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18-11-2020
ईओडब्ल्यू और एसीबी के अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज,छापेमारी में घिरी दोनों एजेंसियां

रायपुर। बिलासपुर जिले के सिविल लाइंस थाना में ईओडब्ल्यू और एसीबी के अज्ञात लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। मामाला 5 वर्ष पूर्व बिलासपुर में पदस्थ जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता आलोक अग्रवाल और उनके भाई पवन अग्रवाल के ठिकानों पर छापामार कार्रवाई से जुड़ा है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने दोनों एजेंसियों के अज्ञात लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। अब जल संसाधन विभाग के ईई के ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले में पवन अग्रवाल ने बिलासपुर की अदालत में एक परिवाद दायर किया था। उन्होंने दोनों एजेंसियों के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दोनों जांच एजेंसियां उनकी कमाई हुई निजी संपत्ति, नगद, जेवरात और जायदाद को जब्त किए थे।

फर्जी दस्तावेज तैयार कर षड्यंत्रपूर्वक उनकी संपत्ति जब्त की गई थी। जबकि उनके भाई की संपत्ति से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है।  पवन अग्रवाल के अनुरोध पर अदालत से मिले आदेश के बाद सप्ताह भर पूर्व बिलासपुर के सिविल लाइंस थाने में ईओडब्ल्यू और एसीबी के अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। मामले में आगे की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। मामला 30 दिसंबर 2014 का था, जब अग्रवाल बंधुओं के घर पर छापा मारा गया था। इस छापे में करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त करने का दावा किया गया था।

 

17-11-2020
नहरों के जीर्णोद्धार से किसान हुए लाभान्वित, अंतिम छोर के गांव तक पहुंचा सिंचाई का पानी

कांकेर। जिले में नहरों के जीर्णोद्धार से सिंचाई रकबा में वृद्धि हुई है, जिससे क्षेत्र के किसान लाभान्वित हुए हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा चारामा विकासखण्ड के अंतर्गत सेन्दारनाला व्यपवर्तन का जीर्णोद्धार एवं नहर लाइनिंग कार्य किया गया है, जिससे अंतिम छोर के गांव तक सिंचाई पानी पहुंचने से किसानों में खुशी है।बता देें कि चारामा विकासखण्ड के अंतर्गत सेन्दारनाला व्यपवर्तन का निर्माण लगभग 30 वर्ष पहले कराया गया था। इसके अंतर्गत एक मुख्य नहर जिसकी लंबाई 23 किलोमीटर तथा 5 माइनर नहरों का निर्माण किया गया है। इस व्यपवर्तन के पूर्ण होने के बाद शुरू में किसानों को इसका लाभ मिल रहा था, लेकिन कालांतर में अनुरक्षण के अभाव में नहरों की सिंचाई क्षमता में गिरावट आती गई, जिसके कारण रूपांकित क्षमता के अनुरूप सिंचाई नहीं हो पा रही थी।

उक्त व्यपवर्तन से अंतिम छोर के किसानों को भी लाभान्वित करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस योजना की जीर्णोंद्धार एवं नहर लाइनिंग कार्य के लिए 809 लाख रूपये की स्वीकृति की गई। इसे निविदा के माध्यम से 741.79 लाख रूपये व्यय कर इस व्यपवर्तन को जुलाई 2020 में पूर्ण किया गया है। सेन्दारनाला व्यपवर्तन का रूपांकित सिंचाई क्षमता 1215 हेक्टेयर है, लेकिन पूर्व में इससे मात्र 203 हेक्टेयर क्षेत्र में ही खरीफ फसल की सिंचाई हो पा रही थी। नहरों का जीर्णोंद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के बाद इस वर्ष 680 हेक्टेयर में खरीफ सिंचाई की गई है, जो पिछले वर्षों के तुलना में 477 हेक्टेयर अधिक है।

 

19-10-2020
सिंचाई परियोजना के निर्माण व जीर्णोद्धार के लिए भूपेश सरकार ने मंज़ूर किए 24 करोड़ 34 लाख रुपए

