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12-08-2020
चार कंपनियों में कृषि विभाग की दबिश, मेसर्स ओम केमिकल्स को कारण बताओ नोटिस 

रायपुर। रासायनिक उर्वरकों की गुणवत्ता, भण्डारण एवं वितरण की स्थिति पर सतत् निगरानी बनाए रखने के लिए कृषि विभाग की ओर से संचालित जांच पड़ताल के सघन अभियान के तहत  बुधवार को अधिकारियों की टीम ने रायपुर के उरला स्थित मेसर्स ओम केमिकल्स में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 का उल्लंघन पाए जाने पर वहां 46 टन रासायनिक उर्वरक जिंक सल्फेट के जब्ती की कार्रवाई की। जांच पड़ताल की इस कार्रवाई के तहत निर्माता कंपनी मेसर्स ओम केमिकल्स उरला के रासायनिक उर्वरक जिंक सल्फेट के भण्डारण एवं विक्रय पर प्रतिबंध लगाए जाने के साथ ही कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में उर्वरक निरीक्षक एवं अन्य अधिकारियों के संयुक्त टीम ने आज रायपुर जिले के चार रासायनिक उर्वरक निर्माता कंपनियों के परिसर में आकस्मिक रूप से दबिश देकर वहां निर्मित एवं भण्डारित रासायनिक उर्वरकों का मुआयना किया और गुणवत्ता परीक्षण के लिए रासायनिक उर्वरकों के नमूने लेकर गुण नियंत्रण प्रयोगशाला भेजे जाने की कार्रवाई की। 

रायपुर जिले में रासायनिक उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच एवं भण्डारण की स्थिति की जांच-पड़ताल के लिए संयुक्त संचालक कृषि गयाराम एवं उप संचालक कृषि रायपुर आर एल खरे के नेतृत्व में गठित अलग-अलग टीमों ने आज रायपुर जिले के चार रासायनिक खाद निर्माता कंपनियों के परिसर में औचक रूप से पहुंचकर वहां जांच-पड़ताल की। उपसंचालक कृषि खरे के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने रासायनिक उर्वरक जिंक सल्फेट निर्माता कंपनी ओम केमिकल्स उरला के निरीक्षण के दौरान उर्वरक नियंत्रक आदेश 1985 का उल्लंघन पाए जाने के कारण वहां निर्मित 46 टन जिंक सल्फेट उर्वरक को जब्त करने के साथ ही गुणवत्ता परीक्षण के लिए दो नमूने भी लिए।

अधिकारियों की इस टीम ने इसके पश्चात् मेसर्स अल्फा क्रॉप साइंस उरला की जांच-पड़ताल कर वहां से मिश्रित उर्वरक के दो तथा कीटनाशी के 3 नमूने लेकर उसे गुण नियंत्रण प्रयोगशाला भेजने की कार्रवाई की। संयुक्त संचालक कृषि गयाराम के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने आज भनपुरी स्थित मेसर्स माधव एग्रो इंडस्ट्रीज तथा सरोरा रायपुर स्थित मेसर्स संगम इस्पात लिमिटेड का औचक निरीक्षण कर उक्त दोनों कंपनियों द्वारा उत्पादित रासायनिक उर्वरकों के गुणवत्ता परीक्षण के लिए नमूना लिए जाने की कार्रवाई की। उप संचालक कृषि रायपुर ने बताया कि किसानों को गुणवत्तायुक्त रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु विभागीय अधिकारियों द्वारा सघन जांच-पड़ताल तथा गुणवत्ता परीक्षण के लिए नमूने एकत्र किए जाने की कार्रवाई नियमित रूप से की जा रही है। उन्होंने बताया कि रायपुर जिले में अब तक विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की 121 नमूने निर्माता कंपनियों एवं विक्रय केन्द्रों से एकत्र कर गुणवत्ता परीक्षण की कार्रवाई की गई।

