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27-10-2020
विधानसभा विशेष सत्र : भूपेश बघेल ने कहा-किसानों की बात हो तो दल नहीं दिल देखा जाना चाहिए

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से लाया गया नया कृषि कानून किसानों के लिए नहीं है। केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार की दुहाई देती है। जब एक राष्ट्र-एक बाजार है, तो कीमत भी एक होनी चाहिए। यदि केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार-एक कीमत की व्यवस्था लागू कर दें, तो हमें कानून में संशोधन करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तीन नए कानून बनाकर केन्द्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। केन्द्र सरकार का कानून किसानों को ठगने वाला कानून है। केन्द्र सरकार के नए कानूनों से किसानों के मन में संशय पैदा हो गया है। केन्द्र सरकार को इस बात की गारंटी देनी चाहिए कि किसानों के उपज को कोई भी समर्थन मूल्य से नीचे नहीं खरीदेगा। मुख्यमत्री भूपेश बघेल ने सदन में केन्द्र सरकार के पारित तीनों कृषि कानूनों की खामियों की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि हम अपने किसानों के हितों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, छत्तीसगढ़ के व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग भोले-भाले है। लोग ठगाए मत, इसलिए हम मंडी अधिनियम में संशोधन कर किसानों और आम उपभोक्ता के हितों की रक्षा की व्यवस्था कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान पूरे सदन में खामोशी छायी रही। सदन के सदस्य, किसानों के हित में मुख्यमंत्री के तर्कों को बड़े ही गौर से सुनते नजर आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब छत्तीसगढ़ की बात हो, किसानों की बात हो, तो दल नहीं, दिल देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि से छत्तीसगढ़ के किसानों को लाभ देने के मामले में केन्द्र सरकार द्वारा अड़ंगा लगाया जा रहा है। केन्द्र सरकार किसानों को भ्रमित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कृषि के क्षेत्र में जो तीन नए कानून बनाए है, उसकी जरूरत क्या थी? क्या किसी किसान संगठन ने या किसी राजनीतिक दल ने कानून में बदलाव की मांग की थी? कोरोना संकट काल में जब देश के लोग समस्याओं से जूझ रहे थे, ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार ने किसानों के हितों की परवाह न करते हुए कृषि के क्षेत्र में तीन नए अध्यादेश जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि इसके चलते केन्द्र सरकार के एक सहयोगी दल की मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। इन्ही तीनों कानूनों के चलते एनडीए के सहयोगी दल नाराज है। एनडीए के कई केन्द्रीय मंत्री भी इस कानून से सहमत नहीं है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार का कहना है कि कृषि के तीनों नए कानून, किसानों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम पूरे देश में फैलाया जा रहा है। इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है। यह कानून पूंजीपतियों को लाभ देने वाला कानून है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 2006 से यह कानून लागू है। आज हालत यह है कि समर्थन मूल्य तो दूर की बात, बिहार में 1300 रुपए क्विंटल से अधिक मूल्य पर किसानों का धान खरीदने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि जब इस कानून से बिहार के किसानों का कोई भला नहीं हुआ तो देश के किसानों का भला होने वाला नहीं है।

 

23-10-2020
भूपेश सरकार ने उद्योग नीति में किए संशोधन,इस्पात उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज

रायपुर। नवीन औद्योगिक नीति में 2019-24 में कुल 21 बिंदुओं पर संशोधन अधिसूचित किए गए हैं। इसमें प्रमुख रूप से लघु उद्योगों को कैपिटल सबसिडी में नगद या जीएसटी की पूर्ति का विकल्प होगा। अभी तक यह नगद अनुदान की सूक्ष्म उद्योगों के लिए पात्रता थी। शासन ने विभिन्न औद्योगिक संगठनों की मांगों को स्वीकार करते हुए लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योगों को नगद या जीएसटी में अनुदान देने का निर्णय लिया है। अनूसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणी के उद्यमियों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की गई है। इसके तहत पिछली औद्योगिक नीतियों से अधिक लाभ दिया जाएगा। पुराने उद्योगों के विस्तार पर भी नए उद्योगों की तरह सरकार प्रोत्साहन देगी। उद्योगों को अब राज्य से अन्य देशों से निर्यात करने के लिए परिवहन में पैसा लगता था। उसमें सरकार परिवहन लागत में अनुदान देगी। इसके तहत प्रतिवर्ष 20 लाख रूपए का अनुदान सरकार देगी।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से नई औद्योगिक नीति में एमएसएमई को पृथक रूप से परिभाषित किया गया है। वृहद सेवा उद्यम की परिभाषा भी जारी की गई। निवेशकों की मांग अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान को सूक्ष्म उद्योगों तक सीमित न कर लघु व मध्यम श्रेणी के उद्योगों के लिए भी प्रावधानित किया गया। विद्यमान उद्योगों के विस्तार करने पर स्थायी पूंजी निवेश की गणना अवधि को भी बढ़ा दिया गया है। राज्य के उद्योगों की रीढ़ इस्पात क्षेत्र को बढ़ावा देने मेगा, अल्ट्रामेगा उद्योगों के लिए के तहत विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की गई है। ये वो इकाईयां होगी जो राज्य शासन के साथ एमओयू निष्पादित करेंगे। उद्योगों में नवीन विचारधारा को समहित करने और नव रोजगार सृजित करने छत्तीसगढ़ राज्य स्टार्ट-अप पैकेज को नीति में स्थान दिया गया है। इन स्टार्ट-अप्स को अन्य उद्योगों से अधिक सुविधाएं कम औपचारिकता के साथ प्रदान की जाएगी। समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज जारी किया गया है।

