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19-09-2020
राज्य सरकार करे लॉकडाउन को लेकर सभी वर्ग से संवाद,प्रदेश में एक साथ हो 15 दिनों तक लॉकडाउनः कौशिक

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के भयावह स्वरूप को लेकर प्रदेश सरकार को लगातार आगाह कर रहे हैं,लेकिन प्रदेश सरकार कोरोना को लेकर गंभीर ना ही पहले थी न वर्तमान में है। कोरोना के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिये प्रदेश की सरकार को सभी वर्ग से चर्चा करनी चाहिये। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उद्योगपति, व्यापारियों और आमजनों से वर्तमान हालत पर सरकार को चर्चा कर के पूरे प्रदेश में एक साथ ही लॉकडाउन लगाने पर उचित कदम उठाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिलावार लॉकडाउन लगाये जाने के बजाय पूरे प्रदेश में एक साथ ही लागू किया जाना चाहिये। वही इस समय पर लॉकडाउन को लेकर सारा कमान प्रदेश सरकार को अपने हाथों पर लेना चाहिये।  इसके साथ ही दो सप्ताह के लिये लॉकडाउन लगाने की जरूरत है ताकि कोरोना के हो रहे लगातार विस्तार की गति पर विराम लग सके। एक सप्ताह का लॉक डाउन पर्याप्त समय नही है। इसके सार्थक परिणाम भी नही आयेंगे। उन्होंने कहा प्रदेश में सक्रिय केस की संख्या को प्रदेश सरकार छुपा रही है। इसके चलते स्थिति और बिगड़ती जा रही है। अब हालत तो यहां तक बिगड़ चुके हैं कि मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए भी विवाद होने लगे हैं। वहीं प्रदेश में परिस्थियां बेहतर हो इसके लिये भी कोई कारगर कोशिशे नही जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि प्रदेश में पहले ही लॉक डाउन लग जाना चाहिये था।

समय रहते कोरोना पर अंकुश लगाने के लिये ठोस पहल की जाती और लॉकडाउन लगा दिया जाता तो जो हालत बिगड़ते जा रहे हैं वो काबू में किया जा सकता था। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि कोरोना पर अंकुश लगाने के लिये समाज के हर वर्ग की सहभागिता जरूरी है लेकिन इस दिशा मे प्रदेश सरकार की ओर से कोई पहल नही की जा रही है। इस समय पर सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लेना चाहिये। लेकिन एक समय सामाजिक संस्थाओं ने सहयोग देना चाहा तो प्रदेश सरकार ने इस पर रूचि नही दिखाई। इसके कारण सामाजिक संगठनों का फिर जुड़ाव नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में 1 सितंबर की स्थिति में सक्रिय मरीज़ 15,533 थे वहीं 19 सिंतबर की  स्थिति में 36,580 सक्रिय केस के साथ  सातवें स्थान  पर हैं। मौत के मामले पर 17 वें स्थान पर और जांच के मामले पर 20वें स्थान पर हैं। इसके साथ ही एक्टिव केस के प्रतिशत  मामले में भी 44.8 प्रतिशत के साथ प्रथम स्थान पर हैं। अगर रिकवरी संख्या मामले में देखें तो 19वें स्थान पर हैं परंतु रिकव्हरी अनुपात के मामले में अभी भी छत्तीसगढ़ 54.4 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे 35 वे नंबर पर स्थित है, जो चिंता की बात है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में एक साथ लॉकडाउन को दो सप्ताह तक किये जाने पर तत्काल विचार किया जाना चाहिये।

 

17-09-2020
गोधन न्याय योजना से जुड़कर खड़गवां के सुखराज की इच्छा हुई पूरी,राज्य सरकार का माना आभार

कोरिया। खड़गवां का सुखराज एक बकरी खरीदना चाहता था पर इतने पैसे एक साथ जुटा नहीं पाया। बीते 2 महीने में गोधन न्याय योजना में गोबर बेचना शुरू किया, तो 8 हजार 876 रुपए मिल गए। इससे अब दो बकरियां खरीद ली हैं। मोर तो सपना पूरा हो गिस" चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ ग्राम पंचायत पेंड्री के रहने वाले सुखराज कहते हैं। विकासखण्ड खड़गवां में पेंड्री गांव के लिए रहने वाले सुखराज बकरी खरीदना चाहते थे। गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रय कर मिली राशि से उनकी यह इच्छा साकार हो गई है। किसान सुखराज बेहद खुश हैं और राज्य सरकार की योजना के लिए धन्यवाद दिया।20 जुलाई को हरेली पर्व के अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा गोधन न्याय योजना शुरू की गई है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आय एवं रोजगार के साधन विकसित कर प्रदेश की उन्नति की राह प्रशस्त करना है।

