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04-09-2021
मौसम अलर्ट: बस्तर में कल हो सकती है भारी बारिश

रायपुर। रविवार को प्रदेश के  अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। साथ ही प्रदेश में गरज चमक के साथ एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा भी होने की संभावना है। प्रदेश में भारी वर्षा का क्षेत्र मुख्यतः बस्तर संभाग और उससे लगे जिले संभावित है।
मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि मानसून द्रोणिका गंगानगर, हिस्सार, हमीरपुर, गया, कोलकाता और उसके बाद दक्षिण-पूर्व की ओर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक स्थित है। एक चक्रीय चक्रवाती घेरा उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास स्थित है जो 4.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। 
एक चक्रीय चक्रवाती घेरा दक्षिण छत्तीसगढ़ और उसके आसपास 2.1 किलोमीटर से 3.6 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है।

25-08-2021
बस्तर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए जमीन आवंटन और संग्रहालय की कार्यवाही प्रक्रियाधीन

रायपुर। उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा है कि राज्य के बस्तर अंचल के लोगों की दिक्कतों और समस्याओं को समझकर उनकी तकलीफ दूर करने के लिए ही बस्तर विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। वनांचल के विकास में इस मंच की महत्वपूर्ण भूमिका है। बैठक में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशानुरूप बस्तर के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल निर्माण के लिए जमीन आवंटन और निर्माण सहित आदिवासी संग्रहालय स्थापित करने के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री लखमा बुधवार  दंतेवाड़ा जिले के जावंगा आडिटोरियम में आयोजित बस्तर विकास प्राधिकरण की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

प्रभारी मंत्री लखमा ने बैठक में किसानोंं को सिंचाई सुविधा दिलाने के लिए उनके नलकूपों का समय-सीमा पर विद्युत कनेक्शन देने, सुराजी गांव योजना के गौठानों में आर्थिक गतिविधियां संचालित किए जाए, जिसमें महिला समूहों को जोड़ने, वनांचल के युवाओं को लघु वनोपज संग्रहण और प्रसंस्करण सहित विभिन्न कार्यों में रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने, सभी पात्र लोगों को वनाधिकार मान्यता पत्र देने, जल जीवन मिशन के कार्यों में और अधिक गति लाने संबंधी बातें कही। इसके साथ ही उन्होंने जल जीवन मिशन के पूर्ण कार्यों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अवलोकन कराने के भी निर्देश दिए। 


प्रभारी मंत्री लखमा ने बैठक में शहीद वीर नारायण सिंह स्वावलंबन योजना की प्रगति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों के नलकूपों के ऊर्जीकरण, नलकूप खनन कार्य, सिंचाई नलकूप एवं चैन लिंक फैनसिंग कार्य तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग को वनोपज, कृषि उपज आधारित प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की स्वीकृति के संबंध में चर्चा की। उन्होंने निर्माण कार्यों की समीक्षा में प्राधिकरण मद से वर्ष 2004 से 2021-22 तक स्वीकृत अपूर्ण कार्यों को जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए। सभी समाजों के लिए भवनों की स्वीकृति और जमीन आवंटन की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग के जिलों में सांस्कृतिक धरोहरों एवं आदिवासी संस्कृति के अभिलेखीकरण के कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करवाएं। साथ ही दर्शनीय, एतिहासिक, धार्मिक, पर्यटन स्थलों के पर्यावरणीय संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को पर्यटन समिति के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं। 

विधायक चंदन कश्यप, अनुप नाग और देवती कर्मा ने भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को बैठक में रखा। मनोनीत सदस्यों और जिला पंचायत अध्यक्षों ने भी अनेक उपयोगी सुझाव दिए। बैठक में प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल, उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी, सांसद बस्तर दीपक बैज, कांकेर सांसद मोहन मंडावी, संसदीय सचिव रेखचंद जैन और शिशुपाल शोरी, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप, विधायक देवती कर्मा, राजमन बेंजाम, अनुप नाग उपस्थित थे।

25-08-2021
विशेष पुलिस महानिदेशक ने दिए माओवादी के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करने और बैकफुट पर लाने के निर्देश

