GLIBS
26-05-2020
अजीत जोगी के मस्तिष्क की गतिविधियां कम, वेंटीलेटर से ले रहे सांस

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के मस्तिष्क की गतिविधियां बेहद कम है, उन्हें वेंटीलेटर के माध्यम से सांस दी जा रही है। डॉक्टर ने उनके स्वास्थ्य के संबंध में मेडिकल बुलेटिन जारी की है। डॉ. सुनील खेमका ने बताया कि चीफ इंटेनसिविस्ट डॉ. पंकज ओमर, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विनोद अग्रवाल, न्यूरोफिजिशियन डॉ. छत्रपाल सिंह साहू, डॉ. विवेक त्रिपाठी सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर अजीत जोगी के स्वास्थ्य पर निगरानी रखे हैं। सामूहिक प्रयास से अजीत जोगी का स्वास्थ्य हिमो डाइनामिकली स्थिर बना हुआ है। अब ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, लीवर, किडनी आदि अंग सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। हालांकि उनके मस्तिष्क की गतिविधियां बेहद कम है। लागातार वे कोमा में चल रहे हैं। 

 

11-05-2020
बच्चें को सांस लेने में प्राब्लम थी मैंने माउथ टू माउथ ऑक्सीजन दिया और बच्चे की जान बच गई : शीला खटकर

रायपुर/बिलासपुर। प्रदेश के सबसे बड़े मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय सेंदरी में प्रभारी मेट्रेन के पद पर पदस्थ नर्सिंग सिस्टर शीला खटकर ने आज अंतराष्ट्रीय नर्स डे पर चर्चा करते हुए एक वाक्या शेयर करते हुए बताया कि सन् 1995 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैकुंठपुर उन्होंने नौकरी की शुरुआत की थी। 25 साल पहले आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर नहीं थी। उस समय एक जोखिम भरा डिलीवरी केस आया। प्रसव के समय बच्चा फंस गया था। वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा सिजेरियन किया गया लेकिन बच्चे को नियमित सांस नहीं आ रही थी। मैंने तुरंत उसको माउथ टू माउथ ऑक्सीजन दिया और बच्चे की जान बच गई। जब यह बात बच्चे के पिता को पता चली तो उन्होंने मेरे पैर छूकर कहा आप गॉड मदर हो। आपने हमारे बच्चे की जान बचाई है हमारी पत्नी की जान बचाई है।  सिस्टर शीला कहती है वैसे तो नर्स का रोल दिखने में बहुत साधारण होता है लेकिन यह रोल डॉक्टर के रोल से कम नहीं है।

इस समय विश्व भर के डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी अपने परिवार को भूलाकर मानवजाति को बचाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। ऐसे में नर्सों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है, विशेष तौर पर जो नर्सें आइसीयू में काम करती हैं, और जो कोविड-19 के मोर्चे पर तैनात हैं। इन्हें आराम के लिए पर्याप्त समय भी नहीं मिलता। नर्सों व मिडवाइफ को अक्सर समाज और मेडिकल पेशे में अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता जबकि उनकी सेवाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं। कोविड-19 के संक्रमण को खत्म करने के मोर्चे पर तैनात नर्सिंग स्टाफ भी अपने आप में डॉक्टर से कम नहीं है हमारे राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय में भी नियमित रूप से मानसिक रोगी के आने का क्रम नहीं रुका है। ऐसे समय में भी मानसिक रोगी राज्य के अलग-अलग जिलों से आते हैं वह हमारे लिए एक चुनौती है। हम उनको अपने परिवार के सदस्य के रूप में सेवा देते हैं। कभी कभी तो उनको देखकर बहुत दया आती है। मानसिक रोगों की अपनी एक अलग दुनिया हो जाती है। उन्हें अपने घर का एड्रेस पता नहीं होता है राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय में पिछले 6 वर्षों से मैं इनकी जीवनचर्या को समझने की कोशिश कर रही हूँ।

09-05-2020
अजीत जोगी की सांस की नली से डॉक्टर ने निकाला गंगा इमली का बीज, दिमाग में सूजन

