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16-06-2021
सीबीएसई बोर्ड 12वीं के इवेलुएशन क्राइटेरिया पर सुप्रीम कोर्ट में 17 जून को सुनवाई

नई दिल्ली। सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के लिए इवेलुएशन क्राइटेरिया पूरा करने में कुछ और समय लग सकता है। सीबीएसई ने इसके लिए एक कमेटी बनाई थी। कमेटी को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी थी। हालांकि 10 दिन के भीतर यह रिपोर्ट जमा नहीं कराई जा सकी। इस बीच 17 जून को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है। सीबीएसई सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट देनी है। इस रिपोर्ट में बारहवीं कक्षा का रिजल्ट तय करने का फामूर्ला बोर्ड सुप्रीम कोर्ट को बता सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों ने ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया इसी सप्ताह जारी किए जाने की उम्मीद जताई है। 12 सदस्यीय विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट के आधार पर ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया बनाया जाएगा।


बारहवीं कक्षा के छात्रों का रिजल्ट एवं अंक देने का फॉर्मूला बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विपिन कुमार समेत 12 व्यक्तियों शामिल हैं। सीबीएसई ने 4 जून को इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया था। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि इस कमेटी में 12 सदस्य हैं। यह कमेटी छात्रों को प्रमोट करने और उनकी मार्कशीट तैयार करने का आधार तय करेगी। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक कमेटी को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी थी। हालांकि अब 10 दिन के भीतर यानी 14 जून तक यह रिपोर्ट जमा नहीं कराई गई है। इस कारण से इवेलुएशन क्राइटेरिया फिलहाल जारी नहीं किया जा सका है। सीबीएसई ने इससे पहले 1 जून को 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द करने का अहम निर्णय लिया था। बोर्ड अदालत को अपने इस निर्णय से भी अवगत करा चुका है। अब सीबीएसई बोर्ड को 12वीं के छात्रों को अंक प्रदान करने का फार्मूला तय करना है।

 

14-06-2021
Video: विकास उपाध्याय बैठे धरने पर, कहा-राम मंदिर के लिए जमीन खरीदी में हुए घोटाले की हो न्यायिक जांच

रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विकास उपाध्याय ने अयोध्या में राम जन्म भूमि पर निर्मित राम मंदिर के लिए जमीन खरीदी में घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने न्यायिक जांच की मांग की है। उपाध्याय ने सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ कर घोटाने का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के नाम पर जमीन खरीदने के बहाने राम भक्तों को पूरे देश में ठगा जा रहा है।  इस घोटाले के सामने आने के बाद पूरे प्रकरण में भारतीय जनता पार्टी की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए। विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि अयोध्या में राम मंदिर के नाम पर भाजपा आरंभिक दिनों से ही राजनीति करते आ रही है। भाजपा भगवान राम के नाम पर हमेशा से देश के लोगों को गुमराह कर सिर्फ सत्ता हथियाने का काम की है और आज जब अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राम मंदिर का निर्माण हो रहा है, ऐसे में राम मंदिर की जमीन खरीदी में जिस तरह से घोटाले की बात सामने आई है यह बहुत ही दुर्भाग्य जनक है। उन्होंने कहा है कि यह राम मंदिर के नाम पर जमीन खरीदने के बहाने राम भक्तों को ठगने का काम है। इस घोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। भगवान राम के नाम पर जो लोग इसमें संलिप्त हैं,उन्हें पकड़कर जेल में डाला जाना चाहिए।

विकास उपाध्याय ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए कहा है कि 18 मार्च 2021 को राम मंदिर की जमीन का बैनामा के साथ-साथ एग्रीमेन्ट भी हुआ। जिस जमीन को 2 करोड़ रुपए में खरीदा गया, उसी जमीन का 10 मिनट बाद 18.50 करोड़ में एग्रीमेन्ट क्यों किया गया? विकास उपाध्याय ने सवाल किया हाकि ऐसी कौन सी वजह थी जो प्रति सेकंड 5.50 लाख रुपए उक्त जमीन की कीमत बढ़ गई, जबकि एग्रीमेंट और बैनामा दोनों में ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा और मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं। इससे साफ जाहिर है कि जमीन खरीदने का सारा खेल इन दोनों को मालूम था और यह बगैर भाजपा के सह में नहीं हो सकती। भाजपा सिर्फ राम के नाम पर मंदिर निर्माण के बहाने देश के लोगों को और राम भक्तों को ठगने का काम कर रही है।