10-08-2020
संदिग्ध बीज पार्सल के संबंध में छत्तीसगढ़ में अलर्ट जारी

रायपुर। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विदेशों से आ रहे संदिग्ध बीज पार्सल के संबंध में जारी दिशा-निर्देश के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग ने अलर्ट जारी किया है। कृषि विभाग ने विभागीय अधिकारियों एवं राज्य के किसानों से किसी अज्ञात स्रोतों से प्राप्त होने वाले बीज इस संबंध में सतर्क रहने की सलाह दी है। राज्य के किसानों से अपील की गई है कि वे स्वयं के रखे हुए बीज अथवा राज्य की सहकारी सोसायटियों के माध्यम से प्राप्त होने वाले प्रमाणित बीज का ही उपयोग करें। अज्ञात स्रोतों से भ्रामक पैकेज के साथ अनचाहे/संदिग्ध बीज का उपयोग न करें।ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा यह अवगत कराया गया है कि विभिन्न देशों जैसे अमेरिका (यूएसए), कनाडा, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, जापान एवं कुछ यूरोपीय देशों में अवांछित स्रोतों से भ्रामक पैकिंग में अनचाहे/अवांछित अथवा संदिग्ध बीज पार्सल प्राप्त होने के खतरे के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई है। विगत कुछ माह से पूरी दुनिया में ऐसे संदिग्ध बीज के हजारों पार्सल मिले हैं।

यूएसए के कृषि विभाग ने इसे बीज बिक्री के फर्जी आंकड़े दिखाने का घोटाला (ब्रशिंग स्कैम) और कृषि तस्करी बताया है।यह भी अवगत कराया गया है कि उक्त अवांछित बीज पार्सल में विदेशी आक्रामक प्रजातियों के बीज हो सकते हैं अथवा उक्त अवांछित बीज पार्सल के माध्यम से विभिन्न रोगों अथवा रोगजनक कीटाणुओं को प्रवेश कराने का प्रयास किया जा सकता है, जो पर्यावरण, कृषि पारिस्थितिक तंत्र एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।अपर संचालक कृषि ने राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य बीज प्रमाणिकरण संस्था रायपुर, निदेशक अनुसंधान सेवाएं एवं निदेशक विस्तार सेवाएं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, संयुक्त संचालक कृषि एवं सभी जिले के उप संचालकों को इस मामले में सतर्कता बरतने तथा प्रदेश के किसानों एवं आम जनता को इस संबंध में जागरूक बनाने के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।

 

20-07-2020
बिहान बाजार का अवलोकन किया विधायक मोहन मरकाम और चंदन कश्यप ने

रायपुर/नारायणपुर। स्व सहायता समूह की महिलाओं की ओर से लगाये गए बिहान बाजार स्टॉल का अवलोकन किया विधायक मोहन मरकाम और विधायक चंदन कश्यप ने। उन्होंने समूह की महिलाओं से आत्मीय बातचीत की। बातचीत के दौरान समूह की महिलाओं ने बताया कि इस स्टॉल में उनके समूह की ओर से बनाई गई सामग्री बेचने के लिए रखी गई है। समूह की महिलाओं की ओर से तैयार किये गए साबुन, फिनायल, मसाले, आचार, कपड़े, चूड़ी आदि को सरकारी संस्थाओं और हाट बाजारों में बेचा जाता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले से अच्छी हुई है। महिलाओं ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत् उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने यह व्यवसाय शुरू किया है। विधायक मरकाम और विधायक चंदन ने समूह की महिलाओं के इस कार्य की हौसला अफजाई की और जैविक खाद खरीदे। समूह की महिलाओं ने अतिथियों को खुद से तैयार की गई सामग्री भेंट की। कार्यक्रम में आये अन्य अतिथियों ने कुछ घरेलू सामान खरीदा। कृषि विभाग की ओर से किसानों को मक्का बीज मिनीकिट का भी वितरण किया गया।