रायपुर। सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण कार्य के लिए भूपेश सरकार लगातर प्रयास कर रही है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य के लिए 24 करोड़ 34 लाख 17 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की है। इन परियोजनाओं के निर्माण एवं जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण होने के उपरांत 2221 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। जल संसाधन विभाग मंत्रालय, महानदी भवन से जारी आदेशानुसार दुर्ग जिले के विकासखण्ड पाटन की औरी जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहर प्रणाली का रिमाडलिंग तथा लाइनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 21 लाख 21 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गयी है। कार्य के पूर्णता से 155 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। विकासखण्ड दुर्ग की भेण्डसर नाला जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए एक करोड़ 87 लाख 41 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। कार्य के पूरा होने से 260 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। विकासखण्ड दुर्ग की रिसामा एल.पी. जलाशय जीर्णोद्धार व लाईनिंग कार्य के लिए एक करोड़ एक लाख 16 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 55 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। दुर्ग के भेण्डरवानी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 55 लाख 86 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 324 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।

विकासखण्ड पाटन की झाड़मोखली जलाशय का वेस्ट वियर एवं शूटफाल का जीर्णोद्धार व नहर का रिमाडलिंग तथा लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ सैतीस लाख 43 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना के पूरा होने से 124 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की कसही स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ दो लाख 69 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना के पूरा होने से 20 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की सिपकोना डिस्ट्रीब्यूटरी के किकिरमेटा माईनर नहर का लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 41 लाख 74 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूर्णता पर 585 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की गुजरा नाला पर ग्राम मटिया के पास स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 20 लाख पांच हजार रुपए स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 15 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की मोखली स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए 92 लाख 95 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 15 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की गुजरा नाला पर खोरपा-खम्हरिया स्टापडेम सह रपटा निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 49 लाख 84 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की मटिया व्यपवर्तन योजना के शीर्ष कार्य का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए एक करोड़ आठ लाख 78 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 222 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की अमेरी जलाशय योजना के शीर्ष कार्य का जीर्णोद्धार एवं नहर प्रणाली का रिमॉडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए एक करोड़ 79 लाख 81 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना के पूरा होने से 16 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। पाटन की मटंग जलाशय शीर्ष कार्य एवं नहरों का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए एक करोड़ 22 लाख एक हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना के पूरा होने से 184 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। विकासखण्ड दुर्ग की करंजा भिलाई जलाशय सुधार कार्य एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए एक करोड़ 77 लाख 93 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना के पूरा होने से 194 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। कबीरधाम जिले के विकासखण्ड सहसपुर लोहारा के सुतियाघाट जलाशय की दांयी तट नहर कार्य के लिए एक करोड़ 35 लाख 30 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है।

23-09-2020
Video: दो दिन पहले ग्रामीणों ने दी थी बांध से पानी लीक होने की सूचना, खाडा बांध टूटने से दस एकड़ फसल बर्बाद

कोरिया। बैकुंठपुर स्थित खाडा बांध बुधवार सुबह लगभग 6 बजे टूट गई। संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव ने जिला प्रशासन से किसानों की बर्बाद हुई, 10 एकड़ फसल का तत्काल मुआवजा प्रकरण तैयार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की हर संभव मदद की जाएगी। जिला पंचायत उपाध्यक्ष वैजयंती तिवारी भी मौजूद रही। उन्होंने लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई और जल संसाधन विभाग के मंत्री से बात की। दो दिन पहले ग्रामीणों ने बांध के लीक होने की जानकारी विभाग को दी थी।

28-07-2020
किसानों के लिए राहत की खबर, गंगरेल से छोड़ा गया 500 क्यूसेक पानी, इस साल जल भराव की स्थिति है बेहतर

