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04-12-2019
आईएनएक्स मीडिया मामले में पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

नई दिल्ली। आईएनएक्स मीडिया मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पी. चिदंबरम की सशर्त जमानत मंजूर कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के केस में पी. चिदंबरम को जमानत दी है। पी.चिदंबरम ने कोर्ट से कहा है कि वे जांच में पहले भी सहयोग करते रहे हैं और आगे भी किसी तरीके की पूछताछ के लिए जांच एजेंसी के समक्ष उपलब्ध रहेंगे। बता दें कि चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई ने जो केस दर्ज किया था उसमें कोर्ट पहले ही चिदंबरम को जमानत दे चुका है। ऐसे में आज सुप्रीम कोर्ट से ईडी के केस में जमानत मिलने के बाद चिदंबरम जेल से बाहर आ जाएंगे। हालांकि, जेल से उनकी कब रिहाई होगी, इसको लेकर अभी कोई निश्चित समय नहीं बताया जा रहा है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, चिदंबरम को विदेश जाने से पहले इजाजत लेनी होगी। चिदंबरम ने भी कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वे इस मामले से संबंधित किसी भी पूछताछ के लिए उपलब्ध रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने पी. चिदंबरम को 2 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जमानत देने का फैसला केस की मेरिट पर निर्भर करता है, साथ ही जमानत देना कानून के प्रावधान में है। पी. चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में 16 अक्टूबर से प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं। इसी मामले सीबीआई ने उनको दिल्ली स्थित आवास से 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। रिमांड पूरी होने के बाद वे तिहाड़ जेल भेज दिए गए थे जहां से ईडी ने उनको हिरासत में ले लिया था। इस बीच खबर आ रही है कि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पी.चिदंबरम रिहा हो सकते हैं।

03-12-2019
अयोध्या मामलाः जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वकील राजीव धवन को से केस हटाया

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ वकील राजीव धवन को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस मामले से हटा दिया है। जमीयत द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका में राजीव धवन को वकील नहीं बनाया गया है। राजीव धवन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस बारे में बताया है। उन्होंने ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है। उन्होंने कहा कि अब वे इस मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बाबत राजीव धवन ने एजाज मकबूल को एक चिट्ठी भी लिखी है। इस मामले पर वकील एजाज मकबूल ने कहा कि मुद्दा यह है कि मेरे क्लाइंट यानी की जमीयत सोमवार को रिव्यू पिटिशन दाखिल करना चाहते थे। यह काम राजीव धवन को करना था। वह उपलब्ध नहीं थे इसलिए मैं पिटिशन में उनका नाम नहीं दे पाया। यह कोई बड़ी बात नहीं है। बता दें कि सोमवार को अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। पक्षकार एम.सिद्दीकी ने 217 पन्नों की पुनर्विचार याचिका दाखिल की। एम. सिद्दीकी की तरफ से मांग की गई कि संविधान पीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए, जिसमें कोर्ट ने विवादित जमीन को राम मंदिर के पक्ष दिया था।

 

02-12-2019
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट नहीं, पुनर्विचार याचिका दायर

नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अयोध्या केस में सुनाए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। यह याचिका मौलाना सैयद अशद रशीदी की ओर से दायर की गई है, जो अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के 10 याचिकाकतार्ओं में से एक हैं। यह पुनर्विचार याचिका इस विवाद में मूल वादकारियों में शामिल एम. सिद्दीक के कानूनी वारिस मौलाना सैयद अशद रशीदी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि फैसला त्रुटिपूर्ण है और इस पर संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत पुनर्विचार की जरूरत है। पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को राहत के मामले में संतुलन बनाने का प्रयास किया है, हिंदू पक्षकारों की अवैधताओं को माफ किया गया है और मुस्लिम पक्षकारों को वैकल्पिक रूप में पांच एकड़ भूमि का आबंटन किया गया है जिसका अनुरोध किसी भी मुस्लिम पक्षकार ने नहीं किया था।

