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20-11-2020
छत्तीसगढ़ के दो मत्स्य कृषकों को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार, नई दिल्ली में होगा सम्मान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दो मत्स्य कृषकों को मछली पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत और सम्मानित किया जाएगा। 21 नवंबर को विश्व मात्स्यिकी दिवस पर भारत शासन की ओर से एपी सिम्पोजियम हॉल, पूसा कैंपस नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के मेसर्स एमएम फिश सीड़ कल्टीवेशन प्राइवेट लिमिटेड माना जिला रायपुर का बेस्ट फिशरीज इन्टरप्राइजे़स के लिए सम्मान किया जाएगा। दो लाख रुपए का नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इसी तरह मेसर्स एमआईके कम्पनी, सिहावा जिला धमतरी का बेस्ट प्रोप्राईटरी फर्म संवर्ग के लिए सम्मान किया जाएगा। एक लाख रुपए का नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करने वाले मत्स्य कृषकों और संस्थाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी है। 

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में प्रदेश के मत्स्य कृषक नवीनतम तकनीक को अपनाते हुए सफलता अर्जित कर रहे हैं। मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश आत्मनिर्भर हैं। विगत दो वर्षो में प्रदेश में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मत्स्य बीज उत्पादन 251 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई से 267 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई का उत्पादन में किया हैं। देश में राज्य का मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में छठवां स्थान हैं। राज्य के मत्स्य कृषक प्रदेश में आवश्यक मत्स्य बीज प्रदाय करने के अतिरिक्त मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आध्रप्रदेश और बिहार प्रदेशों को भी निजी क्षेत्र की ओर से मत्स्य बीज की आपूर्ति कर रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।

09-11-2020
बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर बनाने की बात कही मंत्री रविन्द्र चौबे ने राज्य बीज निगम की बैठक में

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के संचालक मंडल की 50वीं बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि बीज उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग एवं बीज निगम के अधिकारियों को राज्य के किसानों को समय पर कृषि आदान सामग्री एवं कृषि यंत्र की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना बनाकर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ हर हाल में किसानों को मिले, यह सरकार की मंशा है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। राज्य में कृषि बीज निर्बाध उपार्जन के लिए उन्होंने आवश्यकतानुसार बीज निगम की कैश क्रेडिट लिमिट में भी वृद्धि किए जाने की सहमति दी। मंत्री रविन्द्र चौबे ने राज्य के जिलों में स्थित बीज निगम के प्रक्रिया केन्द्रों के काम-काज पर निगरानी एवं समन्वय के लिए संबंधित जिलों के उपसंचालक कृषि को जिम्मेदारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि मौसम के अनुसार प्रत्येक फसलों के बीज का आंकलन एवं उसकी डिमांड तैयार करने की जिम्मेदारी कृषि विभाग की है। इसमें किसी भी तरह का विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को समय से पूर्व समितियों में खाद बीज के भण्डारण की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कृषि मंत्री ने किसानों को समितियों अथवा निजी विक्रेताओं द्वारा प्रदाय किए जाने वाले खाद, बीज एवं कृषि यंत्रों की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखने की हिदायत अधिकारियों को दी। कीटनाशक दवाओं की गुणवत्ता को लेकर मिल रही शिकायतों पर भी अधिकारियों को कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री चौबे ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी दुकान अथवा सप्लायर के यहां क्वालिटी एवं रेट के बारे में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाए तो संबंधित फर्म को सील करने के साथ ही उसके संचालक पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में किसानों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संचालक मंडल की बैठक में 49वीं बैठक की कार्यवाही का अनुमोदन करने के साथ ही कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र मर्रा को सीएसआर मद से 71.20 लाख रूपए की राशि लैब इक्यूप्मेंट, कृषि मशीनों के संचानल एवं रख-रखाव, प्रशिक्षण और मशरूम उत्पादन पर कृषकों को ट्रेनिंग दिए जाने के उद्देश्य से प्रदाय किए जाने का अनुमोदन किया गया है। बैठक में संचालक मंडल ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के एग्रो प्रकोष्ठ की कार्य प्रणाली में बदलाव, बीज निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए प्रोत्साहन राशि देने का भी निर्णय लिया। बैठक में खरीफ सीजन 2020 में बीजों के भण्डारण एवं वितरण तथा रबी 2020-21 में विभिन्न फसलों के बीज के भण्डारण एवं वितरण की स्थित पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में विवेकानंद विद्यापीठ से प्राप्त प्रस्ताव का अनुमोदन करने के साथ ही प्रस्ताव अनुसार राशि दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