रायपुर। खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए किसानों की मांग और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सिंचाई जलाशयों से जलापूर्ति किए जाने के छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले पर जल संसाधन विभाग ने अमल शुरू कर दिया है। गंगरेल बांध सहित कई सिंचाई जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ दिया गया है। गंगरेल से आज 500 क्यूसेक पानी सिंचाई के लिए छोड़ा गया। बस्तर, राजनांदगांव, कबीरधाम, दुर्ग, महासमुंद, बलौदाबाजार, धमतरी, गरियाबंद आदि जिलों में सिंचाई जलाशयों से खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए जलापूर्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 27 जुलाई को उच्च स्तरीय बैठक में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए जलाशयों से जलापूर्ति किए जाने के फैसले से किसानों को बड़ी राहत मिली है। सिंचाई जलाशयों से जलापूर्ति होने से राज्य के उन इलाकों में जहां लगभग एक पखवाड़े से कम वर्षा हुई है, उन इलाकों में खरीफ फसलों की सिंचाई हो सकेगी। राज्य के बड़े एवं मध्यम सिंचाई जलाशयों में इस साल जल भराव की स्थिति बीते साल की तुलना में लगभग दोगुना है। मनियारी और खारंग जलाशय वर्तमान स्थिति में लबालब है, जबकि मिनी माता बांगो, दुधावा, सोंढूर जलाशय में जल भराव की स्थिति 80 फीसद से अधिक है। गंगरेल जलाशय की सिंचाई क्षमता 2 लाख 64 हजार 311 हेक्टेयर है। इस जलाशय से धमतरी, बालोद, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में सिंचाई होती है।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार आरके नगरिया ने कहा कि गंगरेल बांध से पानी छोड़ने की मात्रा किसानों की मांग और आवश्यकता को देखते हुए बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बस्तर स्थित कोसारटेडा जलाशय से सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। इस जलाशय से बस्तर जिले में 7360 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। मुख्य अभियंता डीसी जैन ने बताया कि कबीरधाम जिले में छीरपानी जलाशय, सरोदादादर जलाशय और सुतियापाठ जलाशय से सिंचाई के लिए जलापूर्ति की जा रही है। राजनांदगांव जिले में पिपरिया जलाशय और सुरही जलाशय सहित मोंगरा बैराज से सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। बलौदाबाजार के जोंक व्यपवर्तन, धमतरी एवं गरियाबंद जिले में पैरी परियोजना से जलापूर्ति की जा रही है। महासमुंद जिले में कोडार जलाशय, दुर्ग जिले में खपरी जलाशय और बालोद जिला स्थित गोंदली जलाशय से किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। वर्तमान में मुंगेली जिले का मनियारी जलाशय और बिलासपुर जिले का खारंग जलाशय लबालब है, जबकि कोरबा जिला स्थित मिनीमाता बांगो सिंचाई परियोजना में 86.49, कांकेर स्थित दुधावा जलाशय में 80.74, गरियाबंद जिले के सिकासेर जलाशय में 63.33, धमतरी जिले के सोंढूर जलाशय में 86.90 प्रतिशत एवं माडमसिल्ली जलाशय में 62.36 प्रतिशत, कोडार में 61.56 प्रतिशत  जल भराव है। वर्तमान में उक्त बड़े जलाशयों में 76.17 प्रतिशत जल भराव है, जबकि बीते वर्ष इसी अवधि तक इन जलाशयों में मात्र 40.39 प्रतिशत जल भराव था। इसी तरह राज्य के 33 मध्यम सिंचाई जलाशयों में आज की स्थिति में 58.54 प्रतिशत जल भराव है,जो बीते वर्ष इसी अवधि में 26.60 प्रतिशत जल भराव से लगभग 32 प्रतिशत अधिक है।

 

21-07-2020
महासमुंद जिले के दो और राजनांदगांव जिले की एक सिंचाई जलाशय के जीर्णोद्धार कार्य के लिए 7.51 करोड़ की स्वीकृत