गोधन न्याय योजना शुरू होने के साथ ही सुखराज ने गोबर को पास के ग्राम गौठान में जाकर बेचना शुरू किया। कुछ ही दिनों की मेहनत से उसे प्रदेश सरकार की गोधन न्याय योजना के तहत 2 रुपए प्रति किलो की दर से गोबर बेचने के एवज में 8 हजार 876 रुपए मिल गए। अब खड़गवां के ग्रामीण सुखराज के पास 2 बकरियां हैं। जिन्हें वे अपनी कामधेनु बताते हैं। सुखराज के पास पहले कभी एक साथ इतने पैसे नहीं आये कि वह अपने लिए बकरियां खरीद कर पाल सके। आज इस आदिवासी किसान ने अपने परिवार के लिए गांव से ही तीन-तीन हजार रुपए में दो बकरियां खरीद ली हैं। वर्षों से बकरियों को खरीदने की मंशा गोधन न्याय योजना से जुड़कर पूरी होने पर ग्राम पेंड्री के किसान सुखराज बेहद खुश हैं।

 

17-09-2020
उन्नत व आधुनिक खेती किसानी की जनकल्याणकारी योजनाओं से किसान हो रहे हैं खुशहाल

रायपुर/जगदलपुर। जन कल्याणकारी योजना से किसानों के जीवन में आ रही खुशियां। छत्तीसगढ़ को समृद्ध व आत्मनिर्भर बनाने राज्य के कृषि को उन्नतशील बनाने की सोच व उसे कार्य रूप में परिणित कराना शुरू से ही छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष प्राथमिकता रही है। राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में ठोस निर्णय लेकर और योजना बनाकर उनका सफल क्रियान्वयन भी किया है। इसके परिणाम स्वरूप पूरे राज्य के साथ-साथ बस्तर जिले के किसान भी शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजना का लाभ लेकर आधुनिक व आत्मनिर्भर कृषि की ओर बढ़ रहे हैं। योजना का सफल क्रियान्वयन का ही नतीजा है कि बस्तर जिले में धान का रकबा 10 वर्ष पूर्व खरीफ सीजन में 1 लाख 13 हजार 120 हेक्टेयर व औसत उत्पादकता 1533 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। वह बढ़कर 1 लाख 11 हजार 942 हेक्टेयर और औसत उत्पादकता 3202 प्रति हेक्टेयर हो गया है।

शासन के जन कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के फलस्वरूप खेती किसानी में आये आषातित सुधार व परिवर्तन से बस्तर जिले के सुदूर वनांचल के किसान भी अछूता नहीं है। इसी का परिणाम है कि आज अपने खेती किसानी के लिए वर्षा की पानी पर निर्भर रहने वाले जिले के बस्तर विकासखण्ड के ग्राम दूबेउमरगांव कृषक जितेन्द्र साहू को कृषि कार्य के लिए बारहमासी पानी मिलने से आज एक आत्मनिर्भर किसान बन गया है। किसान जितेन्द्र कृषि विभाग के शाकम्भरी योजना से अनुदान लेकर 5 एचपी का डिजल पम्प तथा किसान समृद्धि योजना से ट्यूबवेल खनन कराने से आज उसे उन्नतषील एवं मन पसंद खेती के लिए केवल वर्षा के जल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उसे अब खेती के लिए समय पर पानी मिल जाता है, जिससे वे धान के अलावा मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जी भाजी आदि फसल उगाकर आत्मनिर्भर व समृद्धि किसान बन गया है।