इसके तहत अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों को पूर्व की सुविधाओं से अधिक लाभ प्राप्त होगा। कोर सेक्टर के माध्यम, वृहद,मेगा,अल्ट्रामेगा उद्योगों को अब किसी भी श्रेणी के स्थान में उद्योग स्थापित करने पर विद्युत शुल्क में पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी। अब परिवहन अनुदान के लिए इकाई का शत प्रतिशत निर्यातक होना आवश्यक नहीं रह गया है। सामान्य वर्ग के उद्यमियों की ओर से स्थापित किए जाने वाले पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को उद्योग विभाग/सीएसआईडीसी के औद्योगिक क्षेत्रों में भू-आवंटन पर भू-प्रीमियम प्रदान किया जाएगा। उद्यमियों की ओर से बहुप्रतीक्षित भूमि हस्तांतरण शुल्क में कमी कर दी गई है। साथ ही उत्पादन प्रारंभ करने की अधिकतम सीमा में भी वृद्धि की गई है।

 

11-10-2020
प्रदेश सरकार लगातार बढ़ा रही है पत्रकारों के लिए सुविधाएं, पत्रकार सुरक्षा कानून की प्रक्रिया अंतिम चरण में

रायपुर। प्रदेश सरकार पत्रकारों के लिए लगातार बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। जनसंपर्क विभाग ने दी जाने वाली सुविधाओं की पात्रता एवं प्रावधानों में संशोधन कर ज्यादा से ज्यादा पत्रकारों को इनके दायरे में लाया जा रहा है। प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए पिछले वर्ष ही वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि को पांच हजार रुपए से बढ़ाकर दस हजार रुपए प्रति माह किया है। अधिमान्यता नियमों में संशोधन कर विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। पत्रकार कल्याण कोष से जरूरतमंद पत्रकारों को आर्थिक सहायता की सीमा को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए किया गया है। राज्य शासन के श्रम विभाग ने पत्रकारों के हित में उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का आदेश जारी किया है।

प्रदेश में कार्यरत पत्रकारों को श्रमजीवी पत्रकार के रूप में पहचान देने एवं उनके काम में सहूलियत के लिए साल भर पहले नए अधिमान्यता नियम लागू किए गए हैं। मीडिया के बदलते स्वरूप को देखते हुए टीवी चैनलों, वेब-पोर्टल, समाचार पत्रिका और समाचार एजेंसी के पत्रकारों को भी अधिमान्यता देने का प्रावधान किया गया है। मीडिया संस्थानों के लिए अधिमान्यता कोटा करीब-करीब दुगुना कर दिया गया है। नए नियमों के तहत राज्य में पहली बार विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। साथ ही लंबे समय तक इस पेशे में रहे सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए दीर्घकालिक सेवा पत्रकार अधिमान्यता भी शुरू किया गया है। नए अधिमान्यता नियमों के फलस्वरूप वर्तमान में 233 राज्य स्तरीय और 287 जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार हैं।

पत्रकारों को गंभीर बीमारी के इलाज, वृद्धावस्था में आर्थिक संकट, दैवीय विपत्ति जैसी परिस्थितियों में मदद का दायरा बढ़ाने के लिए पत्रकार कल्याण कोष के नियमों में पिछले वर्ष व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब आर्थिक सहायता की सीमा 50 हजार रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दी गई है। साथ ही दंगों, बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों में समाचार कवरेज के दौरान कैमरा एवं अन्य उपकरणों के नुकसान पर भी आर्थिक मदद का प्रावधान नए नियम में जोड़ा गया है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश के 49 पत्रकारों को साढ़े 41 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है।

