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27-03-2021
कोरोना के बढ़ते संक्रमण पर चैंबर और कैट के पदाधिकारियों ने बीआईटी कालेज के डायरेक्टर से की मुलाकात

दुर्ग। कोविड 19 के तेजी से बढ़ते हुए मामलों को लेकर छतीसगढ़़ चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रिज के प्रदेश महामंत्री अजय भसीन, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश सांखला, भिलाई प्रदेश उपाध्यक्ष महेश बंसल, पवन बड़जात्या, मो.अली हिरानी ने दुर्ग भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) कॉलेज के डायरेक्टर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कोविड 19 के तेजी से बढ़ते हुए केस को लेकर अस्पतालों में जगह एवं वेंटीलेटर की कमी से जूझना पड़ रहा है। सिर्फ सरकार के करने से ही कुछ नहीं होगा। कोरोना से लड़ने के लिए व्यापारी एवं उद्योग जगत के साथ आम लोगों को भी सहयोग करना होगा। अजय भसीन एवं टीम चैंबर एवं टीम कैट ने शनिवार को बीआईटी के डायरेक्टर डॉ.अरुण अरोरा से चर्चा कर कहा की अगर युवा छात्रों की एक टीम बनाकर अस्थाई वेंटिलेटर के प्रोजेक्ट पर काम शुरू करे, मेडिकल में आम जनता के लिए आपका यह बहुत बड़ा योगदान रहेगा।  इसी कड़ी में दुर्ग जिला प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश सांखला ने बताया की करोना के बढ़ते केसेस से सभी घबराए हुए है लेकिन चैंबर एवं कैट द्वारा संयुक्त रूप से मिलकर जन जागृति के माध्यम से लोगों में जागरूकता लाई जा रही है।

26-02-2021
6 लाख से अधिक व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रख दिया एकता का परिचय

रायपुर। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी संजय चौबे ने बताया कि कैट द्वारा बुलाए गए भारत बंद को प्रदेशभर के व्यापारिक संगठनों का बहुमूल्य समर्थन प्राप्त हुआ। प्रदेशभर के व्यापारी संगठनों से जुड़े 6 लाख से अधिक व्यापारियों ने आज अपना व्यापार बंद कर व्यापारी एकता का परिचय देते हुए केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।

कैट ने जीएसटी के नियमों में किये गये जटिल प्रावधानों के सरलीकरण और गैरकानूनी संशोधनों के खिलाफ व्यापारियों की आवाज बुलंद करने के लिया बंद का आव्हान किया था। साथ ही साथ बड़ी विदेशी ई कॉमर्स कम्पनियों के लिए लगातार सरकार द्वारा बनाए गए कानून और नीतियों के उल्लंघन पर लगाम कसने के लिए एफडीआई पालिसी के तहत प्रेस नोट 2 के स्थान पर एक नया प्रेस नोट जारी करने की मांग को लेकर भी यह व्यापार बंद किया गया था। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की बार-बार चेतावनी के बाद भी ये कंपनियां लगातार नीति का उल्लंघन कर यह बताने की कोशिश कर रही हैं की भारत के कानून और नीति कमजोर हैं। मालूम हो कि आज के भारत व्यापार बंद से देश में 1 लाख करोड़ रुपए के व्यापार का नुकसान हुआ है। जीएसटी प्रावधानों में किये गये जटिल संशोधनों एवं विदेशी ई कॉमर्स कंपनियों के किये गये नियमों के उल्लंघन के विरोध में आज कैट द्वारा बुलाए गए भारत बंद के दौरान प्रदेश के बाजारों में वीरानी छाई रही। सभी व्यापारिक संगठनों ने आज इस देशव्यापी बंद में शामिल होकर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जीएसटी कॉउन्सिल को मजबूत सन्देश दिया की जीएसटी कर का उपनिवेशीकरण करने से व्यापार और अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा होगा। आज प्रदेश में व्यापारी से व्यापारी (बीटूबी)  और व्यापारी से उपभोक्ता (बी2सी) का व्यापार पूरी तरह से बंद रहा।