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम आज सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर नहीं कर रहे हैं। हमने समीक्षा याचिका तैयार की है और हम इसे 9 दिसंबर से पहले किसी भी दिन दायर कर सकते हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अयोध्या मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका की बात करने वाले लोग बिखराव और टकराव का माहौल पैदा करने की कोशिश में हैं लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या का मुद्दा अब खत्म हो गया है और इसे अब उलझाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए क्योंकि देश की शीर्ष अदालत ने सर्वसम्मति के फैसले में इस मामले को हल कर दिया है।

01-12-2019
राम रसोई में सुबह 11:30 से 2:30 बजे तक मिलेगा फ्री में भोजन

अयोध्या। पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद रविवार को अयोध्या में राम रसोई की शुरुआत हो गई है। रामलला के मंदिर के ठीक बाहर अमावा मंदिर में पटना के महावीर मंदिर ट्रस्ट ने राम रसोई की शुरुआत की। राम रसोई में रामलला के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन मिलेगा। महावीर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने आज इसकी शुरुआत की। इसमें सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक भोजन प्रसाद दिया जाएगा। इससे पहले पटना महावीर मंदिर ट्रस्ट 10 करोड़ रुपए चंदे के तौर पर राम मंदिर के लिए ऐलान कर चुका है।

इस प्रसाद भोजन की शुभारंभ रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने श्रद्धालुओं को प्रसाद भोजन अपने हाथों से वितरित कर  किया। इससे पहले वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान राम जानकी के विवाह पंचमी की विशेष तिथि पर विशेष पूजन हुआ और भगवान राम की अनुमति के बाद राम रसोई का संचालन शुरू किया गया। ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने बताया कि सभी चावल कैमूर (बिहार) के मोकरी गांव से मंगवाया गया है। राम रसोई और भगवान के भोग की सेवा लगातार चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए अयोध्या के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास से बात हो चुकी है। कुणाल ने कहा कि बिहार में पहले से ही सीतामढ़ी में सीता रसोई चल रही है। यहां दिन में 500 लोग और रात में 200 लोगों को मुफ्त में भोजन कराया जाता है।

29-11-2019
प्रधानमंत्री की मौजूदगी में रामनवमी पर होगा अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास!

अयोध्या। अयोध्या विवाद पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद अब राम मंदिर निर्माण को लेकर कवायद शुरू हो गई है। अब राम मंदिर के शिलान्यास की तारीख का ऐलान अयोध्या मामले के पक्षकार एवं दिगम्बर अखाड़े के महंत सुरेश दास ने किया है। महंत सुरेश दास ने कहा कि अगले साल रामनवमी के मौके पर मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा। महंत ने दावा किया कि शिलान्यास के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर महंत सुरेश दास ने दावा किया कि इसमें विश्व हिन्दू परिषद, निर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा और दिगंबर अखाड़ा भी शामिल रहेगा। महंत सुरेश दास ने कहा कि 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से राम जन्मभूमि का फैसला आया वह बहुत प्रशंसनीय है। सैकड़ों वर्षों की समस्या का समाधान सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया। राम मंदिर के लिए बनने वाले न्यास में विहिप के साथ निर्मोही अखाड़ा रहेगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को शामिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही दिगंबर अखाड़ा भी इस न्यास में शामिल होगा, क्योंकि हमारे महंत परमहंस दास ने 1949 से इस लड़ाई को लड़ा है। 

29-11-2019
महाराष्ट्र के नए गठबंधन के खिलाफ दायर याचिका खारिज, सुको ने कहा-कोई आधार नहीं

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना गठबंधन के विरोध में दायर एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया के बाद महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (महाविकास अघाडी) का गठबंधन हुआ, यह गलत है और इसे असंवैधानिक करार दिया जाए। शीर्ष अदालत ने याचिका का कोई आधार नहीं माना और इसे खारिज कर दिया। इस मामले की सुनवाई उसी बेंच ने की जिसने महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट को लेकर सुनवाई की थी। इससे पहले 24 और 25 नवंबर को दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट करवाने और विधायकों की शपथ ग्रहण का आदेश दिया था। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने डिप्टी सीएम के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन की सरकार का रास्ता साफ  हो गया था।

29-11-2019
देवेंद्र फडणवीस को नागपुर पुलिस ने भेजा समन, जाने क्या है पूरा मामला...

