुआ और जयपुर के स्कूल, कॉलेज और मॉल सब बंद नज़र आए। राजस्थान में सर्व समाज संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है, लेकिन हम इसे पूरा नहीं होने देंगे।

बिहार:

बंद को लेकर बिहार में अच्छा खासा असर देखा जा रहा है। बिहार के खगड़िया में सवर्णों के समूह ने NH31 पर जाम लगा दिया है। यहां पर लोग मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. लोगों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है उसका पालन किया जाए। पिछली हिंसा से सबक लेते हुए प्रशासन ने इस बार कई जिलों में अलर्ट जारी कर भारी पुलिस की तैनाती किए जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। भीड़ से निपटने के लिए आंसू गैस के गोले भी थानों में पहुंचा दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश:

भारत बंद को देखते हुए उत्तर प्रदेश में सुरक्षा को मुस्तैद किया गया है। राज्य में कुल 11 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी लखनऊ समेत बिजनौर, इलाहाबाद, आजमगढ़, बरेली जैसे कई शहरों में पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। ताकि किसी भी तरह के हालातों से निपटा जा सके।

18-08-2018
Raipur Railway : केरल में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री का मुफ्त परिवहन प्रदान करेगा रायपुर रेल मंडल

रायपुर। केरल के बाढ़ पीड़ितों के लिए राशन, कपड़े और जरूरी समान के लिए रेलवे मुफ्त परिवहन प्रदान करेगा। इसकी जानकारी रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर दी है। रेल मंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि हम केरल बाढ़ और केंद्र सरकार से प्रभावित लोगों के कल्याण के बारे में चिंतित हैं। हम सभी संभावित सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। रेलवे अब विभिन्न राज्य सरकारों के माध्यम से केरल के लिए राहत सामग्री का मुफ्त परिवहन प्रदान करेगा। रेल मंत्री के ट्वीट के बाद रायपुर रेल मंडल ने केरल के बाढ़ पीड़ितों के लिए नि:शुल्क फ्रेट उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

बता दें कि केरल इस समय भयंकर बाढ़ की चपेट में है। लोगों के घर ताश की पत्ती की तरह ढह गए हैं। बाढ़ की वजह से अरबों रुपए का नुकसान हुआ है। सैकड़ों लोगों की बाढ़ की चपेट में आने से मौत हो गई है। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार और सभी राज्य सरकारों ने केरल के बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए सेना की मदद ली जा रही है। लोगों तक रेल,सड़क और हवाई मार्ग से राहत ौर बचाव सामग्री पहुंचाई जा रही है। इसे देखते हुए रेल मंत्री ने देश के सभी रेल मंडलों से नि:शुल्क राहत और बचाव सामग्री पहुंचाने ट्वीट की है। रेल मंत्री के ट्वीट के बाद रायपुर रेल मंडल ने भी केरल के लोगों तक नि:शुल्क राहत और बचाव सामग्री पहुंचाने नि:शुल्क फ्रेट देने की घोषणा की है।

 

10-08-2018
Triple Talaq Bill : राज्यसभा में आज पेश हो सकता है तीन तलाक बिल

नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के आज आखिरी दिन आज केंद्र सरकार राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पेश कर सकती है। गुरुवार को ही मोदी कैबिनेट ने इस बिल में संशोधन किए हैं, जिसके बाद अब ये बिल पास होने की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि इससे पहले कांग्रेस ने इस बिल में कई तरह की कमियां बताई थीं, जिसके बाद बिल को संशोधित किया गया है।

बता दें कि गुरुवार को ही राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव हुए हैं, इस चुनाव में एनडीए के हरिवंश सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है। यही कारण है कि एनडीए की स्थिति अभी मजबूत नजर आ रही है। ऐसे में केंद्र सरकार चाहेगी कि सत्र का अंत होते हुए वह तीन तलाक जैसे महत्वपूर्ण बिल को पास करवा पाए। बता दें कि नए बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा।

साथ ही विधेयक में एक और संशोधन किया गया है जिसमें पीड़ित के रिश्तेदार जिससे उसका खून का रिश्ता हो भी शिकायत दर्ज कर सकता है। बता दें कि पिछले सत्र में राज्यसभा में इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक देखने को मिली थी। जब विपक्ष की तरफ से विधेयक को त्रुटिपूर्ण बताते हुए प्रवर समिति में भेजने की मांग की गई थी।

18-07-2018
दर्द से कराहती महिला को खाट में लेकर 4 किमी पैदल पहुंचे अस्पताल, समय पर नहीं पहुंचने से हुई मौत

मलकानगिरी। बीमार पत्नी, परेशान पति और संजीवनी के आने की आस लिए पूरा परिवार। समय के हर बीतते पल में एंबुलेंस का इंतजार। इधर सीने में हो रही दर्द से कराहती पत्नी और समय पर इलाज की दिलाशा देता पति। बस यही दृश्य रहा मलकानगिरी जिले के खइरपुत कादगुडाई गांव की। जहां एक पति ने जाने किसकी गलती से अपनी पत्नी को खो दिया। आखिर व्यथा क्या थी जो पत्नी को समय पर अस्पताल पहुंचाने में पति नाकाम रहा। आखिर वजह क्या थी जो घर से अस्पताल की महज 4 किमी की दूरी इतनी लंबी हो गई की एक परिवार ने अपना एक सदस्य खो दिया।