कैट ने बंद में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, केमिस्ट शॉप ,दूध और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति करने वाले जनरल स्टोर को व्यापार बंद के दायरे से बाहर रखा। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने भारत व्यापार बंद को सफल बताते हुए कहा कि अधिकारियों को दी गई मनमानी और अनैतिक शक्तियां एक बार फिर से देश में इंस्पेक्टर राज लाएगी और इसका उपयोग कर अपराधियों पर करने की बजाय ईमानदार और कर पालन करने वाले व्यापारियों के उत्पीड़न के लिया किया जाएगा क्योंकि व्यापारियों का पूर्व का अनुभव यही है। कैट ने मांग की है कि कानून या नियमों में कोई संशोधन लाने से पहले जीएसटी नियमों के विवादास्पद प्रावधानों को स्थगित किया जाए और व्यापारियों को विश्वास में लेकर ही नियमों एवं कानून में बदलाव किया जाए। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत वर्तमान कर आधार और इस कर आधार से अर्जित राजस्व बहुत कम है और इसे दोगुना किया जा सकता है लेकिन इसके लिए जीएसटी कर प्रणाली को सरलीकृत और तर्कसंगत बनाया जाना जरूरी है। पारवानी ने कहा कि एक सामंजस्यपूर्ण साझेदारी के लिए व्यापारी सरकार का सहयोग करने के लिए तैयार है।

इसमें हमारा यह स्पष्ट मत है की कर अपराधियों और कर वंचना करने वाले लोगों को अनुकरणीय सजा दी जानी चाहिए क्योंकि वे ईमानदार और कर पालन करने वाले व्यापारियों के लिए बहुत अनुचित प्रतिस्पर्धा लाते हैं लेकिन श्त्रुटिश् और श्चोरीश् के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझा जाना चाहिए। जीएसटी कानून और नियमों की जटिलता को रेखांकित करते हुए विक्रम सिंहदेव ने कहा कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी की घोषणा की गई थी जो वर्तमान में वास्तविक रूप से एक सरल कर था। लेकिन पिछले चार वर्षों में 1000 से अधिक संशोधनों के साथ जीएसटी को बेहद जटिल कानून बना दिया गया है। एक सामान्य व्यापारी की समझ से परे एक जटिल प्रणाली प्रणाली बन गई है। सिंहदेव ने इस कानून को चुनौती देते हुए कहा की हम किसी भी सार्वजनिक मंच पर किसी भी कर विशेषज्ञ की मदद के बिना जीएसटी रिटर्न फॉर्म भरने के लिए किसी भी राज्य के वित्त मंत्री को चुनौती देते हैं? क्या वो रिटर्न फार्म भर पाएंगे? जीएसटी कॉउंसिल तो इतनी बड़ी संख्या में जीएसटी कानून और नियमों को संशोधित कर सकती है। लेकिन व्यापारियों को कम से कम एक बार भी अपने जीएसटी रिटर्न को संशोधित करने की अनुमति नहीं है। जीएसटी को अच्छा और सरल कर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आवाह्न गुड एंड सिंपल टैक्स को जीएसटी कॉउंसिल ने पलीता लगा दिया है। सिंहदेव ने कहा कि मजबूरी से कर पालन व्यवसाय के विकास के लिए एक कृत्रिम बाधा है। कानून और नियम समावेशी होने चाहिए और स्वैच्छिक पालन के लिए एक प्रेरणा होनी चाहिए। कानून और नियम 5 प्रतिशत लोगों के लिए बने हैं जो किसी भी व्यवस्था में आदतन अपराधी हैं।

लेकिन कानून या नियमों का उपयोग 95 प्रतिशत अन्य लोगों के खिलाफ किया जाता है जो कानून का पालन कर रहे हैं। यह मानसिकता अच्छी नहीं है। सिंहदेव ने कहा कि अगर इन संशोधनों को लागू किया जाता है तो इसकी प्रबल संभावना है की व्यापार से प्राप्त राजस्व में कमी होगी क्योंकि अनजानी त्रुटि को ठीक करने का कोई प्रावधान नहीं है और विभाग को अधिकार है की वो जीएसटी पंजीकरण नंबर को निलंबित कर सकते हैं। यह एक खुला तथ्य है कि सरकार के अधीन सरकारी विभाग और सार्वजनिक उपक्रम समय पर व्यापारियों को भुगतान नहीं करते फिर वे व्यापारियों से समय पर करों का भुगतान करने की अपेक्षा कैसे करते हैं। हम केंद्र और राज्य सरकार दोनों से आग्रह करते हैं कि दोनों सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के तहत विभागों के लिए किए गए भुगतान का एक चार्ट तैयार करें, वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इसके अलावा, जब लेट फीस और ब्याज का प्रावधान है तो व्यापारियों का जीएसटी नंबर निलंबित या रद्द क्यों किया जाए। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि सरकार देर से रिटर्न जमा कराने पर 18 प्रतिशत ब्याज एकत्र कर रही है।