किसान जितेन्द्र ने बताया कि वे एक मध्य श्रेणी के ग्रामीण किसान है। इससे पहले वे करीब 20 वर्षों से वर्षा परंपरागत रूप से वर्षा पर आधारित धान की खेती करते आ रहे थे। लेकिन वर्षा के पानी के अलावा सिंचाई के लिए अन्य कोई साधन नहीं होने से समय पर खेती किसानी का काम करना बड़ा कठिन होता था। इसके अलावा फसलों में कीट व्याधियों का प्रकोप तथा उन्नत खेती के लिए तकनीकी ज्ञान के अभाव होने के कारण उसे उत्पादन एवं उससे आय मेहनत के हिसाब से बहुत ही कम मिल पाता था। उन्होंने बताया इसी बीच उसका सम्पर्क कृषि विभाग के अधिकायों से हुआ। उन्होंने उन्नत व आधुनिक खेती किसानी के लिए शासन की विभिन्न जन कल्याणकारी योजना की जानकारी दी जिसके माध्यम से उन्होंने इन योजना का लाभ लिया है।

16-09-2020
लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मिला मध्यान्ह भोजन का लाभ, सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ टॉप पर 

रायपुर। कोरोना संकट काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिला है, जबकि इस दौरान अन्य राज्यों में मध्यान्ह भोजन वितरण की स्थिति काफी खराब रही। आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि, मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा। आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है।

जबकि उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित रहे। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि, उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया। लॉक डाउन के दौरान पिछले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति तय करने के निर्देश दिए थे। इसके तारतम्य में छत्तीसगढ़ ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूली बच्चों को स्कूलों और बच्चों के घरों तक पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। गांव-गांव में इसकी मुनादी कराई गई। देश के अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रक्रिया काफी बाद में शुरू कराई गई। छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया। इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए, 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया। इस प्रकार अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण किया जा चुका है। इस योजना से राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ मिला है। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया गया।

वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि, यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की गई। मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहलीं से आठवीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया गया।

13-09-2020
महिलाएं कर रही गौठान का संचालन, बना रही हैं जैविक खाद

दुर्ग। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रयास जारी हैं। बिहान योजना के तहत महिलाओं को रोजगार मूलक कार्य के रूप में वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया इस तरह इनको गांव में ही काम उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार की योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी योजना से सुराजी गाँव की परिकल्पना साकार होती नजर आ रही है। स्व सहायता समूह की महिलाएं गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट खाद और नाडेप टैंकों में पारंपरिक खाद का निर्माण कर रही हैं। जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक जिले भर के गौठानों में 1176 नाडेप एवं 1264 वर्मी कम्पोस्ट टैंक निर्मित किए गए हैं। दुर्ग जनपद पंचायत के  62 गौठानों में 543 नाडेप और 579 वर्मी कम्पोस्ट टैंक बने हैं,जिनसे अब तक 7271 क्विंटल पारंपरिक कम्पोस्ट और 43 क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन किया है। इसी प्रकार जनपद पंचायत धमधा के 79 गौठानों में 274 नाडेप और 375 वर्मी कम्पोस्ट टैंक निर्मित किए गए हैं और की 581 नाडेप, 61 क्विंटल केंचुआ खाद का निर्माण किया गया है।

वहीं जनपद पंचायत पाटन के 77 गौठानों में 359 नाडेप और 310 वर्मी कम्पोस्ट टैंकों में 750 क्विंटल नाडेप और 63 क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन किया है। जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। गांव की स्व-सहायता समूह की महिलाएं जिसमें अध्यक्ष व अन्य महिलाएं पूरी तन्मयता से कार्यरत हैं। गौठान का संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाएं ही कर रही है। गौवंश के लिए सभी तरह के इंतजाम किए गए है। गोबर खरीदी योजना के अंतर्गत महिला 2 रू किलो में गोबर खरीदकर गौठानों में जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है। जिसे शासन के निर्देशानुसार विक्रय किया जाएगा। जनपद पंचायत दुर्ग में ग्राम पंचायत आलबरस जय मां लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत विनायपुर में खुशी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत मचान्दुर में लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत घुघसीडीह भारत माता स्व-सहायता समूह, चंदखुरी में सिंधुजा स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत ढाबा में दीप माला स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत उमरपोटी मां शेरावली स्व-सहायता समूह, जनपद पंचायत पाटन में ग्राम पंचायत अमलीडीह संगवारी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत पाहंदा में प्रार्थना स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत ढौर में प्रगति स्व-सहायता समूह, जनपद पंचायत धमधा में ग्राम पंचायत देवरी, अम्बे स्व-सहायता समूह, पोटिया में जय माता दी स्व-सहायता समूह, खपरी(ग) जय शीतला स्व-सहायता समूह, घटियाखुर्द (खपरी ग) जय माहावीर स्व-सहायता समूह, द्वारा जैविक खाद निर्माण किया जा चुका है। गौठान गोबर और गांव से निकले कचरे से भी बनाएंगी जैविक खाद गौठान योजना के जरिये, गांव की महिलाओं ने साफ रखने के साथ कमाई का जरिया भी ढूंढ लिया है। गांव से निकलने वाला कचरे, अपशिष्ट पदार्थ और गौठान के गोबर से भी खाद बनाने की तैयारी की जा रही है। जिससे जैविक खाद भी बनेंगे और गांव भी स्वच्छ होंगे। महिलाओं को इस योजना से रोजगार का साधन मिल पाया है साथ ही महिलाएं अपने पैरों में खड़े होने का जज्बा भी दिखा रही हैं।