19-07-2020
किसानों ने सीखा पैड़ी ट्रांसप्लांटर मशीन से खेती करना, कृषि विभाग ने दिया प्रशिक्षण

बीजापुर। कृषि विभाग ने भैरमगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत तालनार में पैड़ी ट्रांसप्लांटर मशीन से किसानों को बुआई करने का प्रशिक्षण दिया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि इस मशीन से बुआई करने पर किसानों को काफी फायदे है। सबसे पहले तो मजदूरी की बचत होती है। कम लागत में बेहतर फसल तैयार की जा सकती है। छतीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को समय समय पर निःशुल्क इस तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर विधायक विक्रम उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों से कहा कि अब जमाना बदल गया है।

किसान अब वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने लग गए है,जिससे किसानों को अधिक फायदा मिल रहा है। अब भूपेश सरकार प्रदेश के किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित कर रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में भैरमगढ़ जनपद पंचायत अध्यक्ष दशरथ कुंजाम,सुखदेव नाग,आइटी सेल कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहित चौहान,तालनार सरपंच,कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों सहित किसान मौजूद थे।

 

18-07-2020
कृषि उत्पादन आयुक्त ने किसानों से कहा, खेतों की मेड़ पर करें अरहर खेती, होगी अतिरिक्त आय

रायपुर। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने शनिवार को दुर्ग जिले के अमलेश्वर-पाटन क्षेत्र का दौरा कर खरीफ फसलों की बुवाई की स्थिति का जायजा लिया और किसानों विशेषकर धान की रोपाई कर रही महिलाओं से मुलाकात की। डॉ.गीता ने किसानों से खरीफ फसल के लिए कृषि विभाग की ओर से प्रदान की जा रही आदान सामग्री के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों को खेतों की मेड़ पर अरहर की खेती का सुझाव दिया और कहा कि अरहर की खेती करके अतिरिक्त लाभ अर्जित किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को कृषि विभाग द्वारा अरहर बीज मिनी किट भी दिया जा रहा है। इस दौरान संचालक कृषि निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ थे।
 डॉ.एम. गीता ने अपने भ्रमण के दौरान रोका-छेका कार्यक्रम, गौठानों के संचालन की स्थिति, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि यह सब योजनाएं किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मानना है कि किसानों की खुशहाली से ही छत्तीसगढ़ में खुशहाली आएगी।

यही वजह है कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा यह योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को  5700 करोड़ की मदद दी जा रही है। प्रथम किश्त के रूप में 1500 करोड़ रुपये किसानों को दिए जा चुके हैं। आगामी 20 अगस्त को इस योजना के तहत किसानों को दूसरी किस्त की राशि भी दी जाएगी, ताकि किसान बेहतर तरीके से खेती किसानी की व्यवस्था कर सकें। रोका-छेका अभियान को किसानों के लिए फायदेमंद बताते हुए कहा कि खुले में चराई से फसलों का नुकसान होता है ।बरसात के दिनों में खुली चराई से पशुओं के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। फसलों की सुरक्षा और पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए रोका-छेका अभियान बहुत प्रभावी है। उन्होंने किसानों से इस अभियान को कड़ाई से लागू करने और अपने पशुओं को गौठान में भेजने का भी आग्रह किया। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ.एम. गीता ने कहा कि खुले में चराई पर रोक लगने से किसान धान की फसल के तुरंत बाद अन्य फसलों की खेती कर अतिरिक्त लाभ अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों और किसानों से खेतों की मेड़ पर दलहन-तिलहन की फसलों की खेती करने की अपील की। किसानों और ग्रामीणों को गोधन न्याय योजना के बारे में भी उन्होंने विस्तार से जानकारी दी और कहा कि सरकार निर्धारित दर पर किसानों और ग्रामीणों से गोबर क्रय करेगी, जिससे वर्मी कंपोस्ट खाद का निर्माण किया जाएगा। राज्य में गोधन न्याय योजना की शुरुआत 20 जुलाई हरेली पर्व के दिन से होगी।