लेकिन बैंक लोगों की बचत पर लगभग 8 प्रतिशत लोगों को ब्याज दे रहे हैं। एक और सवाल यह है कि व्यापारी एक छोटी सी चूक के लिए भी जवाबदेह हैं लेकिन कर अधिकारियों की कोई जवाबदेही नहीं है। इस विवेकाधीन शक्ति ने व्यापारियों को खूंखार आतंकवादी अजमल कसाब से भी गया बीता करार दिया है क्योंकि कसाब को अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका भी दिया गया था और सुप्रीम कोर्ट को उन्हें सुनने के लिए सुबह 2.00 बजे खोला गया था, जबकि जीएसटी में कर अधिकारी नोटिस देने के लिए बाध्य नहीं हैं मतलब सुनवाई का कोई मौका ही देंगे। कैट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जीएसटी कॉउंसिल से मांग की है कि विवादास्पद संशोधनों को स्थगित रखा जाए और किसी भी संशोधन को लाने से पहले व्यापारी संगठनों को विश्वास में लिया जाए। इसके अलावा जीएसटी के प्रभावी कार्यान्वयन और एक अनुकूल व्यापार का वातावरण प्रदान करने के लिए सरकार को एक जीएसटी समिति का गठन करना चाहिए जिसमें केंद्रीय स्तर और राज्य स्तर पर अधिकारी और व्यापार प्रतिनिधि शामिल हों और देश में प्रत्येक जिले में एक जीएसटी समिति हो।

18-02-2021
कैट ने जीएसटी कराधान प्रणाली में  सरलीकरण के संबंध में प्रधानमंत्री मोदी के नाम टीएस सिंहदेव को सौंपा ज्ञापन

रायपुर। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के सीजी चैप्टर ने गुरुवार को राज्य जीएसटी कराधन प्रणाली के संबंध में वाणिज्य मंत्री टीएस सिंहदेव को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से ज्ञापन सौंपा। मंत्री सिंहदेव ने इस संदर्भ में सकारात्मक आश्वासन दिया है। कैट के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी ने बताया कि आज भारत में जीएसटी लागू होने के 4 वर्षों की अंतराल में जीएसटी कर प्रणाली एक सबसे जटिल कराधान प्रणाली के रूप में उभरी है। चार वर्षों में जीएसटी नियमों में अब तक किए गए लगभग 950 संशोधन स्वयं बया कर रहे हैं कि जीएसटी परिषद भी प्रणाली की स्थिरता के बारे में आश्वस्त नहीं है। लेकिन यह व्यापारियों से उम्मीद करता है कि वे जीएसटी के प्रावधानों का निर्बाध तरीके से अनुपालन करें अन्यथा जीएसटी रेजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है। इनपुट क्रेडिट से हाथ धोना पड़ सकता है, और दंड भी भुगतना पड़ सकता है।
पारवानी ने आगे कहा कि इसी कड़ी में देश भर के सभी राज्यों में  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटी कराधान प्रणाली में सुधार एवं सरलीकरण के संबंध में अपने-अपने राज्यों में प्रधानमंत्री के नाम से ज्ञापन जिला कलेक्टर, जीएसटी आयुक्त, प्रधान सचिव, वित्तमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री, विधायक एवं सांसद को सौपेंगे। ऐसी निराशाजनक पृष्ठभूमि में, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने 26 फरवरी को भारत व्यापार बंद का आह्वान किया है, जिसे देश के व्यापारी एवं अन्य संगठनों का मजबूत एवं खुला समर्थन मिल रहा है। कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं जीएसटी काउन्सिल से माँग की है की जीएसटी की समग्र समीक्षा कर इसे सरल और युक्तिसंगत कर प्रणाली बनाया जाए।
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि जीएसटी में निम्नाकिंत समस्या है। जिसका समाधान अतिशीघ्र होना चाहिए:-
1. नई अधिसूचना के आधार पर जीएसटी अधिकारी अपने विवेक के आधार पर बिना कोई नोटिस दिए अथवा बिना कोई सुनवाई किये किसी भी व्यापारी का जीएसटी पंजीकरण नंबर निलंबित कर सकते हैं।
2. केंद्रीय बजट में प्रस्तावित धारा 16 (2) (एए) जीएसटी के मूल विचार के खिलाफ है ।
3. वहीँ जीएसटी की धारा 75 (12) में यदि गलती से व्यापारी ने अधिक टैक्स की गणना कर दी तो वह स्व कर निर्धारण टैक्स मानकर व्यापारी से धारा 79 के अंतर्गत बिना कोई नोटिस दिए वसूला जाएगा।
4. इसी तरह से धारा 129 (1) (ए) में ट्रांसपोर्ट के द्वारा भेजे जाने वाले माल को यदि रास्ते में किसी अनियमितता के लिए रोका जाता है तो विभाग को ऐसे माल वाहक गाडी तथा उसमें रखे माल को जब्त करने अथवा अपनी हिरासत में लेने का अधिकार दिया गया है !
5. ई-वे बिल के प्रावधानों को पालन नहीं  करनें पर अभी तक इस प्रकार के मामलों में 100 प्रतिशत जुर्माना था जिसको बढ़ाकर अब 200 प्रतिशत कर दिया है।
6. नियम 86 बी में जीएसटी इनपुट 99 प्रतिशत तक कर दी गई है।
7. ई-वे बिल की वैधता अवधि में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है।
8. छुटे हुए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए अतिरिक्त अवसर प्रदान करनी चाहिए।
9. माल के परिवहन एवं ई-वे बिल सम्बंधित समस्याएं दूर करनी चाहिए।
10. रिटर्न सम्बंधित समस्याएं को दूर जाना चाहिए।
11. जितना क्रेड़िट जीएटीआर 2 ए में दिखेगा उतना ही क्लेम जीएटीआर 3बी किया जा सकेगा।