11-06-2021
आईएनआई सीईटी परीक्षा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, आईएमए मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क यंग ब्रिगेड की बड़ी जीत

रायपुर। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स व अन्य चिकित्सा संस्थानों की ओर से ली जाने वाली आईएनआई सीईटी 2021 की परीक्षा के संबंध में फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 23 एमबीबीएस डॉक्टरों सहित इंडिया मेडिकल एसोसिएशन मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क छत्तीसगढ़ चैप्टर की बड़ी जीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा को कम से कम 1 महीने के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एमआर शाह की खंडपीठ ने शुक्रवार को 16 जून को राष्ट्रीय महत्त्व संयुक्त प्रवेश परीक्षा (इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट)आईएनआई सीईटी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने दो याचिकाओं पर सुनवाई की, इसमें पहली 23 एमबीबीएस डॉक्टरों के एक समूह की ओर से दायर की गई और दूसरी इंडिया मेडिकल एसोसिएशन मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क छत्तीसगढ़ चैप्टर की ओर से दायर की गई थी। वर्तमान में कोविड-19 सेवारत 35 डॉक्टरों की ओर से आईएनआई सीईटी 2021 परीक्षा को स्थगित करने और कम से कम 1 महीने का नोटिस देने का निर्देश देने की मांग की याचिका थी।

याचिकाकर्तार्ओं ने एम्स की ओर से 27 मई को जारी नोटिस को रद्द करने की मांग की थी,जिसमें अधिसूचित किया गया था कि आईएनआईसीईटी 2021 परीक्षा 16 जून को होगी। बता दें कि याचिका में कहा गया था कि डॉक्टर्स फ्रंटलाइन वॉरियर्स कोरोना मरीजों के इलाज में लगे हैं, कुछ  तो खुद संक्रमित है और अभी बहुतों का वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। ऐसे में बहुत ही शॉर्ट नोटिस पर परीक्षा का फैसला लिया गया है। परीक्षा सेंटर अलग-अलग राज्यों में होने से छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ होगा। मांग की गई थी कि परीक्षा को कम से कम अगस्त तक टाल देना चाहिए। इधर भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने 16 जून को आईएनआई सीईटी की परीक्षा का फैसला लिया था। पहले यह परीक्षा 8 मई को होनी थी, लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद 27 मई को एम्स ने नोटिस जारी कर परीक्षा 16 जून होने की जानकारी दी थी। यह परीक्षा मेडिकल संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए ली जाती है। देश में यह कोर्स दिल्ली, भोपाल, भुवनेश्वर, ऋषिकेश समेत कुल 8 एम्स में होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर के जूनियर डॉक्टरों में खुशी की लहर 

शासन-प्रशासन ने 3 मई को देशभर के डॉक्टरों से 100 दिन की कोविड महामारी में  सेवा की मांग करते हुए नीट पीजी की परीक्षा को 100 दिन तक टालने का निर्देश दिया था। अब जबकि पूरे देश भर के डॉक्टर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी छोड़कर कोविड महामारी में हॉस्पिटलों में सेवा दे रहे थे,ऐसे में एम्स ने एकाएक 28 अप्रैल को आईएनआईसीईटी परीक्षा,केवल 19 दिन की अल्पावधि में आयोजित होने का नोटिस जारी किया था। इस समय देश भर के जूनियर डॉक्टर कोविड महामारी में अपनी सेवा दे रहे थे,कुछ सेवा देते देते कोरोना से ग्रसित हो गए थे तो कुछ क्वारेंटाइन में थे और तो और यातायात की असुविधा होने के कारण देशभर के डॉक्टर परीक्षा स्थल तक पहुंचने में असमर्थ थे। देश भर के डॉक्टर इसके विरोध में थे। मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क छत्तीसगढ़ के संयोजक व प्राइवेट हॉस्पिटल बोर्ड छत्तीसगढ़ के प्रमुख,डॉ राकेश गुप्ता मार्गदर्शन में डॉ क्षितिज सिंह,डॉ रेशम सिंह रत्नाकर,डॉ योगेश्वर जैसवाल और मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क के नेशनल काउंसिल मेंबर मेहुल केडिया और राघव मोहन ने इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। इसके मुख्य पिटीशनर रेशम सिंह हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कार्यवाही करते हुए 11 जून को आदेश जारी कर परीक्षा को 1 महीने के लिए टाल दिया है। परीक्षा बोर्ड को निर्देशित किया है कि परीक्षा आयोजित करने के न्यूनतम 1 माह पूर्व परीक्षार्थियों को सूचित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश भर के जूनियर डॉक्टरों के बीच खुशी की लहर है।

