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04-03-2021
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बुजुर्ग लोगों को भर्ती करने और उपचार में निजी अस्पताल दे प्राथमिकता

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी चिकित्सा संस्थानों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी बुजुर्ग लोगों को भर्ती करने और उपचार में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जस्टिस अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आरएस रेड्डी की पीठ ने अपने 4 अगस्त 2020 के आदेश में परिवर्तन करते हुए यह कहा। उस आदेश में शीर्ष न्यायालय ने कोरोना वायरस के जोखिम को देखते हुए बुजुर्ग लोगों को भर्ती एवं उपचार में प्राथमिकता देने का निर्देश केवल सरकारी अस्पतालों को दिया था। पीठ ने याचिकाकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार की इस दलील पर गौर किया कि ओडिशा और पंजाब के अलावा किसी भी अन्य राज्य ने शीर्ष अदालत के पहले जारी निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं दी है।


न्यायालय ने बुजुर्ग लोगों को राहत प्रदान करने से संबंधित कुमार के नए सुझावों पर जवाब देने के लिए सभी राज्यों को तीन हफ्ते का समय दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन के लिए राज्यों को नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी करने की जरूरत है।

कुमार ने याचिका दायर कर न्यायालय से अनुरोध किया था कि महामारी काल में बुजुर्ग लोगों को अधिक देखभाल एवं सुरक्षा की जरूरत है अत: इस संबंध में निर्देश जारी किए जाने चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल ये निर्देश दिए थे कि सभी उपयुक्त पात्रता वाले बुजुर्गों को समय पर पेशन दिया जाना चाहिए और राज्य को इनके लिए जरूरी दवाओं की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही कोरोना महामारी को देखते हुए मास्क, सैनेटाइजर और अन्य जरूरी चीजें भी मुहैया कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा था कि महामारी को देखते हुए बुजुर्ग लोगों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के मामले में प्राथमिकता देनी चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि अगर कोई शिकायत बुजुर्गों की ओर से आती है तो अस्पतालों को तत्काल इन्हें दूर करने की जरूरत है।

 

02-03-2021
चीफ जस्टिस ने कहा रेप पीड़िता से शादी करोगे तो मिलेगी बेल, जाने क्या है पूरा मामला

रायपुर/नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ की शर्त सुन कोर्ट रूम में बहस शुरू हो गई। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी से सोमवार को पूछा कि क्या वह रेप पीड़िता से विवाह करने के लिए तैयार है? अगर हां, तो उसे जमानत मिल जाएगी वरना जेल में ही रहना पड़ेगा।​ जिसके बाद बहस शुरू हो गई। इस पर आरोपी के वकील आनंद ने कहा कि उन्हें अपने मुवक्किल से बातचीत करके अनुमति लेनी होगी। इसके लिए उन्हें कुछ समय चाहिए। लेकिन अदालत ने समय देने से साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद वकील आनंद ने दलील दी कि उनका मुवक्किल एक सरकारी कर्मचारी है, और मामले में गिरफ्तारी के कारण उसे सस्पेंशन का सामना करना पड़ सकता है। 

इस पर चीफ जस्टिस ने जवाब दिया कि आपको उस नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी और रेप करने से पहले सोचना चाहिए था। चीफ जस्टिस ने जोर देकर कहा कि अदालत याचिकाकर्ता को लड़की से शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को 4 हफ्ते के लिए गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और वह रेग्युलर बेल के लिए अप्लाई कर सकता है।

10-02-2021
स्किन टू स्किन कांटेक्ट : बॉम्बे हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

मुंबई/रायपुर। बॉम्बे हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग एवं अन्य ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बुधवार को उस मामले की सुनवाई होनी है। आदेश में कहा गया था कि बच्चों के कपड़ों के ऊपर से उनके अंगों को छूना अपराध नहीं है। इस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। दरअसल अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ के समक्ष इस विषय का उल्लेख किया था और कहा था कि यह फैसला अभूतपूर्व है और यह एक खतरनाक नजीर पेश करेगा। बच्ची के शरीर को उसके कपड़ों के ऊपर से स्पर्श करने को यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता है। इस आदेश के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग और अन्य ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून को परिभाषित करने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर 27 जनवरी को रोक लगा दी थी।

05-02-2021
Breaking : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिले दो नए जज

रायपुर। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को 2 नए जज देने का फैसला लिया गया। नरेंद्र कुमार व्याह और नरेश कुमार चंद्रवंशी को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया है। बता दें नरेश कुमार चंद्रवंशी फिलहाल छत्तीसगढ़ के विधि विभाग में प्रमुख सचिव के तौर पर पदस्थ हैं। वहीं नरेंद्र कुमार व्याह सीनियर अधिवक्ता हैं।

05-02-2021
सुप्रीम कोर्ट ने दी कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को अंतरिम जमानत 