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग की ओर से महासमुंद जिले के दो और राजनांदगांव जिले की एक सिंचाई जलाशय के जीर्णोद्धार कार्य के लिए 7 करोड़ 51 लाख 69 हजार रूपए की स्वीकृत की गई है। इन सिंचाई जलाशयों के पूरा होने से 1090.63 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार महासमुंद जिले के विकासखंड महासमुंद की कोडार जलाशय परियोजना की बम्हनी वितरक नहर लाईनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 54 लाख 80 हजार और पसीदा जलाशय के नहर लाइनिंग, पक्के कार्यों का सुधार एवं जीर्णोंद्धार कार्य के लिए 2 करोड़ 11 लाख 27 हजार रूपए तथा राजनांदगांव जिले के विकासखंड डोंगरगढ़ की पेटेश्री नदी पर झिटिया एनीकट योजना के निर्माण के लिए 2 करोड़ 85 लाख 62 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

 

08-07-2020
सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए सभी जरूरी संसाधन मुहैया करा रही है भूपेश सरकार

रायपुर। भूपेश सरकार की ओर से सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए अद्योसंरचना निर्माण के साथ ही सभी जरूरी संसाधन मुहैया कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जल संसाधन विभाग द्वारा कांकेर जिले में सिंचाई क्षेत्र का रकबा बढ़ाने के लिए 5 करोड़ 86 लाख 48 रूपए के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। सिंचाई विस्तार के कार्य पूर्ण होने से किसानों को लगभग 162 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कांकेर जिले के विकासखण्ड दुर्गकोंदल की दमकसा एनीकट कम काजवे निर्माण कार्य के लिए 2 करोड़ 94 लाख 42 हजार और रैगाटोला मदले एवं मुगुंरपारा मदले के बीच की नदी में स्टापडेम एवं पुलिया निर्माण कार्य के लिए 2 करोड़ 92 लाख 6 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

02-07-2020
रविशंकर सागर परियोजना के विभिन्न कार्यों के लिए 49.42 करोड़ स्वीकृत

रायपुर। राज्य शासन ने धमतरी जिले के रविशंकर सागर परियोजना (गंगरेल) के विभिन्न कार्यों के लिए 49 करोड़ 42 लाख 32 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। इन कार्यों में गंगरेल के ग्लैसिक भाग टीथ और बकेट फ्लोर में एप्रोक्सी ट्रीटमेंट के लिए 7 करोड़ 57 लाख 70 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। इसी तरह परियोजना के स्पील चैनल में पायलट चैनल के खुदाई कार्य के लिए 37 करोड़ 44 लाख 15 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं।परियोजना के डाऊन स्ट्रीम भाग पर टरफिंग कार्य और बांध के नीचे फेन्सीग कार्य के लिए 2 करोड़ 12 हजार रुपए और बांध के गैलरी में हो रहे सीपेज को नियंत्रित करने और सफाई के लिए 2 करोड़ 40 लाख 35 हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से रविशंकर सागर परियोजना के इन कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता महानदी परियोजना जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। परियोजना के कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूरी गुणवत्ता के साथ कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

27-06-2020
जल संसाधन विभाग सिंचाई योजना का उपयोग कर रही दुधारू गाय की तरह : बसंत ताटी

बीजापुर। जिला पंचायत सदस्य एवं कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बसंत राव ताटी ने जल संसाधन विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि विगत 15 वर्षों से पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद भी एक बूंद पानी किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच सका। ताटी ने कहा की नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के शासनकाल में क्षेत्र के किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से भोपालपटनम तहसील के अंतर्गत ग्राम अर्जुनल्ली में उदवहन सिंचाई योजना की स्वीकृति दिए जाने के उपरांत बीजापुर विधानसभा के तत्कालीन विधायक स्व. राजेंद्र पामभोई के द्वारा इस योजना की नींव रखते ही क्षेत्र के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर देखी गई थी। अब 15 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी उक्त सिंचाई योजना का लाभ न मिल पाने की चिंता किसानों को सताने लगी है। जिला पंचायत सदस्य ताटी ने कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर ग्राम अर्जुनल्ली में उदवहन सिंचाई योजना की शुरुआत की गई थी अब वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।