जगदलपुर। बस्तर संभाग में 2 दिवसीय भ्रमण पर विशेष पुलिस महानिदेशक  अशोक जुनेजा जिला नारायणपुर पहुंचे। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर के सभाकक्ष में जिला पुलिस बल,बीएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक ली। बैठक में विगत वर्षाे में घटित नक्सल अपराध एवं घटनाओं पर चर्चा के साथ-साथ नक्सल उन्मूलन अभियान को लेकर कार्ययोजना एवं रणनीति की समीक्षा की। जुनेजा द्वारा आगामी दिनों में माओवादी के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करने एवं नक्सलियों को बैकफुट पर लाने के लिये उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया।
विशेष पुलिस महानिदेशक ने नक्सल विरोधी अभियान अंतर्गत आरओपी, एरिया डोमिनेशन और नक्सल गस्त-सर्चिंग के दौरान पुलिस एवं केन्द्रीय बलों द्वारा बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर, कांकेर और कोण्डागांव द्वारा अपने-अपने जिले से संबंधित नक्सल अभियानों की रूपरेखा की जानकारी, शासन द्वारा स्वीकृत निर्माण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत कराया गया।

समीक्षा बैठक में पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज सुन्दरराज पी., पुलिस महानिरीक्षक बीएसएफ,एसके त्यागी डीआईजी, उप महानिरीक्षक, बीएसएस (ऑप्स),एसएस दबास, उप महानिरीक्षक, बीएसएस, अनिल कुमार ठाकुर, उप महानिरीक्षक, आईटीबीपी, संजय शर्मा, उप महानिरीक्षक, एसएसबी पीएस डंगबाल,सुधीर कुमार,उप पुलिस महानिरीक्षक,कांकेर रेंज बालाजी सोमावार, पुलिस अधीक्षक, कांकेर शलभ सिन्हा, पुलिस अधीक्षक, कोंडागांव  सिद्धार्थ तिवारी, पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर यू.उदय किरण, सेनानी (बीएसएफ) अनंत, सेनानी (आईटीबीपी) समर बहादुर, सेनानी (आईटीबीपी) पवन सिंह, सेनानी (बीएसएफ) राजीव शर्मा,  सेनानी (आईटीबीपी) पंकज वर्मा, सेनानी (आईटीबीपी) भानुप्रताप सिंह और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नारायणपुर  नीरज चन्द्राकर सहित केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बल और पुलिस के अधिकारी उपस्थित रहे।

 

24-07-2021
मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का बस्तर में चौथा चरण जारी, इस बार पॉजिटिविटी दर कम

रायपुर। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक तीन लाख 16 हजार घरों में पहुंचकर 14 लाख 30 हजार लोगों की मलेरिया जांच कर चुकी है। इस दौरान पॉजिटिव पाए गए 9392 मरीजों का मौके पर ही इलाज शुरू किया गया है। बस्तर संभाग के सातों जिलों में इस अभियान का चौथा चरण 15 जून से शुरू किया गया है। अब तक दस लाख से अधिक लोगों की मलेरिया जांच की गई है जिनमें 8742 पॉजिटिव पाए गए हैं।
बस्तर संभाग में अभियान के पहले, दूसरे और तीसरे चरण में पॉजिटिविटी दर क्रमश: 4.6 प्रतिशत, 1.27 प्रतिशत और 1.04 प्रतिशत रही थी, जो अभी वर्तमान में संचालित चौथे चरण में और घटकर 0.87 प्रतिशत पर आ गई है। अभियान के प्रभाव से वहां मलेरिया के मामलों में लगातार कमी आ रही है। पूर्व में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के नाम से चलाए गए इस अभियान के असर की सराहना नीति आयोग और यूएनडीपी ने भी की है और इसे देश के आकांक्षी जिलों में संचालित सर्वश्रेष्ठ अभियानों में से एक बताया है।

अभी सरगुजा संभाग के पांचों जिलों में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का दूसरा और प्रदेश के नौ अन्य जिलों में पहला चरण संचालित किया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा संभाग में पूर्व में संचालित इस अभियान के अच्छे नतीजों को देखते हुए मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को इस बार कुल 21 जिलों में विस्तारित किया गया है। राज्य शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित इस अभियान के अंतर्गत इस बार 21 जिलों में 20 लाख 43 हजार से अधिक लोगों की मलेरिया जांच का लक्ष्य है। अभियान के दौरान मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे बस्तर संभाग के पहुंचविहीन, दुर्गम एवं दूरस्थ इलाकों में घर-घर पहुंचकर 11 लाख 37 हजार से अधिक लोगों की जांच करेगी।14 अन्य जिलों में करीब नौ लाख छह हजार लोगों की मलेरिया जांच की जाएगी।