 

26-10-2020
मंत्री रविन्द्र चौबे ने दी कैबिनेट के फैसलों की जानकारी, कहा-विधानसभा में विपक्ष यदि तैयारी से आएगा तो हम भी तैयार

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में उनके निवास कार्यालय में सोमवार को कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद मंत्री रविन्द्र चौबे ने मीडिया को फैसलों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विधानसभा के विशेष सत्र की तैयारी और विपक्ष की बैठक पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केन्द्र के कृषि कानूनों से किसानों का शोषण होने की संभावना है। धान खरीदी भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए प्रदेश में 27 और 28 अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है। यदि विपक्ष तैयारी से आएगा तो हम भी उनके सवालों का जवाब देने तैयार हैं। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त किसानों के खातों में डाली जाएगी। राज्योत्सव में राहुल गांधी भी शामिल होंगे। 

कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय : 
औद्योगिक नीति 2019-24 में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमति दी गई। इसमें राज्य के वनोपज, हर्बल और वन पर आधारित अन्य उत्पादों का प्रसंस्करण, खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के निर्माण और मूल्य संवर्धन के कार्य राज्य में ही किए जाने को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज (वनांचल उद्योग पैकेज) का अनुमोदन किया गया।  इसके तहत लघु उद्योगों को औद्योगिक नीति 2019-24 के प्रावधान में पूर्व से घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त स्थायी पूंजी निवेश अनुदान उत्पादन में आने के उपरांत उद्योगों को मान्य स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान के रूप में विशेषकर पिछड़े क्षेत्र विकासखंडों में स श्रेणी के विकासखंडों में कुल निवेश का 40 प्रतिशत 5 वर्षों में अधिकतम 40 लाख रुपए प्रतिवर्ष और द श्रेणी के विकासखंडों में कुल निवेश का 50 प्रतिशत 5 वर्षों में अधिकतम 50 लाख रुपए प्रतिवर्ष पात्रतानुसार देय होगा। विशेष पैकेज के लिए लघु उद्योगों की ओर से प्लांट और मशीनरी के अंतर्गत न्यूनतम 50 लाख और अधिकतम 5 करोड़ रुपए का निवेश किया जाना आवश्यक होगा। 

छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं प्रबंधन नियम-2015 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इसमें उद्योग विभाग की ओर से संचालित औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत उपकेन्द्रों की स्थापना के लिए न्यूनतम आवश्यक भूमि का आबंटन एक रुपए प्रतीकात्मक प्रीमियम राशि (टोकन मनी) पर बिना किसी लीज रेंट, सिक्यूरिटी डिपॉजिट के भूमि का आबंटन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं प्रबंधन नियम-2015 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इसमें औद्योगिक भूमि, भवन, शेड, प्रकोष्ठ  और लैण्ड बैंक से आबंटित भूमि का आबंटन के बाद नियमन और प्रबंधन की कंडिका में संशोधन किया गया। छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं प्रबंधन नियम-2015 के अंतर्गत भूमि आबंटन प्राप्त करने वाले उद्योगों को नियमों में संशोधन करते हुए कोविड-19 एवं आर्थिक मंदी को ध्यान में रखते हुए जो प्रस्तावित उद्योग स्थापित नहीं हो सके हैं, उनके लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक-2020 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। 

राज्य शासन की ओर से वर्ष 2012 में राज्य के ग्रामीण अंचलों के त्वरित एवं सर्वांगींण विकास की पूर्ति के लिए वर्तमान में विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए गठित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण और अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वर्ष 2013-14 के क्रियान्वयन के संबंध में प्रदेश में नशा मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के लिए छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान (भारत माता वाहिंनी योजना) को समाज कल्याण विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया। भारत सरकार, जल शक्ति मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के संबंध में निर्णय लिया गया कि-जल जीवन मिशन के संपूर्ण टेंडर (ईओआई) को निरस्त करके भारत सरकार के निर्देशानुसार कार्यवाही की जाए।

21-10-2020
कैट का प्रतिनिधिमंडल मंत्री रविन्द्र चौबे से मिला,उद्योगों और व्यापार को मंडी शुल्क में राहत देने सौंपा ज्ञापन

