GLIBS
12-11-2019
महाराष्ट्र में लगा राष्ट्रपति शासन, कैबिनेट की सिफारिश को रामनाथ कोविंद ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सरकार बनाने का पेच नहीं सुलझ पाया। इसके चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया है, जिसकी मंजूरी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दे दी है। बता दें कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी थी, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनुच्छेद 356 के तहत महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश को अपनी मंजूरी दे दी। राज्यपाल के इस निर्णय के बाद शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 

11-11-2019
सुप्रीम कोर्ट के प्रकोप से बचने की कवायद : धरमलाल कौशिक

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा स्मार्टफोन कॉल को अवैध रूप से टेप कराने के मामले की जांच के लिए कमेटी बनाने के निर्णय को हास्यास्पद कवायद करार दिया है। उन्होंने  कहा कि मुख्यमंत्री बघेल शायद सुप्रीम कोर्ट से फोन टैपिंग मामले में शासन को मिली फटकार के बाद अपना दामन बचाने के लिए ऊल जुलूल हरकत कर रहे हैं। कौशिक ने कहा कि ऐसी अनावश्यक कवायदों से सीएम अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। कौशिक ने कहा कि प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए मिले जनादेश की अनदेखी कर तमाम गैरजरूरी मुद्दों में सीएम अपनी हाजिरी दे रहे हैं। यह तमाम कवायद सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के हास्यास्पद हथकंडे हैं। कौशिक ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री बघेल किस मुंह से नागरिक स्वतंत्रता के हनन पर क्षोभ जता रहे हैं? वस्तुत: मुख्यमंत्री बघेल को भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के नाम का फोबिया हो गया है। उन्हें एक तरह का अज्ञात राजनीतिक भय हमेशा सताता है और वे इसके चलते हर बात को भाजपा के कार्यकाल से जोड़कर पार्टी को बदनाम करने की कोशिशें करते हैं। कौशिक ने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता और निजता के हनन का कांग्रेस का काला इतिहास रहा है। हाल में सुको की टिप्पणी भी उसी इतिहास पर मुहर जैसा है। उन्होंने कहा कि बौखलायी कांग्रेस को हर सरकार और दल का वैसा ही चरित्र दिखता है। अपने नजरिए और सोच में व्यापक सुधार लाकर मुख्यमंत्री बघेल को इस तरह के हथकंडों से बचने की सलाह देते हुए नेता प्रतिपक्ष कौशिक  ने कहा कि जिम्मेदारपद पर बैठे मुख्यमंत्री को गैर जिम्मेदाराना व्यवहार और बयानों से बचना चाहिए।

11-11-2019
बाघ और पैंथर की ट्रेकिंग का कार्य शुरू करने जा रही सरकार,आएंगे सही आंकड़े : मो.अकबर

रायपुर। बाघ और पैंथर की ट्रेकिंग का काम अब छत्तीसगढ़ सरकार खुद प्रारंभ करने जा रही है, इसके लिए एजेंसी नियुक्त होना बाकी है जो अभी प्रक्रिया में है। इसके बाद जब ट्रेकिंग प्रारंभ होगी तो सारी बातें सामने आएगी। यह बात आज मंत्री मो. अकबर ने राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। मिलिये मंत्री से कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री मो. अकबर ने कहा कि ट्रेकिंग अब वन विभाग की ओर से प्रारंभ की जा रही है, इसमें सही आंकड़े सामने आएंगे।  उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक बार मिलिये मंत्री से कार्यक्रम में होता है और इसी संबंध में आज यहां पर आना हुआ। बहुत से आवेदन प्राप्त हुए हैं, कुछ आवेदन पत्रों का निराकरण किया गया तो कुछ के बारे में समझाइश दी गई है। ट्रांसफर के संबंध में 2 आवेदन प्राप्त हुए थे,जो कि बहुत खुशी का विषय है क्योकि पहले ट्रांसफर के बहुत सारे आवेदन आते थे। यह क्रम आगे भी चलता रहेगा,हम प्रयास करते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की समस्या का निराकरण किया जाए। 
मंत्री मो. अकबर ने कहा कि पहले जब यह कार्यक्रम प्रारंभ हुआ तो उस समय अधिकतर ट्रांसफर के आवेदन आते थे और बहुत अधिक आवेदन ट्रांसफर को कैंसिल करने के संबंध में आते थे, फिलहाल अब उसमें एक-दो रह गए काफी कमी आ गई है। इसके अलावा पंचायतों के संबंध में कुछ आवेदन होते हैं, अनियमितता की जांच कराने के संबंध में। अब जो नए आवेदन आने चालू हुए हैं वह टिकट के संबंध में है। पार्षद टिकट के संबंध आवेदन आना शुरू हुए हैं, आगे इसकी संख्या और बढ़ेगी।  उन्होंने कहा कि धान खरीदी के संबंध में जो प्रस्तावित आंदोलन था कांग्रेस का, वह अयोध्या मामले में जो निर्णय सुप्रीम कोर्ट का आया है, इसे देखते हुए तय किया गया है कि पूरे देश की क्या स्थिति है, इसका आकलन भी जरूरी रहता है। इस कारणों से स्थगित किया गया है, बहुत ही खुशी की बात है कि पूरे देश में अच्छा वातावरण बना है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सभी ने स्वागत किया है, आने वाले समय में फिर से तय किया जाएगा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ बैठक होने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