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि बस्तर संभाग में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के चौथे चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक दो लाख दस हजार 174 घरों में पहुंचकर दस लाख 658 लोगों की मलेरिया जांच कर चुकी है। इस दौरान पॉजिटिव पाए गए 8742 लोगों का तत्काल इलाज शुरू किया गया। अभियान के तहत अब तक बस्तर जिले में एक लाख 18 हजार 738, बीजापुर में एक लाख 60 हजार 927, दंतेवाड़ा में दो लाख 36 हजार 223, कांकेर में 61 हजार 468, कोंडागांव में 59 हजार 801, सुकमा में दो लाख 42 हजार 341 और नारायणपुर में एक लाख 21 हजार 160 लोगों की जांच की जा चुकी है। 
डॉ. शुक्ला ने बताया कि जांच में बस्तर जिले में 1319, बीजापुर में 1146, दंतेवाड़ा में 1215, कांकेर में 430, कोंडागांव में 371, सुकमा में 1083 और नारायणपुर में 3178 लोग मलेरियाग्रस्त पाए गए। अभियान के दौरान मलेरिया के मरीजों को नि:शुल्क दवा देने के साथ ही घरों में मच्छररोधी स्प्रे का छिड़काव, लार्वा को नष्ट करने की गतिविधि और मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण किया जा रहा है। लोगों को मच्छरों और मलेरिया से बचाव के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। चौथे चरण के दौरान अब तक पॉजिटिव पाए गए 48 प्रतिशत मरीजों में मलेरिया के लक्षण दिखाई दे रहे थे, जबकि 52 प्रतिशत में इसके कोई लक्षण नहीं थे। नियमित सर्विलेंस के दौरान मलेरिया के अलाक्षणिक मरीज पकड़ में नहीं आते हैं। बिना लक्षण वाले मरीज रिजर्वायर के रूप में समुदाय में रहते हैं और इनके द्वारा मलेरिया का संक्रमण होते रहता है। अलाक्षणिक मलेरिया एनीमिया और कुपोषण का भी कारण बनता है। 

मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के दूसरे चरण वाले सरगुजा जिले में अब तक 44 हजार 188, सूरजपुर में 18 हजार 571, बलरामपुर-रामानुजगंज में 75 हजार 848, जशपुर में 70 हजार 721 और कोरिया में 26 हजार 917 लोगों की जांच की गई है। अभियान में पहली बार शामिल गरियाबंद जिले में अब तक 49 हजार 929, धमतरी में 49 हजार, कोरबा में 18 हजार 518, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 11 हजार 786, रायगढ़ में 4244, मुंगेली में 3556, राजनांदगांव में 19 हजार 823, कबीरधाम में 20 हजार 753 और बालोद में 15 हजार 397 लोगों की मलेरिया जांच की गई है। इन जिलों में स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक एक लाख छह हजार घरों में पहुंचकर चार लाख 29 हजार 252 लोगों की जांच कर चुकी है। इनमें 650 पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें सरगुजा के आठ, बलरामपुर और कोरिया के 11-11, गरियाबंद के 110, धमतरी के 165, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और मुंगेली के एक-एक, रायगढ़ के तीन, राजनांदगांव के 235, कबीरधाम के 74 और बालोद जिले के 30 मरीज शामिल हैं।

13-07-2021
Breaking : बस्तर संभाग में भारी बारिश और बिजली गिरने के आसार,मौसम विभाग ने जारी किया यलो अलर्ट

रायपुर। मौसम विभाग ने बस्तर संभाग और इससे लगे जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई है। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने आगामी 24 घंटे के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। प्रदेश के बस्तर, कोंडागांव,दंतेवाड़ा,सुकमा,नारायणपुर बीजापुर इससे लगे हुए जिलों के लिए चेतावनी जारी की गई है। यहां एक-दो स्थानों पर गलर-चमक के साथ भारी वर्षा और बिजली गिरने की संभावना है। मौसम विज्ञानी चंद्रा ने राहत आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन को पत्र जारी किया है। गलत-चमक के साथ भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। जिलेवार पूर्वानुमान देखने क्लिक करें-


 

 