नई दिल्ली। नागपुर पुलिस ने यहां की एक स्थानीय अदालत द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम समन जारी किया है। फडणवीस द्वारा चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ दो आपराधिक मुकद्दमों के बारे में सूचनाएं छिपाने के आरोप से जुड़ा मामला है। इसी मामले में समन जारी हुआ है। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त हुआ है, जब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन ने सरकार बनाई है। फडणवीस नागपुर से विधायक हैं। मजिस्ट्रेटी अदालत ने 1 नवंबर को एक याचिका पर सुनवाई शुरू की थी, जिसमें भाजपा नेता के खिलाफ कथित तौर पर सूचनाएं छिपाने के लिए आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी।

शहर के वकील सतीश उके ने अदालत में एक याचिका दायर कर फडणवीस के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। बंबई हाईकोर्ट ने उके की याचिका खारिज करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को मजिस्ट्रेटी अदालत को उके द्वारा दी गई याचिका पर सुनवाई के लिए आगे बढ़ने का निर्देश दिया था। फडणवीस के खिलाफ 1996 और 1998 में जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए थे लेकिन दोनों मामले में आरोप नहीं तय किए गए थे। उके ने आरोप लगाया था कि फडणवीस ने अपने चुनावी हलफनामे में इस सूचना का खुलासा नहीं किया। 

29-11-2019
कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किया है। इस याचिका में कोलकाता उच्च न्यायालय द्वारा शारदा चिट फंड घोटाले में राजीव कुमार की कथित संलिप्तता के लिए जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।

 

28-11-2019
आदिवासियों के विरोध से अदानी कंपनी में खलबली, अब शुरू हो गया ज्ञापन का खेल

