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06-10-2019
फारूक अब्दुल्ला से मिला 15 सदस्यीय शिष्टमंडल, नजरबंदी के बाद पहली मुलाकात

नई दिल्ली। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री पिता-पुत्र (फारूक और उमर) नजरबंद हैं। पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मिलने नेशनल कॉन्फ्रेंस का 15 सदस्यीय शिष्टमंडल रविवार को श्रीनगर पहुंचा। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शनिवार को इसकी इजाजत दे दी थी। बताया जा रहा है कि शिष्टमंडल उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात करेगा। पार्टी नेताओं का 15 सदस्यीय शिष्टमंडल जम्मू प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में फारूक और उमर से मिलने के लिए श्रीनगर पहुंचा है। 81 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर स्थित अपने आवास पर नजरबंद हैं, जबकि उमर अब्दुल्ला को स्टेट गेस्ट हाउस में हिरासत में रखा गया है।

'कई पूर्व विधायक शामिल है शिष्टमंडल में'

इससे पहले पार्टी प्रवक्ता मदन मंटू ने बताया था, 'शिष्टमंडल में पार्टी के कई पूर्व विधायक हैं। शिष्टमंडल राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिला था और उनसे पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेताओं से मिलने की अनुमति मांगी थी, राज्यपाल ने अनुमति दे दी थी।'

एनसी नेताओं की गतिविधियों से पाबंदियां हटीं

मंटू ने बताया था कि पार्टी के जम्मू संभाग के जिला अध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ नेताओं की आकस्मिक बैठक में फारूक और उमर अब्दुल्ला से मिलने का फैसला लिया गया था। बता दें कि जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं की गतिविधियों पर से पाबंदियां हटा दी गई हैं।

इस कारण यह मुलाकात है अहम

दरअसल, जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 और 35A को हटाए जाने के बाद पहली बार स्थानीय निकायों के चुनाव होने जा रहे हैं। उधर, दोनों ही पार्टियों के आला नेता, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती नजरबंद हैं। चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव को लेकर भी एनसी का प्रतिनिधि दल फारूक अब्दुल्ला और उमर से मिलकर चर्चा करेगा। ऐसा इसलिए भी है कि चुनाव में नैशनल कॉन्फ्रेंस की भागीदारी को लेकर अभी असमंजस की स्थिति है। पिछले दिनों ही खबर आई थी कि एनसी और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के स्थानीय प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का समर्थन करने का मन बना रहे हैं।

18-08-2019
हिरासत में पूर्व सीएम उमर अब्‍दुल्‍ला फिल्‍में देखकर बीता रहे समय, महबूबा मुफ्ती पढ़ रहीं किताबें

नई दिल्ली। जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 को हटाए जाने के बाद से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती हिरासत में हैं। ऐसे में उमर अब्‍दुल्‍ला हॉलीवुड की फिल्‍में देखकर और जिम में पसीना बहाकर अपना समय काट कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार उमर अब्‍दुल्‍ला को श्रीनगर के गुप्‍तकर रोड स्थित सरकारी गेस्‍ट हाउस हरि निवास पैलेस में रखा गया है। वहीं पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती किताबे पढ़ते हुए दिन गुजार रही हैं। मुफ्ती जम्मू और कश्मीर पर्यटन विकास निगम के स्वामित्व वाले गेस्ट हाउस में रह रही हैं। उन्हें मुगल गार्डन के आसपास के क्षेत्र में जाने की इजाजत है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं को पहले हरि निवास पैलेस में रखा गया था। लेकिन दोनों के बीच विवाद होने के बाद उन्हें अलग-अलग किया गया। उमर अब्दुल्ला जहां हरि निवास में ही रह रहे हैं वहीं पीडीपी अध्यक्ष को चश्मे शाही शिफ्ट कर दिया गया है। उमर अब्‍दुल्‍ला को हिरासत के दौरान हॉलीवुड फिल्‍मों की डीवीडी दी गई है। उन्हें हरि निवास के अंदर मॉर्निंग वॉक की अनुमति दी गई है। साथ ही जिम सुविधा भी उन्हें दी गई है। हरि निवास 9 हेक्‍टेयर में फैला है, जिसमें कई सुविधाएं हैं। 

 