 

20-06-2021
21 जिलों में पहुंचा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान, तीन चरणों के असर से मामलों में आई 39 प्रतिशत की कमी

रायपुर। पूरे बस्तर संभाग से मलेरिया को खत्म करने में मील का पत्थर साबित हो रहे मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के चौथे चरण की शुरुआत 15 जून से हो चुकी है। 31 जुलाई तक चलने वाले चौथे चरण के शुरुआती चार दिनों में ही स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब 31 हजार घरों तक पहुंच चुकी है। इस दौरान 1 लाख 28 हजार से अधिक लोगों की मलेरिया जांच कर पॉजिटिव पाए गए 1066 मरीजों का तत्काल इलाज शुरू किया गया है। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ और मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के असर को देखते हुए प्रदेश में इस बार इसे कुल 21 जिलों तक विस्तारित किया जा रहा है। अभियान से मलेरिया उन्मूलन के साथ ही एनीमिया और कुपोषण को खत्म करने और शिशु व मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी। छत्तीसगढ़ में मलेरिया से सबसे ज्यादा प्रभावित बस्तर संभाग में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के पहले तीन चरणों का व्यापक असर दिखा है। मई-2020 की तुलना में वहां मई-2021 में मलेरिया के मामलों में 39 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले मई में बस्तर संभाग के सातों जिलों में जहां इसके कुल 2298 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं इस मई में केवल 1404 प्रकरण सामने आए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कांकेर जिले में 84 प्रतिशत, कोंडागांव में 82 प्रतिशत, बस्तर में 37 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 22 प्रतिशत, सुकमा में 21 प्रतिशत, बीजापुर में नौ प्रतिशत और नारायणपुर में दो प्रतिशत की कमी आई है। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के प्रभाव से एपीआई यानि प्रति एक हजार की आबादी में सालाना मिलने वाले मलेरिया के मरीजों की संख्या में भी बड़ी कमी आई है। वर्ष 2016 में 26.78 एपीआई वाले बस्तर संभाग की एपीआई 2020 में घटकर 8.57 पर पहुंच गई है।
 

अभियान को जन अभियान के रूप में विस्तारित किया गया :
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपील पर पूरे बस्तर संभाग में मलेरिया मुक्त अभियान को जन अभियान के रूप में विस्तारित किया गया है। अभियान के पहले चरण के दौरान दंतेवाड़ा प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री बघेल ने सार्वजनिक सभा में बस्तर को मलेरिया मुक्त करने लोगों को शपथ दिलाई थी। स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले के साथ लगातार बैठक कर अभियान को सफल बनाने मॉनिटरिंग कर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। दिसंबर-2020 व जनवरी-2021 के दौरान मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के तीसरे और मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के पहले चरण के दौरान बस्तर और सरगुजा संभाग के 2309 गांवों में करीब 15 लाख 70 हजार लोगों की मलेरिया जांच की गई थी।  
 

अभियान के प्रभाव से नीति आयोग और यूएनडीपी भी प्रभावित :
बस्तर में मलेरिया को नियंत्रित करने में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के प्रभाव से नीति आयोग और यूएनडीपी भी प्रभावित है। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए इसे देशभर के आकांक्षी जिलों में संचालित सर्वश्रेष्ठ अभियानों में से एक बताया है। दोनों संस्थाओं ने मलेरिया को खत्म करने देश के अन्य आकांक्षी जिलों में भी इस तरह के अभियान संचालित करने की सिफारिश की है। अभियान के व्यापक असर और उपयोगिता को देखते हुए जीएफएटीएम भी मोबिलिटी-सपोर्ट प्रदान करने आगे आया है। इंटेंसिफाइड मलेरिया एलिमिनेशन प्रोजेक्ट  के अंतर्गत संस्था 16 जिलों के 87 विकासखंडों में मलेरिया के उन्मूलन के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगी। जीएफएटीएम 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2024 तक प्रदेश से मलेरिया को खत्म करने वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
 

 

 