उदयपुर। ग्राम सभा के फर्जी प्रस्ताव के सहारे परसा कोल परियोजना की स्वीकृति प्रक्रियाएं और हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल प्रभावित 20 ग्राम सभाओं के विरोध के बावजूद खदानों के खोले जाने की तैयारी के विरोध में पिछले 14 अक्टूबर से सरगुजा, सूरजपुर और कोरबा जिले के सैकड़ों आदिवासियों और अन्य ग्रामीणों के लगातार धरना प्रदर्शन से अदानी कंपनी में खलबली होने लगी है। करीब डेढ़ महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शन को तोड़ने अब तरह तरह की तरकीब अपनाई जा रही हैं। सबसे पहले अंबिकापुर-बिलासपुर हाईवे में सूरजपुर जिला में स्थित ग्राम तारा में चल रहे धरना प्रदर्शन को एसडीएम की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच के माध्यम से धरनास्थल बदलने के लिए मजबूर किया गया गया। जब प्रदर्शनकारियों ने धरनास्थल बदलकर सरगुजा जिला के परसा कोल ब्लॉक के प्रभावित ग्राम फतेहपुर में धरना जारी रखा, तब प्रशासन के माध्यम से अयोध्या विवाद के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के वक्त धारा 144 का भी डर दिखाया गया। प्रदर्शनकारी इन सबके बावजूद बड़ी संख्या में धरना में शामिल होते रहे। इसी बीच कलेक्टर सरगुजा और कलेक्टर सूरजपुर को परसा कोल परियोजना को जल्दी शुरू किए जाने की मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया। इसकी भनक तक स्थानीय ग्रामीणों को नहीं थी। समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने पर इसका पता चला। उक्त ज्ञापन में पूर्व से संचालित खदान के प्रभावित क्षेत्र में विकास कार्यों, स्थानीय लोगों को योग्यता के अनुसार नौकरी आदि का हवाला दिया गया था। आंदोलन में शामिल स्थानीय ग्रामीणों ने जब इसकी पड़ताल की तब पता चला कि अदानी कंपनी के द्वारा ग्रामीणों के बीच में फूट डालने के लिए कुछ एजेंट तैयार किए गए हैं, इसी तरह के कुछ लोगों ने उक्त ज्ञापन में हस्ताक्षर किए थे। ग्रामीणों के अनुसार इस परियोजना के प्रभावित गांवों में मुआवजे की लालच में कुछ बाहरी लोगों ने भी कुछ जमीन खरीदी हैं, उन्होंने ने भी कंपनी के आफिस में उनके द्वारा तैयार किए गए ज्ञापन में हस्ताक्षर किए हैं। परसा कोल ब्लॉक के प्रभावित गांव साल्ही हरिहरपुर, फतेहपुर और घाटबर्रा के ग्रामीण रामलाल, बालसाय कोर्राम, मुनेश्वर, जयनंदन पोर्ते और अन्य लोगों ने बताया कि पूर्व से संचालित परसा ईस्ट केते बासेन परियोजना का हाल हम देखते आ रहे हैं। हमारे गांवों से बमुश्किल तीन किमी दूरी पर संचालित इस खदान से केते गांव का नामोनिशान मिट गया। उस गांव के लोगों को पुनर्वास के नाम पर छोटे छोटे दड़बानुमा कमरे बनाकर ग्राम बासेन मे दिया गया है। मुआवजे के रूप में मिली राशि अधिकांश लोगों की खर्च हो चुकी है। सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में असमय ही मौत के मुंह में समा चुके हैं उनके बच्चे अनाथ हो चुके हैं। हरे भरे जंगल कट चुके हैं, तापमान बढ़ता ही जा रहा है। धूल और कोयले के गुबार से लोग सांस की बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। नौकरी के नाम पर कुछ लोगों से आठ-दस हजार मासिक के काम कराया जा रहा है,ऐसा विकास हमें नहीं चाहिए। स्थानीय ग्रामीणों ने बुधवार 27 नवम्बर को पुनः कलेक्टर सरगुजा को परियोजना के विरोध में ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया है कि हम लोग पिछले 14 अक्टुबर से खदानों के विरोध में लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं पर शासन प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। हम लोगों ने खदान खोलने की मांग से संबंधित कोई ज्ञापन नहीं दिया है उक्त ज्ञापन फर्जी है। उसे निरस्त करने की मांग की करते हैं। 

 

28-11-2019
देश में मुस्लिम नहीं हिन्दू बिगाड़ते है शांति-सौहार्द वाले बयान पर राजीव धवन ने दी सफाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष और सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील रहे राजीव धवन ने हिंदुओं को लेकर दिए बयान पर सफाई दी है। राजीव धवन ने बयान दिया था कि 'देश में शांति-सौहार्द हिन्दू बिगाड़ते हैं मुस्लिम नहीं'। इसकी जमकर आलोचना हो रही है। वहीं राजीव धवन का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। अपने बयान पर सफाई देते हुए राजीव धवन ने कहा कि, 'यह टीवी द्वारा की गई शरारत है। मैं जब हिंदुओं की बात करता हूं तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं सभी हिंदुओं की बात कर रहा हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'जब बाबरी मस्जिद मामले में हिंदू शब्द का इस्तेमाल होता है तो इसका मतलब संघ परिवार होता है। मैंने कोर्ट में कहा था कि जिन्होंने बाबरी मस्जिद ढहाया वे लोग हिंदू तालिबान हैं। मैं संघ परिवार के उन वर्गों की बात कर रहा हूं जो हिंसा और लिंचिंग जैसी चीजों के लिए समर्पित हैं'।