14-02-2021
कैट के भारत व्यापार बंद को छत्तीसगढ़ स्टेट सेल्स टैक्स बार काउंसिल ने दिया समर्थन

रायपुर। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)ने 26 फरवरी को भारत व्यापार बंद का आव्हान किया है। जीएसटी के खिलाफ देशभर के व्यापारी एकजुट हो रहे हैं। कैट को व्यापारिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो रहा है। इसी क्रम में छतीसगढ़ सेल्स टैक्स बार काउंसिल के प्रांत अध्यक्ष ने भी अपना समर्थन पत्र बंद को सफल बनाने के लिए दे दिया है। कैट के प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि जीएसटी में इतनी विकृति आ चुकी है कि व्यापारी इसके पालन के लिए अपना व्यापार छोड़कर इसी काम में लगे रहते हैं। इससे सभी व्यापारियों के व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। सभी व्यापारी मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजर रहे हैं। पारवानी ने कहा है कि प्रदेश के हर जिले के व्यापारिक संगठनों से भी समर्थन पत्र भारत व्यापार बंद को सफल बनाने के लिए लिए जा रहे हैं।

 

12-02-2021
भारत व्यापार बंद को सफल बनाने कैट की तैयारियां तेज, राष्ट्रीय पदाधिकारी करेंगे राज्यों का दौरा

रायपुर। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने 26 फरवरी को जीएसटी के खिलाफ भारत व्यापार बंद को सफल बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी है। देश भर के 40 हजार से ज्यादा व्यापारिक संगठनों ने पूरी तरह से कमर कस ली है। इस सिलसिले में कैट के राष्ट्रीय नेताओं का विभिन्न राज्यों में तूफानी दौरों का कार्यक्रम बन गया है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया को उत्तर प्रदेश और दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, अंडमान एवं निकोबार, राजस्थान में भारत व्यापार बंद को तय करेंगे। कैट के चेयरमेन महेन्द्र शाह और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घनश्याम भाटी दक्षिण भारत के छह राज्यों में भारत बंद को सफल बनाने के लिए जुटेंगे। कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन बृजमोहन अग्रवाल (उड़ीसा), झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में बंद की गतिविधियों को तेज करेंगे। कैट के राष्ट्रीय मंत्री सुमित अग्रवाल पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में बंद को सफल बनाएंगे।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धैर्यशील पाटिल उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश को देखेंगे। कैट के अन्य राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नीरज आनंद जम्मू, कश्मीर, लेह और लद्दाख में भारत बंद को सफल बनाएंगे। यह सभी पदाधिकारी 14 फरवरी से 23 फरवरी तक देश भर के सभी राज्यों का तूफानी दौरा करेंगे। जीएसटी में बेतुके प्रावधानों पर जनमत जाग्रत कर भारत व्यापार बंद को सफल बनाएंगे। पारवानी ने कहा कि भारत व्यापार बंद को सफल बनाने के लिए कैट ने टैक्स प्रैक्टिशनरों, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कर सलाहाकार, कंपनी सेक्रेटरी, लघु उद्योग,  पेट्रोल पंप ,डायरेक्ट सेलिंग, महिला संगठनों, उपभोक्ताओं, हॉकर्स, फिल्म उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, मोबाइल उद्योग, विभिन्न सेवा प्रदाताओं, ऑनलाइन विक्रेता व अर्थव्यवस्था और व्यापार से जुड़े सभी राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय संगठनों को भी इस बंद में शामिल करने उनसे संपर्क करने का अभियान तेज किया है। इसकी अगुवाई कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल कर रहे हैं ।

