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02-09-2019
मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद-पुराण के आधार पर नहीं

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को मुस्लिम पक्षकारों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने हिंदू पक्ष की तरफ  से पेश की गई दलीलों को काटते हुए कहा कि मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद और स्कंद पुराण के आधार पर नहीं। उन्होंने हिंदू पक्ष के परिक्रमा वाले दलील पर कहा कि लोगों का उस स्थान की परिक्रमा करना धार्मिक विश्वास को दिखाता है। यह कोई सबूत नहीं है। वर्ष 1858 से पहले के गजेटियर का हवाला देना भी गलत है। अंग्रेजों ने लोगों से जो सुना लिख लिया। इसका मकसद ब्रिटिश लोगों को जानकारी देना भर था। मुस्लिम पक्षकार के वकील ने रामायण को काल्पनिक काव्य करार दिया। राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा कि कहा जा रहा है कि विदेशी यात्रियों ने मस्जिद का जिक्र नहीं किया। लेकिन मार्को पोलो ने भी तो चीन की महान दीवार के बारे में नहीं लिखा था।

मामला कानून का है। हम इस मामले में किसी अनुभवहीन इतिहासकार की बात को नहीं मान सकते हैं। हम सभी अनुभवहीन ही हैं। इस पर कोर्ट ने राजीव धवन से कहा कि आपने भी हाईकोर्ट में ऐतिहासिक तथ्य रखे थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि आपने (राजीव धवन) भी कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य दिए हैं। कोई ऐसा साक्ष्य है, जिसपर दोनों ने भरोसा जताया हो? इससे पहले राजीव धवन ने कहा कि महाभारत एक इतिहास है और रामायण एक काव्य है। इस पर जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है? धवन ने कहा काव्य तुलसीदास द्वारा कल्पना के आधार पर लिखी गई थी। इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि कुछ तो साक्ष्य के आधार पर लिखा जाता होगा। धवन ने दलील देते हुए कहा कि हम सिर्र्फ  इसलिए इस पक्ष को मजबूती से देख रहे हैं, क्योंकि वहां कि शिला पर एक मोर या कमल था। इसका मतलब यह नहीं है कि मस्जिद से पहले एक विशाल संरचना थी।

11-07-2019
मध्यस्थता नहीं बढ़ी आगे तो 25 जुलाई से रोजाना सुनवाई : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि इस मसले पर अदालत ने मध्यस्थता का जो रास्ता निकाला था, वह काम नहीं कर रहा है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल से रिपोर्ट मांगी है। अब 18 जुलाई तक रिपोर्ट सामने आएगी और फिर इस बात पर फैसला होगा कि इस मामले में रोजाना सुनवाई होगी या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी से इस मसले पर रिपोर्ट भी मांग ली है. अब इस मसले की सुनवाई 25 जुलाई को होगी। पैनल को ये रिपोर्ट अगले गुरुवार तक सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर पैनल कहता है कि मध्यस्थता कारगर नहीं साबित होती है, तो 25 जुलाई के बाद ओपन कोर्ट में रोजाना इसकी सुनवाई होगी। यानी इस मामले में मध्यस्थता जारी रहेगी या नहीं, इसका फैसला 18 जुलाई को ही हो जाएगा।

हिंदू पक्ष की तरफ से वकील रंजीत कुमार ने कहा है कि 1950 से ये मामला चल रहा है लेकिन अभी तक सुलझ नहीं पाया है। मध्यस्थता कारगर नहीं रही है इसलिए अदालत को तुरंत फैसला सुना देना चाहिए। पक्षकार ने कहा कि जब ये मामला शुरू हुआ था तब वह जवान थे, लेकिन अब उम्र 80 के पार हो गई है। लेकिन मामले का हल नहीं निकल रहा है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की बेंच कर रही है। अदालत ने कहा है कि अनुवाद में समय लग रहा था, इसी वजह से मध्यस्थता पैनल ने अधिक समय मांगा था। अब हमने पैनल से रिपोर्ट मांगी है।

गोपाल सिंह विशारद रामजन्म भूमि विवाद में एक मूल वादकार भी हैं। विशारद ने अपनी याचिका में कहा है कि इस विवाद को निपटाने के लिए आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी लेकिन इसमें कोई प्रगति नहीं दिख रही। विशारद ने याचिका में कहा है कि शीर्ष अदालत मामले की जल्द सुनवाई करे।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ से विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा कि मालिकाना हक के इस विवाद को जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध किए जाने की जरूरत है।
विशारद ने याचिका में कहा है कि मध्यस्थता कमेटी की अब तक तीन बैठकें हो चुकी हैं लेकिन हल निकलने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। इसलिए शीर्ष अदालत इस पर जल्द सुनवाई करे।

08-03-2019
अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में तीन लोगों का पैनल गठित, दो माह में देनी होगी रिपोर्ट

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने शुक्रवार को फैसला लिया कि मध्यस्थ के जरिए बातचीत से सुलझाने के लिए तीन लोगों का पैनल गठित किया है। जिसमें रविशंकर, जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्ला और राम पंच भू मध्यस्थता करेंगे और दो माह में रिपोर्ट देंगे। 

बता दे कि प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को मामला मध्यस्थता को भेजे जाने के मुद्दे पर सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए कुल 8 हफ्तों का वक्त दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता तुरंत शुरू हो उसे शुरू होने में एक सप्ताह से ज्यादा वक्त न लगे, साथ ही कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता पैनल को 4 हफ्तों में मामले की रिपोर्ट देनी होगी।

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