राज्य शासन द्वारा निर्भीक एवं निष्पक्ष पत्रकारिता में मदद के लिए छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून तैयार करवाया जा रहा है। इसके लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायधीश न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायधीश, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, वरिष्ठ पत्रकार और महाधिवक्ता की 12 सदस्यीय समिति ने कानून का प्रथम प्रारूप तैयार कर माह नवम्बर-2019 में राज्य के पत्रकारों, पत्रकार संगठनों और आम नागरिकों की राय को शामिल कर इसका द्वितीय प्रारूप तैयार किया है। अभी इसके द्वितीय प्रारूप पर ऑनलाइन सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं, जिसके आधार पर इस कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा। पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

10-10-2020
पत्रकार सुरक्षा कानून की प्रक्रिया अंतिम चरण में,छत्तीसगढ़ सरकार लगातार कर रही है सुविधाओं में इजाफा

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार पत्रकारों के लिए लगातार बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। जनसंपर्क विभाग की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं की पात्रता और प्रावधानों में संशोधन कर ज्यादा से ज्यादा पत्रकारों को इनके दायरे में लाया जा रहा है। प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए पिछले वर्ष ही वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि को पांच हजार रूपए से बढ़ाकर दस हजार रुपए प्रति माह किया है। अधिमान्यता नियमों में संशोधन कर विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। पत्रकार कल्याण कोष से जरुरतमंद पत्रकारों को आर्थिक सहायता की सीमा को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए किया गया है। राज्य शासन के श्रम विभाग ने पत्रकारों के हित में उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का आदेश जारी किया है।

प्रदेश में कार्यरत पत्रकारों को श्रमजीवी पत्रकार के रूप में पहचान देने और उनके काम में सहूलियत के लिए साल भर पहले नए अधिमान्यता नियम लागू किए गए हैं। मीडिया के बदलते स्वरूप को देखते हुए टीवी चैनलों, वेब-पोर्टल, समाचार पत्रिका और समाचार एजेंसी के पत्रकारों को भी अधिमान्यता देने का प्रावधान किया गया है। मीडिया संस्थानों के लिए अधिमान्यता कोटा करीब-करीब दुगुना कर दिया गया है। नए नियमों के तहत राज्य में पहली बार विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। साथ ही लंबे समय तक इस पेशे में रहे सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए दीर्घकालिक सेवा पत्रकार अधिमान्यता भी शुरू किया गया है। नए अधिमान्यता नियमों के फलस्वरूप वर्तमान में 233 राज्य स्तरीय और 287 जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार हैं।
पत्रकारों को गंभीर बीमारी के इलाज, वृद्धावस्था में आर्थिक संकट, दैवीय विपत्ति जैसी परिस्थितियों में मदद का दायरा बढ़ाने के लिए पत्रकार कल्याण कोष के नियमों में पिछले वर्ष व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब आर्थिक सहायता की सीमा 50 हजार रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दी गई है। साथ ही दंगों, बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों में समाचार कवरेज के दौरान कैमरा और अन्य उपकरणों के नुकसान पर भी आर्थिक मदद का प्रावधान नए नियम में जोड़ा गया है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश के 49 पत्रकारों को साढ़े 41 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है।वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि की राशि दुगुनी करने के साथ ही इसके दायरे में अधिक से अधिक पत्रकारों को लाने के लिए पात्रता की शर्तें शिथिल की गई हैं। योजना के तहत पहले जहां हर माह पांच हजार रूपए दिए जाते थे, वहीं अब इसे बढ़ाकर दस हजार रुपए कर दिया गया है। पात्रता के लिए आयु सीमा भी 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष की गई है। पहले इस योजना में शामिल पत्रकारों की पात्रता की हर पांच वर्ष में समीक्षा की जाती थी। नए नियमों के तहत समीक्षा का प्रावधान समाप्त करते हुए अब इसे आजीवन कर दिया गया है। योजना में शामिल पत्रकारों को अक्टूबर-2019 से हर महीने दस हजार रुपए की सम्मान निधि दी जा रही है। वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि योजना के फलस्वरूप दो वर्ष पूर्व जहां 8 वरिष्ठ पत्रकारों को योजना का लाभ मिल रहा था, अब यह संख्या 23 हो गई है।
राज्य शासन की ओर से निर्भीक एवं निष्पक्ष पत्रकारिता में मदद के लिए छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून तैयार करवाया जा रहा है। इसके लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायधीश न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायधीश, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, वरिष्ठ पत्रकार और महाधिवक्ता की 12 सदस्यीय समिति ने कानून का प्रथम प्रारूप तैयार कर माह नवंबर-2019 में राज्य के पत्रकारों, पत्रकार संगठनों और आम नागरिकों की राय को शामिल कर इसका द्वितीय प्रारूप तैयार किया है। अभी इसके द्वितीय प्रारूप पर आनलाइन सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं जिसके आधार पर इस कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा। पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