05-08-2019
अनुच्छेद 370: हिरासत में लिए गए महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला

जम्मू। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हिरासत में लिया गया है। उन्हें श्रीनगर के हरि निवास गेस्ट हाउस में रखा गया है। घाटी में धारा 144 लागू है। महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला द्वारा लगातार बयानबाजी की जा रही थी। सूत्रों की मानें तो प्रशासन ने हिंसा न भड़के इसलिए सुरक्षा के कारणों से हिरासत में लिया गया है।  इससे पहले रविवार रात को महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया था। बता दें कि घाटी में अभी भी कई नेता नजरबंद हैं, जिनमें सज्जाद लोन समेत कई अलागवादी नेता और राजनीतिक पार्टियों के नेता शामिल हैं। घाटी में पूरी तरह से मोबाइल, लैंडलाइन, ब्रॉडबैंड समेत सभी इंटरनेट सेवा शनिवार रात से ही बंद कर रखी हैं। वहीं घाटी में सभी अधिकारियों को सैटेलाइट फोन दिए गए हैं, ताकि आपस में बातचीत होती रहे। 

 

05-08-2019
उमर, महबूबा ने की कश्मीर मुद्दे पर सरकार के कदम की आलोचना

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर मुद्दे पर सरकार के कदम की कड़ी निंदा की है। मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा, आज भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन है। जम्मू-कश्मीर नेतृत्व द्वारा 1947 में दो देशों की अवधारणा को खारिज कर दिया गया। भारत के साथ जुड़े रहने का फैसला अब उस पर भारी पड़ रहा है। भारत सरकार का अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का एकतरफा फैसला अवैध और असंवैधानिक है। इसका उपमहाद्वीप के लिए विनाशकारी परिणाम होगा। सरकार के इरादे साफ हैं। वह जम्मू-कश्मीर के लोगों को डरा-धमका पर इस पर कब्जा करना चाहती है। उसने कश्मीरियों के साथ किये गये वादे पूरे नहीं किये।

उन्होंने कहा कि सरकार के इरादे साफ और कुटिल हैं। वह देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य की जनसंख्या में बदलाव चाहती हैं। वह मुसलमानों को इतना अशक्त बनाना चाहती है कि वह अपने ही राज्य में दूसरे दर्जे का नागरिक बन कर रह जायें। उन्होंने कहा कि मीडिया और सिविल सोसायटी के एक वर्ग में सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर जश्न मनाया जा रहा है जो कि निराशाजनक और परेशान करने वाला है। सुश्री मुफ्ती ने सवालिया लहजे में कहा, जम्मू-कश्मीर को भारत से जुड़ कर क्या मिला। धर्म के आधार पर एक और बंटवारा। हमारा विशेष दर्जा दान में नहीं मिला है, यह संसद की ओर से प्रदत्त अधिकार है। जम्मू-कश्मीर नेतृत्व और केंद्र सरकार ने एक समझौता किया था जिसका आज उल्लंघन किया गया। 

अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार का आज का एकतरफा और हैरतअंगेज फैसला जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात है जिन्होंने 1947 में भारत पर भरोसा जताया था। इस फैसले के दूरगामी और खतरनाक अंजाम होंगे। यह राज्य के लोगों के खिलाफ उठाया गया कदम है जिसके बारे में कल श्रीनगर में हुई सर्वदलीय बैठक में आगाह किया गया था। उन्होंने कहा, हमारी सबसे बड़ी आशंका बदकिस्मती से सच साबित हो गयी है। सरकार और जम्मू-कश्मीर में उसके प्रतिनिधि ने हमसे झूठ बोला कि कोई बड़ी योजना नहीं है। यह घोषणा तब की गयी जब पूरे राज्य, खास तौर पर कश्मीर घाटी को किले में तब्दील कर दिया गया। राज्य में लाखों की संख्या में सुरक्षा बलों को उतार कर जम्मू-कश्मीर के लोगों को लोकतांत्रिक आवाज प्रदान करने वाले हमारे जैसे लोगों को कैद कर दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला एकतरफा, अवैध और असंवैधानिक है और नेशनल कांफ्रेंस इसे चुनौती देगी। उन्होंने कहा, एक लंबी और कठिन लड़ाई होने वाली है। हम इसके लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो भागों में विभक्त करने वाला विधेयक जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 आज राज्यसभा में पेश किया। इससे लद्दाख को अलग कर केन्द्रशासित क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