11-11-2019
अयोध्या मामले का फैसला सुनाने वाले जजों की बढ़ाई गई सुरक्षा

नई दिल्ली। अतिसंवेदनशील अयोध्या मामले का फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पांचों जजों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि एहतियातन इन जजों की सुरक्षा में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। सीजेआई समेत किसी अन्य जज को लेकर कोई विशेष खतरा नहीं है। अयोध्या मामले का फैसला सुनाने वाली पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा ड्रिल के तहत अतिरिक्त जवानों को इन जजों के आवासों पर तैनात किया गया है। साथ ही इन जजों के आवासों की ओर जाने वाली सड़कों पर कुछ बेरिकैड लगाए गए हैं। अभी तक जजों के आवास पर गार्ड और अचल सुरक्षा थी। अब इनकी सुरक्षा में मोबाइल कंपोनेट को जोड़ा गया। साथ ही जजों के वाहनों के साथ अब सशस्त्र गार्डों से लैस एस्कार्ट वाहन भी रहेंगे।

10-11-2019
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने की धर्मगुरुओं के साथ बैठक, रामदेव, स्वामी परमात्मानंद, कल्बे जव्वाद रहे मौजूद

नई दिल्ली। अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने धार्मिक नेताओं के साथ बैठक की। डोभाल के आवास पर हुई इस बैठक में योग गुरु बाबा रामदेव, स्वामी परमात्मानंद, शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और महमूद मदनी समेत कई अन्य मौजूद थे। विश्व हिंदू परिषद के नेता आलोक कुमार ने बैठक के बाद कहा कि आज का मुख्य मुद्दा यही था कि कैसे देश में अमन और शांति बनी रहे। सभी धर्मगुरुओं ने इसी बात पर जोर दिया कि वह देश में अमन और शांति चाहते हैं। बैठक में मौजूद रहे अन्य संतों ने बताया कि मुख्य मुद्दा देश में कैसे अमन शांति कायम रहे यही थी। हम सब इसके लिए प्रयास करेंगे।  बता दें कि अयोध्या विवाद पर फैसले के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल के साथ बैठक की थी। अयोध्या पर फैसले के मद्देनजर देशभर में खासकर उत्तर प्रदेश में अलर्ट है। अयोध्या के आसपास भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।

 

10-11-2019
दिग्गी ने पूछा-बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों को कब मिलेगी सजा?

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के बहुप्रतीक्षित फैसले को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने टिप्पणी करते हुए एक नया सवाल उठाया है। उन्होंनेे एक तरफ शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया तो दूसरी तरफ सवाल भी उठाया कि बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों को कब सजा मिलेगी? दिग्विजय सिंह ने फैसले के एक दिन बाद चुप्पी तोड़ते हुए ट्वीट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि फैसले में बाबरी मस्जिद को तोड़ने के कृत्य को गैरकानूनी व अपराध माना है। क्या दोषियों को सजा मिल पाएगी? इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट के फैसले को लेकर कहा कि कांग्रेस हमेशा संविधान के दायरे में समाधान की पक्षधर रही है। राम जन्मभूमि के निर्णय का सभी ने सम्मान किया, हम आभारी हैं। कांग्रेस ने हमेशा से यही कहा था, हर विवाद का हल संविधान द्वारा स्थापित कानून व नियमों के दायरे में ही खोजना चाहिए। विध्वंस और हिंसा का रास्ता किसी के हित में नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने राम जन्म भूमि फैसले में बाबरी मस्जिद को तोडऩे के कृत्य को गैर कानूनी अपराध माना है। क्या दोषियों को सजा मिल पायेगी? देखते हैं। 27 साल हो गये। बता दें कि अयोध्या में जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है लेकिन बाबरी मस्जिद हिंसा का मामला अब भी लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत में लंबित है। विशेष सीबीआई अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा सबूत और गवाही पेश करने की आखिरी तारीख 24 दिसंबर तय की है। ऐसे में इस आपराधिक मामले में फैसला अप्रैल 2020 तक आने की संभावना है।  

 