बता दें कि, मुस्लिम पक्ष और सुन्नी वक्फ बोर्ड को भले ही सुप्रीम कोर्ट से फैसले में निराशा मिली हो, लेकिन उनकी पैरवी करने वाले राजीव धवन ने खूब वाहवाही बटोरी थी। सुप्रीम कोर्ट में करीब 40 दिन चली मैराथन सुनवाई में धवन ने अपनी दलीलों से पीठ का दिल जीत लिया था। पीठ ने उस वक्त कहा था कि, हम वरिष्ठ वकील डॉ राजीव धवन की शैली से प्रभावित हुए। उन्होंने जिस तरह पूरी सुनवाई के दौरान दलीलें रखीं और साथ ही अपने विपक्षी वकीलों को बोलने का मौका दिया वह काबिल ए तारीफ था। पूरी सुनवाई के दौरान उन्होंने जिस तरह से धैर्य, सत्य और न्याय के लिए सहयोग किया वह सराहनीय है। सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने एक बार यह भी कहा था कि सीजेआई सब सवाल सिर्फ उनसे ही पूछ रहे हैं जबकि हिंदू पक्ष के वकील से कुछ नहीं पूछा जा रहा, इस पर सीजेआई ने हिंदू पक्ष के वकील से भी कई सवाल पूछ डाले। हालांकि राजीव धवन ने कई बार अपना आपा भी खोया था, सुनवाई के अंतिम दिन तो उन्होंने हिंदू पक्ष की ओर से पेश किया गया नक्शा भी फाड़ दिया था। धवन को मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी करने के लिए जान से मारने की धमकी भी मिली थी।

सीजेआई से बहस के बाद छोड़ी थी वकालत

74 वर्षीय राजीव धवन ने सीजेआई दीपक मिश्रा के साथ दिल्ली सरकार बनाम केंद्र के मामले में अदालत की सुनवाई के दौरान बहस के बाद 11 दिसंबर 2017 को उन्होंने वकालत छोड़ने का फैसला किया था। बाद में मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी के लिए वह तैयार हो गए थे। 

26-11-2019
एक दिसंबर को सीएम पद की शपथ लेंगे शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे

मुंबई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र में पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। कोर्ट ने कहा है कि कल शाम 5 बजे तक बहुमत परीक्षण हो जाना चाहिए। इसके फैसले के बाद देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही राज्य में कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी सरकार गठन का रास्ता साफ  हो गया। शरद पवार ने कहा कि उद्धव ठाकरे को सीएम पद का जिम्मा दिया जाएगा। हम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। बैठक में उद्धव ठाकरे गठबंधन महा विकास अघाड़ी के नेता चुने गए हैं। उद्धव ने शरद पवार के पैर भी छुए। एसीपी के जयंत पाटिल ने उद्धव ठाकरे का नाम सीएम पद के लिए प्रस्तावित किया, कांग्रेस के बालासाहेब थोराट ने समर्थन किया। शिवसेना के अनिल देसाई ने कहा कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन में एक समन्वय समिति होगी।

 

26-11-2019
सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या फैसले पर दायर नहीं करेगा पुनर्विचार याचिका

लखनऊ। अयोध्या मामले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को हुई बैठक में अहम फैसला किया है। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ  बोर्ड की बैठक में सात में से छह सदस्य पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के पक्ष में नहीं थे। बोर्ड के सदस्यों में से अकेले अब्दुल रज्जाक खान चाहते थे कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। इस बैठक में सुप्रीम कार्ट द्वारा दिए गए फैसले पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी ने मीडिया के सामने इस बात की जानकारी दी कि फैसले का विरोध नहीं किया जाएगा। वहीं, पांच एकड़ जमीन लेने के फैसले पर बोर्ड ने कहा कि जब हमें ऑफर की जाएगी तब निर्णय लेंगे। अभी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। बता दें कि इससे पहले बोर्ड अध्यक्ष ने कहा था कि यह बैठक पहले 13 नवंबर को होने वाली थी लेकिन इसे 26 तक के लिए टाल दिया गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने हमें सलाह दी थी कि मस्जिद के लिए जमीन न लेने से नकारात्मकता बढ़ेगी जो कि ठीक नहीं है, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि जमीन लेकर यहां शिक्षा संस्थान और साथ में मस्जिद बनाइए।

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