07-07-2020
सोयाबीन जेसी-9305 बीज का भंडारण एवं विक्रय तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित

कवर्धा। जिला अनुज्ञप्ति अधिकारी (बीज) एवं उपसंचालक कृषि विभाग ने सोयाबीन अंकुरण प्रतिशत में अमानक (सब स्टेण्डर्ड) स्तर का पाये जाने के फलस्वरूप बीज नियंत्रण आदेश 1983 के खंड 11 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सेवा सहकारी समिति रणवीरपुर में सोयाबीन जेसी-9305 बीज का भंडारण एवं विक्रय तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया है। इसके तहत सहसपुर लोहारा विकासखंड के सेवा सहकारी समिति रणवीरपुर में सोयाबीन जेसी-9305 लॉट नंबर ओसीटी-19-34-77-37-सीआई में अंकुरण 41 प्रतिशत प्रतिशत पाये जाने के कारण इस बीज का भंडारण एवं विक्रय तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया है।

 

24-06-2020
बीजोपचार ड्रम, घड़ा विधि, प्लास्टिक बोरा इन विधियों से कर सकते हैं बीजों का उपचार

रायपुर/बेमेतरा। बीज अनेक रोगाणु जैसे-कवक, जीवाणु, विषाणु व सूत्रकृमि आदि के वाहक होते हैं, जो भंडारित बीज एवं खेत में बोये गए बीज को नुकसान पहुंचाते हैं। इससेे बीज की गुणवत्ता एवं अंकुरण के साथ-साथ फसल की बढ़वार, रोग से लड़ने की क्षमता, उत्पादकता एवं उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस​लिए बीज भंडारण के पूर्व अथवा बोवाई के पूर्व जैविक या रासायनिक अथवा दोनों के द्वारा बीज का उपचार किया जाना चाहिए। कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र ढोलिया (बेमेतरा) के अधिकारियों ने बताया कि बीजोपचार विभिन्न माध्यम से किया जाता है। ’’बीजोपचार ड्रम’’में बीज और दवा डालकर ढक्कन बंद करके हैंडल द्वारा ड्रम को 5 मिनट तक घुमाया जाता है। इस विधि से एक बार में 25-30 किलो ग्राम बीज उपचार किया जा सकता है। बीजोपचार ड्रम कृषि विभाग के माध्यम से अनुदान में अथवा कृषि सेवा केन्द्र से प्राप्त किया जा सकता है।

बीज उपचार की पारम्परिक विधि ’’घड़ा विधि’’ है। इस विधि से बीज और दवा को घड़ा में निश्चित मात्रा में डालकर घड़े के मुंह को पालीथीन से बांधकर 10 मिनट तक अच्छी तरह से हिलाया जाता है। थोड़ी देर बाद घड़े का मुंह खोलकर उपचारित बीज को अलग बोरे में रखा जाता है। बीज उपचार की अन्य विधि ’’प्लास्टिक बोरा’’ विधि है। इस विधि में बीज और दवा को डालकर बोरे के मुंह को रस्सी से बांध दिया जाता है और 10 मिनट तक अच्छी तरह हिलाने के बाद जब दवा की परत बीज के ऊपर अच्छी तरह लग जाये तब बीज को भंडारित अथवा बुआई की जाती है। बीज का उपचार रासायनिक विधि से भी किया जाता है। इस विधि में 10 लीटर पानी में कार्बेन्डाजाइम या वीटावेक्स की निर्धारित मात्रा 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से घोल बनाकर गन्ना, आलू, अन्य कंद वाले फसल को 10 मिनिट तक घोल में डुबाकर बुआई की जाती है। धान बीजोपचार 17 प्रतिशत नमक घोल से किया जाता है।