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के स्वास्थ्य के संबंध में डॉ. सुनील खेमका ने मेडिकल बुलेटिन जारी की है। उन्होंने बताया कि अजीत जोगी के सांस की नली में गंगा इमली का बीज फंस गया था जिसे निकाल लिया गया है। उन्होंने कहा कि आज शनिवार शाम अजीत जोगी के दिमाग का सीटी स्कैन किया गया है। इसमें उनके मस्तिष्क में सेरिब्रल एडिमा (दिमाग में सूजन) पायी गई है। फिलहाल उनका हृदय सामान्य हो गया है। अभी अजीत जोगी वेंटीलेटर पर हैं और उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। आने वाले 48 से 72 घंटे अजीत जोगी के लिए बेहद अहम है।

06-05-2020
प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता ने की आत्महत्या, पति, सास और ससुर को जेल

राजनांदगांव। पति, सास और ससुर की शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर ग्राम सुकुलदैहान थाना लाल बाग निवासी विंध्या साहू पति नागेश साहू ने अपने घर में ही मिट्टी तेल डालकर आग लगा ली थी। उसकी इलाज के दौरान सेक्टर 9 हॉस्पिटल में मौत हो गई। नगर पुलिस अधीक्षक एमएस चंद्रा ने जांच उपरांत आरोपी पति नागेश, ससुर दिलीप साहू तथा सास गायत्री साहू को धारा 304(B),34 के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।

04-05-2020
3 साल की बच्ची के श्वास नली में फंसा था सीताफल का बीज, 6 महीने बाद निकाला गया

रायपुर। राजधानी के डॉक्टर की मेहनत से एक मासूम की मुस्कान फिर लौट आई है। सांस लेने में तकलीफ से परेशान 3 वर्षीय बच्ची का सही इलाज नहीं हो पा रहा था। परिजन 1 माह से इलाज करा रहे थे पर कोई फायदा नहीं हो रहा था। इसके बाद राजनांगांव के पास से इस बच्ची को रायपुर के समता कॉलोनी स्थित निजी अस्पताल लाया गया। परिजनों ने डॉक्टर को बताया था कि वे विगत 1 माह से बच्ची का इलाज करा रहे हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है। जांच में डॉक्टर को यह आशंका हुई कि श्वसन नली में कुछ फसा होने से बच्ची को तकलीफ हो रही होगी। डॉक्टर ने बताया कि चूंकि बच्ची के फेफड़े में दिक्कत थी और निमोनिया होने की वजह से श्वसन में तकलीफ हो रही थी। पहले बच्ची का कोरोना टेस्ट कराया गया फिर पूरी सावधानी के साथ डॉक्टर की टीम ने दूरबीन से जांच की।

इस दौरान श्वसन नहीं में कुछ होना पाया गया। जब उसे बाहर निकाला गया तो डॉक्टर हैरान थे। बच्ची के श्वसन नली में सीताफल का बीज था। बीज फंसा होने से फेफड़े में संक्रमण हो गया था। डॉक्टर ने मामले में जब परिजनों से बात की तो उन्हें याद आया कि 6 माह पूर्व अक्टूबर में बच्ची को सीताफल खाने के दौरान खांसी हुई थी। लेकिन आशंका नहीं हुई कि बीज श्वसन नली में फंस गया होगा। मासूम बच्ची को फिर से मुस्कान देने वाले डॉक्टर की टीम में डॉ.पूजा धुप्पड़, डॉ.अरूण कुमार, डॉ.कुलदीपक वर्मा, डॉ.सतीश राठी, डॉ.रोहित कुमार शर्मा और डॉ.चन्द्रपाल भगत शामिल थे। डाक्टर का कहना है कि हर निमोनिया कोरोना नहीं होता है। बीज वाले फल खाने पर इस प्रकार की घटनाओं से बच्चों में जान का खतरा हो सकता है।

26-03-2020
कोरोना विशेष : खांसी बुखार और सांस लेने में हो परेशानी तो डॉक्टर की सलाह लें

रायपुर। कोविड-19 नोवल कोरोना वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आने पर आपको अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि आपको खांसी, बुखार, सांस लेने में परेशानी है तो आप नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। डॉक्टर से सलाह और उपचार ले इतना ही नहीं आप जिन-जिन व्यक्तियों के साथ निकट संपर्क में रहे हैं। उनकी जानकारी डॉक्टर को भी दें। अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार के टोल फ्री नंबर पर संपर्क करें।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804