05-08-2019
देर रात फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती को सरकार ने किया नजरबंद, इंटरनेट, मोबाइल सेवा ठप

कश्मीर। जम्मू-कश्मीर पर हर किसी की नजर बनी हुई है। अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती के साथ-साथ राजनीतिक हलचल भी बढ़ रही है। ऐसे में सरकार कश्मीर पर क्या बड़ा फैसला ले सकती है। इसपर भी हर किसी की नजर है। कश्मीर में लगातार बदलते हालात के बीच राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अबदुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और एनसी नेता उमर अब्दुल्ला को श्रीनगर में नजरबंद किया गया है। नजरबंद होने के बाद उमर अब्दुल्ला ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट किया कि हिंसा से केवल उन लोगों के हाथों में खेलेंगे जो राज्य की भलाई नहीं चाहते। शांति के साथ रहें और ईश्वर आप सभी के साथ रहें।

वहीं नजरबंद होने से पहले भी दोनों नेताओं ने कई ट्वीट किए। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सुनने में आ रहा है कि जल्द ही इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया जाएगा। कर्फ्यू पास भी जारी किए जा रहे हैं। अल्लाह जाने क्या होगा। यह एक लंबी रात होने जा रही है। महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट में लिखा कि ऐसे कठिन समय में, मैं अपने लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहती हूं कि जो हो सकता है, हम इसमें एक साथ हों और इसका मुकाबला करेंगे। जो कुछ भी हमारा अधिकार है उसके प्रयास करने के लिए हमारे संकल्प को तोड़ा नहीं जा सकता। महबूबा मुफ्ती के इस ट्वीट को उमर अब्दुल्ला ने भी रिट्वीट किया है।

फारूक अब्दुल्ला के घर पर हुई बैठक
श्रीनगर में पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला घर पर सर्वदलीय बैठक हुई, जिसके बाद उन्होंने प्रेस को संबोधित किया। अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम से कश्मीर के लोग खौफ में हैं। अब से पहले कभी भी अमरनाथ यात्रा को रद्द नहीं किया गया। यह कश्मीर के लिए सबसे बुरा वक्त है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान से अपील करते हुए कहा कि दोनों देश कोई ऐसा कदम न उठाएं, जिससे तनाव बढ़े।

04-08-2019
कश्मीर घाटी में सैन्य हलचल पर पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने जताई चिंता

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में जारी हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि कश्मीर में घबराहट का माहौल है। महबूबा ने जम्मू-कश्मीर के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि यहां आफत टूट पड़ी है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में क्या होने वाला कोई नहीं बता रहा। मुफ्ती ने यह भी आरोप लगाया कि रविवार शाम एक होटल में सभी राजनीतिक दलों ने बैठक बुलाई थी, लेकिन पुलिस ने बुकिंग रद्द करा दी है। उधर सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी कैबिनेट की अचानक मीटिंग होने वाली है। खास बात यह है कि मोदी मंत्रिमंडल की मीटिंग आमतौर पर बुधवार को होती है। जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती और एक के बाद अडवाइजरी जारी किए जाने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी परिप्रेक्ष्य में कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और धारा 35ए को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। साथ ही जम्मू-कश्मीर राज्य को जम्मू, कश्मीर और लद्दाख, कुल तीन भागों में विभक्त करने की भी अनौपचारिक चर्चा फिजाओं में गूंज रही है। इस बीच महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर 35-ए या 370 से छेड़छाड़ पर चेतावनी दी है। महबूबा ने कहा कि हमने इस देश के लोगों को समझाने का प्रयास किया था कि अगर 35-ए या 370 से छेड़छाड़ करेंगे तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। हमने अपील भी की है लेकिन केंद्र की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला है। वे ये भी नहीं कह रहे हैं कि सबकुछ ठीक हो जाएगा।  

 