इस विधि में साधारण नमक के 17 प्रतिशत घोल में बीज को डुबोया जाता है, जिससे बदरा, मटबदरा, कीट से प्रभावित बीज, खरपतवार के बीज ऊपर तैरने लगते है और स्वस्थ्य एवं हष्ट पुष्ट बीज नीचे बैठ जाता है, जिसे अलग कर साफ पानी से धोकर भंडारित करें अथवा सीधे खेत में बुआई करें। बीज जनित बीमारी जैसे उकटा, जड़गलन, आदि के उपचार के लिए जैविक फफूंदनाशी जैसे-ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास से 5 से 10 ग्राम प्रति किलो ग्राम बीज की दर से उपचारित करें, इससे उकटा अथवा जड़ गलन से फसल प्रभावित नहीं होती है।बीजोपचार के लाभ -बीज एवं मृदा जनित रोग जैसे- ब्लास्ट, फाल्सस्मट (लाई फूटना) उकटा, जड़ गलन आदि बीमारी से फसल प्रभावित नहीं होती है। बीजोपचार करने से बीज के उपर एक दवाई की परत चढ़ जाती है जो बीज को बीज अथवा मृदा जनित सूक्ष्म जीवों के नुकसान से बचाती है। बीज की अकुंरण क्षमता को बनाये रखने के लिये बीजोपचार जरूरी होता है, क्योंकि बीज उपचार करने से कीड़ों अथवा बीमारियों का प्रकोप भंडारित बीज में कम होता है। बुआई पूर्व कीटनाशी से बीज का उपचार करने पर मृदा में उपस्थित हानिकारक कीटों से बीज की सुरक्षा होती है। उपचारित बीज की बुआई करने से बीज की मात्रा कम लगती है एवं बीज स्वस्थ्य होने के कारण उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि होती है।

19-06-2020
ग्राम पंचायत कासोली में रोका छेका कार्यक्रम शुरु

गीदम। रोका छेका कार्यक्रम के तहत जनपद पंचायत गीदम अन्तर्गत ग्राम पंचायत कासोली 02 जपोड़ी गौठान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 30 किसानों को राम तिल, तीन किसान को 50-50kg अदरक, हल्दी, रागी की बीज वितरण किया गया है। सभी ग्रामीणों को फलदार पौधा आम, काजू, आंवला, मुनगा नींबू के पौधे भी वितरण किया गया है। साथ-साथ राहुल गांधी के जन्म दिवस के अवसर पर गौठान में फलदार पौधे रोपे गए। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, जनपद सदस्य राजेश कश्यप, उपसरपंच घासी राम कश्यप, पंच सोमनाथ भास्कर, नीलमन कश्यप, कलाराम अटामी एवं कृषि विभाग, उधान विभाग के अधिकारी कर्मचारी व ग्रामीण उपस्थित थे।

17-06-2020
टिड्डी दल का जिले में प्रवेश, डीजे बजाकर,फटाका फोड़कर भगाया जा रहा

राजनांदगांव। मध्यप्रदेश के बालाघाट की ओर से टिड्डी दल का छुईखदान ब्लॉक में प्रवेश हुआ है। तेज आवाज में डीजे बजाकर, फटाका फोड़कर व दवा का छिड़काव कर इन्हें भागने का प्रयास वन विभाग, कृषि विभाग व ग्रामीण कर रहे हैं। वन विभाग सल्हेवारा द्वारा कीटनाशक दवा का छिड़काव भाजी डोंगरी नर्सरी में किया जा रहा है,जिसके चलते टिड्डी दल गंडई, कबीरधाम की ओर चले गए हैं।

16-06-2020
जिले के हर दूसरे गांव में कृषि दवाई केंद्र, नाममात्र की कार्रवाई कर थपथपा रहे पीठ