रायपुर। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) सीजी चैप्टर के एक प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार को प्रदेश के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे से मुलाकात की। कृषि पर आधारित उद्योगों और व्यापार को मंडी शुल्क में राहत देने के लिए ज्ञापन सौंपा। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे को अवगत कराया कि प्रदेश के अधिकतर उद्योग कृषि उपज पर आधारित है। प्रदेश में दाल और पोहा के लगभग 500 उद्योग इकाईयां स्थापित है। इसमें लगभग 40000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होता है। इन उद्योगों के उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत भाग अन्य राज्यों को निर्यात होता है। इससे संबंधित उद्योगों को राहत देने के लिए मंडी शुल्क संबंधी कुछ बिंदुओं पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से प्रयास किया जा सकता है।पारवानी ने कहा कि वर्तमान में पोहा और दाल उद्योग पर 1 प्रतिशत की दर से मंडी शुल्क देय है।

इसे पूर्णत: मंडी शुल्क मुक्त किया जाना चाहिए। इससे की इन उद्योगों का बड़ा आर्थिक संबल मिलेगा। प्रसंस्कृत उपज के विक्रय पर किसी भी राज्य में अनुज्ञा पत्र की अनिवार्यता नहीं है, केवल छत्तीसगढ़ राज्य में ही प्रसंस्कृत उपज विक्रय पर अनुज्ञा पत्र जारी करने की अनिवार्यता है। इसे समाप्त कर दिया जाना चाहिए।  अन्य राज्यों से आयातित कृषि उपज पर छत्तीसगढ राज्य में भी मंडी शुल्क में छुट मिलती है। परन्तु  शासन द्वारा मंडी शुल्क छूट में नवीनीकृत किया जाता है। मंडी शुल्क में छूट को स्थायी रूप से लागू किया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ की प्रत्येक कृषि उपज मंडी में किसान को अपनी उपज मंडी  प्रांगण के बाहर बेचने के लिए सौदा पत्रक की व्यवस्था लागू है। मगर प्रदेश के कुछ कृषि उपज मंडियां जैसे कि भाटापारा में किसान के इस अधिकार को लागू नहीं किया जाता है। इस पर संज्ञान लेते हुए सौदा पत्रक की व्यवस्था कृषि उपज मंडी में लागू किया जाना चाहिए। मंत्री रविन्द्र चौबे ने ज्ञापन का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर प्रतिनिधी मंडल को सकारात्मक आश्वासन दिया है। मुलाकात करने कैट के प्रतिनिधिमंडल में अमर पारवानी के साथ राम मंधान और नरेन्द्र कुमार दुग्गड आदि पहुंचे थे।

 

16-10-2020
राज्यपाल से मिले भूपेश सरकार के दो मंत्री, कहा- राजभवन और शासन में टकराव और नारजगी नहीं 

रायपुर। भूपेश सरकार के दो दिग्गज मंत्री रविन्द्र चौबे और मो. अकबर ने शुक्रवार को राजभवन पहुंचे। राज्यपाल अनुसुईया उइके के साथ हुई संक्षिप्त चर्चा हुई। मुलाकात के बाद बाहर निकले मंत्री रविन्द्र चौबे ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बात को ही दोहराया। उन्होंने राजभवन और सरकार के बीच टकराव को सिरे से खारिज किया है। मंत्री चौबे ने कहा है कि सरकार और राजभवन में टकराव  या तल्खी जैसी कोई बात नहीं है। राज्यपाल हमारे राज्य की संवैधानिक प्रमुख हैं। राज्यपाल और सरकार के बीच संवाद का सिलसिला चलता रहता है। राज्यपाल जो भी जानकारी सरकार से मांगेंगी वो उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी।