रायपुर/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को अंतरिम जमानत दे दी है। बता दें कि फारुकी के खिलाफ इंदौर में धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज हुआ था। जबलपुर हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी इसके बाद फारूकी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने जमानत खारिज करने के मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। फारूकी पर एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी कर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ के समक्ष फारूकी की याचिका पर सुनवाई हुई। भाजपा विधायक के बेटे की शिकायत पर फारूकी और अन्य को एक जनवरी को गिरफ्तार किया गया था. विधायक के बेटे ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फारूकी ने नववर्ष पर इंदौर में एक कैफे में कॉमेडी शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बाद में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था।

03-02-2021
गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

 रायपुर/नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के दिन हुई हुई हिंसा के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यन के साथ ही प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ इसकी सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिकाओं में से एक में एनआईए को मामले की जांच के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि ट्रैक्टर रैली का हिस्सा कर रहे उन असामाजिक तत्वों के खिलाफ अदालत की निगरानी में एनआईए को जांच करनी चाहिए, जो गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर हिंसा में लिप्त थे। अधिवक्ता शशांक शेखर झा और मंजू जेटली शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि गणतंत्र दिवस पर लाल किले और राष्ट्रीय ध्वज पर हुए हमले पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों को विरोध के नाम पर हिंसा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। दलील में कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध जताने के साथ ही दूसरों के अधिकारों पर भी विचार करना चाहिए।

29-01-2021
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण, पूछा-क्यों छूट नहीं दे सकते कोरोना प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रयास को

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और संघ लोक सेवा आयोग से स्पष्टीकरण मांगा कि क्यों कोविड-19 से प्रभावित सिविल सेवा अभ्यर्थियों को अतिरिक्त प्रयास का मौका नहीं दिया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि पहले भी इस तरह की छूट दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उन अभ्यर्थियों को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के लिए एक और मौका देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है,जो 2020 में महामारी के कारण अपना अंतिम प्रयास नहीं कर पाए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को को केंद्र सरकार से यूपीएससी सिविल परीक्षा मामले में उसके द्वारा दाखिल एक हलफनामे को लेकर सवाल पूछा कि इसमें यह नहीं बताया गया है कि किस स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि यूपीएससी सिविल सेवा के उन अभ्यर्थियों को एक और अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा जो कोविड-19 महामारी के कारण, अपने अंतिम प्रयास में 2020 की परीक्षा में नहीं दे सके थे। केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोविड-19 के कारण 2020 में अंतिम प्रयास की परीक्षा में भाग नहीं ले पाने वाले छात्रों को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त मौका देने की अनुमति संपूर्ण परीक्षा प्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी।

 

28-01-2021
नए कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया केंद्र को नोटिस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तीन कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले केरल के कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन की याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र से जवाब मांगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में जारी किसान आंदोलन को लेकर पूर्व में जारी याचिकाओं के चलते 12 जनवरी को इन कानूनों के अमल पर रोक लगा चुका है। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना तथा न्यायमूर्ति वी.रामसुब्रमण्यन की पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और इसे मुद्दे पर लंबित अन्य याचिकाओं के साथ नत्थी कर दिया। केरल में त्रिसूर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतापन ने आरोप लगाया है कि इन कानूनों से संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार), 15 (भेदभाव करने पर रोक) और 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को ‘असंवैधानिक, अवैध और अमान्य’’ बताकर निरस्त कर देना चाहिए। वकील जेम्स पी. थॉमस के जरिए दाखिल याचिका में प्रतापन ने कहा कि भारतीय कृषि क्षेत्र छोटी-छोटी जोत में बंटा हुआ है और कुछ ऐसी दिक्कतें हैं जिस पर नियंत्रण पाना मुश्किल है, जैसे कि मौसम पर निर्भरता, उत्पादन की अनिश्चितता। बाजार भाव में भी असंतुलन आदि। इस कारण से कृषि, उत्पादन और प्रबंधन के हिसाब से बहुत जोखिम वाला क्षेत्र है।’ याचिका में कहा गया है कि किसान मौसम पर निर्भर रहते हैं। इसलिए कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) की व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र ने 2015-16 की कृषि गणना से पीएम-किसान कार्यक्रम के भुगतान का आकलन किया है। इसमें खेती की जमीन का उत्तराधिकार रखने वाले 14.5 करोड़ किसानों को लाभार्थी की सूची में शामिल किया गया है। यह मामला जनहित का है और इन कानूनों को रद्द किए जाने की जरूरत है क्योंकि ये कृषि से जुड़े 14.5 करोड़ नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून, 2020, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून, 2020, और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 हैं।
शीर्ष अदालत ने कृषि कानूनों के अमल पर 12 जनवरी को आगामी आदेश तक रोक लगा दी थी और चार सदस्यों वाली कमेटी का भी गठन किया था। इससे पहले, पिछले साल 28 सितंबर को राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सदस्य मनोज झा और द्रमुक के राज्यसभा सदस्य तिरूचि शिवा तथा राकेश वैष्णव द्वारा दाखिल की इसी तरह की याचिकाओं पर न्यायालय ने केंद्र को नोटिस जारी किया था।