 

30-09-2020
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक पर किए हस्ताक्षर

रायपुर।  राज्यपाल अनुसुईया उइके ने बुधवार को छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक-2020 पर हस्ताक्षर किए। इसके अनुसार अध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य, उस तारीख से, जिस पर वह अपना पद ग्रहण करता है, राज्य सरकार के प्रसाद पर्यन्त पद धारण करेगा।  यह छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995 की धारा 4 की उपधारा (1) का संशोधन है। इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य पर होगा और यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा।

 

 

16-09-2020
लोकसभा में पास हुआ बैंकिंग विनियम (संशोधन) विधेयक, 2020, निर्मला सीतारमण ने कहा-होगा बेहतर प्रबंधन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में बैंकिंग विनियमन संशोधन विधेयक, 2020 को पारित कर दिया। लोकसभा में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक सहकारी बैंकों को नियंत्रित नहीं करता है। सहकारी बैंकों का विनियमन 1965 से ही आरबीआई के पास है। हम कुछ नया नहीं कर रहे। जो नया कर रहे हैं वह जमाकर्ताओं के हित में है। इस बिल में जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिये बेहतर प्रबंधन और समुचित नियमन के जरिये सहकारी बैंकों को बैकिंग क्षेत्र में हो रहे बदलावों के अनुरूप बनाने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक इससे संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया है। विपक्षी दलों के सदस्यों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या राज्यों से विचार विमर्श किया गया, वित्त मंत्री ने कहा कि जो विषय समवर्ती सूची में होते हैं, उन्हीं पर राज्यों से विमर्श करने की जरूरत होती है लेकिन यह मुद्दा संघ सूची है और इसके लिये राज्यों से चर्चा की जरूरी नहीं है।

बता दें कि, यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अवश्यकता पड़ने पर सहकारी बैंकों के प्रबंधन में बदलाव करने का अधिकार देता है। इससे सहकारी बैंकों में अपना पैसा जमा करने वाले आम लोगों के हितों की रक्षा होगी। विधेयक में कहा गया है कि आरबीआई को सहकारी बैंकों के नियमित कामकाज पर रोक लगाये बिना उसके प्रबंधन में बदलाव के लिये योजना तैयार करने का अधिकार मिल जायेगा। कृषि सहकारी समितियां या मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में काम करने वाली सहकारी समितियां इस विधेयक के दायरे में नहीं आयेंगी। वहीं विपक्ष ने इस विधेयक को सहकारी संगठनों को लेकर राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप बताया था। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार सहकारी बैंकों के निजीकरण का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे सहकारी बैंकों की स्वायत्तता खतरे में पड़ जायेगी।

 

 

04-07-2020
कोरोना के कारण इंदिरा कला व संगीत विवि खैरागढ़ की परीक्षा पद्धति और पीएचडी के प्रावधानों में संशोधन

रायपुर। कोविड-19 महामारी के प्रभाव को देखते हुए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की परीक्षा पद्धति और पीएचडी के प्रावधानों में संशोधन किया गया है। यह संशोधन अध्यादेश क्रमांक-18 और अध्यादेश क्रमांक-60 में किया गया है। इसके अनुसार अंतिम वर्ष सेमेस्टर पाठ्यक्रम को छोड़कर स्नातक (यूजी)/स्नातकोत्तर (पीजी) एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के सभी मध्यवर्ती सेमेस्टर और वर्ष के अंत के परीक्षाओं का मूल्यांकन विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों से निर्धारित किए गए मूल्यांकन पद्धति के आधार पर किया जाएगा। राज्यपाल ने निर्देशित किया है कि विद्यार्थियों को परीक्षा और अन्य संबंधित गतिविधियों के संचालन के बारे में कम से कम 15 दिवस पहले सूचित किया जाए। जिन विद्यार्थियों की पीएचडी थीसिस की समय-सीमा समाप्त हो गई है या कोरोना महामारी की अवधि के दौरान समाप्त हो रही है, उन्हें थीसिस प्रस्तुत करने की निर्धारित तारीख से छह माह की अनुमति दी जाए।