दरअसल गांव की एक महिला को सीने में तेज दर्द का आभास हुआ। उसने इसकी सूचना पति को दी। पति ने एंबुलेंस को फोन किया। उधर से उक्त स्थान पर पहुंचने की बात कही गई। समय बीतता गया। घड़ी में मिनट की सूई अपनी एक चक्कर पूरी कर चुकी थी। लेकिन परिवार की आस न टूटी कि एंबुलेंस जल्द आएगी और बीमार महिला जाम्बति कंसारी को उपचार के लिए जल्द अस्पताल पहुंचाया जाएगा। इसी आस के बीच मिनट की सूई अपनी दुसरी चक्कर पूरी करने के कगार पर थी। लेकिन तब परिवार के सब्र का बांध टूटा। इसके बाद परिवार महिला को अस्पताल पहुंचाने का बीड़ा उठाता है और घर से अस्पताल की चार किमी की दुरी के सफर में निकल पड़ता है। यह 4 किमी की दुरी महज 4 किमी कही जा सकती थी अगर कोई एंबुलेंस वाहन या कोई और गाड़ी की सुविधा होती। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था। महिला को खाट में लादकर अस्पताल पहुंचाया गाया। कच्ची सड़क, बारिश की वजह से किचड़ व गड्ढों भरे रास्ते को परिवार ने पैदल हि तय किया। जैसे तैसे महिला को अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन जब तक वे पहुंचे तब तक काफि देर हो चुकी थी। रास्ते में ही महिला की मौत हो चुकी थी।

डॉक्टर का कहना यही था कि अगर समय पर उपचार होता तो जान बच सकती थी। राज्य और केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ओडिशा के वनांचल व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की यही नियति है। यह पहली घटना नहीं। इससे पहले भी लोगों की अकाल मौत हुई है। जो मौजूदा स्थिति है, उससे आगे भी इसकी तरह की घटनाएं होती रहेंगी। 

17-07-2018
पोलावरम बांध के विरोध में नक्सलियों ने किया बंद का आह्वान 

मलकमगिरी। तेलंगाना में बन रहे पोलावरम बांध के विरोध में नक्सलियों ने 20 जुलाई को बंद का आह्वान किया है। कोरापुट, मलकमगिरी, बिसाखा सीमांत दिभजनाल कमिटी के संपादक बेनु ने प्रेसनोट जारी कर पोलावरम बांध का विरोध किया है। बता दें कि इस बांध के बनने से ओडिशा के करीब 56 गांव प्रभावित हो रहे हैं। करीब 1300 एकड़ वन भूमि और आदिवासी परिवारों को विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। पोलावरम परियोजना में छत्तीसगढ़ से लगी हुई शबरी नदी के किनारों पर तटबंध बनाने से छत्तीसगढ़ में डुबान की स्थिति बनेगी, लगभग 1300 एकड़ वन भूमि होगी और हजारों आदिवासी परिवारों के विस्थापित होने की भी 

नौबत आ सकती है। पोलावरम बांध मामले को लेकर ओड़िसा समेत छत्तीसगढ़ में सुकमा और आसपास के लोग लंबे समय से राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। नक्सलियों के अनुसार यह बांध विकास के नाम पर बनाई जा रही इस परियोजना से सिर्फ कुछ धनी लोगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा होने वाला है। इसके विपरीत छोटे और मध्यम किसान, आदिवासी उजड़ने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के 23 गांवों का अस्तित्व नहीं रहेगा। इस परियोजना के कारण छत्तीसगढ और तेलंगाना क्षेत्र के 3 लाख लोग विस्थापित होंगे।

09-07-2018
समर्थन मूल्य में वृद्धि को किसान बता रहे है चुनावी झुनझूना

रायपुर। केंद्र सरकार ने तो धान के समर्थन मूल्य में 200 रूपए की बढ़ोत्तरी कर दी है परन्तु किसानों ने इस बढ़ोत्तरी को सिर्फ चुनावी लाभ लेने वाला बताया है।

2019 के लोकसभा चुनावों से पहले देश भर के किसानों के लिए मोदी सरकार ने खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ा दिया है। जबकी धान का समर्थन मूल्य प्रति क्ंिवटल200 रुपए बढ़ाया गया है। जो कि अब तक की सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी है। कांग्रेस की सरकार में समर्थन मूल्य 175 तक पहुंच चुका था।

किसान नेता रूपन चंद्राकर ने बताया कि भाजपा सरकार और उनके नेता इस साल दिए गए समर्थन मूल्य को सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में बताने की कोशिश कर रहे हैं। परन्तु यह बढ़ोतरी महज एक दिखावा है। जो चुनावी लाभ के लिए किया गया है।

किसान नेताओं ने मांग की है कि सरकार को पैदावार की खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर समस्त फसल खरीदने पर जोर देना चाहिए। साथ ही समर्थन मूल्य को दोगुना कर देना चाहिए। उनका कहना है कि सन 1975 से लेकर अब तक महंगाई ने आसमान छुआ है उस हिसाब से समर्थन मुख्य 25 सौ होना चाहिए। केंद्र की सरकार ने 200 रु मात्र समर्थन मूल्य बड़ा कर ऊंठ के मुह में जीरा दिया है। जिसके कारण असंतुष्ट किसान अपनी बात रखने के लिए विकल्प तलाश रहें हैं। 

किसान नेताओ का कहना है कि सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया है उन्होंने समर्थन मूल्य दोगुना करने की बात कही थी परन्तु उन्होंने केवल एक तिहाई ही समर्थन दिया है ये किसानों के साथ छल है।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804
Visitor No.