सरकार 9 और जिलों में करने जा रही विस्तारित  :
बस्तर और सरगुजा संभाग में अभियान की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार इसे नौ और जिलों में विस्तारित करने जा रही है। सरगुजा संभाग के पांचों जिलों के साथ ही बिलासपुर संभाग के चार जिलों मुंगेली, कोरबा, रायगढ़ और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग संभाग के तीन जिलों बालोद, कबीरधाम और राजनांदगांव तथा रायपुर संभाग के दो जिलों धमतरी और गरियाबंद में 25 जून से मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही मलेरिया उन्मूलन के इस गहन अभियान की पहुंच प्रदेश के कुल 21 जिलों तक हो जाएगी। अभियान के अंतर्गत 20 लाख 29 हजार लोगों की मलेरिया जांच की जाएगी।  

पैरों के अंगूठे में निशान लगाकर की जाती है मार्किंग :
राज्य शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ की ओर सेृ जनवरी-फरवरी-2020 में बस्तर संभाग के सातों आकांक्षी जिलों में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का पहला चरण संचालित किया गया था। उसी साल जून-जुलाई में दूसरा और दिसंबर-2020 व जनवरी-2021 में इसका तीसरा अभियान चलाया गया। घर-घर जाकर पहले चरण में 14 लाख छह हजार, दूसरे चरण में 23 लाख 74 हजार और तीसरे चरण में 15 लाख 69 हजार लोगों की मलेरिया जांच की गई। पहले चरण में पॉजिटिव  पाए गए 64 हजार 646, दूसरे चरण में 30 हजार 76 और तीसरे चरण में 16 हजार 148 मलेरिया पीड़ितों का तत्काल उपचार शुरू किया गया।
पहले, दूसरे और तीसरे चरण के अभियानों में टेस्ट पॉजिटिविटी दर क्रमश: 4.6 प्रतिशत, 1.27 प्रतिशत और 1.03 प्रतिशत पाई गई। इन अभियानों में मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ओर से घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे बस्तर के पहुंचविहीन, दुर्गम एवं दूरस्थ इलाकों में घर-घर पहुंचकर सभी लोगों की आरडी किट से मलेरिया की जांच की गई। पॉजिटिव पाए गए लोगों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थ खिलाकर तत्काल मलेरिया के इलाज के लिए दवाई का सेवन चालू किया गया। मितानिनों की निगरानी में उन्हें दवाइयों की पूरी खुराक खिलाई गई। अभियान के दौरान हर घर और हर व्यक्ति की जांच तय करने के लिए घरों में स्टीकर चस्पा कर जांच किए गए लोगों के पैर के अंगूठे में निशान लगाकर मार्किंग की जाती है।

 

 


घरों में मच्छर पैदा करने वाले स्रोतों को भी किया गया नष्ट :
बस्तर संभाग में तीन चरणों की स्क्रीनिंग में पाए गए मलेरिया के मरीजों में 57 प्रतिशत से 60 प्रतिशत ऐसे मरीज थे, जिनमें इसके कोई लक्षण नहीं थे। नियमित सर्विलेंस के दौरान मलेरिया के ऐसे मामले पकड़ में नहीं आते हैं। बिना लक्षण वाले मरीज रिजर्वायर के रूप में समुदाय में रहते हैं और इनके और से मलेरिया का संक्रमण होते रहता है। अलाक्षणिक मलेरिया एनीमिया और कुपोषण का भी कारण बनता है। अभियान के दौरान मलेरिया के दोनों तरह के मरीजों, लक्षण वालों और बिना लक्षण वालों का पूर्ण उपचार किया गया। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के दूसरे एवं तीसरे चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों की ओर से मलेरिया के साथ-साथ कोविड-19 के लक्षणों वाले व्यक्तियों की भी स्क्रीनिंग की गई। अभी चौथे चरण में भी ऐसे लोगों की स्कीनिंग की जा रही है। अभियान के दौरान एक (1) से अधिक एपीआई वाले उप स्वास्थ्य केंद्रों के सभी गांवों में करीब 34 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण किया गया। घरों में मच्छर पैदा करने वाले स्रोतों को भी नष्ट किया गया।
 

अप्रैल-2021 में मलेरिया के मामलों में 60 प्रतिशत की कमी :
बस्तर संभाग में अभियान के अच्छे  नतीजों को देखकर इसे मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के रूप में विस्तारित करते हुए दिसंबर-2020 में सरगुजा संभाग के पांचों जिलों कोरिया, जशपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सरगुजा और सूरजपुर में अभियान संचालित किया गया। इस अभियान के पहले चरण में तीन लाख 89 हजार लोगों की मलेरिया जांच कर पॉजिटिव पाए गए लोगों का मौके पर इलाज किया गया। अभियान के असर से वहां अप्रैल-2020 की तुलना में अप्रैल-2021 में मलेरिया के मामलों में 60 प्रतिशत की कमी आई है।