यह प्रावधान यूजी,पीजी एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष, अंतिम सेमेस्टर और विश्वविद्यालय से संचालित सभी अमहाविद्यालयीन परीक्षाओं पर लागू नहीं होंगे। इनके लिए परीक्षा आयोजन का निर्णय कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों के आधार पर लिया जाएगा। इन संशोधनों के अनुसार 14 मार्च 2020 से पहले आयोजित सभी परीक्षाओं का मूल्यांकन अध्यादेशों में निर्धारित मापदण्ड/प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अंतिम वर्ष/सेमेस्टर पाठ्यक्रम को छोड़कर वर्ष 2019-20 के स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के अन्य सभी मध्यवर्ती सेमेस्टर और वर्ष के अंत की परीक्षाओं का मूल्यांकन, विश्वविद्यालय-महाविद्यालय द्वारा किये गए आंतरिक मूल्यांकन में छात्र द्वारा प्राप्त 50 प्रतिशत ग्रेडिंग अंक और शेष 50 प्रतिशत अंक पिछले सेमेस्टर या वर्ष में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। यदि, जहां पिछले सत्र में विषय उपलब्ध नहीं है, तो वर्तमान सत्र के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर 100 प्रतिशत मूल्यांकन किया जायेगा। कोई छात्र ग्रेड या अंकों में सुधार करना चाहे, तो वह अगले सेमेस्टर-वर्ष के दौरान ऐसे विषयों के लिए विशेष परीक्षा में उपस्थित हो सकता है या वह विश्लेषण के बाद विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किया गया कोई अन्य अवसर में शामिल हो सकता है।

अंतिम सेमेस्टर का कोई भी छात्र किसी सेमेस्टर में बैक होने की स्थिति में उसका मूल्यांकन विशेष प्रावधान के खंड-4 के अनुसार किया जाएगा। विद्यार्थियों की उपस्थिति के संबंध में यह माना गया है कि न्यूनतम प्रतिशत उपस्थिति की आवश्यकता होने पर लॉकडाउन की अवधि को सभी छात्रों की उपस्थिति माना जाएगा। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर वर्तमान शैक्षणिक सत्र के परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, विशेष उपबंधों के तहत स्वचालित रूप से रद्द कर दिया जाएगा। महामारी के प्रभाव के परिणाम स्वरूप पीएचडी से संबंधित प्रावधानों में अनुमोदन के अनुसार संशोधन किया गया है। यह संशोधन अध्यादेश क्रमांक-60 से संबंधित है। इसके अनुसार पीएचडी चिरायु-स्वर परीक्षाएं वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएगी। पीएचडी डिग्री के लिए वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से वायवा-वायस परीक्षा आयोजित करते समय अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्यों, विभाग के सभी संकाय सदस्यों, अनुसंधान विद्वानों एवं अन्य विशेषज्ञ/शोधकर्ताओं द्वारा भाग लिया जाएगा। सभी के नियत रिकार्ड, जिसमें विशेषज्ञ ने  हस्ताक्षरित रिपोर्ट शामिल है, उसी को परीक्षा संचालित करने के लिए परीक्षक नियुक्त किया जाएगा। अनुसंधान विद्वानों के लिए न्यूनतम उपस्थिति के संबंध में लॉकडाउन की अवधि को भी न्यूनतम प्रतिशत माना जाएगा।

 

01-07-2020
भूपेश सरकार वेब पोर्टल से संबंधी विज्ञापनों में करेगी संशोधन, समिति का किया गठन

रायपुर। राज्य सरकार ने न्यूज वेबसाइट व वेब पोर्टल से संबंधी विज्ञापनों में आवश्यक संशोधन, विचार विमर्श और परिवर्तन करने समिति का गठन किया है। 8 सदस्यीय यह समिति 1 माह के भीतर आवश्यक संशोधन के लिए अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। समिति में छत्तीसगढ़ संवाद, जनसंपर्क संचालनालय, चिप्स और वरिष्ठ पत्रकारों को शामिल किया गया है। इस संबंध में राज्य शासन के जनसंपर्क विभाग के सचिव डीडी सिंह ने आदेश जारी किया है।