10-11-2019
सैलानियों के आने से हर साल 165 करोड़ रुपए की हो रही आय : त्रिवेदी

रायपुर। विकसित गुजरात नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल/वाईब्रेन्ट गुजरात में तब्दिल हो चुका है। छत्तीसगढ़ एवं गुजरात में संस्कृति के आदान-प्रदान का रिश्ता है। गुजरात की प्रमुख उपलब्धि सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 फीट की स्टेच्यू ऑफ यूनिटी है। इसे देखने के लिए विश्व के सैलानी प्रतिदिन आते हैं। सैलानियों से प्रतिवर्ष 165 करोड़ की आय हुई है। उक्त बातें प्रेसक्लब रायपुर में आयोजित रूबरू कार्यक्रम में त्रिदिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष राजेंद्र नारायण त्रिवेदी ने कही। त्रिवेदी ने बताया कि वे रायपुर, बिलासपुर एवं भाटापारा में कान्यकुब्ज ब्राम्हण सभा द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होने छत्तीसगढ़ आए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि रायपुर का कायाकल्प हो गया है। प्रतिनिधि द्वारा यह पूछे जाने पर कि गुजरात एवं छत्तीसगढ़ में मूल अंतर क्या है? उनका जवाब था गुजरात विकसित हो चुका है जबकि इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में छत्तीसगढ़ प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जब वे गुजरात के खेल एवं संस्कृति मंत्री थे तब उन्हें छत्तीसगढ़ से जुडऩे का सौभाग्य मिला। गुजरात और छत्तीसगढ़ की संस्कृति एक जैसी है। यहां बेल मेटल पर हो रही नक्काशी की प्रसंशा करते हुए उन्होंने कहा कि यह गुजरात में व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सामाग्री है। अध्यक्ष ने कहा कि रायपुर में गुजराती समाज का बड़ा हिस्सा है। आज वहां पर भी उन्हें आमंत्रित किया गया है। सरदार सरोवर की चर्चा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 138 फीट की ऊंचाई तक निर्मित बांध के पानी से जहां मध्यप्रदेश को बिजली मिलेगी वहीं गुजरात को पानी मिलेगा। कुछ वर्ष पहले गुजरात में पानी की काफी कमी थी। 800 फीट में भी खुदाई करने पर पानी नहीं मिलता था। सरदार सरोवर के पानी मिलने से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में अब कुछ ही फीट में पानी मिलने लगा है।

अयोध्या मामले पर टिप्पणी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष त्रिवेदी ने इसे सुप्रीम कोर्ट का सर्वश्रेष्ठ निर्णय करार देते हुए देश के ताने-बाने के अनुरूप माना। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता गंगा, जमुना तहजीब से लिपटी हुई है जिसे बचाकर रखने में प्रत्येक भारती का योगदान है। कपड़ा मिलों पर उठे सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बड़ी कपड़ा मिलों से काफी प्रदूषण होता था इसलिए छोटी मिलों के जरिए सस्ते और अच्छे कपड़े की बिक्री में देश में अहमदाबाद का सर्वाेच्च स्थान है। उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी का असर गुजरात पर नहीं पड़ा है। कोऑपरेटिव सेक्टर मजबूत होने से दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अमूल ने पूरे विश्व में अपना स्थान बनाया है। पत्रकारवार्ता में कान्यकुब्ज ब्राम्हण समाज के पदाधिकारी डॉ. अरूणकांत शुक्ला, अंजय शुक्ला, राघवेन्द्र मिश्रा एवं त्रिवेदी उपस्थित थीं। पत्रकारवार्ता के समापन अवसर पर प्रेसक्लब ने परंपरा अनुसार विधानसभा अध्यक्ष त्रिवेदी का प्रतीक चिन्ह सप्रेम भेंट किया। पुष्पगुच्छ से प्रेसक्लब के पदाधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी का अभिनंदन किया।

 

10-11-2019
अयोध्या फैसले पर पाकिस्तान ने की टिप्पणी, भारत ने कहा-हमारे आंतरिक मामलों में ना दे दखल

नई दिल्ली। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पड़ोसी देश पाकिस्तान ने हमेशा की तरह भारत के आंतरिक मामलों को लेकर टिप्पणी की। करतारपुर कॉरीडोर के उद्घाटन के मौके पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि यह फैसला मोदी सरकार की कट्टर हिंदू विचारधारा को प्रदर्शित करता है। फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कुरैशी ने कहा कि वह इस तरह के खुशी के मौके पर दिखाए गई ‘असंवेदनशीलता’ से ‘बेहद दुखी’ हैं। पाकिस्तान की इस टिप्पणी की भारत ने सख्त आलोचना की है। भारत ने कहा है कि  पाकिस्तान ने घृणा फैलाने के स्पष्ट इरादे के साथ हमारे आंतरिक मामलों पर, जो टिप्पणी की है वह बेहद निंदनीय है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘हम एक सिविल मामले पर भारत के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर पाकिस्तान द्वारा की गई अनुचित और अनावश्यक टिप्पणियों को अस्वीकार करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यह कानून के शासन और सभी धर्मों के लिए समान आदर की अवधारणाओं से संबंधित है,जो उनके लोकाचार का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए पाकिस्तान की समझ की कमी कोई आश्चर्य की बात नहीं है, घृणा फैलाने के स्पष्ट इरादे के साथ हमारे आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने की उनकी यह आदत निंदनीय है।