ताटी का कहना है कि जल संसाधन विभाग इस योजना का उपयोग दुधारू गाय की तरह कर रही है संबंधित विभाग द्वारा प्रारंभ से लेकर आज पर्यंत तक इस योजना में करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद भी किसानों के खेतों को एक बूंद तक पानी नसीब नहीं हुआ है यह भी जांच का विषय है। जिला पंचायत सदस्य ने एक जानकारी के तहत कहा कि बीजापुर जिला में पर्याप्त सिंचाई स्रोतों की कमी के चलते यहां के किसान मात्र बरसात के पानी पर निर्भर होने की वजह से अपने खेतों में एक फसल की पैदावार ही करते है। जिससे क्षेत्र के कृषि मजदूरों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाता वहीं पड़ोसी राज्य तेलंगाना में पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के चलते किसान हमेशा अपने खेतों में विभिन्न प्रकार के फसलों की पैदावार करते हैं। जिस कारण तेलंगाना राज्य में कृषि कार्य के लिए मजदूरों की कमी बनी रहती है। यही वजह है कि बीजापुर जिला से सैकड़ों श्रमिक प्रतिवर्ष काम की तलाश में पड़ोसी राज्य तेलंगाना की ओर रुख करते हैं।

ताटी ने आगे कहा की विगत दिनों क्षेत्र प्रवास पर पहुंचे बीजापुर विधानसभा के ऊर्जावान विधायक विक्रम शाह मंडावी ने भी ग्राम अर्जुनल्ली पहुंच कर इस उदवहन सिंचाई योजना से संबंधित निर्माण कार्य को करीबी से देखते हुए किसानों के मंशानुरूप इस योजना को जल्द से जल्द पूरा कराने का आश्वासन दिया। इसके पश्चात पिछले दिनों भोपालपटनम प्रवास पर पहुंचे बीजापुर जिला के नव पदस्थ युवा कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने भी ग्राम अर्जुनल्ली पहुंच कर इस उदवहन सिंचाई योजना को अतिशीघ्र पूरा करने के दिशा निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिया है। ताटी ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक एवं जिला कलेक्टर के निरीक्षण के पश्चात अब क्षेत्रीय किसानों ने यह उम्मीद जताया है की क्षेत्रीय विधायक एवं जिला कलेक्टर की पहल पर अब उक्त उदवहन सिंचाई योजना का लाभ किसानों को मिलेगा।

25-06-2020
हसदेव नदी का पानी मिनीमाता बांगो बांध में किया जाएगा प्रवाहित

कोरबा। वर्षाकाल 2020 के दौरान आवश्यकता होने पर मिनीमाता बांगो बांध माचाडोली से हसदेव नदी में पानी प्रवाहित किया जायेगा। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध संभाग क्रमांक-3 माचाडोली ने बताया है कि वर्तमान में मिनीमाता बांगो बांध में लगभग 80 प्रतिशत जल भराव है। इसके कारण मिनीमाता बांगो बांध के जलद्वार खोलकर हसदेव नदी में जल प्रवाह किये जाने की अधिक संभावना है। इसलिए सर्व साधारण एवं कार्य संबंधितों को सूचित किया गया है कि उक्त बांध से नीचे, हसदेव नदी के किनारे, बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल सम्पत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जायें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान ठेकेदार, औद्योगिक इकाईयां, संस्थानों आदि को भी सूचित किया गया है कि वे अपनी परिसम्पत्तियों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर कर लेवें। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध ने कहा है कि अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग उत्तरदायी नहीं होगा।

बाढ़ क्षेत्र में आने वाले संभावित ग्रामों के नाम- बांगो, लेपरा, टुुनिया, कछार, कोनकोना, पोड़ीउपरोड़ा, चर्रा, गाड़ाघाट, छिनमेर, सिरकीकला, कोड़ा, कछार, पाथा, सिलीयारीपारा, तिलसाभाटा, हथमार, छिर्रापारा, डुग्गुपारा, कल्मीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, टुंगुमांड़ा, नवागांव, झोरा, कोरियाघाट, डोंगाघाट, पोंड़ीखोहा, धनगांव, लोतलोता, नर्मदा, औराकछार, झाबू, सोनगुड़ा, नवागांव, स्याहीमुड़ी, आदि हैं।

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