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28-06-2020
गलवान हिंसा: चीन ने एलएसी पर भेंजे थे मार्शल आर्ट में माहिर हत्यारें

नई दिल्ली। लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर है। इस बीच खुलासा हुआ है कि इस झड़प से कुछ दिन पहले ही चीन ने अपनी माउंटेन डिविजन और मार्शल आर्ट में माहिर हत्यारों को सीमा के नजदीक तैनात किया था। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, पीएलए के इस डिवीजन में तिब्बत के स्थानीय मार्शल आर्ट क्लब से भर्ती किए गए लड़ाकों के अलावा चीनी सेना के नियमित सैनिक भी शामिल थे।आधिकारिक सैन्य समाचार पत्र चाइना नेशनल डिफेंस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 15 जून के पहले ही तिब्बत की राजधानी ल्हासा में चीनी सेना ने पांच नए मिलिशिया डिवीजन को तैनात किया था। इस डिवीजन में चीन के माउंट एवरेस्ट ओलंपिक टॉर्च रिले टीम के पूर्व सदस्यों के अलावा मार्शल आर्ट क्लब के लड़ाके शामिल हैं।

माना जाता है कि इन्हीं के करतूतों के कारण सीमा पर हिंसक वारदातें देखने को मिलीं।सेना में माउंट एवरेस्ट ओलंपिक टॉर्च रिले टीम के सदस्य जहां पहाड़ों पर चढ़ाई करने में माहिर हैं, वहीं मार्शल आर्ट क्लब के लड़ाके घातक हत्यारे होते हैं। चीनी सेना ने लद्दाख में अपनी नीतियों को बदलते हुए बड़ी संख्या में मार्शल आर्ट में माहिर लड़ाकों को भर्ती किया है। चीन जानता है कि सीमा पर वह युद्ध के जरिए भारत से नहीं जीत सकता, इसलिए उसने इन लड़ाकों के जरिए भारत से भिड़ने की कोशिश की है।ये लड़ाके मार्शल आर्ट लाठी-भाले, डंडा और रॉड के जरिए युद्ध करने में माहिर होते हैं। ऐसे ही सैनिकों के भरोसे चीन अब भारत से युद्ध करने की तैयारी कर रहा है। पीपुल्स डेली की रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत के पठार इलाके में रहने वाले ये लड़ाके चीनी सेना को नुकीली चीज या लाठी, डंडों से लड़ने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। छद्म युद्ध में माहिर चीन अब इन भाड़े के लड़ाकों के जरिए सीमा विवाद को बढ़ाने के फिराक में है।

15-05-2019
मोदी राज में चीन से और पीछे हो गया भारत-चीनी मीडिया का दावा

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी के पांच साल के कार्यकाल में भारत कई मामलों में चीन से पीछे हो गया है। चीन की सरकारी मीडिया में यह दावा किया जा रहा है। भारत में लोकसभा के चुनाव हो रहे हैं, ऐसे में चीनी मीडिया में इस तरह की रिपोर्ट आना दिलचस्प है।
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'पश्चिमी मीडिया में इस तरह की बातें हो रही हैं। यह सच भी है कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर चीन और भारत के बीच खाई काफी बढ़ी है। साल 2018 में चीनी अर्थव्यवस्था का आकार 13.6 लाख करोड़ डॉलर का था, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2.8 लाख करोड़ डॉलर का था।'

अखबार ने कहा है, 'भारत यदि इस खाई को पाटना चाहता है तो उसकी सालाना आर्थिक वृद्धि दर चीन से कई गुना होनी चाहिए। लेकिन चीन की तेज बढ़त दर को देखते हुए ऐसा लगता नहीं कि भारत यह हासिल कर पाएगा।' गौरतलब है कि साल 2014 में चीनी अर्थव्यवस्था का आकार 10.38 लाख करोड़ डॉलर का था, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2.04 लाख करोड़ डॉलर का था. यानी 2014 में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के आकार में करीब 8.34 लाख करोड़ का अंतर था जो 2018 में बढ़कर 10.8 लाख करोड़ डॉलर का हो गया।

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