 

20-06-2021
नई सोच के साथ पंचायत के अधिकारों का संरक्षण और शक्तिशाली बनाने में सहयोग करने की अपील की कमिश्नर जीआर चुरेन्द्र ने

जगदलपुर/रायपुर। बस्तर संभाग कमिश्नर जीआर चुरेन्द्र ने पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कांकेर जिले के अधिकारियों की जिला पंचायत के सभाकक्ष में बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम सभा को मजबूत करने, ग्राम विकास एवं न्याय समिति का गठन कर सरकार की योजनाओं को सुचारू रूप से क्रियान्वयन करने के साथ ग्राम पंचायतों को स्वायत स्वरूप प्रदान करने के निर्देश दिए। राजस्व प्रशासन को पूर्ण रूप से सुव्यवस्थित एवं त्रुटीहीन बनाकर कम्प्यूटर में एन्ट्री कर राजस्व अभिलेख का अद्यतन जानकारी रखने के लिए निर्देशित करते हुए उन्होंने पटवारियों पर नियंत्रण की व्यवस्था बनाने के लिए ग्राम पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देकर दायित्व का निर्वहन गंभीरता से करने कहा। शासकीय भूमि का सर्वेक्षण कर चिन्हांकित करने और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए आरक्षित रखने के निर्देश दिए। अवैध कटाई एवं अवैध माईनिंग उत्खनन को रोकने के लिए ग्राम समिति के माध्यम से व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी कमिश्नर से दिए गए। कमिश्नर चुरेन्द्र ने कहा कि महात्मागांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत विशेष प्राथमिकता के कार्यों जैसे-डबरी, तालाब का पानी भरने नाली का निर्माण करने लोक प्रयोजन के स्थलों से कब्जा हटाकर उसका समग्र विकास, लोगों को आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष पहल कर शासकीय निजी एवं पड़त भूमि अथवा भर्री-भाटा वाली भूमि एवं वनाधिकार पट्टे, व्यक्तिगत पट्टा एवं सामुदायिक वन संसाधन पट्टों की भूमि का चिन्हांकन एवं सूचीकरण कर विकास कार्यों को बढ़ाने के लिए निर्देशित किया गया, साथ ही किसानों के लिए मत्स्य पालन, उद्यानिकी विकास, फसल प्रतिरूप परिवर्तन, रेशम पालन, डेयरी व कुक्कुट पालन, कुटीर एवं लघु उद्योगों का विकास, जल जंगल जमीन की विशेष प्रबंधन करने के लिए पहल करने के लिए भी उनकी ओर से जिले के अधिकारियों को निर्देशित किया गया।

अधिकारियों को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि नई सोच के साथ पंचायत के अधिकारों का संरक्षण और शक्तिशाली बनाने के लिए जनप्रतिधियों का सहयोग करें। समाजिक संगठनों से मिलकर सरकार की योजनाओं का सफलता पूर्वक क्रियान्वयन करें। जिले के सभी सरकारी कार्यालयों के परिसरों में पौधरोपण कराना सुनिश्चित करें। कलेक्टर चन्दन कुमार ने पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त एवं सुदृढ़ बनाने के लिए कमिश्नर के दिए गए मार्गदर्शन का तन्मयता से पालन करते हुए क्रियान्वयन करने का भरोसा दिलाया। बैठक में कांकेर जिले के जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ. संजय कन्नौज, वनमण्डाधिकारी कांकेर अरविंद पीएम, अपर कलेक्टर एसपी वैद्य, उपायुक्त आदिवासी विकास माखनसिंह ध्रुव, एसडीएम, तहसीलदार सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

13-06-2021
बस्तर संभाग में चल रहे मलेरिया उन्मूलन अभियान की तारीफ की संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम व नीति आयोग ने