 

28-01-2021
भड़काऊ टीवी कार्यक्रमों पर नकेल नहीं कसने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई केंद्र सरकार को फटकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उन टीवी कार्यक्रमों पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं करने पर फटकार लगाई है, जिनका असर भड़कान वाला होता है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ऐसी खबरों पर नियंत्रण उसी प्रकार से जरूरी हैं जैसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय। उच्चतम न्यायालय ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद किए जाने का जिक्र किया और निष्पक्ष और सत्यपरक रिपोर्टिंग की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि समस्या तब आती है जब इसका इस्तेमाल दूसरों के खिलाफ किया जाता है।
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि तथ्य यह है कि कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं जिनके प्रभाव भड़काने वाले हैं और आप सरकार होने के नाते इस पर कुछ नहीं कर रहे हैं। पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हैं जो भड़काने वाले होते हैं या एक समुदाय को प्रभावित करते हैं। लेकिन एक सरकार के नाते, आप कुछ नहीं करते। न्यायमूर्ति बोबड़े ने कहा कि कल आपने किसानों के दिल्ली यात्रा पर आने के कारण इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद कर दी। मैं गैर विवादास्पद शब्दावली का इस्तेमाल कर रहा हूं। आपने मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया। ये ऐसी समस्याएं हैं जो कहीं भी पैदा हो सकती हैं। मुझे नहीं पता कि कल टेलीविजन में क्या हुआ। पीठ ने कहा कि निष्पक्ष और सत्यपरक रिपोर्टिंग आमतौर पर कोई समस्या नहीं है, समस्या तब होती है जब इसका इस्तेमाल दूसरों को परेशान करने के लिए किया जाता है। यह उतना ही जरूरी है जितना किसी पुलिसकर्मी को लाठी मुहैया कराना। यह कानून-व्यवस्था की स्थिति का अहम एहतियाती हिस्सा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि टीवी पर लोगों द्वारा कही जा रही बातों में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन उसे उन कार्यक्रमों को लेकर चिंता है जिनका उसर भड़काने वाला होता है।

 

28-01-2021
 पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने डेनियल पर्ल की हत्या के आरोपी को किया रिहा

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या मामले में मुख्य आरोपी ब्रिटिश मूल के अलकायदा आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख को रिहा करने का आदेश दिया। साल 2002 में कराची में द वॉल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख पर्ल (38) का सिर कलम करके हत्या कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सिंध हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सिंध प्रांतीय सरकार की अपील को खारिज कर दिया,जिसमें पर्ल की हत्या के लिए शेख की सजा को खत्म कर दिया गया था। तीन न्यायाधीशों वाली एक पीठ ने संदिग्ध को रिहा करने का आदेश भी दिया।

पीठ के एक सदस्य ने इस फैसले का विरोध किया। पर्ल का 2002 में उस समय अपहरण कर लिया गया था, जब वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अलकायदा के बीच संबंधों पर एक खबर के लिए जानकारी जुटा रहे थे। इसके बाद पर्ल का सिर कलम करके हत्या कर दी गई थी। सिंध उच्च न्यायालय ने अप्रैल, 2020 में उमर शेख की मौत की सजा को पलट दिया था और उसे सात साल कारावास की सजा सुनाई थी और तीन अन्य आरोपियों फहाद नसीम, शेख आदिल और सलमान साकिब को बरी कर दिया था। आतंकवाद निरोधक अदालत (एटीसी) ने इन आरोपियों को पहले आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सिंध उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सिंध सरकार और डेनियल पर्ल के परिवार ने उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं दाखिल की थीं।

 

21-01-2021
आपका आधार कार्ड सुरक्षित है, कांग्रेस नेता जयराम समेत 7 लोगों की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

रायपुर/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता जयराम रमेश समेत 7 लोगों ने आधार कार्ड की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए दायर की पुनर्विचार याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोरोना के कारण कोर्ट ने खुले में विचार करने के बजाय चौंबर में सुनवाई की और फिर याचिकाएं खारिज कर दी। गौरतलब है कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश समेत सात लोगों ने आधार कार्ड की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ए एमखानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस बीआर गवई की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने 11 जनवरी को मामले की सुनवाई की। इसका आदेश कल ही जारी कर दिया गया। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय एक संविधान पीठ ने 26 सितम्बर, 2018 के उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं को 4ः1 के बहुमत के साथ खारिज कर दिया। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने बहुमत वाले इस फैसले से असहमति जताई और कहा कि समीक्षा याचिकाओं को तब तक लंबित रखा जाना चाहिए जब तक कि एक वृहद पीठ विधेयक को एक धन विधेयक के रूप प्रमाणित करने पर फैसला नहीं कर लेती।

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