27-07-2019
कश्मीर एक राजनीतिक समस्या, सैन्य विकल्प से समाधान संभव नहीं : महबूबा

श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) अध्यक्ष एवं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी में केन्द्रीय पुलिस बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात करने संबंधी केंद्र सरकार के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की समस्या एक राजनीतिक समस्या है जिसका समाधान सैन्य तरीकों के जरिये नहीं निकाला जा सकता। सुश्री मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा कि राज्य में 10 हजार अतिरिक्त केन्द्रीय पुलिस बलों की तैनाती के निर्णय से राज्य के लोग काफी डरे हुए हैं और तनाव की स्थिति है। केंद्र सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार कर इसमें सुधार करना चाहिए।

सुश्री मुफ्ती ने ट्वीट किया, घाटी में 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात करने के केन्द्र के फैसले से लोग डरे हुए हैं। कश्मीर में सुरक्षाबलों की कोई जरुरत नहीं है। जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जिसका समाधान सैन्य तरीकों से नहीं निकाला जा सकता। भारत सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार कर इसमें सुधार करना चाहिए। गृह मंत्रालय के केन्द्रीय पुलिस बलों को जारी आदेश में राज्य में अर्द्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां तैनात करने को कहा गया है। इनमें से 50 कंपनी केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल , 30 सशस्त्र सीमा बल और दस-दस सीमा सुरक्षा बल तथा भारत तिब्बत सीमा पुलिस की होंगी। मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि राज्य में ह्यआतंकवाद रोधी ग्रिडह्ण को मजबूत बनाने और कानून व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा रही है।

20-05-2019
महबूबा ने ‘एक्जिट पोल’ को लेकर न्यूज चैनलों के एंकरों पर कसा तंज

श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष एवं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने लोकसभा चुनावों को लेकर विभिन्न समाचार चैनलों के ‘एक्जिट पोल’ को लेकर न्यूज एंकरों पर तंज कसा है। सुश्री महबूबा ने न्यूज चैनलों के एक्जिट पोल पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि अधिकांश चैनल के एंकर ‘एक्जिट पोल’ को लेकर ऐसे उछल रहे थे, जैसे किसी बच्चे को टॉफी की दुकान से टॉफियां हाथ लग गयी हों। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, अधिकांश न्यूज एंकर ‘एक्जिट पोल’ को लेकर ऐसे उछल रहे हैं, जैसे किसी बच्चे को टॉफी की दुकान से टॉफियां हाथ लग गयी हों। तेरे आने से यूं खुश है दिल जैसे की बुलबुल बहार की खातिर।

उल्लेखनीय है कि विभिन्न समाचार चैनलों ने रविवार को अपने ‘एक्जिट पोल’ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय गठबंधन सरकार (राजग) को लोकसभा की 542 सीटों में से तीन सौ सीटें मिलने की अनुमान जताया था। इस बीच, अधिकांश एग्जिट पोल ने दशार्या गया कि जम्मू में भाजपा दो सीटें जीतेगी, कांग्रेस लद्दाख में एक सीट पाएगी, जबकि नेशनल कांफ्रेंस कश्मीर घाटी की सभी तीन सीटों पर कब्जा कर लेगी। एग्जिट पोल के मुताबिक महबूबा के नेतृत्व वाली पीडीपी को कश्मीर की तीनों सीटों से हार का मुंह देखना पड़ सकता है।

11-05-2019
सैम पित्रोदा की टिप्पणी कांग्रेस के लिए ‘सेल्फ गोल’ जैसी : महबूबा

श्रीनगर। वर्ष 1984 के सिख दंगों को लेकर कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा की ‘हुआ तो हुआ’ टिप्पणी को आम चुनाव के माहौल में पार्टी के लिए ‘सेल्फ गोल’ करने जैसा निरुपित करते हुए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष एवं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि एक बुद्धिमान दुश्मन किसी मूर्ख मित्र से बेहतर होता है। पित्रोदा को बयान को अस्वीकार्य करार देते हुए सुश्री मुफ्ती ने ट्विटर पर कहा, ‘ऐसे समय में जब लोग सोच रहे हैं कि इन चुनावों में कांग्रेस ने शिष्टाचार बनाए रखा है, ये ‘हुआ तो हुआ’ हो गया। सैम पित्रोदा के योगदान के लिए भले ही उनकी सराहना की जाए, लेकिन 1984 के भीषण दंगों को लेकर उनका यह बयान अस्वीकार्य है। एक बुद्धिमान शत्रु मूर्ख मित्र से बेहतर है।