रायपुर। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और नीति आयोग ने प्रदेश के बस्तर संभाग में मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ से संचालित मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की सराहना की है। यूएनडीपी ने नीति आयोग को सौंपे अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आकांक्षी जिलों बीजापुर और दंतेवाड़ा में इस अभियान के बहुत अच्छे नतीजे आए हैं। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के असर से बीजापुर जिले में मलेरिया के मामलों में 71 प्रतिशत और दंतेवाड़ा में 54 प्रतिशत की कमी आई है। यूएनडीपी ने इस अभियान को आकांक्षी जिलों में संचालित सबसे बेहतर अभियानों में से एक बताया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मलेरिया को खत्म करने देश के अन्य आकांक्षी जिलों में भी इस तरह का अभियान संचालित किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग को मलेरिया से मुक्त करने राज्य शासन की ओर से शुरू किए गए मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का व्यापक असर देखने को मिला है। बस्तर क्षेत्र में इसके बेहतरीन परिणाम देखे जाने के बाद इस अभियान का मलेरिया मुक्त छतीसगढ़ अभियान के रूप में पिछले वर्ष के अंत में सरगुजा संभाग में भी क्रियान्वयन किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ की ओर से चलाए गए दोनों संभागों में इन विशेष अभियानों से मलेरिया के प्रकरणों में लगातार कमी आ रही है। अप्रैल-2020 की तुलना में अप्रैल-2021 में सरगुजा संभाग में मलेरिया के मामलों में 60 प्रतिशत और बस्तर संभाग में 45 प्रतिशत की कमी आई है।

23-05-2021
भूपेश बघेल ने की समीक्षा, बस्तर संभाग के दो जिलों के पुलिस अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बस्तर संभाग के दो जिले सुकमा और बीजापुर के पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री बघेल ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिए। बैठक में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, बस्तर सांसद दीपक बैज, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह  सुब्रत साहू एवं स्पेशल डीजी नक्सल ऑपरेशन अशोक जुनेजा मौजूद थे।

 

 

22-05-2021
मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के असर से सरगुजा और बस्तर संभाग में मामले हुए आधे के करीब

रायपुर। राज्य शासन के मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का असर दिखने लगा है। मलेरिया नियंत्रण के लिए बस्तर और सरगुजा संभागों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा चलाए गए विशेष अभियानों से वहां मलेरिया के मामलों में काफी कमी आई है। सरगुजा संभाग में अप्रैल-2020 की तुलना में अप्रैल-2021 में मलेरिया के मामलों में 60 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं बस्तर संभाग में भी पिछले अप्रैल की तुलना में इस अप्रैल में मलेरिया के मामले 45 प्रतिशत घटे हैं। पिछले अप्रैल में बस्तर संभाग के सातों जिलों में जहां मलेरिया के कुल 2854 प्रकरण मिले थे, वहीं इस साल अप्रैल में कुल 1564 मामले ही सामने आए हैं। सरगुजा संभाग के पांच जिलों में पिछले अप्रैल के 137 मामलों की तुलना में इस अप्रैल में केवल 55 मामले दर्ज किए गए हैं।   मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के असर से पिछले अप्रैल की तुलना में इस अप्रैल में मलेरिया के मामलों में कांकेर जिले में 79 प्रतिशत, कोंडागांव में 73 प्रतिशत, बस्तर और नारायणपुर में 50-50 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 32 प्रतिशत, बीजापुर में 20 प्रतिशत और सुकमा में दस प्रतिशत की कमी आई है। कांकेर जिले में पिछले अप्रैल में जहां मलेरिया के 305 प्रकरण थे, वहीं इस साल केवल 63 मामले सामने आए हैं। कोंडागांव में पिछले वर्ष के 401 मामलों की तुलना में इस साल 107, बस्तर में 589 की तुलना में 295, नारायणपुर में 357 की तुलना में 180, दंतेवाड़ा में 517 की तुलना में 351, बीजापुर में 487 की तुलना में 390 तथा सुकमा में पिछले वर्ष के 198 मामलों की तुलना में इस वर्ष 178 मामले मलेरिया के दर्ज किए गए हैं। सरगुजा जिले में जहां पिछले वर्ष अप्रैल में मलेरिया के 11 प्रकरण दर्ज किए गए थे, वहां इस वर्ष अप्रैल में एक भी प्रकरण नहीं आया है। बलरामपुर-रामानुजगंज में पिछले वर्ष के 25 मामलों की तुलना में इस साल पांच, जशपुर में 78 की तुलना में 25 और सूरजपुर में पिछले वर्ष के छह मामलों की तुलना में इस वर्ष केवल तीन मामले मलेरिया के दर्ज किए गए हैं।

 

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