दरअसल टकराव का एक कारण गृह विभाग की बैठक और दूसरा सरकार की ओर से भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के विभागों में फेरबदल को देखा जा रहा था। सरकार ने तीन आईएएस अफसरों को नई जिम्मेदारी देने के साथ ही अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया था। सोनमणि बोरा अतिरिक्त प्रभार सचिव राज्यपाल को सचिव राज्यपाल के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया था। अमृत कुमार खलखो आयुक्त बस्तर संभाग जगदलपुर को सचिव राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार और केडी कुंजाम को  संयुक्त सचिव राजभवन सचिवालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। इसके बाद से राजनीतिक गलियारे से इन दो कारणों को राजभवन और सरकार के बीच टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है। 
इधर राजभवन में ली जाने वाली गृह विभाग की समीक्षा बैठक को स्थगित करना पड़ा था। राज्यपाल ने राजभवन में गृहविभाग की समीक्षा बैठक बुलाई थी। बैठक में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को भी शामिल होना था, लेकिन उन्होंने पीएल पुनिया के संपर्क में आने के कारण वे एहतियातन होम आइसोलेशन में थे। उन्होंने क्वारेंटाइन में होने की सूचना दी थी। इन कारणों से बैठक स्थगित की गई। उसी दिन गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का मुख्यमंत्री निवास में भूपेश बघेल की बुलाई बैठक में शामिल होना विपक्ष की नजर में आ चुका था। इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विष्मुदेव साय ने कहा था कि गृह मंत्री का यह रवैया सीधे-सीधे राज्यपाल का अपमान और संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन है। प्रदेश की सर्वोच्च संवैधानिक प्रमुख होने के नाते प्रदेश में कानून-व्यवस्था के बिगड़ते हालात पर राज्यपाल की चिंता को संजीदगी से लेने के बजाय गृहमंत्री ने राजनीतिक अशिष्टता का परिचय दिया है। 
इधर गृह विभाग के संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने बयान जारी कर विष्णुदेव साय को जवाब दिया था। उन्होंने संवैधानिक अवमानना किए जाने की बात को सिरे से खारिज किया था। विकास उपाध्याय ने कहा था  कि कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया 9 और 10 अक्टूबर को पार्टी की बैठक ली थी। उनके संपर्क में कांग्रेस के तमाम नेताओं के साथ गृहमंत्री भी आए थे। ऐसी स्थिति में मानवता और सुरक्षा के नाते गृहमंत्री का राजभवन न जाना पूरी तरह से सही निर्णय था।  जब इस वजहों की जानकारी भी दे दी गई थी,तो इसे भाजपा बेवजह तूल क्यों दे रही है, समझ से परे है। ऐसी स्थिति में गृहमंत्री का सुरक्षा कारणों से राजभवन न जाना कहां की संवैधानिक अवमानना है, समझ से परे हैं। 
संसदीय सचिव उपाध्याय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बुलाई गई समीक्षा बैठक में गृहमंत्री के शामिल होने की बात पर भी स्पष्टीकरण दिया।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रभारी के संपर्क में आने वालों में मुख्यमंत्री भी थे।  वे हमारे पार्टी के ही थे। ऐसी स्थिति में उनकी बैठक में सम्मिलित होना इसलिए भी तर्कसंगत था कि कांग्रेस प्रभारी के संपर्क में वे गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के साथ थे। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि राज्यपाल को भी किसी संक्रमण के खतरे में डाल देना उचित होता। राज्यपाल अनुसुईया उइके राजभवन में पूरी तरह से सुरक्षित और ऐसी कोई क्वारेंटाइन की स्थिति में आए के संपर्क में नहीं थीं। यह बैठक रखी गई थीं, जहां गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की वजह से कोविड-19 को लेकर कोई बात हो जाए,इसको लेकर स्वयं गृहमंत्री गंभीर थे। इसका ध्यान रखना बेहद ही जरूरी था। इस पूरी बात की जानकारी राजभवन को दे दी गई थी। ऐसे में भाजपा नेताओं की ओर से गृहमंत्री को लेकर उठाई गई अशिष्ट आचरण से लेकर, संवैधानिक अवमानना की बात करना पूरी तरह से गलत है।

13-10-2020
गोधन न्याय योजना : अब तक हितग्राहियों को लगभग 30 करोड़ रुपए का हो चुका है भुगतान