01-05-2019
मुद्दाविहीन भाजपा 370 और 35ए पर कर रही बयानबाजी : महबूबा मुफ्ती

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कहा है कि भाजपा के पास अनुच्छेद 370 और 35ए के अलावा कोई और मुद्दा नहीं रहा। वह हर कदम पर नाकाम रही है। चाहे बेरोजगारी की बात हो या महंगाई का मसला, या फिर किसानों की परेशानियों का हल निकालना रहा हो। इसलिए अब वे रियासत के विशेष दर्जे को लेकर राजनीति कर रहे हैं। वे बुधवार को श्रीनगर में भाजपा की तरफ  से दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया दे रही थीं, जिसमें कहा गया था कि अगर वह दोबारा हुकूमत बनाएंगे तो 370 और 35ए को खत्म कर देंगे। उन्होंने कहा कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के दौर में जम्मू कश्मीर का जो हिंदुस्तान के साथ विलय हुआ उसमें 370 और हमारा विशेष दर्जा उसकी एक बुनियाद है। अगर उसके साथ छेड़छाड़ होती है तो इसका मतलब यह है कि जो जम्मू कश्मीर का रिश्ता मुल्क के साथ है वह खतरे में पड़ जाएगा। दक्षिणी कश्मीर के दो चरणों में हुए कम मतदान को लेकर महबूबा मुफ्ती  ने कहा कि हालात कुछ ऐसे हैं जिसके कारण वहां कम मतदान हुआ। दक्षिणी कश्मीर के लोगों ने मुसीबतें भी काफी झेली हैं, वहां मौतें भी काफी हुई हैं। उसका भी एक असर चुनाव पर देखने को मिला। 

 

 

24-04-2019
एक महीने तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए यासीन मलिक, महबूबा मुफ्ती ने मांगी रिहाई 

दिल्ली। आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में गिरफ्तार अलगाववादी नेता यासीन मलिक को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने 24 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इधर जम्मू कश्मीर की पू्र्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने यासीन मलिक को न्यायिक हिरासत में भेजने के फैसले का विरोध किया है।

महबूबा मुफ्ती ने यासीन मलिक के गिरते स्वास्थ्य के मद्देनजर उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा करने की अपील की है। इसके अलावा महबूबा ने जमात-ए-इस्लामी के अन्य सदस्यों को भी रिहा करने की मांग की। बता दें कि अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद मुहैया कराने संबंधी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी  द्वारा गिरफ्तार किए गए मलिक ने 19 अप्रैल को सीने में दर्द की शिकायत की थी। उन्हें मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया और नियमित जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी। उसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं। 

22-04-2019
तो पाकिस्तान ने भी ईद के लिए नहीं रखे हैं परमाणु बम : महबूबा मुफ्ती 

श्रीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों की कड़ी आलोचना करते हुए और पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने  कहा है कि  पाकिस्तान ने भी अपने परमाणु बम ईद के लिए बचाकर नहीं रखे हैं। बता दें कि पीएम मोदी ने पाकिस्तान को चेताते हुए कहा था कि हमने दिवाली मनाने के लिए परमाणु बम नहीं रखा है। इस दौरान महबूबा ने पीएम मोदी के चुनावी भाषणों के स्तर को लेकर भी नाराजगी जताई। ज्ञात हो कि राजस्थान के बाड़मेर में चुनावी जनसभा में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि हमने परमाणु बम को दिवाली के लिए नहीं रखा हुआ है। भारत ने पाकिस्तान की धमकी से डरने की नीति को छोड़ दिया है। उन्होंने कहा था कि हमने घर में घुसकर आतंकवादियों को मारा। चोट वहां लगी और दर्द यहां हुआ।  दरअसल राजस्थान में अपने भाषण में कांग्रेस पर हमला बोलते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि 1971 की लड़ाई में जम्मू कश्मीर की समस्या को हल करने का बेहतर मौका कांग्रेस ने गंवा दिया था। इस दौरान अपनी सरकार की तारीफ  करते हुए पीएम ने कहा था,  आज का भारत बिना युद्ध के पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर आतंकियों को ढेर कर रहा है। हमने आतंकियों के मन में डर पैदा किया। 

 

 

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