 

10-11-2019
महंत नरेंद्र गिरी ने ओवैसी के बयान पर किया पलटवार, कहा - भारत छोड़कर चले जाना चाहिए पकिस्तान

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में असदुद्दीन ओवैसी की ओर से आए बयान को लेकर संत समाज में उबाल बना हुआ है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने उनपर कटाक्ष करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न मानना राष्ट्रद्रोह है। उन्होंने कहा है कि ओवैसी भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं। अगर ओवैसी को भारत में अच्छा नहीं लगता है तो उन्हें भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाना चाहिए।

महंत नरेंद्र गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ओवैसी हमेशा से हिंदुओं और साधु संतों का अपमान करते आए हैं। ओवैसी अगर इस तरह की भाषा का दोबारा इस्तेमाल करेंगे तो साधु संत समाज और अखाड़ा परिषद इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी को भारत में रहना है तो भारत के संविधान और न्यायपालिका के आदेश का पालन और सम्मान करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में रहकर अगर भारत के खिलाफ ओवैसी बयानबाजी करेंगे तो संत समाज उन्हें इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। ऐसे में अगर मंदिर निर्माण को जबरदस्ती करते और इसमें भेदभाव होता तो सामाजिक समरसता नहीं रहती और सांप्रदायिक सौहार्द भी बिगड़ता। विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सभी राम मंदिर का निर्माण चाहते थे। यहां तक कि कुछ मुस्लिम पक्ष के लोग भी इस पक्ष में थे। तो फिर ओवैसी ऐसे बयानबाजी क्यों कर रहे हैं। 

10-11-2019
अयोध्या फैसले पर सलमान के पिता ने दिया बड़ा बयान, कही ये बात...

मुंबई। अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 40 दिनों की सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया। मुस्लिमों को मस्जिद के लिए अलग जमीन दी जाएगी। इस फैसले पर सलमान खान के पिता और पटकथा लेखक सलीम खान का बयान आया है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए सलीम खान ने कहा कि अयोध्या में मुस्लिमों को दी जाने वाली पांच एकड़ भूमि पर स्कूल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि मोहब्बत जाहिर करिए और माफ करिये, अब इस मुद्दे को फिर से मत कुरेदिये, यहां से आगे बढ़िए।

मुस्लिमों को सलाह देते हुए सलीम खान ने कहा कि अब इस मामले पर बात न कर बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए। मुस्लमानों को स्कूल और अस्पताल की जरूरत है। अयोध्या में मस्जिद के लिए मिलने वाली पांच एकड़ जगह पर कॉलेज बने तो बेहतर होगा। नमाज तो ट्रेन, प्लेन  कहीं भी पढ़ी जा सकती है। अगर 22 करोड़ मुस्लिमों को अच्छी शिक्षा मिलेगी तो इस देश की बहुत सी कमियां खत्म हो जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात पर सहमति जताते हुए सलीम खान ने कहा कि अयोध्या विवाद को खत्म कर हमें नई शुरुआत करनी चाहिए। हमें अब शांति की जरुरत है। हमें अपने प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देकर भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। 

09-11-2019
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ओवैसी की राय क्यो ली गई? है कौन वो? क्या उसका कमेंट अवमानना नही?

रायपुर। अयोध्या में राम जन्मभूमि पर आए फैसले पर ओवैसी का बयान बेहद चौंकाने वाला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने के फैसले पर ओवैसी का यह कहना खैरात लेने की क्या जरूरत है, बेहद चौंकाने वाला बयान है। कायदे से तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना भी नजर आता है। सारी बातों को दरकिनार कर भी दिया जाए तो भी ओवैसी जैसे नेताओं को तवज्जो देना मीडिया की टीआरपी की भूख का प्रमाण है। मीडिया ना जाने क्यों ओवैसी जैसे मौकापरस्त नेताओं को मौका देता है भड़काऊ बयान देने का। ऐसे संवेदनशील समय में जब सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही थी तब ओवैसी जैसे गैर जिम्मेदार नेताओं से बयान लेकर मीडिया ना जाने कौन सा विवाद खड़ा करने के मूड में नजर आया। मीडिया का ओवैसी जैसे नेताओं को अयोध्या जैसे संवेदनशील मामले में तवज्जो देना हैरानी सबब है।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804