07-06-2021
Breaking : सुप्रीम कोर्ट का आदेश, फरीदाबाद के लक्कड़पुर-खोरी गांव में अवैध रूप से बनाए गए 10 हजार मकान तोड़े जाएं

नई दिल्ली/रायपुर। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को दिल्ली सटे फरीदाबाद के अरावली वन क्षेत्र के लक्कड़पुर-खोरी गांव में अवैध रूप से बनाए गए करीब 10 हजार घरों को हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने अपने आदेश में हरियाणा के फरीदाबाद नगर निगम को घरों को छह हफ्ते के भीतर ढहाने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने फरीदाबाद पुलिस को निगम कर्मियों की सुरक्षा का पर्याप्त इंतजाम करने के लिए कहा है।

 

03-06-2021
12वीं की बोर्ड परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई दो हफ्ते टली

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 12वीं की परीक्षा पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी है। सीबीएसई और आईसीएसई ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को परीक्षा रद्द कर देने की आधिकारिक जानकारी दी लेकिन छात्रों को अंक देने के ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया पर जानकारी देने के लिए समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात संतोष जताया कि सरकार ने कोरोना की स्थिति देखते हुए परीक्षा रद्द कर दी है। इससे पहले 31 मई को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि सरकार जल्द ही इस मामले में फैसला लेने वाली है। इसलिए इस मामले पर सुनवाई टाल देनी चाहिए। तब कोर्ट ने कहा था कि इसमें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन एक बात का ख्याल रखें कि सरकार अगर पिछले साल से अलग कोई फैसला कर रही है यानी परीक्षा करा रही है तो आपको उसके लिए उचित कारण बताना होगा। पिछले साल परीक्षा स्थगित होने से पहले जो पेपर हो चुके थे, उनके औसत के आधार पर रिजल्ट घोषित किए गए थे।
याचिका में कहा गया है कि बारहवीं की परीक्षा करियर का अहम मोड़ होती है और इसका रिजल्ट उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश का आधार बनता है। याचिका टोनी जोसेफ और ममता शर्मा ने दायर की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि बारहवीं की परीक्षा रद्द करने से उन छात्रों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने बोर्ड की परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की है। याचिका में कहा गया है कि स्कूलों की ओर से आयोजित आंतरिक मूल्यांकन और आंतरिक ऑनलाइन परीक्षाओं के आधार पर छात्रों का रिजल्ट देना उनके साथ अन्याय है,क्योंकि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में शायद ही किसी शिक्षक ने किसी छात्र को आमने-सामने देखा हो। याचिका में कहा गया है कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सीबीएसई ने बारहवीं की बोर्ड परीक्षा को स्थगित करने का फैसला किया है। 

 

02-06-2021
गैर मुस्लिम लीग पहुंची सुप्रीम कोर्ट, केंद्र की अधिसूचना को दी चुनौती

रायपुर/नई दिल्ली। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता के आवेदन की मंजूरी देने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार की अधिसूचना संविधान की अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। साथ ही अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि जब नागरिकता संशोधन अधिनियम सीएए से जुड़ी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तो यह अधिसूचना कैसे आई। नागरिकता अधिनियम के प्रावधान धर्म के आधार पर आवेदकों को वर्गीकरण की अनुमति नहीं देती है।

