GLIBS
16-09-2020
सूर्य करेंगे राशि परिवर्तन, कन्या राशि में प्रवेश कहलाती है कन्या संक्रांति, जानिए क्या फल देंगे सूर्यदेव

रायपुर। कन्या राशि में सूर्यदेव का प्रवेश कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार 12 राशियां हैं और जब भी सूर्यदेव एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं तो उस राशि की संक्रांति आरंभ हो जाती है। संक्रांति का पुण्यकाल बेहद विशेष माना जाता है। सूर्य का प्रत्येक माह राशि में परिवर्तन करना संक्रांति कहलाता है और इस संक्रांति को स्नान, दान और पितरों के तर्पण आदि के लिए शुभ माना जाता है। आज सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिष में सूर्य की इस घटना को कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

कन्या संक्रांति भी अपने आप में विशेष है। कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की उपासना की जाती है। भगवान विश्वकर्मा की उपासना से कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। कार्यक्षेत्र और व्यापार में आने वाली परेशानियां दूर हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति को सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त हो जाए तो उसे समाज में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और सरकारी नौकरी आदि प्राप्त होती है।

31-10-2019
नहाए-खाय के साथ शुरू हुआ छठ पूजा का महापर्व

नई दिल्ली। बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश में धूम धाम से मनाए जाने वाले छठ महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई है। पर्व की लोकप्रियता देश की राजधानी दिल्ली में भी हर साल की तरह इस साल भी देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां छठ पूजा के लिए यमुना घाटों को तैयार किया जा रहा है वहीं, पूजन सामग्री के लिए बाजार भी सज गए हैं। व्रतियों ने भी इस पर्व की तैयारी शुरू कर दी है। बृहस्पतिवार को यह व्रत नहाए-खाय के साथ शुरू होगा। घरों में व्रती इसकी तैयारी में जुटे हुए है। इस पर्व का मुख्य प्रसाद ठेकुआ, खजूर होता है जो आटे का बनता है। इसके लिए भी व्रतियों ने तैयारी शुरू कर दी है। पूजन सामग्री के भंडारण के लिए नए बर्तन भी खरीदे जा रहे हैं। साड़ियों की दुकानों पर भी रौनक है, व्रती नई साड़ी पहनकर ही अस्तांचल सूर्य व उदय होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

पूजन सामग्री की बात करें तो पूर्वी दिल्ली इलाके में खासतौर से प्रसाद के लिए बाजार सजे हुए हैं। पूजन सामग्री के लिए दिल्ली के पालम इलाके, पूर्वी दिल्ली, द्वारका, बुराड़ी, गोपालपुर, जहांगीर पुरी समेत कई जगहों पर खरीदारी की जा रही है। कोशी, पीतल का सूप, बांस का सूप, दउरा, केला, संतरा, अनार, सेब, पानी फल, गागल, पानी वाला नारियल, गन्ना, कच्ची हल्दी, मूली, अदरक, सूथनी आदि की दुकानें भी जगह-जगह लगी हुई हैं।

सजाए जा रहे हैं घाट

दिल्ली में यमुना के किनारे बड़ी संख्या में छठ व्रती शाम का अर्घ्य देने घाट पर पहुंचते हैं। इसे लेकर खास तैयारी चल रही है। छठ पूजा के लिए घाट पर लकड़ी की बाड़ लगाने के साथ ही जिस घाट पर सीमेंट की सीढ़ियां नहीं हैं वहां मिट्टी को ही काटकर सीढ़ियां बनाई जा रही हैं, ताकि यमुना के तट पर व्रत रखने वाली महिलाओं की पूजा करते समय किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। प्रशासन की तरफ से भी सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। घाटों पर नजर रखने के लए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।
 
सूर्य देव की उपासना का पर्व

छठ पूजा सूर्य देव की उपासना का पर्व है। चार दिनों तक यह पर्व चलता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की खष्ठी को छठ पूजा अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देकर की जाती है। इस बार छठ महापर्व 31 अक्टूबर को नहाय-खाय से शुरू हो रहा है। पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, भगवान सूर्य को समर्पित इस पूजा में सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसे दुनिया के कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। व्रती दो दिनों तक निर्जला रहते हैं। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को यह व्रत आरंभ हो रहा है। दूसरे दिन खरना होगा। पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती प्रसाद ग्रहण करेंगे। इस दिन छठ पूजा का प्रसाद व्रती अपने हाथों से बनाएंगे। मुख्य प्रसाद ठेकुआ, टिकरी बनाया जाएगा। खष्ठी को व्रती अस्तांचल सूर्य को तालाब, नदी के घाट के किनारे अर्घ्य देंगे। सप्तमी को प्रात: सूर्योदय के समय अर्घ्य देंगे व विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित किया जाएगा।