रायपुर। कृषि और पशुपालन मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में मंगलवार को गोधन न्याय योजना के तहत गौठान समितियों के माध्यम से खरीदे गए गोबर से जैविक खाद निर्माण सहित उसकी बहुउपयोगिता पर मंथन किया गया। बैठक में जैविक खाद निर्माण की स्थिति, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। गोबर और बायोमास से बायो सीएनजी तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। मंत्री चौबे ने छोटी-छोटी परियोजना तैयार कर गोबर को लाभकारी बनाने पर जोर दिया। मंत्री चौबे ने बताया कि 20 जुलाई हरेली पर्व से प्रारंभ हुई गोधन न्याय योजना के अंतर्गत अब तक गौपालकों और गोबर विक्रेताओं से प्रदेश के 3247 से अधिक गौठानों में गौठान समितियों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से पशुपालकों और गोबर संग्राहकों से लागभग 30 करोड़ रूपए का गोबर खरीदा जा चुका है। गोधन न्याय योजना का लाभ जिस प्रकार पशुपालकों और गरीब ग्रामीण गोबर विक्रेताओं को मिल रहा है, इसे और व्यापक बनाते हुए खरीदे गए गोबर से जैविक खाद निर्माण सहित मल्टी उत्पाद और बहुउपयोगी बनाकर ग्रामीणों और महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने सहकारिता विभाग के जरिए किसानों को आसानी से जैविक खाद उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।  
उन्होंने बताया कि  गौठानों में तैयार की गई वर्मी कम्पोस्ट गोधन वर्मी कम्पोस्ट के नाम से लॉंच किया गया है। इसका प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए वर्मी कम्पोस्ट के पैकेजिंग का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपें जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। गोेबर से मल्टी उत्पाद तैयार करने के लिए शहरी महिलाओं की तरह ग्रामीण क्षेत्रों के महिला समूहों को भी आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने पर बल दिया। उन्होंने नियमित रूप से गौठानों में निरीक्षण कर जैविक खाद निर्माण पैंकेजिंग और मार्केंटिंग पर विशेष ध्यान देने तथा योजनाबद्ध तरीके से काम करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना को और अधिक लाभकारी कैसे बनाए जाए इस दिशा में क्या-क्या किया जा सकता है, इस पर भी विचार किया जाए। इस योजना के जरिए राज्य में 700 से 800 करोड़ रुपए की वर्मी कम्पोस्ट खाद का कारोबार महिला समूहों एवं सोसायटियों के माध्यम से होगा। इससे ग्रामीणों को रोजगार और सोसायटियों को संबल मिलेगा।

 

08-10-2020
Breaking : छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए बनेगा अलग से कानून, बुलाया जाएगा विधानसभा सत्र

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद मंत्री रविन्द्र चौबे ने पूरी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में किसानों के लिए अलग से कानून बनेगा। कानून बनाने अलग से छत्तीसगढ़ विधानसभा का सत्र बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस कोविड-19 के कारण इस बार छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस में बड़ा कार्यक्रम नहीं होगा। केवल राज्य अलंकरण समारोह संक्षिप्त रूप से किया जाएगा। धान खरीदी के बारे में विस्तृत चर्चा हुई।

धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारण और प्रक्रिया के संबंध में चर्चा हुई। इसी तरह कई महत्वपूर्ण विषयों पर कैबिनेट की बैठक में चर्चा हुई है। बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंडिया के पति स्व. रविन्द्र भेंडिया को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। रविन्द्र भेंडिया का 4 और 5 अक्टूबर की दरमियानी रात को निधन हो गया था।

03-10-2020
जिला सहकारी बैंक की धमधा शाखा का मंत्री रविन्द्र चौबे ने किया भूमिपूजन

दुर्ग। धमधा में जिला सहकारी बैंक की शाखा का भूमिपूजन किया गया। इस मौके पर कार्यकम के मुख्यअतिथि कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि धमधा के विकास के लिए शासन प्रतिबद्ध है। आपकी ओर से जो सुझाव हैं उन्हें रखें हम तत्परता से कार्रवाई करेंगे। चाहे धमधा में अच्छा अस्पताल का विषय हो या इंग्लिश मीडियम स्कूल का, सबसे अच्छी सुविधाएँ देने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। धमधा क्षेत्र में सोसाइटी स्वीकृत किये जा रहे हैं। इससे निकट के ग्रामीणों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि किसानों को आगे बढ़ाने के लिए सिंचाई का दायरा बढ़ाने बड़े स्तर पर कार्य किये जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राजपुर में प्लग टाइप वेजिटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन इकाई का आरंभ हो रहा है। खेती किसानी के साथ उद्यानिकी का रकबा बढ़ाने सरकार संकल्पित हैं। इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को आगे बढ़ाने बड़ी पहल की गई है। गोधन न्याय योजना के माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त करने और जैविक खेती के लिए बड़ी पहल की गई है। किसानों को बढ़ावा देने वाली योजना के माध्यम से उनकी आर्थिक बेहतरी की दिशा में बड़ा काम किया जा रहा है। इस मौके पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे भी मौजूद थे।