 

09-09-2020
Breaking : भूपेश सरकार स्कूलों को खोलने केन्द्र की गाइडलाइन पर कर रही विचार, जल्द सामने आएगा फैसला

रायपुर। अनलॉक-4 के लिए केन्द्र सरकार की ओर से जारी किए गए दिशानिर्देशों में स्कूलों को खोलने की अनुमति भी दी गई है। इसके बाद अब छत्तीसगढ़ में भी स्कूलों को खोलने पर जल्द ही भूपेश सरकार निर्णय ले सकती है। प्रदेश में कोरोना महामारी के कारण बंद पड़े स्कूलों को खोलने की पूरी तैयारियों के संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि, राज्य सरकार ने 30 सितंबर तक स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने का निर्देश जारी किया था। अब केन्द्र सरकार की ओर से आई गाइडलाइन में 21 सितंबर से स्कूलों के संबंध में जो बात कही गई है, तो राज्य सरकार इस पर विचार करने जरुर उच्चस्तरीय बैठक लेकर निर्णय ले सकती है। 

बुधवार को राज्य सरकार ने इस संबंध में कहा है कि, केंद्र सरकर ने 30 सितंबर तक स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है, परंतु 21 सितंबर से 50 प्रतिशत शिक्षकों को स्कूल बुलाने के अनुमति दी है। कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को उनके अभिभावकों की लिखित सहमति प्राप्त होने पर स्वेच्छा से स्कूल आकर शिक्षकों से शंका समाधान कराने की अनुमति देने का अधिकार राज्यों को दिया है। छत्तीसगढ़ में अभी इस संबंध में विचार चल रहा है। उच्च स्तर पर योग्य निर्णय लिया जाएगा।

09-09-2020
सीएम का वीडियो ​एडिट करने वाले पर कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस वि​धि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ने की ​एसपी से शिकायत

रायपुर। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का वीडियो एडिट कर भ्रम फैलाने की शिकायत कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ ने की है। विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संदीप दुबे ने एसपी से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के मुताबिक भिलाई निवासी नरसिंग राजपूत के नाम से बने फेसबुक अकाउंट से राज्य सरकार को बदनाम करने साजिश की जा रही है। फेसबुक के माध्यम से एक वीडियो शेयर किया गया है। इसमें सीएम भूपेश बघेल की आवाज की नकल की गई है। इसमें एक व्यक्ति द्वारा शराब दुकान खोलने की मांग की जाती है। इस पर सीएम की आवाज का उपयोग करते हुए इसे एक अच्छी पहल बताया गया है। ऐसे भ्रामक प्रचार के माध्यम से सीएम और राज्य सरकार की छवि धुमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

09-09-2020
पंचायतों और गौठान समितियों के लिए सीमित संसाधनों के भरोसे मवेशियों की देखभाल कर पाना भगवान भरोसे : भूपेन्द्र शर्मा