चार दिन की पूजा

-31 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ पूजा शुरू होगी।
-1 नवंबर को खरना होगा।
-2 नवंबर को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
-3 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

04-05-2019
चौबेबांधा में पानी के लिए लोग हलाकान, तालाब व नदी सूखी

राजिम। मई के शुरूआत में ही सूर्य देव अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिए हैं। इससे हर कोई बेहाल और परेशान नजर आ रहा है। नगर से लगे गांव चौबेबांधा में पानी के लिए लोग हलाकान हो रहे हैं। यहां निस्तारी लिए 2 तालाब है जिनमें से एक शीतला तालाब को गहरीकरण के लिए डेढ़ माह पहले ही खाली कर दिया गया है। जिससे तालाब पूरी तरह सूख गया है। वहीं गहरीकरण का काम जारी है। दूसरी तलाब में बहुत कम पानी बचा हुआ है जिस पर पूरे गांव के लोग निर्भर है। निस्तारी के लिए लोगों को बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि गांव के पश्चिम दिशा में पैरी एवं सोढूर नदी है लेकिन यह पूरी तरह से सूख चुकी है नदी में पानी ही नहीं है। जब तालाब से पानी खाली किया गया तो लोगों को उम्मीद थी कि नदी के पानी के भरोसे वे गर्मी के दिनों को काट लेंगे। लेकिन राजिम पुन्नी मेला के बाद से पानी कम हो गया और शीघ्र ही नदी बिन पानी के हो गई।

ज्ञातव्य हो कि नदी में पानी रहे इस लिहाज से शासन ने करोड़ों रुपया खर्चा करके नवागांव एनीकेट का निर्माण किया है और कुछ दिनों के लिए ठेकेदार को काम मिला। निर्माण करने वाले अधिकारियों ने तो अपना काम ईमानदारी से किया लेकिन इसमें पानी भरने वाले अधिकारियों ने अपनी दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजतन यह एनीकेट बिना पानी का हो गया है। लोगों ने लंबे समय से मांग किया कि यदि एनीकट में पानी भरा रहेगा तो इससे 3 दर्जन गांवों को लाभ मिलेगा और हजारों की आबादी को निस्तारी में कोई दिक्कत नहीं आएगी। परन्तु उनकी सोच जहां की तहां रह गई। शासन ने तो करोड़ों रुपये खर्च करके एनीकेट बना दिया लेकिन रखरखाव व पानी की व्यवस्था करने में चुक गई है और अब गांव वालों को एक-एक बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। गाय पानी पीने के लिए तरस रहे हैं नदी किनारे गाय को इकट्ठा करके रखा जाता है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी से लगातार रेत उठाव होने के चलते नदी जल्दी सूख जाती है आज से कुछ साल पहले नदी में 12 महीना पानी की धार चलती थी किन्तु अब स्थिति विपरीत हो गई है। वाटर लेवल बहुत नीचे जा चुका है यहां तक कि अब बोर मशीनों से पानी नहीं निकल रहे हैं। गर्मी भी तेज पड़ रही है और ऐसे में शीतलता प्रदान करने का एक ही साधन पानी होता है। ग्रामीण बिशे लाल साहू, जीता राम चेलक, देवलाल, द्वारका पाल, अलेन जांगड़े, विष्णु जांगड़े, भीखम सोनकर, राजेंद्र सोनकर, थनवार पटेल, संतोष सोनकर ने सिकासेर जलाशय से शीघ्र नदी के लिए पानी छोड़ने तथा पानी को एनीकेट में स्टॉक रखने की मांग क्षेत्रीय विधायक अमितेश शुक्ला एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों से की है। पंचायत सचिव जागेश्वर से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि तेज गर्मी को देखते हुए नल की सुबह टाइमिंग को कल से बढ़ा दिया जाएगा। ताकि लोगों को निस्तारी के लिए भरपूर पानी मिल सके।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804