31-05-2021
सुप्रीम कोर्ट में सीबीएसई 12वीं परीक्षा पर सुनवाई फिर टली,केंद्र सरकार ने मांगा दो दिन का समय

नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर के बीच सीबीएसई और आईएसई की 12वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट से दो दिन का और समय मांगा। दरअसल केंद्र ने कोर्ट से कहा कि उसे 12वीं की परीक्षा कराने या रद्द करने का फैसला लेने के लिए दो दिन का समय और चाहिए। केंद्र ने कहा कि वह गुरुवार को कोर्ट को अपना फैसला बता सकता है। इसके बाद कोर्ट ने गुरुवार तक के लिए सुनवाई को स्थगित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार इस मामले की सुनवाई टाली है। इससे पहले कोर्ट ने 28 मई को सुनवाई की तारीख 31 मई तक के लिए स्थगित की थी। बता दें कि याचिकाकर्ता ने 12वीं परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की है। 12वीं बोर्ड की परीक्षा को रद्द करने संबंधी याचिका एडवोकेट ममता शर्मा की ओर से डाली गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर जस्टिस एएम खनविलकर और दिनेश महेश्वरी की स्पेशल बेंच सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र से कहा, 'आप जो भी फैसला लेना चाहते हैं, उसके लिए आजाद हैं। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से उम्मीद जताई गई है कि जो पॉलिसी आपने पिछली बार लागू की थी उसे इस बार भी दोहराया जा सकता है। अगर सरकार पिछले बार की नीतियों से अलग जाना चाहती है तो उसे स्पष्ट कारण बताने चाहिए।' सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है परीक्षा आयोजित कराने से बच्चे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। इससे लाखों बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ जाएगी। 

 

 

13-05-2021
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रवासी मजदूरों की हालत खराब, एक सप्ताह में देना होगा जवाब

नई दिल्ली/रायपुर। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों को पिछले साल जुलाई में प्रवासी मजदूरों के लिए खाने—पीने और रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन आदेशों का कोई पालन नहीं हुआ है, क्योंकि किसी भी सरकार ने जवाब दाखिल नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो प्रवासी मजदूर पिछले साल अपने गांव वापस चले गए थे और जो शहर में वापस आ गए हैं। उनके लिए रोजगार या खाने पीने का साधन होना चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर में सामूहिक रसोई बनाई जाए, ताकि कोई भी नागरिक भूखा न रहे। प्रवासी मजदूरों की दशा और उनके लाभकारी योजनाओं पर राज्य सरकारों को एक हफ्ते में जवाब देना होगा। सुप्रीम कोर्ट प्रवासी मजदूरों पर आज शाम चार बजे तक आदेश पारित करेगा।

 

 

12-05-2021
केंद्र ने कहा, मई में वैक्‍सीन के 2 करोड़ डोज दिए जाएंगे

नई दिल्ली/रायपुर। कोरोना महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने वैक्सीन वितरण का एक फॉर्मूला पेश किया है। इसके मुताबिक राज्य सरकारों को 18 से 44 साल तक की आयु वर्ग वाली आबादी के लिए मई में वैक्‍सीन के करीब 2 करोड़ डोज दिए जाएंगे। सरकार ने यह भी कहा कि इस महीने वैक्सीन के 8.5 करोड़ डोज तैयार होने की उम्मीद है। केंद्र ने कहा कि उन्होंने राज्‍यों को यह 8.5 करोड़ डोज सप्‍लाई करने के लिए कोटा तय कर दिया है। राज्‍यों को इस कोटे के मुताबिक वैक्सीन निर्माताओं से खुद डोज खरीदने होंगे।

10-05-2021
टीकाकरण नीति पर केंद्र सरकार ने दायर किया सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, किया अपना बचाव