 

03-10-2020
मंत्री रविन्द्र चौबे ने किया प्लग टाइप वेजिटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन इकाई का लोकार्पण

दुर्ग। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने धमधा के ग्राम राजपुर में स्थापित शासकीय बीज प्रगुणन में 5 करोड़ 81 लाख 62 हजार रूपए की लागत से प्लग टाइप वेजिटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन का लोकार्पण किया। इस मौके पर मंत्री ने कहा कि दस महीने पहले राजपुर आया था। ग्रामीणों ने कहा कि जमीन यहां बहुत है कुछ अच्छा काम होना चाहिये। फिर ऐसा सोचा कि यहाँ कुछ करना चाहिए, आज यह मुकम्मल हो गया। श्री चौबे  ने कहा कि देश भर में धमधा का टमाटर जा रहा है। अभी भी यहां से काफी टमाटर सप्लाई हो रही है। मुझे जब प्लग टाइप इकाई का प्रस्ताव अधिकारियों ने बताया तो मुझे बहुत पसंद आया। आज इतनी सुंदर और गुणवत्तापूर्ण यूनिट तैयार हुई है। इसके पीछे ग्रामीणों का सहयोग और अधिकारियों की कड़ी मेहनत है। यहाँ सोसाइटी जल्द आरम्भ होगी। इससे रोजगार की संभावना बढ़ेगी। यदि फलोद्यान ज्यादा से ज्यादा लगाएंगे तो आमदनी भी उसी अनुपात में बढ़ेगी। यह नर्सरी किसानों के लिए बहुत उपयोगी होगी। सरकार बनने के साथ ही कर्ज माफी की गई। हमने लोगों को कर्जमाफी का वायदा किया था ये पूरा हुआ।

20 हजार करोड़ की धान खरीदी की गई 2500 रुपये क्विंटल की दर से। राजीव गांधी न्याय योजना के माध्यम से किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया गया। उक्त इकाई की स्थापना होने से फल, सब्जी, मसाला एवं पुष्प वाली फसलों के सीडलिंग (थरहा) उच्च तकनीकी से तैयार किया जा सकेगा। यहां प्रतिमाह 10 लाख पौधे तैयार जा सकेंगे। इससे जिले के साथ ही आस-पास के जिले के कृषकों को गुणवत्ता युक्त स्वस्थ एवं रोग रहित पौधे प्राप्त होंगे जिससे फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी का लाभ मिलेगा। इस इकाई की स्थापना से जिले के साथ ही बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगाॅव, जिले के किसानों को बीज प्रगुणन का लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में दुर्ग जिला उद्यानिकी फसलों की खेती के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यहां के कृषकों द्वारा परंपरागत खेती से लेकर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक पद्धति से उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे हैं। जिले में मुख्य रूप से टमाटर, बैगन, मिर्च, शिमला मिर्च, गोभी वर्गीय तथा केला, पपीता, अमरूद, एप्पल बेर की खेती प्रमुखता से किया जा रहा है। यहां के कृषकों के द्वारा उत्पादित फसलों को स्थानीय मंडी से लेकर राज्य से बाहर के बाजारों में भी भेजा जाता है। जिले में सभी फसलों का रकबा लगभग 1 लाख 92 हजार 214 हेक्टेयर है, जिसमें 49 हजार 734 हेक्टेयर उद्यानिकी फसलों का  क्षेत्रफल शामिल है।

प्लग टाईप वेजिटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन यूनिट से यह लाभ मिलेगा

प्लग टाईप वेजिटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन यूनिट की स्थापना होने से कृषकों को उच्च गुणवत्ता युक्त पौधे प्राप्त होगी। इससे तैयार पौधे कीट, बीमारी एवं व्याधियों से मुक्त पौधे उपलब्ध होगी। बीज की बचत होगी। किसानों को हर मौसम में गुणवत्ता युक्त पौधे उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस तकनीक से पौधे तैयार करने में सभी बीजों का जमाव होता है। नर्सरी में पौधे उखाड़ते समय पौधों की जड़े टुटती नहीं है, साथ ही कम समय में पौधे तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा सभी पौधों की बढ़वार एक समान होती है, सब्जियों के उत्पादन में वृद्धि होती है। इससे कृषक समुचित समय पर पौधों की रोपाई कर सकेंगे। साथ ही कृषकों के आर्थिक स्थिति में इजाफा होगा।प्लग टाईप वेजिटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन यूनिट की स्थापना होने से गुणवत्ता युक्त रोपण सामाग्री की उपलब्धता जिले के किसानों को हो सकेगी। ग्रामीण युवक एवं युवतियों को रोजगार मिलेगा। सब्जी रोपाई के उत्पादन के लिए नवीन तकनीकों के लिए एक प्लग प्रकार वनस्पति बीज उत्पादन इकाई स्थापित करना है। बगवानी उद्योग में तकनीकी विकास में किसानों की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके जरिए किसानों उत्पादकों और उद्यमियों को तकनीकी जानकारी प्रदान करना है। बागवानी उद्योग में उद्यमिता के लिए युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।