रायपुर। राज्य सरकार की ओर से अब तक बनवाए गए आधे-अधूरे नवाचारी गौठानों में पहुंच रहे बाहरी आवारा मवेशियों का सीमित संसाधनों के भरोसे देखरेख कर पाना पंचायतों व गौठान समितियों के बस की बात नहीं है। इन मवेशियों के साथ होने वाले किसी अनहोनी के लिए शासन-प्रशासन द्वारा इनके कंधों पर बंदूक रख चलाने की प्रवृत्ति के चलते ये पंचायतें व समितियां सांसत में हैं और खासकर ग्रामीण राजनीति के कारण ज्यादा। इन्हें इस सांसत से छुटकारा दिलाने ऐसे मवेशियों के लिए अभ्यारण्य बनवाने सहित कई सुझावों को लेकर किसान संघर्ष समिति ने शासन के नुमाइंदों को ज्ञापन प्रेषित किया है । प्रदेश सरकार के मुखिया भूपेश बघेल व पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री टी .एस . सिंहदेव को मेल से व कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे तथा गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास को व्हाट्सएप के द्वारा यह सुझावयुक्त ज्ञापन समिति संयोजक भूपेन्द्र शर्मा ने प्रेषित किया है । ज्ञापन मे अवैध कब्जों की वजह से बदरंग हो चले ग्रामों में सुराजी गांव योजना के तहत  वर्तमान परिवेश में नवाचारी गौठान निर्माण की परिकल्पना को व्यापक ग्रामहित में स्वागतेय ठहराते हुये लिखा गया है कि प्रदेश के 20599 ग्रामों में से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल 5000 गौठान निर्माण का लक्ष्य होने व तकरीबन 2200 गौठानों के अस्तित्व में आने की जानकारी मिली है ।

इन अस्तित्वधारी गौठानों के भी परिकल्पना के अनुरूप अब तक निर्माण न हो आधे - अधूरे रहने के बाद भी ऐसे आवारा मवेशियों को किसानों की फसल बचाने मजबूरन सीमित संसाधनों के भरोसे रखे जाने व इन मवेशियों के साथ हो रहे किसी अनहोनी के लिये पंचायत व गौठान समितियों को जिम्मेदार ठहराये जाने से आक्रोश पनपने की जानकारी भी ज्ञापन ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌में‌ दिया गया है। नवाचारी गौठान न होने वाले ग्रामों के ग्रामीणों द्वारा अपने अनुपयोगी व अलाभप्रद मवेशियों सहित बाहर के ग्रामों से पहुंचने वाले ऐसे आवारा मवेशियों को धकेलते धकेलते इन‌ गोठानों तक पहुंचाने की वजह से हरेक ऐसे गोठानों में सैकड़ों की संख्या में ये मवेशिया अब तक इकट्ठे हो जाने की बात भी ज्ञापन में लिखा गया है। इन मवेशियों के संबंध में पूर्ववर्ती सरकार के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल सहित तात्कालिक मुख्य सचिव  अजय सिंह को सुझावयुक्त ज्ञापन सौंपे जाने व इस पर कार्यवाही लंबित रहने के‌ दौरान ही सरकार बदल जाने की जानकारी देते हुये पूर्ववर्ती सरकार के शासनकाल में इन मवेशियों के लिये अभ्यारण्य निर्माण की योजना को राजनैतिक नजरिया ‌‌‌से न ले तत्काल अमलीजामा पहनाने की दिशा में अग्रसर होने का आग्रह किया गया है ।

फौरी व्यवस्था के तहत इन‌ मवेशियों के लिये हरेक जनपद पंचायत स्तर पर  भूमि का चयन कर ऐसे मवेशियों को एक जगह इकट्ठा रखने व इनकी संपूर्ण जिम्मेदार जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को देने का सुझाव दिया गया है । ज्ञापन में अनुसंधान विस्तार वन मंडल के  लावारिस पड़े रोपणियों को इसके लिये उपयोग में लाते जाने का भी सुझाव देते हुते बताया गया है कि मंदिरहसौद थाना क्षेत्र के भीतर ही ग्राम कुरूद , बकतरा , मुनगी आदि में ऐसे कई‌ रोपणिया‌ हैं। जो 35-40 एकड़ में फैले हैं तथा चारदीवारी से‌ घिरे‌ होने के साथ पानी की व्यवस्था भी रखते हैं तथा वहां के वृक्ष इतने बड़े हो गये हैं जिन्हें मवेशिया नुकसान नहीं पहुंचा सकते व उन्हें चारा भी आसानी से मिल सकता है। इन इकट्ठे मवेशियों के गोबर से शासन को आय‌ भी होने के साथ-साथ इकट्ठे मवेशियों के देखरेख में गोठानों की तुलना में खर्च भी काफी कम आने ‌‌‌‌‌‌‌की‌ बात ज्ञापन में कहा गया है। प्रायोगिक तौर पर यहां से शुरुआत कर पूरे प्रदेश के ऐसे रोपणियों का‌ पता लगवा इस कार्य को अंजाम दिये जाने का भी सुझाव दिया गया है।