 

05-02-2021
कैट ने कहा, किसान आंदोलन के कारण हुआ 1 लाख करोड़ से अधिक का व्यापार प्रभावित

नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में कृषि बिलों के खिलाफ किसानों 70 दिनों के अधिक समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। वहीं कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) के अनुसार इस आंदोलन से व्यापार में कुल मिलाकर आवक-जावक के रूप में लगभग एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार प्रभावित हुआ है। इसमें अन्य राज्यों से दिल्ली में आने वाले माल से लगभग 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है और दिल्ली से अन्य राज्यों को भेजे जाने वाले व्यापार में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुकसान हुआ है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि, मुख्य रूप से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के थोक बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि, व्यावसायिक नुकसान झेलने वाली प्रमुख वस्तुओं में एफएमसीजी उत्पाद, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, आयरन एंड स्टील, टूल्स, पाइप एंड पाइप फिटिंग्स, मशीनरी इक्विपमेंट्स एंड इम्प्लीमेंट्स, मोटर्स एंड पंप्स, बिल्डर हार्डवेयर, केमिकल्स, फर्नीचर और फिक्स्चर, लकड़ी और प्लाईवुड, खिलौने, कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडलूम कपड़े और हैंडलूम बेड फर्निशिंग, इलेक्ट्रिक और वायवीय उपकरण और विभिन्न अन्य उद्योग में प्रयुक्त होने वाले अन्य औद्योगिक उत्पाद बड़ी संख्या में शामिल हैं।

 

01-02-2021
कैट ने केंद्रीय बजट को बताया संतुलित,कृषि, स्वास्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

रायपुर। कांफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पदाधिकारियों ने कहा है कि केंद्रीय बजट एक प्रगतिशील और व्यापक आर्थिक दस्तावेज है। इसके प्रावधान लागू होने से देश भर  के व्यापारियों को व्यापार करने में अधिक सुविधा देंगे। देश के वरिष्ठ अधिकांश नागरिकों को कर के बोझ से राहत देना  और स्वास्थ्य क्षेत्र और उसमें सेवाओं के मजबूत विकास को तय करना इस बजट की मुख्य विशेषता है। इस बार के बजट में कोई भी नया कर नहीं लगाया गया है। इससे ये बजट और भी प्रभावी बन जाता है। हालांकि देश भर में पिछले एक पखवाड़े से नए कर लगाने की तमाम अटकलें लगाईं जा रहीं थी, जिन पर अब विराम लग गया है। केंद्रीय बजट के कई प्रावधानों से बाजार को बड़ी तााकत मिलेगी।

चाहे वह एमएसएमई के लिए दोगुने प्रावधान हो चाहे, कृषि और स्वास्थ्य के लिए बेहतर घोषणाएं हो। रोड, रेल, रियल एस्टेट, एमएसएमई, कापोर्रेट आदि सेक्टरों में कई अच्छी घोषणाएं हुई हैं। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी ने  कहा है कि अफसोस भी है कि भारत के खुदरा व्यापार के लिए कोई समर्थन नीति घोषित नहीं की गई है। इस मुद्दे को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष रखेंगे। आयकर स्लैब में बदलाव नहीं होने से निराशा है। कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि में इससे बेहतर बजट नहीं आ सकता था। इस बजट के जरिए सरकार ने देश के मजबूूूत भविष्य को परिभाषित करने  के लिए एक निश्चित रोडमैप प्रदान किया है।

 

 

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