कवर्धा। सप्ताह भर पहले कृषि विभाग ने गांव-गांव में अवैध रूप से बिना लाइसेंस के संचालित कृषि दवाई दुकान पर कार्रवाई करने टीम बनाई थी, लेकिन अब तक टीम ने गिनती के ही दुकानों पर कार्रवाई कर अपचारिकता पूरी कर दी। इसके कारण कृषि विभाग के अफसरों पर भी सवाल उठ रहे हैं। जी हां कवर्धा जिले में मात्र 149 कृषि दवाई दुकान है जहाँ फसल के बीज व फसल छिड़काव के लिए दवाई बेच सकते हैं। लेकिन जिले में तो हर दूसरे गांव में अवैध रूप से बिना परमिशन लाइसेंस के ही दवाई दुकान खुले हुए है। इसके लिए कृषि विभाग ने टीम बनाई थी लेकिन टीम ने गिनती के ही कार्रवाई कर औपचारिकता निभा दी। इसके कारण गांव-गांव में बेधड़क दवाई बेची जा रही है। जबकि कृषि दुकानों में अमानक दवाई के खाद बीज भी बेचा जा रहा है।

इसके बाद भी कृषि विभाग के अफसर कार्रवाई करने कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। दो ब्लाक के 8 केंद्रों में कार्रवाई कृषि विभाग द्वारा अवैध कृषि केंद्रों में कार्रवाई करने टीम बनाई थी। यह टीम केवल दो ब्लाक के 8 दुकानों में निरीक्षण किया है। बोड़ला व पोड़ी में इसी प्रकार कवर्धा व मझगांव में कार्रवाई किया गया। इसके बाद लोहारा व पंडरिया ब्लाक में कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि हर दूसरे गांव में अवैध कृषि केंद्र संचालित हो रहे हैं। जिस पर विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। कृषि विभाग के उपसंचालक एमडी डड़सेना ने बताया कि अवैध कृषि दवाई व खाद बीज दुकानों पर कार्रवाई किया जा रहा है। इसके लिए टीम का गठन हुआ है।

28-05-2020
टिड्डी दल के संभावित आक्रमण को लेकर कृषि विभाग ने दी समसामयिक सलाह....

धमतरी। जिले में टिड्डी दल के संभावित प्रकोप को दृष्टिगत करते हुए कृषि विभाग द्वारा बचाव की सलाह दी गई है। उप संचालक कृषि ने बताया कि रात्रि के समय में ये टिड्डी दल खेतों में रूककर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। जमीन में लगभग 500 से 1500 अण्डे प्रति मादा कीट देकर सुबह तक उड़कर दूसरी ओर चले जाते हैं, जहां लाखों की संख्या में पेड़-पौध एवं अन्य वनस्पति को खाकर आगे बढ़ जाते हैं। उन्होंने इसके नियंत्रण के लिए सलाह दी है कि कृषक अपने स्तर पर गांव में समूह बनाकर खेतों में रात्रिकालीन समय में निगरानी रखें। यदि टिड्डी दल का प्रकोप हो तो शाम सात से रात नौ बजे के मध्य यह दल विश्राम के लिए बैठते हैं, जिनकी पहचान करने के लिए सतत् निगरानी रखें। जैसे ही किसी गांव में टिड्डी दल के आक्रमण की जानकारी मिलती है तो इसकी जानकारी कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र से को तत्काल दें। उन्होंने बताया कि टिड्डियों का हमला होने पर कृषक टोली बनाकर परंपरागत उपाय जैसे ढोल, डीजे बजाकर अथवा डिब्बे आदि के माध्यम से शोर मचाकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग कर तेज आवाज के जरिए खेतों से भगाया जा सकता है। यदि शाम के समय टिड्डी दली का प्रकोप हो गया हो तो दल के विश्राम अवस्था में सुबह तीन से पांच बजे के बीच तुरंत क्लोरोपाइरीफाॅस 20 ई.सी. 200 एमएल या लेंब्डासायहेलोथ्रिन 5 ईसी 400 एमएल या डायफ्लूबेंजूसन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। साथ ही कीटनाशक पावडर फेनबिलरेट 0.4 प्रतिशत 20-25 किग्रा या क्यूनाॅलफास 0.5 प्रतिशत 25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर का भी भुरकाव किया जा सकता है।

 

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