इसके अतिरिक्त ज्ञापन में प्रत्येक ग्राम के किसानों के मवेशियों के पहचान के लिये टैगिंग अविलंब करवाने , आवारा छोड़े जाने वाले मवेशियों के मालिकों पर ऐसे मवेशियों को अपने कब्जे में न रखें जाने पर उनको‌ मिलने वाले समस्त शासकीय सुविधाओं के लाभ से वंचित करने का कानूनी अधिकार पंचायत को देने कानून बनाने व वर्तमान में इन मवेशियों के साथ गौठानों में हो‌ रहे किसी परिस्थितिजन्य अनहोनी के लिये सरपंच व गौठान समिति के अध्यक्ष सहित पंचायत सचिवों के कंधों पर बंदूक रख चलाने वाले अधिकारियों के खिलाफ़ कार्यवाही का भी‌ सुझाव देते हुये प्रत्येक ग्राम के निस्तार पत्रक‌ में गौठानों व‌ चरागनों के लिये कानूनी तौर पर आरक्षित भूमियों पर हुये अवैध कब्जों को न हटवा अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये कानून सुरक्षित खाली पड़े ‌‌‌भूमियों पर गोठान निर्माण किये जाने पर क्षोभ प्रगट करते‌ हुये सुप्रीम कोर्ट के फैसले का‌ पालन करते हुये ग्रामों के निस्तारी भूमियों को बेजा कब्जों से मुक्त कराने का भी आग्रह किया गया है।

08-09-2020
11 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीण उतरे सड़क पर,अधिकरियों के आश्वासन के बाद वापस लौटे

बीजापुर। जिले के गंगालूर क्षेत्र के सात गांव पुसनार, मेटापाल, बुरजी, मल्लूर,गोंगला,हिरोली एवं नैनपाल के लगभग दो हज़ार ग्रामीण अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर गंगालूर में प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेश भूषा में नज़र आये। ग्रामीणों के हाथ में तीर धनुष के साथ देवी देवता फोटा भी थी। ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को कोसा। ग्रामीणों का कहना है कि इस कोरोना महामारी के चलते उन्हें इलाज़ सही तरह से नहीं मिल रहा है। इस से इस भयंकर बीमारी से लोगों की मृत्यु भी हो रही है। बच्चों के पढ़ाई पर भी असर हो रहा है। ग्रामीणों के मांगों में महंगाई,शिक्षा,फ़र्ज़ी मुठभेड़ और अत्याचार प्रमुख है। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर अमितनाथ त्यागी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मिर्ज़ा ज़ियारत बेग ने ग्रामीणों को समझया और हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया। उसके बाद ग्रामीण अपना धरना खत्म कर गांव लौटे।

 

05-09-2020
बस चलाने से ड्राइवर-कंडक्टरों ने किया इंकार, थमे पहियों से नहीं हटा ब्रेक

धमतरी। टैक्स माफी,किराया बढोत्तरी समेत अन्य मांगों को पूरा करने राज्य सरकार से मिले आश्वासन के बाद यात्री बसों का संचालन करने बस मालिक तैयार हो गए है लेकिन ड्राइवर-कंडक्टरों ने बस चलाने से इंकार कर दिया,जिसके चलते बसों के थमे पहियों से ब्रेक नहीं हट पाया है। बस चालक-परिचालक वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा बस स्टैंड में धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। उनकी मांग है कि शासन के द्वारा 6 माह का भत्ता प्रदान किया जाए। बताया कि बसों का संचालन 6 माह से बंद हैं, इस दौरान बस मालिकों से कोई सहयोग नही मिल पाया,कर्ज के बोझ तले दब गए है।

परिवार चलाने के लिए घर का समान तक बेचना पड़ा है। चूंकि बस मालिकों से मदद नहीं मिल पाई इसलिए शासन से भत्ते की मांग कर रहे है। इधर जिला बस एसोशिएशन के अध्यक्ष महावीर प्रसाद गुप्ता का कहना है कि ड्राइवर-कंडक्टरों का धरना जारी है। उन्होंने शासन से अपनी मांगे मनवाने 15 दिन का समय मांगा है तब तक बस का संचालन बंद रहेगा।  इधर बस बन्द होने से जरूरी काम के लिए आवागमन करने वालों को परेशान होना पड़ रहा है।

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