29-06-2020
भूपेश सरकार ने किया लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 में संशोधन, अधिसूचना जारी

रायपुर। राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 में संशोधन किया है। इसके तहत प्रत्येक विभागों में गठित की जाने वाली पदोन्नति एवं छानबीन समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रत्येक प्रवर्ग से पृथक-पृथक एक-एक सदस्य को रखा जाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 के नियम 11 में संशोधन कर संशोधित अधिसूचना का प्रकाशन 18 जून को छत्तीसगढ़ राजपत्र में किया गया है। अधिसूचना जारी होने की तिथि से यह नियम प्रभावशील हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में मंत्रालय महानदी भवन से सभी विभागों, अध्यक्ष राजस्व मंडल बिलासपुर, सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को परिपत्र जारी कर नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

 

28-05-2020
अशोक द्विवेदी को फिर से मिला राजस्व का प्रभार, हिमांशु देशमुख होंगे भवन निर्माण अधिकारी

भिलाई। नगर पालिक निगम, भिलाई के आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने कुछ अधिकारियों के कार्यों में फेरबदल किया है। उन्होंने पूर्व जारी आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए एके द्विवेदी, उपायुक्त नगर पालिक निगम, भिलाई को उनके वर्तमान कार्यों के साथ-साथ प्रभारी अधिकारी राजस्व/संपदा विभाग एवं भवन अनुज्ञा शाखा का दायित्व निर्वहन करने के लिए आदेशित किया है एवं जोन 01, 02, 03 एवं जलकार्य की विकास एवं निर्माण कार्य संबंधी कार्यों की नस्तियां अब इनके माध्यम से प्रस्तुत नहीं होंगी।जल कार्य की नस्तियां तरुण पाल लहरे, उपायुक्त, नगर पालिक निगम, भिलाई को प्रभारी अधिकारी संपदा/राजस्व/भवन अनुज्ञा शाखा के दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। जोन 01, 02, 03 एवं जलकार्य की विकास एवं निर्माण कार्य संबंधी नस्तियों को तरुण पाल लहरे, उपायुक्त के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए आयुक्त ने आदेशित किया है।

निगमायुक्त रघुवंशी ने हिमांशु देशमुख, सहायक अभियंता, निगम भिलाई को भवन निर्माण अधिकारी का दायित्व निर्वहन किये जाने के लिए आदेशित किया है। इस आदेश के साथ ही सहायक अभियंता सुनील जैन को भवन निर्माण अधिकारी के दायित्व से मुक्त कर दिया गया है।विदित है कि उपायुक्त अशोक द्विवेदी के द्वारा जनगणना महत्वपूर्ण कार्य मे संलग्न होने के दौरान राजस्व एवं संपदा विभाग का प्रभार तरुण पाल लहरें को दिया गया था।

15-05-2020
अन्त्योदय राशन कार्ड में प्रति सदस्य को मिलेगा 5 किलो अतिरिक्त चावल

रायपुर। सीएम भूपेश बघेल के निर्देश पर सरकार ने अन्त्योदय राशनकार्डधारियों के लिए पूर्व में जारी अतिरिक्त खाद्यान्न आबंटन में संशोधन कर अन्त्योदय राशन कार्डों के लिए अप्रैल से जून तक 5 किलो प्रति सदस्य अतिरिक्त खाद्यान्न आबंटन जारी करने का निर्णय लिया है। अंत्योदय राशनकार्डधारी परिवारों के सभी सदस्यों को अप्रैल से जून 2020 तक 3 माह का 5 किलो प्रति सदस्य के हिसाब से अतिरिक्त खाद्यान्न आबंटन जारी किया है। अतिरिक्त निःशुल्क चावल माह जून के लिए जारी नियमित आबंटन के साथ दिया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय द्वारा संशोधित आबंटन आदेश जारी किया गया है, जिसके अनुसार माह जून में एक सदस्य वाले राशन कार्ड में 35 किलो नियमित आबंटन के साथ तीन माह का 15 किलो अतिरिक्त निःशुल्क चावल शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से वितरित किया जाएगा।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय द्वारा जारी आबंटन आदेश के अनुसार सभी उचित मूल्य की दुकानों में राशन कार्डवार आबंटन की नवीन पात्रता सूची का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। सभी अन्त्योदय राशनकार्ड धारियों को अतिरिक्त खाद्यान्न की संशोधित पात्रतानुसार उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न का वितरण सुनिश्चित करने कहा गया है।

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