 

27-09-2020
राजधानी में लॉक डाउन बढ़ेगा या नहीं फैसला सोमवार को,रविन्द्र चौबे करेंगे समीक्षा

रायपुर। राजधानी रायपुर में जारी 1 सप्ताह के लॉकडाउन का सोमवार 28 सितंबर को अंतिम दिन है। 21 सितंबर की रात 9 बजे से 28 सितंबर की रात 12 बजे तक कलेक्टर डॉ. एस.भारतीदासन ने पूरे जिले को कंटेनमेंट जोन घोषित किया था। अब लॉकडाउन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सोमवार को मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठक में होगा। मंत्री चौबे ने रविवार को मीडिया को बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि सोमवार को कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन व जिला प्रशासन के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में चर्चा होगी। जिले की वर्तमान स्थितियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बता दें कि रायपुर में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले को देखते हुए जारी लॉकडाउन में व्यवस्थाओं का जायजा लेने गत दिनों जिले के प्रभारी मंत्री रविन्द्र चौबे सड़क पर उतरे थे। उन्होंने शहर में घूमकर तमाम व्यवस्थाओं को देखा था और पुलिस टीम की सराहना भी की थी। उन्होंने उस दौरान भी मीडिया से चर्चा के दौरान कहा था कि समीक्षा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। मंत्री चौबे के साथ व्यवस्थाओं का जायजा लेने संसदीय सचिव व विधायक विकास उपाध्याय, विधायक कुलदीप जुनेजा, कलेक्टर डॉ.एस.भारतीदासन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव भी निकले थे। इधर रोजाना के आंकड़ों पर गौर करें तो लॉकडाउन के बाद भी राजधानी में कोरोना मरीजों के मिलने की संख्या में कोई कमी नहीं हुई है। रोजाना प्रदेश में सर्वाधिक रायपुर जिले में कोरोना मरीज मिल रहे हैं। अब देखना है कि,सोमवार की बैठक में क्या निर्णय लिया जाता है। लॉक डाउन को लेकर जो भी फैसला हो,सभी को बेसब्री से इंतजार है।

24-09-2020
Video : मंत्री रविन्द्र चौबे ने लॉक डाउन के तीसरे दिन व्यवस्थाओं का लिया जायजा, कहा- समीक्षा के बाद होगा फैसला   

रायपुर। जिले के प्रभारी व कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने गुरुवार को राजधानी में घूमकर प्रशासन की व्यवस्थाओं को देखा। लॉक डाउन के तीसरे दिन सड़कों पर उतरे मंत्री चौबे ने तमाम व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान संसदीय सचिव व विधायक विकास उपाध्याय,विधायक कुलदीप जुनेजा, कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव और जिला प्रशासन के अधिकारी भी साथ थे। मंत्री रविन्द्र चौबे ने रायपुर में जारी लॉक डाउन को लेकर शहर की स्थिति को देखा। उन्होंने प्रशासन की व्यवस्थाओं व पुलिस कर्मियों के कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि, वे अपने प्रभार जिले रायपुर में लॉक डाउन के तीसरे दिन प्रशासनिक व्यवस्था और लोगों के सहयोग बारे में जानकारी लिए। इस विपदा की घड़ी में उत्कृष्ट  सेवा भाव से कार्य कर रहे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य सराहनीय है। मंत्री चौबे ने जनता से अपील की है कि ,घर पर रहें ,सुरक्षित रहें और लॉक डाउन के नियमों का पालन करें। मंत्री चौबे ने कहा है कि,वर्तमान में सात दिन के लॉक डाउन की समीक्षा के बाद ही आगे बढ़ाने पर फैसला लेंगे।

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