नई दिल्ली। देश में फैली महामारी और टीकाकरण की रणनीति पर केंद्र सरकार लगातार घिर रही है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना बचाव किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि केंद्र की टीकाकरण नीति में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामें में कहा कि 18 वर्ष से 44 वर्ष की आयु तक के लोगों को वैक्सीन देने को इसलिए मंजूरी दी गई है क्योंकि राज्य सरकार लगातार इसकी मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार ने वैक्सीन उत्पादक राज्यों को एक दाम में वैक्सीन के सप्लाई करने को कहा है। बता दें कि केंद्र सरकार जिस वैक्सीन के लिए केवल 150 रुपये देने पड़ रहे हैं उसी वैक्सीन को वैक्सीन निर्माता कंपनियां राज्यों को 300 से 400 रुपये प्रति डोज बेच रही हैं। इस मामले पर केंद्र सरकार का कहना है कि केंद्र को इतने कम पैसे इसलिए देने पड़ रहे हैं क्योंकि उसने बड़ी मात्रा में वैक्सीन का ऑर्डर दिया है। केंद्र सरकार ने कहा अपने हलफनामे में कहा है कि इसका किसी प्रकार का असर जनता पर नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि सभी राज्य सरकारों द्वारा लोगों को वैक्सीन मुफ्त में मुहैया कराने की घोषणा की गई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार से 4 बिंदुओं पर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट में 27 अप्रैल को ऑक्सीजन आपूर्ति, कोविड बेड्स, महत्वपूर्ण चिकित्सा आवश्यकताओं में वृद्धि और रेमडेसिविर, फेविपिविर सहित आवश्यक दवाईयों की उपलब्धता पर जवाब मांगा था।

 

08-05-2021
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई ऑक्सीजन और दवाओं के वितरण के लिए राष्ट्रीय टॉस्क फोर्स, इन हस्तियों को किया शामिल

नई दिल्ली। देश में जारी कोरोना संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को बड़ा एक्शन लेते हुए ऑक्सीजन और दवाओं के वितरण के लिए टास्क फोर्स बनाई है। अब से ये टास्क फोर्स राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऑक्सीजन और दवाओं के वितरण की जिम्मेदारी संभालेगी। बता दें कि कोरोना महामारी के मद्देनजर देश के ज्यादातर राज्य ऑक्सीजन और जरुरी दवाओं की भारी किल्लत से गुजर रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस संकट पर पिछले कई दिनों से नजर बनाए हुए है और शनिवार को आखिरकार उसने अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में ऑक्सीजन और जरुरी दवाओं के आवंटन के लिए 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जरुरत पड़ने पर कैबिनेट सचिव सहयोगी की नियुक्ति कर सकते हैं हालांकि वह अतिरिक्त सचिव के पद से नीचे के रैंक के अधिकारी को नामित नहीं कर सकेंगे।

इन हस्तियों को किया गया टॉस्क फोर्स में शामिल
डॉ. भबतोष विश्वास, पूर्व कुलपति, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता। डॉ. देवेंद्र सिंह राणा, चेयरपर्सन, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली।
डॉ.देवी प्रसाद शेट्टी, चेयरपर्सन और कार्यकारी निदेशक, नारायण हेल्थकेयर, बेंगलुरु। डॉ.गगनदीप कांग, प्रोफेसर, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु। डॉ.जेवी पीटर, डायरेक्टर, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु।डॉ. नरेश त्रेहन, चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक, मेदांता अस्पताल और हर्ट इंस्टीट्यूट गुरुग्राम। डॉ.राहुल पंडित, डायरेक्टर, क्रिटिकल केयर मेडिसिन एंड आईसीयू, फोर्टिस अस्पताल, मुलुंड (मुंबई) और कल्याण (महाराष्ट्र)। डॉ. सौमित्र रावत, चेयरमैन और हेड, डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली।
डॉ.शिव कुमार सरीन, वरिष्ठ प्रोफेसर और हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ हेपेटोलॉजी, डायरेक्टर, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीरी साइंस (ILBS), दिल्ली। डॉ. जरीर एफ उदवाडिया, कंसल्टेंट चेस्ट फिजिशियन, हिंदुजा हॉस्पिटल, ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल और पारसी जनरल हॉस्पिटल, मुंबई।
सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार।
नेशनल टास्क फोर्स के संयोजक भी इसके सदस्य होंगे, जो केंद्र सरकार में कैबिनेट सचिव स्तर का अधिकारी होगा। 

 

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